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सदन में आक्रामक रणनीति की तैयारी, बिहार सरकार ने किए नए सचेतकों और उप नेताओं की नियुक्ति

 पटना  बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने विधानसभा और विधान परिषद में बड़ा राजनीतिक और संगठनात्मक फेरबदल कर साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले सत्रों में सत्ता पक्ष आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरने वाला है। सरकार ने दोनों सदनों में मुख्य सचेतक, उप मुख्य सचेतक, सचेतक और उप नेता जैसे अहम पदों पर नई नियुक्तियां कर संगठन को धार देने की कोशिश की है। इस बदलाव को सिर्फ औपचारिक नियुक्ति नहीं, बल्कि सत्ता और संगठन के बीच तालमेल मजबूत करने की बड़ी तैयारी माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस फेरबदल में कई पुराने और सक्रिय नेताओं को अहम जिम्मेदारी देकर राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश भी दिख रही है। विधानसभा में संजीव चौरसिया को बड़ी जिम्मेदारी बिहार विधानसभा में भाजपा विधायक संजीव चौरसिया को मुख्य सचेतक बनाया गया है। वहीं मनजीत कुमार सिंह को उप मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजनीतिक हलकों में इसे सदन के भीतर सरकार की रणनीति को और मजबूत करने की कवायद माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि आगामी विधानसभा सत्रों में विपक्ष के हमलों का जवाब अधिक संगठित तरीके से दिया जाए। इसी वजह से ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है जो सदन की कार्यवाही और संगठन दोनों में सक्रिय माने जाते हैं। विधान परिषद में भी बड़ा संतुलन साधा गया विधान परिषद में भी कई अहम बदलाव किए गए हैं। ललन कुमार सराफ और राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को उप नेता बनाया गया है। वहीं संजय कुमार सिंह को मुख्य सचेतक और जनक राम को उप मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा नीरज कुमार और रीना देवी को सचेतक नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि परिषद में सरकार अपनी मौजूदगी और समन्वय को और मजबूत करना चाहती है ताकि विधायी कामकाज में किसी तरह की बाधा न आए। कई विधायकों को मिला संगठन में नया रोल विधानसभा में कई विधायकों को सचेतक बनाकर सरकार ने क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने का भी प्रयास किया है। जिन नेताओं को यह जिम्मेदारी मिली है उनमें गायत्री देवी, राजू तिवारी, रामविलास कामत, सुधांशु शेखर, राणा रणधीर, ललित नारायण मंडल, कृष्ण कुमार ऋषि, अरुण मांझी और रत्नेश कुमार शामिल हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार ने ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाया है जो अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय और प्रभावशाली माने जाते हैं। इससे सत्ता पक्ष को सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह फायदा मिल सकता है। आखिर क्यों अहम होते हैं सचेतक? सदन की राजनीति में सचेतकों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। इनकी जिम्मेदारी पार्टी विधायकों और विधान पार्षदों की उपस्थिति सुनिश्चित करना, पार्टी लाइन के अनुसार मतदान कराना और सदन के भीतर अनुशासन बनाए रखना होता है। सरकार जब किसी बड़े विधेयक या महत्वपूर्ण फैसले को सदन में लाती है तो सचेतकों की भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। यही वजह है कि इन पदों पर भरोसेमंद नेताओं की नियुक्ति की जाती है। सम्राट चौधरी ने भेजा आधिकारिक पत्र सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन नियुक्तियों को लेकर बिहार विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद सभापति को आधिकारिक पत्र भेज दिया है। माना जा रहा है कि यह बदलाव आने वाले राजनीतिक और विधायी समीकरणों को ध्यान में रखकर किए गए हैं राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सम्राट सरकार अब सदन के भीतर ज्यादा आक्रामक और संगठित रणनीति के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है।

आयुष्मान खुराना की कॉमेडी फिल्म ‘पति पत्नी और वो दो’ में झंझटों और गलतफहमियों का धमाका

