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करनाल: खट्टर का गांवों का दौरा, 10 गांवों में योजनाओं की प्रगति का लिया जायजा

करनाल करनाल में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नीलोखेड़ी विधानसभा क्षेत्र के तहत कई गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक भी की। मंत्री ने बताया कि उनका यह दौरा 10 गांवों को कवर करने के लिए तय किया गया है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि क्षेत्र में विकास योजनाएं किस तरह आगे बढ़ रही हैं, कहां दिक्कतें हैं और किन जगहों पर सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हर बार करनाल आने पर वे इसी तरह जमीनी स्तर पर कामकाज की समीक्षा करते हैं। आरक्षण और सुप्रीम कोर्ट टिप्पणी पर प्रतिक्रिया IAS अधिकारियों के बच्चों को आरक्षण से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि आरक्षण का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों को ही मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नीतियों का उद्देश्य कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना है, न कि पहले से सक्षम वर्गों को अतिरिक्त लाभ देना। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर विपक्ष को जवाब पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह मुद्दा वैश्विक परिस्थितियों से जुड़ा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, आपूर्ति श्रृंखला और भू-राजनीतिक तनावों का असर तेल की कीमतों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान जैसे वैश्विक हालात और सप्लाई बाधाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर केवल आलोचना करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कई देशों में ईंधन कीमतें भारत से कहीं अधिक बढ़ी हैं। सरकार की योजनाओं पर जोर उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई सरकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार लगातार विकास और गरीबों के कल्याण के लिए काम कर रही है।

राशन कार्ड आवंटन में घूसखोरी का खुलासा, CBI ट्रैप में रंगे हाथ पकड़ा गया अधिकारी

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक असिस्टेंट कमिश्नर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी अधिकारी एशियन मार्केट, पुष्प विहार, नई दिल्ली स्थित फूड एंड सप्लाई विभाग में तैनात था। सीबीआई की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस मामले में 20 मई को केस दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी को शिकायत मिली थी कि आरोपी अधिकारी राशन कार्ड ों के आवंटन और वितरण के बदले रिश्वत की मांग कर रहा था। आरोप था कि वह प्रत्येक राशन कार्ड पर 100 रुपए की अवैध रकम मांग रहा था। क्या है पूरा मामला बताया गया कि कुल 475 राशन कार्ड अलग-अलग नजदीकी दुकानों को आवंटित किए जाने थे। इनमें शिकायतकर्ता की दुकान को भी करीब 120 राशन कार्ड मिलने थे। इसी आधार पर आरोपी अधिकारी ने शिकायतकर्ता से लगभग 12 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की और फिर जाल बिछाकर कार्रवाई की। 21 मई को सीबीआई की टीम ने ट्रैप ऑपरेशन चलाया। इस दौरान आरोपी असिस्टेंट कमिश्नर को शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया। मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई का बयान आया सामने सीबीआई ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। सीबीआई ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत मांगता है या भ्रष्टाचार से जुड़ी कोई जानकारी हो, तो उसकी शिकायत तुरंत करें। इसके लिए लोग सीबीआई एसीबी दिल्ली कार्यालय, सीजीओ कॉम्प्लेक्स, लोधी रोड, नई दिल्ली में संपर्क कर सकते हैं। साथ ही 011-24367887 और मोबाइल नंबर 9650394847 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

Vinesh Phogat के पक्ष में हाईकोर्ट का फैसला, अब एशियन गेम्स ट्रायल में ले सकेंगी हिस्सा

