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प्रगतिशील किसान खानेंद्र कुमेटी की प्रेरणादायक कहानी

प्रगतिशील किसान खानेंद्र कुमेटी की प्रेरणादायक कहानी   फसल उत्पादन में नैनो डीएपी एवं यूरिया के उपयोग से जमीन की बनी रहेगी उर्वरकता  रायपुर  नारायणपुर के ग्राम केरलापाल के निवासी खानेंद्र कुमेटी एक मेहनती और प्रगतिशील किसान हैं। उनका जीवन संघर्ष, परिश्रम और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है। कुछ वर्ष पहले तक वे पारंपरिक खेती करते थे, जिससे उन्हें बहुत कम लाभ मिलता था। खेती की लागत बढ़ रही थी और उत्पादन अपेक्षाकृत कम हो रहा था। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं हो पा रही थी। खानेंद्र कुमेटी ने हार मानने के बजाय नई तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने उन्नत बीजों का उपयोग शुरू किया, खेतों में जैविक खाद का प्रयोग बढ़ाया तथा सिंचाई के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाया। इससे उनकी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उन्होंने धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों और फलदार पौधों की खेती भी शुरू की। फसल विविधीकरण के कारण उनकी आय के स्रोत बढ़ गए। उन्होंने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई, जिससे पानी की बचत हुई और पौधों को आवश्यक मात्रा में पानी मिलता रहा। इसके अतिरिक्त वे समय-समय पर मिट्टी परीक्षण भी करवाते हैं, जिससे फसल के अनुसार उचित उर्वरकों का चयन कर पाते हैं। खानेंद्र कुमेटी की सफलता देखकर गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हुए। वे अपने अनुभव और ज्ञान को अन्य किसानों के साथ साझा करते हैं तथा उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनकी पहल से गांव में कृषि के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई है और कई किसानों की आय में वृद्धि हुई है। आज खानेंद्र कुमेटी न केवल एक सफल किसान हैं, बल्कि गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं। उनका मानना है कि खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किया जाए तो यह अत्यंत लाभकारी व्यवसाय बन सकता है। उनके परिश्रम, दूरदर्शिता और नवाचार ने उन्हें ग्राम केरलापाल के एक सम्मानित प्रगतिशील किसान के रूप में पहचान दिलाई है। खानेंद्र कुमेटी की कहानी हमें यह संदेश देती है कि मेहनत, सीखने की इच्छा और नई तकनीकों को अपनाने का साहस किसी भी किसान को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। उन्होंने बताया कि फसल उत्पादन के लिए सबसे अच्छी नैनो डीएपी और नैनो यूरिया की उपयोग से जमीन की उर्वरकता नष्ट नहीं होती और फसल को उत्पादन में सहायक होती है, कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मछली पालन और उद्यानिकी फसलों का भी उत्पादन करते हैं।

जन्मदिवस पर मौसमी फलों और लड्डू से तौले गए वित्त मंत्री ओपी चौधरी

रायपुर,  वित्त मंत्री ओपी चौधरी के जन्मदिवस के अवसर पर रायगढ़ में क्षेत्रवासियों ने अनूठे अंदाज में उनका सम्मान किया। इस दौरान उन्हें मौसमी फलों एवं लड्डुओं से तौलकर शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक, समर्थक और शुभचिंतक उपस्थित रहे।              इस अवसर पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भावुक होते हुए कहा कि रायगढ़ क्षेत्रवासियों द्वारा उन्हें जन्मदिवस पर विभिन्न फलों एवं मिठाइयों से तौलना उनके जीवन के सबसे अनमोल क्षणों में से एक है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान क्षेत्रवासियों के स्नेह, प्रेम और उन पर किए गए अटूट विश्वास का प्रतीक है।             चौधरी ने सभी नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का यह अपनापन और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के प्रति और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी शुभचिंतकों, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों को जन्मदिवस पर मिली शुभकामनाओं और स्नेह के लिए धन्यवाद दिया।कार्यक्रम का माहौल उत्साह और उल्लास से भरा रहा तथा उपस्थित लोगों ने वित्त मंत्री के स्वस्थ, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना की।