बड़े दिनों के बाद आयुष्मान खुराना बड़े पर्दे पर कॉमेडी फिल्म लेकर आए हैं. उनकी पिक्चर 'पति पत्नी और वो दो' का इंतजार फैंस को बेसब्री से था. ये कहानी है प्रजापति पांडे की, जो प्रयागराज के वन विभाग अधिकारी हैं. प्रजापति पांडे (आयुष्मान खुराना) का वन विभाग में अपना ही जलवा है. पिक्चर के पहले सीन में उनका इंट्रोडक्शन 'लेपर्ड कैसेनोवा' के रूप में दिया जाता है. उनकी खुद की जुबान में 'तेंदुए तो ज्यादा ही होते हैं, शेर सिर्फ एक ही होता है.' टशन मारते हुए पांडे जी लपक कर तेंदुआ पकड़ लेते हैं और आपको समझ आ जाता है कि उनका किरदार इस पिक्चर में अलग-अलग सिचुएशन की लगाम पकड़ने में भागता दिखने वाला है. प्रजापति पांडे की पत्नी हैं अपर्णा पांडे (वामिका गब्बी). अपर्णा एक न्यूज रिपोर्टर हैं और अपने तेज दिमाग और जुबान के साथ कुछ कर दिखाने की कोशिश में लगी हुई हैं. अपर्णा की दोस्त है नीलोफर (रकुल प्रीत सिंह), जो प्रजापति संग वन विभाग में काम करती है. प्रजापति 'जबरफॉर्म' में चल रहे होते हैं कि तभी उनकी दोस्त चंचल (सारा अली खान) आकर उनकी खुशियों में आग लगा देती हैं. चंचल एक सीटिंग एमएलए, गजराज तिवारी (तिग्मांशु धूलिया) के बेटे के प्यार में हैं. किसी ने दोनों की फोटो भी सोशल मीडिया पर लीक कर दी है. अब एमएलए चंचल को ढूंढ रहा है और अगर वो उसे मिल गई, तो चंचल का राम नाम सत्य हो जाएगा. चंचल मदद मांगने प्रजापति के पास आती है और दोनों मिलकर झन्नाटेदार आइडिया निकालते हैं. दिक्कत ये है कि पांडे जी अपनी पत्नी को इस प्लान में इनवॉल्व नहीं कर सकते और इस चक्कर में उनके हाथ-पैर फूले जा रहे हैं. दूसरी तरफ एक झूठ से शुरू हुई गड़बड़ी और हड़बड़ी अब डबल-ट्रिपल हो गई है. पांडे जी जिसके साथ दिख जा रहे हैं, उसी से उनका अफेयर मान लिया जा रहा है. जेंडर का भेदभाव भी नहीं किया जा रहा. इस सारी उलझन के बीच पांडे जी को अपनी शादी, दोस्त की जान और अपनी खुद की जान बचानी है. अब वो ये कर पाएंगे या नहीं, यही पिक्चर में देखने वाली बात है. डायरेक्शन और परफॉरमेंस दूसरी कॉमेडी ऑफ एरर फिल्मों की तरह 'पति पत्नी और वो दो' भी जबरदस्त झमेले से भरी हुई है. इसमें हर मोड़ पर खतरे के साथ-साथ गलतफहमी है. ये एलिमेंट काफी अच्छे से पिक्चर को आगे लेकर आता है. प्रयागराज से बनारस के बीच दौड़ती इस फिल्म के कुछ पल काफी अच्छे हैं. प्रजापति और अपर्णा एक दूसरे से जिस अंदाज में बात करते हैं, वो कभी सेक्सी लगता है तो कभी क्रिंज. इसके अलावा फिल्म में कॉमेडी का भर-भरकर इस्तेमाल तो किया गया है, मगर सभी जोक लैंड नहीं होते. कुछ आपको हंसाते हैं, तो कुछ मिस हो जाते हैं. कुछ सीन्स भी इसमें हवा बाजी करने के लिए डाले लगते हैं. डायरेक्टर मुदस्सर अजीज की बनाई इस फिल्म का क्लाइमैक्स उतना जोरदार नहीं है, जितने की उम्मीद आप फिल्म के दौरान कर रहे होते हैं. इसके गाने ठीक हैं. प्रजापति पांडे के रोल में आयुष्मान खुराना ने अच्छा काम किया है. सारा अली खान, वामिका गब्बी और रकुल प्रीत सिंह अपने-अपने रोल में अच्छी हैं. पिक्चर में तिग्मांशु धूलिया, विजय राज, आयेशा रजा, विशाल वशिष्ठ, दुर्गेश कुमार समेत कई बढ़िया कलाकार हैं, जिन्होंने मजेदार किरदार निभाए हैं. कुल-मिलाकर अगर आप बिना जोर दिए कुछ हल्का-फुल्का देखना चाहते हैं तो ये फिल्म आपके लिए है.

बिहार के लाल ईशान किशन पर गर्व, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सौंपा 1 करोड़ का चेक

