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शिक्षा में टेक्नोलॉजी क्रांति! 600 विद्यालयों में ड्रीम लैब्स स्थापित करेगा यूपी सरकार-नेल्को समझौता

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के  नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूली शिक्षा को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। इसी क्रम में समग्र शिक्षा (माध्यमिक), माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा शनिवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, लखनऊ में नेल्को लिमिटेड (टाटा एंटरप्राइज) एवं अग्रणी औद्योगिक समूह के साथ 600 राजकीय माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अत्याधुनिक ड्रीम लैब्स (डिज़ाइन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग) की स्थापना हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी की उपस्थिति में किए गए। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि यह समझौता केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के युवाओं के भविष्य में निवेश है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं को देखते हुए राज्य के विद्यार्थियों को इंडस्ट्री 4.0 आधारित कौशलों से लैस करना समय की मांग है। ड्रीम लैब्स इस दिशा में एक सशक्त माध्यम बनेंगे, जहाँ विद्यार्थी पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक एवं रोजगारपरक कौशल भी अर्जित करेंगे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने अपने संबोधन में कहा कि यह पहल व्यावसायिक शिक्षा को नई दिशा देने वाली है। उन्होंने हब एवं स्पोक मॉडल के प्रभावी संचालन, मशीनरी स्थापना, प्रशिक्षकों की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति तथा परिणाम आधारित निगरानी पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआत जितनी मजबूत होती है, उतना ही आवश्यक है कि हम उसे सफल परिणति तक पहुंचाएं, विशेषकर आकांक्षी जनपदों में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। इस परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जनपदों में कुल 600 विद्यालयों (150 हब एवं 450 स्पोक विद्यालय) को शामिल किया गया है। प्रथम चरण में 18 हब एवं 54 स्पोक विद्यालय (कुल 72), द्वितीय चरण में 36 हब एवं 108 स्पोक विद्यालय (कुल 144) तथा तृतीय चरण में 96 हब एवं 288 स्पोक विद्यालय (कुल 384) में ड्रीम लैब्स स्थापित किए जाएंगे। इन ड्रीम लैब्स को आधुनिक नवाचार एवं कौशल विकास केन्द्रों के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), 3डी प्रिंटिंग, उन्नत विनिर्माण, बैटरी चालित विद्युत वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा, ड्रोन प्रौद्योगिकी तथा डिज़ाइन थिंकिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) तथा स्किल इंडिया मिशन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, समस्या समाधान क्षमता, तकनीकी दक्षता एवं उद्यमिता कौशल विकसित करना है, ताकि वे भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धी बन सकें। पांच वर्षीय साझेदारी मॉडल के अंतर्गत संचालित इस परियोजना में नेल्को लिमिटेड के नेतृत्व में औद्योगिक समूह द्वारा अत्याधुनिक मशीनरी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सॉफ्टवेयर एवं रखरखाव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही उद्योग विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ शिक्षकों का क्षमता निर्माण भी सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे यह मॉडल दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके। कार्यक्रम में यास्कावा, मास्टरकैम, 3डी सिस्टम्स, अज्नालेंस, एसीई माइक्रोमैटिक सहित विभिन्न वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता करते हुए इस पहल को शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत सेतु बताया। उन्होंने कहा कि ड्रीम लैब्स विद्यार्थियों को वास्तविक औद्योगिक अनुभव प्रदान कर उन्हें रोजगार एवं उद्यमिता के बेहतर अवसरों से जोड़ेगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को “कुशल, आत्मनिर्भर एवं नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था” के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा आने वाले समय में प्रदेश के विद्यालयों से नई पीढ़ी के तकनीकी विशेषज्ञ, नवप्रवर्तक एवं उद्यमी तैयार होंगे। अपर निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) सुरेन्द्र कुमार तिवारी तथा अपर राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कान्त पाण्डेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

यूपी में बिजली आपूर्ति सुधार पर जोर, फीडर-वाइज मॉनिटरिंग के आदेश

लखनऊ यूपी में भीषण गर्मी में बिजली संकट और राजधानी लखनऊ से लेकर छोटे जिलों तक मचे हाहाकार को देखते हुए सीएम योगी ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। सीएम योगी ने रविवार को बिजली अधिकारियों को तलब कर आपूर्ति से लेकर वितरण तक की स्थिति जानी। अलग-अलग इलाकों के बारे में विश्लेषण किया और व्यवस्था सुधारने के लिए कई निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को बिजली संकट का सामना न करना पड़े। इसके लिए सभी स्तरों पर सतत मॉनिटरिंग की जाए। फीडर वाइज मॉनिटरिंग करें और जवाबदेही भी तय करें। बैठक में ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत के साथ ही ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन व सभी डिस्कॉम भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता को और सुदृढ़ बनाने और गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए उत्पादन इकाइयों की अधिकतम क्षमता का उपयोग किया जाए और सभी संयंत्रों में तकनीकी दक्षता और रखरखाव व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। ट्रांसमिशन नेटवर्क को करें मजबूत मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क को और अधिक मजबूत, आधुनिक एवं भरोसेमंद बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था की मजबूती के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा को न्यूनतम रखने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय विद्युत गृहों की 9,120 मेगावाट क्षमता शामिल है, जबकि जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट क्षमता उपलब्ध है। इसके अलावा मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं से संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से 3,742 मेगावाट क्षमता राज्य को प्राप्त हो रही है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022 की तुलना में वर्ष 2026 तक उत्पादन निगम की स्थापित क्षमता में 86 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा गैर पारंपरिक ऊर्जा विकल्पों से लगभग 10 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन हो रहा है। वितरण व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह के साथ ही उपभोक्ता केंद्रित बनाया जाए। उन्होंने फीडर वाइज जवाबदेही तय करने के निर्देश देते हुए कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित होने या शिकायत निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आंधी-तूफान और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों के बावजूद त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखा जाए। बिजली खरीद और आपूर्ति प्रबंधन दुरुस्त करें मुख्यमंत्री ने बढ़ती मांग के अनुसार बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी संभावित स्रोतों से खरीद और आपूर्ति प्रबंधन के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने भविष्य की मांग को देखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर बनाने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने उपभोक्ता सेवाओं को और अधिक तकनीक आधारित तथा पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। सही जानकारी उपभोक्ताओं को दें मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को हेल्पलाइन कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण कर व्यवस्था की पड़ताल करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में आमजन को समयबद्ध और सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर केवल समस्या दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को यह भी स्पष्ट रूप से बताया जाए कि समाधान कब तक होगा।

बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के लिए बनेगा डिटेंशन सेंटर, बंगाल सरकार का बड़ा कदम

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए विशेष 'होल्डिंग सेंटर' बनाने के  निर्देश जारी किए हैं. शुभेंदु सरकार की ओर से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों को बनाने के लिए सही जगह की पहचान करने और आगे की कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने को कहा है. प्रशासन का फोकस सीमावर्ती जिलों और उन इलाकों पर है, जहां अवैध प्रवासियों के छिपे होने की ज्यादा उम्मीद रहती है. डिपोर्ट होने तक सेंटरों में रखे जाएंगे घुसपैठिए सरकार के बनाए जा रहे इन होल्डिंग सेंटरों का मकसद अवैध रूप से रह रहे लोगों पर कड़ी नजर रखना है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को सीधे जेल में रखने के बजाय इन सेंटरों में ट्रांसफर किया जाएगा. जब तक इन पकड़े गए विदेशी नागरिकों की पहचान की पुष्टि करने और उन्हें कानूनी रूप से उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें इन्हीं होल्डिंग सेंटरों में रखा जाएगा. चुनाव प्रचार के दौरान किया था ये वादा बता दें कि बीजेपी ने इसी साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालने का वादा किया था. अमित शाह ने अपने एक संबोधन में साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म किया, उसी तरह पार्टी बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह से खत्म कर देगी. अब राज्य में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, पार्टी अपने उस वादे को पूरा करने में जुट गई है.

