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झारखंड में ग्रामीण सड़क नेटवर्क होगा मजबूत, 600 किमी नई सड़क निर्माण की तैयारी

 रांची पूरे देश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फोर शुरू होने जा रही है. इसमें झारखंड को पहले चरण में करीब 600 करोड़ रुपये की सड़क योजना मिलने वाली है. इसकी तैयारी हो गयी है. झारखंड ने इसका प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेज दिया है. वहीं एक बार केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक भी हो गयी है. अब दूसरी बैठक में झारखंड के लिए सड़क योजनाएं स्वीकृत हो जायेंगी. इस बार कुल 319 योजनाएं मिलने वाली है, जिसके तहत ग्रामीण इलाकों में करीब 600 किमी सड़क का निर्माण होगा. प्रति किमी एक करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है. केंद्र ने तय कर दी है प्राथमिकता भारत सरकार ने सड़क योजनाओं के लिए जो प्राथमिकता तय की है, उसके मुताबिक सबसे पहले अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जातियों के रहने वाले क्षेत्रों को चिह्नित किया जाना है. उनके क्षेत्रों में ही प्राथमिकता के आधार पर सड़कें बनेंगी. जिन क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के लोग 40 प्रतिशत रहते हैं, वहां प्राथमिकता दी जायेगी. वहीं जिन क्षेत्रों में अनुसूचित जाति के लोग 50 प्रतिशत रह रहे हैं, वहां भी सड़क योजनाएं लेनी है. शुरू में 1000 से अधिक आबादी वाले ऐसे क्षेत्रों को लेना है. इसके बाद 500 आबादी, फिर 250 की आबादी वाले गांवों को चिह्नित कर सड़कों का निर्माण कराना है. शिक्षण व स्वास्थ्य संस्थानों को भी जोड़ना लक्ष्य वहीं इस बार शिक्षण व स्वास्थ्य संस्थानों को जोड़ने का भी लक्ष्य रखा गया है. गांवों से इन जगहों को जोड़ा जायेगा, ताकि विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेजों तक पहुंचने में आसानी हो. वहीं मरीजों को लेकर अस्पताल जाने में सुविधा हो. इन सारे चीजों को देखते हुए इस बार सड़क योजनाओं का चयन किया जायेगा. उसके अनुरूप क्रियान्वयन भी किया जाना है.

जयपुर में छापेमारी से हड़कंप, बीज निगम निदेशक के घर और बस से करोड़ों रुपये मिले

जयपुर जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई में राजस्थान राज्य बीज निगम के निदेशक जुगल किशोर विश्नोई के घर से 1 करोड़ 59 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं, जबकि उनके भांजे स्वतंत्र विश्नोई से बस में तलाशी के दौरान लगभग 85 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई है. यह कार्रवाई राज्य सरकार की उस मंशा के अनुरूप बताई जा रही है, जिसके तहत प्रदेश के किसानों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार यह मामला खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है. राज्य सरकार ने हाल के दिनों में खराब और संदिग्ध बीजों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाते हुए कई गोदामों पर छापेमारी की, गोदामों को सील किया और ऐसे बीजों की बिक्री पर रोक लगाई. साथ ही संबंधित बीजों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण की प्रक्रिया भी शुरू की गई. गजराज मूंगफली बीज मामले को दबाने के लिए दिए 1 करोड़ 20 लाख इसी क्रम में पिछले दिनों किरण कपाड़िया की कंपनी के गजराज ब्रांड मूंगफली बीज के मामले में भी कार्रवाई की गई थी. आरोप है कि कंपनी के गोदाम को सील किए जाने और बीजों की बिक्री पर रोक लगने के बाद बीजों को वापस गुजरात ले जाने और पूरे मामले को दबाने की व्यवस्था के लिए लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपये जुगल किशोर विश्नोई द्वारा प्राप्त किए गए, जबकि करीब 60 लाख रुपये गणपत नामक व्यक्ति द्वारा लिए गए. मामले की जांच जारी है और एसीबी पूरे प्रकरण से जुड़े वित्तीय लेन-देन तथा अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है. एसीबी को सूत्रों से सूचना प्राप्त हुई कि आज सुबह जुगल किशोर द्वारा अपने भांजे स्वतंत्र बिश्नोई के माध्यम से इस राशि में से 90 लाख रुपए गंगानगर भिजवा रहा है. जिस पर एसीबी टीम द्वारा संबंधित बस को लूणकरणसर में रुकवा कर तलाशी लेने पर 85 लाख रुपए राशि स्वतंत्र बिश्नोई से बरामद कर गिरफ्तार किया गया है. राजस्थान राज्यसभा चुनाव: बीजेपी के दोनों उम्मीदवारों ने किया नामांकन, शुभ मुहूर्त में दाखिल किया पर्चा जुगल किशोर विश्नोई के घर एवं बस से 2 करोड़ 44 लाख रुपए प्राप्त भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, राजस्थान द्वारा किसानों को वितरित किए जाने वाले बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और बीज वितरण व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के संबंध में कार्रवाई करते हुए जुगल किशोर बिश्नोई, प्रोपराइटर  किरण कापड़िया, गजराज ब्राण्ड (मूंगफली बीज), गणपत बिश्नोई, सुनील सेतीया और सतपाल, को डिटेन कर पूछताछ की जा रही है. वहीं स्वतंत्र बिश्नोई को लूणकरणसर में नकद राशि सहित गिरफ्तार किया गया है. एसीबी की टीम के द्वारा कार्रवाई करते हुए जुगल किशोर विश्नोई के घर एवं बस कि सर्च के दौरान कुल 2 करोड़ 44 लाख रुपए कि राशि अभी तक प्राप्त हुई है. जांच में गजराज ब्रांड के बीजों की बिक्री पर लगा दी गई थी रोक प्रारंभिक अनुसंधान में सामने आया है कि 27 मई 2026 को किरण कापड़िया के मूंगफली बीज गोदाम पर की गई कार्रवाई के दौरान अधिकारियों द्वारा बीजों के नमूने एकत्रित किए गए थे और गजराज ब्रांड के बीजों की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी. जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आए हैं कि उक्त कार्रवाई को प्रभावित करने, पूरे प्रकरण को दबाने और गोदाम में रखे कथित नकली बीजों को वापस गुजरात ले जाने की अनुमति दिलाने और इसमें सहायता करने के एवज में बड़ी मात्रा में रिश्वत राशि का लेन-देन किया गया. प्रयोगशाला में सैंपलों को पास कराने के लिए रिश्वत का इस्तेमाल अनुसंधान में यह भी जानकारी मिली है कि संबंधित कंपनी के व्यक्तियों ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को निष्प्रभावी करने के लिए विभिन्न अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों से संपर्क किया और अनुचित लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया. आरोप है कि प्रयोगशाला में भेजे गए सैंपलों को पास करवाने, बीजों की बिक्री दोबारा शुरू करवाने और अन्य प्रशासनिक राहत हासिल करने के लिए प्रभाव और धनबल का उपयोग करने की कोशिश की गई. मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है.