पटना भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक विकेटकीपर-बल्लेबाज और बिहार के लाल ईशान किशन ने अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से एक बार फिर पूरे सूबे का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 (ICC T20 World Cup 2026) में टीम इंडिया को विश्व विजेता बनाने में अपनी सबसे अहम भूमिका निभाने वाले स्टार क्रिकेटर ईशान किशन को बिहार सरकार ने शानदार इनाम से नवाजा है। शुक्रवार को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ईशान किशन को विशेष रूप से सम्मानित करते हुए 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम पुरस्कार राशि का चेक सौंपा। इस सम्मान के साथ ही राज्य में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बेहद मजबूत संदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सौंपा चेक राजधानी पटना में आयोजित एक अहम कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ईशान किशन को यह सम्मान दिया। विश्व कप जैसे सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराने वाले इस युवा सितारे की ऐतिहासिक उपलब्धि पर आज पूरे राज्य को नाज है। सीएम ने उन्हें 1 करोड़ रुपये का चेक सौंपने के बाद उनके उज्ज्वल और सुनहरे भविष्य की कामना की। इस खास और गौरवशाली मौके पर राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और वरिष्ठ अधिकारी दीपक कुमार भी मुख्य रूप से मौजूद रहे। सीएम ने एक्स पर शेयर की तस्वीर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ईशान किशन को सम्मानित करते हुए ली गई तस्वीर को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (X) पर भी साझा किया। तस्वीर के साथ उन्होंने एक बेहद ही गर्व से भरा संदेश लिखा। सीएम ने लिखा कि बिहार के लाल ईशान किशन ने विश्व कप में अपने शानदार खेल और दमदार प्रदर्शन से न केवल देश का, बल्कि पूरे बिहार राज्य का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि ईशान किशन इसी तरह आगे भी अपने बल्ले की गूंज से भारतीय क्रिकेट में धमक बनाए रखेंगे। नई ऊंचाइयों पर बिहार का क्रिकेट, वैभव को भी मिला था सम्मान इन दिनों बिहार के होनहार युवा क्रिकेटरों का जलवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ रहा है। ईशान किशन से पहले, बेहद कम उम्र में ही अपने बेहतरीन प्रदर्शन से पूरे देश की सुर्खियां बटोरने वाले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को भी बिहार सरकार द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वैभव की अद्भुत प्रतिभा को सराहते हुए उन्हें 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की थी। बिहार क्रिकेट अब नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- उज्जैन की जनता सिंहस्थ तैयारियों में निभा रही अहम भूमिका

उज्जैन की जनता सिंहस्थ संबंधी कार्यों में सहयोग कर पेश कर रही हैं नई मिसाल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने हरसिद्धि पाल से रामघाट मार्ग चौड़ीकरण कार्य का किया निरीक्षण उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ:2028 के लिए श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के आवागमन एवं सुविधाएं बढ़ाने के लिए घाटों एवं मार्गों के चौड़ीकरण कार्य किए जा रहे है। सरकार द्वारा सभी कार्यों की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। सिंहस्थ के लिये सभी कार्य इस तरीके से किए जा रहे है कि पौराणिक और धार्मिक नगरी उज्जैन को लंबे समय तक उनका लाभ प्राप्त हो। उज्जैन के जनप्रतिनिधि, सभी धर्म के अनुयायी और नागरिक विकास कार्यों का समर्थन कर रहे है और सहयोग प्रदान कर देश के लिए एक नई मिसाल बन रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को उज्जैन में रामघाट पहुंचकर हरसिद्धि पाल से राम घाट मार्ग चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के दौरान निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत कार्य तेजी गति, गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण करें। होमगार्ड द्वारा आयोजित बाढ़ बचाव प्रशिक्षण का अवलोकन किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरसिद्धि पाल से रामघाट मार्ग चौड़ीकरण के निरीक्षण के बाद होमगार्ड द्वारा आयोजित बाड़ बचाव प्रशिक्षण का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे होमगार्ड जवानों की हौसला अफजाई की। डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट संतोष कुमार जाट ने जानकारी दी कि होमगार्ड द्वारा 250 होमगार्ड जवानों को बाढ़ बचाव के लिए डीप डाइविंग, नाविकों, स्विमिंग, लाइफ जैकेट के उपयोग का तरीका, आपदा और बाढ़ बचाव सामग्री का उचित प्रयोग, अंडर वॉटर रेस्क्यू और सर्फेस वॉटर रेस्क्यू का 15 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, संजय अग्रवाल, सिंहस्थ मेला अधिकारी सह संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजीपी राकेश गुप्ता और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

