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डिजिटल सिस्टम से बदलेगा हरियाणा का राजस्व विभाग, फेसलेस रजिस्ट्रेशन और ई-स्टांप लागू

 चंडीगढ़ हरियाणा में जमीन संबंधी विवादों को सुलझाने के लिए सभी जिलों में राजस्व लोक अदालतें लगाई जाएंगी। इनमें उपायुक्त, एसडीएम व तहसीलदार विवादित पक्षों के बीच आपसी सहमति से विवादों का समयबद्ध ढंग से समाधान कराने का प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा तैयार पांच वर्षीय कार्य योजना की समीक्षा करते हुए इस संबंध में निर्देश दिए। बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्तायुक्त राजस्व डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि राजस्व संबंधी विवादों के शीघ्र समाधान के लिए डिजिटल कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व विभाग में नई ऑनलाइन सेवाएं शुरू की जाएं। नव-नियुक्त पटवारियों के लिए लैपटाप व टेबलेट की खरीद की जाए और हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएं जिससे सभी पटवारी डिजिटल माध्यम से सेवाएं दे सकें। पटवारियों को नई तकनीक व राजस्व कार्यों में पारंगत करने के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र भी खोला जाएगा। प्रदेश में सभी प्रकार के स्टांप की बिक्री ई-स्टांप के माध्यम से की जाएगी। उन व्यक्तियों के लिए फेसलेस रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू की जाएगी जो कहीं बाहर दूसरे राज्यों या विदेश में रहते हैं और रजिस्ट्री के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकते हैं। पेपरलैस रजिस्ट्रेशन के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि अब तक चार लाख रजिस्ट्रेशन किए जा चुके हैं। किसी भी तहसील में 15 दिन से पुराना कोई भी रजिस्ट्रेशन आवेदन लंबित नहीं है। राजस्व विभाग द्वारा अपने डाटा की स्टोरेज के लिए हारट्रोन के माध्यम से अपडेटिड डाटा सेंटर स्थापित किया जा रहा है जिसके लिए टेंडर किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने शहरी संपत्ति के राजस्व रिकार्ड को प्रॉपर्टी आइडी के साथ लिंक करवाकर सुव्यवस्थित करवाने के भी निर्देश दिए। पोर्टल पर होगा सरकारी जमीन का रिकॉर्ड कृषि विभाग के साथ मिलकर भूमि अभिलेखों का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण और जीयो-टैगिंग का कार्य किया जा रहा है। सभी लैंड पार्सल का यूनिक नंबर जनरेट किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी विभागों की सरकारी जमीन को पोर्टल पर अपडेट किया जाए। आपदा एवं अग्नि तथा आपात सेवाओं के लिए अलग से विभाग बनाने का प्रस्ताव है। आपदा मित्र योजना आठ जिलों में चल रही है। इसका सभी 23 जिलों तक विस्तार किया जाएगा। आग बुझाने में रोबोट का होगा इस्तेमाल अग्निशमन विभाग के महानिदेशक शेखर विद्यार्थी ने बताया कि सभी जिलों में विदेश की तर्ज पर एआइ आधारित एकीकृत कमांड तथा नियंत्रण केंद्र की स्थापना की जाएगी। अग्निशमन कार्यों में रोबोट के इस्तेमाल की भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने अग्निशमन कार्यों में लगे कर्मचारियों का रिस्क कम करने तथा उनके कल्याण हेतु कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए।  

ओडीओपी, युवा उद्यमी, आवास, कृषक दुर्घटना कल्याण और आयुष्मान समेत कई योजनाओं के लाभार्थियों को मिला लाभ