नई दिल्ली मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह विशेषज्ञों की एक समिति गठित करे, जो विनेश फोगाट की फिटनेस का मूल्यांकन करेगी। इसी आधार पर उन्हें 30-31 मई को होने वाले एशियन गेम्स चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाएगी। मातृत्व को नुकसान की वजह नहीं बनाया जा सकता: हाईकोर्ट सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में मातृत्व का सम्मान किया जाता है और इसे किसी खिलाड़ी के करियर के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा, 'मातृत्व उत्सव है। इसे किसी खिलाड़ी के लिए नुकसानदायक नहीं बनाया जाना चाहिए।' दरअसल, विनेश फोगाट जुलाई 2025 में मां बनी थीं और इसके बाद अब घरेलू प्रतियोगिताओं में वापसी की तैयारी कर रही हैं। डब्ल्यूएफआई ने जून 2026 तक किया था अयोग्य घोषित भारतीय कुश्ती महासंघ ने हाल ही में विनेश फोगाट को 26 जून 2026 तक घरेलू टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। महासंघ का तर्क था कि संन्यास के बाद वापसी करने वाले खिलाड़ी को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) के एंटी-डोपिंग नियमों के तहत कम से कम छह महीने पहले नोटिस देना जरूरी होता है। डब्ल्यूएफआई के मुताबिक, विनेश ने यह अनिवार्य नोटिस अवधि पूरी नहीं की, इसलिए वे घरेलू प्रतियोगिताओं में खेलने की पात्र नहीं हैं। 15 पन्नों का नोटिस, 'राष्ट्रीय शर्म' जैसी टिप्पणी पर भी सवाल विनेश को जारी किए गए 15 पन्नों के कारण बताओ नोटिस में डब्ल्यूएफआई ने उन पर अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए थे। नोटिस में यह भी कहा गया था कि उनके आचरण से भारतीय कुश्ती की छवि को नुकसान पहुंचा है। सुनवाई के दौरान विनेश की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत को बताया कि 9 मई को जारी नोटिस में पेरिस ओलंपिक डिस्क्वालिफिकेशन को 'राष्ट्रीय शर्म' बताना पूर्वाग्रहपूर्ण और अपमानजनक था। इस पर खंडपीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, 'अगर किसी से नाराजगी या विवाद है तो खेल की बलि क्यों दी जाए? विनेश अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं। मातृत्व के सिर्फ 10 महीने बाद उन्हें ट्रायल से बाहर रखने का क्या औचित्य है?' सिंगल जज से नहीं मिली थी राहत इससे पहले 18 मई को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने विनेश को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ उन्होंने डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी, जिस पर अब यह फैसला आया है। क्या है पूरा विवाद?     WFI ने विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।     उन पर अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए।     महासंघ ने दावा किया कि संन्यास के बाद वापसी के लिए जरूरी छह महीने का नोटिस नहीं दिया गया।     इसी आधार पर उन्हें जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं से बाहर कर दिया गया।     विनेश ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।     अब हाईकोर्ट ने उन्हें एशियाई खेल चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति दे दी है।

देवास ब्लास्ट हादसा: एमवाय अस्पताल में भर्ती दो घायलों की मौत, अब तक 8 लोगों की गई जान

देवास  देवास जिले के टोंककला में 14 मई को हुए पटाखा फैक्टरी हादसे में झुलसे अजय और निरंजन ने भी दम तोड़ दिया। शुक्रवार रात इलाज के दौरान दोनों घायलों की मौत हो गई। इसके साथ ही हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है। फैक्ट्री विस्फोट के बाद से दोनों का उपचार MYH में चल रहा था। बर्न यूनिट में दोनों मरीजों की हालत अभी बेहद गंभीर बनी हुई थी। दोनों बिहार के रहने वाले थे। वहीं इंदौर के एमवाय अस्पताल में एडमिट एक मरीज की सोमवार रात मौत हो गई थी। सोमवार को जिस मरीज की मौत हुई थी उसका नाम राम (20) पिता मुकेश कुमार था। वहीं हादसे में घायल विशाल (25) को सिर में गंभीर चोट आने के बाद न्यूरो सर्जरी वार्ड में एडमिट है। धमाके के दौरान विशाल दूर जाकर गिर पड़ा था, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई और खून का थक्का जम गया। विशाल की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। विशाल को आज दोपहर 1 बजे बाद डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। बर्न यूनिट में संक्रमण की आशंका को देखते हुए पांच नर्सिंग कर्मचारियों की शिफ्ट वाइज 24 घंटे की ड्यूटी लगाई गई है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों की देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। उधर, चोइथराम हॉस्पिटल में एडमिट चार मरीजों में से तीन को सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। अभी यहां एक मरीज एडमिट है। उसकी हालत ठीक है। उसे बुधवार को डिस्चार्ज किया जाएगा। देवास जिले के टोंककलां इलाके में गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ। हादसे में 20 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मृत मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार के थे। शुरुआत में धीरज, सनी और सुमित की मौत की जानकारी सामने आई थी। गुरुवार देर रात अमलतास अस्पताल में इलाजरत दो मजदूर अमर और गुड्डू ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 5 हो गई। अब राम की मौत सहित मृतकों की संख्या छह हो गई है। ब्लास्ट इतना तेज था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे। फैक्ट्री की दीवारें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और आसपास के मकान तक हिल गए। हादसे के बाद झुलसे मजदूर बदहवास हालत में बाहर निकलते दिखे। कुछ लोगों के कपड़े स्किन से चिपक गए थे। फैक्ट्री के बाहर बाल और जले अवशेष बिखरे पड़े मिले।