जमीन घोटाले में बढ़ीं हेमंत सोरेन की मुश्किलें, ED कोर्ट ने याचिका ठुकराई

 रांची  ईडी कोर्ट से बरियातू रोड स्थित 8.86 एकड़ जमीन घोटाला मामले में हेमंत सोरेन को राहत नहीं मिली है। ईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका को खारिज कर दिया। तीन जून को सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने 140 पेज में अपना निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया कि हेमंत सोरेन के खिलाफ प्रथम दृट्या मामला बनता है, इसलिए अब मुकदमा चलेगा। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि उपलब्ध सामाग्री से गंभीर संदेह पैदा होता है और यह पर्याप्त आधार है कि आरोपित के खिलाफ आरोप तय किए जाएं। कोर्ट ने हेमंत सोरेन इस दलील को खारिज कर दिया कि उनका इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। क्या है पूरा मामला? मामला रांची के बरियातू रोड स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि यह जमीन हेमंत सोरेन ने अवैध रूप से कब्जाई थी। आरोप है कि सोरेन ने 2010-11 में मूल कब्जाधारियों को जबरन बेदखल कर यह जमीन हड़प ली और बाद में भू-राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर इसे वैध दिखाने की कोशिश की। जांच में सामने आया कि तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के पास से 17 मूल रजिस्टर और बड़ी संख्या में दस्तावेज बरामद हुए थे, जिनमें इसी जमीन का जिक्र था। ईडी के अनुसार, सोरेन के सहयोगी अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू के जरिए मुख्यमंत्री कार्यालय से इस जमीन की वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए गए। हेमंत सोरेन की ओर से कहा गया था कि यह जमीन कथित अपराध से जुड़ी नहीं है। 2010-11 में कब्जे की बात है, जबकि आरोपित भानु प्रताप प्रसाद 2019 में ही रांची पोस्टिंग पर आया। इस जमीन पर कोई फर्जीवाड़ा पूरा नहीं हुआ। न तो रजिस्टर में सोरेन का नाम दर्ज किया गया और न ही कोई जाली दस्तावेज उनके नाम से बना। ईडी ने जिन गवाहों के बयानों का हवाला दिया, वे सुनी सुनाई बातों पर आधारित हैं। इसलिए प्रार्थी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। समय / वर्ष घटनाक्रम वर्ष 2024 बड़गाई अंचल की 8.46 एकड़ जमीन मामले में ईडी ने जांच तेज की और हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था (बाद में उन्हें जमानत मिली)। 5 दिसंबर 2025 हेमंत सोरेन ने विशेष अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया। 3 जून 2026 ईडी की विशेष अदालत में दोनों पक्षों (हेमंत सोरेन के वकील और ईडी) की ओर से लंबी बहस पूरी हुई। 8 जून 2026 विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में डिस्चार्ज याचिका पर फैसला। याचिका खारिज। बड़गाई जमीन घोटाला: जानिए 4 बड़ी बातें मुख्य आरोप: यह पूरा मामला रांची के बड़गाई अंचल स्थित 8.46 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेज तैयार कर हेरफेर करने से जुड़ा है। ईडी इसे मनी लांड्रिंग का मामला मानकर जांच कर रही है। डिस्चार्ज याचिका क्या है: जब किसी आरोपी को लगता है कि जांच एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं और आरोप निराधार हैं, तो वह अदालत से केस से बरी करने (डिस्चार्ज) की गुहार लगाता है। हेमंत सोरेन का पक्ष: पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर को याचिका दायर कर खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है और कहा है कि इस मामले से उनका कोई जुड़ाव नहीं है। अब तक की कार्रवाई: इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी अब तक  18 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर चुकी है।  

श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी! कुरुक्षेत्र से सोमनाथ मंदिर तक शुरू हुई विशेष तीर्थ यात्रा ट्रेन

कुरुक्षेत्र. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर गुजरात के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को लेकर जाने वाली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र से सोमनाथ महादेव के दर्शन के लिए विशेष ट्रेन को रवाना करना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। सोमनाथ मंदिर का इतिहास भारत की आस्था, धैर्य और स्वाभिमान का प्रतीक रहा है। उन्होंने बताया कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है, जो जनवरी 2027 तक चलेगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जबकि हरियाणा में पिहोवा स्थित अरुणाय संगमेश्वर महादेव मंदिर में राज्य स्तरीय आयोजन हुआ। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी श्रद्धालु आर्थिक अभाव के कारण तीर्थ यात्रा से वंचित न रहे। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत पहले भी अयोध्या धाम, प्रयागराज और श्री हजूर साहिब नांदेड़ के लिए विशेष रेल एवं बस सेवाएं संचालित की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने रेलवे विभाग तथा आयोजन से जुड़े अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि श्रद्धालु भगवान सोमनाथ के समक्ष हरियाणा और देश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली के लिए प्रार्थना करें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

लीज खत्म होने से पहले टाटा स्टील की बड़ी तैयारी, नई खदानों और समझौतों पर जोर

जमशेदपुर  देश की सबसे पुरानी और प्रमुख इस्पात उत्पादक कंपनी टाटा स्टील ने 2030 के बाद कच्चे माल की आपूर्ति को लेकर एक नई और स्पष्ट रणनीति तैयार की है। झारखंड और ओडिशा में स्थित नोवामुंडी, जोड़ा ईस्ट और काटामाटी जैसी कंपनी की पुरानी खदानों की लीज 2030 में समाप्त हो रही है। इसे देखते हुए कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि 2030 के बाद भी वह अपनी कुल जरूरत का कम से कम 50 प्रतिशत लौह अयस्क (आयरन ओर) खुद की (कैप्टिव) खदानों से ही जुटाएगी। यह कदम उत्पादन की लागत को नियंत्रित रखने और कच्चे माल की आपूर्ति के जोखिम को कम करने के लिए उठाया गया है। कंपनी के एमडी व सीईओ टीवी नरेंद्रन और कार्यकारी निदेशक व सीएफओ कौशिक चटर्जी ने वार्षिक रिपोर्ट में शेयरधारकों को बताया कि आपूर्ति शृंखला को बाधारहित रखने के लिए विविध दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से 1907 से टाटा स्टील अपनी जरूरत का 100 प्रतिशत लौह अयस्क खुद की खदानों से ही निकालती आई है। स्टील अथोरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के बाद टाटा स्टील अकेली ऐसी कंपनी है जिसे खदानों से यह लागत लाभ मिलता रहा है। इस साल टाटा स्टील ने 44 मिलियन मीट्रिक टन लौह अयस्क का उत्पादन किया है। वहीं, कंपनी ने अपनी खदानों से छह मिलियन मीट्रिक टन कच्चा कोयला निकालकर अपनी 25 प्रतिशत जरूरत पूरी की है। नीलामी की चुनौती और नई खदानें खान और खनिज अधिनियम के तहत पुरानी लीज खत्म होने पर खदानें ई-नीलामी के जरिए आवंटित होंगी। इस नीलामी में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण अधिक प्रीमियम देना पड़ सकता है, जिससे लागत बढ़ने की आशंका है। इस संभावित असर को कम करने के लिए कंपनी अभी से तैयारी कर रही है। टाटा स्टील ने भविष्य के लिए गंधलपाड़ा और कलामंग वेस्ट जैसी नई खदानों का अधिग्रहण किया है। इसके अलावा, अपनी स्टील उत्पादन क्षमता को 2030 तक 40 मिलियन मीट्रिक टन तक ले जाने के लक्ष्य को देखते हुए, कंपनी ने सरकारी खनन कंपनियों एनएमडीसी और ओएमसी के साथ भी आपूर्ति समझौते किए हैं। अपने आपूर्ति तंत्र को और मजबूत करने के लिए टाटा स्टील ने महाराष्ट्र के गड़चिरोली में लायड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस करार के तहत दोनों कंपनियां मिलकर लौह अयस्क खनन, स्लरी पाइपलाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर, पेलेटाइजेशन और नए ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट लगाने की दिशा में काम करेंगी। कंपनी भविष्य में नीलाम होने वाली नई खदानों की लीज हासिल करने के लिए भी आक्रामक रूप से बोली लगाने की योजना बना रही है।  

रेलवे का बड़ा अपडेट! लुधियाना में दो दिनों तक बंद रहेगा फाटक, ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित

लुधियाना. शहर के हरनाम नगर स्थित रेलवे फाटक को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है, जिससे इस मार्ग से रोजाना गुजरने वाले वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फाटक बंद होने के कारण लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार रेलवे फाटक पर मरम्मत और अन्य तकनीकी कार्य चल रहा है। इसी के चलते रेलवे प्रशासन ने एहतियात के तौर पर फाटक को अस्थायी रूप से बंद किया है। अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों का ट्रैफिक पक्खोवाल रोड अंडरपास और मिड्डा चौक रेलवे फाटक की ओर डायवर्ट कर दिया गया है। फाटक बंद होने से आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है। वाहन चालकों को लंबा चक्कर लगाकर सफर तय करना पड़ रहा है, जिससे समय के साथ-साथ ईंधन की भी अतिरिक्त खपत हो रही है। खासकर नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे प्रशासन ने वाहन चालकों से सहयोग की अपील करते हुए निर्धारित डायवर्ट रूट का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

साहू समाज की परंपरा और योगदान की सराहना, कर्मा महोत्सव में अरुण साव ने कही बड़ी बात

रायपुर. उप मुख्यमंत्री अरुण साव किरंदुल में तहसील साहू संघ द्वारा आयोजित कर्मा महोत्सव, नवीन सामाजिक भवन नामकरण एवं लोकार्पण समारोह में शामिल हुए। उन्होंने सामाजिक पदाधिकारियों के साथ एक करोड़ रुपए की लागत से निर्मित भव्य तैलीय सदन का लोकार्पण किया। छत्तीसगढ़ तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष जितेन्द्र साहू, दंतेवाड़ा के विधायक चौतराम अटामी और किरंदुल नगर पालिका की अध्यक्ष रुबी शैलेन्द्र सिंह भी महोत्सव में शामिल हुईं। उप मुख्यमंत्री साव ने कर्मा महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि किरंदुल में छत्तीसगढ़ का सबसे भव्य साहू समाज का भवन बना है। इस भवन का रोज उपयोग हो, ऐसी व्यवस्था बनाएं। उन्होंने कहा कि ईमानदारी और मेहनत साहू समाज की ताकत और विशेषता है। हमारी इस पहचान को बनाकर रखना है।  साव ने कहा कि सभी समाजों के साथ साहू समाज का आत्मीय संबंध है। यह सभी के साथ मिलकर चलने वाला समाज है। साहू समाज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। देश-विदेश में समाज के युवा अनेक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। भक्त माता कर्मा के बताए मार्ग पर चलकर हमें समाज को ऊंचाईयों पर पहुंचाना है। छत्तीसगढ़ तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष जितेन्द्र साहू ने अपने संबोधन में कहा कि साहू समाज का तेल निकालने का पुश्तैनी काम रहा है। हमारे इस पुश्तैनी व्यवसाय को पुनर्स्थापित करना चाहिए। उन्होंने समाज के लोगों को तेल निकालने की मशीन लगाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि तेल निकालने की मशीनों पर सरकार द्वारा 35 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। समाज के लोग इसका लाभ लेकर तेल निकालने का उद्यम कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। विधायक चौतराम अटामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि साहू समाज के लोग किरंदुल में सक्रियता से काम कर रहे हैं। समाज के 300 परिवार यहां रहते हैं। उन्होंने समाज की मांग पर शैक्षणिक कार्य के लिए कमरा बनाने की घोषणा की। किरंदुल नगर पालिका की अध्यक्ष रुबी शैलेन्द्र सिंह, किरंदुल तहसील साहू समाज के अध्यक्ष टीकमचंद साहू और छत्तीसगढ़ साहू समाज के संगठन सचिव ओमप्रकाश साहू ने भी कर्मा महोत्सव को संबोधित किया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए लालाराम साहू को समाजरत्न सम्मान दिया गया। माता कर्मा प्रांगण में दीवारों कर कलाकृति बनाने वाले कलाकार कामता राम कोर्राम को भी सम्मानित किया गया। भगवताचार्य यामिनी देवी साहू, लोक गायिका आरू साहू, पार्षद विनोद साहू और तहसील साहू समाज के संरक्षक ओम साहू सहित साहू समाज के प्रदेशभर के पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।

बीएमएचआरसी के डॉक्टरों की बड़ी सफलता, 12 किलो के जटिल ओवरी ट्यूमर की सफल सर्जरी

बीएमएचआरसी में 12 किलो के जटिल ओवरी ट्यूमर की सफल सर्जरी  -बड़ी आंत, पेशाब की नली और प्रमुख रक्त वाहिकाओं के निकट था ट्यूमर, पांच घंटे चला ऑपरेशन  भोपाल   भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में अंडाशय के कैंसर (ओवरी कैंसर) से पीड़ित 60 वर्षीय गैस पीड़ित महिला की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। महिला के शरीर में विकसित ट्यूमर का आकार लगभग 12 किलो तक पहुंच गया था और वह ओवरी से फैलकर पेट के अन्य हिस्सों तक पहुंच चुका था। ट्यूमर के अत्यधिक बड़े आकार और कई महत्वपूर्ण अंगों से चिपके होने के कारण यह सर्जरी अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाली थी। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। बीएमएचआरसी के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. सोनवीर गौतम ने बताया कि मरीज पिछले लगभग तीन वर्षों से इस समस्या से जूझ रही थी। शुरुआती दो वर्षों तक बीमारी का पता नहीं चल पाया। बाद में पेट का आकार बढ़ने, भारीपन और तकलीफ होने पर जांच कराई गई। सीटी स्कैन में पता चला कि पेट में अत्यंत बड़ी गांठ मौजूद है, जो बड़ी आंत, पेशाब की नली तथा पेट की प्रमुख रक्त वाहिकाओं के अत्यंत निकट और उनसे चिपकी हुई थी। उन्होंने बताया कि ट्यूमर के कारण मरीज को हर्निया भी हो गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई थी। ट्यूमर कई महत्वपूर्ण अंगों से जुड़ा होने के कारण ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा था। मरीज को मधुमेह (डायबिटीज) भी थी, जिससे सर्जरी का जोखिम और बढ़ गया था। ट्यूमर के कुछ हिस्सों में रक्त प्रवाह प्रभावित होने के कारण संक्रमण और पस बनने की स्थिति भी उत्पन्न हो गई थी। समय पर सर्जरी नहीं होने पर यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता था, जिससे मरीज की जान को खतरा हो सकता था। डॉ. गौतम ने बताया कि करीब पांच घंटे चली इस जटिल सर्जरी के दौरान चिकित्सकों की टीम ने सावधानीपूर्वक ट्यूमर को हटाया। सर्जरी में एनेस्थीशियोलॉजी विभााग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ संध्या इवने ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। सर्जरी करने वाली टीम में सीनियर रेजिडेंट डॉ ऋषि आथ्या, डॉ श्रेया भारद्वाज, डॉ जेश्ना और जूनियय रेजिडेंट डॉ आशीष वैद्य शामिल थे। बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि इस प्रकार की जटिल सर्जरी के लिए उच्च स्तर की विशेषज्ञता, अनुभव और विभिन्न विभागों के समन्वय की आवश्यकता होती है, जो बीएमएचआरसी के विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान में गंभीर एवं जटिल बीमारियों के लिए उन्नत, समग्र और विशेषज्ञ उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे क्षेत्र के मरीजों को उपचार के लिए बड़े महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। पैंक्रियाज़ कैंसर मरीज को मिली राहत : बीएमएचआरसी के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में पैंक्रियाज़ कैंसर से पीड़ित 60 वर्षीय पुरुष की भी जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सोनवीर गौतम ने बताया कि कैंसर पैंक्रियाज़ से बढ़कर पोर्टल वेन नामक महत्वपूर्ण रक्त वाहिका तक पहुंच गया था, जिससे सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण हो गई थी। ऑपरेशन के दौरान छोटी सी चूक भी मरीज के लिए घातक साबित हो सकती थी। चिकित्सकों की टीम ने सावधानीपूर्वक सर्जरी कर ट्यूमर हटाया। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज का निःशुल्क उपचार किया गया। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार है और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।

योगी सरकार की औद्योगिक नीति का असर, पांच जिलों में विकसित हो रहे आधुनिक टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क

उत्तर प्रदेश में टेक्सटाइल हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम, संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना को मिली रफ्तार योगी सरकार की औद्योगिक नीति का असर, पांच जिलों में विकसित हो रहे आधुनिक टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर और बिजनौर में 326 एकड़ से अधिक भूमि पर पीपीपी मॉडल से होंगे पार्क विकसित-योगी भूमि हस्तांतरण से लेकर प्री-फिजिबिलिटी और आधारभूत सुविधाओं के कार्यों में तेजी लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल एवं परिधान विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। योगी सरकार ने वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर और बिजनौर में पांच बड़े टेक्सटाइल पार्क विकसित करने की योजना बनाई है। इन पार्कों के लिए कुल 326 एकड़ से अधिक भूमि चिह्नित की गई है और सभी भूमि पार्सलों के हस्तांतरण को मंत्रिमंडल की मंजूरी भी मिल चुकी है।    इस योजना के तहत वाराणसी के रामना में 75 एकड़, अमरोहा में 79.825 एकड़, बरेली के बहेड़ी में 79.580 एकड़, संत कबीर नगर के मगहर में 39.490 एकड़ तथा बिजनौर के नगीना में 52.910 एकड़ भूमि पर पार्क विकसित किए जाएंगे। सभी परियोजनाएं सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर स्थापित होंगी। सरकार का लक्ष्य निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करना है।    परियोजना के क्रियान्वयन के लिए प्राधिकरण गठन की अधिसूचना जारी की जा चुकी है तथा भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। राष्ट्रीय वस्त्र अनुसंधान संस्था (NITRA) द्वारा वाराणसी पार्क की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है, जबकि शेष चार पार्कों की संशोधित प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उद्योग जगत के सुझावों को शामिल करते हुए इन रिपोर्टों को अंतिम रूप दिया जाएगा।    वाराणसी के रामना टेक्सटाइल पार्क को शीघ्र विकसित करने के लिए संपर्क मार्ग निर्माण का कार्य भी आगे बढ़ रहा है। सड़क निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनुबंध की कार्यवाही प्रगति पर है। वहीं बिजली आपूर्ति के लिए 132 केवी उपकेंद्र, ट्रांसमिशन लाइन और 33 केवी विद्युत अवसंरचना की रूपरेखा तैयार की गई है, जिससे पार्क को निर्बाध विद्युत उपलब्ध कराई जा सके।     योगी सरकार पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप परियोजनाओं को विकसित करने पर भी विशेष जोर दे रही है। पर्यावरण स्वीकृति, भूजल उपयोग और वन विभाग की अनापत्ति से संबंधित प्रक्रियाएं जारी हैं। इसके साथ ही चार अन्य पार्कों के लिए मास्टर डेवलपर चयन हेतु पीपीपी आधारित निविदा दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। उद्योगों से मिले सकारात्मक प्रतिसाद के बाद सरकार को इन परियोजनाओं में बड़े निवेश की उम्मीद है।    राज्य सरकार का मानना है कि संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना उत्तर प्रदेश को टेक्सटाइल निर्माण, रेडीमेड गारमेंट्स, तकनीकी वस्त्र और निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों अवसर सृजित होंगे और प्रदेश की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

दिल्ली बर्ड एटलस लॉन्च: 195 लोगों की टीम ने किया 2 साल का सर्वे

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली केवल राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र ही नहीं, बल्कि पक्षियों की असाधारण विविधता का भी महत्वपूर्ण ठिकाना है. दुनिया की राजधानियों में पक्षी प्रजातियों की समृद्धि के मामले में दिल्ली दूसरे स्थान पर मानी जाती है. इसके बावजूद अब तक यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी कि शहर के किस हिस्से में कौन-सी पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं. इस कमी को दूर करते हुए दिल्ली का पहला बर्ड एटलस तैयार किया गया है, जो राजधानी की जैव विविधता का विस्तृत और वैज्ञानिक दस्तावेज माना जा रहा है. दो वर्षों में तैयार हुआ दिल्ली का पहला पक्षी मानचित्र दिल्ली सरकार के वन विभाग और बर्ड काउंट इंडिया के संयुक्त प्रयास से तैयार किए गए इस एटलस का उद्देश्य शहर में पक्षियों के वितरण, उनकी संख्या और उनके आवास से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित रूप से संकलित करना था. विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इसका औपचारिक लोकार्पण किया. वैज्ञानिक तरीके से हुआ सर्वे पक्षी सर्वेक्षण को अधिक सटीक बनाने के लिए पूरे दिल्ली क्षेत्र को 6.6 वर्ग किलोमीटर के ग्रिड में विभाजित किया गया. प्रत्येक ग्रिड को आगे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया और उनमें से चयनित क्षेत्रों में विस्तृत अध्ययन किया गया. कुल 145 उपक्षेत्रों में सर्वेक्षण किया गया, जो राजधानी के लगभग 11 प्रतिशत भूभाग का प्रतिनिधित्व करते हैं. अधिकारियों के अनुसार यह प्रक्रिया पक्षी विविधता की संतुलित और वैज्ञानिक तस्वीर सामने लाने के लिए अपनाई गई. 195 प्रतिभागियों ने संभाली जिम्मेदारी सर्वेक्षण कार्य में पक्षी विशेषज्ञों, प्रकृति प्रेमियों और बर्डवॉचरों की टीमों ने सक्रिय भागीदारी निभाई. दो से पांच सदस्यों वाली टीमों ने विभिन्न मौसमों में क्षेत्रीय निरीक्षण किए. सर्दियों और गर्मियों के दौरान कुल चार चरणों में अध्ययन किया गया, जिससे स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रकार के पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की जा सके. इस पूरी प्रक्रिया में 195 प्रतिभागियों ने योगदान दिया. रिकॉर्ड में दर्ज हुईं 221 प्रजातियां एटलस के पहले वर्ष में 221 पक्षी प्रजातियों की पहचान और रिकॉर्डिंग की गई. इनमें सबसे बड़ी संख्या कीटभक्षी पक्षियों की रही, जिनकी 108 प्रजातियां दर्ज की गईं. इसके अलावा 37 प्रजातियां बीज और वनस्पतियों पर निर्भर पाई गईं, जबकि 34 प्रजातियां सर्वाहारी श्रेणी में शामिल रहीं. छोटे जीवों और मृत पशुओं पर निर्भर 33 प्रजातियां भी दर्ज की गईं. फल और फूलों के रस पर निर्भर पक्षियों की संख्या सबसे कम रही और ऐसी केवल 9 प्रजातियां सामने आईं. संकटग्रस्त और दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता और उम्मीद सर्वेक्षण के दौरान कई ऐसी प्रजातियां भी दर्ज की गईं, जिन्हें संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. इनमें ब्लैक-बेलीड टर्न जैसी संकटग्रस्त प्रजाति के अलावा ओरिएंटल डार्टर, एशियाई वूली-नेक्ड स्टॉर्क, ब्लैक-हेडेड आइबिस और पेंटेड स्टॉर्क जैसे निकट संकटग्रस्त पक्षी भी शामिल हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रजातियों की मौजूदगी दिल्ली के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की अहमियत को दर्शाती है. यमुना के बाढ़ क्षेत्र और अरावली बने पक्षी विविधता के बड़े केंद्र विशेषज्ञों के अनुसार अरावली क्षेत्र, यमुना का बाढ़ मैदान, साहिबी नदी के आसपास के इलाके और सेंट्रल एशियन फ्लाइवे जैसे प्राकृतिक कारक दिल्ली को पक्षियों के लिए अनुकूल आवास प्रदान करते हैं. यही वजह है कि राजधानी में बड़ी संख्या में स्थानीय और प्रवासी पक्षी सालभर दिखाई देते हैं. नीति निर्माण से लेकर संरक्षण तक, कई क्षेत्रों में होगा एटलस का उपयोग दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एटलस को केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि भविष्य की योजना निर्माण का महत्वपूर्ण उपकरण बताया है. उनके अनुसार पक्षियों के वितरण और मौसमी गतिविधियों का यह दस्तावेज आवास पुनर्स्थापन, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ शहरी विकास की योजनाओं को दिशा देने में मदद करेगा. अन्य जीव-जंतुओं पर भी ऐसे अध्ययन की जरूरत बर्ड काउंट इंडिया के क्षेत्रीय समन्वयक पंकज गुप्ता का कहना है कि दिल्ली सरकार द्वारा राज्य स्तर पर पक्षियों के वितरण का इस तरह का डेटा पहली बार तैयार किया गया है. उनका मानना है कि इसी तरह के व्यापक सर्वेक्षण अन्य वन्यजीवों, पौधों और कीटों के लिए भी किए जाने चाहिए, ताकि राजधानी की संपूर्ण जैव विविधता का वैज्ञानिक डेटाबेस विकसित किया जा सके.