भोजशाला विवाद में हिंदू पक्ष की जीत की बड़ी वजह बने ये धार्मिक प्रमाण

धार  मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI की 98 दिन तक चली वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को सही मानते हुए भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर स्वरूप वाला स्थल माना है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐतिहासिक साक्ष्य, साहित्य, संरचनाएं और ASI की रिपोर्ट यह स्थापित करती हैं कि यह स्थान राजा भोज से जुड़ा संस्कृत अध्ययन और देवी वाग्देवी सरस्वती की आराधना का प्रमुख केंद्र था।  इस मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस अशोक अवस्थी की खंडपीठ ने की. यह मामला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों जजों ने खुद भोजशाला परिसर का दौरा कर जमीनी स्थिति का निरीक्षण किया. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह निर्णय सिर्फ दस्तावेजों और रिपोर्टों के आधार पर नहीं बल्कि स्थल के प्रत्यक्ष निरीक्षण के बाद दिया गया है।  पूजा पर रोक वाला पुराना आदेश रद्द कोर्ट ने कहा कि अगर कमाल मौला मस्जिद से जुड़े मुस्लिम पक्षकार चाहें तो वे मस्जिद के लिए धार शहर या उसके आसपास वैकल्पिक जमीन आवंटित करने की मांग सरकार से कर सकते हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी मांग आने पर सरकार उस पर विचार करेगी. हिंदू पक्ष की ओर से अदालत में एक और महत्वपूर्ण मांग रखी गई थी. इसमें राजा भोज की आराध्या मानी जाने वाली वाग्देवी सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा को लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम से वापस भारत लाने के लिए आदेश देने की मांग की गई थी।  कोर्ट ने इस पर कहा कि याचिकाकर्ता सरकार को ज्ञापन दे सकते हैं और सरकार इस विषय पर विचार कर सकती है. भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद का विवादित क्षेत्र 18 मार्च 1904 से संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज है. यह परिसर 1958 के प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल अधिनियम के तहत भी संरक्षित है. लंबे समय से यह विवाद बना हुआ था कि इस स्थल का धार्मिक स्वरूप क्या है. हिंदू पक्ष इसे देवी वाग्देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र बताता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है।  ASI रिपोर्ट में मिले मंदिर के कई प्रमाण अदालत के आदेश पर ASI ने यहां 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था. इस सर्वे के दौरान परिसर की दीवारों और खंभों पर कई ऐसे चिन्ह और आकृतियां मिलीं जिन्हें हिंदू मंदिर स्थापत्य से जुड़ा माना गया. रिपोर्ट में कमल, केले के स्तंभ, घंटियां, पल्लव, श्रीफल युक्त कलश और देवी-देवताओं की उकेरी गई मूर्तियों का उल्लेख किया गया. इसके अलावा संस्कृत श्लोक, शिलालेख और धार्मिक प्रतीकों के भी प्रमाण मिले. ASI ने इन सभी अवशेषों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई थी।  सर्वे में जमीन के नीचे भी मंदिर जैसे ढांचे के संकेत मिलने की बात कही गई. परिसर में एक हवनकुंड मिलने का भी जिक्र रिपोर्ट में किया गया है. अदालत ने कहा कि इन सभी साक्ष्यों से यह साबित होता है कि यह स्थल हिंदू धार्मिक और शैक्षणिक परंपरा से जुड़ा रहा है. हाईकोर्ट ने ASI के वर्ष 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया जिसमें हिंदुओं के पूजा अधिकारों को सीमित किया गया था जबकि मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी. अदालत ने कहा कि ऐसा आदेश समानता और धार्मिक अधिकारों के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।  कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. साथ ही परिसर की पवित्रता, धार्मिक स्वरूप और कानून व्यवस्था बनाए रखना भी सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है. अदालत ने अपने निष्कर्ष में कहा कि भोजशाला में हिंदू पूजा की परंपरा कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।  हिंदुओं के पूजा अधिकारों पर लगी रोक हटाई गई इसके अलावा कोर्ट ने माना कि ऐतिहासिक साहित्य और उपलब्ध साक्ष्य यह स्थापित करते हैं कि यह स्थल परमार राजवंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था. इसी के साथ हाईकोर्ट ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की रिट याचिका संख्या 10497/2022 और कुलदीप तिवारी की याचिका संख्या 10484/2022 का निपटारा करते हुए विस्तृत निर्देश जारी किए. फैसले के बाद भोजशाला विवाद को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है और अब आगे सरकार के कदमों पर सभी की नजर बनी हुई है। 

शौर्य संकल्प योजना से युवाओं को मिलेगा आत्मविश्वास और अवसरों का नया मंच: राज्यमंत्री गौर