विदेश नहीं जा सकेंगे बिक्रम मजीठिया, पंजाब पुलिस ने जारी किया LOC

 अमृतसर पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ पंजाब पुलिस की ओर से लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी करवाया गया है। इस कार्रवाई के बाद अब मजीठिया बिना संबंधित एजेंसियों की अनुमति के देश से बाहर यात्रा नहीं कर सकेंगे। जानकारी के अनुसार, लुकआउट सर्कुलर जारी होने के बाद देश के सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और इमिग्रेशन चेक पोस्टों पर मजीठिया के संबंध में अलर्ट जारी कर दिया गया है। यदि वह विदेश जाने का प्रयास करते हैं तो संबंधित एजेंसियों को इसकी सूचना दी जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब मजीठा थाना प्रकरण में पुलिस और अकाली दल के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस पहले ही इस मामले में कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर चुकी है और विभिन्न स्थानों पर छापेमारी भी कर रही है। उधर, अकाली दल के नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है, जबकि पुलिस का कहना है कि सभी कदम कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाए जा रहे हैं। फिलहाल लुकआउट सर्कुलर जारी होने के बाद मजीठिया की कानूनी और राजनीतिक गतिविधियों पर सबकी नजर बनी हुई है।   

नैनो तकनीक से जिले के कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव: खेतों में नैनो यूरिया और डीएपी का सफल प्रयोग

नैनो तकनीक से जिले के कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव: खेतों में नैनो यूरिया और डीएपी का सफल प्रयोग प्रगतिशील किसान शंकर लाल गुप्ता बने रोल मॉडल, कम लागत में बेहतर उत्पादन का दिया संदेश रायपुर सरगुजा जिले में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। खेती की लागत कम करने, मिट्टी के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने तथा उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से किसान अब वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपना रहे हैं। इसी क्रम में अंबिकापुर के देवीगंज रोड निवासी एवं ग्राम बरकेला के प्रगतिशील किसान शंकर लाल गुप्ता ने पिछले वर्ष अपने कृषि रकबे में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का सफल प्रयोग कर क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। गुप्ता ने बताया कि वे वर्षों से पारंपरिक दानेदार यूरिया एवं डीएपी का उपयोग करते रहे हैं, लेकिन पिछले वर्ष कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर उन्होंने नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से धान की फसल अधिक स्वस्थ, हरी-भरी तथा सुदृढ़ दिखाई दे रही है। फसल की वृद्धि बेहतर होने के साथ-साथ उत्पादन में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से परिवहन एवं भंडारण संबंधी समस्याओं में कमी आई है। पहले 65 एकड़ क्षेत्र के लिए बड़ी मात्रा में खाद की बोरियों को ट्रैक्टरों से लाना पड़ता था, जिससे परिवहन, मजदूरी एवं भंडारण पर अतिरिक्त खर्च होता था। इसके विपरीत नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी की छोटी बोतलें आसानी से खेत तक पहुंचाई जा सकती हैं, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होती है। गुप्ता के अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से खेती की लागत में भी कमी आई है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी किफायती हैं, जिसके कारण उर्वरक पर होने वाला खर्च कम हुआ है तथा प्रति एकड़ शुद्ध लाभ बढ़ने की संभावना बढ़ी हुई है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक उर्वरकों का एक बड़ा हिस्सा बहाव अथवा अन्य कारणों से नष्ट हो जाता है, जबकि नैनो उर्वरकों का फसलों पर सीधे छिड़काव किया जाता है। इससे पौधों की पत्तियां पोषक तत्वों को शीघ्र अवशोषित कर लेती हैं और उर्वरक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है। परिणामस्वरूप फसल को सीधे लाभ मिलता है तथा पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। किसानों से की आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील नैनो उर्वरकों के सकारात्मक परिणामों से उत्साहित शंकर लाल गुप्ता ने क्षेत्र के किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग न केवल किफायती है, बल्कि इसके परिवहन, भंडारण एवं उपयोग में भी सुविधा है। इससे खेती की लागत कम होती है और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलती है। मिट्टी एवं पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक नैनो उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता एवं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह तकनीक उर्वरकों के अधिक दक्ष उपयोग को सुनिश्चित करती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायक है। शंकर लाल गुप्ता के सफल अनुभवों को अन्य किसानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जिले के अधिक से अधिक किसान आधुनिक एवं स्मार्ट कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

