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NEET UG 2026 की तैयारियां तेज: मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को दिए अहम दिशा-निर्देश

’नीट यूजी 2026 परीक्षा के सुचारु संचालन के लिए मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को दिये दिशा-निर्देश   मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न  रायपुर मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आगामी 21 जून को नीट (यू जी) 2026 की पुनः परीक्षा के सुचारु संचालन हेतु बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये हैं। उन्होंने परीक्षा के दौरान केन्द्र सरकार एवं राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा जारी दिशा- निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने कहा है।  नीट पुनः परीक्षा 21 जून को               मुख्य सचिव ने कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को परीक्षा के पहले ही परीक्षा केन्द्रों का निरीक्षण करने और परीक्षा के लिए की गई तमाम तैयारियों के बारे जानकारी लेने कहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस है इसे ध्यान में रखते हुये परीक्षा संचालन में  कहीं पर कोई दिक्कत नहीं हो यह सुनिश्चित कर लिया जाये। परीक्षा केन्द्रों पर आने जाने के लिए समुचित व्यवस्था हो। उन्होंने योगा दिवस से संबंधित गतिविधियों के कारण किसी भी परीक्षा केन्द्र पर परीक्षा संचालन प्रभावित नहीं हो यह सुनिश्चित करने कहा है।              मुख्य सचिव ने कहा कि परीक्षा देने जा रहे बच्चें घबराये नही- परीक्षा अच्छे से दें। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की संयुक्त टीम बच्चों की काउंसलिंग करें कि उन्हें किसी भी तरह परीक्षा से घबराने की जरूरत नहीं है। मुख्य सचिव ने परीक्षा के एक दिन पहले 20 जून को परीक्षा संचालन के लिए तमाम व्यवस्थाओं के लिए माकड्रिल एक्सरसाइज करने के निर्देश दिए है। उन्होंने माकड्रिल की तैयारी पहले से करने कहा है। परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कहा गया है। परीक्षा के प्रश्न-पत्र एवं ओएमआर शीट एयर फोर्स के माध्यम से मूव होंगे। इन्हें सुरक्षा के साथ रखने कलेक्टर, एसपी को पहले से ही पर्याप्त तैयारी करने कहा गया है। प्रत्येक जिले में नियंत्रण कक्ष की स्थापना करने एवं परीक्षा दिवस पर सक्रिय रखने कहा गया है, जिससे परीक्षा संचालन का प्रभावी निगरानी की जा सकें। नीट पुनः परीक्षा 2026 के लिए 19 शहरों में 127 परीक्षा केन्द्र बनाये गए             वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बैठक में शामिल हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में नीट पुनः परीक्षा 2026 के लिए 19 शहरों में होगी। परीक्षा के लिए कुल 127 परीक्षा केन्द्र बनाये गए है। सिंह ने सभी जिला र्प्रशासन के अधिकारियों से परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां करने एवं सहयोग और समन्वय करने का अनुरोध किया।           बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव बसवराजु एस. सहित राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा नामित छत्तीसगढ़ राज्य नोडल अधिकारी पीयुष शुक्ला सहित छत्तीसगढ़ शासन के तकनीकी शिक्षा संचालनालय, पुलिस विभाग तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारी सहित सरगुजा, बालोद, बीजापुर, बिलासपुर, दुर्ग, दंतेवाड़ा, धमतरी, बस्तर, जांजगीर-चापा, कांकेर, कोण्डागांव, कोरबा, महासमुंद, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, नारायणपुर, रायगढ़, रायपुर, राजनांदगांव एवं सुकमा के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।

भगवंत मान सरकार का बड़ा स्वास्थ्य कवच, हजारों श्वास रोगियों का बिना खर्च हुआ उपचार

