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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल की सौजन्य मुलाकात

रायपुर  छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री  केदार कश्यप के नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच सामाजिक समरसता, जनकल्याण तथा छत्तीसगढ़ के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।       मुख्यमंत्री ने भी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के विकास, संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

ईरान डील के संकेत मिलते ही ट्रंप का नरम रुख, शहबाज शरीफ ने शुरू की तारीफों की बरसात

नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 60 दिनों के लिए युद्धविराम को बढ़ाया जा सकता है और इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट बिना किसी शुल्क के खुला रहेगा। इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के साथ समझौता लगभग अंतिम रूप ले चुका है और इसके अंतिम पहलुओं तथा विवरणों पर चर्चा चल रही है, जिसकी जल्द घोषणा की जाएगी। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने डोनाल्ड ट्रंप को बधाई देते हुए कहा कि उनके साथ फोन पर अच्छी चर्चा हुई है। क्या बोले शहबाज शरीफ शहबाज शरीफ ने कहा, डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, तुर्किए,एजिप्ट, यूएई, जॉर्डन और पाकिस्तान के साथ फोन पर बात की है। पाकिस्तान की ओर से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने फोन पर बात की और इस पूरी प्रक्रिया में डोनाल्ड ट्रंप के अथक प्रयास को सराहा है। इस चर्चा में मध्य एशिया में शांति के प्रसायसों को लेकर सकारात्मक बातचीत की गई है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान अगले चरण की वार्ता के लिए प्रयास करता रहेगा। होर्मुज से हटाई जाएँगी रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ने दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन का मसौदा साझा किया है। इसके तहत दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए वैध समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। इस अवधि में होर्मुज जलडमरूमध्य बिना किसी शुल्क के खुला रहेगा तथा ईरान वहां बिछाई गयी बारूदी सुरंगों को हटाने पर सहमत होगा, ताकि जहाजों की आवाजाही निर्बाध रूप से जारी रह सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाएगा और ईरान को तेल की स्वतंत्र बिक्री की अनुमति देने के लिए कुछ रियायतें देगा।रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि ईरान जितनी जल्दी होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाकर जहाजरानी बहाल करेगा, उतनी ही जल्दी नाकेबंदी समाप्त कर दी जाएगी। एक्सियोस ने बताया कि प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में ईरान की ओर से कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता, यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को निलंबित करने तथा उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाने पर बातचीत करने का प्रावधान मिल है। स्थिति के जानकार दो सूत्रों के हवाले से कहा गया कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को संवर्धन कार्यक्रम निलंबित करने और परमाणु सामग्री छोड़ने को लेकर रियायतों के दायरे पर 'मौखिक आश्वासन' दिये हैं। रिपोर्ट के अनुसार ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैन्य बल अगले 60 दिनों तक वहीं बने रहेंगे और यदि तेहरान अंतिम रूप से समझौता स्वीकार कर लेता है तो क्षेत्र से हट जाएंगे। एक्सियोस ने यह भी कहा कि अंतिम समझौता होने की स्थिति में अमेरिका 60 दिनों के भीतर ईरान की जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने पर चर्चा के लिए तैयार है। प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में हिज्बुल्ला और इजरायल के बीच सशस्त्र संघर्ष समाप्त करने का प्रावधान भी शामिल है।

तपती गर्मी में भी UP में नहीं थमी बिजली सप्लाई, योगी सरकार की सख्त निगरानी से व्यवस्था दुरुस्त

