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विपक्षी एकता को मिली नई धार! INDIA ब्लॉक की बैठक में तय हुए 5 अहम एजेंडे

 नई दिल्ली लोकसभा चुनाव के दो साल बाद विपक्षी एकजुटता को नई धार देने के मकसद से इंडिया ब्लॉक की 7वीं बैठक दिल्ली में हुई. कांग्रेस की अगुवाई में करीब ढाई घंटे चली बैठक में 25 दलों के नेताओं ने चुनावी पारदर्शिता, शिक्षा व्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने पर सहमति जताई. बैठक में नीट और सीबीएसई से जुड़े विवादों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई. इंडिया ब्लॉक ने नियमित अंतराल पर बैठकें करने का फैसला लिया।  इंडिया ब्लॉक की इस बैठक में कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, एनसीपी-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले समेत 25 दलों के 34 नेता और निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल शामिल हुए. दोपहर 12 शुरू हुई बैठक करीब ढाई घंटे से ज्यादा चली. इंडिया ब्लॉक में शामिल प्रमुख दलों के नेता दोपहर 3 बजे जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए।  प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि इंडिया ब्लॉक की बैठक में 25 दलों के नेता शामिल हुए और 5 प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी. उन्होंने कहा कि बैठक में नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक और सीबीएसई रिवैल्यूएशन में अनियमितताओं के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. कांग्रेस अध्यक्ष ने इन दोनों मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि ये देश के युवाओं के साथ धोखा है. उन्होंने इंडिया ब्लॉक की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।  इंडिया ब्लॉक की बैठक में इन 5 मुद्दों पर सहमति बनी     एसआईआर, मतदाता सूची में कथित हस्तक्षेप और चुनावों की निष्पक्षता के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने पर सहमति बनी है. यह पत्र उन्हें जल्द से जल्द सौंपा जाएगा।      लाखों छात्रों को प्रभावित करने वाले गंभीर मामलों को देखते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए. उनके कार्यकाल में नीट और सीबीएसई परीक्षाओं से जुड़े मामलों में लाखों युवाओं के साथ अन्याय हुआ है, जिसके कारण आज बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।      हम देश की गंभीर आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, अत्याचारों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे. जनहित से जुड़े इन विषयों पर केंद्र सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए, जिसमें हम अपने सभी मुद्दे और सुझाव रखेंगे।      इंडिया ब्लॉक के सभी दल हर दो महीने में बैठक करेंगे. हमारी अगली बैठक 8 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित होगी।      संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के बीच समन्वय जारी रहेगा. इसके लिए नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में प्रतिदिन सुबह एक समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।  खड़गे ने बताया कि संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान भी विपक्षी गठबंधन नियमित बैठकें करेगा. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'बैठक में एसआईआर, वोट की लूट और चुनाव में धांधली के संबंध में भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजने पर सहमति बनी है. यह पत्र जल्द ही भारत के मुख्य न्यायाधीश को सौंप दिया जाएगा. दूसरा बिंदु यह है कि शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग पर सर्वसम्मति से सहमति बनी है. क्योंकि उनकी देखरेख में नीट और सीबीएसई परीक्षाओं में शामिल हुए लाखों युवाओं के साथ विश्वासघात हुआ है। 

