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प्राचार्य और सहायक स्वास्थ्य पदाधिकारी भर्ती अटकी, दोबारा प्रक्रिया शुरू नहीं

 रांची  झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की कई नियुक्ति प्रक्रियाएं रद तो हुईं, लेकिन दोबारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई। आयोग ने अपरिहार्य कारण बताते हुए प्रतियोगिता परीक्षाएं रद कीं। दोबारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं होने से प्राचार्यों, सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारियों, पालीटेक्निक शिक्षकों जैसे महत्वपूर्ण रिक्त पद भरे नहीं जा सके। अधिसंख्य मामलों में नियमावली में कोई न कोई त्रुटि होने के कारण आवेदन मंगाने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया रद हुई। संबंधित विभागों के अनुरोध पर नियुक्ति प्रक्रिया रद की गई, लेकिन फिर से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की आवश्यक कार्रवाई नहीं हो पाई। उदाहरण के रूप में, जेपीएससी ने नगर विकास एवं आवास विभाग में सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी के कुल 56 पदों पर नियुक्ति के लिए अगस्त-2018 में ही आवेदन मंगाए थे। इसके लगभग सात वर्ष बाद आयोग ने 30 दिसंबर 2025 को सूचना प्रकाशित कर अपरिहार्य कारण बताते हुए यह नियुक्ति प्रक्रिया रद कर दी। इसके बाद दाेबारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई। दूसरी तरफ, निकायों में लोक स्वास्थ्य पदाधिकारियों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। विज्ञापन के दो वर्ष बाद रद हुई नियुक्ति प्रक्रिया जेपीएससी ने राज्य के 59 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्राचार्य के 39 पदों पर नियुक्ति के लिए 29 मार्च 2023 को ही विज्ञापन प्रकाशित कर आवेदन मंगाए थे। लेकिन दो वर्ष में भी यह नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। बाद में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा इन पदों पर नियुक्ति के लिए भेजी गई अधियाचना वापस लिए जाने के कारण उक्त विज्ञापन को 12 दिसंबर 2025 को रद कर दिया गया। इसके बाद अभी तक यह नियुक्ति प्रक्रिया दोबारा शुरू नहीं हुई। दूसरी तरफ, विद्यालयों में लंबे समय से पदों की रिक्तियां बरकरार है। दरअसल, विभाग ने अब इन पदों पर नियुक्ति पिछले वर्ष गठित झारखंड माध्यमिक आचार्य नियुक्ति नियमावली-2025 के तहत करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब नए सिरे से नियुक्ति की अधियाचना जेपीएससी को भेजी जानी है। नई नियुक्ति नियमावली में राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालयों में प्राचार्य के पद को बदलकर प्रधानाचार्य कर दिया गया है। साथ ही इस पद का ग्रेड पे 7,600 से घटाकर 4,800 कर दिया गया है। इस पद के लिए आवश्यक अर्हता में भी कुछ बदलाव किया गया है। अर्हता के कुछ बिंदुओं पर स्थगित व्याख्याता नियुक्ति जेपीएससी ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की अधियाचना पर राजकीय पालीटेक्निक संस्थानों में व्याख्याताओं की नियमित एवं बैकलाग पदों पर नियुक्ति के लिए इस वर्ष 13 फरवरी को विज्ञापन प्रकाशित कर आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन इसमें अर्हता के कुछ बिंदुओं पर झारखंड विधानसभा में सवाल उठने के बाद विभाग के अनुरोध पर आयोग ने नियुक्ति प्रक्रिया 16 मार्च को स्थगित कर दी। लगभग दो माह बीत जाने के बाद भी इसपर कोई अपडेट सूचना आयोग की ओर से प्रकाशित नहीं की गई है। बताया जाता है कि विभाग द्वारा नियुक्ति नियमावली में संशोधन किया जा रहा है। संशोधन के बाद ही दोबारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होगी।  

सीएम योगी के निर्देश पर सख्त,100 अस्पतालों का भुगतान रोका गया, 100 किए गए सस्पेंड