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में पड़ रही प्रचंड गर्मी के बीच योगी सरकार प्रदेशवासियों को निर्धारित शेड्यूल के अनुसार निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ऊर्जा विभाग लगातार बिजली व्यवस्था की निगरानी कर रहा है, जिससे आम लोगों को गर्मी के इस कठिन दौर में बड़ी राहत मिल रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उन्होंने प्रदेश के सभी डिस्कॉम के प्रबन्ध निदेशक से लेकर अधिशासी अभियन्ताओं से विद्युत आपूर्ति को लेकर विस्तृत जानकारी ली तथा उन्हें आवश्यक निर्देश दिये। यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने नोएडा, लखनऊ, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, मथुरा, फिरोजाबाद, झांसी, बरेली, उन्नाव, बनारस, अयोध्या, गोरखपुर, देवरिया और कानपुर (केस्को) के मुख्य अभियन्ताओं से विद्युत आपूर्ति के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बैठक में कहा कि इस समय भीषण गर्मी से लोग बेहाल हैं। ऐसे मौसम में सुचारु विद्युत आपूर्ति का अत्यधिक महत्व है। इसलिए सभी क्षेत्रों को निर्धारित शेड्यूल के अनुरूप विद्युत आपूर्ति प्राप्त हो। सभी अधिकारी एवं कार्मिक अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष रूप से सजगता बरतें। उपकेन्द्रों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में पेट्रोलिंग की जाए। जिन क्षेत्रों में रात्रि में अचानक लोड में अत्यधिक बढ़ोत्तरी होने के कारण ट्रांसफार्मर या लाइनों पर लोड बढ़ता है, उनको चिन्हित कर विजिलेन्स की टीम के साथ जांच अभियान चलाने के निर्देश दिये। बैठक के दौरान यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने ट्रांसफार्मर की क्षतिग्रस्तता, ट्रिपिंग एवं सामग्री उपलब्धता के बारे में भी पूछा। सभी मुख्य अभियन्ताओं का कहना था कि निर्धारित शेड्यूल के अनुरूप ग्रामीण एवं शहरों को क्रमशः 18 एवं 24 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। सभी सब स्टेशनों पर रात्रिकालीन ड्यूटी लगाई गयी है। वरिष्ठ अधिकारी भी देर रात्रि तक व्यवस्था की मॉनीटरिंग में लगाए गये हैं। पर्याप्त संख्या में सामग्री एवं अनुरक्षण कार्यों के लिए मैन पावर उपलब्ध है। अध्यक्ष डॉ. गोयल ने कहा कि लाइनों, सब स्टेशनों एवं ट्रांसफार्मर की नियमित जांच होती रहे। हेल्प लाइन नंबर 1912 पर आने वाली शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो। नए कनेक्शन के लिए झटपट पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों का भी शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें। मुख्य अभियंताओं ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में ट्रिपिंग एवं आपूर्ति बहाल करने के समय में सुधार हुआ है। ऐसे स्थान जहां पर रात्रि में अचानक लोड बढ़ता है उनको चिन्हित करके विजिलेन्स के साथ चोरी रोकने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके कारण कई स्थानों पर लोड कम हुआ है और विद्युत फाल्ट में भी कमी आई है . डॉ. गोयल ने निर्देशित किया कि संवेदनशील स्टेशनों पर अधिकारियों की तैनाती बढ़ाएं। रिले की सेटिंग ठीक कराएं। इसमें टेस्ट डिवीजन के कार्मिक अभियान के रूप में लगें। ट्रांसमिशन के साथ बेहतर ताल मेल रखें। निदेशक वितरण इसका रिव्यू करें। अध्यक्ष ने कहा कि गर्मी और लू के मौसम में सामान्य शटडाउन न लिया जाये। कहीं भी ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने, तार गिरने तथा ट्रिपिंग जैसी समस्याओं का बिना विलम्ब निस्तारण सुनिश्चित किया जाये। ट्रांसमिशन एवं वितरण के अधिकारी परस्पर सामंजस्य स्थापित करके कार्य करें जिससे ट्रांसमिशन के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित न हो। डॉ. गोयल ने कहा कि अधिकारी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में मौजूद रहें। अपना जनसम्पर्क अच्छा रखें। जन प्रतिनिधियों, मीडिया कर्मियों, उपभोक्ताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं का वाट्सएप ग्रुप बनाएं, जिसमें बिजली आपूर्ति सम्बन्धी आवश्यक सूचनाएं सबको मिलती रहें। अधिक विद्युत व्यवधान वाले क्षेत्रों में विशेष सजगता बरती जाए। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर वरिष्ठ अधिकारी स्वंय जाकर समस्याओं को समझें और उनका निराकरण करायें साथ ही संचार माध्यमों से उपभोक्ता को बतायें। यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने कहा कि विद्युत वितरण कार्यों से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी उपभोक्ताओं को विद्युत व्यवधान और आपूर्ति के बारे में सही जानकारी दें। उन्होंने कहा कि किसी की भी लापरवाही से विद्युत आपूर्ति प्रभावित होगी तो उस पर कार्रवाई होगी। बैठक को पावर कारपोरेशन के प्रबन्ध निदेशक नितीष कुमार ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने राजस्व वसूली बढ़ाने तथा बिजनेस प्लान की प्रगति तथा आगामी कार्य योजना के बारे में विस्तृत जानकारी ली तथा इसमें तेजी लाने के निर्देश दिये।