‘स्कूल–शाला संवाद’ से पढ़ाई आसान, वीडियो लेक्चर और ई-कॉन्टेंट एक ही जगह उपलब्ध

 जयपुर डिजिटल युग में शिक्षा को नई दिशा देने के उद्देश्य से राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा विकसित शाला दर्पण पोर्टल विद्यार्थियों के लिए एक समग्र शैक्षणिक मंच के रूप में स्थापित हो चुका है। विशेष रूप से पोर्टल का 'स्कूल – शाला संवाद' सेक्शन विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का भंडार साबित हो रहा है, जहां कक्षा 1 से 12 तक के लिए विविध और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इसमें विद्यार्थियों को न केवल अध्ययन सामग्री का भंडार मिलता है, साथ ही विषयवार वीडियो लेक्चर, एनसीईआरटी और आरबीएसई पाठ्यक्रम आधारित ई-कॉन्टेंट, विस्तृत प्रश्न बैंक, दूरदर्शन द्वारा प्रसारित शैक्षणिक कार्यक्रमों की सामग्री और ई-पत्रिकाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। यह सामग्री विद्यार्थियों को कठिन विषयों को सरल तरीके से समझने में मदद करती है और परीक्षा की तैयारी को अधिक व्यवस्थित बनाती है। छात्र लॉगिन करके इस पठन एवं डिजिटल सामग्री को प्राप्त कर सकते हैं। शाला दर्पण पोर्टल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल पाठ्य सामग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी भी प्रदान करता है। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में आसानी होती है  इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म है 'टॉक टू टीचर' इसके अलावा, 'टॉक टू टीचर' सुविधा विद्यार्थियों के लिए एक इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य कर रही है। इस सुविधा के माध्यम से छात्र-छात्राएं सीधे अपने शिक्षकों से जुड़ सकते हैं और पढ़ाई से संबंधित समस्याओं, शंकाओं या कठिनाइयों का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। यह पहल खासतौर पर उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है, जो किसी कारणवश कक्षा में अपनी शंकाएं स्पष्ट नहीं कर पाते। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए शाला दर्पण पोर्टल किसी वरदान से कम नहीं है। इंटरनेट के माध्यम से उन्हें शहरों के समान गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे शिक्षा में समानता को बढ़ावा मिल रहा है। शिक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर पोर्टल को अपडेट किया जाता है, ताकि विद्यार्थियों को नवीनतम और प्रासंगिक सामग्री मिलती रहे। साथ ही, शिक्षकों को भी इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल शिक्षण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे शिक्षण प्रक्रिया अधिक आधुनिक और प्रभावी बन सके। शाला दर्पण पोर्टल न केवल विद्यार्थियों के लिए बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संसाधन बन गया है। यह पारदर्शिता, संवाद और गुणवत्ता युक्त शिक्षा को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम है। राजस्थान शिक्षा विभाग का यह नवाचार शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो राज्य के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

डीटीसी बेड़े में बढ़ेंगी इलेक्ट्रिक बसें, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर सरकार का फोकस

नई दिल्ली  दिल्ली में रोजाना बसों में सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए डीटीसी के बेड़े में 2800 नई एसी लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने जा रही है। इस साल के अंत तक सभी बसें आ जाएंगी सर, अलग अलग लॉट में। सरकार का कहना है कि इससे बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और शहर के दूर-दराज के इलाकों तक बस सेवा का विस्तार होगा। सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच और बेहतर होगी परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि भारत सरकार की पीएम ई-ड्राइव स्कीम के तहत नौ-मीटर वाली 1400 और 12-मीटर लंबाई वाली 1400 इलेक्ट्रिक बसों को डीटीसी के बेड़े में शामिल किया जाएगा। इनके आने से दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच और बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस केवल मुख्य मार्गों पर बसें बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन इलाकों तक भी सार्वजनिक परिवहन पहुंचाने पर है जहां अभी सुविधाएं अपेक्षाकृत कम हैं। इसी उद्देश्य से 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' को मजबूत करने की योजना बनाई गई है, ताकि लोगों को घर या कॉलोनी के नजदीक से बस सुविधा मिल सके और मेट्रो व अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों तक पहुंच आसान हो सके।     12 मीटर लंबाई वाली 1400 बसें होंगी     9 मीटर वाली 1400 बसें होंगी     इस साल के अंत तक इलेक्ट्रिक बसों की संख्या 7500 करने का है लक्ष्य 9-मीटर वाली इलेक्ट्रिक बसों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा परिवहन विभाग के अनुसार, दिल्ली में पहले से चल रहीं 9-मीटर वाली इलेक्ट्रिक बसों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। खासकर लोकल और फीडर रूट्स पर इनसे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल रही है। इसी अनुभव के आधार पर नए बेड़े को तैयार किया जा रहा है, जिससे व्यस्त रूटों और फीडर सेवाओं दोनों की जरूरतों को पूरा किया जा सके। 14,000 बसों का लक्ष्य दिल्ली सरकार ने वर्ष 2028-29 तक राजधानी में सार्वजनिक परिवहन बसों की कुल संख्या बढ़ाकर करीब 14,000 करने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल दिल्ली में करीब 4300 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, जिससे राजधानी देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक बस बेड़ों में शामिल है। सरकार इस साल के अंत तक इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाकर करीब 7500 करने की दिशा में काम कर रही है। लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती पंकज कुमार सिंह ने बताया कि पीएम ई-ड्राइव फेज-II के तहत 3330 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करने की योजना पर भी काम चल रहा है। इनमें 7-मीटर लंबाई वाली 500 इलेक्ट्रिक बसें होंगी, जो फीडर सेवाओं और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को और मजबूत करेंगी। इससे रिहायशी, ग्रामीण और कम सुविधा वाले क्षेत्रों में भी सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बेहतर होगी।