युवाओं को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक अभियान है शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना: राज्यमंत्री गौर शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना का हुआ शुभारंभ भोपाल, नर्मदापुरम और रायसेन के चयनित अभ्यर्थियों को वितरित की किट पहली बार ओबीसी छात्रावासों में फ्री मेस, दिल्ली छात्रगृह योजना की राशि 1550 से बढ़ाकर 10 हजार भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने शुक्रवार को अपेक्स बैंक परिसर के समन्वय भवन में 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया और विधायक श्री भगवानदास सबनानी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में योजना के अंतर्गत भोपाल, नर्मदापुरम और रायसेन जिले के चयनित अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया, जिन्हें राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने प्रशिक्षण किट वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने युवाओं का स्वागत करते हुए इसे अपने राजनीतिक जीवन का एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हमने यह प्रण लिया था कि पिछड़ा वर्ग के युवाओं का जीवन बेहतर बनाने के लिए हम कुछ ठोस करेंगे और यह योजना युवाओं को सशक्त बनाने का एक बड़ा अभियान है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि 45 दिन तक चलने वाली यह विभाग की पहली ऐसी रोजगार परक प्रशिक्षण योजना है, जो ओबीसी अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, शौर्य, समर्पण और संकल्प का ज्ञान भी देगी। हमारी योजना का नाम ही 'शौर्य और संकल्प' है, जो अपने आप में एक प्रेरणा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नियत किए गए विकास के 4 स्तंभों में युवाओं को एक अहम स्तंभ बताते हुए मंत्री श्रीमती गौर ने युवा शक्ति का आह्वान किया कि वे किसी के भ्रम में न आएं। हमारी केंद्र और राज्य सरकार कौशल, संकल्प और प्रेरणा के जरिए युवाओं को निखारने का काम कर रही है, जो राष्ट्रसेवा की सशक्त राह पर आगे बढ़ाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करते हुए मंत्री श्रीमती गौर ने विभागीय उपलब्धियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार ओबीसी हॉस्टल में 'मेस' की सुविधा शुरू होने जा रही है, जहां विद्यार्थियों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संवेदनशीलता है कि 'दिल्ली छात्रगृह योजना' की सहायता राशि को 1,550 रुपए से बढ़ाकर सीधे 10 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है। इसके अलावा छात्राओं को बेहतर वातावरण देने के लिए 31 कन्या छात्रावासों को 'आदर्श छात्रावास' के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूरे देश में मध्यप्रदेश पहला राज्य और हमारा विभाग पहला विभाग है, जो 'सोशल इंपैक्ट बॉन्ड' के माध्यम से युवाओं को ट्रेनिंग देकर विदेश भेजने की तैयारी कर रहा है। 'सरदार पटेल कोचिंग योजना' के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी विद्यार्थियों को नीट, क्लैट और जेईई जैसी परीक्षाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का संकल्प हमारी सरकार ने किया है। कार्यक्रम में महापौर श्रीमती मालती राय ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार मानते हुए कहा कि राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने ओबीसी वर्ग के छात्रों की बेहतरी के लिए एक शानदार योजना को जमीन पर उतार दिया है। मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि राज्यमंत्री श्रीमती गौर के प्रयासों से ही आज यह ऐतिहासिक योजना मूर्त रूप ले रही है। विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने कहा कि 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण' जैसी योजना देशभर में केवल मध्यप्रदेश सरकार ने ही शुरू की है। इससे प्रतीक होता है कि सरकार सभी वर्गों के विकास के प्रति कितनी संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ रही है। आयुक्त पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण श्री सौरभ सुमन ने बताया कि इस योजना के लिए कुल 6,687 आवेदन प्राप्त हुए थे। पारदर्शी स्क्रीनिंग के बाद 3,664 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के लिए अंतिम रूप से चयनित किया गया है, जिनमें 2,030 छात्र और शेष छात्राएं शामिल हैं। इन चयनित अभ्यर्थियों को सैद्धांतिक और प्रैक्टिकल शिक्षा दी जाएगी। इसके अलावा, आधुनिक तरीके से तैयारी करने के लिए 'ऐप बेस्ड ट्रेनिंग मटेरियल' भी उपलब्ध रहेगा। आयुक्त श्री सुमन ने छात्रों को विश्वास दिलाया कि योजना की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अगर आवश्यकता हुई तो मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री के अनुमोदन के बाद अन्य जिलों तक इस योजना का विस्तार किया जाएगा और सीटों की संख्या में भी विस्तार किया जाएगा।  

