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मुख्य सचिव जैन ने ली सभी कलेक्टर, नगरीय निकाय, पंचायत, पीएचई एवं जल निगम के अधिकारियों की बैठक

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पेयजल व्यवस्था से जुड़े सभी विभागों को पेयजल संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण और प्रतिदिन मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिये हैं। इस क्रम में नगरीय निकाय, पंचायत, पीएचई, जल निगम आदि विभागों के पेयजल व्यवस्था से जुड़े समस्त अमले के अवकाश पर प्रतिबंध लगा दिया है। केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही अवकाश स्वीकृत होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने रविवार को कलेक्टर्स एवं नगरीय निकाय, पंचायत, पीएचई और नगर निगम के अधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली। उन्होंने कलेक्टर्स से कहा है कि वे सेंट्रल कंट्रोल रूम बनाएं और पेयजल उपलब्धता के लिए अधिकारियों की समिति बनाकर प्रतिदिन समीक्षा करें। यह सुनिश्चित करें कि टैंकर से पेयजल आवश्यकता वाले क्षेत्रों में वितरित हो और किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हो। उन्होंने टैंकर के दुरूपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वे जनप्रतिनिधियों से संवाद और समन्वय रखकर पेयजल की कमी वाले क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करें। मुख्य सचिव  जैन ने कलेक्टर से कहा कि पेयजल उपलब्धता के लिये युद्ध स्तर पर काम करें। शहरी क्षेत्र की पानी की टंकियों को भरने में समानता रखें और अन्य विभागों के साथ ही ऊर्जा विभाग को भी इस पूरे प्लान में शामिल रखें। उन्होंने निर्देश दिये कि कोई भी नलजल योजना का विद्युत कनेक्शन न कटे। मुख्य सचिव  जैन ने बताया कि राज्य शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में वोरवेल आदि के खनन के लिए 1500 करोड़ रूपये की राशि जारी की है और पंचायतों को संधारण कार्य के लिए 55 करोड़ रूपये की अतिरिक्त राशि भी दी गई है, जिससे पेयजल उपलब्धता में कोई असुविधा नहीं हो। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर मेकेनिज्म तैयार करें और नियमित रूप से समीक्षा करें। बैठक में नगरीय विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, पीएचई, ऊर्जा और सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारी बैठक में शामिल हुए। मुख्य सचिव  जैन कहा कि कंट्रोल रूम को स्वयं कलेक्टर लीड करें और जनप्रतिनिधियों आदि से प्राप्त होने वाली शिकायतों के अलावा लोक सेवा गारंटी तथा सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का न्यूनतम समय अवधि में निराकरण करवाएं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ बेहतर संवाद रखें एवं पेयजल उपलब्धता तथा शिकायतों के निराकरण का प्रचार-प्रसार भी करें। उन्होंने कहा कि आगामी एक माह के लिए प्लान बनाकर रोज सख्ती से मानीटरिंग की जाए। पेयजल प्रदाय कार्य में लगे सभी विभागों के अमले के अवकाश पर तत्काल प्रतिबंध लगाएं और अपरिहार्य होने पर ही अवकाश स्वीकृत किया जाए। मुख्य सचिव  जैन ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि वे ट्रीटेड वाटर का भी समुचित उपयोग करें साथ ही टैंकर से जल प्रदाय पर विशेष ध्यान रखें और यह सुनिश्चित करें कि हर हाल में बसाहटों में टैंकर पहुंचे तथा जल प्रदाय करें। कलेक्टर्स से कहा गया है कि नई एसओपी जारी की गई है, एसओआर को रिवाइज किया गया है और अब जल संधारण के 10 हजार तक के कार्य पंचायत स्वयं कर सकती है। मुख्य सचिव ने कहा कि 15वां एवं 16वां वित्त आयोग की राशि का भी पेयजल उपलब्धता में उपयोग किया जा सकता है। मुख्य सचिव ने बताया कि केन्द्र वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, मूलभूत मद, अन्य अनुदान जो केन्द्र या राज्य शासन से दिया गया है, के अलावा पंचायत की स्वयं के आय के स्रोतों से भी पेयजल व्यवस्था पर पंचायतें व्यय कर सकती हैं। उन्होंने कमिश्नर से भी अपने संभाग में विशेष सतर्कता बनाए रखने के लिए कहा है। अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई ने कलेक्टर्स से कहा कि वे पेयजल के सभी स्रोतों पर विशेष सतर्कता रखें और पहले से यह जानकारी रखें कि कहीं स्रोत में जल की कोई कमी तो नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक रूप से जल स्रोत की उपलब्धता पर भी पहले से काम करें। जल संवर्धन अभियान और गंगा दशहरा पर कार्यक्रमों को जनोपयोगी स्वरूप दें बैठक में अपर मुख्य सचिव  शिव शेखर शुक्ला ने कलेक्टर्स से कहा कि 25 मई से प्रदेश में दो दिवसीय गंगा दशहरा के आयोजन होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. माहेन यादव स्वयं 25 और 26 मई को उज्जैन के क्षिप्रा तट पर अनेक कार्यक्रमों में शामिल होंगे।  शुक्ला ने कहा कि आयोजनों को पेयजल से जोड़कर जनोपयोगी बनाया जाए और जन-प्रतिनिधियों तथा आमजन की उपस्थिति सुनिश्चित करें।  