ODI स्क्वॉड का ऐलान, लेकिन वर्ल्ड कप चैंपियन खिलाड़ी को नहीं मिली जगह; फैसले पर उठे सवाल

सिडनी  क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए स्क्वॉड का ऐलान कर दिया है। जोश इंग्लिस पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश दौरे पर भी ऑस्ट्रेलियाई टीम के कप्तान रहेंगे, क्योंकि मिचेल मार्श अभी भी चोट से परेशान है। मार्श टखने की चोट के कारण समय पर ठीक नहीं हो पाए, लेकिन वे T20I की तैयारी के लिए ढाका में ग्रुप के साथ जुड़ेंगे। वहीं वर्ल्ड कप विनिंग टीम का हिस्सा रहें ट्रैविस हेड को पहले बांग्लादेश के खिलाफ वनडे और टी20 टीम के लिए चुना गया था, मगर नेशनल सिलेक्टर टोनी डोडेमेड के अनुसार उन्हें दोनों सीरीज के लिए पर्सनल लीव दे दी गई है। ओलिवर पीक और मैट शॉर्ट को बांग्लादेश ODI के लिए रखा गया है, जिन्हें पहले सिर्फ पाकिस्तान ODI के लिए चुना गया था। टॉड मर्फी को भी शामिल किया गया है। वह तनवीर संघा की जगह लेंगे, जो लेग स्पिनर हैं, उन्हें लाहौर में दूसरे ODI के दौरान हैमस्ट्रिंग में चोट लग गई थी। बेन ड्वारशुइस और जेवियर बार्टलेट भी टीम में शामिल हुए हैं, जो राइली मेरेडिथ और बिली स्टैनलेक की जगह लेंगे। मेरेडिथ T20I में वापसी करेंगे। मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड के पहले से ही बाहर होने से, ODI टीम में हमेशा की तरह अनुभव की कमी है, लेकिन इंग्लिस को उम्मीद है कि इससे नए सदस्यों के लिए मौके बनेंगे। पीक और शॉर्ट, दोनों को शुरू में सिर्फ पाकिस्तान ODIs के लिए चुना गया था, अब मार्श और हेड की गैरमौजूदगी में बांग्लादेश की राजधानी में होने वाले तीन ODIs के लिए दोनों ही रहेंगे। शॉर्ट ने पाकिस्तान में बल्ले (पहले ODI में अर्धशतक) और गेंद (आखिरी दो ODIs में अपनी ऑफ़-स्पिन से चार विकेट) दोनों से प्रभावित करने के बाद अपनी जगह बनाए रखी है। फिर भी, ऑस्ट्रेलिया के दो सबसे सीनियर ODI बल्लेबाज़ों की गैरमौजूदगी का सबसे ज़्यादा फ़ायदा पीक को हो सकता है। 19 साल के पूर्व U19 वर्ल्ड कप कप्तान को लंबे समय से ऑस्ट्रेलिया के हाल के सबसे होनहार बल्लेबाज़ों में से एक माना जाता था, लेकिन पाकिस्तान में उनका इंटरनेशनल डेब्यू ज़्यादातर उम्मीदों से ज़्यादा तेजी से हुआ। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच पहला वनडे मंगलवार 9 जून को ढाका में खेला जाएगा। इसके बाद के मैच 11 और 14 तारीख को उसी जगह पर खेले जाएंगे। T20Is 17 जून से शुरू होंगे। बांग्लादेश ODIs के लिए ऑस्ट्रेलिया टीम जोश इंग्लिस (कप्तान), ज़ेवियर बार्टलेट, एलेक्स कैरी, कूपर कोनोली, बेन ड्वारशुइस, नाथन एलिस, कैमरून ग्रीन, मैथ्यू कुहनेमन, मार्नस लाबुशेन, टॉड मर्फी, ओलिवर पीक, मैथ्यू रेनशॉ, लियाम स्कॉट, मैट शॉर्ट, एडम जैंपा बांग्लादेश T20Is के लिए ऑस्ट्रेलिया टीम मिशेल मार्श (कप्तान), ज़ेवियर बार्टलेट, कूपर कोनोली, टिम डेविड, जोएल डेविस, नाथन एलिस, कैमरून ग्रीन, एरॉन हार्डी, जोश इंग्लिस, स्पेंसर जॉनसन, मैथ्यू कुहनेमन, रिले मेरेडिथ, जोश फिलिप, मैथ्यू रेनशॉ, एडम ज़म्पा

बिहार की बेटी मिताली ने पर्वतारोहण में रचा इतिहास, केदारकांठा पर लहराया परचम

  नालंदा बिहार के नालंदा की रहने वाली और पटना यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा मिताली प्रसाद ने अपनी पर्वतारोहण यात्रा में एक और खूबसूरत उपलब्धि जोड़ ली है. मिताली ने 12,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित माउंट केदारकांठा पर सफलतापूर्वक फतह हासिल की है. उन्होंने बीते मई माह में इस चोटी पर चढ़ाई करने में सफलता हासिल की है. इस उपलब्धि के बाद प्रभात खबर से बात करते हुए मिताली प्रसाद ने इस गौरवपूर्ण पल को साझा किया. मिताली प्रसाद ने कहा, इस चोटी पर खड़े होकर मुझे बिहार का प्रतिनिधित्व करने पर बेहद गर्व महसूस हुआ. यह इस बात का सबूत है कि हम सभी में किसी भी ऊंचाई को पार करने का अटूट जज्बा है. उन्होंने इस कामयाबी के बाद ‘जय बिहार’ का नारा भी बुलंद किया. दक्षिण अमेरिका की ऊंची चोटी पर भी फहराया है तिरंगा मिताली प्रसाद का पर्वतारोहण में काफी शानदार ट्रैक रिकॉर्ड रहा है. वे साल 2020 में दक्षिण अमेरिका की 6,962 मीटर ऊंची चोटी ‘माउंट एकांकागुआ’ (Mt. ACONCAGUA) को अकेले (Solo) फतह करने वाली भारत की पहली बेटी बनी थीं. इसके अलावा उन्होंने साल 2022 में ‘माउंट कुन’ (7077 मीटर) और एवरेस्ट बेस कैंप की चढ़ाई पूरी की थी. वे साल 2019 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो (5895 मीटर) और साल 2020 में दक्षिण अमेरिका के माउंट बोनेटे (5400 मीटर) पर भी तिरंगा फहरा चुकी हैं. मार्शल आर्ट्स इंटरनेशनल प्लेयर और एनसीसी कैडेट भी रही हैं मिताली राजनीति विज्ञान से पोस्ट ग्रेजुएट मिताली प्रसाद बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं. पर्वतारोहण के क्षेत्र में कदम रखने से पहले वे कराटे में ब्लैक बेल्ट (2nd डैन) होल्डर और इंटरनेशनल प्लेयर रह चुकी हैं. इसके साथ ही वे एनसीसी (Air Sqn) की ‘ए’ ग्रेड कैडेट रही हैं और पैरा बेसिक कोर्स (आगरा) भी पूरा कर चुकी हैं. किसान परिवार की बेटी का अब प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना प्रभात खबर से बात करते हुए मिताली ने कहा कि कतरीसराय के पास मायापुर उनका पैतृक गांव है. उनके माता-पिता किसान हैं और साथ में अन्य घरेलू उद्योग में भी लगे हैं. फिलहाल वो बिहार के स्कूली बच्चों को पर्वतारोहण की बारीकियां सीखा रही हैं. साथ ही बिहार प्रशासनिक सेवा की तैयारी भी कर रही हैं. अब तक दो बार मुख्य परीक्षा में भी शामिल हुई हैं. आगे उनका सपना बिहार के बच्चों, खासकर बेटियों को पर्वतारोहण के प्रति जागरुक करना है. वो माउंट एवरेस्ट भी फतह करना चाहती हैं. हालांकि इसके लिए फंड की कमी बड़ी बाधा बन रही है.

मुख्य सचिव पद की दौड़ तेज, सुमिता मिश्रा बनाम सुधीर राजपाल पर टिकी निगाहें

जालंधर. हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का सेवा-विस्तार 30 जून को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में 1990 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों सुमिता मिश्रा और सुधीर राजपाल को उनके उत्तराधिकारी के रूप में प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। सुमिता मिश्रा वर्तमान में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में वित्तीय आयुक्त हैं जबकि सुधीर राजपाल अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) के पद पर कार्यरत हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारी राज्य के शीर्ष प्रशासनिक पद के लिए प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। पूर्व में हालांकि यह देखा गया है कि राज्य के शीर्ष नौकरशाही पद पर नियुक्ति हमेशा केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं की गई है। पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को एक वर्ष का सेवा-विस्तार प्रदान किया था। उनका कार्यकाल 30 जून, 2025 को समाप्त होना था। जानकारी हो कि रस्तोगी 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। फरवरी 2025 में हरियाणा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने रस्तोगी को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया था। रस्तोगी को मुख्य सचिव का पद उस समय मिला था जब 1989 बैच के आईएएस अधिकारी एवं तत्कालीन मुख्य सचिव विवेक जोशी निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किए गए थे।  

यात्रियों की बढ़ सकती है परेशानी, PRTC कर्मचारियों ने 3 दिन बस सेवा प्रभावित करने की चेतावनी दी

जालंधर. पनबस-पी.आर.टी.सी. ठेका कर्मचारी यूनियन ने सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जेलों में बंद कर्मचारियों को रिहा नहीं किया गया और कर्मचारियों की मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 22, 23 और 24 जून को हड़ताल करते हुए सरकारी बसों का चक्का जाम किया जाएगा व मुख्यमंत्री के आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे। यूनियन नेताओं ने कहा कि इस संघर्ष की शुरूआत 10 जून से पंजाब भर के डिपूओं में रैलियां व सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शनों से होगी। प्रदेश प्रधान रेशम सिंह गिल ने कहा कि सरकार को बने चार वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन एक भी नई सरकारी बस नहीं डाली गई। इसके विपरीत किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को बढ़ावा देकर विभाग को निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनियन नेताओं और कर्मचारियों पर मामले दर्ज कर उन्हें जेलों में बंद किया जा रहा है, ताकि निजीकरण के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाया जा सके। प्रदेश महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने कहा कि सरकार एक तरफ कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के दावे कर रही है, जबकि दूसरी ओर कर्मचारियों की मूलभूत मांगों को लागू नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन और अन्य लंबित मुद्दों पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जब तक सरकार अपने फैसलों को धरातल पर लागू नहीं करती, तब तक कर्मचारी संतुष्ट नहीं होंगे। सीनियर उपप्रधान हरकेश विक्की ने आरोप लगाया कि विभाग की अपनी बसों को डिपो में खड़ा कर निजी किलोमीटर स्कीम की बसों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे सरकार की निजीकरण संबंधी नीति स्पष्ट हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि नई किलोमीटर स्कीम की बसों को शुरू किया गया तो यूनियन काले झंडों के साथ विरोध प्रदर्शन करेगी।

ईंधन की अवैध बिक्री पर सख्ती, डब्बों में पेट्रोल-डीजल बेचने पर होगी कार्रवाई

दंतेवाड़ा. पश्चिम एशिया में उपजे मौजूदा संकट और उससे उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने बड़ा फैसला लिया है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग (मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर, अटल नगर) द्वारा जारी निर्देशों के तहत राज्य में पेट्रोल और डीजल की खुले में बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। कलेक्टर खाद्य शाखा दंतेवाड़ा द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य शासन ने ईंधन की आपूर्ति और वितरण को सुचारू बनाए रखने के लिए नए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जारी निर्देशों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) की तेल कंपनियों और अन्य समानांतर कंपनियों के पेट्रोल-डीजल रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) संचालकों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि: पेट्रोल और डीजल का विक्रय सीधे केवल उपभोक्ता के वाहन की टंकी में ही किया जाएगा। कोई भी रिटेल आउटलेट संचालक किसी भी व्यक्ति को ड्रम, केन (Jerrycan) या बोतल जैसे खुले बर्तनों में पेट्रोल-डीजल नहीं बेचेगा। यदि कोई संचालक इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चूंकि वर्तमान में रबी सीजन की फसल कटाई का काम चल रहा है और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियां भी शुरू होने वाली हैं, ऐसे में आम जनता और विकास कार्यों को प्रभावित होने से बचाने के लिए शासन ने कुछ महत्वपूर्ण मामलों में छूट का प्रावधान भी किया है। इन क्षेत्रों को मिलेगी नियमों से राहत: कृषक (किसान): खेती-किसानी और ट्रैक्टर/थ्रेशर आदि के लिए किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए। शासकीय एवं निर्माण कार्य: जिला कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित रेलवे, सड़क निर्माण और भवन निर्माण जैसे समय-सीमा में पूरे होने वाले सरकारी कार्य। अत्यावश्यक सेवाएं: अस्पताल, मोबाइल टावर संचालन और अन्य जरूरी इमरजेंसी सेवाएं। कैसे मिलेगी खुले में ईंधन लेने की अनुमति? विज्ञप्ति के अनुसार, शासकीय कार्यों और अत्यावश्यक सेवाओं के लिए खुले में (ड्रम या केन में) डीजल-पेट्रोल की आवश्यकता होने पर सीधे ईंधन नहीं मिलेगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM द्वारा मांग का उचित परीक्षण किया जाएगा। एसडीएम की रिपोर्ट और सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद ही कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित कार्यों हेतु रिटेल आउटलेट से निर्धारित मात्रा में ईंधन विक्रय की विशेष अनुमति दी जा सकेगी।

बंगाल में जांच एजेंसियों को बड़ी राहत! शुभेंदु सरकार ने CBI पर लगी रोक हटाई

 कोलकाता पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में सीबीआई को जांच करने की पूरी छूट देने का बड़ा फैसला किया है. होम एंड हिल अफेयर्स विभाग की तरफ से 8 जून 2026 को जारी अधिसूचना के मुताबिक, दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (डीएसपीई) एक्ट, 1946 के तहत सीबीआई को राज्य में केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मियों और उनसे जुड़े मामलों की जांच करने की अनुमति दी गई है।  इस नोटिफिकेशन का सीधा मतलब यह है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने CBI को राज्य में कुछ मामलों की जांच करने के लिए फिर से सामान्य सहमति (General Consent) दे दी है, लेकिन यह छूट पूरी तरह बिना शर्त नहीं है।  यह अधिकार दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (DSPE) एक्ट, 1946 की धारा 6 के तहत दिया गया है. नोटिफिकेशन 8 जून 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो रहा है।  किन मामलों में जांच कर सकेगी CBI?     केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामले.     केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के कर्मचारियों से जुड़े मामले.     अगर किसी शख्स पर केंद्रीय कर्मचारियों या केंद्रीय उपक्रमों के कर्मचारियों के साथ मिलकर अपराध करने का आरोप हो, तो उनके खिलाफ भी जांच की जा सकेगी. किन मामलों में CBI सीधे जांच नहीं कर सकेगी? पश्चिम बंगाल सरकार के नियंत्रण वाले राज्य सरकारी कर्मचारियों के मामलों में सीबीआई सीधे जांच नहीं कर सकती है. ऐसे मामलों में सीबीआई को पहले राज्य सरकार से लिखित अनुमति लेनी होगी. यह कहना कि 'बंगाल ने CBI को सभी मामलों की जांच की पूरी छूट दे दी' पूरी तरह सही नहीं होगा. नोटिफिकेशन पढ़ने पर साफ है कि छूट मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय उपक्रमों और उनसे जुड़े मामलों के लिए दी गई है. राज्य सरकार के अधिकारियों पर CBI अभी भी बिना अनुमति सीधे जांच नहीं कर सकती।  भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई की सीबीआई को दी खुली छूट  मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पिछली सरकार ने 4 वर्षों से सीबीआई की कार्रवाई को रोक रखा था. कानून के अनुसार, किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने या अभियोजन शुरू करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होती है।  ममता बनर्जी पर भ्रष्ट नौकरशाहों को संरक्षण देने का आरोप मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार ने जान-बूझकर इन फाइलों को अटकाये रखा, ताकि उनके खास अधिकारियों को बचाया जा सके. मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल 3 प्रमुख विभागों में भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ जांच की सीबीआई को आवश्यक मंजूरी दे दी गयी है. इसकी प्रतियां केंद्रीय एजेंसी को भेज दी गयी हैं।  रडार पर शिक्षक भर्ती और नगर निकाय भर्ती घोटाले के मास्टरमाइंड     शिक्षक भर्ती घोटाला (WBSSC) स्कूलों में अवैध नियुक्तियों से जुड़ा मामला है. इस केस में कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ अब सीबीआई सीधे आरोपपत्र दाखिल कर सकेगी।      नगर निकाय भर्ती घोटाला वो केस है, जिसमें बंगाल के विभिन्न नगरपालिकाओं में हुई नौकरियों की बंदरबांट हुई थी. अब इसकी जांच तेजी से आगे बढ़ेगी।  कानून का हथियार बनाकर भ्रष्टाचारियों को दिया गया था सुरक्षा कवच मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने कानून को ढाल बनाकर भ्रष्टाचारियों को कवच प्रदान किया था. उन्होंने कहा- भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है. जो फाइलें सचिवालय की आलमारियों में बंद थीं, उन्हें अब खोल दिया गया है, ताकि जनता का पैसा लूटने वालों को सजा मिल सके। 