ईडन गार्डन्स में KKR और गुजरात टाइटंस की टक्कर, हेड-टू-हेड में GT का दबदबा

कोलकाता इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का 60वां मुकाबला कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और गुजरात टाइटंस (GT) के बीच खेला जाएगा। प्लेऑफ के लिहाज से ये मुकाबला महत्वपूर्ण है। GT ने 12 मुकाबले खेले हैं और उसे 8 मैच में जीत मिली है। टीम को 4 मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा है। वहीं, KKR ने 4 मुकाबलों में जीत दर्ज की है। उसे 6 मैच में हार मिली है। आइए मुकाबले से जुड़ी जरूरी बातों पर नजर डालते हैं। KKR के खिलाफ GT का पलड़ा रहा है भारी IPL में दोनों टीमों के बीच 6 मुकाबले हुए हैं। इस दौरान GT को 4 मैच में जीत मिली है। KKR एक मैच में जीत हासिल कर पाई है। एक मैच में कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। इस संस्करण दोनों टीमों के बीच दूसरा मुकाबला खेला जाएगा। पहले मैच में GT को 39 रन से जीत मिली थी। आखिरी बार KKR ने IPL 2023 में GT को हराया था। उसे उस मैच में 3 विकेट से जीत मिली थी। ऐसी हो सकती है KKR की प्लेइंग इलेवन KKR को पिछले मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के खिलाफ 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था। एक बार फिर टीम के कप्तान अजिंक्य रहाणे का बल्ला कोई कमाल नहीं कर पाया था। ऐसे में उनसे इस मैच में एक कप्तानी पारी की उम्मीद होगी। संभावित एकादश: अजिंक्य रहाणे (कप्तान), फिन एलन, कैमरून ग्रीन, अंगकृष रघुवंशी (विकेटकीपर), रोवमैन पॉवेल, मनीष पांडे, रिंकू सिंह, सुनील नरेन, अनुकुल रॉय, वैभव अरोड़ा और कार्तिक त्यागी। इस संयोजन के साथ नजर आ सकती है GT GT कमाल के फॉर्म में चल रही है। उसने पिछले 5 मैचों में जीत दर्ज की है। ऐसे में वह अपनी प्लेइंग इलेवन में कोई बड़ा बदलाव नहीं करना चाहेगी। टीम को पिछले मैच में सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के खिलाफ 82 रनों की जीत मिली थी। टीम वही प्रदर्शन दोहराना चाहेगी। संभावित एकादश: शुभमन गिल (कप्तान), साई सुदर्शन, जोस बटलर (विकेटकीपर), वाशिंगटन सुंदर, जेसन होल्डर, निशांत सिंधु, राहुल तेवतिया, राशिद खान, अरशद खान, कागिसो रबाडा और मोहम्मद सिराज। ये हो सकते हैं इम्पैक्ट सब्स प्लेयर GT: प्रसिद्ध कृष्णा, साई किशोर, अनुज रावत, कुमार कुशाग्र और ग्लेन फिलिप्स। KKR: सौरभ दुबे, रमनदीप सिंह, तेजस्वी दहिया, नवदीप सैनी और टिम साइफर्ट। कैसा होगा पिच का मिजाज? ईडन गार्डन स्टेडियम में काली मिट्‌टी की पिच बनाई जाती है। ऐसे में यह बल्लेबाजों को काफी रास आती है। खेल की शुरुआत में यहां तेज गेंदबाजों को थोड़ी मदद मिलती है। उसके बाद स्पिनर्स हावी होते हैं। इस पिच पर अगर बल्लेबाज की निगाह एक बार जम गई तो आसानी से बड़े-बड़े शॉट्स लगते हैं। यहां की तेज आउटफील्ड भी बल्लेबाजों के पक्ष में जाती है। हाउस्टेट के मुताबिक, IPL में पहली पारी का औसत स्कोर 165 रन है। ऐसा रहेगा कोलकाता का मौसम एक्यूवेदर के अनुसार, 16 मई को कोलकाता का मौसम पूरी तरह साफ रहेगा। यहां अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री रहने का अनुमान है। बारिश की संभावना नहीं है। मुकाबला रात में है, ऐसे में खिलाड़ियों को गर्मी से परेशानी नहीं होगी। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर रहेगी नजरें रघुवंशी ने पिछले 10 मैचों में 32.11 की औसत और 134.41 की स्ट्राइक रेट से 289 रन बनाए हैं। रिंकू के बल्ले से पिछले 10 मैच में 147.95 की स्ट्राइक रेट से 253 रन निकले हैं। सलामी बल्लेबाज शुभमन ने पिछले 10 मैच में 42.8 की उम्दा औसत से 428 रन बनाए हैं। गेंदबाजी में KKR के कार्तिक ने पिछले 9 मैच में 15 विकेट चटकाए हैं। GT के रबाडा के नाम पिछले 10 मैच में 18 विकेट है। कब और कहां देखें मुकाबला? KKR और GT के बीच यह मुकाबला 16 मई को कोलकाता के ईडन गार्डन स्टेडियम में रात 7:30 बजे से खेला जाएगा। भारत में स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क और जियोहॉटस्टार ऐप पर इस मैच का सीधा प्रसारण देखा जा सकता है।  

सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा फैसला, शिक्षा समेत कई विभागों के सचिव बदले गए

