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बस्तर की पारंपरिक शिल्पकला को मिली बड़ी पहचान, अमित शाह-योगी को दिए गए विशेष उपहार

कोंडागांव. बस्तर की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की पहल कोंडागांव में देखने को मिली. गृहमंत्री अमित शाह को भगवान गणेश की विशेष शिल्पकृति भेंट कर स्थानीय कला का सम्मान किया गया. वहीं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मां दंतेश्वरी का चित्र स्मृति चिन्ह के रूप में प्रदान किया गया. यह शिल्पकृति स्थानीय मूर्तिकारों की मेहनत और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जा रही है. बताया गया कि कलाकार सुशील सखूजा ने इस कृति को तैयार करवाया, जबकि इसे मूर्त रूप देने में मदन का योगदान रहा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल कलाकृति नहीं, बल्कि बस्तर की लोक परंपराओं का प्रतिनिधित्व है. राष्ट्रीय नेतृत्व तक बस्तर की कला पहुंचने से स्थानीय कलाकारों में उत्साह देखा जा रहा है. ऐसी पहल से हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को नया बाजार मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है. कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, किरण सिंह देव और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. बस्तर की कला लंबे समय से अपनी अलग पहचान रखती है. अब इसे राष्ट्रीय मंच मिलने से स्थानीय शिल्पकारों को प्रोत्साहन और रोजगार की संभावनाएं बढ़ने लगी हैं. सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाली इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है.