महराजगंज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को महराजगंज में विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत चयनित लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र, चेक, टूलकिट और आवास की चाबियां वितरित कीं। इससे पहले मुख्यमंत्री ने नन्हे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया और उन्हें उपहार भी भेंट किए। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।  मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग की ओडीओपी योजना के अंतर्गत अंगद को तथा विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत सीमा कन्नौजिया को टूलकिट वितरित कीं। पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के अंतर्गत राजकुमार कुशवाहा को ₹30 लाख की धनराशि का चेक दिया गया। ग्राम प्रधान पंचायत कल्याण कोष योजना के तहत बिजना देवी को ₹10 लाख का चेक प्रदान किया गया। कार्यक्रम में एपीओ कंचन मौर्या फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशक सुरेंद्र कुमार को कृषि यंत्र वितरण हेतु अनुदान राशि का चेक सौंपा गया। इसी प्रकार द्वारिका को भी अनुदान राशि से संबंधित कृषि यंत्र (ट्रैक्टर) की चाबी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के अंतर्गत प्रतिभा जायसवाल को ₹5 लाख की परियोजना लागत का चेक दिया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अवतारी देवी को आवास की चाबी सौंपी गई, जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से विनोद को आयुष्मान कार्ड प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत उर्मिला देवी को ₹5 लाख की सहायता राशि का चेक वितरित किया गया। इन परियोजनाओं का हुआ लोकार्पण जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाने वाली 5 परियोजनाएं बृजमनगंज में 33/11 के.वी.ए. विद्युत उपकेंद्र में ट्रांसफार्मर की स्थापना 7 राजकीय विद्यालयों में प्रोजेक्ट अलंकार के अंतर्गत पेयजल व्यवस्था, पुस्तकालय एवं शौचालय का निर्माण ₹490 लाख से फरेन्दा में लेहडा देवी मंदिर का समेकित पर्यटन विकास इन परियोजनाओं का हुआ शिलान्यास नौतनवां एवं फरेन्दा में 14 मागों एवं 3 लघु सेतुओं का निर्माण कार्य ₹55 करोड़ की लागत से 21.50 किमी मदरी-महदेड्या-चकदह-शाहपुर धोतिअहवा-कजरी मार्ग का निर्माण कार्य ₹28 करोड़ की लागत से नौतनवां के ग्राम मुड़िला में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय का निर्माण कार्य ₹27 करोड़ की लागत से विकास खंड लक्ष्मीपुर की ग्राम पंचायत सेमरहवां में रोहिन नदी पर सेतु का निर्माण कार्य भगवानपुर और अमोढ़ा में शिव मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य

शुभेंदु सरकार का सख्त कदम, RG कर मामले में तीन IPS अफसरों पर गिरी गाज

 कोलकाता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सूबे की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कई तरह की बातें कही हैं. उन्होंने कहा कि बंगाल में कुल मिलाकर अराजकता का माहौल था और हमने अब सख्ती शुरू कर दी है. शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को नबन्ना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "आरजी कर डॉक्टर रेप और मर्डर केस को ठीक से न संभालने के आरोप में तीन IPS अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. कोलकाता पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, पूर्व डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता और डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी को सस्पेंड किया गया है।  CM शुभेंदु ने  में आगे आरोप लगाया कि ये अधिकारी पीड़ित परिवार को रिश्वत देने और बिना किसी लिखित आदेश के प्रेस कॉन्फ्रेंस करने में शामिल थे. इन तीनों IPS अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।  उन्होंने कहा, "हमें जानकारी मिली है कि कोलकाता की प्रेसिडेंसी जेल में स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल किया जा रहा था. हमने जांच शुरू की और पाया कि आरोप सही थे." उन्होंने बरामद किए गए मोबाइल फोन दिखाए गए, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति का पता चल सके।  'हम पता लगाएंगे…' सीएम शुभेंदु ने कहा कि मैंने आरजी कर घटना की जांच में कोलकाता पुलिस की भूमिका पर गृह विभाग से रिपोर्ट मांगी है. उस वक्त इस घटना को ठीक से नहीं संभाला गया था. पुलिस को जो भूमिका निभानी चाहिए थी, वह उसने नहीं निभाई।  "हम पता लगाएंगे कि क्या पुलिस अधिकारियों को राजनीतिक नेताओं के इशारे पर काम करना पड़ा था. एक पुलिस DC का रवैया और भाषा अनुचित थी।  बंगाल सरकार ने आरजी कर मामले से जुड़े तीन आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. कोलकाता के पूर्व CP विनीत गोयल उनमें से एक हैं।  आरजी कर मामला क्या है? यह घटना 9 अगस्त, 2024 को हुई थी. कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर डॉक्टर का शव अस्पताल की बिल्डिंग के अंदर एक सेमिनार हॉल में मिला था. कोलकाता पुलिस ने 33 साल के एक सिविक वॉलंटियर, संजय रॉय को, डॉक्टर के साथ रेप और उसकी हत्या करने के शक में गिरफ्तार किया था. बाद में इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया।  इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए और पीड़ित के लिए इंसाफ की मांग की गई. पीड़ित की मां ने हाल ही में हुए बंगाल चुनावों में पानीहाटी सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।  विधानसभा चुनावों से पहले, आरजी कर की पीड़िता को इंसाफ दिलाना बीजेपी के मुख्य वादों में से एक था. 20 जनवरी, 2025 को एक ट्रायल कोर्ट ने संजय रॉय को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई. हालांकि, डॉक्टर के परिवार का आरोप है कि इस अपराध को अंजाम देने में वह अकेला नहीं था।  पिछले दिनों परिवार ने कोलकाता हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने कई ऐसे पहलुओं के बारे में जानकारी जुटाई है, जिनकी सीबीआई और राज्य पुलिस ने ठीक से जांच नहीं की है. उन्होंने कहा कि एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट की राय के मुताबिक, घटना के वक्त वहां कई लोग मौजूद हो सकते हैं। 