गर्मी से तप रहा पंजाब, कल से मिल सकती है राहत; मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

चंडीगढ़  पंजाब में मौसम साफ होते ही गर्मी ने फिर तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार को राज्य का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया।  प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में 2.9 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि यह अभी भी सामान्य से 4.2 डिग्री कम बना हुआ है। सबसे अधिक 40.2 डिग्री सेल्सियस तापमान बठिंडा में रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार से पंजाब के मौसम में फिर बदलाव आएगा। विभाग ने तीन दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम में बदलाव के कारण अगले कुछ दिनों में तापमान में चार डिग्री तक गिरावट आ सकती है। मंगलवार को पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा, रूपनगर और मोहाली समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। छह और सात जून को भी राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश के न्यूनतम तापमान में भी 2.8 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.8 डिग्री सेल्सियस रूपनगर में रिकॉर्ड किया गया। अमृतसर का अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री, लुधियाना का 35.6 डिग्री, पटियाला का 35.6 डिग्री, पठानकोट का 37.4 डिग्री, फाजिल्का का 37.1 डिग्री और फिरोजपुर का 36.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धान की फसल के लिए फायदेमंद बारिश पंजाब कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. गुरनाम सिंह ने कहा कि हाल की बारिश धान की फसल के लिए लाभदायक साबित हो रही है। इससे किसानों की सिंचाई की जरूरत कम हुई है और भूजल संरक्षण में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक वर्षा का पानी घुलित नाइट्रोजन को सीधे फसलों तक पहुंचाता है, जिससे जड़ों का बेहतर विकास होता है। साथ ही बारिश के कारण बिजली की मांग में भी कमी आई है। 

पदमनी और मधु को मिला प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का संबल

महासमुंद/रायपुर. ’मां की मुस्कान, बच्चे का उज्ज्वल भविष्य: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना बनी भरोसे की साथी’मातृत्व का सफर हर महिला के लिए भावनाओं, जिम्मेदारियों और नए सपनों से भरा होता है। इस महत्वपूर्ण दौर में यदि समय पर सहयोग और सुरक्षा का साथ मिल जाए, तो यह अनुभव और भी सुखद बन जाता है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ऐसी ही एक संवेदनशील पहल है, जो गर्भवती एवं धात्री माताओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य, पोषण और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित कर रही है। महासमुंद जिला के महासमुन्द नगर के वार्ड क्रमांक 11 निवासी पदमनी यादव के जीवन में यह योजना नई उम्मीद लेकर आई। गर्भावस्था के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की सेक्टर सुपरवाइजर शीला प्रधान ने उन्हें योजना की जानकारी दी। पंजीयन के बाद प्रथम संतान के जन्म पर उन्हें 5 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। इस राशि से उन्होंने पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य परीक्षण तथा शिशु की आवश्यक जरूरतों को पूरा किया। पदमनी बताती हैं कि इस सहयोग ने उन्हें मातृत्व के दौरान आर्थिक चिंताओं से राहत दी और बच्चे की बेहतर परवरिश का आत्मविश्वास प्रदान किया। इसी तरह वार्ड क्रमांक 11 की मधु यादव को भी योजना से महत्वपूर्ण सहायता मिली। पहले बच्चे के जन्म पर 5 हजार रुपये तथा बेटी के जन्म के बाद 6 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त होने से उन्हें मातृत्व संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी मदद मिली। मधु कहती हैं कि योजना से मिले सहयोग ने उनके परिवार को संबल दिया और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने का अवसर प्रदान किया। आज दोनों माताएं अपने बच्चों की बेहतर देखभाल कर रही हैं और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण आधार मानती हैं। उनका कहना है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि मातृत्व के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच और महिलाओं के सम्मान का प्रतीक है। महासमुंद शहरी क्षेत्र में अब तक 321 हितग्राही महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जबकि जिले में 27 हजार से अधिक महिलाएं इससे लाभान्वित हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के साथ-साथ महिलाओं के सशक्तिकरण और परिवारों के बेहतर भविष्य की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो रही है। योजना से लाभान्वित पदमनी और मधु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके जीवन में खुशियों और आत्मविश्वास की नई रोशनी लेकर आई है।