1 से 15 जून तक होंगे कर्मचारियों-अधिकारियों के तबादले, MP कैबिनेट का बड़ा फैसला

भोपाल  मध्य प्रदेश कैबिनेट बैठक में मोहन सरकार ने ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर बड़ा निर्णय लिया है. इस बैठक में राज्य सरकार की तबादला नीति-2026 को मंजूरी मिल गई है. प्रदेश में राज्य और जिला स्तर पर कर्मचारियों और अधिकारियों को 1 जून से 15 जून तक तबादले किए जाएंगे. सामान्य प्रशासन विभाग (ने ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा था. सीएम और मंत्रियों की सहमति के बाद नीति को अंतिम रूप दिया गया. बता दें कि प्रदेश के कर्मचारी और अधिकारी तबादला नीति को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।  तबादला नीति में क्या खास है? नई तबादला नीति के तहत प्रत्येक संवर्ग में अधिकतम 20% अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे. इससे बड़े पैमाने पर मनमाने तबादलों पर रोक लगेगी और प्रक्रिया को नियंत्रित रखा जाएगा. जिलों के भीतर होने वाले तबादलों के लिए प्रभारी मंत्री का अनुमोदन अनिवार्य किया गया है. इस नीति के तहत प्रथम श्रेणी (Class‑I) अधिकारियों के तबादले मुख्यमंत्री के अनुमोदन से ही किए जा सकेंगे. वहीं अन्य संवर्गों के अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों को संबंधित विभागीय मंत्री अनुमोदित कर सकेंगे. यह व्यवस्था वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण में अतिरिक्त सतर्कता सुनिश्चित करेगी. इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी, जो एक ही स्थान पर तीन वर्षों से अधिक समय से पदस्थ हैं।  कैबिनेट मंत्री चेतन्य कश्यप ने दी कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी. वहीं कैबिनेट पीएम मोदी को नार्वे और स्वीडन के दिए गए सम्मान के लिए शुभकामनाएं दी।  सरस्वती लोक बनाने की तैयारी धार जिले के भोजशाला परिसर को लेकर उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि धारा के भोजशाला मंदिर को वागदेवीकी प्रतिमा को वापस लाने का प्रयास केंद्र सरकार के माध्यम से की जाएगी. साथ ही यहां सरस्वती लोक बनाने पर भी विचार कर रहे हैं. सीएम ने कहा कि करीब 750 वर्ष पुराने इस धार्मिक विवाद पर न्यायालय ने सकारात्मक और शांतिपूर्ण निर्णय दिया है और राज्य सरकार सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए फैसले का पालन सुनिश्चित करेगी।  उन्होंने बताया कि बीते दिन सीएम जगदलपुर गए थे, जहां केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बैठक रखी थी. यह बैठक बस्तर में हुई थी. केंद्रीय गृहमंत्री ने एक प्रमुख बिंदु रेखांकित किया हैं. उन्होंने कहा कि कभी नक्सल प्रभावित रहे जिलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नए योजना बनाने की बात कही हैं।  कैबिनेट बैठक में ई-रिक्शा से पहुंचे मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल-ईरान युद्ध के कारण बने वैश्विक हालात को देखते हुए पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन का संयमित उपयोग करने की अपील की थी। पीएम की इस अपील को अनदेखा कर मध्य प्रदेश के नवनियुक्त निगम, मंडल और बोर्ड के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों ने वाहन रैलियां निकालीं, जिसके बाद पूरे देश में एमपी बीजेपी नेताओं की फजीहत हुई। मामले में दिल्ली से केंद्रीय नेतृत्व की फटकार पड़ी तो एमपी बीजेपी ने दो नेताओं पर एक्शन लिया। साथ ही कई नेताओं को हिदायत भी दी गई। वाहन रैलियों को लेकर आलोचना होने के बाद अब संगठन ने सख्ती दिखाई है। इसके बाद मंत्री, विधायक और सांसद भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते नजर आ रहे हैं। मंत्रालय ई-रिक्शा से पहुंचे 2 मंत्री बुधवार को मंत्रालय में हो रही कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए मंत्री गौतम टेटवाल और नारायण सिंह पवार ई-रिक्शा के जरिए पहुंचे। भोपाल के चार इमली में पास-पास रहने वाले दोनों मंत्री एक ही ई-रिक्शा से करीब ढाई किलोमीटर का सफर तय कर मंत्रालय पहुंचे। मंत्रियों के पीछे दूसरे ई-रिक्शा में उनके स्टाफ के लोग पहुंचे, लेकिन जिनके पास पास नहीं थे, उन्हें सुरक्षा कर्मियों ने अंदर नहीं जाने दिया। मंत्रियों के बाद उनके स्टाफ के लोग अलग-अलग गाड़ियों से थोड़ी देर के अंतराल पर मंत्रालय पहुंचे। ये हैं वाहन रैलियां निकालने वाले नेता     सौभाग्य सिंह ठाकुर (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम): पदभार ग्रहण करने के दौरान उज्जैन से भोपाल तक 200 से 700 गाड़ियों का विशाल काफिला निकाला। वीडियो वायरल होने के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने सख्त एक्शन लिया। कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। साथ ही जांच पूरी होने तक सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए।     सज्जन सिंह यादव (जिलाध्यक्ष, किसान मोर्चा भिंड): नियुक्ति के बाद लग्जरी कारों की विशाल वाहन रैली निकालकर शक्ति प्रदर्शन किया था। संगठन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल प्रभाव से उनकी नियुक्ति रद्द कर दी।     वीरेंद्र गोयल (अध्यक्ष, सिंगरौली विकास प्राधिकरण): जब पदभार ग्रहण करने पहुंचे, तब उनके समर्थकों ने भी विशाल वाहन रैली निकाली थी। इस रैली के कारण सिंगरौली शहर की सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम लगा था। आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा।     पंकज जोशी (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड): नियुक्ति का जश्न मनाने के लिए विशाल वाहन रैली निकाली थी। काफिले में करीब 100 से ज्यादा गाड़ियां शामिल थीं, जिसे पीएम की ईंधन बचाने की अपील का उल्लंघन माना गया।     सत्येंद्र भूषण सिंह (अध्यक्ष, मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम): नियुक्ति के बाद भोपाल के अवधपुरी स्थित घर से बीजेपी प्रदेश कार्यालय तक ई-रिक्शा से पहुंचे। इसके बाद न्यू मार्केट स्थित कार्यालय में पदभार ग्रहण करने भी ई-रिक्शा से ही पहुंचे। हालांकि भाजपा कार्यालय के बाहर उनके समर्थकों की गाड़ियों की लंबी लाइन नजर आई थी।     राकेश सिंह जादौन (उपाध्यक्ष, मध्य प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड): यह भी प्रदेश बीजेपी कार्यालय पहुंचने के लिए ई-रिक्शा का उपयोग करते नजर आए। हालांकि विदिशा से भोपाल तक वे गाड़ियों का काफिला लेकर पहुंचे थे। अब ई-व्हीकल्स और बस से सफर कर रहे नेता प्रद्युम्न सिंह तोमर (ऊर्जा मंत्री): पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर दिखाते हुए उन्होंने अपनी लग्जरी गाड़ी छोड़ दी और ई-स्कूटी (E-Scooter) से मंत्रालय पहुंचे। सीएम हाउस में सत्ता और संगठन की वन-टू-वन मीटिंग में शामिल होने भी वे ई-स्कूटी से ही पहुंचे थे। गौतम टेटवाल (तकनीकी शिक्षा मंत्री): तकनीकी शिक्षा मंत्री गौतम टेटवाल अपने विधानसभा क्षेत्र में सारंगपुर से पचोर तक बस से सफर कर पहुंचे थे। इसके दो दिन बाद वे प्रभारी जिले बड़वानी में भी कलेक्टर जयति सिंह और अधिकारियों के … Read more

शौर्य स्मारक से निकली रैली, ट्विशा मामले में कार्रवाई को लेकर पूर्व सैन्य अधिकारियों का प्रदर्शन