अधिकारियों ने पैदल भ्रमण कर जानी ज़मीनी हकीकत; जाटलूर, धोबे और हरवेल में उमड़ा जनसैलाब

रायपुर. छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों में इन दिनों शासन की संवेदनशीलता और सक्रियता का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिल रहा है, जिसने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को पूरी तरह पाट दिया है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार आयोजित ‘सुशासन तिहार’, ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ एवं ‘जनभागीदारी अभियान’ के तहत ओरछा विकासखंड के ग्राम जाटलूर, धोबे और हरवेल सहित कई अंदरूनी गाँवों में उत्सव जैसा माहौल है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज को सशक्त बनाना और विकास की मुख्यधारा से छूटे अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुँचाना है। एसी कमरों से निकलकर ज़मीन पर उतरा प्रशासन इस अभियान की सबसे प्रभावशाली तस्वीर तब सामने आई, जब कलेक्टर के दिशा-निर्देशन में प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की संयुक्त टीम ने सुदूर गाँवों का पैदल भ्रमण किया। उबड़-खाबड़ रास्तों और भौगोलिक चुनौतियों के बीच जब पूरी प्रशासनिक टीम ग्रामीणों के मोहल्लों और मजरों तक पहुँची, तो जनता में यह मजबूत संदेश गया कि सरकार अब सिर्फ बंद कमरों से आदेश जारी नहीं कर रही, बल्कि खुद जमीन पर आकर हकीकत परख रही है। जिले के आला अधिकारियों को अपने बीच इतनी सादगी से उपस्थित पाकर ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। चौपाल पर ही मिलीं डिजिटल सेवाएँ और स्वास्थ्य सुविधाएं इन विशेष शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को बहुत बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें छोटे-मोटे शासकीय कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालयों के चक्कर काटने और आर्थिक बोझ उठाने से मुक्ति मिल गई है। शिविर स्थल पर ही आधार कार्ड, पहचान पत्र व अन्य जरूरी सरकारी दस्तावेजों में सुधार और नए दस्तावेज बनाने की सुविधा तत्काल प्रदान की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का मौके पर ही स्वास्थ्य परीक्षण किया और निःशुल्क दवाइयां वितरित कीं गई। इसी तरह कृषि, महिला एवं बाल विकास और पंचायती राज जैसे विभिन्न विभागों के स्टॉलों के जरिए जल, जंगल, जमीन के संरक्षण के साथ-साथ शिक्षा और पोषण की महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। जनविश्वास से सज रही सुशासन की नई इबारत जब सरकार की मंशा विशुद्ध रूप से जनहित की हो, तो सुशासन केवल कागजी शब्द नहीं रहता, बल्कि गाँव-गाँव की सूरत बदलने वाली एक जीवंत ताकत बन जाता है। शिविरों में ग्रामीणों की यह भारी और स्वस्फूर्त भागीदारी इसी सकारात्मक बदलाव की गवाह है। विभिन्न विभागों के आपसी समन्वय से आयोजित इस महा-अभियान ने न केवल वनांचल के भाई-बहनों में शासन-प्रशासन के प्रति अटूट भरोसा जगाया है, बल्कि बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में विकास की एक नई और व्यावहारिक इबारत लिख दी है।