जमीन के नीचे छिपा था नक्सलियों का जखीरा, सुकमा में टीम ने किया ध्वस्त

सुकमा. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की सीमा से लगे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में माओवाद विरोधी अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने विशेष सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सली डंप का खुलासा किया। डंप से हथियार निर्माण में इस्तेमाल होने वाली बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद की गई। दरअसल, पुलिस और बीडीडीएस टीम आत्मसमर्पित माओवादियों से मिली गोपनीय सूचना के आधार पर पोमके-बिनागुंडा क्षेत्र के जंगलों में विशेष सर्च ऑपरेशन पर निकली थी। इसी दौरान टीम ने जमीन के अंदर छिपाकर रखे गए नक्सली डंप का खुलासा किया। इसी के साथ ही मौके से लेथ मशीन, बीजीएल पाइप, 12 बोर पाइप, इन्वर्टर, जनरेटर, बैटरी, ग्राइंडिंग मशीन, ड्रिलिंग मशीन, जिग सॉ मशीन, प्रेशर पंप, सोलर पैनल और करीब 20 फीट फुटबॉल पाइप सहित अन्य सामग्री बरामद की। अधिकारियों के अनुसार, माओवादी इन उपकरणों का उपयोग हथियार बनाने और सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश को अंजाम देने के लिए करते थे। पुलिस ने मौके पर ही बरामद सभी सामग्री को नष्ट कर दिया। यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के मार्गदर्शन में विशेष अभियान पथक और बीडीडीएस जवानों द्वारा संयुक्त रूप से की गई। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में माओवाद विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा।

अब प्राइवेट केंद्रों पर भी फ्री अल्ट्रासाउंड, नूंह की गर्भवती महिलाओं को मिली राहत

नूंह. जिला स्वास्थ्य विभाग ने नूंह के नागरिकों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार,प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत जिले के प्रमुख निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों को स्वास्थ्य विभाग के पैनल में शामिल किया गया है। अब सरकारी अस्पतालो से रेफर की गई गर्भवती महिलाओं को इन निजी केंद्रों पर पूरी तरह निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधाएं मिलेंगी। सरकार ने इसके लिए प्रति अल्ट्रासाउंड 330 रुपये की दर तय की है, जिसका भुगतान सीधे विभाग द्वारा किया जाएगा। वहीं मरीजों से कोई भी शुल्क नहीं लिया जा सकता। यह सुविधा 31 मार्च 2027 तक जारी रहेगी। गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी दिशा-निर्देश 18 से 19 सप्ताह की जांच अनिवार्य: प्रत्येक रेफर की गई महिला को गर्भावस्था के 18वें से 19वें सप्ताह के बीच कम से कम एक मुफ्त अल्ट्रासाउंड प्रदान किया जाएगा। यह जांच गर्भ में पल रहे शिशु की किसी भी जन्मजात विकृति या अन्य जटिलताओं का समय पर पता लगाने के लिए बेहद जरूरी है। विशेष दिनों में प्राथमिकता: हर महीने की 9, 10, 23 और 30 तारीख को रेफर की गई महिलाओं को इन निजी केंद्रों पर जांच के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। शनिवार को पहले दिन ही देवांश अल्ट्रासाउंड केंद्र पर छह महिलाओं का निशुल्क अल्ट्रासाउंड किया गया। देवांश हॉस्पिटल की संचालिका डॉ. प्रियंका ने बताया कि सरकार द्वारा जारी आदेशों का नियमानुसार पालन किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस व्यवस्था के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अब दूर दराज के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उन्हें अपने नजदीकी ही उच्च स्तरीय जांच की सुविधा बिल्कुल मुफ्त मिल सकेगी। फिरोजपुर झिरका खंड     न्यू वाधवा नर्सिंग होम,     रौनक अल्ट्रासाउंड सेंटर     दुर्गा देवी अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक सेंटर     प्राइम डॉयग्नोस्टिक्स     गोयल अल्ट्रासाउंड     डॉ. अरोड़ा अल्ट्रासाउंड नूंह खंड      आर.जी. अल्ट्रासाउंड सेंटर     मलिक हॉस्पिटल     महाजन डॉयग्नोस्टिक सेंटर     डॉ. विशाखा इमेजिंग सेंटर     गोयल अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक्स सेंटर      सिटी डॉयग्नोस्टिक अल्ट्रासाउंड सेंटर      मेसर्स एएनएच 3डी/4डी अल्ट्रासाउंड     भारत अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक सेंटर पुन्हाना खंड       बी.एस. अल्ट्रासाउंड सेंटर      सहारा अल्ट्रासाउंड सेंटर     न्यू भारत डॉयग्नोस्टिक सेंटर     तिरुपति डॉयग्नोस्टिक्स लैब व सीटी स्कैन      वरदान अल्ट्रासाउंड सेंटर      न्यू प्राइम अल्ट्रासाउंड सेंटर पिनंगवा खंड     मंगला अल्ट्रासाउंड सेंटर     डॉ. ऊषा बत्रा मेमोरियल अल्फा हॉस्पिटल     डॉ. हिम्मत राय मेमोरियल हॉस्पिटल तावडू खंड     माडर्न अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक सेंटर     डॉ. ऊषा बत्रा मेमोरियल अल्फा हॉस्पिटल     न्यू ओम डॉयग्नोस्टिक     देवांश अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक्स सेंटर गर्भ की जांच सरल होगी – क्योंकि सरकारी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड की पुख्ता व्यवस्था नहीं है, इसलिए यह फैसला लिया गया है, सरकारी केंद्रों पर आने वाली गर्भवति महिलाओं को जांच के लिए भेजा जाएगा प्राईवेट केंद्र पर। इससे महिलाओं की गर्भ की जांच सरल होगी। – डॉ ज्योत्सना, सीएमओ नूंह