भोपाल  राजधानी भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर बुधवार को पूर्व सेना अधिकारी और जवान सड़क पर उतर आए। वर्दी वेलफेयर सोसाइटी के नेतृत्व में निकाली गई रैली में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक शामिल हुए और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। शौर्य स्मारक से शुरू हुई रैली रैली की शुरुआत शौर्य स्मारक से की गई, जहां पूर्व सैनिकों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद मार्च करते हुए प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री निवास, पुलिस मुख्यालय और राजभवन की ओर बढ़ गए, जहां ज्ञापन सौंपने की तैयारी की गई। पुलिस जांच पर उठे सवाल मंगलवार को ट्विशा शर्मा के पिता, परिजनों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे। उनका आरोप है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की जा रही। इसी के विरोध में पूर्व सैनिकों ने बुधवार को प्रदर्शन कर सरकार से न्याय की मांग की। सड़ने लगा है ट्विशा का शव', डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन में भी बड़ा खुलासा ट्विशा का शर्मा का शव 13 मई से भोपाल एम्स में पड़ा हुआ है। परिजन दोबारा पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं। ऐसे में भोपाल पुलिस की ओर से ट्विशा के परिजनों को एक चिट्ठी लिखी गई है, जिसमें कहा गया है कि ट्विशा शर्मा का शव सड़ने लगा है। शव को ज्यादा दिन तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था भोपाल एम्स में नहीं है। परिजनों को भोपाल पुलिस ने लिखी चिट्ठी दरअसल, ट्विशा शर्मा के परिजन ससुराल के लोगों पर लगातार हत्या के आरोप लगा रहे हैं। साथ ही अंतिम संस्कार करने से मना कर रहे हैं। इस बीच भोपाल पुलिस ने ट्विशा शर्मा के माता-पिता को एक चिट्ठी लिखी है। उसमें कहा गया है कि ट्विशा शर्मा का शव लंबे समय से मोर्चरी में रखा है। उसे सड़ने की संभावना ज्यादा है। ऐसे में आपसे अनुरोध किया जाता है कि कृप्या शव को लेने की व्यवस्था करें। -80 डिग्री तापमान की है जरूरत भोपाल पुलिस की चिट्ठी में इस बात का जिक्र है कि अभी शव को भोपाल एम्स में रखा गया है। भोपाल एम्स की मोर्चरी में -4 डिग्री सेल्सियस तापमान है। शव को सड़ने से बचाने के लिए -80 डिग्री सेल्सियस पर रखना जरूरी है। यह सुविधा भोपाल एम्स में उपलब्ध नहीं है। पुलिस के अनुसार ट्विशा शर्मा का पहला पोस्टमार्टम 13 मई को पूरा हो गया था। ऐसे में पुलिस ने कहा है कि हमें दोबारा पोस्टमार्टम पर कोई आपत्ति नहीं है। पिता कर रहे हैं दूसरी जगह पर पोस्टमार्टम की मांग वहीं, ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा लगातार दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बुधवार को भी मीडिया से बातचीत में कहा है कि सभी फॉरेंसिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ट्विशा के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार शांति और गरिमा के साथ किया जा सकेगा। ये उठ रहे हैं सवाल     पोस्टमार्टम के दौरान भोपाल पुलिस के चूक भी हुई है     पीएम के दौरान पुलिस ने वो बेल्ट डॉक्टरों के सामने नहीं पेशी की, जिससे ट्विशा ने खुदकुशी की     मेडिकल टीम महिला की गर्दन पर मिले लिगेचर निशानों की जांच साइंटीफिक तरीके से नहीं कर पाई     ट्विशा के परिजनों का कहना है कि इससे जांच प्रभावित हुई उलझता जा रहा है मामला इसी लापरवाही की वजह से ट्विशा शर्मा का केस उलझता जा रहा है। उसकी गर्दन पर दो सामानांतर निशान मिले हैं। इससे मामला उलझता दिख रहा है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज में भी टाइम मिसमैच है। ससुराल वालों का कहना है कि उसने रात 10 बजे के बाद फांसी लगाई है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज में टाइम 7 बजकर 20 मिनट दिख रही है, जिस वक्त ट्विशा छत पर जा रही थी। साइकियाट्रिक ट्रीटमेंट पर थी ट्विशा वहीं, ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह ने दावा किया था कि उसका इलाज साइकियाट्रिक के पास चल रहा है। डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन से यह पता चला है कि ट्विशा शर्मा नींद और डिप्रेशन की दवा ले ही थी। 28 अप्रैल से 6 मई तक उसका इलाज चला है। वह एडजसमेंट डिसऑर्डर की शिकार थी। सुसाइड से पहले भी वह डॉक्टर से संपर्क की थी।  

लार पुलिस ने शराब तस्करी पर कसा शिकंजा, बिहार बॉर्डर से लाखों की खेप बरामद

 देवरिया  वाहन चेकिंग के दौरान थाना लार पुलिस ने एक पिकअप वाहन से 55 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब रायल स्टैग बरामद की है। बरामद शराब की अनुमानित कीमत लगभग 5,14,800 रुपये है। पुलिस ने एक तस्कर को गिरफ्तार किया है और वाहन पर लगे फर्जी नंबर प्लेट भी बरामद किया है। पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की। 18 मई के अंक में दैनिक जागरण के अंक में पेज दो पर शराब तस्करों का गिरोह फिर सक्रिय, पहुंचने लगी हरियाणा से शराब शीर्षक से खबर को छह कालम में प्रकाशित किया था। जिसे एसपी अभिजीत आर शंकर ने गंभीरता से लिया और थानाध्यक्षों को निर्देश दिए। लार पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर मेहरौना चेक पोस्ट से बिहार ले जाई जा रही पिकअप को रोका गया। वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट यूपी15 एफटी 3915 लगी थी। तलाशी में 40 पेटी रायल स्टैग, प्रत्येक बोतल 375 एमएल, कुल 960 बोतल 360 लीटर और 15 पेटी रायल स्टैग, प्रत्येक बोतल 180 एमएल, कुल 720 बोतल शराब बरामद हुई। गिरफ्तार तस्कर निशार खान पुत्र अयूब खान, उम्र करीब 32 वर्ष, निवासी मोदीपुरम पल्लवपुरम फेज-दो, थाना पल्लवपुरम, जनपद मेरठ के विरुद्ध थाना लार पर आबकारी अधिनियम व अन्य धाराओं के तहत पंजीकृत कर कार्रवाई में जुटी रही। अपर पुलिस अधीक्षक आनंद कुमार पांडेय ने बताया कि शराब तस्करी रोकने की दिशा में पुलिस लगातार कदम उठा रही है। शराब तस्करी में संलिप्त लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। जिले के सभी पुलिस अधिकारियों व थानाध्यक्षों को अलर्ट किया गया है।  