NFHS-6 रिपोर्ट ने दिखाई बिहार की बदली तस्वीर, बेटियों की पढ़ाई में आया बड़ा सुधार

पटना. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS)-6 की रिपोर्ट ने बिहार के सामाजिक और शैक्षणिक विकास की सकारात्मक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में छह वर्ष और उससे अधिक आयु की स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या 61.1 प्रतिशत से बढ़कर 64.1 प्रतिशत हो गई है। यानी छात्राओं की स्कूलिंग में करीब पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके मुकाबले पुरुषों में 10 या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वालों की संख्या 42.8 प्रतिशत से बढ़कर 45.9 प्रतिशत हुई है, जो करीब तीन प्रतिशत की वृद्धि है। विशेषज्ञों का मानना है कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, साइकिल योजना और सामाजिक जागरूकता अभियानों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। राजधानी पटना समेत राज्य के शहरी क्षेत्रों में लड़कियों का विद्यालयों और कालेजों में नामांकन लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार बिहार में महिलाओं की शैक्षणिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 33.1 प्रतिशत महिलाओं ने 10 या उससे अधिक वर्षों की स्कूली शिक्षा पूरी की है, जबकि एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 28.8 प्रतिशत था। यानी लगभग 4.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बैंकिंग और डिजिटल पहुंच में भी सुधार एनएफएचएस-6 के आंकड़ों के अनुसार बिहार में 98.5 प्रतिशत परिवारों के कम से कम एक सदस्य के पास बैंक या डाकघर खाता है, जबकि पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 95.5 प्रतिशत था। वहीं इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 20.6 से बढ़कर 58.4 हो गया है। पुरुषों में यह आंकड़ा 35.4 प्रतिशत से बढ़कर 78.1 प्रतिशत पहुंच गया है।  बाल विवाह और प्रजनन दर में कमी रिपोर्ट के अनुसार 20 से 24 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं का प्रतिशत, जिनकी शादी 18 वर्ष से पहले हुई थी, 40.8 प्रतिशत से घटकर 34.6 प्रतिशत हो गया है। वहीं कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 3.0 से घटकर 2.7 पर पहुंच गई है। इसे जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में सुधार बिहार में बिजली सुविधा वाले घरों की संख्या 96.3 प्रतिशत से बढ़कर 98.5 प्रतिशत हो गई है। बेहतर पेयजल सुविधा प्राप्त करने वाली आबादी का प्रतिशत 99.2 से बढ़कर 99.8 हो गया है। स्वास्थ्य बीमा या वित्तीय सुरक्षा योजना से जुड़े परिवारों का प्रतिशत भी 17.4 से बढ़कर 21.1 दर्ज किया गया है। पटना में दिख रहा बदलाव शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पटना में छात्राओं की स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थानों में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और बेटियों को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार एनएफएचएस-6 के आंकड़े संकेत देते हैं कि बिहार में सामाजिक विकास की रफ्तार तेज हुई है और इसमें महिलाओं की भागीदारी निर्णायक भूमिका निभा रही है। बदलाव की गवाही देते आंकड़े स्कूल जाने वाली लड़कियां : 61.1 प्रतिशत से बढ़कर 64.1 प्रतिशत 10 वर्ष या अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाएं : 28.8 प्रतिशत से बढ़कर 33.1 प्रतिशत 10 वर्ष या अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त पुरुष : 42.8 प्रतिशत से बढ़कर 45.9 प्रतिशत इंटरनेट उपयोग करने वाली महिलाएं : 20.6 प्रतिशत से बढ़कर 58.4 प्रतिशत बैंक खाता वाले परिवार : 95.5 प्रतिशत से बढ़कर 98.5 प्रतिशत बाल विवाह (18 वर्ष से पहले) : 40.8 प्रतिशत से घटकर 34.6 प्रतिशत कुल प्रजनन दर : 3.0 से घटकर 2.7