पटना: चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य भुगतान में दिखाई तेजी, लगभग पूरा हुआ भुगतान

पटना  गन्ना उद्योग विभाग की पहल पर चीनी मिलों ने किसानों से क्रय किए गए गन्ना मूल्य का 99.14 प्रतिशत राशि भुगतान कर दिया है। शेष बकाया राशि भुगतान करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। राज्य में संचालित दस चीनी मिलों द्वारा पेराई सत्र 2025-26 में किसानों से नौ अप्रैल 26 तक कुल 572.66 लाख क्विंटल गन्ना का क्रय किया गया था। इसके एवज में गन्ना किसानों को 213783.58 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। बताया जा रहा है कि गन्ना उद्योग विभाग ने गन्ना क्रय शुरू होने के साथ ही सभी चीनी मिल संचालकों को गन्ना मूल्य का भुगतान करने का निर्देश दिया था। ताकि किसानों को समय से गन्ना का पैसा मिल सके। इसके साथ ही विभाग द्वारा लगातार गन्ना किसानों को होने वाले भुगतान की निगरानी की जा रही थी। विभाग के अनुसार किसानों के कुल देय राशि 213783.58 करोड़ रुपये के विरुद्ध अब तक 211481.43 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है, जो देय राशि का 99.14 प्रतिशत है। विभाग के अनुसार गन्ना किसानों को देय राशि का भुगतान करने की लगातार मानीटरिंग की जा रही थी। चीनी मिल संचालकों ने भी तत्परता के साथ किसानों को देय राशि का भुगतान करने में रुचि ली, सुफल से अब तक 99.14 प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया गया है। शेष बकाया राशि का भुगातन करने की कार्रवाई जारी है।

उत्तराखंड में बदलता मौसम पैटर्न, ग्लेशियर पिघलने से बढ़ी चिंता

उत्तराखंड उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम से 4 किलोमीटर दूर कंचनगंगा के ऊपर ग्लेशियर टूटने की खबर है। हालांकि, इस घटना में किसी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है। हर वर्ष नीचे की तरफ खिसक रहा ग्लेशियर गर्मी में तापमान बढ़ते ही तेजी के साथ पिघलने लगता है। इस मामले में चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मार्च-अप्रैल में गिर रही ज्यादा बर्फ पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय में बर्फबारी का पैटर्न बदल रहा है। बर्फबारी के महीने माने जाने वाले जनवरी-फरवरी से ज्यादा बर्फ अब मार्च-अप्रैल में गिर रही है। इसका सीधा असर वाटर बैंक माने जाने वाले ग्लेशियरों पर पड़ेगा। इस पैटर्न के कारण ट्री लाइन भी लगातार ऊपर को खिसक रही है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ताजा शोध जर्मनी की एप्लाइड जियोमेटिक्स शोध पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ है। सर्दियों में कम बर्फबारी हिमालय में सर्दियों की तुलना में गर्मियों में ज्यादा हो रही बर्फबारी का कारण पश्चिमी विक्षोभ में आई असमानता है। सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने से बारिश और बर्फबारी में कमी आ रही है। गर्मियों में इसके बढ़ने से बर्फबारी के साथ बारिश, ओलावृष्टि और आपदाओं के खतरे बढ़े हैं। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पंकज चौहान कहते हैं कि बागेश्वर के पिंडारी और कफनी ग्लेशियर की तरह पूरा मध्य हिमालय इस बदलाव से जूझ रहा है। आर्थिक और सामाजिक नुकसान पर्यावरणविद् पद्मविभूषण डॉ. अनिल जोशी के मुताबिक, हिमालय में मौसम के बदले पैटर्न से आर्थिक और सामाजिक नुकसान का खतरा भी बढ़ा है। इससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी और अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं। पर्यटन और हॉर्टिकल्चर भी प्रभावित होगा। सामान्य से अधिक तापमान पिंडारी और कफनी ग्लेशियर क्षेत्र में इस साल सबसे अधिक 158 सेंटीमीटर बर्फ अप्रैल में गिरी है। मार्च में ये आकड़ा 84 सेंटीमीटर रहा, जबकि जनवरी में महज 96 सेंटीमीटर ही बर्फ पड़ी। दिसंबर में महज चार बार बर्फबारी हुई, वह भी बेहद ऊपरी क्षेत्र में। वैज्ञानिकों के मुताबिक अध्ययन क्षेत्र में बर्फबारी रिकॉर्ड करने लायक भी नहीं हुई। इससे ग्लेशियर और आसपास के क्षेत्र का तापमान भी सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। कुछ जगहों पर तापमान में 0.1 से बढ़कर 5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हुई है। कमजोर पड़ रहे ग्लेशियर डॉक्टर पंकज चौहान ने बताया कि मार्च-अप्रैल में हो रही बर्फबारी से ग्लेशियर खतरे में पड़ सकते हैं। चूंकि इन महीनों में तापमान अधिक रहता है इसलिए जिस गति से बर्फ पड़ती है, उसी गति से पिघल भी रही है और ग्लेशियर कमजोर पड़ रहे हैं। ये भविष्य में जलधाराओं को प्रभावित करेंगे, साथ ही आपदा के खतरों को भी बढ़ाएंगे।

मुख्यमंत्री योगी ने दिए त्वरित और जनकेंद्रित मौसम अलर्ट के निर्देश

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में मौसम संबंधी पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक, त्वरित तथा जनकेंद्रित बनाने के निर्देश दिए हैं। शनिवार को राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर दी गई सही सूचना अनेक लोगों का जीवन बचा सकती है। इसलिए मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी तंत्र को केवल तकनीकी व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों में “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” मजबूत करने, आईवीआरएस, पंचायत स्तर के लाउडस्पीकर, स्थानीय एफएम रेडियो, मोबाइल अलर्ट तथा सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग करने के निर्देश दिए। बैठक में 13 मई 2026 को आए भीषण आंधी-तूफान की समीक्षा प्रस्तुत की गई। बताया गया कि आईएमडी के मल्टी-हैजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम (एमएचईडब्ल्यूएस) द्वारा इस घटना की सात दिन पहले से निगरानी की जा रही थी। प्रारंभ में येलो वार्निंग जारी की गई, जिसे बाद में ऑरेंज वार्निंग तथा कई जिलों में रेड अलर्ट में अपग्रेड किया गया। चेतावनियों में तेज आंधी, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक रफ्तार वाली हवाओं की आशंका जताई गई थी। कई स्थानों पर हवा की गति 80 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई। बैठक में बताया गया कि भदोही, प्रयागराज, फतेहपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, रायबरेली, कानपुर नगर और उन्नाव सहित अनेक जिलों के लिए 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक की हवा चलने संबंधी नाउकास्ट अलर्ट जारी किए गए थे। “सचेत” प्लेटफॉर्म के माध्यम से कलर-कोडेड अलर्ट जिला प्रशासन, डीडीएमए, आपदा मित्रों और संबंधित विभागों तक पहुंचाए गए। प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय मोबाइल फोनों पर एसएमएस आधारित चेतावनियां भी भेजी गईं। पूरी घटना के दौरान लगातार एसएमएस अलर्ट जारी किए गए। स्थानीय टीवी चैनलों, एफएम रेडियो, व्हाट्सएप समूहों, ग्राम प्रधानों, लेखपालों तथा आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी व्यापक स्तर पर सूचना प्रसारित की गई। मुख्यमंत्री ने मौसम संबंधी पूर्व सूचना मिलने के बाद संबंधित जिलाधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि चेतावनी जारी करने के साथ-साथ लोगों में सुरक्षित व्यवहार को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। उन्होंने स्कूलों, पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही पेड़ों, बिजली के खंभों, होर्डिंग्स और कमजोर अस्थायी संरचनाओं की संवेदनशीलता का स्थानीय स्तर पर आकलन कर एसओपी तैयार करने को कहा। बैठक में बताया गया कि आईएमडी द्वारा डॉप्लर वेदर रडार, ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस), ऑटोमैटिक रेन गेज स्टेशन (एआरजी), लाइटनिंग सेंसर, सैटेलाइट इमेज तथा न्यूमेरिकल वेदर प्रिडिक्शन मॉडल्स के माध्यम से प्रदेश में मौसम की लगातार निगरानी की जा रही है। मीडियम रेंज फोरकास्ट (4-5 दिन), शॉर्ट रेंज फोरकास्ट (2-3 दिन) तथा नाउकास्ट (3 घंटे तक) स्तर पर थंडरस्टॉर्म और लाइटनिंग गतिविधियों का पूर्वानुमान जारी किया जाता है। प्रदेश में 450 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन तथा 2000 ऑटोमैटिक रेन गेज स्थापित किए जा चुके हैं। अलीगढ़, झांसी, लखनऊ, वाराणसी और आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि बरेली, देवरिया और प्रयागराज में अतिरिक्त रडार लगाने की प्रक्रिया जारी है। लखनऊ और प्रयागराज में विंड प्रोफाइलर रडार स्थापित किए जाने की कार्यवाही भी प्रगति पर है। बैठक में बताया गया कि यूएनडीपी के सहयोग से प्रदेश के 15 विभागों, सभी 75 जिलों तथा 20 प्रमुख नगरों के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान तैयार किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में 44 जिलों की 118 तहसीलों में लगभग 1800 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनके माध्यम से 2361 गांवों और 4824 मजरों में जनजागरूकता अभियान चलाया गया। “आपदा मित्र” स्वयंसेवकों को बीमा प्रमाण-पत्र वितरित किए गए हैं तथा नाव दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए 38 जिलों में 66,077 लाइफ जैकेट वितरित किए गए हैं।

गुरुद्वारा शहीदां साहिब में दर्दनाक हादसा, छत गिरने से 2 की मौत और 5 घायल

अमृतसर. अमृतसर में रविवार को गुरुद्वारा शहीद गंज बाबा दीप सिंह जी (शहीदां साहिब) में बड़ा हादसा हो गया। यहां निर्माणाधीन लंगर हॉल की छत की लोहे की प्लेटें अचानक टूटकर नीचे गिर गईं। हादसे के समय कई महिलाएं लंगर हॉल में सेवा कर रही थीं। जिसमें दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। मौके पर पहुंचे लोगों के अनुसार हादसा उस समय हुआ जब निर्माणाधीन लंगर हाल में सेवा का काम चल रहा था। अचानक छत की भारी लोहे की प्लेटें नीचे गिर पड़ीं। हादसे के बाद गुरुद्वारा परिसर में चीख-पुकार मच गई और लोगों में दहशत फैल गई। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। अमृतसर की पुलिस अधिकारी Amandeep Kaur ने बताया कि घायल महिलाओं का इलाज किया जा रहा है और अस्पताल में सभी डॉक्टर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में बड़ी संख्या में लोग घायल महिलाओं के साथ अस्पताल के अंदर पहुंच गए थे, जिससे इलाज में परेशानी हो रही थी। बाद में सभी को बाहर कर दिया गया ताकि डॉक्टर आसानी से उपचार कर सकें। घायलों को पहुंचाया गया अस्पताल हादसे के बाद गुरुद्वारा परिसर में शोक का माहौल है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग अस्पताल तथा घटनास्थल पर पहुंचे। प्रशासन की ओर से मामले की जांच शुरू कर दी गई है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि निर्माणाधीन छत की लोहे की प्लेटें किस कारण गिरीं और कहीं निर्माण कार्य में लापरवाही तो नहीं हुई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करना है। इस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

अमेरिका के विदेश मंत्री जयपुर में, रामबाग पैलेस से लेकर आमेर तक हाई-प्रोफाइल विजिट का शेड्यूल तैयार

जयपुर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के जयपुर दौरे की तैयारियां जोरों पर हैं. रुबियो सोमवार (25 मई) को परिवार के साथ जयपुर आ रहे हैं. इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर गुलाबी नगरी में प्रशासनिक और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि भारत और अमेरिका के मजबूत होते रिश्तों के लिहाज से भी बेहद अहम है. यही वजह है कि राजस्थान की राजधानी में व्यवस्था चाक-चौबंद है. रूबियो के दौरे का शेड्यूल और उससे जुड़ी हर जरूरी बात इस खास रिपोर्ट में पढ़िए. हाथी गांव में चल रही विशेष तैयारियां मार्को रूबियो के हाथी गांव में दौरे को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं. हालांकि, इससे जुड़ा कोई आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है. हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री के आगमन को लेकर यहां विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं. उनका बेहद खास अंदाज में पारंपरिक स्वागत किया जाएगा. इसके साथ ही मरुधरा की इस धरती पर हाथियों को किस तरह रखा जाता है और उनका रखरखाव कैसे होता है, इसकी भी जानकारी दी जाएगी. इससे पहले जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जयपुर आए थे, तब भी हाथियों के विशेष स्वागत ने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थीं. राजस्थानी इतिहास को करीब से जानेंगे रुबियो सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं. एयरपोर्ट से लेकर आमेर तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री का विशेष विमान दोपहर करीब 2 बजे जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड होगा. एयरपोर्ट पर राजस्थानी परंपरा के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया जाएगा. इसके बाद उनका काफिला सीधे जयपुर के प्रतिष्ठित हेरिटेज होटल 'रामबाग पैलेस' के लिए रवाना होगा. रामबाग पैलेस में रुकने के बाद मार्को रूबियो राजस्थान के इतिहास के को करीब से देखने के लिए आमेर फोर्ट पहुंचेंगे. कल्चरल डिप्लोमेसी के लिहाज से भी अहम है दौरा जयपुर की विरासत, यहां की समृद्ध संस्कृति और राजस्थानी मेहमाननवाजी को इस पूरे दौरे का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है. यही वजह है कि जानकार इस यात्रा को केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि 'सांस्कृतिक कूटनीति' यानी कल्चरल डिप्लोमेसी के एक नए अध्याय के तौर पर देख रहे हैं.

बिजली संकट से परेशान ग्रामीण सड़क पर उतरे, सीहोर में विरोध प्रदर्शन से यातायात प्रभावित

अमलाहा. बीते 15 दिनों से लगातार रात्रि में की जा रही बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीणजन अमलाहा डीसी पहुंचे, जहां उन्होंने चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि रात में बार-बार बिजली काटे जाने से आमजन, किसान और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और तत्काल रात्रिकालीन बिजली कटौती बंद करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि आगामी 72 घंटे के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो समस्त ग्रामवासी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में नई और पुरानी चंदेरी के ग्रामीणों ने यह अनोखा प्रदर्शन किया। हाथों में मशालें थामे लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पटाखे फोड़कर अपना विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के बीच रात में 2 से 3 घंटे तक लगातार दो से तीन बार बिजली काटी जा रही है। पेयजल संकट और मच्छरों का बढ़ा प्रकोप रात के समय बिजली गुल रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, बिजली के अभाव में पानी की मोटरें नहीं चल पा रही हैं। इस कारण गांवों में पेयजल का गहरा संकट उत्पन्न हो गया है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहरों को 24 घंटे बिजली, गांवों में अंधेरा प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन शहरों को 24 घंटे बिजली देकर 'वीआईपी ट्रीटमेंट' दे रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों को अंधेरे में रखा जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि प्रदेश में बिजली का कोई बड़ा संकट है, तो सरकार को औद्योगिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों की बिजली काटनी चाहिए। बिजली संकट का खामियाजा गरीब किसानों और ग्रामीणों को नहीं भुगतना चाहिए। सीएम से हस्तक्षेप की मांग, आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि रात्रिकालीन बिजली कटौती तुरंत बंद करने के सख्त निर्देश जारी किए जाएं। यदि बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव कार्यशाला में वर्चुअली हुए शामिल, फॉरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी

रायपुर. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुशंसा पर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों को अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई है। इसी क्रम में मुंगेली जिले को करीब 65 लाख रुपये लागत की आधुनिक सुविधाओं से लैस मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्राप्त हुई है। इस वैन के तकनीकी उपयोग और अपराध अनुसंधान में इसकी भूमिका से पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अवगत कराने मुंगेली कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ‘कलेक्टर जनदर्शन सभाकक्ष’ में विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव नवा रायपुर स्थित मंत्रालय से इसमें वर्चुअली शामिल हुए। उन्होने हरी झंडी दिखाकर मोबाइल फॉरेंसिक वैन को जिले में सेवा हेतु रवाना किया। अपराध अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा मुख्य अतिथि के रूप में कार्यशाला में ऑनलाइन जुड़े उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि मुंगेली जिले को मिली यह अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन कानून व्यवस्था और अपराध जांच प्रणाली को नई मजबूती प्रदान करेगी। आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित यह वैन पुलिस को घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा देगी, जिससे अपराध अनुसंधान में तेजी आएगी और साक्ष्य संकलन अधिक प्रभावी होगा। तकनीकी क्षमता का उठाएं पूरा लाभ बिलासपुर रेंज के आईजी श्री रामगोपाल गर्ग ने कहा कि मोबाइल फॉरेंसिक वैन की तकनीकी क्षमताएं आपराधिक मामलों के त्वरित एवं वैज्ञानिक निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुंगेली पुलिस इस सुविधा का बेहतर उपयोग कर अपराधियों के खिलाफ सशक्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। निष्पक्ष न्याय में बड़ी भूमिका निभाएगी वैन मुंगेली एसएसपी श्री भोजराम पटेल ने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था में सभी नागरिकों के लिए न्याय समान है। उन्होंने कहा कि न्याय भेद नहीं करता और प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष न्याय मिलना उसका अधिकार है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष और सटीक जांच में बड़ी मददगार साबित होगी। आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों की दी गई विस्तृत जानकारी कार्यशाला में तकनीकी सत्र में फॉरेंसिक एक्सपर्ट सुश्री ज्योत्सना लकड़ा ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से पुलिस अधिकारियों और जवानों को वैन में उपलब्ध आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया, साक्ष्य सुरक्षित रखने में बरती जाने वाली सावधानियों तथा मौके पर ही प्राथमिक फॉरेंसिक जांच करने के तरीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। साथ ही बताया कि अदालत में साक्ष्यों की वैधता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से जांच और दस्तावेजीकरण अत्यंत आवश्यक है। प्रधानमंत्री की बचत अपील का दिखा असर कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘बचत’ संबंधी अपील को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव तथा बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग ने अनावश्यक खर्च से बचते हुए ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला में सहभागिता की। कार्यशाला में मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, अपर कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय तिवारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवनीत कौर छाबड़ा, उप पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह, बार काउंसिल के अध्यक्ष राजमन सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता रविंदर सिंह छाबड़ा सहित जिले के विभिन्न थाना प्रभारी, पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।