मुख्यमंत्री बोले – लंबित राजस्व वादों में देरी पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि राजस्व मामलों के त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि भूमि और राजस्व से जुड़े विवाद आमजन के जीवन, किसान हितों और सामाजिक सौहार्द से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए इन मामलों में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्धारित समय-सीमा के बाद भी लंबित रहने वाले मामलों में संबंधित अधिकारियों और कार्मिकों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। शनिवार को राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था, जवाबदेही और समयबद्ध कार्यप्रणाली के माध्यम से राजस्व न्यायालयों की कार्यक्षमता को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि आम नागरिक को शीघ्र न्याय मिल सके। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि निर्धारित समय-सीमा से अधिक अवधि से लंबित वादों का अभियान चलाकर प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि तहसील और जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा हो तथा कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों की जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि आमजन को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए।  बैठक में बताया गया कि आरसीसीएमएस पोर्टल के माध्यम से धारा-80 के अंतर्गत लंबित वादों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। 1 जनवरी 2026 को कुल 85,158 वाद लंबित थे, जिनमें से 77,578 का निस्तारण किया गया था। वहीं 22 मई 2026 तक कुल लंबित वादों की संख्या घटकर 38,166 रह गई, जिनमें 29,543 वादों का निस्तारण किया गया। तीन माह से अधिक समय से लंबित मामलों की संख्या में भी लगातार कमी आई है। धारा-80 के मामलों में बस्ती, चित्रकूट, अयोध्या, बागपत और कन्नौज ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि मेरठ, वाराणसी, अमेठी, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर पाया गया। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि धारा-34 के अंतर्गत लंबित वादों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। 1 जनवरी 2026 को कुल 22,44,466 वाद लंबित थे, जो 22 मई 2026 तक घटकर 10,59,139 रह गए। इस अवधि में 5,40,945 वादों का निस्तारण किया गया। समीक्षा में बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ और बदायूं का प्रदर्शन बेहतर पाया गया, जबकि गोरखपुर, संतकबीरनगर, प्रतापगढ़, बलिया और देवरिया अपेक्षित प्रगति नहीं कर सके। मुख्यमंत्री ने इन जिलों में विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। धारा-33 के अंतर्गत निर्विवादित वरासत मामलों की समीक्षा में बताया गया कि वर्ष 2025 में कुल 16,89,732 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 16,43,104 का निस्तारण किया गया। वहीं 22 मई 2026 तक प्राप्त 7,15,872 आवेदनों में से 6,52,512 का निस्तारण किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वरासत से जुड़े मामलों में नागरिकों को अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें तथा सभी प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में धारा-24 के मामलों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 1 जनवरी 2026 को 1,82,710 वाद लंबित थे, जो 22 मई 2026 तक घटकर 92,915 रह गए। समीक्षा में वाराणसी, कुशीनगर, मैनपुरी, बलरामपुर और हमीरपुर का प्रदर्शन बेहतर पाया गया, जबकि गौतमबुद्धनगर, लखनऊ, प्रतापगढ़, अमेठी और मुजफ्फरनगर अपेक्षित प्रगति नहीं कर सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन जिलों में प्रगति संतोषजनक नहीं है, वहां वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। धारा-116 के अंतर्गत लंबित मामलों की समीक्षा में बताया गया कि जनवरी 2026 में 1,69,693 वाद लंबित थे, जो 22 मई 2026 तक घटकर 1,14,479 रह गए। इस श्रेणी में वाराणसी, एटा, आजमगढ़, लखीमपुर खीरी और महाराजगंज का प्रदर्शन बेहतर रहा, जबकि प्रतापगढ़, मुजफ्फरनगर, कानपुर नगर, गोंडा और बलिया का प्रदर्शन कमजोर पाया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित पुराने मामलों की अलग सूची तैयार कर उनके निस्तारण के लिए विशेष रणनीति बनाई जाए। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में लंबित वादों का एक समय सीमा तय करके निस्तारण कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व प्रशासन की कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए, जिससे जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो तथा लोगों को न्याय के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।  

राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले – जनजातीय समाज दुनिया को सिखा सकता है प्रकृति संग विकास

नई दिल्ली   देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री  साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री  केदार कश्यप एवं  रामविचार नेताम भी उपस्थित थे।  कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री मती रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में  लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान  मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

राजा भोज एयरपोर्ट हुआ हाईटेक, नए अराइवल एरिया में मिलेगी लाउंज और टैक्सी बुकिंग सुविधा