 पटना बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने एक बार फिर बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 15 सीनियर अधिकारियों का शुक्रवार को एक साथ ट्रांसफर कर दिया गया। कई विभागों के सचिव और अपर मुख्य सचिव बदले गए हैं। वहीं, कुछ प्रमंडलों के आयुक्त को भी इधर-उधर किया गया है। बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल शिक्षा विभाग के नए सचिव होंगे। 1996 बैच के आईएएस सैंथिल कुमार को श्रम संसाधन विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। वह पिछड़ा और अति पिछड़ा कल्याण विभाग के भी अपर मुख्य सचिव के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। वह पहले गन्ना उद्योग विभाग के एसीएस थे। नई व्यवस्था में एचआर श्रीनिवास को पिछड़ा एवं अति पिछड़ा कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। कोसी और पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त का ट्रांसफर मुंगेर प्रमंडल के आयुक्त प्रेम सिंह मीणा को भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। कोसी (सहरसा) और पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार का पटना ट्रांसफर कर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग का प्रधान सचिव बना गया है। पंकज पाल पथ निर्माण विभाग के नए सचिव पीएचईडी विभाग के पंकज कुमार पाल सचिव को पथ निर्माण विभाग का सचिव बना दिया गया है। वहीं, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह को सूचना प्रावैधिकी विभाग में तबादला कर दिया गया है। उनके पास बेल्ट्रॉन के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार रहेगा धर्मेंद्र गन्ना उद्योग विभाग के सचिव सहकारिता विभाग के सचिव आईएएस धर्मेंद्र सिंह का गन्ना उद्योग विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया है। इसी तरह, दीपक आनंद को श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग से हटाकर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में तैनात किया गया है। विनोद सिंह गुंजियाल शिक्षा विभाग के नए सचिव, बी राजेंदर को हटाया बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल को शिक्षा विभाग का सचिव बना दिया गया है, वह विभाग के संपूर्ण प्रभार में रहेंगे। इसके अतिरिक्त वह खेल विभाग में भी सचिव का पद संभालेंगे। दोनों विभागों के वे अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। साथ ही, बी राजेंदर को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। वह सामान्य प्रशासन विभाग के एसीएस हैं। भागलपुर के प्रमंडलीय आयुक्त का ट्रांसफर भागलपुर के प्रमंडलीय आयुक्त अवनीश कुमार सिंह का पटना ट्रांसफर कर दिया गया है। वह खान एवं भूतत्व विभाग का सचिव बनाए गए हैं। दरभंगा के प्रमंडलीय आयुक्त हिमांशु कुमार राय को कोसी प्रमंडल का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा को विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। उनके पास जीविका का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। पूर्णिया के डीएम के पास प्रमंडलीय आयुक्त का भी प्रभार पूर्णिया के डीएम अंशुल कुमार को पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर को सीएम सचिवालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। भोजपुर और नालंदा के उप विकास आयुक्त का ट्रांसफर भोजपुर जिला परिषद की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी गुजंन सिंह को सीएम सचिवालय में संयुक्त सचिव की पोस्ट मिली है। नालंदा के उप विकास आयुक्त को पटना का उप विकास आयुक्त सह जिला परिषद का मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी नियुक्त किया गया है

यूपी में मेट्रो कनेक्टिविटी होगी मजबूत, 21 स्टेशनों से चलेंगी इलेक्ट्रिक सिटी बसें

लखनऊ यूपी के लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो यात्रियों की संख्या बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में शासन ने बड़े कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में हुई बैठक में कनेक्टिविटी और सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ (अंतिम मील संपर्क) को दूर करने के लिए लखनऊ में 29, कानपुर में 50 और आगरा में 27 नए ऑटो एवं टेम्पो सर्कुलर रूट तय किए गए हैं। इन रूटों पर नए स्टॉपेज भी बनाए जाएंगे ताकि यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में भटकना न पड़े। इसके अतिरिक्त, मेट्रो स्टेशनों के पास वाहनों को खड़ा करने की समस्या को हल करने के लिए लखनऊ में 71, कानपुर में 24 और आगरा में 19 नए पार्किंग स्थलों को अंतिम रूप दिया गया है, जिनके लिए नगर निगम जल्द ही निविदा प्रक्रिया शुरू करेगा। शटल बस सेवा और डिजिटल मोबिलिटी सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुविधा के लिए प्रमुख आवासीय कॉलोनियों और कार्यालयों को नजदीकी मेट्रो स्टेशनों से जोड़ने के लिए चरणबद्ध तरीके से शटल बस सेवाएं शुरू की जाएंगी। यूपीएमआरसी ऐप-आधारित सेवाओं जैसे यूटीयू मोबिलिटी के साथ-साथ ओला, उबर और रैपिडो के साथ भी समन्वय बढ़ा रहा है ताकि यात्रियों को घर से स्टेशन तक निर्बाध परिवहन मिले। पार्किंग और कनेक्टिविटी अनिवार्य बैठक में यूपीएमआरसी के एमडी सुशील कुमार ने स्पष्ट किया कि मेट्रो को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पार्किंग और कनेक्टिविटी अनिवार्य है। मण्डलायुक्त ने निर्देश दिए कि सार्वजनिक परिवहन के लाभों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए डिजिटल बोर्ड और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक अभियान चलाया जाए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की सख्त हिदायत दी है। इस पहल से न केवल ट्रैफिक जाम कम होगा, बल्कि प्रदूषण पर भी लगाम लगेगी। मेट्रो के 21 स्टेशनों के सामने से गुजरेंगी इलेक्ट्रिक सिटी बसें वहीं लखनऊ में निजी वाहनों का लोग कम इस्तेमाल करें। ताकि ईधन की बचत की जा सकें। इसी मकसद से मेट्रो के 21 स्टेशनों को ई सिटी बसों से लिंक किया जाएगा। ताकि लखनऊ शहर में ज्यादा से ज्यादा लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर कर सकें, इसके लिए मेट्रो के 21 स्टेशनों से एसी इलेक्ट्रिक सिटी बसों को संचालित किया जाएगा। यानी सिटी बसों का संचालन ऐसे रूटों पर किया जाए कि हर मेट्रो स्टेशन के सामने से सिटी बसों का आवागमन हो, जिससे दैनिक यात्री निजी वाहनों को छोड़कर सिटी बसें या मेट्रो से सफर कर सकें।

कुचाई शिव मंदिर में हठभक्ति का अद्भुत नजारा, महिलाओं समेत सैकड़ों भक्तों ने आग पर चलकर निभाई आस्था

 सरायकेला वैशाख महीने की तपती गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर में शुक्रवार को आस्था, तपस्या और हठभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला. वैशाख संक्रांति के अवसर पर सैकड़ों शिवभक्तों ने दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलकर अपनी श्रद्धा और भक्ति का परिचय दिया. मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहा और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना में लीन दिखे. मन्नत पूरी होने पर अंगारों पर चले श्रद्धालु वैशाख संक्रांति के मौके पर शिवभक्तों ने गुरुवार से ही उपवास और व्रत रखकर पूजा-अर्चना शुरू कर दी थी. भक्तों ने मंदिर परिसर में भैरवनाथ की विशेष पूजा की और भगवान शिव से मांगी गई मन्नत पूरी होने की खुशी में जलते अंगारों पर चलकर अपनी हठभक्ति का प्रदर्शन किया. भक्तों का मानना है कि शरीर को कष्ट देकर वे अपने आराध्य देव महादेव के प्रति समर्पण और विश्वास व्यक्त करते हैं. अंगारों पर चलते समय श्रद्धालुओं के चेहरे पर न डर दिखाई दिया और न ही दर्द का कोई भाव. ढोल और नगाड़ों की थाप के बीच भक्त पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आग पर चलते रहे. महिलाओं ने भी निभाई आस्था की परंपरा हठभक्ति की इस परंपरा में महिलाओं की भागीदारी भी काफी बड़ी रही. माथे पर जल से भरा कलश लेकर महिलाएं स्थानीय जलाशयों से मंदिर परिसर तक पहुंचीं. इसके बाद उन्होंने सबसे पहले जलते अंगारों पर चलकर अपनी आस्था प्रकट की और फिर मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया. ढोल-नगाड़ों की धुन पर महिलाएं भी पूरे उत्साह के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हुईं. बताया गया कि इस वर्ष सौ से अधिक महिलाओं ने अंगारों पर चलकर अपनी मन्नत पूरी होने की खुशी जाहिर की. श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास ही उन्हें यह शक्ति प्रदान करता है. हजारों श्रद्धालुओं ने देखा भक्ति का अनोखा दृश्य कुचाई शिव मंदिर में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे. मंदिर परिसर और आसपास का इलाका सुबह से ही भक्तिमय माहौल में डूबा रहा. श्रद्धालु पूरे आयोजन के दौरान भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाते रहे. इस अवसर पर पुजारी गोपाल चंद्र तिवारी ने विधिवत पूजा-अर्चना कराई. वहीं गोपी राम सोय, दिनेश महतो, विष्णु महतो, लाल बिहारी महतो, लुदरी हेंब्रम, रेखा दास, विष्णु सोय, गोपी सोय, अक्षय महतो और सामु सोय समेत दर्जनों भोक्ताओं ने आग पर चलकर हठभक्ति की परंपरा निभाई. 209 वर्षों से निभाई जा रही है परंपरा कुचाई स्थित शिव मंदिर में आग पर चलने की यह परंपरा करीब 209 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है. बताया जाता है कि 13 मई 1817 में मंदिर की स्थापना के बाद से हर वर्ष वैशाख संक्रांति के अवसर पर यह धार्मिक आयोजन किया जाता है. स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक है. पीढ़ी दर पीढ़ी लोग इस अनुष्ठान में शामिल होकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते आ रहे हैं. शरीर को कष्ट देकर मिलती है आत्मिक शांति हठभक्ति में शामिल भक्तों का कहना है कि शरीर को कष्ट देकर उन्हें मानसिक और आत्मिक शांति मिलती है. उनका मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया भगवान शिव को समर्पित है और उनकी कृपा से ही भक्त बिना किसी नुकसान के आग पर चल पाते हैं. भोक्ताओं के अनुसार वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है, लेकिन आज तक किसी भक्त को आग पर चलने से कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ. श्रद्धालुओं का कहना है कि न तो किसी को गंभीर जलन की समस्या हुई और न ही किसी को इलाज की जरूरत पड़ी. भक्त इसे भगवान की महिमा और आस्था की शक्ति मानते हैं. श्रद्धालुओं ने साझा किया अनुभव श्रद्धालु सुजन सिंह सोय ने बताया कि वैशाख संक्रांति के अवसर पर कुचाई शिव मंदिर में पिछले 209 वर्षों से आग पर चलने की परंपरा निभाई जा रही है. उन्होंने कहा कि हर वर्ष सैकड़ों श्रद्धालु इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेते हैं और भगवान शिव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. वहीं भोक्ता दिनेश महतो ने बताया कि वे पिछले 18 वर्षों से इस परंपरा का हिस्सा बन रहे हैं. उन्होंने कहा कि भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था ही उन्हें हर वर्ष अंगारों पर चलने की शक्ति देती है. श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह अनुष्ठान उनके जीवन में आत्मिक संतोष और शांति प्रदान करता है.