गंगा एक्सप्रेसवे पर सफर हुआ महंग,फास्टैग से कटेगा दूरी के हिसाब से टोल

 लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) पर अब सफर करने वालों को टोल टैक्स का देना होगा। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार गंगा एक्सप्रेसवे पर गुरुवार आधी रात्रि 12 बजे से टोल टैक्स वसूला जाएगा। यह वसूली अडाणी समूह द्वारा बनाए गए गंगा एक्सप्रेसवे के 80 फीसद हिस्से में होगी। जबकि आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा बनाए गए हिस्से में टोल टैक्स की वसूली शुक्रवार रात 12 बजे से शुरू होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 29 अप्रैल को हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था। टोल टैक्स की वसूली 15 दिन बाद शुरू किए जाने का निर्णय किया गया था। सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर बिना किसी शुल्क के सफर करने का आनंद उठा रहे वाहन चालकों की जेब पर अब मार पड़ेगी। शासन द्वारा दी गई 15 दिन की फ्री राइड की समय सीमा गुरुवार को समाप्त हो गयी। 14 मई की आधी रात से इस एक्सप्रेस-वे पर टोल टैक्स वसूलने की प्रक्रिया विधिवत शुरू भी कर दी गयी। इंटरचेंज सोनिक के मैनेजर गौरव शर्मा ने बताया कि टोल का शुल्क वसूलने के लिए सारी मशीनें एक्टिव कर ली गयी हैं। 16 लोगों के स्टाफ से व्यवस्थाएं सुचारू रखी जायेंगी। एंट्री-एग्जिट प्वाइंट्स पर टोल दरों की सूची भी चस्पा कर दी गई है। 15 दिन तक एक्सप्रेसवे का सफर था फ्री पहले डिजिटल एक्सप्रेसवे का संचालन 30 अप्रैल से आरंभ हो चुका है। शासन ने वाहनों का संचालन आरंभ होने के साथ ही 15 दिन तक टोल वसूली नहीं करने के आदेश दिए थे। अब रात बीती रात 12 बजे टोल का संचालन शुरू कर दिया गया। वाहनों की संख्या बढ़ाने पर भी कार्यदाई संस्थाए जोर जुगत में लगी है। कोई असुविधा न हो इसे लेकर भी जिले से जुड़े दोनों इंटरचेंज पर काम चालू है। लाइट, ट्रामा आदि की व्यवस्थाएं भी पूरी की गई। मैनेजर के मुताबिक एक टोल पर अभी ढाई हजार से तीन हजार वाहन दर्ज हो रहे। इनकी संख्या अब बढ़ने के आसार भी जग रहे हैं। पूरी तरह ऑनलाइन, जितना सफर उतना टोल उन्नाव के सोनिक टोल के मैनेजर गौरव शर्मा ने बताया कि यह पूरी तरह से फास्टटैग आधारित ट्रांजिट सिस्टम है। जिसमें आपके द्वारा तय की गई दूरी के अनुसार ही शुल्क कटता है। प्रारंभिक निर्धारण के अनुसार कार/जीप से 2.55 प्रति किमी (पूरे सफर पर लगभग 1,515) बस और ट्रक पर 8.20 प्रति किलोमीटर (पूरे सफर का करीब 5,700 रुपये उससे अधिक) लिया जाएगा। प्रति किमी कार/जीप के लिए रुपये 2.55, हल्के कमर्शियल वाहन के लिए रुपए 4.5 रुपये, बस/ट्रक के लिए रुपये 8.20 रुपए पूरी यात्रा का है। मेरठ से प्रयागराज तक कार से लगभग रुपये 1500 से रुपये 1800 तक का टोल खर्च आ सकता है। एक्सप्रेसवे पर बैरियरलेस ऑटोमैटिक टोल सिस्टम है, जो फास्टैग से सीधे टोल काटेगा।