भोपाल. राजा भोज एयरपोर्ट पर हाल ही में विकसित किए गए नए अराइवल एरिया में अब यात्रियों के लिए रिजर्व लाउंज और प्री-पेड टैक्सी बुकिंग जैसी सुविधाएं भी शुरू कर दी गई हैं। नियमित उड़ानों से भोपाल आने वाले विशिष्ट और अति विशिष्ट यात्री अब मुख्य लाउंज के बजाय नए रिजर्व लाउंज में समय बिता सकेंगे। एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा शुरू किए गए इस नए अराइवल एरिया का अब तक करीब एक लाख यात्री उपयोग कर चुके हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए यहां “मे आई हेल्प यू” काउंटर भी बनाया गया है, जहां एयरपोर्ट परिसर और सेवाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। अब अंदर ही बुक होगी टैक्सी नए अराइवल एरिया में यात्री एयरपोर्ट से बाहर निकलने से पहले ही प्री-पेड टैक्सी बुक करा सकेंगे। इससे खासकर पहली बार भोपाल आने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिल रही है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने के लिए एस्केलेटर सुविधा भी उपलब्ध कराई है। अब यात्री विमान से उतरने के बाद सीधे एस्केलेटर के जरिए बाहर पार्किंग क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं। पहले यात्रियों को पार्किंग तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। कस्टमर सर्वे में फिर नंबर-वन बनने की उम्मीद राजा भोज एयरपोर्ट को पिछले राष्ट्रीय कस्टमर सैटिस्फेक्शन सर्वे में चेक-इन स्टाफ के व्यवहार और प्रतीक्षा समय जैसे मानकों पर पांच में से पूरे पांच अंक मिले थे। एयरपोर्ट अथॉरिटी को उम्मीद है कि नई सुविधाओं के कारण इस बार भी भोपाल एयरपोर्ट शीर्ष स्थान हासिल करेगा। नंबर एक आने की उम्मीद – हमें फिर से नंबर एक आने की उम्मीद है क्यों कि पिछले सर्वे के बाद सुविधाएं बढ़ी हैं इसलिए नंबर कम होने का कोई कारण नहीं है। – रामजी अवस्थी, डायरेक्टर, राजाभोज एयरपोर्ट, भोपाल

वीजा नियमों पर अमेरिका का बड़ा बयान, रूबियो बोले- बदलाव सिर्फ भारत के लिए नहीं

 नई दिल्ली  अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को नई दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी की रूपरेखा पेश की, साथ ही इमिग्रेशन सुधारों और वीजा से जुड़ी चिंताओं पर पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए। प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के बाद हैदराबाद हाउस में बोलते हुए रूबियो ने कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच का रिश्ता अब पारंपरिक कूटनीति से कहीं आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा, "एक रणनीतिक साझेदारी एक बहुत ही अलग चीज होती है रूबियो ने बताया कब होती है रणनीतिक साझेदारी? रूबियो ने कहा, "एक रणनीतिक साझेदारी तब होती है, जब दो देशों के तौर पर आपके हित एक-दूसरे से मेल खाते हैं और आप उन समस्याओं को सुलझाने के लिए मिलकर रणनीतिक रूप से काम करते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "जिन मुद्दों पर हम भारत के साथ मिलकर काम करते हैं, उनकी सूची और उनका व्यापक दायरा इस बात को उजागर करता है कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है बल्कि दुनिया भर में हमारे सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक है।" यह प्रेस कॉन्फ्रेंस रूबियो के भारत के चार-दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने के ठीक एक दिन बाद हुई। रूबियो ने देश में अपने पहले दिन को शानदार बताया और बार-बार इस बात पर जोर दिया कि भारत और अमेरिका केवल सहयोगी ही नहीं हैं, बल्कि रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और आतंकवाद-रोधी प्रयासों जैसे क्षेत्रों में साझा हितों वाले रणनीतिक सहयोगी हैं। इस बातचीत में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर शामिल थे। वीजा बदलावों और इमिग्रेशन सुधारों पर क्या बोले रूबियो? J1, F1 और H-1B वीजा नीतियों में हाल के बदलावों को लेकर जताई जा रही चिंताओं का जवाब देते हुए रूबियो ने कहा कि ये सुधार यूएस इमिग्रेशन सिस्टम में बड़े बदलाव का हिस्सा थे और सिर्फ भारत के लिए नहीं थे। उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं उस योगदान को स्वीकार करता हूं जो भारतीयों ने यूएस अर्थव्यवस्था में दिया है। भारतीय कंपनियों ने यूएस अर्थव्यवस्था में 20 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। हम चाहते हैं कि यह आंकड़ा लगातार बढ़ता रहे… अभी जो बदलाव हो रहे हैं या संयुक्त राज्य अमेरिका में हमारी प्रवासन प्रणाली का जो आधुनिकीकरण हो रहा है, वह सिर्फ भारत के लिए नहीं है। यह वैश्विक है, इसे पूरी दुनिया में लागू किया जा रहा है।" रूबियो ने आगे कहा, "हम आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में हमें प्रवासन संकट का सामना करना पड़ा है। यह भारत की वजह से नहीं है, बल्कि मोटे तौर पर पिछले कुछ सालों में 20 मिलियन से ज्यादा लोग अवैध रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में घुस आए हैं और हमें इस चुनौती से निपटना पड़ा है…एक देश के तौर पर आप जो कुछ भी करते हैं, वह आपके राष्ट्रीय हित में होना चाहिए और इसमें आपकी आव्रजन नीति भी शामिल है।" रूबियो ने आगे कहा कि यूएस आव्रजन के मामले में दुनिया का सबसे ज्यादा स्वागत करने वाला देश बना हुआ है, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि चल रहे सुधारों की वजह से बदलाव के इस दौर में कुछ दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। भारत-विरोधी नफरत और नस्लभेदी टिप्पणियों पर रूबियो अमेरिका में ऑनलाइन और दूसरी जगहों पर भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ की गई नस्लभेदी टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर रूबियो ने कहा कि ऐसी टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका एक सबको साथ लेकर चलने वाला देश बना हुआ है उन्होंने कहा, “मैं उन टिप्पणियों को बहुत गंभीरता से लूंगा। मुझे यकीन है कि ऐसे लोग हैं जिन्होंने ऑनलाइन और दूसरी जगहों पर टिप्पणियां की हैं, क्योंकि दुनिया के हर देश में बेवकूफ लोग होते हैं। मुझे यकीन है कि यहां भी बेवकूफ लोग हैं। यूनाइटेड स्टेट्स में भी बेवकूफ लोग हैं जो हर समय बेवकूफी भरी टिप्पणियां करते रहते हैं। यूनाइटेड स्टेट्स एक बहुत ही मेहमाननवाज देश है। हमारा देश उन लोगों से समृद्ध हुआ है जो दुनिया भर से हमारे देश में आते हैं।” रूबियो ने अमेरिकी समाज में प्रवासियों के योगदान की ओर भी इशारा किया और बताया कि उनके अपने माता-पिता 1956 में क्यूबा से यूनाइटेड स्टेट्स आए थे। रक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर जयशंकर ने क्या कहा? प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जयशंकर ने दोनों देशों के बीच रक्षा और आर्थिक संबंधों को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका ने हाल ही में अपने 10 साल के प्रमुख रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क समझौते को रिन्यू किया है और एक व्यापक 'अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस' रोडमैप पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा, “जहां तक रक्षा और सुरक्षा सहयोग की बात है आप सभी जानते हैं कि 10 साल के प्रमुख रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क समझौते को हाल ही में रिन्यू किया गया था। एक व्यापक 'अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस' रोडमैप पर भी हस्ताक्षर किए गए। हमने रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए 'मेक इन इंडिया' दृष्टिकोण और हाल के संघर्षों से सीखे गए सबक को ध्यान में रखने के महत्व पर चर्चा की।” व्यापार वार्ताओं पर जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्ष एक अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने पर जोर दे रहे हैं, जो अंततः एक व्यापक द्विपक्षीय सौदे का रास्ता खोल सकता है। इसकी परिकल्पना पहली बार फरवरी 2025 में पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान की गई थी।

वक़्फ़ संशोधन अधिनियम से बदली म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड की तकदीर और तस्वीर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड ने नवीन वक़्फ़ अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से वक़्फ़ संपत्तियों के संरक्षण, पारदर्शी प्रबंधन और जनहित में उनका उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक और प्रभावी कार्रवाई की है। वक़्फ़ बोर्ड की संपत्तियों से वर्षों से अवैध कब्जाधारियों को हटाया गया और भौतिक सत्यापन के बाद जरुरतमंद लोगों को संपत्ति के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया गया। वक़्फ़ बोर्ड की आय कैसे बड़े इस पर अन्य राज्यों की वफ्फ समितियां से चर्चा कर, राजस्व बढ़ाने के लिए कार्य किया गया। भारत सरकार द्वारा वक़्फ़ संपतियों का लेखा-जोखा उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कराने में म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। परिणामस्वरूप म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड को स्कॉच अवार्ड से नवाजा गया। नवीन वक्फ अधिनियम के बाद समाज के बेटा-बेटियों के लिए खुली हैं नई राहें म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने बताया कि देश में वक़्फ़ संशोधन कानून लागू होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड ने कानून के मंशानुरूप कई समाजिक परिवर्तनकारी कार्यों को आगे बढ़ाते हुए समाज को नई दिशा दी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री की इच्छा शक्ति के परिणामस्वरूप 1552 बेटा-बेटियों को ड्रॉप आउट होने से बचाया गया। वे आगे की पढ़ाई जारी रख सकें, इसके लिए समुचित रुप से आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की गई, नवीन वक्फ अधिनियम के बाद समाज के बेटा-बेटियों के लिए नई राहें खुली है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल जिले के 849 मेधावी बेटा-बेटियों को स्कॉलरशिप प्रदान कर सम्मानित करेंगे। यह शुरुआत है, वक़्फ़ बोर्ड मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिले में इस तरह बेटा-बेटियों को स्कॉलरशिप देकर सम्मानित करेगा। मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड द्वारा 'पढ़ो पढ़ाओ – राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनों' जैसे नवाचार की चर्चा के बाद मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड की योजनाओं और कार्य करने की शैली को समझने के लिए अनेक राज्यों द्वारा अपने अधिकारी- कर्मचारियों को मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड के कार्यालय में भेजा जा रहा है। वक़्फ़ संपत्तियां स्वच्छ और जवाबदेह प्रबंधन को सौंपने के लिए उठाए गए निर्णायक कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशन में नवीन वक़्फ़ अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड को कानूनी एवं प्रशासनिक मजबूती प्राप्त हुई। वक़्फ़ माफियाओं, दागदार प्रबंधकों और अवैध कब्जाधारियों के विरुद्ध कठोर अभियान चलाया गया। वक़्फ़ संपत्तियों को दागदार हाथों से मुक्त कर स्वच्छ और जवाबदेह प्रबंधन को सौंपने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए गए। समानांतर वक़्फ़ बोर्ड चलाकर वक़्फ़ संपत्तियों को हानि पहुँचाने वाले तत्वों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई। वक़्फ़ को हानि पहुँचाने वाले प्रबंधकों के विरुद्ध कुल 41 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली के लिए आरआरसी/वसूली नोटिस जारी किए गए और वसूली की कार्यवाही भी की गई। इस क्रम में वक़्फ़ यतीमखाना शाहजहांनी, भोपाल के प्रबंधक को 28 करोड़ 96 लाख रुपये का वसूली नोटिस जारी किया गया, जो देश के वक़्फ़ इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा वसूली नोटिस माना जा रहा है। वक़्फ़ मदर गेट उज्जैन के प्रबंधन के विरुद्ध 7 करोड़ 21 लाख रुपये की वसूली के लिए कार्रवाई की गई। वक़्फ़ जामा मस्जिद, बीना बजरिया सागर के प्रबंधकों के विरुद्ध 1 करोड़ 84 लाख रुपये की वसूली का नोटिस जारी कर कार्यवाही की गई। वक़्फ़ बड़वाली चौकी, इंदौर प्रकरण में 1 करोड़ 24 लाख रुपये की वसूली की कार्रवाई की गई। इसी क्रम में वक़्फ़ हिंदू अनाथालय, भोपाल के प्रबंधन पर 1 करोड़ 5 लाख रुपये की वसूली के लिए आरआरसी जारी की गई। वक़्फ़ अंजुमन इस्लामिया, जबलपुर के पूर्व अध्यक्ष प्यारे साहब द्वारा वक़्फ़ को पहुँचाई गई 81 लाख 43 हजार रुपये की हानि की वसूली के लिए भी नोटिस जारी किया गया। इन कार्यवाहियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नवीन वक़्फ़ बोर्ड वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। वक़्फ़ को हानि पहुँचाने वाले किसी भी व्यक्ति, माफिया या दागदार प्रबंधन के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई निरंतर जारी है। अब सभी वक़्फ़ संपत्तियां दर्ज है ऑनलाइन केन्द्र सरकार द्वारा नये संशोधन कानून से वक़्फ़ संपतियों पर बैठे कब्जाधारियों को भी सोचने पर मजबूर होना पड़ा है। सभी संपत्तियां ऑनलाइन दर्ज है, इस कारण कहीं कोई गड़बड़ी नहीं कर सकता, इस बात की दहशत भी वक़्फ़ माफियाओं में देखने को मिली है। वक़्फ़ संपतियों के डिजिटलीकरण के परिणामस्वरूप पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित हुई है। इससे अनैतिक गतिविधियां करने वाले हतोत्साहित हुए। कृषि भूमियों की समय पर नीलामी की गई, जिससे राजस्व में वृद्धि हुई और इनका परिणाम आज सबसे सामने है। समाज के हर वर्ग में इसकी सराहना हो रही है। म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड के इतिहास में पहली बार हुआ पौधरोपण का निर्णय म.प्र. वक़्फ़ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने बताया कि इस वर्ष मध्यप्रदेश वक़्फ़ बोर्ड के इतिहास में पहली बार यह निर्णय लिया गया है कि वक़्फ़ बोर्ड की निगरानी में पर्यावरण को संरक्षित करने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में वक़्फ़ बोर्ड की जमीनों पर पांच लाख पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया है। समाज के हर वर्ग और प्रत्येक व्यक्ति से अपने पूर्वजों के नाम पर एक पौधा अवश्य लगाने का अनुरोध किया जा रहा है। पौध-रोपण के बाद उनकी सही देखभाल के लिए जिलेवार जिम्मेदारी तय की जाएगी और अच्छा कार्य करने वालों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।