स्कूल पहुंचे चंडीगढ़ के प्रशासक, मलोया में पैरेंट्स ने शिकायतों की लगा दी झड़ी

चंडीगढ़. शहर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का जायजा लेने के लिए मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया मलोया स्थित सरकारी स्कूलों के निरीक्षण पर पहुंचे। उनके साथ शिक्षा विभाग के सचिव, निदेशक स्कूल शिक्षा सहित प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि जून माह में विद्यार्थियों की ग्रीष्मकालीन छुट्टियां चल रही हैं, इसके बावजूद प्रशासक ने स्कूल परिसरों की आधारभूत सुविधाओं, रखरखाव और शैक्षणिक वातावरण का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्कूल भवनों, कक्षाओं, खेल मैदानों और अन्य व्यवस्थाओं की स्थिति की समीक्षा की गई। गौरतलब है कि 25 मई को आयोजित समाधान शिविर के दौरान मलोया क्षेत्र के अभिभावकों ने स्कूलों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाया था। अभिभावकों ने शिकायत की थी कि स्कूलों के मैदानों में घास उगी हुई है, कई स्थानों पर टूटा-फूटा सामान पड़ा है तथा पुराने कबाड़ और डेस्कों के ढेर लगे हुए हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई थीं। अभिभावकों का कहना था कि कई विद्यार्थियों की पढ़ने-लिखने की क्षमता अपेक्षित स्तर से काफी नीचे है। शिकायतों के अनुसार आठवीं कक्षा के कुछ विद्यार्थी सामान्य पाठ पढ़ने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, जबकि नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को साधारण प्रार्थना-पत्र लिखने में भी परेशानी हो रही है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासक कटारिया ने स्वयं स्कूलों का दौरा करने की घोषणा की थी। उसी घोषणा के तहत मंगलवार को उन्होंने अधिकारियों के साथ स्कूलों का निरीक्षण किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्कूलों की कमियों को दूर करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया। निरीक्षण के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूलों के रखरखाव को बेहतर बनाने पर भी विशेष चर्चा की गई।

होमस्टे कारोबार को मिलेगा बढ़ावा, बैठक में ऋण सुविधा और पर्यटन संभावनाओं पर चर्चा

रायपुर. छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के अंतर्गत नए हितग्राहियों को जागरूक एवं प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के पर्यटन सूचना केंद्र जगदलपुर द्वारा जिला पंचायत बस्तर के सहयोग से आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में इच्छुक हितग्राहियों ने भाग लिया। ’छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के तहत आयोजित बैठक में हितग्राहियों को व्यवसाय संचालन, ऋण सुविधा एवं पर्यटन संभावनाओं की जानकारी’ दी गई। ’लोगों की आय में वृद्धि और रोजगार सृजन करना’ इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नए हितग्राहियों को होमस्टे व्यवसाय की बारीकियों से परिचित कराना, उन्हें पर्यटन आधारित स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना तथा छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति जागरूक करना था। इस सराहनीय पहल से बस्तर में सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि और रोजगार के नए अवसरों का सृजन होने की प्रबल उम्मीद है। ’पर्यटन स्थलों के विकास पर चर्चा’ बैठक के दौरान उपस्थित हितग्राहियों से उनके प्रस्तावित होमस्टे के संबंध में विस्तृत जानकारी ली गई। अधिकारियों ने विशेष रूप से जाना कि हितग्राही किस स्थान पर होमस्टे स्थापित करना चाहते हैं और उस क्षेत्र के आसपास कौन-कौन से पर्यटन स्थल या आकर्षण मौजूद हैं। अधिकारियों के अनुसार स्थानीय प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध क्षेत्रों में होमस्टे विकसित होने से पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। ’सफल संचालन एवं नीतिगत नियमों की जानकारी’ इस अवसर पर हितग्राहियों को होमस्टे व्यवसाय के सफल संचालन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया। उन्हें मुख्य मुख्य विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। अतिथि सत्कार के लिए पर्यटकों का स्वागत और आतिथ्य प्रबंधन, स्वच्छता एवं गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन, सुविधाएं व मार्केटिंग के रूप में पर्यटकों को दी जाने वाली आवश्यक सुविधाएं और डिजिटल प्रचार-प्रसार के तरीके, छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के प्रावधान, पात्रता शर्तें एवं आवेदन की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। ’ऋण सुविधा एवं बैंकिंग सहयोग’ बैठक में उपस्थित छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अधिकारियों ने योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता की जानकारी दी। उन्होंने हितग्राहियों को ऋण सुविधा, ब्याज अनुदान  तथा बैंकिंग प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से समझाया और आश्वस्त किया कि शासन की सहायता तथा बैंकिंग सहयोग से इच्छुक हितग्राही अपने होमस्टे व्यवसाय को सफलतापूर्वक स्थापित कर सकते हैं। ’बस्तर में सामुदायिक पर्यटन की अपार संभावनाएं’ कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित जिला पंचायत बस्तर के सहायक परियोजना अधिकारी तपन डे ने हितग्राहियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति एवं पर्यटन स्थलों की विविधता होमस्टे व्यवसाय के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करती है। उन्होंने सभी हितग्राहियों को पर्यटकों को उच्च गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देने और उन्हें एक बेहतर अनुभव प्रदान करने के लिए प्रेरित किया।

प्रदेश के विकास और जनकल्याण को बड़ी सौगात, 21,485 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी

प्रदेश के चहुँमुखी विकास, जन-कल्याण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 21 हजार 485 करोड़ रूपये की स्वीकृति स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 को मिली स्वीकृति अधिकार अभिलेखों पर स्टॉम्प ड्यूटी और पूरा पंजीयन शुल्क माफ करने का हुआ फैसला योजना का वित्तीय भार 3800 करोड़ रूपये का राज्य शासन करेगा वहन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगभग 17 हजार 59 करोड़ रूपये की स्वीकृति जिला न्यायालय भवन, पिपल्याहाना, इंदौर के निर्माण के लिए पुनरीक्षित लागत 626 करोड़ 61 लाख रूपये की स्वीकृति पहली से 8 वीं तक के विद्यार्थियों को सिली हुई गणवेश प्रदाय करने का निर्णय "मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 (संशोधन) अध्यादेश, 2026" के प्रारूप का अनुमोदन "मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश 2026" के प्रारूप का किया अनुमोदन "तन्वी द ग्रेट" और "शतकः संघ के 100 वर्ष" को एस.जी.एस.टी. से छूट के निर्णय का अनुसमर्थन बरगी जलाशय दुर्घटना की जांच के लिए न्यायिक जाँच आयोग के गठन का अनुसमर्थन मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। बैठक में प्रदेश के चहुंमुखी विकास, जन-कल्याण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए 21 हजार 485 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। साथ ही प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के लिए ऐतिहासिक एवं दूरगामी निर्णय लिए गए। मंत्रि-परिषद ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' के तहत स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क को पूरी तरह माफ करने का फैसला किया है, जिसका संपूर्ण 3800 करोड़ रूपये का वित्तीय भार राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। इसके साथ ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत 17 हजार 59 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई, जिससे नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण और एमबीबीएस तथा पीजी सीटों में बढ़ोतरी का मार्ग प्रशस्त होगा। बैठक में ग्रामीण विकास और वित्तीय सुधारों को गति देने के लिए 'मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम' तथा 'मध्यप्रदेश उपकर अधिनियम' में संशोधन संबंधी अध्यादेशों के प्रारूपों को मंजूरी दी गई। वहां, स्कूली शिक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए सत्र 2026-27 में कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को निविदा प्रक्रिया के माध्यम से सिली-सिलाई गणवेश प्रदाय करने का निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त इंदौर जिला न्यायालय भवन के पुनरीक्षित लागत, बरगी जलाशय हादसे की न्यायिक जांच के लिए आयोग गठन के निर्णय का अनुसमर्थन तथा 2 प्रमुख फिल्मों को एस.जी.एस.टी. से छूट देने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों पर मंत्रि-परिषद द्वारा मुहर लगाई गई। ये सभी निर्णय राज्य में बुनियादी ढांचे के विस्तार और पारदर्शी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 को स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद द्वारा निर्णय लिया गया है कि प्रदेश में स्वामित्व योजना में जिन भू-खण्डधारियों के अधिकार अभिलेख निर्मित किए गए हैं उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए इन निर्मित अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाए। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस का निष्पादन एवं पंजीयन किया जाएगा ताकि नागरिक आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका एवं आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए विशेष अभियान के तहत कार्यवाही पूर्ण की जाएगी। अब तक कुल 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया है। इसमें 48.32 लाख निजी संम्पत्तियां शामिल है। अधिकार अभिलेखों के पंजीयन के लिए नागरिकों से स्टॉम्प ड्यूटी अथवा पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा, संपूर्ण व्यय राशि 3800 करोड़ रूपये का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाएगा। मध्यप्रदेश पहला राज्य होगा जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी के नागरिकों के भू-खण्ड संबंधी अधिकार सुरक्षित कर उनकी आर्थिक उन्नति के मार्ग को प्रशस्त किया जा रहा है। स्वामिव योजना में मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी में निवासरत नागरिकों को उनका वैधानिक अधिकार प्रदान करने के लिए अधिकार अभिलेखों का निर्माण ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण, समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जायेगा। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त/संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी, सदस्य होंगे एवं आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञों को संयोजित किया जा सकेगा। योजना के प्रचार-प्रसार, मुद्रण व्यय एवं जन-जागरुकता गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना का विस्तृत परिपत्र एवं समय-समय पर आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण आदि जारी करने के लिए राजस्व विभाग को अधिकृत किया गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 17 हजार 59 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 17 हजार 59 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने चिकित्सा महाविद्यालय से सम्बद्ध चिकित्सालय योजना की 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 14,363.95 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के अंतर्गत प्रदेश के जन सामान्य को निशुल्क गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराये जाने एवं प्रदेश में चिकित्सा के लिए मानव संसाधन विकसित किये जाने के लिए 12 जिला मुख्यालयों पर चिकित्सा महाविद्यालयों एवं संबद्ध चिकित्सालयों का संचालन राज्य शासन द्वारा किया जा रहा है। चिकित्सा महाविद्यालय में पी.जी. पाठ्यक्रम के सुदृढ़ीकरण से संबंधित योजना के लिए 657 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत प्रदेश में संचालित चिकित्सा महाविद्यालयों में भारत सरकार के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मापदंडों के अनुरूप अतिरिक्त अधोसंरचना का निर्माण, नवीन मशीनें एवं उपकरणों के प्रतिस्थापन के फलस्वरूप अतिरिक्त स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम सीटों में वृद्धि होगी। इससे राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ जन सामान्य को सुदूर ग्रामीण अंचल से जिला स्तर तक चिकित्सा सुविधा के लिए चिकित्सीय मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण से संबंधित योजना के लिए 1200 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की … Read more