खिलाड़ियों के पक्ष में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ग्रुप-D भर्ती रद्द करने पर लगी रोक

चंडीगढ़. हरियाणा में ग्रुप-डी भर्ती के तहत एक्सीलेंट स्पोर्ट्स पर्सन (ईएसपी) श्रेणी में चयनित उम्मीदवारों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने चयन रद करने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाते हुए याचिकाकर्ताओं की सेवाओं के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह अंतरिम राहत उस समय प्रदान की, जब राज्य सरकार की ओर से जारी संशोधित चयन सूची के आधार पर पहले से नियुक्त उम्मीदवारों की उम्मीदवारी समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप मौदगिल की अदालत में हुई। राजेंद्र और अन्य उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा ग्रुप-डी भर्ती के तहत ईएसपी श्रेणी में उनका चयन किया गया था और वे पिछले कई महीनों से विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने और जाइनिंग के बाद अब संशोधित सूची जारी कर चयन रद करना पूरी तरह मनमाना और कानून के विपरीत है।याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील जसबीर मोर ने अदालत को बताया कि 18 मई 2026 को जारी संशोधित सूची के माध्यम से उन उम्मीदवारों की उम्मीदवारी निरस्त कर दी गई, जो पहले ही चयनित होकर नौकरी जाइन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरा विवाद स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट के सत्यापन से जुड़ा है। खेल विभाग हरियाणा द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर संशोधित सूची तैयार की गई और उसी आधार पर चयन रद करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।याचिका में यह भी कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान सभी दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों की जांच की जा चुकी थी। ऐसे में लंबे समय तक सेवा लेने के बाद उम्मीदवारों को हटाने का प्रयास न केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि इससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। वहीं याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि सभी याचिकाकर्ता वर्तमान में नियमित रूप से सेवाएं दे रहे हैं और अचानक की गई कार्रवाई से उनके रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की सेवाओं के संबंध में वर्तमान स्थिति को बरकरार रखा जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश पारित होने के समय जो स्थिति थी, वही अगली सुनवाई तक जारी रहेगी। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को निर्देश दिए कि वे अगली तारीख से कम से कम एक सप्ताह पहले अपना जवाब दाखिल करें और उसकी अग्रिम प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता को भी उपलब्ध कराएं। मामले की अगली सुनवाई अब 2 सितंबर 2026 को होगी। हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से फिलहाल उन खिलाड़ियों को राहत मिली है, जिनकी नियुक्ति संशोधित सूची के बाद खतरे में पड़ गई थीं।

शादी के 27 दिन बाद उजड़ा परिवार, पत्नी की मौत के बाद पति ने भी दी जान

ग्वालियर मध्य प्रदेश के ग्वालियर में नवविवाहित जोड़े की आत्महत्या ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. एक महीने पहले जिन दो परिवारों में शादी की खुशियां थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है. सिद्धार्थ कांदिल और मेघा उर्फ ज्योति की शादी 25 अप्रैल को हुई थी, लेकिन शादी के 27 दिन बाद ही दोनों की मौत हो गई।  जानकारी के मुताबिक, शादी के कुछ दिन बाद मेघा अपने मायके मुरार चली गई थी. बताया जा रहा है कि 1 मई को वह मायके पहुंची थी. इसके बाद 20 मई को उसने दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. नवविवाहिता की मौत की खबर मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया।  पत्नी की मौत से सिद्धार्थ पूरी तरह टूट गया था. बताया जा रहा है कि वह गहरे सदमे में चला गया था. पत्नी की मौत के दो दिन बाद 22 मई को सिद्धार्थ ने भी पिंटो पार्क स्थित अपने घर के बाथरूम में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।  पुलिस जांच में जुटी, मोबाइल रिकॉर्डिंग खंगाल रही टीम घटना के बाद इलाके में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है. जिन घरों में कुछ दिन पहले शहनाइयां गूंज रही थीं, वहां अब सिर्फ आंसू और मातम दिखाई दे रहा है. नवविवाहित जोड़े की लगातार दो मौतों ने सभी को हैरान कर दिया है।  मामले में पुलिस ने दोनों घटनाओं को दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल रिकॉर्डिंग की मदद से आत्महत्या की वजह तलाशने में जुटी हुई है. फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से कोई आरोप नहीं लगाया गया है।  सीएसपी अतुल सोनी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है. पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है और मोबाइल रिकॉर्डिंग समेत अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है, ताकि आत्महत्या के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके। 

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला: पानी-सीवर इन्फ्रास्ट्रक्चर चार्ज घटा

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में अब घर बनाना सस्ता हो जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घर बनाने के दौरान पानी और सीवर पर लगने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर चार्ज (IFC) को 70 प्रतिशत तक घटाने का शुक्रवार को फैसला किया। यह चार्ज सिर्फ घर के निर्माण वाले हिस्से और पानी की वास्तविक मांग पर लिया जाएगा। पहले IFC चार्ज प्लॉट के आकार पर लगता था। इसमें पार्किंग जैसी खुली जगह (नॉन FAR) भी शामिल की जाती थी। यानी प्लॉट बड़ा तो यह चार्ज ज्यादा देना पड़ता था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि IFC चार्ज अब नई निर्माण परियोजनाओं या किसी संपत्ति में अतिरिक्त निर्माण पर ही लागू होगा। जिन रिडिवेलपमेंट प्रोजेक्ट्स में पानी की मांग नहीं बढ़ती, उन पर यह चार्ज नहीं लगेगा। सीएम ने कहा कि A-B कैटिगरी की कॉलोनियों में इन्फ्रा चार्ज में 59% की कमी की गई है। ई, एफ कैटिगरी में 50% और G-H कैटिगरी में 70% की कमी की गई है। दिल्ली में घर बनाने की मुख्य बातें अब प्लॉट के आकार के हिसाब से नहीं देना होगा चार्ज जितने में कंस्ट्रक्शन, उतने पर ही IFC लगेगा इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज क्या होता है?  घर, फ्लैट, या व्यावसायिक इमारत बनाने (या खरीदने) पर बिल्डर/अथॉरिटी द्वारा एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज ( EDC ) और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्ज (IDC) वसूला जाता है इसका उपयोग कॉलोनी या क्षेत्र में बाहर की मुख्य सड़कें, पार्क, और सीवरेज सिस्टम जैसी सुविधाएं देने के लिए किया जाता है।  जब आप किसी नए या बड़े प्लॉट पर पानी और सीवर का नया कनेक्शन लेते हैं, तो संबंधित जल बोर्ड (जैसे दिल्ली जल बोर्ड) द्वारा इन्फ्रास्ट्रक्चर शुल्क लगाया जाता है। इसके अलावा, सार्वजनिक या निजी स्थानों पर इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने की सुविधा (चार्जिंग स्टेशन का सेटअप) से जुड़े शुल्क को भी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर चार्ज कहा जाता है।  

आवारा कुत्तों के लिए Sonu Sood ने उठाई आवाज, लोगों से की अपनाने की अपील

मोगा/चंडीगढ़. पंजाब में लावारिस कुत्तों को लेकर शुरू हुए विवाद के बीच अब पंजाबी और बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद भी खुलकर सामने आ गए हैं। अभिनेता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि सड़क पर रहने वाले कुत्तों को मारना समाधान नहीं है। उन्होंने सरकार से इन बेजुबान जानवरों के लिए शेल्टर होम बनाने की मांग की और खुद भी इस दिशा में प्रयास करने की बात कही। सोनू सूद पंजाब के मोगा के रहने वाले हैं। उनकी बहन भी यहीं से कांग्रेस कार्यकर्ता हैं। सोनू सूद ने वीडियो में कहा कि इंसान सिर्फ किताबें लिख सकता है, लेकिन वफादारी अगर किसी से सीखनी हो तो वह कुत्तों से मिलती है। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग सड़क के कुत्तों को अपनाते हैं, उनका ध्यान रखते हैं और ऐसे कुत्ते आमतौर पर नुकसान नहीं पहुंचाते। सोनू सूद ने कहा- यह भी माना कि कई मामलों में बच्चों पर हमलों जैसी घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को यह पता होता है कि कौन से कुत्ते खतरनाक हो सकते हैं और उनकी शिकायत भी की जाती है।' सोनू सूद ने आवाज उठाने की कही बात सोनू सूद ने कहा कि किसी आदेश के तहत गली-मोहल्लों से कुत्तों को पकड़कर हटाना और उनके साथ क्या होगा, यह सोचकर भी चिंता होती है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस तरह के आदेशों को रुकवाने के लिए ज्यादा से ज्यादा आवाज उठानी चाहिए। अभिनेता ने कहा कि सरकार को ऐसे स्थान बनाने चाहिए जहां इन बेजुबान जानवरों को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे ज्यादा से ज्यादा स्ट्रे डॉग्स को अपनाएं। उन्होंने कहा कि यदि लोग उनके गले में पट्टा डाल दें और उनकी देखभाल करें तो यह पता चलेगा कि कोई उनकी जिम्मेदारी ले रहा है। सीएम की पोस्ट के बाद शुरू हुई चर्चा दरअसल, मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से 21 मई की रात लावारिस कुत्तों को लेकर की गई पोस्ट के बाद पंजाब में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई थी। पोस्ट में 22 मई से अभियान शुरू करने की बात कही गई थी। इसके बाद पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री, सामाजिक संगठनों और कई नेताओं ने इसका विरोध जताया। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव तजिंदर बग्गा ने भी इस मामले को लेकर देश के मुख्य न्यायाधीश को ईमेल भेजा। वहीं पंजाबी अभिनेत्री सोनम बाजवा, गायिका रुपिंदर हांडा और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने भी कुत्तों को न मारने की अपील की।

भूजल संरक्षण की बड़ी पहल, गांव-गांव के कुएं और बोरवेल होंगे डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल

दुर्ग. भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए जिले में अब गांवों के कुओं और बोरवेल की जल स्थिति का वैज्ञानिक सर्वे किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशानुसार जिले की सभी ग्राम पंचायतों में 25 मई से 15 जून तक “जलदूत” मोबाइल एप के माध्यम से विशेष प्री-मानसून भूजल सर्वे अभियान संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत चयनित खुले कुओं एवं बोरवेल में उपलब्ध पानी की गहराई मापकर उसका डिजिटल डेटा ऑनलाइन एप में दर्ज किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा तकनीकी अमले को निर्देशित किया गया है कि ग्राम पंचायतों में जलदूत एप के माध्यम से बोरवेल के वाटर लेवल की भी जांच सुनिश्चित की जाए। सर्वे के दौरान जलस्तर मापन प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन हो सके। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल की उपलब्धता, जलस्तर में गिरावट और जल संकट की संभावित स्थिति का आकलन करना है। जलदूत एप के माध्यम से एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर भविष्य में जल संरक्षण संरचनाओं की योजना, वर्षा जल संचयन कार्यों की प्राथमिकता तय करने तथा जल संकट वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिलेगी। अभियान के तहत वर्ष में दो बार डेटा संग्रह किया जाएगा। पहली बार बारिश पूर्व यानी प्री-मानसून अवधि में तथा दूसरी बार बारिश के बाद पोस्ट- मानसून अवधि में कुओं का जलस्तर मापा जाएगा। इससे वर्षा के बाद भूजल स्तर में हुए सुधार का तुलनात्मक अध्ययन भी संभव हो सकेगा। जिला प्रशासन ने सभी जनपद पंचायतों एवं ग्राम पंचायतों को अभियान की तैयारी समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। मापन अधिक वैज्ञानिक और एकरूप मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार इस बार भूजल स्तर मापन की प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और एकरूप बनाया गया है। सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि कुओं की माप केवल मेजरिंग टेप के माध्यम से ही की जाए, ताकि आंकड़ों की शुद्धता और विश्वसनीयता बनी रहे। सर्वे में सूखे कुएं भी शामिल सीईओ जिला पंचायत ने बताया कि इस बार ऐसे सूखे कुएं, जिनमें पानी उपलब्ध नहीं है, उन्हें भी सर्वे में शामिल किया जाएगा। इन मामलों में जलस्तर के स्थान की कुल गहराई दर्ज की जाएगी। इसके लिए मंत्रालय ने प्री-मानसून 2026 पर कुएं सर्वे में “कुएं की कुल गहराई” नामक नया पैरामीटर जलदूत मोबाइल एप में जोड़ा है। इससे भूजल संरचना, जल उपलब्धता तथा जलस्तर में होने वाले बदलावों का अधिक विस्तृत विश्लेषण किया जा सकेगा।

ट्विशा शर्मा केस में जांच तेज, कोर्ट ने आरोपी पति समर्थ को 7 दिन की रिमांड पर भेजा

भोपाल भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा केस में आरोपी पति समर्थ को कोर्ट ने 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. कड़ी सुरक्षा के बीच समर्थ को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनुदिता गुप्ता की अदालत में पेश किया गया, जहां सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में भारी भीड़ देखने को मिली. इस दौरान पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में मामले की विस्तृत बहस हुई।  पुलिस ने रिमांड के लिए तर्क देते हुए कहा कि घटनास्थल का वेरिफिकेशन, अन्य साक्ष्यों की जब्ती और विस्तृत बयान दर्ज करने के लिए आरोपी का कस्टडी में रहना जरूरी है. वहीं बचाव पक्ष ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अधिकांश साक्ष्य पहले ही जुटाए जा चुके हैं और एक दिन की रिमांड पर्याप्त है. सुनवाई के दौरान मृतका ट्विशा के भाई मेजर हर्षित समेत परिजन भी अदालत पहुंचे।  पुलिस ने मांगी 7 दिन की रिमांड, कोर्ट ने तुरंत कर दी मंजूर, परिजन बोले- पहली जीत मिली ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह की 7 दिन की रिमांड भोपाल कोर्ट ने मंजूर कर दी है. कोर्ट ने आरोपी का पासपोर्ट भी जब्‍त कर लिया है. कोर्ट ने पुलिस की दलीलों को माना. इधर, समर्थ के वकीलों ने इसका विरोध किया और कोर्ट से केवल 1 दिन की रिमांड देने का अनुरोध किया था. ट्विशा के परिजनों ने इसे अपनी पहली जीत बताया है. पुलिस ने जिला अस्‍पताल में मेडिकल कराने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया था. समर्थ सिंह के भाई सिद्धार्थ और वकीलों की टीम पहले से ही कोर्ट परिसर में थी. समर्थ सिंह की अग्रिम बेल पहले ही कोर्ट रद्द कर चुकी थी, इसके बाद समर्थ फरार हो गया था और उस पर 30 हजार रुपए का इनाम रखा गया था।  दूसरे पोस्टमार्टम के लिए आज भोपाल पहुंचेगी AIIMS दिल्ली की टीम, चार्टर्ड विमान से रवाना होंगे डॉक्टर  ट्विशा शर्मा डेथ केस में दूसरे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया अब तेज हो गई है. जानकारी के मुताबिक AIIMS दिल्ली की फॉरेंसिक टीम रविवार को भोपाल पहुंचेगी. यह टीम ट्विशा शर्मा के दोबारा पोस्टमार्टम के लिए गठित किए गए मेडिकल बोर्ड का हिस्सा होगी. सूत्रों के अनुसार अदालत के आदेश में केवल AIIMS दिल्ली के निदेशक को मेडिकल बोर्ड गठित करने के लिए अधिकृत किया गया था. कोर्ट का आदेश मिलने के बाद AIIMS दिल्ली के फॉरेंसिक विभाग प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने निदेशक की मंजूरी से चार वरिष्ठ डॉक्टरों का विशेष मेडिकल बोर्ड तैयार किया है. बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार की ओर से रविवार सुबह पोस्टमार्टम कराने के लिए आधिकारिक अनुरोध AIIMS दिल्ली को भेजा गया. इसके बाद मेडिकल बोर्ड ने तैयारी शुरू कर दी. टीम अत्याधुनिक फॉरेंसिक उपकरणों के साथ रविवार शाम करीब 6 बजे राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए चार्टर्ड विमान से भोपाल के लिए रवाना होगी. यही मेडिकल बोर्ड ट्विशा शर्मा का दूसरा पोस्टमार्टम करेगा. पूरे मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है, क्योंकि केस पहले ही हाई प्रोफाइल और संवेदनशील बन चुका है।   पुलिस ने मांगी 7 दिन की रिमांड, समर्थ के वकील ने किया विरोध, बोले- एक दिन काफी  ट्विशा शर्मा डेथ केस में आरोपी समर्थ सिंह को लेकर कोर्ट में शनिवार को अहम सुनवाई हुई. पुलिस ने अदालत से समर्थ सिंह की 7 दिन की रिमांड मांगी. पुलिस का तर्क था कि मामले में स्पॉट वेरिफिकेशन कराना है, कई अन्य साक्ष्यों की जब्ती बाकी है और कुछ लोगों के विस्तृत बयान भी दर्ज किए जाने हैं. जांच एजेंसी ने कहा कि केस में डिजिटल एविडेंस और घटनास्थल से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल अभी जारी है, इसलिए आरोपी से लंबी पूछताछ जरूरी है. वहीं समर्थ सिंह के वकील ने पुलिस की मांग का विरोध किया. बचाव पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि मामले में जरूरी साक्ष्यों की जब्ती पहले ही हो चुकी है और लंबे समय की रिमांड की आवश्यकता नहीं है. वकील ने कहा कि यदि पूछताछ करनी भी है तो एक दिन की रिमांड पर्याप्त होगी. मामले को लेकर अदालत में दोनों पक्षों के बीच विस्तृत बहस हुई. अब कोर्ट के फैसले पर सभी की नजर टिकी हुई है।  समर्थ सिंह को भोपाल पुलिस ने किया गिरफ्तार ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. जबलपुर पुलिस ने समर्थ सिंह को भोपाल पुलिस को हैंडओवर कर दिया था. पुलिस उसे भोपाल ले आई है और दोपहर तक उसे कोर्ट में पेश किया। समर्थ सिंह शुक्रवार (22 मई) को जबलपुर जिला जज के कोर्ट रूम में सरेंडर करने पहुंचा था. 12 मई से फरार चल रहे समर्थ सिंह पर 30 हजार रुपये का इनाम रखा गया था. इसके अलावा, पुलिस ने लुक आउट नोटिस भी जारी किया था. इस बीच समर्थ सिंह के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली थी और जज को बताया था कि समर्थ सरेंडर करने को तैयार है।  गिरफ्तारी से बच रहा था समर्थ सिंह शुक्रवार को सरेंडर करने के बाद भोपाल पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था. अब समर्थ सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है. पेशे से वकील समर्थ सिंह 12 मई को ट्विशा शर्मा की मौत के बाद से गिरफ्तारी से बच रहा था. बार काउंसिल ने उसकी वकालत का लाइसेंस भी रद्द कर दिया है. जबलपुर जिला न्यायालय में उसके मौजूद होने की खबर मिलने के कुछ देर बाद जबलपुर पुलिस ने समर्थ को हिरासत में लिया और ओमती थाने ले गई, जहां उसे भोपाल पुलिस को सौंप दिया गया।  पुलिस ने समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को 30,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी. इससे पहले, शुक्रवार को समर्थ सिंह ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की अपनी याचिका वापस ले ली थी. इसके साथ ही समर्थ के पास आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था. आत्मसमर्पण के लिए जबलपुर जिला कोर्ट पहुंचने पर भी गहमागहमी रही क्योंकि ट्विशा के परिजनों के वकील ने यह कहते हुए विरोध किया कि हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक आरोपी समर्थ को या तो भोपाल जिला न्यायालय या फिर मामले के जांच अधिकारी के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहिए।