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सीमा पार से हथियार सप्लाई का नेटवर्क बेनकाब, पंजाब पुलिस ने 4 आरोपियों को दबोचा

अमृतसर. पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए हथियारों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मिली जानकारी के अनुसार, अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने बॉर्डर पार से गैर-कानूनी हथियारों की तस्करी और हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए एक अफगान नागरिक समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पंजाब पुलिस के DGP गौरव यादव ने इस संबंधी जानकारी देते हुए ट्विटर पर शेयर की। DGP ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के पास से 8 अल्ट्रा-मॉडर्न पिस्तौल और 7 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी विदेश में बैठे एक तस्कर के संपर्क में थे, जो छिपी हुई जगहों से गैर-कानूनी हथियारों की खेप भेजता था। बरामद हथियारों की सप्लाई के लिए क्रिमिनल लोगों तक पहुंचाया जाना था। अमृतसर के पुलिस स्टेशन इस्लामाबाद और पुलिस स्टेशन गेट हकीमा में FIR दर्ज की गई है। DGP ने कहा कि विदेश में मौजूद नेटवर्क से जुड़े दूसरे साथियों की पहचान करने और और बरामदगी और गिरफ्तारियों का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है। पंजाब पुलिस गैर-कानूनी हथियारों की तस्करी, हवाला ऑपरेशन और ऑर्गनाइज्ड क्राइम के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी पर पूरी तरह से कायम है।

वन्यजीव सुरक्षा में बड़ा कदम, हाथियों से जुड़े मामलों की जांच के लिए वन कर्मियों को मिला विशेष प्रशिक्षण

सूरजपुर/ रायपुर. प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा रायगढ़ में हाथियों की मृत्यु की वैज्ञानिक जांच एवं वन्यजीव अपराधों की पहचान को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।  “कार्यक्रम में एशियाई हाथियों की मृत्यु जांच की आवश्यक प्रक्रियाएं” विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों से आए 78 वन अधिकारी एवं पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, वन्यजीव अपराधों की पहचान तथा संरक्षण संबंधी प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाना था। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 450 हाथियों की उपस्थिति है। रायगढ़, जशपुर, कोरबा और सूरजपुर जैसे जिलों में हाथियों की बढ़ती आवाजाही तथा मानव-हाथी संघर्ष की चुनौतियों को देखते हुए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया। वन विभाग का मानना है कि किसी हाथी की मृत्यु के पीछे बीमारी, विद्युत प्रवाह, विषप्रयोग, शिकार अथवा अन्य कारणों की सटीक पहचान किए बिना भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम और दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई संभव नहीं है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को हाथियों की शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य, व्यवहार एवं प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी हाथी की मृत्यु की जांच केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित विस्तृत अध्ययन है। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि जंगल में मिला मृत हाथी संभावित रूप से एक अपराध स्थल भी हो सकता है, इसलिए घटनास्थल को सुरक्षित रखने, साक्ष्य एकत्रित करने तथा संदिग्ध परिस्थितियों की पहचान करने की प्रक्रियाओं का पालन अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में वन्यजीव अपराधों की जांच, साक्ष्यों के संरक्षण, हाथी दांत तस्करी से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं तथा न्यायालय में उपयोगी वैज्ञानिक प्रमाणों के संकलन पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों को यह भी सिखाया गया कि जांच के दौरान प्राप्त जैविक नमूनों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाए ताकि प्रयोगशाला परीक्षणों में उनकी गुणवत्ता बनी रहे। प्रशिक्षण के दूसरे दिन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को फील्ड स्तर पर हाथियों के शव परीक्षण, नमूना संग्रहण, रक्त एवं ऊतक नमूनों के संरक्षण तथा विष विज्ञान एवं रोग परीक्षण के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कठिन परिस्थितियों और दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षित तरीके से शव परीक्षण करने की तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान तथा वन्यजीव फोरेंसिक एवं स्वास्थ्य अध्ययन संस्थान के विशेषज्ञों ने सहभागिता करते हुए आधुनिक वन्यजीव फोरेंसिक तकनीकों और वैज्ञानिक जांच पद्धतियों की जानकारी साझा की। प्रशिक्षण के दौरान दोनों विभागों के अधिकारियों ने वन्यजीव रोगों की निगरानी, वन्यजीव अपराधों की जांच तथा संरक्षण संबंधी गतिविधियों में साझा कार्यप्रणाली विकसित करने पर बल दिया। अचानकमार टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक प्रियंका पांडे सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सक्रिय रूप से भागीदारी की। प्रशिक्षण में सभी 78 प्रतिभागियों को हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों की मृत्यु जांच के लिए मानकीकृत वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। इससे छत्तीसगढ़ वन विभाग की फोरेंसिक जांच, रोग निगरानी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण तथा वन्यजीव संरक्षण की क्षमता और अधिक मजबूत होगी। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा दे रही है। हाथियों सहित सभी वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने विभाग निरंतर क्षमता निर्माण, अनुसंधान और नवाचार आधारित प्रयास कर रहा है। यह प्रशिक्षण उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो प्रदेश में हाथियों के दीर्घकालिक संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन को नई मजबूती प्रदान करेगा।

नामांकन खत्म होते ही तय हुई जीत, बिहार विधानपरिषद की 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन

पटना बिहार विधानपरिषद चुनाव के लिए एनडीए और महागठबंधन उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया सोमवार को पूरी हो गई। अंतिम दिन एनडीए की ओर से नौ उम्मीदवारों ने नामांकन किया जबकि महागठबंधन की ओर से केवल एक ही नामांकन किया । विधानपरिषद की दस सीटों के लिए दस उम्मीदवार मैदान में हैं। तीन बजे नामांकन की अवधि खत्म होते ही इन सभी उम्मीदवारों की जीत भी पक्की हो गई क्योंकि, दीपक प्रकाश के नामांकन नहीं करने से वोटिंग की स्थिति नहीं बन पाई। 18 जून को मतदान होना सुनिश्चित किया गया था नामांकन करने वालों में जदयू से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद के अलावा भाजपा से संजय प्रकाश मयूख, पवन सिंह, अनिल ठाकुर और शीला पंडित जबकि लोजपा ने अशरफ अंसारी हैं। निशांत कुमार सदन का सदस्य बनने से पहले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन चुके हैं। राजद ने राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई सुनील सिंह को टिकट दिया है। उन्हें दूसरी बार यह मौका मिला है। सुनील सिंह ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। हालांकि, लालू की बेटी और तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्या ने सुनील सिंह को टिकट दिए जाने का विरोध किया है। बिहार विधान परिषद की जिन दस सीटों के चुनाव हो रहे हैं उनमें सात सीटें विधान पार्षदों का टर्म पूरा होने के कारण खाली हो रहे हैं। दो सीट सम्राट चौधरी और और भगवान सिंह कुशवाहा के विधानसभा जाने से खाली हुआ। सभी का टर्म 28 जून को पूरा हो रहा है। इन सीटों पर जीतने वाले उम्मीदवारों का कार्यकाल 6 सालों का होगा। एक सीट नीतीश कुमार के इस्तीफे के कारण खाली हुआ। इस सीट पर जदयू ने ललन प्रसाद को मौका दिया है। ललन प्रसाद का कार्यकाल चार वर्षों का होगा। इस चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा के मंत्री बेटे दीपक प्रकाश को मौका नहीं मिला। एनडीए ने उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया। सोमवार को अंतिम दिन उन्होंने नामांकन भी दाखिल नहीं किया। इस वजह से उनके मंत्री पद पर भी तलवार लटक गई है क्योंकि, दीपक प्रकाश वर्तमान में किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। उपेंद्र कुशवाहा खेमे में इससे नाराजगी देखी जा रही है। सोमवार को एनडीए के सभी घटक दलों के नेता नामांकन में पहुंचे पर उपेंद्र कुशवाहा और दीपक प्रकाश नहीं दिखे। इससे पहले रविवार को पार्टी के अधिवेशन में उपेंद्र कुशवाहा नें कहा कि जदयू और आरएलएम की विचारधारा मेल खाती है पर भाजपा की अलग है। भाषण में उनका दर्द भी छलका। उपेंद्र कुशवाहा पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए दिल्ली जा रहे हैं।

केमी ब्लेक ने स्वर्ण, बेटी किमानी ने कांस्य जीतकर बढ़ाया अमेरिका का मान

 नई दिल्ली अमेरिका की केमी ब्लेक और उनकी बेटी किमानी ब्लेक ने विश्व योगासन चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया। अहमदाबाद के ईकेए एरिना में आयोजित प्रतियोगिता में 35 वर्षीय केमी ने बैक बेंड व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जबकि 16 वर्षीय किमानी ने जूनियर आर्टिस्टिक व्यक्तिगत वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। विश्व चैंपियनशिप से पहले दोनों ने अहमदाबाद स्थित साई सेंटर में प्रशिक्षण लिया था। पेशेवर करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से उन्होंने योग को अपनाया, जिसने न केवल उनकी शारीरिक क्षमता बढ़ाई बल्कि मानसिक मजबूती भी प्रदान की। लक्ष्य को पूरा करने के लिए छोड़ना पड़ा शहर केमी का सपना बचपन से एक सफल कॉन्टॉर्शनिस्ट बनने का था। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह न्यूयार्क से लास वेगास गईं और प्रसिद्ध सर्क डू सोले अकादमी में प्रशिक्षण हासिल किया। दूसरी ओर, उनकी बेटी किमानी जिम्नास्टिक सीख चुकी हैं और भविष्य में पेशेवर डांसर बनना चाहती हैं। भारत के प्रशिक्षकों ने बढ़ाया आत्मविश्वास केमी ने बताया कि वह कई वर्षों से योग कर रही हैं, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि विश्व योगासन चैंपियनशिप में हिस्सा लेंगी। उन्हें लगता था कि भारतीय खिलाड़ियों के सामने प्रतिस्पर्धा करना उनके लिए मुश्किल होगा। हालांकि रोमानिया की एक खिलाड़ी और भारत के कुछ प्रशिक्षकों के प्रोत्साहन ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। उन्होंने कहा कि स्वर्ण पदक जीतना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। उनके अनुसार योग ने जीवन को पूरी तरह बदल दिया। शुरुआत में उन्होंने केवल शरीर में लचीलापन बढ़ाने के लिए योग करना शुरू किया था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन गया। योग ने उन्हें अनुशासन, संतुलन और सकारात्मक सोच दी, जिससे उनके जीवन का नजरिया बदल गया। मां की राह पर बेटी भी मां को विश्व चैंपियनशिप में भाग लेते देख किमानी ने भी इस सफर का हिस्सा बनने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि योग की शुरुआती शिक्षा उन्हें अपनी मां से मिली थी। हालांकि प्रतियोगिता के लिए उन्होंने केवल तीन सप्ताह पहले गंभीर प्रशिक्षण शुरू किया था। इसके बावजूद कांस्य पदक जीतना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। अब यह मां-बेटी की जोड़ी योगासन में और बड़ी सफलताएं हासिल करने तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने देश का नाम रोशन करने का सपना देख रही है।

RJD में अंदरूनी कलह के संकेत? MLC टिकट विवाद के बीच रोहिणी आचार्य की पोस्ट चर्चा में

 पटना राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) द्वारा विधान परिषद चुनाव के लिए सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी और पार्टी नेता रोहिणी आचार्य ने इस फैसले पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर एक तीखी पोस्ट साझा की है. उनकी पोस्ट को पार्टी के भीतर असंतोष और आंतरिक मतभेदों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।  रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में किसी का नाम लिए बिना ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाए जाने पर नाराजगी जताई. उन्होंने लिखा कि गुटबाजी – भीतरघात – विश्वासघात , मक्कारी जिसकी फितरत , विरोधियों से जिसकी मिलीभगत, नजदीकियों की बात बता कर उगाही – वसूली करना जिसका धंधा, जो अपनी झूठी धौंस जताने के लिए पार्टी कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ताओं – पदाधिकारियों को सामने बिठा कर बहन – बेटियों के बारे में ओछी – अमर्यादित बातें करता है, उसको कैसे "उसके" ही द्वारा उम्मीदवार बना दिया गया।   रोहिणी की पोस्ट से चर्चाओं का दौर शुरू रोहिणी ने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि क्या पार्टी में अब समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं व नेताओं की कमी हो गई है. उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने और पार्टी को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी जिन लोगों को सौंपी गई है, वे ऐसे व्यक्तियों को आगे बढ़ा रहे हैं. जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।  आरजेडी नेता की इस टिप्पणी को सीधे तौर पर सुनील कुमार सिंह की उम्मीदवारी से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि रोहिणी ने अपने पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे उसी फैसले के खिलाफ प्रतिक्रिया माना जा रहा है. उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बिहार में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।  रोहिणी ने पार्टी के भविष्य को लेकर भी जताई चिंता रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि पार्टी की स्थापना के समय से लेकर आज तक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े एक नहीं अनेकों समर्पित, सम्मानित , जमीन से जुड़े कट्टर लालूवादी अल्पसंख्यक चेहरे हैं. यादव , दलित , पिछड़े व वंचित समाज से आने वाले वरिष्ठ व युवा लोग हैं , ऐसे लोगों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है और पार्टी हित में तो कतई नहीं है।  फिलहाल आरजेडी की ओर से रोहिणी आचार्य की टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन उनकी पोस्ट ने पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व से जुड़े सवालों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। 

नव भारत साक्षरता अभियान में बड़ी सफलता, योगी सरकार ने 11.68 लाख से अधिक लोगों को बनाया साक्षर

नव भारत साक्षरता अभियान: योगी सरकार ने 11.68 लाख से अधिक लोगों को बनाया साक्षर – 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए प्रदेशभर में चलाया जा रहा नव भारत साक्षरता कार्यक्रम – वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 13.81 लाख प्रतिभागियों ने दी साक्षरता परीक्षा – 11.68 लाख से अधिक नव साक्षरों ने सफलतापूर्वक हासिल की साक्षरता – वर्ष 2026-27 में भी व्यापक अभियान चलाकर निरक्षरता उन्मूलन को दी जाएगी नई गति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और निरक्षरता मुक्त प्रदेश के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में संचालित नव भारत साक्षरता कार्यक्रम लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन रहा है।  15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से संचालित इस अभियान के तहत वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक प्रदेश में 11.68 लाख से अधिक लोगों को साक्षर बनाया जा चुका है। यह अभियान शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता, जागरूकता और सामाजिक सशक्तीकरण को नई मजबूती दे रहा है। केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर नागरिकों को चिह्नित कर वालंटियर्स और प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के सहयोग से साक्षर बनाया जा रहा है। कार्यक्रम के अन्तर्गत लाभार्थियों को पढ़ना, लिखना और गणना करना सिखाने के साथ-साथ दैनिक जीवन में उपयोगी बुनियादी ज्ञान से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे वे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में अधिक प्रभावी भागीदारी कर सकें। लाखों लोगों को साक्षर बनाकर सरकार न केवल निरक्षरता के खिलाफ लड़ाई को मजबूती दे रही है, बल्कि आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त उत्तर प्रदेश के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। घर-घर पहुंच रही शिक्षा की रोशनी अभियान के अंतर्गत चिह्नित वालंटियर्स को प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसके बाद वालंटियर्स ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से साक्षरता कक्षाओं का संचालन करते हैं। प्रदेशभर में संचालित ये कक्षाएं हजारों लोगों के जीवन में नया आत्मविश्वास पैदा कर रही हैं। सरकार का उद्देश्य केवल अक्षर ज्ञान उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि नागरिकों को जागरूक, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना भी है। 13.81 लाख प्रतिभागियों ने दी परीक्षा, 11.68 लाख हुए सफल नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में अब तक सात साक्षरता मूल्यांकन परीक्षाएं आयोजित की जा चुकी हैं। इन परीक्षाओं में कुल 13,81,530 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 11,68,292 प्रतिभागी सफल घोषित हुए। वर्ष 2022-23 में आयोजित परीक्षा में 1.46 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि वर्ष 2025-26 में आयोजित नवीनतम परीक्षा में 4.01 लाख से अधिक प्रतिभागियों की सहभागिता दर्ज की गई। यह आंकड़े अभियान की बढ़ती पहुंच और प्रभावशीलता के गवाह हैं। वर्ष 2026-27 के लिए तैयार नई कार्ययोजना योगी सरकार नव भारत साक्षरता कार्यक्रम को वर्ष 2026-27 में और अधिक व्यापक एवं परिणामोन्मुख बनाने की तैयारी कर चुकी है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश के सभी जनपदों को 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों को चिह्नित कर उन्हें साक्षर बनाने का लक्ष्य सौंपा गया है। इसके अंतर्गत चिह्नित असाक्षरों को वालंटियर्स से जोड़ा जाएगा, जिन्हें प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स द्वारा विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके बाद वालंटियर्स ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से साक्षरता कक्षाओं का संचालन करेंगे। अभियान की प्रगति का नियमित अनुश्रवण होगा तथा भारत सरकार के निर्देशानुसार वर्ष में दो बार साक्षरता मूल्यांकन परीक्षाएं आयोजित कर नव साक्षरों की उपलब्धियों का आकलन किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों को शिक्षा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर, जागरूक और समाज की मुख्यधारा का सक्रिय भागीदार बनाना है।

HSSC की बड़ी उपलब्धि, दो साल में रिकॉर्ड भर्तियां और 13 हजार नई नौकरियों की तैयारी

चंडीगढ़  हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन हिम्मत सिंह ने अपने दो साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। आठ जून 2024 को पदभार संभालने के बाद से हिम्मत सिंह ने 46,951 युवाओं को नौकरी दिलाने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार को दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि आयोग की ओर से लगभग 13 हजार नई भर्तियों की तैयारियां भी चल रही हैं। हिम्मत सिंह ने कहा कि आठ जून 2024 वह दिन था, जब उन्होंने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष के पद की शपथ ली थी। यह शपथ एक नई जिम्मेदारी और नए विश्वास की थी। आयोग के अध्यक्ष के रूप में उन्हें कोई पूर्व अनुभव नहीं था, लेकिन उन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए लक्ष्य को स्पष्ट रखा। मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को उनका हक दिलाना ही मुख्य उद्देश्य रहा है। चेयरमैन ने बताया कि दो वर्षों के कार्यकाल में आयोग ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से करीब 47 हजार अभ्यर्थियों के सपनों को साकार किया है। उन्होंने 'एक परिणाम-25 हजार सपने साकार' के मूल मंत्र के तहत 25 हजार अभ्यर्थियों का परिणाम जारी किया, जो आयोग के इतिहास में सबसे बड़ा परिणाम साबित हुआ। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी राज्य में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने पर शपथ लेते ही 25 हजार अभ्यर्थियों का परिणाम जारी करने की घोषणा की थी, जो उन्होंने शपथ लेते ही पूरी की। हिम्मत सिंह के अनुसार अभ्यर्थियों का विश्वास आयोग के लिए प्रेरणादायक है। पिछले वर्ष संपन्न हुई सीईटी ग्रुप सी 2025 परीक्षा को हिम्मत सिंह ने इस यात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। लगभग 13.5 लाख अभ्यर्थियों वाली इस परीक्षा का आयोजन एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा को पारदर्शिता और सुव्यवस्था के साथ संपन्न कराना कठिन था, लेकिन अभ्यर्थियों के उत्साह ने हमें संबल दिया। आयोग के अधिकारियों, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और अन्य सहयोगियों ने इस परीक्षा को एक उत्सव में बदल दिया। चेयरमैन के अनुसार सीईटी की परीक्षा में 92 प्रतिशत अभ्यर्थियों की भागीदारी ने पूरे देश को सकारात्मक संदेश दिया कि यदि नीयत साफ हो और सभी एक टीम की तरह कार्य करें, तो बड़ी परीक्षाएं भी सफलतापूर्वक संपन्न की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके कार्यकाल के दो वर्षों का समापन नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने का एक और मजबूत पड़ाव है। उन्होंने कहा कि आयोग आगे भी नए विज्ञापनों और 13 हजार भर्तियों के माध्यम से युवाओं के सपनों को साकार करने के लिए प्रयासरत रहेगा।

एनएच-31/231 पर 143 किमी फोरलेन निर्माण तेज, कोसी-सीमांचल को मिलेगा बड़ा लाभ

भागलपुर  राष्ट्रीय राजमार्ग-31/231 के खगड़िया-पूर्णिया खंड को फोरलेन में तब्दील करने की बहुप्रतीक्षित परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। इस 3936 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को लेकर रविवार को बरौनी में पथ निर्माण मंत्री इं. कुमार शैलेंद्र ने एनएचएआई और पीआईयू-बेगूसराय के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। यह परियोजना सीमांचल और कोसी क्षेत्र के विकास के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है। हाल ही में केंद्र सरकार की कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद अब इस परियोजना के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि परियोजना का अवार्ड अगस्त 2026 तक होने की संभावना है। लगभग 90 प्रतिशत भूमि पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिससे निर्माण कार्य शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। ढाई वर्ष में पूरा होगा निर्माण कार्य परियोजना के तहत निर्माण कार्य की अवधि ढाई वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि इसके बाद 27.5 वर्षों तक रखरखाव का प्रावधान रहेगा। कुल 143.53 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन सड़क को आधुनिक मानकों के अनुसार विकसित किया जाएगा। पूर्णिया में 6.73 किलोमीटर लंबा नया बाइपास भी बनाया जाएगा, जिससे शहर में ट्रैफिक दबाव कम होगा। इसके साथ ही सड़क पर एक इंटरचेंज, नौ फ्लाइओवर, 29 अंडरपास, तीन फुट ओवरब्रिज, 30 बस-बे और आठ ट्रक ले-बाय का निर्माण प्रस्तावित है। कोशी नदी पर बनेगा 1090 मीटर लंबा पुल परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में कुरसेला में कोशी नदी पर 1090 मीटर लंबा दो लेन का मेजर ब्रिज बनाया जाएगा। इसके अलावा चार अन्य बड़े पुल और छह छोटे पुल भी प्रस्तावित हैं। अधिकारियों के अनुसार यह संरचना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी और यातायात को सुगम बनाएगी। इससे लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्याओं में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सर्विस रोड और आधुनिक डिजाइन स्पीड घनी आबादी वाले क्षेत्रों और प्रमुख जंक्शनों को ध्यान में रखते हुए परियोजना में 65 किलोमीटर सर्विस रोड और करीब 101 किलोमीटर स्लिप रोड का प्रावधान किया गया है। हाईवे को 100 किलोमीटर प्रति घंटा की डिजाइन स्पीड के अनुरूप तैयार किया जाएगा। सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक और सुविधाओं का उपयोग किया जाएगा। इससे दुर्घटनाओं में कमी आने और यातायात संचालन में सुधार की उम्मीद है। सीमांचल-कोसी क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ पथ निर्माण मंत्री ने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद खगड़िया से पूर्णिया की दूरी मात्र दो घंटे में तय की जा सकेगी। इससे खगड़िया, मानसी, महेशखूंट, पसराहा, नारायणपुर, बिहपुर, खरीक, नवगछिया, भागलपुर, कुरसेला, कटिहार और पूर्णिया जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय से इस परियोजना को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

17 जिलों में अटल लाइब्रेरी का विस्तार, ग्रामीण युवाओं को मिलेगा डिजिटल और आधुनिक अध्ययन माहौल

 चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नया माहौल तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के 17 जिलों में मंगलवार को एक साथ 350 नई अटल लाइब्रेरी शुरू की जाएंगी। करीब 44 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही यह योजना गांवों में अध्ययन संस्कृति को मजबूत करने और युवाओं को उनके घर के नजदीक बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है। हरियाणा सरकार की इस पहल की खास बात यह है कि लाइब्रेरी स्थापित करने के लिए नये भवनों के निर्माण पर खर्च नहीं किया गया है। इसकी बजाय ग्राम पंचायतों के उन भवनों और कमरों का चयन किया गया है जो लंबे समय से खाली पड़े थे या सीमित उपयोग में आ रहे थे। राज्य स्तर पर कराए गए सर्वेक्षण के आधार पर 600 से 1000 वर्ग फुट क्षेत्र वाले उपयुक्त स्थानों की पहचान की गई और उन्हें आधुनिक अध्ययन केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई। किताबों के साथ डिजिटल अध्ययन की भी सुविधा नई अटल लाइब्रेरी केवल पारंपरिक पुस्तकालय नहीं होंगी, बल्कि इन्हें बहुआयामी ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां स्कूली पाठ्यक्रम की पुस्तकों के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सामग्री, सामान्य ज्ञान, व्यक्तित्व विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, कौशल विकास तथा बच्चों के लिए विशेष साहित्य उपलब्ध कराया जाएगा इसके साथ-साथ डिजिटल संसाधनों और आनलाइन अध्ययन की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, ताकि ग्रामीण विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा प्रणाली और डिजिटल लर्निंग से जुड़ सकें। सरकार का लक्ष्य है कि गांवों के छात्र भी शहरों की तरह अध्ययन संसाधनों तक आसानी से पहुंच बना सकें। ग्रामीण युवाओं को मिलेगा प्रतिस्पर्धी माहौल योजना का प्रमुख उद्देश्य उन विद्यार्थियों और युवाओं तक बेहतर अवसर पहुंचाना है, जो आर्थिक या भौगोलिक कारणों से शहरों के कोचिंग संस्थानों और अध्ययन केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते। हरियाणा सरकार का मानना है कि यदि गांवों में ही गुणवत्तापूर्ण अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराया जाए तो प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और रोजगारोन्मुखी शिक्षा में ग्रामीण युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी। अटल लाइब्रेरी के संचालन को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक गांव में ‘अटल लाइब्रेरी प्रबंधन समिति’ गठित की जाएगी। इस समिति में सरपंच, ग्राम सचिव, स्थानीय शिक्षित नागरिकों तथा युवा संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। समिति पुस्तकालय के संचालन, अनुशासन व्यवस्था, पुस्तकों के रखरखाव और करियर मार्गदर्शन जैसी गतिविधियों की निगरानी करेगी। पहले भी शुरू हो चुकी हैं सैकड़ों लाइब्रेरी यह पहल राज्य सरकार के पहले से चल रहे अटल लाइब्रेरी अभियान का विस्तार है। इससे पहले 25 दिसंबर 2025 को अटल सुशासन दिवस के अवसर पर 250 अटल लाइब्रेरी शुरू की गई थीं। इसके बाद विभिन्न जिलों में 268 और लाइब्रेरी संचालित की गईं। अब 350 नई लाइब्रेरी शुरू होने के बाद यह नेटवर्क और अधिक व्यापक हो जाएगा रेवाड़ी में सबसे अधिक 49 लाइब्रेरी इस चरण में जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक 49 अटल लाइब्रेरी रेवाड़ी जिले में शुरू की जाएंगी। इसके बाद करनाल में 45 और भिवानी में 36 नई लाइब्रेरी स्थापित होंगी। हरियाणा सरकार को उम्मीद है कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

बिहार सरकार का बड़ा कदम: 216 पन्नों की किताब में सामने आएगी आर्थिक सर्वे की पूरी तस्वीर

पटना बिहार में जो जाति आधारित गणना और आर्थिक सर्वे हुआ था, उसके आंकड़ों को अब राज्य सरकार एक किताब की शक्ल देने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी पूरी तैयारी शुरू कर दी है। इस किताब में बिहार की हर एक जाति की कमाई कितनी है और उनके पास कितनी जमीन-जायदाद या संपत्ति है, इसका पूरा लेखा-जोखा सिलसिलेवार ढंग से छापा जाएगा। सरकार का मानना है कि इस किताब के आने से समाज की हर जाति की असली आर्थिक स्थिति और उनके विकास का पूरा सच सबके सामने आ सकेगा। इस काम को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए सरकार ने प्रकाशकों से हाथ मिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। 216 पन्नों की होगी यह स्पेशल किताब इस सरकारी योजना के मुताबिक, छपने वाली इस किताब में करीब 216 पन्ने होंगे। पहले चरण में सरकार इसकी 500 कॉपियां छपवाने जा रही है। सरकार इस काम को लेकर कितनी जल्दी में है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जिस भी प्रकाशक को इसका टेंडर या ऑर्डर मिलेगा, उसे सिर्फ 2 दिनों के भीतर किताब छापकर सरकार को सौंपनी होगी। किताब छापने वाले पब्लिशर के लिए सरकार ने एक साल का इनकम टैक्स रिटर्न और जीएसटी रजिस्ट्रेशन होना बिल्कुल अनिवार्य कर दिया है। नीति बनाने और रिसर्च करने में मिलेगी बड़ी मदद आपको बता दें कि बिहार सरकार ने 2 अक्तूबर 2023 को जातीय गणना के मुख्य आंकड़े जारी किए थे। इसके अनुसार बिहार की कुल आबादी 13.07 करोड़ से ज़्यादा है, जिसमें 12.53 करोड़ लोग बिहार में रहते हैं और करीब 53.72 लाख लोग राज्य से बाहर रहते हैं। पूरे राज्य में कुल 2.83 करोड़ से ज़्यादा परिवारों का सर्वे हुआ था, जिसमें पिछड़ा वर्ग की आबादी 27.13 प्रतिशत आई थी। जानकारों का कहना है कि इस आर्थिक सर्वे की किताब के आने से आगे चलकर सरकार को गरीबों के लिए नई योजनाएं और नीतियां बनाने में बहुत आसानी होगी, साथ ही पढ़ाई और रिसर्च करने वालों को भी सटीक डेटा मिल सकेगा।