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस नेता से मिलने से किया इनकार, सियासी गलियारों में बढ़ी चर्चा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं सियासी गलियारों में अलग अलग तरह की हलचलें तेज हो रही हैं। एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो दिनी दौरे पर यूपी पहुंचे तो दूसरी तरफ उनके खुछ खास लोग अचानक बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के लखनऊ स्थित आवास पर मिलने पहुंच गए। चर्चा है कि ये नेता कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का कोई बेहद खास और गोपनीय संदेश लेकर मुलाकात करने पहुंचे थे। हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात की कोशिश पर उस समय पानी फिर गया, जब बसपा प्रमुख की ओर से नेताओं को अंदर आने की अनुमति नहीं मिली। पहले से अप्वाइंटमेंट न होने का हवाला देते हुए कांग्रेस नेताओं को गेट से ही वापस लौटा दिया गया। मायावती के आवास पर पहुंचने वाले नेताओं में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और बाराबंकी से कांग्रेस के युवा सांसद व अनुसूचित विभाग के प्रदेश अध्यक्ष तनुज पूनिया के साथ अन्य प्रमुख पदाधिकारी शामिल थे। गेट से लौटने के बाद दी सफाई भले ही सुरक्षाकर्मियों ने समय न होने की बात कहकर कांग्रेसी नेताओं को अंदर नहीं जाने दिया, लेकिन राजनीतिक पंडित इसे मायावती के कड़े स्टैंड के रूप में देख रहे हैं। वहीं, गेट से लौटने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल गौतम ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए लिखा कि वे एक सामाजिक कार्यक्रम के सिलसिले में लखनऊ आए थे और शिष्टाचार के नाते बहनजी का कुशलक्षेम जानने उनके आवास गए थे। मायावती की तारीफ करते हुए यह भी कहा कि बहन जी के शासनकाल में उनकी उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता और निर्णायक नेतृत्व को सभी वर्गों ने सराहा एवं स्वीकार किया है। यही कारण है कि उनके प्रति विशेष सम्मान और स्नेह का भाव सदैव बना रहता है। समय न मिलने के कारण उन्होंने दोबारा समय का अनुरोध किया है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही मुलाकात होगी। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के यह नेता एक विशेष रणनीति के तहत मायावती से मिलने पहुंचे थे। राहुल की यूपी में मौजूदगी के दौरान कांग्रेस नेताओं का बसपा सुप्रीमो के घर पहुंचना कई चर्चाओं को जन्म दे रहा है। इस मुलाकात की कोशिश को आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की नई कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस चाहती है भाजपा के खिलाफ सभी दल साथ आएं इस अचानक हुई कोशिश और कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठने के बाद पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने भारत समाचार से बातचीत में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, "कांग्रेस पूरी गंभीरता के साथ चाहती है कि देश और प्रदेश के हित में सभी राजनीतिक दल एक साथ आएं। यह विपक्ष और गठबंधन की ही ताकत थी कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को उत्तर प्रदेश के भीतर कड़े मुकाबले में रोका गया।" उन्होंने आगे कहा कि यूपी में इस समय बड़ा राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है। देश में केवल कांग्रेस ही भाजपा के खिलाफ मजबूती से लड़ सकती है। राजनीतिक दलों के नेताओं का एक-दूसरे से मिलना बेहद सामान्य प्रक्रिया है। कांग्रेस ने नेताओं के कदम से खींचा हाथ वहीं, कांग्रेस अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और कांग्रेस सांसद व कांग्रेस अनुसूचित विभाग के प्रदेश अध्यक्ष तनुज पुनिया के बसपा सुप्रीमो मायावती के घर पहुंचने के मामले को लेकर राजनीति गरमा गई है। हालांकि कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय का कहना है कि कांग्रेस नेताओं का मायावती के आवास पर जाना उनका अपना व्यक्तिगत निर्णय था। पार्टी का इससे कोई सरोकार नहीं है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी नेताओं का व्यक्तिगत मामला बताया।

गर्मी से भगवान को राहत! हिसार के मंदिरों में लगे एसी-कूलर, आइसक्रीम और ठंडे पेयों का भोग