योगी सरकार देने जा रही पांच नये एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय की सौगात

योगी सरकार देने जा रही पांच नये एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय की सौगात  आयुष शिक्षा को नई उड़ानः देवीपाटन, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में स्थापित होंगे संस्थान चार मंडलों में जमीन पहले ही आयुष विभाग के नाम दर्ज है, बस्ती में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में  आयुष शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी -योगी   भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं सीएम योगी लखनऊ,  योगी सरकार आयुष चिकित्सा प्रणाली को मजबूत बनाने और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में योगी सरकार ने पांच नए एकीकृत आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालयों की स्थापना का निर्णय लिया है। ये आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालय गोंडा, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में स्थापित किए जाएंगे, जहां विद्यार्थियों को आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान की शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी। योगी सरकार के निर्णय से न केवल प्रदेश में आयुष शिक्षा का दायरा बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी। नए महाविद्यालयों के माध्यम से युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे और आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होगा। चार मंडलों में जमीन पहले से उपलब्ध प्रमुख सचिव, आयुष रंजन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को भी मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे हैं ताकि प्रदेशवासियों को सुरक्षित, सस्ती तथा प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। ऐसे में सीएम योगी के निर्देश पर पांच नये एकीकृत आयुष चिकित्सालय और महाविद्यालय के लिए पांच मंडलों में जमीन को चिन्हित कर लिया गया है। देवीपाटन मंडल में गोंडा के विकास खंड वजीरगंज के ग्राम कोडर में लगभग 14.82 एकड़ भूमि, मीरजापुर मंडल में सदर तहसील के ग्राम अकोढ़ी में 13.83 एकड़ भूमि, मेरठ मंडल के लिए गाजियाबाद के मोदीनगर तहसील के ग्राम सैदपुर हुसैनपुर डलना में 11 एकड़ भूमि, आगरा मंडल में किरावली तहसील के ग्राम अकबरा में 13.5 एकड़ भूमि और बस्ती मंडल में हर्रैया तहसील के ग्राम जोगापुर में 15 एकड़ भूमि महाविद्यालय की  स्थापना के लिए चिन्हित की गयी है। इनमें से चार मंडलों में जमीन पहले ही आयुष विभाग के नाम दर्ज है, जबकि बस्ती में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। शिक्षा संस्थान शोध और नवाचार के केंद्र के रूप में भी किए जाएंगे विकसित आयुष महानिदेशक एवं मिशन निदेशक चैत्रा वी. ने बताया कि सभी पांच मंडलों में आयुष महाविद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध हो गयी है। वहीं वर्तमान में राजकीय एकीकृत आयुष महाविद्यालय एवं चिकित्सालय का नक्शा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नए आयुष महाविद्यालय केवल शिक्षा संस्थान नहीं होंगे, बल्कि शोध और नवाचार के केंद्र के रूप में भी विकसित किए जाएंगे। यहां आयुर्वेदिक औषधियों, योग चिकित्सा, जीवनशैली आधारित उपचार और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे भारतीय चिकित्सा परंपरा को वैज्ञानिक आधार पर और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। नए आयुष महाविद्यालयों की स्थापना से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने ही मंडल में उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों के छात्रों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। महाविद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं, चिकित्सालय, अनुसंधान सुविधाएं और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे, जिससे आयुष शिक्षा को नई गुणवत्ता और पहचान मिलेगी।