लखनऊ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले यूपी के 200 प्राइवेट अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। सीएम योगी के निर्देश पर आयुष्मान योजना के तहत रजिस्टर्ड 100 अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन निलंबित कर दिया गया है। साथ ही 100 अस्पतालों का भुगतान भी रोका गया है। सीएम योगी की इस कार्रवाई से अन्य अस्पतालों में हड़कंप मचा है। सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में इसे अधिक प्रभावी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए समय-समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी दिशा में अस्पतालों की सूचीबद्धता और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाया गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश हैं कि योजना के लाभार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योगी सरकार द्वारा अस्पताल इम्पैनलमेंट मॉड्यूल (एचईएम) पोर्टल के माध्यम से सूचीबद्ध अस्पतालों का सत्यापन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों के लिए 35 महत्वपूर्ण मानकों को पूरा करना अनिवार्य किया गया है। इनमें अस्पताल का पंजीकरण प्रमाणपत्र, फायर सेफ्टी एनओसी, आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता, एचएफआर पंजीकरण सहित अन्य जरूरी दस्तावेज और व्यवस्थाएं शामिल हैं। 200 निजी चिकित्सालयों ने मानकों के अनुरूप नहीं पूरी की प्रक्रिया सीईओ ने बताया कि नेशनल हेल्थ अथॉरिटी और स्टेट हेल्थ एजेंसी की ओर से ई-मेल, दूरभाष, संदेश, पत्राचार और वर्चुअल बैठकों के माध्यम से अस्पतालों को हर स्तर पर सहायता दी गई। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब तक 95 प्रतिशत से अधिक अस्पताल सफलतापूर्वक एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट हो चुके हैं। हालांकि, कुछ निजी अस्पतालों ने निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं की। योगी सरकार की ओर से उन्हें कई बार अवसर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद करीब 200 निजी चिकित्सालयों ने मानकों के अनुरूप प्रक्रिया पूरी नहीं की। इनमें आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़, बागपत, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, फर्रुखाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, झांसी, कन्नौज, कानपुर नगर, कुशीनगर, ललितपुर, लखनऊ, मथुरा, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, प्रतापगढ़, संतकबीरनगर, सुल्तानपुर, वाराणसी, शाहजहांपुर, जालौन, मिर्जापुर, अंबेडकरनगर, रामपुर और सोनभद्र सहित कई जिलों के अस्पताल शामिल हैं। 100 निजी अस्पतालों का रोका गया भुगतान सीएम योगी के निर्देश पर ऐसे अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 100 अस्पतालों का भुगतान रोक दिया गया है, जबकि करीब 100 अन्य अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को केवल मानक आधारित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं ही प्राप्त हों। बता दें कि योगी सरकार ने सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को एनएबीएच गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने के लिए भी निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही राज्य और जिला स्तर पर अस्पतालों की नियमित ऑडिट और मॉनिटरिंग भी कराई जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के अधिकतम उपयोग पर भी विशेष जोर दे रही है। अस्पतालों में डिजिटल माध्यम से मरीजों के निस्तारण को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए एबीडीएम सक्षम एचएमआईएस प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

नायब सैनी का बड़ा फैसला, महिला सशक्तीकरण सूचकांक से बढ़ेगी सुविधाओं की निगरानी

चंडीगढ़  हरियाणा के सभी जिलों में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल और उनके बच्चों के लिए क्रेच सेंटर बनाए जाएंगे। जिलावार महिला सशक्तीकरण सूचकांक बनाया जाएगा ताकि पता लग सके कि किस जिले में महिलाओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा विजन-2047 के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग की आगामी पांच वर्षीय कार्ययोजना की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। हर बच्चा अपनी आयु के अनुरूप शारीरिक व मानसिक माइलस्टोन कवर कर रहा है या नहीं, यह जांचने के लिए विविध गतिविधियां शुरू कराई जाएंगी। हर आयु वर्ग के बच्चों के लिए बेबी शो तथा स्वास्थ्य प्रतियोगिता शुरू करवाई जाएंगी जिनके विजेता बच्चों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। समाज, परिवार व सरकार के प्रतिनिधियों को ऐसे कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों की जन्मदर बढ़ाने के लिए जन-जागरूकता की विशेष कार्ययोजना तैयार करे। लिंगानुपात की दर को राष्ट्रीय औसत 933 से अधिक करने के लक्ष्य पूर्ति के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने महिलाओं व बच्चों के लिए अनीमिया जांच का लक्ष्य बढ़ाने तथा जरूरत के अनुसार सप्लीमेंट्स उपलब्ध करवाने के भी निर्देश दिए। साथ ही तीन साल तक के बच्चों व स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को विशेष पोषण सामग्री प्रदान करने के संबंध में भी हिदायतें दीं। आंगनबाड़ी वर्कर्स व सहायकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव शेखर विद्यार्थी ने बताया कि इस समय प्रदेश में 25 हजार 962 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें कार्यरत आंगनबाड़ी वर्कर्स व सहायक को महिलाओं व बच्चों से संबंधित कई प्रकार का विवरण ऑनलाइन करना होता है। इसलिए इनकी योग्यता को बढ़ाने तथा आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाने के लिए विभाग द्वारा प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

पुराने लहंगे के लुक को यूं बदलें ट्रेंडी स्टाइल में

अगर आप अपनी शादी के लहंगे को कई बार पहन चुकी हैं और अब उसे पहनते- पहनते बोर हो चुकी हैं, तो हम आपको बता रहे हैं 4 तरीके, जिससे आप अपने लहंगे को रिसाइल कर सकती हैं। सबसे पहले बदले लहंगे का लुक सबसे पहले आप अपने लहंगे का लुक बदल डालें। लहंगे को आप साड़ी स्टाइल, गुजराती लंहगा स्टाइल या रिस्ट स्टाइल (जिसमें दुपट्टे का एक कोना अपनी कलाई पर बांधते हैं) में पहन सकती हैं। इसमें आपको केवल करना होगा अपने लहंगे के साथ थोड़ा एक्सपेरिमेंट। इसमें आपके काम आएगा आपका टेलर। आप इसे ट्रडिशनल से हटाकर वेस्टर्न भी बना सकती हैं और वो हो सकता है साड़ी गाउन के रूप में। लहंगे को बनाएं अनारकली अगर आपके पास कोई अच्छा टेलर है, तो आप अपने लहंगे या चोली (ब्लाउज) का अनारकली भी बनवा सकती हैं। ऊपर के लिए सिंपल फैब्रिक को लहंगे के घेरे के साथ सिलवा लें। ऐसे ही अगर चोली का अनारकली बनवाना है, तो इसके नीचे किसी अच्छे फैब्रिक की कलियां जुड़वा लें। चोली से बनाएं ब्लाउज शादी के लहंगे की चोली के साथ एक्सपेरिमेंट करें और इसे किसी साड़ी के साथ पहनें। जैसे अगर आपके पास एम्ब्रॉयडरी वाली क्रेप चोली है, तो इसे सिंपल क्रेप साड़ी के साथ पेयर करें। वेलवेट चोली को नेट साड़ी या वेलवेट साड़ी के साथ पहनें। दोस्त की शादी या कोई फंक्शन अटेन्ड करना हो, तो कोई सिंपल लहंगा खरीदें और उसे शादी की चोली और दुपट्टे के साथ पहन लें। ऐसा करके आपके पैसे भी बचेंगे और लहंगा भी यूज हो जाएगा। अलग- अलग ड्रेस के साथ पेयर करें दुपट्टा लंहगे के दुपट्टे को स्ट्रेट फिट वाले सूट, अनारकली या फिर पटियाला सलवार-कमीज के साथ मिक्स एंड मैच करके पहनें। अगर आपका वेडिंग दुपट्टा नेट या टिशू का है, तो इसे सिर्फ उसी कलर के रॉ सिल्क सूट या वेल्वेट अनारकली के साथ ट्राय करें। अगर आपका दुपट्टा जॉर्जेट का है तो इसे क्रेप या कॉटन सलवार-कमीज के साथ पहनें। मिक्स एंड मैच दुपट्टा आप लहंगे के साथ का दुपट्टा छोड़ दें। इसके साथ मिक्स एंड मैच करवाएं कॉट्रस्ट दुपट्टा। यह आपके लहंगे का पूरा लुक बदल देगा।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महराजगंज में ₹208 करोड़ से अधिक की 79 परियोजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास

महराजगंज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब आपका वोट सही जगह पड़ता है, तब विकास, सुरक्षा, रोजगार और सुशासन सुनिश्चित होता है, लेकिन एक गलत वोट जातिवाद, क्षेत्रवाद, परिवारवाद, माफियावाद, अराजकता और गरीबों की जमीनों पर कब्जे जैसी दुष्प्रवृत्तियों को जन्म देता है। डबल इंजन सरकार ने इन प्रवृत्तियों पर प्रभावी रोक लगाकर प्रदेश में सुशासन और विकास का नया वातावरण तैयार किया है। महराजगंज समेत पूरे पूर्वांचल को माफिया, दंगा व भय के माहौल से बाहर निकालकर विकास, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, मजबूत सड़क नेटवर्क, सिंचाई, रोजगार और सुरक्षा से जोड़ा है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को महराजगंज में ₹208 करोड़ से अधिक की 79 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत उपस्थित जन-समूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र एवं टूलकिट भी वितरित किए। पहले जनता के करोड़ों रुपये कब्रिस्तानों की बाउंड्री वॉल पर खर्च होते थे मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा व सहयोगी दलों के विधायक बनने के बाद विधानसभा क्षेत्रों में मंदिरों के सौंदर्यीकरण और जनसुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दी गई। पहले जनता के करोड़ों रुपये कब्रिस्तानों की बाउंड्री वॉल पर खर्च होते थे, जबकि अब वही धन मंदिरों में बेहतर सुविधाएं विकसित करने और आम जनता के हित में लगाया जा रहा है। महराजगंज में दिख रहा विकास सही सांसद और विधायक चुनने का परिणाम है। बनेलिया माई के नाम पर रोहिन नदी पर बैराज का निर्माण हो या गोरखपुर से सोनौली तक फोरलेन मार्ग का कायाकल्प, ये सब जनता के एक सही वोट की ताकत से संभव हुआ है।   डबल इंजन सरकार ने बदली महराजगंज की तस्वीर मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले महराजगंज इंसेफेलाइटिस, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, अराजकता, माफियावाद और पलायन की त्रासदी झेल रहा था। दिमागी बुखार मासूम बच्चों की जान ले रहा था, सड़कें गड्ढों में तब्दील थीं, बिजली व्यवस्था चरमराई हुई थी, गरीबों की जमीनों पर कब्जे आम थे और किसान, नौजवान व बेटियां खुद को असुरक्षित महसूस करते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार बनने के बाद महराजगंज की तस्वीर बदल गई। इंसेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण हुआ, मेडिकल कॉलेज संचालित हुआ, नौतनवा, फरेंदा, चौक, सिसवा, श्यामदेउरवा, घुघली और पनियरा बेहतर सड़क नेटवर्क से जुड़ गए तथा गोरखपुर-सोनौली फोरलेन बनने से यात्रा समय दो घंटे से घटकर 45-50 मिनट रह जाएगा। गोरखपुर के नए बाईपास, ठूठीबारी से जिला मुख्यालय तक मजबूत सड़क नेटवर्क, पुलों के निर्माण और रोहिन नदी पर बने बनेलिया माई बैराज से क्षेत्र में कनेक्टिविटी और सिंचाई दोनों को नई ताकत मिली है। वनटांगिया गांवों को पट्टा, मतदाता पहचान और सरकारी योजनाओं से जोड़कर सम्मानजनक जीवन देने का काम भी डबल इंजन सरकार ने किया है। बीमारी ही नहीं, ‘बीमारू’ टैग भी खत्म हो गया मुख्यमंत्री ने कहा कि महराजगंज अब शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिले में मेडिकल कॉलेज, आईटीआई, पॉलीटेक्निक और अन्य शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना हो चुकी है, जबकि स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए नए उद्योगों और बंद चीनी मिलों को नई कार्ययोजना के साथ पुनः शुरू करने की तैयारी है। महराजगंज, कुशीनगर और सिद्धार्थनगर से इंसेफेलाइटिस जैसी घातक बीमारी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और केवल बीमारी ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का ‘बीमारू’ टैग भी हट गया है। उत्तर प्रदेश देश के विकास इंजन के रूप में उभर रहा है, जिसे आगे बढ़ने से अब कोई नहीं रोक सकता।  प्रदेश में माफिया का आतंक समाप्त मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने गरीबों की पीड़ा को कभी नहीं समझा, जबकि डबल इंजन सरकार हर जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ पहुंचाकर उनके जीवन में बदलाव ला रही है। वनटांगिया गांवों में भी राजस्व गांवों जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। हर गरीब को आवास, हर घर को शौचालय, राशन और आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा मिल रही है, जबकि गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिले हैं। महराजगंज के सैकड़ों नौजवान उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए हैं और किसान सिंचाई, बीज, ट्रैक्टर, उन्नत खेती तथा सरकारी क्रय केंद्रों का लाभ उठा रहे हैं। माफिया का आतंक समाप्त हो चुका है, गरीबों की जमीनों पर कब्जा नहीं हो सकता, बेटियां सुरक्षित हैं और किसी में भी गोहत्या या जबरन अत्याचार करने का दुस्साहस नहीं बचा है। राममंदिर और काशी विश्वनाथ धाम में बाधक बनी थीं सपा, कांग्रेस मुख्यमंत्री ने कहा कि सदियों के संघर्ष के बाद अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण हुआ है। महराजगंज के हजारों नौजवान, महिलाएं, किसान, व्यापारी और बुजुर्ग भी राममंदिर आंदोलन में सक्रिय रूप से जुड़े रहे। 492 वर्ष बाद मंदिर का शिलान्यास हुआ और 496 वर्ष बाद प्रधानमंत्री के कर-कमलों से अयोध्या में रामलला विराजमान हुए। दुनिया का सबसे भव्य राममंदिर अयोध्या में बना है और अखंड रामायण पाठ के बीच ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं भगवान राम और हनुमान जी आशीर्वाद दे रहे हों। डबल इंजन सरकार में भव्य राममंदिर और काशी विश्वनाथ धाम जैसे ऐतिहासिक कार्य संभव हुए, जबकि सपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां इन कार्यों में हमेशा बाधा बनती रहीं। इसी बाधा को पश्चिम बंगाल की जनता ने भी हमेशा के लिए उखाड़ फेंका है। इसलिए आप सबसे यही आग्रह करने आया हूं कि इन जनप्रतिनिधियों के साथ मजबूती से खड़े रहिए। सीमावर्ती क्षेत्र विकास की दौड़ में कभी पीछे न रहे भारत-नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत और सीमावर्ती क्षेत्र की संवेदनशीलता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नौतनवा, फरेंदा और सोनौली जैसे क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि यहां का नागरिक कभी खुद को पिछड़ा महसूस न करे। भारत और नेपाल सिर्फ दो पड़ोसी देश नहीं, बल्कि साझा संस्कृति, आस्था और रोटी-बेटी के अटूट रिश्ते से जुड़े मित्र राष्ट्र हैं। बौद्ध परिपथ और अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े महराजगंज, नौतनवा और फरेंदा का विकास केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से भी बेहद जरूरी है। विपक्ष के नकारात्मक नैरेटिव से बचते हुए “नेशन फर्स्ट” के साथ रहे हर देशवासी मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह देश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना महामारी का सफलतापूर्वक मुकाबला किया था, उसी तरह पश्चिम … Read more

गढ़वा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद, नई नियुक्तियों की प्रक्रिया अंतिम चरण में

 गढ़वा  झारखंड के गढ़वा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती मिलने वाली है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत चयनित अभ्यर्थियों की बहाली प्रक्रिया अब अपने अंतिम मुकाम पर है. आने वाले 21 मई को सफल अभ्यर्थियों के बीच नियुक्ति पत्र का वितरण किया जाएगा. इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ जॉन एफ कैनेडी ने आधिकारिक जानकारी साझा की है. उपायुक्त करेंगे नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम की शुरुआत सिविल सर्जन ने बताया कि नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम की शुरुआत उपायुक्त अनन्य मित्तल के हाथों होगी. उपायुक्त चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे. इसके बाद बाकी बचे हुए अभ्यर्थियों को सिविल सर्जन कार्यालय के माध्यम से नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे. मूल प्रमाण पत्र सत्यापन पूरा करने वाले अभ्यर्थी ही होंगे शामिल विभाग की ओर से निर्देश दिया गया है कि जिन चयनित अभ्यर्थियों ने अपने मूल प्रमाण पत्रों (ओरिजिनल सर्टिफिकेट) का सत्यापन कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, वे ही इस प्रक्रिया में शामिल होंगे. सभी सफल अभ्यर्थियों को निर्धारित समय पर उपस्थित होकर अपना अस्थायी नियुक्ति पत्र प्राप्त करना होगा. साथ ही, उन्हें आवंटित कार्यस्थल पर जॉइनिंग देने का भी निर्देश दिया गया है. नई तैनाती से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद गौरतलब है कि गढ़वा जिले के कई स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लंबे समय से मानव बल की भारी कमी बनी हुई थी. पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण ग्रामीण इलाकों में मरीजों को समय पर इलाज मिलने में कठिनाई हो रही थी.अब नई तैनाती से न केवल मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन में भी सुगमता आएगी.सिविल सर्जन ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार की उम्मीद है. नए कर्मियों के आने से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी.

यूपी की गोशालाओं में तैनात होंगी ‘कृषि सखियां’, महिलाओं को मिलेगा रोजगार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गो संरक्षण को एक नई और आधुनिक दिशा देने के लिए अब तक का सबसे बड़ा 'मास्टर प्लान' तैयार किया है। इस योजना के तहत गो संरक्षण को केवल सेवा भाव तक सीमित न रखकर इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और जैविक खेती के एक एकीकृत मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुसार, अब प्रदेश के सभी 75 जिलों की साढ़े सात हजार से अधिक गोशालाओं में 'कृषि सखियों' की तैनाती की जाएगी, जो इस अभियान को जमीनी स्तर पर नेतृत्व देंगी। आजीविका मिशन की महिलाओं को मिलेगी कमान इस महत्वाकांक्षी योजना में उत्तर प्रदेश आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं की केंद्रीय भूमिका होगी। योगी सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को गो संरक्षण अभियान से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया जाए। इसके लिए प्रदेश स्तर पर महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर 'मास्टर ट्रेनर' के रूप में तैयार किया जाएगा। ये प्रशिक्षित महिलाएं आगे चलकर गांव-गांव में अन्य महिलाओं को इस अभियान के गुर सिखाएंगी, जिससे गोशालाएं आत्मनिर्भरता और समृद्धि के नए केंद्रों के रूप में उभरेंगी। गोबर से खाद और रोजगार का नया मॉडल उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, गोशालाओं को अब रोजगार और जैविक कृषि के मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों से निकलने वाले गोबर का उपयोग बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद बनाने में होगा। महिलाओं के नेतृत्व में संचालित खाद निर्माण इकाइयों से न केवल गोवंश का बेहतर संरक्षण होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे। यह पहल विशेष रूप से महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने वाली है। खेती की लागत में कमी और बेहतर स्वास्थ्य का लक्ष्य योजना का दूरगामी प्रभाव खेती और स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा। जैविक खाद के प्रचुर उत्पादन से किसानों की रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी, जिससे खेती की लागत घटेगी और मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा। जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से प्रदेशवासियों को स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित खाद्यान्न मिल सकेगा। यही कारण है कि इस पूरी योजना को गांव, किसान, महिला और गोवंश को एक साथ जोड़ने वाले एक व्यापक 'गो समृद्धि अभियान' के रूप में देखा जा रहा है।  

गांवों को मिलेगी नई ताकत! ‘जी राम जी अधिनियम 2025’ से बदलेगी ग्रामीण छत्तीसगढ़ की तस्वीर

विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025 ग्रामीण छत्तीसगढ़ के सशक्तिकरण का नया अध्याय 1 जुलाई 2026 से लागू होगी नई रोजगार गारंटी व्यवस्था, अब 100 के बजाय मिलेंगे 125 दिन का काम रायपुर भारत सरकार द्वारा ग्रामीण आजीविका और समग्र विकास को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से श्विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 अधिसूचित किया गया है। यह क्रांतिकारी कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी होगा और वर्तमान मनरेगा  का स्थान लेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस नई व्यवस्था को प्रदेश में पूरी तत्परता से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संदेश           मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अधिनियम को ग्रामीण समृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत-2047 के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में यह अधिनियम एक मील का पत्थर है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार की कानूनी गारंटी हमारे ग्रामीण भाई-बहनों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और खुशहाली का नया सवेरा लेकर आएगी। हमारी सरकार इस व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ और लाभ          125 दिनों के रोजगार की गारंटी नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की वैधानिक गारंटी मिलेगी। यह वर्तमान 100 दिनों की सीमा से 25 प्रतिशत अधिक है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु 95 हजार 692.31 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट प्रावधान किया है। राज्यों के अंशदान सहित कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिकों के खातों में (DBT) साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। देरी होने पर श्रमिक श्विलंब क्षतिपूर्तिश् के हकदार होंगे। यदि काम की मांग करने के निर्धारित समय के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो शासन द्वारा संबंधित श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों के चयन के लिए अधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों (जैसे जल संरक्षण, कृषि अधोसंरचना) का निर्माण होगा। सुगम संक्रमण  की व्यवस्था          श्रमिकों और प्रशासन की सुविधा के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं की गई हैं। वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। 30 जून 2026 तक मनरेगा के तहत चल रहे सभी कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे और 1 जुलाई से स्वतः नई व्यवस्था में समाहित हो जाएंगे। नए श्रमिक ग्राम पंचायत स्तर पर सहजता से अपना पंजीयन करा सकेंगे। विकसित भारत 2047 का आधार          यह अधिनियम केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और उत्पादक बनाने का महा-अभियान है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अधोसंरचना, जल संरक्षण और कृषि सुधार को अभूतपूर्व गति मिलेगी, जो राज्य को विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में तेजी से आगे ले जाएगी। * धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक * सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक

‘कुछ मीडिया में गए, कुछ RTI एक्टिविस्ट बने’— CJI के बयान से छिड़ी नई बहस

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI सूर्यकांत ने शुक्रवार को कोर्ट में एक ऐसी बात कही जो चर्चा में आ गई है. एक वकील के मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' से की और कहा कि ऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमले करते हैं।   उन्होंने ऐसे लोगों को 'समाज के परजीवी' भी कहा. यह टिप्पणी तब आई जब एक वकील सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने के लिए कोर्ट में याचिका लेकर आया था।  भारत में वकालत में एक खास रैंक होती है जिसे 'सीनियर एडवोकेट' कहते हैं. यह दर्जा कोर्ट खुद किसी वकील को देती है जब वो यह समझे कि उस वकील का अनुभव, काम और पेशेवर आचरण इसके लायक है. यह दर्जा मांगा नहीं जाता बल्कि दिया जाता है. कोई वकील खुद इसके लिए याचिका नहीं लगाता।  कोर्ट में क्या हुआ? CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच के सामने एक वकील ने याचिका दाखिल की थी. वो चाहते थे कि दिल्ली हाई कोर्ट उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा दे. लेकिन उन वकील के पेशेवर आचरण और सोशल मीडिया पर उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को देखकर बेंच बहुत नाराज हो गई।  CJI ने साफ कहा कि अगर दिल्ली हाई कोर्ट उन्हें यह दर्जा दे भी दे तो सुप्रीम कोर्ट उसे रद्द कर देगा. उन्होंने वकील से पूछा कि क्या यह दर्जा कोई मेडल है जो सजावट के लिए रखा जाए. और यह भी पूछा कि क्या ऐसे व्यक्ति को सीनियर एडवोकेट बनना चाहिए।  CJI ने 'कॉकरोच' और 'परजीवी' क्यों कहा? सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि समाज में पहले से ऐसे 'परजीवी' हैं जो सिस्टम पर हमला करते हैं. फिर उन्होंने कहा कि कुछ बेरोजगार युवा जिन्हें कोई नौकरी नहीं मिलती और पेशे में कोई जगह नहीं होती, वो मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं और सबको निशाना बनाने लगते हैं. इन्हें उन्होंने 'कॉकरोच जैसे युवा' कहा. CJI ने वकील से पूछा कि क्या वो भी उन लोगों के साथ हाथ मिलाना चाहता है।  वकीलों की डिग्री पर भी उठाए सवाल CJI ने एक और बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि वो CBI से कहना चाहते हैं कि बहुत से वकीलों की डिग्रियों की जांच की जाए क्योंकि उनकी असलियत पर गंभीर सवाल हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस मामले में कभी कुछ नहीं करेगी क्योंकि उन्हें वकीलों के वोट चाहिए।  आखिर में क्या हुआ? वकील ने बेंच से माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की इजाजत मांगी. बेंच ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी।   

छत्तीसगढ़ में रीडेवलपमेंट योजनाओं को मिलेगी रफ्तार, सरकार स्तर पर मंथन जारी

रायपुर, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा राज्य के प्रमुख शहरों में आधुनिक और सुव्यवस्थित आवासीय परिसरों के निर्माण हेतु पुनर्विकास योजनाओं पर युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल के अंतर्गत मंडल ने अब तक पाँच महत्वपूर्ण योजनाओं के प्रस्ताव राज्य शासन को अनुमोदन हेतु प्रेषित किए हैं। प्रक्रियात्मक प्रगति और तकनीकी तैयारी         शासन द्वारा प्रस्तावों के सूक्ष्म परीक्षण के दौरान विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन(DPR), निविदा दस्तावेज (RFP)और अन्य तकनीकी जानकारियां मांगी गई थीं। मंडल ने तत्परता दिखाते हुए ये सभी आवश्यक दस्तावेज निर्धारित समय-सीमा के भीतर शासन को उपलब्ध करा दिए हैं। वर्तमान में, शासन के नवीन दिशा-निर्देशों के आधार पर इन प्रस्तावों का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है, ताकि इन्हें और अधिक आधुनिक एवं जनोपयोगी बनाया जा सके। परियोजना के लाभ और उद्देश्य         पुनर्विकास की ये योजनाएं वर्तमान में शासन स्तर पर अंतिम निर्णय की प्रक्रिया में हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से नागरिकों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होंगे। पुराने परिसरों के स्थान पर आधुनिक सुविधाओं से लैस घर बनाए जा रहे हैं। बेहतर सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम और हरित क्षेत्र। नियोजित शहरी विकास शहरों के स्वरूप में व्यापक सुधार और सुव्यवस्थित वातावरण बनायसा जा रहा है। मंडल की प्रतिबद्धता        छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल राज्य के नागरिकों को उच्च गुणवत्तापूर्ण आवास और वैश्विक स्तर की शहरी सुविधाएं प्रदान करने के लिए संकल्पित है। मंडल के अनुसार सभी आगामी योजनाओं को शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता और गति के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है।