थाने में कबाड़ माफिया की खातिरदारी पर बवाल, वायरल फोटो ने उठाए सवाल

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में कबाड़ माफिया को थाने के अंदर VIP खातिरदारी देने का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें कबाड़ माफिया अकबर खान कोनी थाने के अंदर चाय पीते हुए नजर आ रहा है। इस तस्वीर ने पुलिस की कार्यप्रणाली और दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। वायरल तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि आरोपी अकबर खान थाने के भीतर आराम से कुर्सी पर बैठा हुआ है और सामने पुलिसकर्मी उसकी सेवा भाव में नजर आ रहे हैं। इस ‘VIP खातिरदारी’ को देखकर ऐसा कतई नहीं लग रहा कि वह कोई आरोपी है। बंद कमरों में चर्चा तेज है कि कबाड़ माफिया को कोनी पुलिस का खुला संरक्षण प्राप्त है। आरोप यह भी है कि हर महीने बंधी रकम के एवज में इस अवैध कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस मामले में प्रधान आरक्षक बालेश्वर तिवारी और आरक्षक अनुज जांगड़े की भूमिका पर गंभीर उंगलियां उठ रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि महज दो दिन पहले ही बिलासपुर एसपी ने जिले के सभी थाना प्रभारियों को अवैध कबाड़ियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन कोनी थाना क्षेत्र में अवतार पैलेस के सामने संचालित इस कबाड़ दुकान पर कार्रवाई के नाम पर पुलिस ने महज 170 बीएनएस (BNS) के तहत औपचारिक कार्रवाई करके खानापूर्ति कर दी। इस पूरे विवाद पर एडिशनल एसपी (ASP) पंकज पटेल का बयान सामने आया है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि आरोपी को कोई VIP ट्रीटमेंट नहीं दिया जा रहा था, बल्कि उसे दस्तावेजों की जांच के लिए थाने बुलाया गया था। इसके साथ ही पुलिस ने दावा किया है कि विवादित कबाड़ दुकान को फिलहाल सील कर दिया गया है।

सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पीएम पोषण योजना से बदल रही उत्तर प्रदेश की तस्वीर

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में अब पढ़ाई के साथ-साथ पोषण, संस्कार और उज्ज्वल भविष्य की नई कहानी लिखी जा रही है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (पीएम पोषण योजना) आज प्रदेश के करोड़ों बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह योजना केवल 'मिड-डे मील' तक सीमित नहीं रही, बल्कि 'पोषण से राष्ट्र निर्माण' का व्यापक अभियान बन गई है। प्रदेश के लगभग 1.42 लाख राजकीय, परिषदीय एवं सहायता प्राप्त प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 1.46 करोड़ से अधिक बच्चों को प्रतिदिन गर्म, ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यह व्यवस्था बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, मानसिक विकास और नियमित विद्यालय उपस्थिति को सुनिश्चित कर रही है। विद्यालयों में बढ़ी उपस्थिति, मजबूत हुआ भरोसा पीएम पोषण योजना का सकारात्मक प्रभाव विद्यालयों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। योजना के प्रभाव से नामांकन और उपस्थिति में निरंतर सुधार हुआ है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना बच्चों की शिक्षा को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सामाजिक समरसता और समानता का संदेश विद्यालयों में एक साथ बैठकर भोजन करने की व्यवस्था सामाजिक समरसता और समानता का भी सशक्त संदेश दे रही है। विभिन्न वर्गों और समुदायों के बच्चे एक साथ भोजन कर 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूत कर रहे हैं। 3.53 लाख रसोइयां बनीं ‘पोषण प्रहरी’ प्रदेश में पीएम पोषण योजना के सफल संचालन में 3.53 लाख से अधिक रसोइयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ये रसोइयां प्रतिदिन स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन तैयार कर बच्चों के स्वास्थ्य की मजबूत आधारशिला रख रही हैं। रसोइयों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता योगी सरकार ने रसोइयों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय के अतिरिक्त ₹1000 अतिरिक्त मानदेय उपलब्ध कराया है। साथ ही, परिधान मद में ₹500 प्रति रसोइया की सहायता भी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश की 93 प्रतिशत से अधिक रसोइयों को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जा चुका है, जिससे उन्हें और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिल रहा है। गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष जोर प्रदेश सरकार द्वारा पीएम पोषण योजना में गुणवत्ता और स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। भोजन की नियमित मॉनिटरिंग के साथ-साथ रसोइयों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। स्वच्छ भोजन निर्माण, पोषण संतुलन और खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। रसोई से मंच तक पहुंची प्रतिभा  योगी प्रदेश सरकार रसोइयों को भोजन तैयार करने वाली कार्यकर्ता से आगे बढ़कर 'पोषण प्रहरी' के रूप में पहचान दे रही है। इसी उद्देश्य से विभिन्न जनपदों में ‘रसोइया पाक-कला प्रतियोगिताओं’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रथम पुरस्कार 3500 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 2500 रुपये एवं तृतीय पुरस्कार 1500 रुपये के अलावा प्रतिभाग करने वाली सभी रसोइयों को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। वाराणसी में आयोजित पाक-कला प्रतियोगिता में रसोइयों ने स्वाद, स्वच्छता और पौष्टिकता के उत्कृष्ट समन्वय का प्रदर्शन किया। विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित कर सरकार ने यह संदेश दिया कि बच्चों के भविष्य को संवारने वालों का सम्मान सर्वोपरि है। पोषण से विकसित उत्तर प्रदेश का मजबूत संकल्प पीएम पोषण योजना आज उत्तर प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी मॉडल बन चुकी है। यह योजना बच्चों को बेहतर पोषण, नियमित शिक्षा और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे तक बेहतर पोषण, प्रत्येक विद्यालय तक गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं और प्रत्येक परिवार तक शिक्षा व्यवस्था के प्रति विश्वास को मजबूत किया जाए। इसी उद्देश्य के अंतर्गत विद्यालयों में पोषण, गुणवत्ता और आधुनिक संसाधनों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आज विद्यालयों की थालियों में परोसा जा रहा भोजन केवल अन्न नहीं, बल्कि विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य का मजबूत संकल्प बन चुका है।

यात्रियों के लिए खुशखबरी, खंडवा होकर चलेगी एक और जयपुर-हैदराबाद वीकली ट्रेन

खंडवा/भोपाल. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जयपुर-हैदराबाद के बीच रेल यात्रियों की मांग को देखते हुए स्थाई साप्ताहिक ट्रेन की सुविधा दी है। इस ट्रेन के स्थाई शुरू होने से जयपुर हैदराबाद के बीच यात्रा करने की आम जनों को सुविधा मिलेगी। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के प्रयासों से खंडवा को अनेक ट्रेनों के स्टापेज मिल रहे हैं। मध्य रेल समिति सदस्य मनोज सोनी ने बताया कि खंडवा स्टेशन से देशभर के शहरों से सीधी रेल कनेक्टिविटी सुलभ मिल सके इसको लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। रेलवे द्वारा समय समय पर त्योहारों और पिक सीजन। में स्पेशल ट्रेनें चलाई जाती है। जिसे सीजन, त्यौहार खत्म होने पर बंद कर दिया जाता है। इसके अंतर्गत स्पेशल किराया ट्रेन 07019/20 जयपुर हैदराबाद साप्ताहिक चलाई जा रही थी। इसमें लगातार यात्रियों का रिस्पॉन्स मिल रहा था। अब रेलवे बोर्ड में इसे स्थाई साप्ताहिक चलाने का परिपत्र जारी किया है। 24 जुलाई 2026 से ट्रेन संख्या 17089 प्रति शुक्रवार हैदराबाद से रवाना होकर अगले दिन खंडवा प्रति शनिवार सुबह 9.25 बजे आगमन कर जयपुर के लिए रवाना होगी। वापसी में 26 जुलाई 2026 से ट्रेन संख्या 17090 प्रति रविवार जयपुर से निकलकर खंडवा प्रति सोमवार सुबह 11.30 बजे आकर हैदराबाद जाएगी ।इसके स्थाई परिचालन से रेल यात्रियों को स्पेशल का अतिरिक्त किराया नहीं चुकाना पड़ेगा। यात्रियों को नार्मल किराया देना होगा साथ ही स्पेशल ट्रेने अनेकों बार विलंब से चलती है। अब यह स्थाई होने से समय पर भी चलेगी। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया है। ट्रेन के स्टापेज हैदराबाद, सिकंदराबाद,कामारेड्डी,निजामाबाद, मूदखेड़, नांदेड़, पूर्णा जंक्शन, बसमत, हिंगोली, वाशिम, अकोला जंक्शन, मलकापुर, खंडवा जंक्शन, इटारसी, भोपाल, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बिजयनगर, अजमेर जंक्शन, मादार जंक्शन, किशनगढ़, फुलेरा और जयपुर। सप्ताह में चार दिन ट्रेन की सुविधा: 12719/20 जयपुर हैदराबाद द्वि साप्ताहिक 17019/20 हिसार जयपुर हैदराबाद साप्ताहिक 17089/90 जयपुर हैदराबाद साप्ताहिक (24 जुलाई से शुरू)

यूरेनियम और न्यूक्लियर प्रोग्राम बना बड़ा मुद्दा, ईरान-यूएस पीस डील पर बातचीत जारी

नई दिल्ली   ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी तनाव के बीच अब संभावित पीस डील की रूपरेखा सामने आने लगी है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज ने दावा किया है कि वॉशिंगटन ने तेहरान के सामने पांच बड़ी शर्तें रखी हैं, जिन पर समझौते की कोशिश चल रही है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ईरान में शांति समझौते पर बातचीत लगभग तय हो गई है और इसका जल्द ही ऐलान किया जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के ड्राफ्ट में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान के संवर्धित यूरेनियम का है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने 400 किलोग्राम हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को अमेरिका के हवाले करे. यही यूरेनियम लंबे समय से पश्चिमी देशों की चिंता का कारण बना हुआ है, क्योंकि इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने की दिशा में अहम माना जाता है. दूसरी बड़ी शर्त ईरान के न्यूक्लियर ढांचे को लेकर है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान सिर्फ एक न्यूक्लियर फैसिलिटी को चालू रखे, जबकि बाकी गतिविधियों पर रोक लगे. इसके अलावा अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि वह युद्ध में हुए नुकसान की कोई भरपाई या मुआवजा नहीं देगा. क्या ईरान को मिलेगा फ्रीज फंड? फार्स न्यूज की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका ने फिलहाल ईरान की विदेशों में जमा फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करने से इनकार कर दिया है. वहीं अलग-अलग मोर्चों पर सीजफायर को भी बातचीत की प्रगति से जोड़ा गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में एक अहम सुरक्षा क्लॉज भी शामिल है. इसमें कहा गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान या उसके सहयोगी गुटों पर हमला नहीं करेंगे. इसके बदले ईरान भी अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कोई प्रीएम्प्टिव यानी पहले हमला नहीं करेगा. हालांकि इन दावों पर अभी तक न तो अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही ईरान ने खुलकर पुष्टि की है. जंग खत्म करने के लिए ईरान की भी रखी पांच शर्तें ईरान ने भी इससे पहले दूसरे दौर की बातचीत के लिए अपनी पांच शर्तें रखी थीं. इनमें सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, खासकर लेबनान में संघर्ष रोकना, आर्थिक प्रतिबंध हटाना, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियां वापस करना, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देना शामिल था. अमेरिका-ईरान जंग की टाइमलाइन ईरान और अमेरिका के बीच 8 अप्रैल को सीजफायर हुआ था. इससे पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके बाद करीब 40 दिन तक संघर्ष चला. बाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच इस्लामाबाद में बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका. इसके बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच कई ड्राफ्ट प्रस्ताव एक्सचेंज हुए.

नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, योगी सरकार के प्रयास ला रहे रंग

लखनऊ.  सड़क सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद संजीदा हैं। हादसों को न्यूनतम करने की दिशा में वे समय-समय पर संबंधित विभागों की समीक्षा, सकारात्मक प्रयास, जागरूकता आदि पर जोर देते हैं। लिहाजा, सड़क सुरक्षा को लेकर योगी सरकार के प्रयास रंग ला रहे हैं। ई-डीएआर पोर्टल के मुताबिक, वर्ष 2025 की जनवरी से अप्रैल की समयावधि की अपेक्षा जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच दुर्घटनाओं और इससे होने वाली मृत्यु में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में पिछले वर्ष की तुलना में 3669 (21 प्रतिशत) दुर्घटनाएं कम हुई हैं, जबकि मृतकों की संख्या में भी 2212 (22 प्रतिशत) की कमी दर्शाई गई है। सीएम के निर्देश के उपरांत सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए लगभग 2000 स्थानों पर होर्डिंग लगाई गई और प्रचार-प्रसार के जरिए परिवहन विभाग आमजन को निरंतर जागरूक भी कर रहा है।   परिवहन निगम के 18 हजार से अधिक चालकों का हुआ चेकअप  सीएम योगी के निर्देश पर परिवहन निगम के चालकों की निरंतर स्वास्थ्य/नेत्र जांच की जा रही है। हर छमाही चेकअप किया जा रहा है। अप्रैल 2026 तक 18,975 वाहन चालकों का स्वास्थ्य परीक्षा किया जा चुका है। शेष 2560 चालकों की जांच भी चल रही है। सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत यूपीएसआरटीसी की बसों पर रेट्रो रिफ्लेक्टर टेप लगाया जा चुका है। ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण अनिवार्य किया गया है। वहीं 300 किमी. से अधिक यात्रा वाली बसों में दो चालक की ड्यूटी भी अनिवार्य की गई है। सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग/निगम काफी संजीदगी से प्रयासों को धरातल पर उतार रहा है।  जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) योजना भी हो रही कारगर  सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि को न्यूतनम करने के उद्देश्य से केंद्रीय सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के 20 जनपदों के 242 क्रिटिकल थानों को जीरो फैटेलिटी योजना के लिए चिह्नित किया गया था। यातायात निदेशालय के मुताबिक इस योजना के क्रियान्वयन के उपरांत 4 महीने में 566 व्यक्तियों की जान बचाई जा चुकी है। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों के 487 क्रिटिकल पुलिस थानों पर यह योजना लागू की गई है। इन 487 क्रिटिकल थानों में 573 क्रिटिकल कॉरिडोर टीम गठित की गई है। हर टीम में एक उपनिरीक्षक व 4 मुख्य आरक्षी/ आरक्षी (2865 पुलिसकर्मी) नियुक्त हैं, जो जीरो फैटेलिटी को सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रहे हैं।  होल्डिंग एरिया को भी किया गया चिह्नित  पहली जनवरी 2026 से 15 मई 2026 के बीच सभी 18 मंडलों मे होल्डिंग एरिया भी चिह्नित व नोटिफाइड किए गए। मंडलों में 656 होल्डिंग एरिया चिह्नित किए गए, इसमें से 630 को नोटिफाइड भी किया गया। आगरा मंडल में सर्वाधिक 121, बरेली में 103, मुरादाबाद में 75, आजमगढ़ में 62 होल्डिंग एरिया चिह्नित/नोटिफाइड किए गए हैं।  मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा को लेकर आम नागरिकों को निरंतर जागरूक कर रहा है। सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने की दिशा में संबंधित विभागों के साथ ठोस कदम भी उठाए जा रहे हैं। आम नागरिकों से भी निवेदन है कि हेलमेट, सीट बेल्ट व यातायात के नियमों का पालन करें। सड़क सुरक्षा, स्कूली वाहनों के फिटनेस आदि को लेकर जल्द ही फिर से अभियान प्रारंभ किया जाएगा।  आशुतोष निरंजन, परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश