samacharsecretary.com

यूपी में बिजली सप्लाई का नया रिकॉर्ड, पीक डिमांड पूरी करने में योगी सरकार देश में नंबर-1

प्रदेश के इतिहास में इस समय सबसे ज्यादा बिजली सप्लाई, पीक डिमांड आपूर्ति में योगी सरकार देश में अव्वल प्रचंड गर्मी के बावजूद योगी सरकार ने बड़ी उपलब्धि हासिल की यूपी में पीक डिमांड 31,824 मेगावाट पहुंची, महाराष्ट्र में 29,463 मेगावाट की आपूर्ति बढ़ती पीक डिमांड के बीच यूपी ने बनाया नया विद्युत आपूर्ति रिकॉर्ड शहर, तहसील नगर पंचायत में 24 घंटे बिजली आपूर्ति, ग्रामीण क्षेत्रों में भी 22 से 22.5 घंटे दी गई बिजली लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेशवासियों को बिजली देने के मामले में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। योगी सरकार में पीक डिमांड आपूर्ति के मामले में उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को पीछे छोड़ दिया है। 24 मई को उत्तर प्रदेश ने 31,824 मेगावाट पीक डिमांड पूरी की। जबकि इस अवधि में महाराष्ट्र ने 29,463 मेगावाट डिमांड की आपूर्ति की थी। यह न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश के किसी भी राज्य द्वारा अब तक की गई सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति है। अभी तक साल 2025 में 11 जून को रात 12:45 बजे 31486 मेगावाट पीक डिमांड सबसे ज्यादा थी। 24 मई की रात को रिकॉर्ड पीक डिमांड की आपूर्ति की गई प्रदेश में प्रचंड गर्मी के बावजूद योगी सरकार में उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे ज्यादा विद्युत आपूर्ति की जा रही है। प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 24 मई की रात्रि 10:29 बजे 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड को सफलतापूर्वक पूरा किया है। योगी सरकार का उद्देश्य हर घर, हर गांव और हर शहर तक निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना है, जिस दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। निर्धारित रोस्टर से आगे बढ़कर प्रदेश में व्यापक स्तर पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराने का प्रयास किया गया है।  25 मई दोपहर 2 बजे 29,616 मेगावाट विद्युत आपूर्ति की गई 24/25 मई की रात 1 बजे 29,933 मेगावाट और रात 3 बजे 30569 मेगावाट की विद्युत आपूर्ति की गई। जबकि 25 मई की सुबह 5 बजे 29,573 मेगावाट और सुबह 10 बजे 27,392 मेगावाट की आपूर्ति की गई है। इसी तरह दोपहर 2 बजे 29,616 मेगावाट डिमांड की विद्युत आपूर्ति की गई है। ऊर्जा विभाग लगातार आपूर्ति कर रहा है। यूपीपीसीएल के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक रविवार को शहरी क्षेत्रों, तहसील, नगर पंचायत, महानगर, मंडल मुख्यालय और उद्योगों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की गई है। बुंदेलखंड में सिर्फ 22 मिनट के लिए बिजली काटी गई थी।  ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर से ज्यादा बिजली आपूर्ति की गई निदेशक वितरण ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी औसत 22 से 22.5 घंटे तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे का रोस्टर है। इससे आमजन, किसान, व्यापारी और उद्योगों को बड़ी राहत मिली है। अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं उप्र. पावर कारपोरेशन अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन के क्रम में प्रदेश में सभी को निर्बाध विद्युत देने का प्रयास किया जा रहा है। सभी अधिकारियों एवं कर्मियों को युद्धस्तर पर विद्युत आपूर्ति के कार्यों में लगाया गया है।  देश में सर्वाधिक बिजली उपलब्ध कराने वाला राज्य बना यूपीः ऊर्जा मंत्री ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश आज देश में सर्वाधिक बिजली उपलब्ध कराने वाला राज्य बन चुका है। तकनीकी, प्राकृतिक अथवा मानवजनित कारणों से कहीं-कहीं स्थानिक व्यवधान उत्पन्न हो सकते हैं, लेकिन उन्हें दूर करने के लिए विद्युत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दिन-रात पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं। ऊर्जा मंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि विद्युतकर्मियों का मनोबल बढ़ाएं, क्योंकि भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों में भी वह लगातार जनता को बेहतर बिजली सुविधा उपलब्ध कराने में जुटे हुए हैं।

CM योगी की पहल से निराश्रित बच्चों को मिला नया सहारा, बदल रही जिंदगी की तस्वीर

सीएम योगी की पहल से बदल रही निराश्रित बच्चों की जिंदगी महिला कल्याण विभाग की बाल देखरेख संस्थाएं बन रहीं उज्ज्वल भविष्य की नई पाठशाला बोर्ड परीक्षाओं में 213 बच्चों की सफलता ने बढ़ाया प्रदेश का मान 107 बच्चों ने 60 प्रतिशत से अधिक अंक लाकर पेश की प्रेरणादायक मिसाल परामर्श सेवाएं, शिक्षा, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के जरिए बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ रही योगी सरकार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में महिला कल्याण विभाग निराश्रित, देखरेख, संरक्षण एवं विधि से संघर्षरत बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। योगी सरकार बाल देखरेख संस्थाओं के माध्यम से हजारों बच्चों को सुरक्षित आश्रय, अच्छी शिक्षा, परामर्श सेवाएं और संस्कारयुक्त वातावरण उपलब्ध करा रही है। इन संस्थाओं में रह रहे 213 बच्चों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की विभिन्न बोर्ड परीक्षाओं में सफलता हासिल की है।  दरअसल, इन संस्थाओं में बच्चों के मानसिक, सामाजिक और नैतिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि वह आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। योगी सरकार की इस पहल से बच्चों को नया जीवन, नई दिशा और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।  बच्चों ने सफलता हासिल कर बढ़ाया प्रदेश का गौरव सीएम योगी की मंशा के अनुरूप बालगृहों और राजकीय सम्प्रेक्षण गृहों में रहने वाले बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यही कारण है कि वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं में विभागीय संस्थाओं में निवासरत बच्चों ने सफलता हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। बच्चों को काउंसलिंग और शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा महिला कल्याण विभाग द्वारा बच्चों को नियमित शैक्षिक मार्गदर्शन, अध्ययन सामग्री, ऑनलाइन कोचिंग, काउंसलिंग, स्मार्ट क्लास की सुविधा और अनुकूल शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही बच्चों में आत्मविश्वास बढाने और सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए विभिन्न प्रेरणात्मक एवं व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं। योगी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि संस्थाओं में रहने वाला प्रत्येक बच्चा शिक्षा और अवसरों से वंचित न रहे। 213 बच्चों ने सफलता हासिल की महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि इस वर्ष कुल 213 बच्चों ने विभिन्न बोर्ड परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है। इनमें 107 बच्चों ने 60 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत करने वाले इन बच्चों की यह उपलब्धि न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह सरकार की बाल हितैषी नीतियों और संवेदनशील कार्यप्रणाली का भी प्रमाण है। अपने पारिवारिक सहयोग के अभाव के बावजूद महिला कल्याण विभाग के संरक्षण में बच्चों ने अपनी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर सफलता की नई कहानी लिखी है।

PM मोदी के 12 साल पूरे, वित्त मंत्री ओपी चौधरी बोले- सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण का बेमिसाल दौर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण होने पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी शुभकामनाएं सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण का बेमिसाल रायपुर  छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद पर ऐतिहासिक 12 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि 26 मई 2014 से शुरू हुआ यह 12 वर्षों का कार्यकाल देश के इतिहास में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के संकल्प का जीवंत प्रतीक रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने अंत्योदय के लक्ष्य को साकार किया है। योजनाओं से आया क्रांतिकारी व्यापक बदलाव          चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं ने समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाया है। जनधन योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना ने गरीबों, किसानों और माताओं-बहनों के जीवन को गरिमापूर्ण बनाया है। डिजिटल इंडिया अभियान ने युवाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं और देश में अभूतपूर्व पारदर्शिता सुनिश्चित की है। नव-निर्माण और सबका साथ, सबका विकास         वित्त मंत्री ने आगे कहा कि यह कालखंड देश के नव-निर्माण और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने वाला रहा है। इन 12 वर्षों में भारत ने वैश्विक पटल पर विकास, सुशासन, डिजिटल परिवर्तन और जनकल्याण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अद्वितीय राष्ट्र-समर्पण, निरंतर जनता-सेवा और सुशासन के लिए उनका हार्दिक अभिनंदन करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।

पंजाब में वोटिंग का माहौल गरम, 1896 वार्डों में मतदान; संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई

चंडीगढ़. पंजाब में मंगलवार सुबह 8 बजे से निकाय चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है। राज्य के आठ नगर निगम, 75 नगर कौंसिल और 20 नगर पंचायत सहित कुल 103 निकायों के 1896 वार्डों में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। चुनाव को लेकर पूरे राज्य में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर पंजाब में चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम और नगर काउंसिल चुनावों के दौरान बड़ी संख्या में वोटरों को मतदान केंद्रों तक पहुंचने से रोका गया तथा विपक्षी उम्मीदवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। पंजाब निकाय चुनाव में मतदान जारी है। सुबह 10:30 बजे तक कुल 14.5 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। अमृतसर जिले में सुबह 10 बजे तक नगर काउंसिल रमदास में 29%, जंडियाला गुरु में 15% और मजीठा में 14.1% मतदान दर्ज किया गया। लुधियाना जिले में सुबह 10 बजे तक कुल 15.07 प्रतिशत मतदान हुआ। दोराहा में 16.21%, जगराओं में 11.09%, खन्ना में 14%, पायल में 19.15%, रायकोट में 17.42% और समराला में 16.40% मतदान दर्ज किया गया। पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पत्नी अमृता वड़िंग के साथ बैलगाड़ी पर सवार होकर मुक्तसर के वार्ड नंबर पांच में वोट डालने पहुंचे। महंगाई के खिलाफ सांकेतिक विरोध जताते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम इस कदर बढ़ गए हैं कि आम आदमी के लिए गाड़ी चलाना मुश्किल हो गया है। भाजपा के जिला अध्यक्ष और पूर्व विधायक दीदार सिंह भट्टी ने पोलिंग स्टेशन पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।वोट डालने के बाद पोलिंग बूथ से बाहर आते ही उन्होंने मीडिया और समर्थकों के सामने अपनी उंगली पर लगी चुनावी स्याही का निशान दिखाया। अमृतसर में नगर कौंसिल मजीठा में मतदान केंद्रों पर व्हीलचेयर न होने की वजह से मतदान डालने के लिए दिव्यांग मतदाता परेशान होते। जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, राज्य में चुनावी माहौल भी गार्माता जा रहा है। लुधियाना के अंतर्गत आते रायकोट में सुबह वार्ड नंबर 4 से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार जगदेव सिंह जग्गा पर कथित तौर पर किरपानों से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। आरोप है कि उन पर ये हमला आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अमनदीप मान मांगट के समर्थकों ने किया। फिलहाल वह अस्पताल में उपचाराधीन हैं। वहीं, फरीदकोट के वार्ड नंबर 17 में आर्मी कैंट के जवानों को वोट डालने से रोकने के आरोप पर हंगामा हो गया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाए। भाजपा नेताओं का कहना है कि 1000 के करीब जवानों की वोट बनी है और सभी यहां लंबे समय से रह रहे हैं। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने सभी समर्थकों को बाहर भेजकर मतदान दोबारा शुरू करवाया। इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई। राज्य के आठ नगर निगम, 75 नगर कौंसिल और 20 नगर पंचायत सहित कुल 103 निकायों के 1896 वार्डों में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। चुनाव को लेकर पूरे राज्य में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। जबकि पंजाब में अन्य जगह अभी माहौल शांत है। अधिकतर सभी बूथों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। इस बार चुनाव आयोग ने महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग-अलग कतारें बनवाई हैं, वहीं सुरक्षा के मद्देनजर चुनावों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है, जिसे एक साल के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। अभी तक राज्य में चुनाव शांतिपूर्वक चल रहा है। जबकि बीती शाम बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब व अबोहर में छुटपुट घटनाएं देखने को मिली। चुनाव आयोग ने इस बार पिछली बार के मुकाबले अधिक मतदान प्रतिशत का लक्ष्य रखा है। दिसंबर 2024 में हुए निकाय चुनाव में करीब 61 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। राज्य चुनाव आयोग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार निकाय चुनाव में कुल 7555 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें 1613 उम्मीदवार नगर निगम, 5142 नगर कौंसिल और 800 उम्मीदवार नगर पंचायत चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक दलों की बात करें तो सबसे अधिक 1801 उम्मीदवार आम आदमी पार्टी ने उतारे हैं। कांग्रेस के 1550, भारतीय जनता पार्टी के 1316 और शिरोमणि अकाली दल के 1251 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के 96 उम्मीदवार और 1528 निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। संवेदनशील बूथों पर सुरक्षा कड़ी चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की है। पूरे पंजाब में 740 मतदान केंद्रों को संवेदनशील और 274 को अतिसंवेदनशील घोषित किया गया है। चुनाव ड्यूटी के लिए 35 हजार कर्मचारियों को लगाया गया है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए 32 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार इस बार मतदान केंद्रों के अंदर और बाहर वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है। चुनाव आयोग ने निर्देश दिए हैं कि रिकॉर्डिंग को एक वर्ष तक सुरक्षित रखा जाएगा। महिलाओं के लिए मतदान केंद्रों पर अलग लाइन की व्यवस्था भी की गई है। विश्वविद्यालयों ने परीक्षाएं की स्थगित भीषण गर्मी को देखते हुए चुनाव आयोग ने सभी बूथों पर पीने के पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं के इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। चुनाव आयुक्त के अनुसार शाम 5 बजे तक मतदान केंद्र पहुंचने वाले सभी मतदाताओं को वोट डालने का अवसर दिया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए 23 आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को आब्जर्वर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा छह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को विशेष ड्यूटी पर लगाया गया है। आईपीएस अधिकारी प्रवीण सिन्हा को नोडल अधिकारी बनाया गया है। निकाय चुनाव के चलते राज्य की कई यूनिवर्सिटियों ने भी अपनी परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ और अन्य संस्थानों ने 26 मई की प्रस्तावित परीक्षाएं आगे बढ़ा दी हैं। पूरे पंजाब में आज का दिन राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

सूरजपुर सूपाझरिया जलाशय के जीर्णाेद्धार के लिए 3.15 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति

सूरजपुर सूपाझरिया जलाशय के जीर्णाेद्धार के लिए 3.15 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति मरम्मत के बाद 82 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बहाल होगी रायपुर  राज्य शासन ने सूरजपुर जिले के विकासखंड ओड़गी स्थित सूपाझरिया जलाशय योजना के मरम्मत एवं जीर्णाेद्धार कार्य के लिए 3 करोड़ 15 लाख 95 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। मरम्मत कार्य पूर्ण होने पर जलाशय की रूपांकित सिंचाई क्षमता 82 हेक्टेयर पूरी तरह बहाल हो जाएगी। इस नहर जीर्णाेद्धार कार्य से ओड़गी क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलेगी और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। 82 हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य           सूपाझरिया जलाशय के जीर्णाेद्धार कार्य पूर्ण होने पर जलाशय की रूपांकित सिंचाई क्षमता 82 हेक्टेयर पूरी तरह बहाल हो जाएगी। इससे क्षेत्र के किसानों को खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलेगी। शर्तों के साथ कार्य के निर्देश            शासन ने कार्य को स्वीकृत राशि और निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। कार्य शुरू करने से पहले सक्षम अधिकारी से ड्रॉइंग-डिजाइन का अनुमोदन और तकनीकी स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही कम से कम 75 प्रतिशत बाधा रहित भूमि उपलब्ध होने पर ही निविदा जारी की जाएगी। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि भू-अर्जन स्वीकृत राशि की सीमा में ही किया जाए और किसी अन्य मद की बचत राशि का उपयोग बिना पूर्व स्वीकृति के न हो। यदि भू-अर्जन प्रस्तावित नहीं है, तो निर्माण शासकीय भूमि पर ही कराया जाए। निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

राज्यपाल रमेन डेका ने की ‘पीएम-जनमन’ योजना समीक्षा

रायपुर,  छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका आज लोक भवन में 'पीएम-जनमन' (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) योजना की प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव तथा सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हैं।

भीषण गर्मी का कहर! नौतपा के पहले दिन 5 शहरों में पारा 45°C से ऊपर

रायपुर. छत्तीसगढ़ में नौतपा के पहले दिन भीषण गर्मी पड़ी. रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, मुंगेली, राजनांदगांव समेत 10 शहर में लू के थपेड़ों ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया.10 शहरों में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया. सबसे ज्यादा गर्मी राजनांदगांव में 46.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. वहीं इस बार की गर्मी में रायपुर में पहली बार दिन में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ. आज भी राजधानी में इसी के करीब पारा पहुंचने की संभावना है. हालांकि बंगाल की खाड़ी से नमी की एंट्री होने से मौसम में बदलाव हो सकता है. मौसम विभाग के अनुसार 24 घंटों में प्रदेश में अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया. अगले 3 दिनों बाद छत्तीसगढ़ में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक गिरावट होने की संभावना है. सोमवार को सक्ती में अधिकतम तापमान 44.9 डिग्री, बेमेतरा में 44.8 डिग्री, जांजगीर-चांपा में 44.4 डिग्री, कबीरधाम में 44.4 डिग्री, गरियाबंद में 43.6 डिग्री, महासमुंद में 43.4 डिग्री, कोरबा में 43.2 डिग्री, सरगुजा में 42.8 डिग्री, रायगढ़ में 42.8 डिग्री, बलरामपुर रामानुजगंज में 41.7 डिग्री, जशपुर में 41.5 डिग्री और सूरजपुर में 40.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इन इलाकों में तापमान 45 से ऊपर राजनांदगांव – 46.5 डिग्री माना (रायपुर) – 45.7 डिग्री मुंगेली – 45.4 डिग्री दुर्ग – 45.2 डिग्री रायपुर – 45.1 डिग्री बिलासपुर – 45.1 डिग्री कुछ इलाकों में हल्की वर्षा और गरज-चमक के आसार मौसम विज्ञानी एच.पी. चंद्रा ने बताया कि एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण दक्षिण बिहार और उसके आसपास स्थित है. एक द्रोणिका दक्षिण बिहार से उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. बंगाल की खाड़ी से नमी का आगमन प्रारंभ हो रहा है. प्रदेश में 26 मई को एक दो स्थानों पर हल्की वर्षा और गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है. इस दौरान अधिकतम तापमान में कोई मुख्य बदलाव नहीं होगी. हालांकि अधिकतम तापमान में हल्की गिरावट संभावित है. कई जिलों में अलर्ट प्रदेश बिलासपुर, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती, कोरबा, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडाई, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बस्तर, कोंडागांव, कांकेर और जिलों में एक दो पॉकेट में ग्रीष्म लहर चलने की संभावना है. इन इलाकों में अगले 48 घंटों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? राजधानी रायपुर में आज मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई है. अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है.

CM साय की दिल्ली यात्रा खत्म, लौटने के बाद शाम 6 बजे होगी अहम कैबिनेट मीटिंग

रायपुर. दिल्ली दौरे से आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय वापस लौटेंगे. दोपहर करीब 1 बजे छत्तीसगढ़ सदन, दिल्ली से एयरपोर्ट रवाना होंगे. करीब शाम 4:15 बजे रायपुर पहुंचेंगे. इसके बाद शाम 4:30 बजे नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास जाएंगे. साय कैबिनेट की बैठक आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक बुलाई गई है. मंत्रालय में यह बैठक शाम 6 बजे आयोजित होगी. मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे से लौटते ही अचानक बुलाई गई इस बैठक को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. बताया जा रहा है कि बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. हालांकि सरकार की ओर से बैठक का अधिकारिक एजेंडा जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में चल रहे सुशासन तिहार अभियान के तहत जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और विभिन्न जनहित योजनाओं की समीक्षा की जाएगी. इसके अलावा आम लोगों को राहत देने वाले कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है.

75 वर्ष से अधिक आयु, असाध्य रोगियों, बच्चों संग महिला बंदियों व जमानत राशि न जमा कर पाने वाले कैदियों की सूची तैयार करें: मुख्यमंत्री

जेलों को सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाए: मुख्यमंत्री केवल पेशेवर अपराधी, माफिया को जेलों में रखने की जरूरत, छोटे अपराधों में ओपन जेल की परिकल्पना उपयोगी 75 वर्ष से अधिक आयु, असाध्य रोगियों, बच्चों संग महिला बंदियों व जमानत राशि न जमा कर पाने वाले कैदियों की सूची तैयार करें: मुख्यमंत्री ‘ओपन जेल’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए: मुख्यमंत्री प्रदेश की जेलों में ओवरक्राउडिंग दर 1.77 से घटकर 1.03 हुई सात नए कारागार शुरू, छह निर्माणाधीन; बंदी क्षमता में लगातार बढ़ोतरी 6200 सीसीटीवी, ड्रोन कैमरे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मजबूत हुई जेल सुरक्षा व्यवस्था ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ से बंदियों को मिल रहा कौशल और रोजगार का अवसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कारागार विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि जेलों को केवल बंदी रखने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी कारागारों में सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, प्रशिक्षण, तकनीकी सुदृढ़ीकरण और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शी व्यवस्था और सुधारात्मक गतिविधियों के माध्यम से कारागारों को नई पहचान दी जाए। बैठक में बताया गया कि विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से बंदियों की समयपूर्व रिहाई की व्यवस्था को गति दी गई है। वर्ष 2012 से 2016 के बीच 273 बंदियों को समयपूर्व रिहाई मिली थी, जबकि वर्ष 2017 से 2021 के बीच यह संख्या बढ़कर 2882 और वर्ष 2022 से 2026 के बीच 3846 हो गई। जुर्माना जमा कर रिहा होने वाले बंदियों की संख्या भी वर्ष 2012-16 के 2823 की तुलना में वर्ष 2017-2026 के दौरान बढ़कर 6231 हो गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 75 वर्ष से अधिक उम्र के कैदियों, असाध्य रोगों से ग्रस्त कैदियों, बच्चों के साथ जेल में बंद महिला कैदियों और जमानत राशि जमा न कर पाने के अभाव में जेल में बंद कैदियों की सूची तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने 'ओपन जेल' की परिकल्पना को विशेष महत्व देते हुए इसे साकार रूप में लाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जेल केवल पेशेवर अपराधी और माफिया के लिए होनी चाहिए। छोटे अपराधों के लिए 'ओपन जेल' उपयोगी होगी।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जेलों में ओवरक्राउडिंग कम करने के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए। उन्होंने नए कारागारों और बैरकों के निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों में क्षमता 58,400 थी जबकि बंदियों की संख्या 96,383 थी और ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी। वर्तमान में प्रदेश में 77 कारागार संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 77,673 है तथा बंदियों की संख्या 79,782 है। ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 रह गई है।  बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से अब तक चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली समेत सात नए कारागार संचालित किए गए हैं, जिससे 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है। इसके अतिरिक्त अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में छह नए कारागारों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिनकी कुल क्षमता 6,156 होगी। कई प्रस्तावित जेलों के लिए भूमि क्रय और पंजीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री ने बहुमंजिला करागारों के निर्माण को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा। तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से 2026 के बीच प्रदेश की जेलों में 6200 सीसीटीवी कैमरे, 24 बैगेज स्कैनर, 30 ड्रोन कैमरे, 84 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, 195 बॉडी वार्न कैमरे और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरण स्थापित किए गए हैं। सभी जेल बैरकों में सीसीटीवी कैमरे तथा मेनवॉल पर वायर फेंसिंग कराई गई है। न्यायालयों में पेशी के लिए 83 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इकाइयां स्थापित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारागारों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और उत्पादन गतिविधियों को और बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि सुधारात्मक प्रयासों से बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में बताया गया कि लखनऊ, आगरा, नैनी, बरेली, वाराणसी, फतेहगढ़, गोरखपुर, उन्नाव और अन्य कारागारों में सिलाई, दरी, कम्बल, फिनायल, काष्ठ कला, मसाला, प्रिंटिंग, हैंडीक्राफ्ट, रेडीमेड गारमेंट, एलईडी बल्ब, पॉटरी, कार्पेट और विभिन्न हस्तशिल्प उद्योग संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश की 37 जेलों में ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ आधारित इकाइयां संचालित हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में बंदियों के स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सकारात्मक वातावरण के लिए योग, खेलकूद, कृषि और गौसंवर्धन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश की 17 जेलों में गौशालाएं संचालित हैं, जहां कुल 1265 गोवंश संरक्षित हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि जेलों की कृषि भूमि वर्ष 2020 में 584.51 एकड़ से बढ़कर वर्तमान में 624.14 एकड़ हो गई है। कृषि फार्मों में सब्जी और आलू उत्पादन 81,270 क्विंटल से बढ़कर 86,720 क्विंटल तक पहुंच गया है।   बैठक में बताया गया कि विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 3647 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रचलित है। वर्ष 2017 से अब तक 4055 नियुक्तियां दी गई हैं तथा विभिन्न पदों पर कुल 2868 पदोन्नतियां प्रदान की गई हैं। मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।

नार्थ-साउथ कॉरिडोर से बदलेगी यूपी की सड़क तस्वीर, योगी सरकार देगी कनेक्टिविटी को नई रफ्तार

स्पेशल  योगी सरकार नार्थ-साउथ कॉरिडोर से सड़क कनेक्टिविटी को देगी नई रफ्तार – नेपाल बॉर्डर से बुंदेलखंड तक मजबूत होगा सड़क नेटवर्क, नए कॉरिडोर से व्यापार, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ  – योगी सरकार की बड़ी पहल, दक्षिण भारत की ओर तक बनेगा हाई स्पीड संपर्क मार्ग – पूर्वांचल, बुंदेलखंड और तराई क्षेत्रों के बीच आसान आवागमन का बनेगा नया नेटवर्क  लखनऊ योगी सरकार प्रदेश में सड़क और कनेक्टिविटी नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी के तहत योगी सरकार एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग और क्षेत्रीय संपर्क मार्गों के विस्तार के साथ अब प्रदेश में “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” की महत्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ाने जा रही है। इसका उद्देश्य नेपाल बॉर्डर से लेकर दक्षिण भारत की ओर तक बेहतर सड़क संपर्क स्थापित करना है, जिससे प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास को नई गति मिल सके। उत्तर से दक्षिण दिशा में मजबूत सड़क संपर्क किया जाएगा विकसित  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन कॉरिडोर के विकसित होने से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि और पर्यटन क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और किसानों को अपने उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। साथ ही धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान में प्रदेश में अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस-वे पूर्व से पश्चिम दिशा में विकसित हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए अब उत्तर से दक्षिण दिशा में मजबूत सड़क संपर्क विकसित करने की रणनीति बनाई जा रही है। इसके तहत नेपाल बॉर्डर से जुड़े जिलों को प्रयागराज, चित्रकूट और बुंदेलखंड क्षेत्र के माध्यम से देश के अन्य राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से जोड़ने की तैयारी है। कुशीनगर-देवरिया-नोएडा-गाजीपुर-जमानिया मार्ग को किया जाएगा विकसित “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना के तहत कई महत्वपूर्ण मार्गों के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और नव निर्माण की कार्य योजना बनाई गयी है। वहीं चार प्रमुख नार्थ-साउथ कॉरिडोर चिह्नित किए गए हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 1531 किलोमीटर है। इनमें से 1232.60 किलोमीटर हिस्सा पहले से एक्सप्रेस-वे अथवा राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है, जबकि शेष मार्गों को विकसित करने की योजना बनाई गयी है। पहले कॉरिडोर के रूप में कुशीनगर-देवरिया-नोएडा-गाजीपुर-जमानिया मार्ग को शामिल किया गया है, जिसकी कुल लंबाई 220 किलोमीटर है। इसमें 53.25 किलोमीटर लंबाई को स्वीकृति मिल चुकी है और लगभग 464 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं दूसरा महत्वपूर्ण कॉरिडोर पीपरी (इंडिया-नेपाल बॉर्डर) से बांसी, सिद्धार्थनगर होते हुए प्रयागराज तक प्रस्तावित है। इसकी कुल लंबाई 295 किलोमीटर है। इस परियोजना के तहत कई नए मार्ग प्रस्तावित हैं जिनसे पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क बेहतर होगा।  मुरादाबाद, शाहजहांपुर, उरई और हमीरपुर को जोड़ने की बनाई परियोजना  “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना के तहत तीसरे कॉरिडोर में लखीमपुर-सीतापुर-लखनऊ-नवाबगंज-बांदा मार्ग को शामिल किया गया है, जिसकी लंबाई 502 किलोमीटर है। इसके अतिरिक्त चौथे कॉरिडोर के रूप में मुरादाबाद, शाहजहांपुर, उरई और हमीरपुर को जोड़ने वाली 514 किलोमीटर लंबी परियोजना है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि प्रदेश की मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर कनेक्टिविटी सबसे जरूरी आधार है। यही कारण है कि योगी सरकार एक्सप्रेस-वे, रिंग रोड, फ्लाईओवर, एयरपोर्ट और नई सड़क परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाएं पहले ही उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल रही हैं। अब नार्थ-साउथ कॉरिडोर के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ जिलों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।