चंडीगढ़. पंजाब की खास मुख्यमंत्री सेहत योजना ने निमोनिया, अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD) और रेस्पिरेटरी फेलियर जैसी सांस की बीमारियों के इलाज पर करीब ₹86 लाख खर्च किए हैं, जिससे राज्य भर में 3,000 से ज़्यादा मरीज़ों को फ़ायदा हुआ है। जानकारी देते हुए, हेल्थ और फ़ैमिली वेलफ़ेयर मिनिस्टर डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि इस स्कीम के तहत अब तक कुल 3,019 सांस से जुड़े इलाज दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, "शुरू होने के बाद से पांच महीनों में करीब 46 लाख लोगों ने हेल्थ इंश्योरेंस प्रोग्राम के तहत रजिस्टर किया है।" हर परिवार को सालाना ₹10 लाख तक का कैशलेस हेल्थ कवर देने वाली यह स्कीम, समय पर मेडिकल मदद की ज़रूरत वाले मरीज़ों, खासकर आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके के लोगों के लिए एक अहम सपोर्ट सिस्टम बनकर उभरी है। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, "अगर इलाज में देरी हो तो सांस की बीमारियां जानलेवा हो सकती हैं। मुख्यमंत्री सेहत योजना के ज़रिए, परिवारों को अब मेडिकल इमरजेंसी के दौरान पैसे का इंतज़ाम करने की चिंता नहीं करनी पड़ती। मरीज़ कैशलेस इलाज पा सकते हैं और बिना देर किए देखभाल पा सकते हैं।" उन्होंने कहा कि सांस की बीमारियां पंजाब में अस्पताल में भर्ती होने के सबसे आम कारणों में से एक हैं, खासकर मौसमी बदलावों और ज़्यादा एयर पॉल्यूशन के समय में। उन्होंने आगे कहा, "जो अक्सर खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ़ से शुरू होता है, अगर इलाज न किया जाए तो यह जल्दी ही एक गंभीर मेडिकल कंडीशन बन सकता है।" मंत्री ने कहा कि पैसे की तंगी की वजह से पारंपरिक रूप से कई परिवारों को अस्पताल जाना टालना पड़ता था, जिससे अक्सर दिक्कतें होती थीं और इलाज का खर्च बढ़ जाता था। उन्होंने आगे कहा, "2,300 से ज़्यादा प्रोसीजर और इलाज के लिए कैशलेस कवरेज उपलब्ध होने के साथ, यह स्कीम मरीज़ों को बीमारी के शुरुआती स्टेज में हेल्थकेयर पाने में मदद कर रही है।" किफ़ायती हेल्थकेयर के लिए सरकार के वादे को दोहराते हुए, डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, "यह स्कीम परिवारों पर पैसे का बोझ कम कर रही है, साथ ही समय पर मेडिकल मदद को बढ़ावा दे रही है और पूरे पंजाब में हेल्थ के नतीजों में सुधार कर रही है।" पटियाला के माता कौशल्या सरकारी हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. जोरावर सिंह ने कहा कि सांस की देखभाल में देर से हॉस्पिटल में भर्ती होना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा, "सांस की कई बीमारियों का जल्दी इलाज होने पर बेहतर असर होता है। हालांकि, मरीज़ अक्सर अपनी हालत बिगड़ने के बाद आते हैं क्योंकि परिवार पैसे का इंतज़ाम करने में मुश्किल महसूस कर रहे होते हैं। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैशलेस इलाज इस कमी को पूरा करने में मदद कर रहा है।"

श्रमिकों के बच्चे अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासक बनेंगे : मुख्यमंत्री

कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों ने प्रदेश का नाम किया रोशन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय श्रमिकों के बच्चे अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासक बनेंगे : मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 22 मेधावी विद्यार्थियों को दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि 28 हजार 754 श्रमिक परिवारों को 7.79 करोड़ रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित विश्व पर्यावरण दिवस पर "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत किया पौधारोपण, प्रदेशवासियों से भी किया आह्वान रायपुर, श्रमिक अपने श्रम, समर्पण और परिश्रम से समाज तथा देश के विकास की मजबूत नींव तैयार करते हैं। वे स्वयं कठिन परिस्थितियों में रहकर दूसरों को सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, इसलिए श्रमिक वास्तव में देश के निर्माता हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में श्रम विभाग द्वारा आयोजित मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करने वाले पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 22 मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया। इनमें कक्षा 10वीं के 9 तथा कक्षा 12वीं के 13 विद्यार्थी शामिल हैं। ये विद्यार्थी रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, गरियाबंद, सक्ती, बलौदाबाजार, रायगढ़ और कांकेर सहित विभिन्न जिलों से हैं। मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि श्रमिक परिवारों के संघर्ष, परिश्रम और संकल्प की प्रेरक कहानी है। उन्होंने कहा कि आज जिन श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों को सम्मानित किया जा रहा है, उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे कभी भी स्वयं को किसी से कम न समझें। इतिहास इस बात का साक्षी है कि अनेक महान व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर अपनी मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर उच्चतम शिखरों तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि श्रमिकों के बच्चे केवल श्रमिक बनकर न रह जाएं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासक, वैज्ञानिक और विभिन्न उच्च पदों पर पहुंचकर छत्तीसगढ़ महतारी तथा देश की सेवा करें। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक कल्याण के लिए लगभग 70 प्रकार की योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने श्रमिक परिवारों से इन योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आग्रह किया तथा उपस्थित हितग्राहियों से कहा कि वे उन श्रमिकों तक भी योजनाओं की जानकारी पहुंचाएं जो अभी इन सुविधाओं से वंचित हैं। अपने केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री के रूप में कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रमिकों और मेहनतकश वर्ग के हितों के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। वर्ष 2014 से 2019 के दौरान केंद्र सरकार में दायित्व निभाते समय उन्हें श्रम मंत्रालय के कार्यों को निकट से देखने तथा श्रमिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि पहले अलग-अलग स्थानों पर कार्य करने के कारण श्रमिकों को भविष्य निधि (पीएफ) राशि प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए यूनिवर्सल पीएफ नंबर की व्यवस्था लागू की गई, जिससे अब एक ही पीएफ नंबर श्रमिक के पूरे कार्यकाल से जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम पेंशन व्यवस्था तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कदम भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उठाए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 28 हजार 754 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारों को कुल 7 करोड़ 79 लाख 52 हजार 370 रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। यह राशि निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक सहायता, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनीलाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना, मुख्यमंत्री साइकिल सहायता योजना, पेंशन सहायता योजना सहित विभिन्न श्रमिक हितैषी योजनाओं के तहत प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत मेधावी विद्यार्थियों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा एक लाख रुपये दोपहिया वाहन क्रय करने के लिए प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मंडल द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिवारों के हित में अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के बच्चों को उच्च शिक्षा और स्वरोजगार के लिए भी विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ मिला है और वे इस राशि का उपयोग उच्च शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए करेंगे। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण किया तथा प्रदेशवासियों से अपनी माताओं के नाम पर पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोग अपने आंगन, खेत-खलिहान, मेढ़ अथवा उपलब्ध स्थानों पर पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण के इस अभियान को जनांदोलन का स्वरूप दें। इस अवसर पर श्रम विभाग के सचिव एवं श्रम आयुक्त हिमशिखर गुप्ता, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, जनप्रतिनिधिगण, विभागीय अधिकारी, श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी, बड़ी … Read more

विदेशी निवेश नियमों में ढील का असर: डॉलर के मुकाबले रुपया उछला, बाजार में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी निवेश के नियमों को आसान बनाने के बाद आज भारतीय रुपये में जबरदस्त मजबूती देखने को मिली. शुक्रवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 50 पैसे मजबूत होकर 95.24 के स्तर पर पहुंच गया. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.74 के स्तर पर बंद हुआ था।  निवेश नियमों में ढील से बढ़ा भरोसा रिजर्व बैंक ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश करने के नियमों को काफी सरल कर दिया है. इसके साथ ही, अनिवासी भारतीयों (NRIs) और विदेशी भारतीय नागरिकों (OCIs) के लिए भी भारतीय शेयर बाजार (इक्विटी) में निवेश की सीमा को बढ़ा दिया गया है।  बाजार के जानकारों का मानना है कि आरबीआई के इन कदमों से देश में विदेशी डॉलर का प्रवाह बढ़ेगा. 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) का दायरा बढ़ने और विदेशी मुद्रा स्वैप जैसी खास सुविधाओं से रुपये को बड़ी ताकत मिली है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भरोसा जताया कि भारत का 682 अरब डॉलर का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी वैश्विक संकट से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है।  ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी मौद्रिक नीति बैठक में आरबीआई ने ब्याज दरों (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा है. केंद्रीय बैंक ने बाजार को लेकर अपना रुख 'न्यूट्रल' यानी तटस्थ रखा है, जिससे जरूरत पड़ने पर आगे कदम उठाए जा सकें।  महंगाई और विकास दर के नए अनुमान कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को देखते हुए रिजर्व बैंक ने अपने आर्थिक अनुमानों में कुछ बड़े बदलाव किए हैं:     विकास दर (GDP): चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।      महंगाई (CPI): खुदरा महंगाई दर का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% किया गया है।  वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) आज करीब 1 फीसदी की तेजी के साथ 95.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. तेल की यह बढ़ती कीमत भारत के आयात बिल के लिए एक चुनौती बनी हुई है, लेकिन आरबीआई के नए सुधारों ने फिलहाल बाजार के डर को दूर कर रुपये को बूम दे दिया है। 

व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित भोपाल  विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर, जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (जेएसआई) ने 5 जून को भोपाल के गांधी भवन में व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, जम्मू और कश्मीर, दिल्ली, बिहार, छत्तीसगढ़, मणिपुर, असम, ओड़ीशा, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मजदूर संगठनों, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, समुदाय के प्रतिनिधियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय नुकसान और मजदूरों के अधिकारों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। व्यावसायिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और पानी एवं वैश्विक गर्मी जैसे चार सत्रों में इस चर्चा को आयोजित किया गया।   सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत में काम से जुड़ी सेहत और सुरक्षा एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है, लाखों मजदूर उद्योगों, खनन, निर्माण, घरेलू काम और दूसरे अनौपचारिक क्षेत्रों में खतरनाक हालात का सामना करते हुये काम कर रहे हैं। प्रतिभागियों ने मजदूरों की सेहत की सुरक्षा के लिए श्रम कानूनों, काम से जुड़ी सुरक्षा के मानकों को बेहतर ढंग से लागू करने और संगठित प्रयास करने की जरूरत पर चर्चा की। सिलिकोसिस से प्रभावित कुछ मजदूरों ने अपनी कहानियां और मदद पाने में आने वाली चुनौतियों के बारे में भी बताया। ऐसे सम्मेलनों के महत्व को बताते हुए, अमूल्य निधि ने कहा कि हमें अपनी जागरूकता बढ़ानी होगी और पर्यावरण की रक्षा तथा काम से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाव के लिए मिलकर काम करना होगा। व्यावसायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ जगदीश पटेल ने कहा कि काम से जुड़े स्वास्थ्य खतरों के मामले में हर जगह जोखिम है, और हमें उनकी पहचान करने की जरूरत है। 90 से ज्यादा ऐसे काम हैं जिनसे सिलिकोसिस हो सकता है। 70 से ज्यादा देशों ने एस्बेस्टस पर रोक लगा दी है, भारत ने सिर्फ एस्बेस्टस की माइनिंग पर रोक लगाई है, लेकिन इसके इंपोर्ट की इजाजत है। काम से जुड़े खतरों के बारे में बात करते हुए सुश्री चुन्नी ने कहा कि काम के दौरान मजदूरों को कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है। वे अपने अंग खो देते हैं और कुछ हादसों में उनकी जान भी चली जाती है। हम उन्हें मुआवजा और दूसरी तरह की मदद दिलाने में सहायता करते हैं। दूसरा मुख्य सत्र "पर्यावरण, जलवायु और स्वास्थ्य" पर केंद्रित था, जिसमें खनन और उससे जुड़े उद्योगों में काम से जुड़े खतरों, पर्यावरण को हो रहे नुकसान, सुरक्षित पानी की चुनौतियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के असर पर चर्चा की गई। अरावली बचाने के संघर्ष में शामिल कैलाश मीणा ने कहा कि हमे अपने संसाधनों को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करते हुये उसे संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए। अरावली पहाड़ को जिस प्रकार से काटा गया है वो एक संकट पैदा कर रहा है। अपने विचार रखते हुए राजकुमार ने कहा कि हम तेजी से अपने प्राकृतिक संसाधन खो रहे हैं। 50 साल पहले हमारे पास 15 हजार नदियां थी जिसमे से 4500 नदियां खत्म हो चुकी है। भारत में वायु प्रदूषण से लगभग 20 लाख मौतें प्रत्येक वर्ष होती है। हमने हवा, पानी और मिट्टी केपी जहरीला बना दिया जिसका सीधा असर स्वास्थ्य पर होता है। राकेश दीवान ने कहा कि हमें आत्महंता समाज बनते जा रहे है, हमे उनसे सीखना होगा जिंहोने जंगल को आज हैती  बचा कर रखा है हमें उस पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करना चाहिए, जिसने हमारे पर्यावरण की रक्षा की है।  आखिरी सत्र में भविष्य की व्यावसायिक स्वास्थ्य रणनीतियों पर चर्चा की गई, जिसमें राज्य-स्तर पर किए जाने वाले कामों को मजबूत करना प्रमुख रहा। अंतराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस 10 दिसंबर 2026 को जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम में घोषणा पत्र जारी करते हुये आगामी कार्ययोजना कि रूपरेखा भी बताई गई जिसमें व्यावसायिक स्वास्थ्य की स्थितियों का अंकलन रिपोर्ट प्रस्तुत करना,घातक उद्योगों में कार्यरत मजदूरों के लिए बने कानून, नीति एवं सुरक्षा संबंधी प्रभावों का अंकलन रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। देश के 5 राज्यों में विकास परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का स्वास्थ्य सर्वे कर स्थिति रिपोर्ट जारी किया जाएगा। साथी ही स्वास्थ्य सेवाओं और ईएसआई कि स्थिति का सर्वे भी किया जाएगा।   जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया द्वारा इस वर्ष देश के सभी राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों में स्वास्थ्य दिवस अभियान चलाया गया था जिसे और मजबूत किया जाएगा। सम्मेलन में निर्णय लिया गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार कोर्स चलाया जाएगा, जिसका पहला कार्यक्रम श्रीनगर में 1-7 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा।    कार्यक्रम को सफल बनाने में जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया के उत्तरप्रदेश संजीव सिन्हा, ओड़ीशा के गोरांग महापात्रा, छत्तीसगढ़ के चंद्रकांत यादव, पुनिता कुमार, प्रकाश गार्डिया, दिल्ली से इफत राग, जम्मू कश्मीर के रही रियाज, राजस्थान कि हेमलता कंसोटिया, असम के मुकुट लोचन, मणिपुर के ऋषिकान्त आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।    

खूबसूरती और प्रतिभा का जलवा: सागर की बेटी अब कनाडा में करेगी भारत का प्रतिनिधित्व

सागर  शहर की बेटी अपूर्वा दुबे ने हाल ही में इंदौर में हुई मिसेज एशिया पैसिफिक वर्ल्ड प्रतियोगिता जीतकर ना सिर्फ सागर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है. प्रतियोगिता जीतने के बाद सागर अपने मायके पहुंची अपूर्वा का जोरदार स्वागत किया गया. अब अपूर्वा कनाडा में आयोजित होने वाली काॅस्मो वर्ल्डवाइड प्रतियोगिता में शिरकत करेंगी. जिसकी तैयारियों में वो जुट गयी है. उनका कहना है कि सागर में पढ़ाई के दौरान वो कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रही है, इसलिए स्टेज पर जाने में हिचक नहीं थी और मैंने आत्मविश्वास के साथ अपने आप को पेश किया, जिसके कारण ये खिताब जीत पायी।  इंदौर में हुई प्रतियोगिता सागर शहर की बेटी और अपूर्वा दुबे वैद्य ने मिसेज एशिया पैसेफिक वर्ल्ड खिताब जीतकर शहर के साथ अपने परिवार का नाम रोशन किया है. सागर यूनिवर्सिटी के शिक्षक गिरीश मोहन दुबे की बेटी अपूर्वा ने बताया कि "उन्हें इस प्रतियोगिता की जानकारी एक दोस्त के जरिए मिली थी. उनके पास समय कम था, लेकिन सागर में पढ़ाई के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्टेज एक्टिविटीज में सक्रिय रहने के कारण आत्मविश्वास के चलते प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और 22 से 24 मई तक इंदौर के एक होटल में आयोजित प्रतियोगिता में जीत हासिल की।  कई चरणों में हुई प्रतियोगिता अपूर्वा दुबे वैद्य ने बताया कि तीन दिन तक अलग-अलग सेशन में प्रतियोगिता आयोजित की गयी. अलग-अलग 9 चरणों में ग्रूमिंग सेशन, रैंप वॉक ट्रेनिंग, व्यक्तित्व विकास, शिष्टाचार और प्रश्न उत्तर सत्र आयोजित किए गए. प्रतियोगिता में दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई, पुणे, रतलाम सहित देश के कई शहरों की महिला प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इन 9 चरणों के प्रदर्शन के आधार पर फिनाले में पहुंची और वहां के प्रदर्शन के आधार पर खिताब जीता।  ट्रेडिशनल लहंगा और मां लक्ष्मी के स्वरूप में मिली जीत अपूर्वा ने बताया कि फिनाले में इंट्रोडक्शन, इंडियन एथेनिक और इंडिया गाॅड्स राउंड हुए. जिसमें उन्होंने इंडियन एथेनिक राउंड में पारंपरिक लहंगा पहना और जबकि इंडियन गॉड्स राउंड में मां लक्ष्मी का स्वरूप प्रस्तुत किया।  इस तरह उन्होंने टॉप 15 में जगह बनायी और इसके बाद सबसे आखिर में क्वश्चन राउंड में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मिसेज एशिया पैसिफिक वर्ल्ड का खिताब अपने नाम किया. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पति राहुल वैद्य, पिता डॉ गिरीश मोहन दुबे और माता संध्या दुबे सहित परिवार के सदस्यों को दिया। 

एक खिलाड़ी ने पलटा पूरा मैच! पाकिस्तान को हराकर भारतीय टीम फाइनल में, खिताब से एक कदम दूर

 काकामिघारा भारतीय टीम मेन्स अंडर-18 हॉकी एशिया कप 2026 के फाइनल में पहुंच गई है. शुक्रवार (5 जून) को कावासाकी हेवी इंडस्ट्रीज हॉकी स्टेडियम में खेले गए हाईवोल्टेज सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने शानदार वापसी करते हुए पाकिस्तान को 5-3 से मात दी और खिताबी मुकाबले में जगह पक्की कर ली. मैच के सबसे बड़े हीरो रहे पूर्ति आशीष तानी रहे, जिन्होंने अकेले चार गोल दागकर पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।  यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि एक समय भारत 2-3 से पीछे चल रहा था, लेकिन टीम ने शानदार जज्बा दिखाते हुए वापसी की और पाकिस्तान को मुकाबले से बाहर कर दिया. अब फाइनल में भारत का सामना जापान से होगा. खिताबी मुकाबला शनिवार को इसी मैदान पर खेला जाएगा।  भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले की शुरुआत बेहद तेज रफ्तार रही. दोनों टीमों ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और गोल करने के मौके तलाशते रहे. पहले क्वार्टर में भारत को पेनल्टी स्ट्रोक मिला. पाकिस्तान ने रिव्यू लेकर फैसला बदलवाने की कोशिश की, लेकिन अंपायर का फैसला बरकरार रहा. इसके बाद पूर्ति आशीष तानी ने 12वें मिनट में गोल कर भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी।  दूसरे क्वार्टर में पाकिस्तान ने जोरदार वापसी की. पाकिस्तानी टीम को लगातार पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन भारतीय डिफेंस और गोलकीपर ने शानदार बचाव किया. हालांकि 27वें मिनट में अदील ने बेहतरीन फिनिश के साथ गोल दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया. हाफ टाइम तक दोनों टीमें बराबरी पर थीं और मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ था।  तीसरे क्वार्टर में भारत ने फिर से आक्रमण की धार तेज की. 35वें मिनट में अली शाहरुख ने गोल कर भारत को 2-1 की बढ़त दिलाई. लेकिन पाकिस्तान ने भी तुरंत जवाब दिया और महज दो मिनट बाद मुहम्मद फरहान असलम ने गोल कर स्कोर 2-2 कर दिया. इसके बाद पाकिस्तान ने मैच में पहली बार बढ़त हासिल की. 42वें मिनट में उजैर अहमद ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर पाकिस्तान को 3-2 से आगे कर दिया. इस समय मुकाबला पूरी तरह पाकिस्तान की ओर झुकता नजर आ रहा था।  आखिरी क्वार्टर में भारतीय टीम ने ऐसा खेल दिखाया जिसने पूरे मैच की कहानी बदल दी. पूर्ति आशीष तानी ने पहले भारत को बराबरी दिलाई और फिर 53वें मिनट में अपना तीसरा गोल दागकर हैट्रिक पूरी की. इस गोल ने भारत को 4-3 की बढ़त दिला दी और पाकिस्तान दबाव में आ गया. मैच खत्म होने से पहले तानी ने अपना चौथा गोल भी दाग दिया और भारत की जीत को पूरी तरह सुनिश्चित कर दिया,. उनके चार गोलों के दम पर भारत ने पाकिस्तान को 5-3 से हराकर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। 

खाद्य सुरक्षा पर पंजाब सरकार सख्त, स्टेट फ़ूड कमीशन ने की ऑनलाइन समीक्षा

फरीदकोट. पंजाब स्टेट फ़ूड कमीशन के बाल मुकंद शर्मा ने आज अलग-अलग अधिकारियों के साथ ऑनलाइन मीटिंग की। मीटिंग में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (RD) डॉ. संदीप मल्होत्रा ​​और अलग-अलग अधिकारी मौजूद थे। मीटिंग के दौरान उन्होंने फ़ूड सेफ्टी से जुड़े काम का रिव्यू किया। उन्होंने मीटिंग के दौरान मिली कमियों को दूर करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि गलतियों को जल्द से जल्द दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी सेंटरों और स्कूलों में मौसमी सब्जियां लगाई जाएं, ताकि बच्चों की सेहत का ध्यान रखते हुए उन्हें साफ़-सुथरा खाना दिया जाए। बच्चों के खाने की समय-समय पर चेकिंग की जाए और साफ़-सफ़ाई से जुड़े कैंप भी लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों की सेहत, न्यूट्रिशन और फ़ूड सेफ्टी से जुड़ी किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मौके पर गुरजीत सिंह DFSC, पवन कुमार डिप्टी डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर, डिप्टी डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर नवदीप सिंह, चमकौर सिंह फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, हरिंदर पाल शर्मा एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट ऑफिसर, कुलदीप सिंह डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिस मौजूद थे।

बस्तर की बेटियों की बड़ी उड़ान, रुद्राणी और डालेश्वरी बनीं अंचल की नई पहचान

रायपुर.  आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों को मात देकर बस्तर जिले की दो बेटियों ने सफलता की एक नई इबारत लिखी है। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों से ताल्लुक रखने वाली रुद्राणी कश्यप और डालेश्वरी बघेल ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपने माता-पिता, गांव और पूरे बस्तर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों में गढ़ी सफलता की कहानी बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम उलनार की निवासी रुद्राणी कश्यप ने सेजेस (स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय) करपावंड से और डालेश्वरी बघेल ने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल उलनार से पढ़ाई करते हुए यह शानदार उपलब्धि हासिल की है। दोनों छात्राओं ने साबित कर दिया है कि यदि लगन और अनुशासन हो, तो प्रतिभा किसी भी अभाव की मोहताज नहीं होती। शिक्षा प्रोत्साहन योजना से मिली नई उड़ान तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए संचालित श्शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत दोनों छात्राओं को 15-15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है। हाल ही में ग्राम उलनार में आयोजित सुशासन तिहार शिविर के दौरान बस्तर सांसद महेश कश्यप ने दोनों होनहार बेटियों को प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए। इस मौके पर सांसद ने दोनों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए स्मृति स्वरूप पौधे भी भेंट किए। माता-पिता ने जताया आभार, बेटियों के सपनों को मिले पंख रुद्राणी कश्यप की माता श्रीमती कुंती कश्यप ने बताया कि बेटी की रुचि जीव विज्ञान (बायोलॉजी) में है और पूरा परिवार उसकी आगे की पढ़ाई में हरसंभव सहयोग करेगा। वहीं, डालेश्वरी बघेल के पिता लम्बोदर बघेल ने इस सफलता का पूरा श्रेय बेटी की कड़ी मेहनत और शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन को दिया। श्रमसाध्य जीवन जीने वाले परिवारों की इन बेटियों की यह कामयाबी आज ग्रामीण अंचल के हज़ारों छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। सरकार की इस योजना ने न केवल उनका हौसला बढ़ाया है, बल्कि उनके सपनों को एक नई और मजबूत दिशा भी दी है।

बस्तर की बेटियों ने रचा सफलता का इतिहास, रुद्राणी और डालेश्वरी ने बढ़ाया अंचल का मान

बस्तर की बेटियों ने पेश की सफलता की मिसाल, तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की रुद्राणी और डालेश्वरी ने बढ़ाई अंचल की शान शिक्षा प्रोत्साहन योजना से मिला संबल, हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में बेटियों ने लहराया परचम सांसद महेश कश्यप ने सुशासन तिहार में सौंपे 15-15 हजार रुपये के चेक, उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं रायपुर, आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों को मात देकर बस्तर जिले की दो बेटियों ने सफलता की एक नई इबारत लिखी है। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों से ताल्लुक रखने वाली रुद्राणी कश्यप और डालेश्वरी बघेल ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपने माता-पिता, गांव और पूरे बस्तर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों में गढ़ी सफलता की कहानी              बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम उलनार की निवासी रुद्राणी कश्यप ने सेजेस (स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय) करपावंड से और डालेश्वरी बघेल ने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल उलनार से पढ़ाई करते हुए यह शानदार उपलब्धि हासिल की है। दोनों छात्राओं ने साबित कर दिया है कि यदि लगन और अनुशासन हो, तो प्रतिभा किसी भी अभाव की मोहताज नहीं होती। शिक्षा प्रोत्साहन योजना से मिली नई उड़ान             तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए संचालित श्शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत दोनों छात्राओं को 15-15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है। हाल ही में ग्राम उलनार में आयोजित सुशासन तिहार शिविर के दौरान बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप ने दोनों होनहार बेटियों को प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए। इस मौके पर सांसद ने दोनों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए स्मृति स्वरूप पौधे भी भेंट किए।            माता-पिता ने जताया आभार, बेटियों के सपनों को मिले पंख रुद्राणी कश्यप की माता श्रीमती कुंती कश्यप ने बताया कि बेटी की रुचि जीव विज्ञान (बायोलॉजी) में है और पूरा परिवार उसकी आगे की पढ़ाई में हरसंभव सहयोग करेगा। वहीं, डालेश्वरी बघेल के पिता श्री लम्बोदर बघेल ने इस सफलता का पूरा श्रेय बेटी की कड़ी मेहनत और शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन को दिया।          श्रमसाध्य जीवन जीने वाले परिवारों की इन बेटियों की यह कामयाबी आज ग्रामीण अंचल के हज़ारों छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। सरकार की इस योजना ने न केवल उनका हौसला बढ़ाया है, बल्कि उनके सपनों को एक नई और मजबूत दिशा भी दी है।