अब उम्र नहीं देख रही थायराइड बीमारी, किशोर और युवा भी तेजी से हो रहे प्रभावित

 फतेहाबाद बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के बीच थाइराइड की बीमारी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। पहले जहां इसे बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, वहीं अब युवा और किशोर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन तीन से चार नए मरीज थाइराइड संबंधी समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें महिलाओं के साथ युवा वर्ग की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों के अनुसार समय रहते जांच और उपचार न कराया जाए तो यह बीमारी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है।थाइराइड गले के सामने मौजूद एक छोटी ग्रंथि होती है, जो शरीर में हार्मोन बनाने का काम करती है। यही हार्मोन शरीर की ऊर्जा, वजन, हृदय गति, पाचन और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करते हैं। जब यह ग्रंथि जरूरत से कम या अधिक हार्मोन बनाने लगती है तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। हार्मोन कम बनने की स्थिति को हाइपोथाइराइड और अधिक बनने को हाइपरथाइराइड कहा जाता है। दोनों ही स्थितियां स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। थकान, वजन बढ़ना और चिड़चिड़ापन हैं प्रमुख संकेत लगातार थकान रहना, अचानक वजन बढ़ना या घटना, बाल झड़ना, हाथ कांपना, नींद कम आना, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन तेज होना और गले में सूजन इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी गड़बड़ी और गर्भधारण में परेशानी भी थाइराइड के कारण हो सकती है। वहीं बच्चों और युवाओं में यह बीमारी पढ़ाई, मानसिक एकाग्रता और शारीरिक विकास पर असर डाल सकती है। इलाज में लापरवाही पड़ सकती है भारी चिकित्सकों का कहना है कि कई लोग शुरुआत में इसे सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक उपचार न मिलने पर यह बीमारी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मोटापा, मानसिक तनाव और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह से इस बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है। मरीजों को बिना डाक्टर की सलाह दवा बंद नहीं करनी चाहिए। थाइराइड से बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां     संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।     आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग करें।     नियमित व्यायाम और योग करें।     तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।     पर्याप्त नींद लें और दिनचर्या नियमित रखें।     वजन और स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच करवाएं।     लगातार थकान या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।     जागरूकता और समय पर उपचार से थाइराइड को नियंत्रित किया जा सकता है। लापरवाही बरतने पर यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। पहले केवल 50 साल के बाद यह बीमारी देखने को मिलती थी, लेकिन अब तो युवा इसकी चपेट में आ रहे है। -डॉ. मनीष टूटेजा, छाती रोग विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल।  

सीएमओ ने कहा- पहली जांच रिपोर्ट सही है, जिन बिंदुओं पर चर्चा हुई, उन पर फिर से करेंगे जांच