एक महीने में बिहार सरकार की नई योजनाएं, शहरी विकास से लेकर महिला सुरक्षा तक बदलाव

 पटना  सम्राट चौधरी ने एक माह पहले 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके मुख्यमंत्री बने एक महीने पूरे हो चुके हैं। बिहार के विकास पुरुष नीतीश कुमार के 'न्याय के साथ विकास' की संकल्पना के साथ सम्राट ने 'समृद्ध बिहार' बनाने की दिशा में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति की झलक स्पष्ट है। 1. सैटेलाइट टाउनशिप बिहार के 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप की रूपरेखा खींच दी गयी है। इस टाउनशिप में प्लांड वे में कॉलोनी बसेंगी। इनमें बाजार और रहने के लिए जगह तय होंगे। चौड़ी सड़कें होंगी। हरियाली के लिए सड़क किनारे और पार्क में पेड़ लगाये जाएंगे। यह मुख्यमंत्री सम्राट जी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में एक है। इसमें सासाराम को जोड़ने का प्रस्ताव भी आया है। इससे शहरी दबाव में कमी आयेगी, लोगों को सुविधायुक्त जीवन का लाभ मिल सकेगा। सुनियोजित विकास से सुंदरता दिखेगी। इसके लिए टाउनशिप का नामकरण ऐतिहासिक संदर्भों को ध्यान में रख कर किया गया है। 2. ‘पुलिस दीदी योजना’ से महिला सुरक्षा पर फोकस सम्राट सरकार की 'पुलिस दीदी योजना' बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य महिलाओं व छात्राओं की सुरक्षा बढ़ाना तथा पुलिस और समाज के बीच भरोसा मजबूत करना है। इसके लिए 1500 स्कूटी महिला पुलिस के खरीदने का निर्णय लिया गया है। कॉलेज व स्कूल के सामने पुलिस दीदी की तैनाती होगी, ताकि रोड साइड रोमियो और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध पर नकेल कसी जायेगी। 3. सहयोग हेल्पलाइन से पंचायत तक शिकायत समाधान सम्राट सरकार ने सुशासन को मजबूती देने और जनता के हित में सरकार के उत्तरदायित्व को ध्यान में रख कर सहयोग की त्रिवेणी को शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सहयोग हेल्पलाइन : 1100, सहयोग पोर्टल : sahyog.bihar.gov.in और पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगाने का निर्णय लिया है। यह शिविर माह के पहले और तीसरे मंगलवार को आयोजित होगा। इस शिविर में ब्लॉक, थाना और अंचल की तमाम शिकायतों की सुनवाई होगी। सहयोग पोर्टल पर सरकारी योजना से जुड़ी शिकायत के निबटारे के लिए 30 दिन का लक्ष्य तय किया गया है। अगर 30 में शिकायत का निबटारा नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी का निलंबन तक हो सकता है। 4. हर प्रखंड में एक मॉडल स्कूल सम्राट सरकार ने अपने दूसरे कैबिनेट में शिक्षा के क्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने सभी जिला स्कूलों और प्रत्येक प्रखंड के चयनित एक उच्च माध्यमिक विद्यालय को 'मॉडल स्कूल' के रूप में विकसित करने के लिए ₹800 करोड़ की स्वीकृति दी है। इसके साथ डिग्री कॉलेज रहित 208 प्रखंडों में नये डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए ₹104 करोड़ (₹50 लाख प्रति कॉलेज) स्वीकृत किये गये हैं, जिसके तहत कुल 9152 पदों का सृजन होगा। 5. निजी विद्यालयों की मनमानी पर नकेल सम्राट सरकार द्वारा निजी स्कूलों में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी एक नेक पहल की गयी है। निजी विद्यालयों को फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। मनमानी फी बढ़ोतरी व अनावश्यक शुल्क पर रोक होगा। छात्रों के परिजनों को किताबें-यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीदने की स्वतंत्रता होगी। फीस बकाया होने पर भी छात्रों को परीक्षा/परिणाम से वंचित नहीं किया जायेगा। आदेश का उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई तय है। 6. बिहारी संवेदकों को प्राथमिकता 50 करोड़ रुपये तक के राज्याधीन सिविल कार्यों के लिए राज्य स्तरीय ठेकेदारों यानी संवेदकों को प्राथमिकता देने के लिए बिहार लोक निर्माण संहिता में संशोधन किया गया। अब से 50 करोड़ रुपये तक कार्यों के ठेके बिहारियों को मिलेंगे। इससे राज्य के लोगों को काम के अधिक मौके मिलेंगे। 7. ई-निबंधन व्यवस्था लागू जमीन और संपत्ति के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस बनाने के लिए ई-निबंधन सिस्टम लागू किया गया है। इससे भ्रष्टाचार कम करने, समय बचाने और पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश हुई। इसके साथ 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर पर रजिस्ट्री सुविधा देने का फैसला लिया गया है। इससे बुजुर्गों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके अलावा दर्जनों महत्वपूर्ण निर्णय लेने के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हिनीयस क्राइम के मामले में पुलिस को ज़ीरो टालरेंस बरतने का निर्देश दिया है। इस क्रम में एनकाउंटर की घटनाएं भी सामने आई हैं।

सितंबर 2024 से अप्रैल 2026 तक 2962 शिकायतों का समाधान हुआ

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के संकल्प के साथ सभी वर्गों को न्याय दिला रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग लगातार शिकायतों की सुनवाई कर त्वरित निस्तारण कर रहा है। आयोग साल 2024 से अप्रैल 2026 तक आई कुल शिकायतों में से करीब 87 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का निस्तारण कर चुका है। इस तरह आयोग ने योगी सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य करते हुए न केवल बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निस्तारण किया है, बल्कि नई शिकायतों पर भी समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की है। 87 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का निस्तारण हुआ दरअसल योगी सरकार की प्राथमिकताओं में पिछड़ा वर्ग के लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान, शिकायतों की सुनवाई और प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई शामिल है। इसी क्रम में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सक्रियता से बड़ी संख्या में लोगों को न्याय मिला है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2024 से अप्रैल 2026 तक कुल 3394 शिकायतें आई थीं। इनमें से 2962 मामलों की सुनवाई और कार्यवाही के बाद निस्तारण किया जा चुका है। इस तरह करीब 87 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है।  योगी सरकार पिछड़ा वर्ग के लोगों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है- राजेश वर्मा छात्र-छात्राएं भी छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर आयोग से मदद मांगते हैं। साथ ही पिछड़े वर्ग में शामिल करने के लिए भी लोग आयोग में प्रत्यावेदन देते हैं। उत्तर प्रदेश के अन्य पिछड़े वर्गों की अनुसूची-एक में जातियों के सम्मिलन, निष्कासन और संशोधन से संबंधित कुल 324 प्रत्यावेदन प्राप्त हुए। इनमें से 307 मामलों का सुनवाई और कार्यवाही के बाद निस्तारण किया जा चुका है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पिछड़ा वर्ग के लोगों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल शिकायतें प्राप्त करना नहीं, बल्कि पीड़ित लोगों को वास्तविक राहत पहुंचाना है।

16 हजार किमी से अधिक लंबाई में नालों की सफाई पूरी, 300 बाढ़ परियोजनाओं का कार्य प्रगति पर

लखनऊ  योगी सरकार इस वर्ष मानसून के दौरान जीरो जनहानि और कृषि भूमि को कम से कम नुकसान सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटा है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना, नालों की सफाई, तटबंधों की सुरक्षा, बाढ़ सुरक्षा समितियों के गठन समेत तमाम उपाय आगामी मानसून के दौरान बड़ी राहत साबित होंगे। प्रदेश के सभी 18 मंडलों में 31 मई तक एकीकृत बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने का निर्देश दिया गया है ताकि पहली जून से इन्हें संचालित किया जा सके।  सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुताबिक इस वर्ष रिकॉर्ड गति से कार्य करते हुए अब तक लगभग 4 हजार किलोमीटर लंबाई के तटबंधों को सुरक्षित किया गया है। वहीं नदियों-नालों के किनारे बसे गांवों और कृषि भूमि को कटान से बचाने के लिए 300 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन्हें 15 जून 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। संवेदनशील और अति-संवेदनशील स्थानों पर कटाव निरोधक कार्य पूरे किए जा रहे हैं। नदियों के किनारों पर पत्थर की पिचिंग और जियो-बैग्स का उपयोग कर सुरक्षा घेरा भी मजबूत किया जा रहा है। नालों की सफाई और जल निकासी विभाग के मुताबिक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए ड्रेनेज सिस्टम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मार्च 2026 तक 16 हजार किलोमीटर से अधिक लंबाई में नालों की सिल्ट सफाई का काम पूरा हो चुका है। बारिश शुरू होने से पहले बचे सभी संवेदनशील जगहों पर सफाई का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके जरिए भारी बारिश होने पर पानी की निर्बाध निकासी से फसलों और गांव-बस्तियों को डूबने से बचाया जा सकेगा। 18 मंडलों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष किए जा रहे तैयार सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की तरफ से लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज समेत प्रदेश के सभी 18 मंडलों में 31 मई तक एकीकृत बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बाढ़ और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी के लिए यह कक्ष 15 जून से 15 अक्टूबर तक 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। जलस्तर की रियल टाइम निगरानी और आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई इनके जरिए सुनिश्चित कराई जाएगी। सामाजिक सहभागिता से मिलेगी मदद सामाजिक स्तर पर भी विभाग अपनी तैयारियां पुख्ता कर रहा है। विभिन्न ग्रामीण इलाकों में ‘बाढ़ सुरक्षा समितियां’ तैयार की जा रहीं हैं। इनमें संबंधित क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर, ग्राम प्रधान, लेखपाल समेत अन्य स्थानीय लोगों को जोड़ा जा रहा है, जिनकी जिम्मेदारी बाढ़ और आपदा की स्थिति में तत्काल सूचना पहुंचाने की होगी। साथ ही राहत से जुड़े काम में मदद करेंगे।

भारत सरकार के भूमि संसाधन सचिव ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से की अहम मुलाकात

भारत सरकार के भूमि संसाधन सचिव ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से की सौजन्य भेंट विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा जलग्रहण प्रबंधन, पीएम सिंचाई योजना, डिजिटल राजस्व सुधार और ई-पंजीयन की प्रगति पर हुई चर्चा रायपुर, भारत सरकार, भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेन्द्र भूषण ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील से सौजन्य भेंट की। इस दौरान छत्तीसगढ़ में सुशासन के अंतर्गत जलग्रहण प्रबंधन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भुईयां पोर्टल, ई-कोर्ट और पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई। भूषण ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) और राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर विभागीय प्रगति का जायजा लिया। राजस्व विभाग डिजिटलीकरण और ई-सुशासन            बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर प्रस्तुतीकरण दिया। डिजिटल रिकॉड्स। के रूप में राज्य में भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण कर मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्थापित किए गए हैं। भू-नक्शा डिजिटलीकरण के तहत सभी भू-नक्शों को डिजिटल स्वरूप दिया गया है। भुईयां पोर्टल के माध्यम से डिजिटल किसान किताब अपडेट की गई है, जिसे भूमि स्वामी कभी भी डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए रेवेन्यू ई-कोर्ट का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, भूमि का ऑटो डायवर्सन ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हो रहा है। पंजीयन एवं स्टाम्प पारदर्शी और पेपरलेस रजिस्ट्री           वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग द्वारा तकनीक के समावेश से रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। ई-पंजीयन के तहत दस्तावेजों की रजिस्ट्री अब पूर्णतः ऑनलाइन और पेपरलेस मोड में की जा रही है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से अपॉइंटमेंट से लेकर रजिस्ट्री पूर्ण होने तक के अपडेट्स क्रेता-विक्रेता को भेजे जा रहे हैं। रजिस्ट्री की प्रति भी व्हाट्सएप से डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जलग्रहण क्षेत्र विकास          छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी (REWARD) के अधिकारियों ने पीएमकेएसवाई (WDC 2.0) की प्रगति साझा की। वर्ष 2021-22 में स्वीकृत 45 परियोजनाओं के तहत 27 जिलों के 387 माइक्रो वाटरशेड में कार्य जारी है। 2.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार हेतु कुल 613.66 करोड़ रुपये की लागत तय है (केंद्र-राज्य अनुपात 60-40 प्रतिशत है)। भारत सरकार द्वारा हाल ही में (28 अप्रैल 2026) 30.14 करोड़ रुपये की केंद्रांश राशि जारी करते हुए परियोजना की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।          बैठक में वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग के सचिव भुवनेश यादव, संयुक्त सचिव भारत सरकार भूमि संसाधन विभाग नितिन खाडे, संचालक भूमि संसाधन भारत सरकार श्याम कुमार सहित छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पंजीयन एवं स्टाम्प, छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेन्सी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुये।

सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है करीब 393 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला स्टेडियम

गोरखपुर शनिवार (16 मई) की तिथि गोरखपुर की उपलब्धियों की श्रृंखला में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होने जा रही है। खेल अवस्थापना सुविधाओं के लिहाज से गोरखपुर का नाम वैश्विक स्तर पर उल्लिखित कराने तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों हेतु बड़ा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भूमि पूजन और शिलान्यास करेंगे। करीब 393 करोड़ रुपये की लागत वाले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के शिलान्यास समारोह में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और प्रदेश के खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव भी मौजूद रहेंगे।  गोरखपुर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है। इस संबंध में मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद प्रशासन की तरफ से ताल नदोर में उपलब्ध कराई गई जमीन पर 24 दिसंबर 2025 से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। औपचारिक शिलान्यास होने से पूर्व, सरकार की तरफ से जारी परियोजना लागत की प्रथम किश्त 63.39 करोड़ रुपये से काम आगे बढ़ रहा है। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड एक (भवन) के अनुसार अब तक करीब सात प्रतिशत काम हुआ है। स्टेडियम का निर्माण 23 दिसंबर 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा।  गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को गोरखपुर के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हैं। उनका कहना है कि इंटरनेशनल स्टेडियम के बन जाने से गोरखपुर आने वाले समय में विश्व स्तरीय स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर और खेल के अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों के लिए भी जाना जाएगा।  30 हजार होगी दर्शक क्षमता गोरखपुर में बन रहा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम 46 एकड़ क्षेत्रफल में आकार लेगा। कुल 30 हजार दर्शक क्षमता का यह स्टेडियम ‘ग्राउंड प्लस टू फ्लोर’ के हिसाब से बनेगा। इसके मेन ग्राउंड पर खिलाड़ियों के लिए 7 प्लेइंग पिच और 4 प्रैक्टिस पिच होगी। स्टेडियम के पूर्वी और पश्चिमी स्टैंड में प्रत्येक में 14,490 दर्शक बैठ सकेंगे। नार्थ पैवेलियन 208 वीआईपी व 382 मीडियाकर्मियों और साउथ पैवेलियन 1708 वीवीआईपी व वीआईपी के लिए होगा। रात्रिकालीन मैच भी हो सकें, इसके लिए मेन स्टेडियम में अंतर्राष्ट्रीय मानक के चार हाई मास्ट लाइट की व्यवस्था रहेगी। यहां क्रिकेट के अलावा अन्य बड़े आयोजन भी होंगे। कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहतरीन स्थान पर बन रहा अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम  ताल नदोर में बन रहा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहतरीन जगह पर है। गोरखपुर-वाराणसी राजमार्ग फोरलेन से जुड़ा यह स्थान, गोरखपुर एयरपोर्ट से करीब 24 किमी की दूरी पर है और रेलवे स्टेशन से करीब 20 किमी है। ऐसे में खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए यहां पहुंचना काफी सुगम होगा। पेट्रोलियम कंपनियों के सीएसआर फंड से 100 करोड़ गोरखपुर के इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण में देश की शीर्ष पेट्रोलियम कंपनियां अपने सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) फंड से कुल 100 करोड़ रुपये देंगी। एमओयू के बाद धनराशि आवंटन प्रक्रिया में है। अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम निर्माण के लिए सीएसआर फंड से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड 60 करोड़ रुपये, भारत पेट्रोलियम 30 करोड़ और हिंदुस्तान पेट्रोलियम 10 करोड़ रुपये देगी।

भोपाल में खुला इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज़ का नया शोरूम, ग्राहकों को मिलेगा प्रीमियम कलेक्शन

भोपाल  पूर्वी भारत में साड़ियों के सबसे भरोसेमंद ब्राण्ड जिसे पिछले 54 सालों से विश्वसनीयता और कारीगरी के लिए जाना जाता है, ने भोपाल में पहले स्टोर के लॉन्च के साथ मध्य प्रदेश की राजधानी में प्रवेश किया है। शॉप नंबर 1, अपर ग्राउंड फ्लोर, ई-3/52, एरिना कॉलोनी,  10 नंबर मार्केट में 1600 वर्गफीट में फैला यह स्टोर ब्राण्ड की अवधारणा ‘भारत की साड़ियों’ को मध्य भारत के सबसे ज़्यादा सांस्कृतिक महत्व वाले शहरों में से एक में लेकर आया है तथा भारत की साडियों को देश में हर कोने तक पहुंचाने के अपने विज़न को और आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।, इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज़ के सीईओ श्री दर्शन दुधोरिया ने कहा, ‘‘साड़ी भारत की सबसे पुरानी सांस्कृतिक पहचान में से एक है, आज की नई पीढ़ी इसे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में एक नए नज़रिए से देख रही है। इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज़ में, हम साड़ी को आधुनिक भारतीय महिला के लिए रोज़मर्रा का परिधान बनाना चाहते हैं, ताकि यह त्योहारों और खास मौकों की तरह ही रोज़ाना लिए भी उतनी ही ज़रूरी बन जाए। अपने प्लेटफॉर्म के ज़रिए, हम देश भर की महिलाओं तक ‘भारत की साड़ियां’ पहुंचा रहे हैं; हम आधुनिक रीटेल माहौल में प्रमाणित बुनाई वाली साड़ियों के साथ उपभोक्ताओं का भरोसा जीतते हैं। भोपाल में अपने पहले स्टोर के साथ, हम भारत की साड़ियों को देश के हर कोने तक पहुंचाने की अपनी यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं। साथ ही हम उन कारीगरों के प्रति भी समर्पित हैं, जो इस विरासत को बरक़रार रखे हुए हैं।’’ भोपाल स्टोर के लॉन्च के साथ इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज़ देश भर में अपने फुटप्रिन्ट को मजबूत बनाने के प्रयास जारी रखे हुए है। ब्राण्ड न सिर्फ अपनी रीटेल मौजूदगी का विस्तार कर रह है बल्कि भारत के द्वारा साड़ी की खोज और अनुभव के तरीके को भी नया आयाम दे रहा है। क्षेत्रीय कारीगरी, सांस्कृतिक स्टोरीटैलिंग एवं आधुनिक रीटेल के संयोजन द्वारा ब्राण्ड साड़ियों के लिए भारत का सबसे भरोसेमंद सिस्टम बनाने की दिशा में अग्रसर है।  इंदौर, उज्जैन और जबलपुर के बाद, यह मध्य प्रदेश में इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज़ का चौथा स्टोर है, इसके साथ ब्राण्ड ने राज्य के मुख्य सांस्कृतिक एवं कमर्शियल केन्द्रों में अपने फुटप्रिन्ट को और अधिक मजबूती से स्थापित कर लिया है। यह देश भर में ब्राण्ड का 68वां स्टोर है, जो भरोसेमंद, नेशनल साड़ी प्लेटफॉर्म के निर्माण की दिशा में इसके प्रयासों की पुष्टि करता है। भोपाल का यह स्टोर भारत की टेक्सटाईल परम्परा का जश्न है। यहां मौजूद कलेक्शन बुनाई की समृद्ध परम्पराओं का संयोजन है जिसमें बंगाल के काव्यात्मक कांथा, बारीक कारीगरी से युक्त बालूचरी, टेक्सचर्ड मटका और टसर से लेकर, दक्षिण भारत की सदाबहार भव्यता से युक्त कांजीवरम, कांचीपुरम और अरनी सिल्क तक शामिल हैं। साथ ही, इसमें बनारसी, कतन बनारसी, इकत, बंधेज, पैठनी, गढ़वाल और उप्पाडा जैसी प्रतिष्ठित परंपराओं को भी शामिल किया गया है; इसके अलावा मध्य प्रदेश की अपनी चमक बिखेरती चंदेरी और माहेश्वरी साड़ियाँ भी मौजूद हैं। ये सभी कलेक्शन ‘भारत की साड़ियों’ की एक जीवंत झांकी प्रस्तुत करते हैं, जहाँ हर साड़ी अपने आप में एक कहानी, एक क्षेत्र और एक विरासत को समेटे हुए है। 60 से अधिक बुनकर समुदायों से 15000 से अधिक कलाकारों के नेटवर्क के साथ, इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज़ भारत के कारीगर समुदायों एवं आधुनिक उपभोक्ताओं के बीच के अंतर को दूर करता है तथा भरोसा, प्रमाणिकता एवं सुलभता को बनाए रखते हुए इस विरासत को आज के दौर के लिए प्रासंगिक बनाता है। भोपाल, एक ऐसा शहर जहाँ संस्कृति को केवल सहेजकर नहीं रखा जाता, बल्कि उसे जिया भी जाता है। ऐसे में शहर में विस्तार ब्राण्ड के लिए स्वाभाविक है। यह नया स्टोर आज की भारतीय महिलाओं को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है, जो अपनी विरासत को महत्व देती हैं, और साड़ियों का चुनाव किसी खास मौके के लिए नहीं बल्कि अपनी रोज़मर्रा की पहचान के रूप में करती हैं।