हिसार. शहर में लगातार बढ़ रही गर्मी का असर अब मंदिरों की दैनिक सेवा-पूजा और व्यवस्थाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए शहर के विभिन्न मंदिरों में भगवान की सेवा बदली गई है। कहीं देवी-देवताओं को ठंडे पेय और शीतल भोग अर्पित किए जा रहे हैं तो कहीं गर्भगृह में एसी और कूलर की व्यवस्था कर ठंडा रखा जा रहा है। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसरों में ठंडे पानी की छबील और वाटर कूलर लगाए गये हैं। सेक्टर 9-11 स्थित श्री शिव मंदिर में पुजारियों और श्रद्धालुओं द्वारा देवी-देवताओं को ठंडे पेयजल का भोग लगाया गया। मंदिर में श्रद्धालुओं ने भीषण गर्मी से राहत की कामना करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिरों में अब शिकंजी, ठंडाई, रसमलाई, मठा, दूध, फल-फ्रूट, खीर और आइसक्रीम जैसे शीतल व्यंजनों का विशेष भोग लगाया जा रहा है। श्री देवी भवन मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित सुरेश ने बताया कि गर्मी के मौसम को देखते हुए गर्भगृह में एयर कंडीशनर लगाए गए हैं, ताकि भगवान की प्रतिमाओं के आसपास का वातावरण शीतल बना रहे। उन्होंने बताया कि देवी-देवताओं को अब सूती और हल्के वस्त्र धारण कराए गये हैं। इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए भी मंदिर परिसर में ठंडे पानी की व्यवस्था की गई है। गर्मी के अनुरूप विशेष व्यवस्था: त्रिलोक सेक्टर 16-17 स्थित श्री श्याम मंदिर में भी गर्मी के अनुरूप विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर के उपप्रधान त्रिलोक बंसल ने बताया कि श्री श्याम बाबा को ठंडाई, फल और हल्के भोग अर्पित किए जा रहे हैं। मंदिर में आरती के समय में भी बदलाव किया गया है ताकि श्रद्धालु सुबह और शाम के अपेक्षाकृत ठंडे समय में दर्शन कर सकें। शहर के एमसी कालोनी शिव मंदिर, राधा-कृष्ण बड़ा मंदिर, जवाहर नगर हनुमान मंदिर, पटेल नगर शिव मंदिर, मोती बाजार हनुमान मंदिर और बुधला संत हनुमान मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों पर भी विशेष शीतल भोग लगाए जा रहे हैं। मंदिर पुजारी रविकांत शर्मा ने बताया कि गर्मी के मौसम में भगवान की सेवा भी ऋतु के अनुसार की जाती है। सर्दियों में जहां गरम भोग और ऊनी वस्त्र अर्पित किए जाते हैं, वहीं गर्मियों में ठंडे भोग और हल्के वस्त्रों का प्रयोग किया जाता है।

पीडब्ल्यूडी सचिव ने केशकाल घाटी फोरलेन प्रोजेक्ट का लिया जायजा, निर्माण कार्य तेज करने के आदेश

केशकाल. रायपुर-जगदलपुर मार्ग के बहुप्रतीक्षित केशकाल घाटी फोरलेन बायपास को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने निर्माण स्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए. उन्होंने निर्माण एजेंसी और विभागीय अधिकारियों के साथ बायपास के दोनों छोरों का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान शेष पेड़ों की कटाई जल्द पूरी करने के निर्देश वन विभाग को दिए गए. साथ ही लंबित मुआवजा प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने पर भी जोर दिया गया. अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना बस्तर और छत्तीसगढ़ की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. करीब 308 करोड़ रुपये की लागत से 11.38 किलोमीटर लंबा बायपास तैयार किया जा रहा है. परियोजना में दो बड़े और दो मध्यम पुलों का निर्माण भी शामिल है.घाटी क्षेत्र में लगातार लगने वाले जाम और दुर्घटनाओं को कम करने में यह बायपास अहम माना जा रहा है. सरकार ने इसे प्राथमिकता वाली परियोजना बताते हुए जल्द निर्माण पूरा करने के संकेत दिए हैं. निरीक्षण के दौरान प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे. अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह परियोजना जल्द धरातल पर दिखाई देगी.

ऑनलाइन-ऑफलाइन शॉपिंग पर गहरी पड़ताल, डॉ. शिवानी सोनी को मिली डॉक्टरेट की उपाधि

बेटियों के जज्बे को मिली शोध की 'डिग्री': डॉ. शिवानी सोनी ने हासिल की PhD की उपाधि  ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन शॉपिंग उपभोक्ता के मन की गहराई नापकर मिली सफलता  भोपाल  राजधानी के शैक्षणिक गलियारे में आज एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया। अपनी विद्वत्ता और कड़े परिश्रम के दम पर डॉ. (श्रीमती) शिवानी यशोधर सोनी ने वाणिज्य के क्षेत्र में सफलता का परचम लहराया है। बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के वाणिज्य विभाग ने उनके उत्कृष्ट शोध कार्य को स्वीकार करते हुए उन्हें 'डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी' (PhD) की मानद उपाधि से विभूषित किया है। बाजार के बदलते मिजाज पर की 'पीएचडी' डॉ. शिवानी ने आज के दौर के सबसे प्रासंगिक विषय "ए स्टडी ऑफ फैक्टर्स अफेक्टिंग कंज्यूमर बिहेवियर एंड इट्स सेटिस्फेक्शन टूवर्ड्स ऑनलाइन एंड ऑफलाइन शॉपिंग" पर अपना शोध प्रबंध प्रस्तुत किया। उन्होंने बारीकी से इस बात का विश्लेषण किया कि बदलते दौर में ग्राहक कब मोबाइल की स्क्रीन पर 'क्लिक' करना पसंद करता है और कब बाजार की गलियों में जाकर सामान की परख करना चाहता है। मार्गदर्शन का मिला साथ: डॉ. शिवानी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने मार्गदर्शक डॉ. बी.एम.एस. भदौरिया (विभागाध्यक्ष, शासकीय एम.एल.बी. कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल) को दिया है, जिनके कुशल निर्देशन में यह जटिल शोध कार्य पूर्ण हुआ। संस्कार और शिक्षा का संगम गौरतलब है कि डॉ. शिवानी सोनी शहर के प्रतिष्ठित और संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वह वरिष्ठ शिक्षाविद और समाजसेवी डॉ. एम.एल. सोनी एवं श्रीमती गीता सोनी की पुत्रवधू हैं। परिवार के शैक्षणिक परिवेश ने उनकी इस उपलब्धि में नींव के पत्थर की तरह काम किया है। बधाइयों का तांता: समूचे सोनी परिवार में जश्न डॉ. शिवानी की इस सफलता की खबर लगते ही उनके शुभचिंतकों और परिजनों में हर्ष की लहर दौड़ गई। पति यशोधर सोनी सहित परिवार के सदस्यों ने इसे उनकी बरसों की तपस्या का प्रतिफल बताया। सफलता के इस विशेष अवसर पर सात समंदर पार से भी दुआएं पहुंचीं। शुभकामनाएं देने वालों में प्रमुख नाम: ऑस्ट्रेलिया से: डॉ. ऋतु वर्मा एवं रोहित वर्मा (मेलबर्न)। चिकित्सा एवं शिक्षा जगत: डॉ. ऋचा सोनी और डॉ. सिद्धार्थ सागर। नन्हे सितारे: काव्या, गर्वित, शिवांश और श्रीतिक। संस्थान: होटल दयालश्री पैराडाइज, होटल गीतकाव्या इन, और हिंद होप मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, भोपाल। इसके साथ ही सोनी परिवार (लहार-भिंड) और भोपाल के समस्त मित्रों एवं परिजनों ने डॉ. शिवानी को इस गौरवशाली उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। क्यों खास है यह शोध? (बॉक्स आइटम) आज के दौर में जहां रिटेल मार्केट और ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच जंग छिड़ी है, डॉ. शिवानी का यह शोध व्यापारिक जगत के लिए एक दिशा-निर्देश साबित हो सकता है। ग्राहकों की संतुष्टि के पैमानों को जिस तरह से उन्होंने रेखांकित किया है, वह आने वाले समय में मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनाने वालों के लिए भी उपयोगी होगा। संपादकीय नोट: डॉ. शिवानी सोनी की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहती हैं।

नवा रायपुर अटल नगर बन रहा नए भारत का स्मार्ट चेहरा, विकास और निवेश से बदल रही तस्वीर

नवा रायपुर अटल नगर: विकास, निवेश और आधुनिक भारत का उभरता स्मार्ट शहर नवा रायपुर अटल नगर: उपलब्धियों से नई ऊँचाइयों की ओर रायपुर छत्तीसगढ़ की आधुनिक और योजनाबद्ध राजधानी नवा रायपुर अटल नगर आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे स्मार्ट शहरों में शामिल है। सुव्यवस्थित अधोसंरचना, हरित विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, पर्यटन और महिला सशक्तिकरण जैसे विविध क्षेत्रों में हुई उल्लेखनीय प्रगति ने नवा रायपुर को भविष्य के भारत का आदर्श शहरी मॉडल बना दिया है। यह केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार और समावेशी विकास का उभरता हुआ केंद्र है। स्मार्ट अधोसंरचना और शहरी सेवाओं में बड़ी उपलब्धियाँ नवा रायपुर अटल नगर में 52 एमएलडी क्षमता की पाइपलाइन और अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र के माध्यम से पूरे शहर में दीर्घकालिक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इससे वर्तमान आबादी के साथ-साथ नए विकसित हो रहे सेक्टरों की आवश्यकताओं की भी पूर्ति हो सकेगी। वर्षाजल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए 10.66 किलोमीटर लंबी बायोस्वेल्स, रिचार्ज पिट्स और प्राकृतिक जल निकासी तंत्र विकसित किए गए हैं। इन पहलों ने न केवल जल संरक्षण को मजबूत किया है, बल्कि शहर के पर्यावरणीय संतुलन को भी सुदृढ़ किया है। परिवहन और कनेक्टिविटी को मिला नया आयाम रायपुर-राजिम रेल सेवा का नवा रायपुर के सीबीडी स्टेशन तक विस्तार शहर की कनेक्टिविटी को नई गति प्रदान कर रहा है। महिलाओं की सुरक्षित आवाजाही और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए पिंक ई-रिक्शा सेवा शुरू की गई है। साथ ही, ई-बस संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है और सेवा प्रारंभ होने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह पहल हरित और टिकाऊ शहरी परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शिक्षा के क्षेत्र में विकसित हो रहा एडूसिटी नवा रायपुर के 13 सहकारी विद्यालयों का उन्नयन किया गया है और दो उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया गया है। लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में एडूसिटी का विकास किया जा रहा है, जहाँ राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों जैसे National Institute of Fashion Technology (NIFT), National Institute of Electronics and Information Technology (NIELIT) और National Forensic Sciences University (NFSU), Narsee Monjee को भूमि आवंटित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त सेक्टर-7 में 17 एकड़ भूमि पर आवासीय विद्यालय की स्थापना प्रस्तावित है। मेडिसिटी: स्वास्थ्य सेवाओं का नया केंद्र मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में विश्वस्तरीय मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यहाँ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, डायग्नोस्टिक सेंटर, धर्मशाला, होटल और आवासीय सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। इस परियोजना के तहत Bombay Hospital को 300 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। साथ ही, लगभग 50 एकड़ भूमि पर आवासीय विकास हेतु निजी निवेशकों को भूखंड आवंटित किए गए हैं, जिनमें लगभग 350 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। महिला सशक्तिकरण और श्रमिक कल्याण कार्यरत महिलाओं के लिए 1,000 क्षमता वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण 109 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह परियोजना महिला सुरक्षा, सुविधा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी। इसके अतिरिक्त, प्रवासी श्रमिकों के लिए 1,100 क्षमता वाला सर्वसुविधायुक्त श्रमिक आवास भवन 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। पर्यटन, संस्कृति और MICE गंतव्य के रूप में उभार नवा रायपुर में 77 एकड़ भूमि पर सेवाग्राम तथा सेक्टर-39 में Art of Living Foundation को 40 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जहाँ सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के बड़े केंद्र विकसित हो रहे हैं। सेक्टर-4 और 10 में लगभग 120 एकड़ क्षेत्र में निजी निवेश के माध्यम से कन्वेंशन सेंटर कम स्पोर्ट्स सिटी विकसित की जा रही है। लगभग 800 करोड़ रुपये की इस परियोजना में विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर और टेनिस, तैराकी, कुश्ती, तीरंदाजी तथा स्क्वैश जैसी खेल सुविधाएँ शामिल होंगी। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी का उभरता हब नवा रायपुर में राज्य का पहला SEZ आधारित एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश अपेक्षित है। यहाँ भारत का पहला GaN तकनीक आधारित सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने के लिए भी भूमि आवंटित की गई है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) हेतु भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त हुई है, जहाँ PCB प्रोटोटाइपिंग, 3D प्रिंटिंग और EMC टेस्टिंग जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। सीबीडी क्षेत्र में प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आईटी कंपनियों को सुसज्जित कार्यालय स्थान उपलब्ध कराए गए हैं। वर्तमान में लगभग 1,000 युवा कार्यरत हैं और 2,000 अतिरिक्त रोजगार सृजन की संभावना है। सतत विकास और हरित पहल “पीपल फॉर पीपल” अभियान के अंतर्गत 1 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिससे शहर के 26 प्रतिशत हरित क्षेत्र को संरक्षित और विस्तारित करने में मदद मिली है। बायोस्वेल्स, रिचार्ज सिस्टम और हरित कॉरिडोर जैसे उपाय नवा रायपुर को पर्यावरण-अनुकूल और जल-संवेदनशील शहर के रूप में स्थापित कर रहे हैं। प्राधिकरण की आगामी कार्ययोजना नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण आने वाले वर्षों में शहर को और अधिक आधुनिक एवं निवेश-आकर्षक बनाने हेतु कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है: सेरीखेड़ी और मंदिरहसौद क्षेत्र में लगभग 1,100 एकड़ पर 800 करोड़ रुपये की लागत से अधोसंरचना विकास। राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) के एकीकृत विकास हेतु विशेष प्राधिकरण गठन। 500 एकड़ में मेडिसिटी और 200 एकड़ में एडूसिटी का विस्तार। नवा रायपुर को IT, ITeS और AI हब के रूप में स्थापित करना। वार्षिक पूंजीगत व्यय क्षमता को 1,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाना। वेलनेस सेंटर, वेडिंग डेस्टिनेशन, MICE कैपिटल और पर्यटन परियोजनाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहन। प्रभावित ग्राम पंचायतों में ग्राम विकास योजना के आधार पर आधुनिक अधोसंरचना विकास। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का तकनीकी उन्नयन। सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने हेतु 40 नई ई-बसों का संचालन। नई राजधानी, नए भारत की पहचान नवा रायपुर अटल नगर आज योजनाबद्ध विकास, आधुनिक सुविधाओं और सतत शहरीकरण का सशक्त उदाहरण बन चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, पर्यटन और हरित विकास के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति इसे न केवल छत्तीसगढ़ की नई पहचान बना रही है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है। आने वाले वर्षों में नवा रायपुर अटल नगर निश्चित ही भारत … Read more

105 निकाय चुनावों से तय होगी पंजाब की सियासी दिशा, विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी हलचल

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल है, लेकिन सियासी दलों ने अपनी-अपनी एक्सरसाइज शुरू कर दी. इससे पहले सियासी दलों की अग्निपरीक्षा निकाय चुनावों में होनी है, जिसके लिए राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है. यही वजह है कि पंजाब में हो रहे स्थानीय निकाय चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है।   पंजाब की 105 स्थानीय निकायों में चुनाव हो रहे हैं, जहां पर 26 मई को मतदान है.  इन निकाय चुनावों का सीधा असर पंजाब के 117 विधानसभा सीटों में से करीब 90 सीट के सियासी समीकरणों पर पड़ेगा. निकाय चुनावों के नतीजे राजनीतिक दलों के लिए आगामी चुनाव से पहले बहुत कुछ तय कर देंगे।  निकाय चुनाव के जरिए आम आदमी पार्टी अपने सियासी माहौल को बनाए रखने की कवायद करेगी, तो कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी जैसी पार्टियां अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए बेताब हैं. ऐसे में देखना है कि निकाय चुनाव में क्या किसका दबदबा रहता है?  पंजाब के 105 निकाय के लिए चुनाव  पंजाब के 105 सीटों के लिए निकाय चुनाव होने जा रहे हैं, जहां पर 26 मई को चुनाव जबकि नतीजे 29 मई को आएंगे. 105 नगर निकाय में 8 नगर निगमों, 76 नगर कौंसिल (नगर पालिका) और 21 नगर पंचायतों में चुनाव है. बठिंडा, मोहाली,होशियारपुर, मोगा, पठानकोट, बटाला, अबोहर और कपूरथला नगर निगम के पार्षद सीटों पर चुनाव है. ऐसे ही नगर पालिका और नगर पंचायत के लिए भी अलग-अलग वार्डों में चुनाव है।  चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 105 नगर निकाय के लिए कुल  10,809 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए थे. इसमें 713 प्रत्याशियों के नामांकन रद्द कर दिए गए हैं, जिसके बाद  10096 उम्मीदवार ही मैदान में रह गए।  पंजाब के जिन 8 नगर निगमों में चुनाव हो रहे हैं, उसे अलग-अलग वार्डों (सीटों) पर पार्षदों के लिए 2003 उम्मीदवार बचे हैं.  76 नगर कौंसिल की सीटों के लिए 6,887 उम्मीदवार मैदान में है तो 21 नगर पंचायत के लिए मैदान में 1,206 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं.  हालांकि, नामांकन वापस लिए जाने के बाद उम्मीदवारों के अंतिम आंकड़े सामने आ सकेंगे।  2027 चुनाव का सेमीफाइनल  पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव है, जिसके चलते निकाय चुनाव को 2027 के सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है. पंजाब का निकाय चुनाव सिर्फ मेयर या पार्षद चुनने का जरिया नहीं है. यह पंजाब की राजनीति का वो थर्मामीटर है, जो यह मापेगा कि सूबे में राजनीतिक हवा किस तरफ बह रही है. निकाय चुनाव के बाद सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में निकाय चुनाव के नतीजों से प्रदेश के सियासी माहौल का पता चल सकेगा।  निकाय चुनाव में मिलने वाली हार जीत को सियासी दल अपने-अपने हिसाब से पेस करेंगे.  निकाय चुनाव सभी दलों के लिए इसलिए अहम हैं, क्योंकि ये चुनाव सीधे तौर पर एक करोड़ से ज्यादा शहरी मतदाताओं से जुड़े हुए हैं. इन चुनावों में 90 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टियों का टेस्ट होगा. सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है ताकि चुनाव से पहले जीत मिल सके और उसका फायदा विधानसभा चुनाव में पार्टियों को मिले।  किसके लिए कितना अहम बना चुनाव बीजेपी अब पंजाब में सरकार बनाने का सपना देख रही है, जिसके लिए निकाय चुनाव काफी अहम है. राघव चड्डा सहित आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों को बीजेपी ने अपने साथ मिलाने के बाद सियासी समीकरण को साधने की कवायद की है, लेकिन इन नेताओं की पहली अग्निपरीक्षा निकाय चुनाव में होनी है।  वहीं, पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के लिए अपने सियासी साख को बचाए रखना के चुनाव माना जा रहा है.  'आप' प्रमुख शहरों के निगमों पर कब्जा बरकरार रखती है, तो 90 विधानसभा सीटों पर उसका कैडर मजबूत होगा. ऐसे में अगर नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है और विधायकों पर परफॉर्मेंस का दबाव दोगुना हो जाएगा।  कांग्रेस पंजाब में मुख्य विपक्षी दल है. लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं. शहरी इलाकों में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक रहा है. इन चुनावों में अगर कांग्रेस अच्छा करती है, तो वह 90 विधानसभा सीटों पर खुद को 'आप' के एकमात्र विकल्प के रूप में स्थापित कर लेगी।  वहीं, शिरमणि अकाली दल इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है, पार्टी के भीतर अंतर्कलह और नेतृत्व संकट जगजाहिर है. अकाली दल के लिए अर्ध-शहरी और कस्बाई इलाकों की सीटें बेहद अहम हैं. इन निकाय चुनावों में अगर अकाली दल खाता खोलने या सम्मानजनक सीटें पाने में नाकाम रहता है, तो कम से कम 40-50 विधानसभा सीटों पर उसका वजूद खतरे में पड़ जाएगा।