कानपुर.  कानपुर में शनिवार को पुलिस कमिश्नर ऑफिस में अर्धसैनिक बल आईटीबीपी के जवानों की हलचल के मामले को लेकर तस्वीर अब साफ हो गई है। दरअसल,  जवान अपने साथी विकास सिंह की मां के इलाज में कथित लापरवाही और अस्पताल पर कार्रवाई न होने से नाराज थे। इसी सिलसिले में कमांडेट गौरव प्रसाद पुलिस कमिश्नर के साथ बात करने आए थे। इस बातचीत में सीएमओ भी शामिल हुए। सीएमओ, पुलिस कमिश्नर और आईटीबीपी कानपुर कमांडेंट के बीच इस संबंध में लंबी बातचीत चली। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी से इस प्रकरण में दोबारा स्पष्ट रिपोर्ट मांगी गई है। कमिश्नरेट के घेराव की बात निराधार एडिशनल पुलिस कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) विपिन ताडा ने अर्धसैनिक बल के जवानों द्वारा कमिश्नरेट परिसर को घेरने की बात से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि आईटीबीपी का जवान बात करने के लिए अपने कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आया था। उस दौरान उनके साथी बाहर खड़े थे। इस पर उनसे बात की गई तो उन्होंने जवानों को वापस भेज दिया. विपिन टाडा ने यह भी बताया कि इस मामले में पुलिस कमिश्नर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से दोबारा स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच, तथ्यों के आधार पर होगी और अगर लापरवाही साबित हुई तो क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। आईटीबीपी का जवान कुछ दिन पहले आवेदन लेकर आया था, जिसमें आरोप था कि अस्पताल द्वारा लापरवाही पूर्वक इलाज करने के कारण उनकी मां का हाथ काटना पड़ा। मामला स्वास्थ्य विभाग का होने के कारण आवेदन मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजा गया था। उनके अनुसार डॉक्टरों की कमेटी गठित कर सभी पहलू की जांच कराई गई थी, लेकिन जो रिपोर्ट आई, उस पर बात करने के लिए जवान अपने अधिकारियों को लेकर आया। उसने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जवान बातचीत के बाद फिर से जांच के लिए राज़ी हुए हैं। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। कमांडेंट ने कहा- पुलिस से पूरा सपोर्ट आईटीबीपी के कानपुर कमांडेंट गौरव प्रसाद ने बताया कि हमारे जवान की मां का हाथ काटे जाने की मेडिकल जांच रिपोर्ट पर बातचीत करने के लिए पुलिस कमिश्नर से अप्वाइंटमेंट लिया गया था। इसीलिए हमारे अधिकारी व जवान आए थे। मैं अंदर बैठा था, बाहर जवान खड़े थे। शायद इसे ग़लत रूप में ले लिया गया। घेराव की बात निराधार है। हमें पुलिस कमिश्नर की तरफ से पूरा सपोर्ट मिल रहा है। सीएमओ ने जहां, कुछ बिंदुओं पर दोबारा जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि हम लोगों ने आपस में बात की है। जो जांच रिपोर्ट दी गई है, वह सही है, लेकिन जिन बिंदुओं आज बात हुई है, उन पर फिर से जांच करेंगे। इसके बाद फाइनल जांच रिपोर्ट दी जाएगी.  यह है पूरा मामला मूल रूप से फतेहपुर के अलीमऊ गांव के रहने वाले विकास सिंह आईटीबीपी में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं। मौजूदा समय में उनकी पोस्टिंग महाराजपुर आईटीबीपी कैंप में है। विकास के मुताबिक, मां निर्मला देवी (56) को सांस लेने में दिक्कत थी। उन्हें कब्ज और कमजोरी की भी शिकायत थी। सबसे पहले मां को आईटीबीपी अस्पताल महाराजपुर में दिखाया था। वहां पर प्राथमिक उपचार के बाद ITBP के पैनल में शामिल अस्पताल यानी हायर सेंटर रेफर किया गया था। इसके बाद इलाज के लिए कानपुर के एक निजी अस्पताल में एडमिट कराया था। मां को वेंटीलेटर पर रखा गया था। विकास का आरोप है कि इलाज के दौरान मां को गलत इंजेक्शन लगा दिया गया। इसकी वजह से उनका हाथ काला पड़ गया और सूजन लगातार बढ़ती जा रही थी। मां की हालत जब बिगड़ने लगी तो उन्हें बिठूर रोड बैकुंठपुर स्थिति दूसरे निजी अस्पताल में एडमिट कराया, जहां उनका हाथ काटना पड़ा।

जैसलमेर के डांडेवाला फील्ड में नेचुरल गैस की खोज, ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

जयपुर दुनियाभर में ऊर्जा संकट के बीच राजस्थान से खुशखबरी मिली है. सीमावर्ती जिले जैसलमेर में नेचुरल गैस का भंडार मिला है. जैसलमेर बेसिन स्थित डांडेवाला फील्ड में ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने नए प्राकृतिक गैस भंडार की सफल खोज की है. इस उपलब्धि को भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. डांडेवाला क्षेत्र के सानू फॉर्मेशन से पहली बार प्राकृतिक गैस का सफल प्रवाह शुरू हुआ है. हर दिन 25 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर उत्पादन परीक्षण के दौरान यहां से करीब 25 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन गैस उत्पादन दर्ज किया गया. ऑयल इंडिया लिमिटेड के अनुसार, कंपनी ने इस कुएं की ड्रिलिंग करीब 950 मीटर की गहराई तक की थी. प्रारंभिक तकनीकी मूल्यांकन और भूवैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर लगभग 75 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस संसाधन होने की संभावना जताई जा रही है. केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 'एक्स' पर जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है और राजस्थान में मिली यह सफलता ऊर्जा आत्मनिर्भरता के अभियान को नई गति देगी. मरुस्थल में मौजूद हो सकते हैं कई बड़े भंडार खास बात यह है कि डांडेवाला क्षेत्र में पहले पारंपरिक गैस उत्पादन होता रहा है. लेकिन सानू फॉर्मेशन में पहली बार गैस की मौजूदगी सामने आई है. इस नए गैस भंडार की खोज के बाद रेगिस्तानी इलाके के लिए उम्मीद जग गई है. संभावना है कि मरुस्थल में कई बड़े ऊर्जा संसाधन मौजूद हो सकते हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच आई यह सफलता देश के लिए राहत की खबर मानी जा रही है. वर्तमान में भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में जैसलमेर की यह खोज रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है.