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पंडोरी की तलाश में पहुंची पुलिस, देर रात छापेमारी के बाद खाली हाथ लौटी टीम

अमृतसर  शिरोमणि अकाली दल की बीसी विंग के प्रधान एवं पार्षद इंद्रजीत सिंह पंडोरी के निवास पर बीती रात करीब ढाई बजे पुलिस की कई टीमें पहुंचीं। चार पुलिस वाहनों में पहुंचे अधिकारियों ने पंडोरी के घर पहुंचे। परिवार के सदस्यों ने बताया कि देर रात पुलिस कर्मियों ने घर पर पहुंचकर इंद्रजीत सिंह पंडोरी के बारे में पूछताछ की। जब परिवार के सदस्य बाहर आए तो उन्होंने पुलिस को बताया कि पंडोरी घर पर नहीं हैं। इसके बाद पुलिस टीम बिना किसी कार्रवाई के वहां से लौट गई। सूत्रों के अनुसार पुलिस इंद्रजीत सिंह पंडोरी को हिरासत में लेने के उद्देश्य से पहुंची थी, लेकिन उनके घर पर नहीं मिलने के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि पुलिस किस मामले में उन्हें हिरासत में लेने पहुंची थी, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। उल्लेखनीय है कि इसी सप्ताह मजीठा में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के समर्थक जोबनजीत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में मजीठिया अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और उसे पुलिस हिरासत से छुड़वा लिया था।

धमकी भरे पत्र से हड़कंप, नगर निगम कार्यालय समेत दो प्रमुख मंदिरों को उड़ाने की चेतावनी

चंडीगढ़. सेशन जज की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक ईमेल प्राप्त हुआ जिसमें अदालत परिसर को उड़ाने की धमकी दी गई थी। हरियाणा पुलिस ने बताया कि सोमवार को सत्र न्यायाधीश की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक ईमेल प्राप्त होने के बाद पंचकुला जिला अदालत में दहशत फैल गई, जिसमें अदालत परिसर को उड़ाने की धमकी दी गई थी। इसके चलते अदालत को खाली कराया गया और तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। पुलिस ने बताया कि अलर्ट मिलने के बाद पंचकुला पुलिस और जिला प्रशासन हरकत में आए और संभावित खतरे को खत्म करने के लिए तुरंत मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए और अदालत परिसर को अस्थायी रूप से खाली करा दिया। पुलिस ने बताया कि बम निरोधक दस्ते, खोजी कुत्तों और विशेष पुलिस टीमों को घटनास्थल पर भेजा गया और उन्होंने मिलकर अदालत परिसर में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। पंचकुला के सहायक पुलिस आयुक्त दिनेश कुमार ने कहा, “अदालत परिसर और आसपास के इलाके की गहन तलाशी में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। यह एक अफवाह थी।” सुरक्षा जांच के बाद स्थिति को पूरी तरह से सुरक्षित और नियंत्रण में घोषित कर दिया गया, लेकिन पुलिस ने अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया। प्रवेश और निकास बिंदुओं पर अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया और सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुसार निगरानी बढ़ा दी, पुलिस सूत्रों ने बताया। पंचकुला की डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने कहा, “धमकी मिलते ही स्थापित सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार तत्काल कार्रवाई की गई। पूरे कोर्ट परिसर की गहन जांच की गई है और स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है। साइबर सेल ईमेल का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। हम जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने का आग्रह करते हैं।” साइबर सेल ने ईमेल के स्रोत का पता लगाने और उसके तकनीकी पहलुओं की जांच करने के लिए जांच शुरू कर दी है। पुलिस और जिला अधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं, वहीं अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जिले में कानून व्यवस्था सामान्य बनी हुई है। हेडक्वार्टर में सुरक्षा जांच इस बीच, पंचकुला जिला अदालत को मिली बम की धमकी के मद्देनजर, सोमवार दोपहर को चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय परिसर में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और चंडीगढ़ पुलिस की टीमों द्वारा गहन सुरक्षा जांच की गई। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह कार्रवाई "एहतियाती उपाय" के रूप में की गई थी, खासकर हाल ही में हुई कई घटनाओं को देखते हुए जिनमें चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में स्कूलों और अदालत परिसरों को धमकी भरे ईमेल भेजे गए थे। उच्च न्यायालय परिसर की गहन और व्यवस्थित तलाशी के लिए खोजी दल और बम निरोधक दल सहित विशेष टीमों को तैनात किया गया था। अभियान के दौरान सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर कड़ी निगरानी रखी गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। यह कहानी इस विज्ञापन के नीचे जारी है शुक्रवार को अंबाला कोर्ट परिसर में बम की धमकी वाला ईमेल मिलने के बाद तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। हाल के हफ्तों में, चंडीगढ़ के कई स्कूलों के अलावा पंजाब के अमृतसर, जालंधर और पटियाला और हरियाणा के अंबाला में भी इसी तरह की बम की धमकियां मिली हैं, जो बाद में झूठी साबित हुईं।

बारिश से पहले एक्शन मोड में सरकार, 1400 हॉटस्पॉट और 2200 किमी सीवर नेटवर्क होगा दुरुस्त

चंडीगढ़. मानसून के दौरान सीवर ओवरफ्लो और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पंजाब सरकार ने राज्यभर में अब तक का सबसे बड़ा सीवरेज सफाई अभियान शुरू किया है। स्थानीय निकाय मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बुधवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि वर्षा शुरू होने से पहले पंजाब के सभी शहरों और कस्बों में 2,200 किलोमीटर लंबी सीवर लाइनों की सफाई तथा 1,400 पुराने सीवर ओवरफ्लो हाटस्पाट्स को दुरुस्त किया जाएगा। बैंस ने बताया कि इस अभियान के तहत 800 किलोमीटर मुख्य ट्रंक सीवर लाइनों और 1,400 किलोमीटर मोहल्लों की शाखा सीवर लाइनों की सफाई की जाएगी। विभाग ने ऐसे 1,400 स्थानों की पहचान की है जहां हर वर्ष मानसून के दौरान सीवर ओवरफ्लो की समस्या सामने आती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार ने इस बार स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है कि पंजाब के किसी भी शहर या कस्बे में सीवर ओवरफ्लो नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए विशेष अभियान मिशन मोड में चलाया जा रहा है। पटियाला में नंगल में होगी सफाई मंत्री अनुसार जालंधर में 108 किलोमीटर सीवर लाइन और 47 हाटस्पाट, पटियाला में 93 किलोमीटर, लुधियाना में 40 किलोमीटर और 42 हाटस्पाट, बठिंडा में 55 किलोमीटर और 39 हाटस्पाट, मोहाली में 36 किलोमीटर, जीरकपुर में 14 किलोमीटर और 15 हाटस्पाट, खरड़ में 11 किलोमीटर और 11 हाटस्पाट, धूरी में सात किलोमीटर और तीन हाटस्पाट, कोटकपूरा में 21 किलोमीटर तथा नंगल में सात किलोमीटर सीवर लाइनों की सफाई की जा रही है। जेई से एसई स्तर तक जवाबदेही हरजोत बैंस ने कहा कि स्थानीय निकायों और सीवरेज बोर्ड के जेई तथा अन्य कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। सुपर सक्शन मशीनों और हाई-कैपेसिटी जेटिंग उपकरणों की तैनाती की गई है। अभियान की प्रगति की निगरानी डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से रोजाना की जाएगी और जेई से लेकर एसई स्तर तक जवाबदेही तय की गई है। उन्होंने कहा कि सभी जिम्मेदार अधिकारियों को मैदान में रहने के निर्देश दिए गए हैं और विधायकों व नगर परिषद प्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ा गया है ताकि इस बार लोगों को जलभराव, सीवर बैकफ्लो और गंदे पानी से फैलने वाली बीमारियों से राहत मिल सके।

जैविक खेती और ड्रोन तकनीक से कृषि को नई उड़ान, मुख्यमंत्री साय ने गिनाए फायदे

रायपुर. आधुनिक तकनीकों, नवाचारों और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज रायपुर में आयोजित ‘मुख्यमंत्री किसान संवाद’ में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसानों के साथ आत्मीय चर्चा करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने खेती-किसानी से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए तथा किसानों के प्रश्नों और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और कम उम्र में ही खेती-किसानी तथा परिवार की जिम्मेदारियां संभालने का अवसर मिला। इसी कारण वे किसानों की जरूरतों, चुनौतियों और उनके संघर्ष को निकटता से समझते हैं। उन्होंने कहा कि पहले खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, आधुनिक तकनीकों और सुविधाओं का अभाव था, लेकिन आज कृषि क्षेत्र में बड़े परिवर्तन आए हैं। मशीनों, वैज्ञानिक पद्धतियों और नई तकनीकों के उपयोग से उत्पादकता बढ़ी है तथा किसानों के लिए नई संभावनाएं खुली हैं। कृषि योजनाओं से किसानों को मिल रहा आर्थिक संबल उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं ने किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान गांवों में किसानों से सीधे संवाद के दौरान यह अनुभव हुआ है कि विभिन्न योजनाओं का लाभ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के चेहरे पर दिखाई देने वाला आत्मविश्वास ही सरकार की योजनाओं की वास्तविक सफलता है। ड्रोन तकनीक से खेती होगी और आधुनिक कार्यक्रम में शामिल ड्रोन दीदियों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव कम समय, कम लागत और अधिक प्रभावशीलता के साथ किया जा सकता है। इससे खेती आधुनिक, वैज्ञानिक और लाभकारी बन रही है तथा महिलाओं के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। जैविक खेती और नैनो उर्वरकों पर जोर मुख्यमंत्री ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और जैविक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इनके उपयोग से लागत कम होती है, उत्पादन क्षमता बढ़ती है तथा मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान किया। किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा आगामी खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है तथा कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निगरानी की जा रही है। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों ने अमरूद, ड्रैगन फ्रूट, मौसंबी, पपीता और आम जैसी फसलों की उन्नत खेती के अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है तथा बदलते समय के अनुरूप किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ बागवानी, प्राकृतिक कृषि, जैविक खेती और अन्य नवाचारों को अपनाना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का युवा खेती को केवल परंपरा नहीं बल्कि आधुनिक उद्यम के रूप में देख रहा है। यह परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत सकारात्मक है। राज्य सरकार कृषि आधारित कौशल विकास, ड्रोन संचालन, कृषि मशीनरी, जैविक खेती और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रही है। नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने में संकोच न करें – मुख्यमंत्री कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि वे नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने में संकोच न करें। समय के साथ बदलती तकनीकों को अपनाकर सीमित लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीक ही किसानों की समृद्धि का आधार बनेंगे।

मध्यप्रदेश का मौसम बदला, भोपाल समेत कई जिलों में बारिश; 39 जिलों के लिए अलर्ट जारी

भोपाल  पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के चलते देश में मौसम तेजी से बदल रहा है. मौसम विभाग के अनुसार इसका असर मध्य प्रदेश में भी देखने को मिलेगा. लोगों के चिलचिलाती जलन देने वाली गर्मी से राहत मिल सकेगी. मौसम विभाग ने राजधानी भोपाल और इंदौर सहित मध्य प्रदेश के 39 जिलों में तेज आंधी, बारिश के साथ ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है।  वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से अगले 48 घंटे मध्य प्रदेश के लिए बेहद भारी मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि "वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के चलते अगले 48 घंटे मध्य प्रदेश के लिए बेहद भारी रहने वाले हैं. प्रदेश के 39 जिलों के लिए ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया गया है. उत्तर और दक्षिण भारत से आ रही नमी मध्य प्रदेश के एक बड़े हिस्से में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के हालात बना रही है. ऐसे में लोगों को अगले 48 घंटों तक सावधान रहने की सलाह दी गई है. जिला प्रशासन को सतर्क रहने के साथ लोगों को खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे नहीं ठहरने की एडवाइजरी जारी की गई है।  अचानक मौसम बदल रहा है मौसम विभाग के हिसाब से इस वक्त एक मजबूत वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव है, जिसके चलते अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आ रही है. ऐसे में दोनों सिस्टम जब आपस में मिलते हैं तो हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है. कई क्षेत्रों में बिजली की कड़कड़ाहट के साथ ओले गिरने की आशंका है।  मौसम विभाग ने नीमच, श्योपुर, मुरैना, टीकमगढ़ और छतरपुर में ओलावृष्टि के साथ 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। भोपाल में सुबह से बादल छाए हैं। कई इलाकों में तेज हवा के साथ बूंदाबांदी हुई। इसके अलावा रायसेन, सीहोर और नर्मदापुरम में भी बारिश हुई। उज्जैन, जबलपुर, सागर और रीवा संभाग के 33 जिलों में 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में ट्रफ लाइन और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश में बारिश और आंधी का दौर बना हुआ है। इसी कारण इस बार मानसून की दस्तक सामान्य तिथि 15 जून की बजाय 20 से 22 जून के बीच होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश में प्रशासन को अलर्ट रहने की सलाह दी गई तेजी से मौसम में आ रहे बदलाव के चलते अगले 48 घंटे मध्य प्रदेश के लिए बहुत परेशानियां ला सकते हैं. ऐसे में स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रहने की सलाह दी गई है. खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका के चलते मध्य प्रदेश के किसानों के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है. अगले 48 घंटों में मध्य प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में मौसम के सबसे ज्यादा आक्रामक रुख रखने की आशंका है. भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभागों में तेज हवाओं के साथ ओले गिर सकते हैं।  40 डिग्री से ऊपर पारा…रतलाम सबसे गर्म मध्य प्रदेश में बुधवार को आंधी-बारिश के दौर के बीच कुछ शहरों में तेज धूप भी खिली। इससे तापमान 40 डिग्री के ऊपर पहुंच गया। सबसे ज्यादा रतलाम में 42 डिग्री दर्ज किया गया। खरगोन में 41.8 डिग्री, राजगढ़ में 40.6 डिग्री, मलाजखंड-खंडवा में 40.5 डिग्री, खजुराहो-सागर में 40.3 डिग्री, नरसिंहपुर में 40.2 डिग्री, नौगांव, दमोह, उमरिया-मंडला में 40 डिग्री सेल्सियस रहा। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 39.4 डिग्री, इंदौर में 38.5 डिग्री, ग्वालियर में 38.9 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और जबलपुर में पारा 39.8 डिग्री दर्ज किया गया।

अभिभावकों को राहत: पंजाब में स्कूल फीस वृद्धि पर लगी सीमा, CM मान ने किया ऐलान

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य के निजी स्कूल अब सालाना पांच प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। इससे अधिक फीस वसूलने वाले स्कूलों को अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी, साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा।  मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल में अमृतसर में फीस को लेकर सामने आई दुखद घटना के बाद बड़ी संख्या में अभिभावकों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी। बच्चों और अभिभावकों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान जिन स्कूलों ने निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है, उनकी जांच कर अतिरिक्त वसूली गई रकम अभिभावकों के खातों में रिफंड करवाई जाएगी। इस संबंध में नया कानून आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा, जो राज्य के सभी निजी स्कूलों पर लागू होगा। मान ने स्पष्ट किया कि पांच प्रतिशत की सीमा केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं होगी। स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले सभी अनिवार्य शुल्क और फंड भी इसके दायरे में आएंगे। इसका उद्देश्य अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के लिए अपनाए जाने वाले अन्य रास्तों को बंद करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत फीस नियमन संबंधी कानून प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सका, जिससे कई स्कूलों को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने का अवसर मिला। नई व्यवस्था शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। निगरानी के लिए बनेगी रेगुलेटरी बाॅडी फीस वृद्धि संबंधी शिकायतों की निगरानी और जांच के लिए रेगुलेटरी बॉडी का गठन किया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगी कि फीस में बढ़ोतरी केवल वास्तविक खर्च और विकास कार्यों के आधार पर हो तथा संस्थान मुनाफाखोरी न करें। सरकार निजी स्कूलों के वित्तीय ऑडिट की व्यवस्था पर भी विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की कमेटी स्कूलों के पिछले तीन से पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। नियम तोड़ने पर होगी कड़ी कार्रवाई कानून के उल्लंघन पर पहली बार 30 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार उल्लंघन पर जुर्माना बढ़कर दो लाख रुपये तक हो सकता है। तीसरी बार नियम तोड़ने पर स्कूल की मान्यता या संबद्धता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। अभिभावक जिला स्तरीय रेगुलेटरी बॉडी के समक्ष फीस वृद्धि को चुनौती भी दे सकेंगे। 

हाई कोर्ट के फैसले से PRTC कर्मचारियों की बढ़ी चिंता, नियमितीकरण पर लगी रोक

चंडीगढ़  पंजाब रोडवेज एवं पीईपीएसयू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (पीआरटीसी) के कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के एकल पीठ के आदेश पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में नोटिस जारी करते हुए 31 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की है और तब तक संबंधित कर्मचारियों की सेवाओं के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। डिवीजन बेंच के समक्ष पीआरटीसी की ओर से अपील में 22 अप्रैल 2026 को पारित उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें एकल पीठ ने कर्मचारियों की याचिका स्वीकार करते हुए निगम को छह सप्ताह के भीतर उन्हें नियमित करने का निर्देश दिया था। एकल पीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित कर्मचारियों को नियमित माना जाएगा। 21 मई के आदेशों का दिया गया हवाला सुनवाई के दौरान पीआरटीसी की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि नियमितीकरण से जुड़ा समान कानूनी प्रश्न पहले से ही एक अन्य मामले में हाई कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। उन्होंने 21 मई 2026 को पारित एक अंतरिम आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पीईपीएसयू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन बनाम जसदीप सिंह व अन्य मामले में भी यही मुद्दा लंबित है और उस प्रकरण की सुनवाई 31 अगस्त 2026 को निर्धारित है। दलीलों पर विचार करने के बाद डिवीजन बेंच ने मामले में नोटिस जारी कर दिया और वर्तमान अपील को भी उसी तारीख पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया, जिस दिन समान प्रकृति का दूसरा मामला सुना जाएगा। अदालत ने आदेश दिया कि इस अपील को एलपीए-1410-2026 के साथ सुना जाएगा ताकि नियमितीकरण के मुद्दे पर एक समान दृष्टिकोण अपनाया जा सके। यथास्थिति बनाए रखने के दिए आदेश सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि निजी प्रतिवादियों यानी कर्मचारियों की सेवाओं के संबंध में संबंधित विभाग यथास्थिति बनाए रखे। इसका अर्थ यह है कि फिलहाल न तो कर्मचारियों को नियमित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और न ही उनकी मौजूदा सेवा स्थिति में कोई बदलाव किया जाएगा। फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश से एकल पीठ के नियमितीकरण संबंधी निर्देशों के क्रियान्वयन पर रोक लग गई है और अंतिम निर्णय आने तक स्थिति यथावत बनी रहेगी।

सीमा पार कनेक्शन का खुलासा, पंजाब में IED के साथ 2 अपराधी दबोचे गए, बड़े हमले की थी तैयारी

चंडीगढ़  पंजाब पुलिस ने सीमा पार से चल रहे आतंकी नेटवर्क के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) मोहाली ने विदेश में बैठे एक आतंकी ऑपरेटिव के दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई का खुलासा पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने किया। अभी तक की जांच में सामने आया है कि इनके द्वारा सार्वजनिक ढांचे को निशाना बनाने की साजिश थी, जिसे नाकाम कर दिया गया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बड़ा सुरक्षा खतरा टल गया। मामले में आगे की जांच जारी है। जांच एजेंसियां साजिश से जुड़े हैंडलर्स, सहयोगियों और पूरे आतंकी नेटवर्क के संबंधों का पता लगाने में जुटी हैं। पंजाब पुलिस ने कहा कि वह आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने, संगठित अपराध पर अंकुश लगाने और राज्य में शांति व जन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 2022 में पुलिस इंटेलिजेंस मुख्यालय पर हुआ था RPG अटैक मोहाली में पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस मुख्यालय पर 9 मई 2022 को आरपीजी (RPG) हमला हुआ था, जिसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है। मामले में अब तक पाकिस्तान और कनाडा में बैठे आतंकियों, स्थानीय गैंगस्टरों और ड्रग तस्करों के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ हो चुका है। केंद्रीय एजेंसियां मुख्य शूटर दीपक रंगा को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से और मुख्य साजिशकर्ता चढ़त सिंह को मुंबई से गिरफ्तार कर चुकी हैं। इसके अलावा कई अन्य आरोपियों को भी जेल भेजा जा चुका है। जांच में पता चला कि इस हमले की मुख्य साजिश पाकिस्तान में छिपे आतंकी हरविंदर सिंह रिंदा और कनाडा में बैठे लखबीर सिंह लांडा (बब्बर खालसा इंटरनेशनल) ने रची थी, जिनकी संपत्तियां भी कुर्क की जा चुकी हैं। मोहाली की विशेष अदालत में इस मामले पर लगातार कानूनी कार्रवाई चल रही है, जहां जेल में बंद मुख्य आरोपियों गुरपिंदर पिंदा, निशांत सिंह और विकास कुमार समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ सुनवाई और गवाही की प्रक्रिया जारी है।

सचिवालय में हड़कंप! कंट्रोल रूम को मिला बम धमाके का धमकी भरा ई-मेल

चंडीगढ़. पंजाब सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद वीरवार को सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। सचिवालय के कंट्रोल रूम को एक धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें परिसर में बम होने की बात कही गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ते और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत अलर्ट कर दिया गया। धमकी मिलने के बाद सचिवालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान चलाया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने भवन के विभिन्न हिस्सों की गहन जांच की। हालांकि, प्रारंभिक जांच के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई। सुरक्षा व्यवस्था की गई कड़ी धमकी के मद्देनजर सचिवालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई। प्रवेश और निकास द्वारों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया तथा आने-जाने वाले लोगों की सघन जांच की गई। अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी। ई-मेल की जांच में जुटीं एजेंसियां पुलिस और साइबर सेल की टीमें धमकी भरा ई-मेल भेजने वाले की पहचान करने में जुट गई हैं। ई-मेल की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि संदेश कहां से भेजा गया और इसके पीछे किसका हाथ है। अफवाहों से बचने की अपील अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाए गए हैं।

सरकारी जमीन पर मचा बवाल, प्रभारी मंत्री ने दिए 52 साल पुरानी रजिस्ट्री की जांच के आदेश

खैरागढ़. शहर के बहुचर्चित एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क और नजूल भूमि विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। करीब 85 हजार वर्गफीट जमीन और 40 करोड़ रुपए से अधिक की अनुमानित कीमत से जुड़े इस मामले में 52 साल पुरानी रजिस्ट्री, सरकारी रिकॉर्ड और कथित प्लॉटिंग को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विवाद बढ़ने के बाद अब प्रभारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने भी मामले की जांच के संकेत दिए हैं। 1974 की रजिस्ट्री से शुरू हुआ विवाद सामने आए दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 1974 में प्लॉट क्रमांक 114 और 115 की रजिस्ट्री अवयस्क स्मृति सिंह के नाम की गई थी। रजिस्ट्री में इन भूखंडों का उल्लेख “एडवर्ड पार्क” और “बाड़ी एडवर्ड पार्क” के रूप में दर्ज है। दस्तावेज में तत्कालीन राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह विक्रेता के रूप में दर्ज हैं, जबकि आम मुख्तियार के रूप में रविंद्र बहादुर सिंह के हस्ताक्षर हैं। क्रेता पक्ष में अवयस्क स्मृति सिंह की ओर से उनकी माता एवं संरक्षिका रश्मि देवी सिंह का नाम दर्ज है। उस समय जमीन का विक्रय मूल्य मात्र 3 हजार रुपए दर्शाया गया था। विवाद इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि रजिस्ट्री में शामिल प्रमुख नाम एक ही राजपरिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड में पार्क और सार्वजनिक भूमि का उल्लेख मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकारी अभिलेखों को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार खसरा नंबर 167, 169 और 170 में सड़क, रास्ता, घास भूमि और छोटे झाड़ का जंगल दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं नजूल मेंटेनेंस खसरे में प्लॉट नंबर 114 को “एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क” और प्लॉट नंबर 115 को “बाड़ी एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क” के रूप में दर्ज बताया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग या पार्क की श्रेणी में थी, तो इसका भूमि उपयोग परिवर्तन कब और किस प्रक्रिया के तहत हुआ? अब तक इससे संबंधित कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। 22 हिस्सों में हुई प्लॉटिंग, 40 करोड़ से अधिक कीमत संयुक्त जांच प्रतिवेदन के अनुसार लगभग 85,627 वर्गफीट भूमि विभिन्न लोगों को विक्रय किए जाने का उल्लेख है। जानकारी के मुताबिक इस जमीन को 22 हिस्सों में बांटकर प्लॉटिंग की गई। वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर इसकी कीमत 40 करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। यही कारण है कि मामला अब केवल जमीन की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक महत्व की बहुमूल्य भूमि से जुड़े बड़े विवाद का रूप ले चुका है। पहले भी विधानसभा तक पहुंच चुका है मामला यह विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। वर्ष 2020 में तत्कालीन विधायक और खैरागढ़ राजपरिवार के सदस्य स्वर्गीय देवव्रत सिंह ने विधानसभा में क्षेत्र में चल रही कथित अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा उठाया था। इसके बाद प्रशासनिक जांच भी हुई थी और कई भूखंडों को अवैध प्लॉटिंग की श्रेणी में चिन्हित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। कुछ मामलों में रजिस्ट्रियों पर रोक लगाने की कार्रवाई भी की गई थी। छोटे अतिक्रमणों पर कार्रवाई, बड़े मामलों में चुप्पी क्यों? इस पूरे विवाद ने प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर सरकारी जमीन पर छोटे अतिक्रमण की शिकायत मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो जाता है। सड़क किनारे बनी झोपड़ियों, गुमटियों और छोटे निर्माणों पर बुलडोजर चलाने में देर नहीं लगाई जाती। लेकिन अब लोगों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड, जांच प्रतिवेदन और अन्य दस्तावेज करोड़ों रुपए मूल्य की इस जमीन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं, तो अब तक कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? लोगों का मानना है कि नियमों की सख्ती कमजोर और गरीब लोगों के लिए अलग दिखाई देती है, जबकि प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गति धीमी पड़ जाती है। भूमिस्वामी पक्ष ने रखा अपना पक्ष भूमिस्वामी पक्ष के प्रतिनिधि रजत भार्गव ने कहा कि उनके पास वर्ष 1974 की विधिवत पंजीकृत रजिस्ट्री, सीमांकन प्रतिवेदन और राजस्व अभिलेख उपलब्ध हैं। उनके अनुसार यह भूमि वर्षों से उनकी पत्नी स्मृति भार्गव के नाम दर्ज है और समय-समय पर उसका सीमांकन भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि शासन या प्रशासन किसी भी प्रकार की जानकारी मांगता है तो सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे। बिना सभी रिकॉर्ड और तथ्यों की जांच किए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। प्रभारी मंत्री ने दिए जांच के संकेत मामले को लेकर खैरागढ़ जिले के प्रभारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि वह कलेक्टर से चर्चा करेंगे और उपलब्ध दस्तावेजों तथा जांच प्रतिवेदन का परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने कहा, “यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” जांच पर टिकी सबकी नजर एक तरफ 52 साल पुरानी रजिस्ट्री है तो दूसरी तरफ सरकारी रिकॉर्ड में पार्क और सार्वजनिक उपयोग की भूमि का उल्लेख। एक ओर निजी स्वामित्व का दावा है, तो दूसरी ओर करोड़ों रुपए की प्लॉटिंग और सरकारी जमीन के कथित उपयोग को लेकर उठ रहे सवाल। अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और शासन के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह विवाद सिर्फ जमीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा, सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और कानून के समान अनुपालन की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।