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भजनलाल सरकार का फैसला: SSO ID से पेंशन वेरिफिकेशन हुआ आसान

जयपुर राजस्थान की भजनलाल सरकार ने पेंशन से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने के लिए नियमों में कुछ अहम बदलाव किए हैं. पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों के बाद, अब 'राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996' में संशोधन के आधिकारिक आदेश शनिवार को जारी कर दिए गए हैं. राज्यपाल की मंजूरी मिलने के साथ ही नई अधिसूचना भी लागू हो गई है. आइए जानते हैं कि ये बदलाव क्या हैं और आपको इनका सीधा फायदा कैसे मिलेगा. चेहरा दिखाकर जमा होगा 'जीवन प्रमाण पत्र' अब पेंशनरों को अपना जीवितता प्रमाण पत्र (Life Certificate) जमा करने के लिए दफ्तरों या बैंकों की लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा. सरकार ने आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन को मंजूरी दे दी है. इसका मतलब है कि अब पेंशनर नई तकनीक की मदद से सिर्फ अपना चेहरा स्कैन करके आसानी से अपना जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकेंगे. SSO ID के जरिए वेरिफिकेशन हुआ आसान पेंशनरों के जीवन प्रमाण पत्र के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को भी पहले से काफी सरल कर दिया गया है. नए नियम के तहत, अब चतुर्थ श्रेणी (Class-IV) से ऊपर के कर्मचारी अपनी एसएसओ आईडी (SSO ID) का उपयोग कर सकेंगे. वे इसके जरिए ई-साइन (e-Sign) करके पेंशनरों के जीवन प्रमाण पत्र को तुरंत प्रमाणित कर सकते हैं. दिव्यांग बच्चों की आजीवन पेंशन से जुड़े नियमों में बदलाव सरकार ने दिव्यांगों को मिलने वाली आजीवन पारिवारिक पेंशन के प्रावधानों में भी जरूरी संशोधन किए हैं. नए नियमों के मुताबिक, अब दिव्यांगता का प्रमाण पत्र किसी सक्षम प्राधिकारी या विशेषज्ञों के मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किया हुआ ही पूरी तरह से मान्य होगा. अगर दिव्यांगता परमानेंट है, तो यह प्रमाण पत्र जिंदगी में सिर्फ एक बार ही प्रस्तुत करना होगा. लेकिन, अगर अस्थायी दिव्यांगता की स्थिति में हर 3 साल के बाद नया प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य होगा.

पार्सल-ओटीपी के नाम पर ठगी की कोशिश, कॉल पर गाली-गलौज और धमकी का मामला

पटना   बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को फोन पर अपशब्द कहने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने वाले शातिर बदमाश के खिलाफ पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पटना साइबर थाने की पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस के आधार पर धमकी देने वाले मुख्य आरोपी की पहचान कर ली है। मिली जानकारी के मुताबिक, जिस मोबाइल फोन से उपमुख्यमंत्री को धमकी भरे कॉल किए गए थे, पुलिस ने उसे शेखपुरा के एक घर में छापेमारी कर जब्त कर लिया है। हालांकि, पुलिस की भनक लगते ही धमकी देने वाला शातिर आरोपी फिलहाल फरार होने में कामयाब रहा, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। पार्सल और ओटीपी के नाम पर ठगी का प्रयास यह पूरी घटना सरकारी महकमे से लेकर आम जनता के बीच भारी चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, बदमाशों द्वारा सीधे सूबे के उपमुख्यमंत्री से ही पार्सल के नाम पर साइबर ठगी करने का प्रयास किया गया था। घटना वाले दिन डिप्टी सीएम को एक अनजान नंबर से कॉल आया और कॉलर ने उनसे कहा कि आपकी एक पार्सल बुकिंग आई है। जब उन्होंने साफ लहजे में कहा कि उनका कोई पार्सल बुक नहीं है और यह कहकर कॉल काट दिया, तो बदमाश ने उन्हें दोबारा फोन घुमा दिया। इस बार कॉलर ने बेहद शातिर अंदाज में कहा कि आपके नंबर पर एक ओटीपी गया है, उसे जल्दी दीजिए। जब डिप्टी सीएम ने फिर से मना कर दिया, तो अपराधी अपना आपा खो बैठा और फोन पर ही उनके साथ बदतमीजी व गाली-गलौज करते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की खुली चेतावनी दे डाली। साइबर डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने शुरू की जांच इस बेहद संवेदनशील मामले को लेकर उपमुख्यमंत्री के निजी सचिव वीरेंद्र कुमार ने बिना कोई वक्त गंवाए पटना के साइबर थाने में एक लिखित शिकायत देकर आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद हरकत में आई साइबर पुलिस की टीम ने जब मोबाइल लोकेशन को ट्रेस किया, तो उसके तार सीधे शेखपुरा जिले से जुड़े मिले। मामले की पुष्टि करते हुए साइबर डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि जब्त किए गए मोबाइल फोन की कड़ाई से तकनीकी छानबीन की जा रही है। शुरुआती जांच में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस मोबाइल का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर लोगों से ऑनलाइन साइबर ठगी करने के लिए किया जा रहा था। डीएसपी ने साफ कहा है कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरे सिंडिकेट और इसकी असली सच्चाई का पूरी तरह से पर्दाफाश हो सकेगा।

‘पंचायत’ फेम रघुबीर यादव ने साझा किया जीवन संघर्ष, थिएटर से फिल्मी सफर तक की कहानी

पर्दे पर सच्चाई से किरदार में ढलने वाले कलाकार बहुत गिने-चुने होते हैं. एक्टर रघुबीर यादव उन्हीं में से एक हैं. पॉपुलर सीरीज 'पंचायत' में उनके शानदार और दिल को छू लेने वाले 'प्रधान जी' के किरदार को लोगों ने काफी पसंद किया. उनकी सादगी ने हर किसी का दिल जीत लिया. लेकिन पहचान हासिल करना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं रहा. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफी मुश्किलों का सामना किया है. एक्टर का छलका दर्द हाल ही में एक्टर ने अपने लंबे और चैलेंजिंग सफर को याद किया. उन्होंने बताया कि एक समय पर वो दिन के महज ढाई रुपये पर गुजारा करते थे. कई दफा भूखे सोते थे मीडिया  बातचीत में उन्होंने अपने मुश्किल दिनों पर कहा- एक्टिंग आसान नहीं है, लेकिन इसमें मजा आता है. लोग इसे स्ट्रगल कहते हैं, लेकिन मैंने अपनी जिंदगी को कभी संघर्ष नहीं माना. मैंने कड़ी मेहनत की और इस पूरे प्रोसेस को एन्जॉय किया. उन्होंने ये भी कहा कई स्टार्स 'संघर्ष' शब्द को अक्सर ग्लोरिफाई करके दिखाते हैं. इसपर उन्होंने अपनी राय देते हुए कहा- हर आर्ट वर्क में प्रैक्टिस की जरूरत होती है. चाहे आप संगीतकार हों, डांसर हों या एक्टर.. आपको सीखते रहना पड़ता है और रिहर्सल करनी पड़ती है. आज भी मुझे लगता है कि अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है. मेरे लिए, जिंदगी हमेशा एक स्कूल रही है, सीखने की एक जगह. थिएटर जर्नी की कैसे हुई शुरुआत? उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उनकी एकेडमिक जर्नी ने शुरुआत में ही एक ऐसा मोड़ लिया, जिसने आगे चलकर उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी. एक सिक्योर फ्यूचर की उम्मीद में उन पर साइंस पढ़ने का दबाव था, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हो गया था कि उनके लिए बोर्ड परीक्षाएं पास करना नामुमकिन है. इस एहसास ने उन्हें एक बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया था. इस बारे में बात करते हुए वो बोले- मुझे पहले से ही पता था कि मैं फेल होने वाला हूं. परीक्षा के नतीजों से घबराकर मैंने अपने एक दोस्त के साथ घर छोड़ने का फैसला किया और ललितपुर चला गया. वहां एक्टर अन्नू कपूर के पिता की एक थिएटर कंपनी परफॉर्म कर रही थी. ढाई रुपये पर किया गुजारा इस तरह थिएटर में उनकी शुरुआत हुई. मदनलाल कपूर की इस कंपनी ने उन्हें ढाई रुपये रोजाना पर रख लिया था. हालांकि, वो मामूली रकम भी हमेशा समय पर या पूरी नहीं मिलती थी. उन्होंने बताया- मुझे रोजाना ढाई रुपये मिलते थे, लेकिन कभी-कभी इससे भी कम मिलते थे. हम आटा और टमाटर खरीद लेते थे, फिर रोटी-चटनी खाकर गुजारा करते थे. जब कोई खाना चुरा लेता था और खाने को कुछ नहीं बचता था, तब हालात और भी ज्यादा मुश्किल हो जाते थे. 20 साल तक गांव से बनाई दूरी एक्टर ने बताया कि इसी दौरान उन्होंने उर्दू सीखी, अपनी प्रोनन्सिएशन सुधारी और खुद को संगीत और थिएटर में पूरी तरह डुबो दिया. उन्होंने उस दौर के काफी भावुक पल को भी याद किया. उन्होंने बताया कि घर छोड़ने के बाद उन्होंने अपने पिता को लेटर लिखकर भरोसा दिलाया था कि वो कभी भी परिवार का नाम बदनाम नहीं करेंगे. 6 महीने बाद वो कुछ समय के लिए घर लौटे थे, लेकिन एक रिश्तेदार के ताने ने उनकी राह फिर से बदल दी. रिश्तेदार ने उन्हें ताना मारते हुए कहा था- हमें लगा था कि अब तुम सीधे सिनेमा के पर्दे पर ही दिखोगे. ये सुनकर उन्हें इतनी शर्मिंदगी महसूस हुई कि वो उसी रात दोबारा घर छोड़कर चले गए. इसके बाद वो करीब 20 साल तक अपने गांव से दूर रहे.

जोरहाट एयरबेस हादसा: AN-32 विमान दुर्घटना में भोजपुर के अग्निवीर दानिश आलम शहीद

 कोईलवर (आरा)  असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर शनिवार को भारतीय वायु सेना का एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड अंतर्गत कायमनगर गांव निवासी अग्निवीरवायु दानिश आलम वीरगति को प्राप्त हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही गांव और परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। बताया जा रहा है कि दुर्घटना में वायु सेना के दो अधिकारियों और दो अग्निवीरवायु समेत कुल पांच जवानों की मौत हुई है। 22 वर्षीय दानिश आलम, मोहम्मद फारूक आलम और अख्तरी बेगम के इकलौते पुत्र थे। उनके पिता गीधा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। बचपन से ही देश सेवा का था सपना परिवार में दो बड़ी बहनें शगुफ्ता परवीन और गजाला परवीन हैं, जिनमें एक की शादी हो चुकी है। स्वजनों ने बताया कि दानिश का बचपन से ही सैनिक बनकर देश सेवा करने का सपना था। अग्निवीरवायु में चयन के बाद उन्होंने 29 जून 2025 को बिहटा एयर फोर्स स्टेशन में योगदान दिया था। इसके बाद तीन जुलाई को प्रशिक्षण के लिए बेलगांव (कर्नाटक) भेजे गए थे। पिछले वर्ष अक्टूबर से वे जोरहाट में तैनात थे। परिवार के अनुसार, दानिश 23 मई को छुट्टी लेकर घर आए थे और 30 मई को वापस ड्यूटी पर लौट गए थे। अब उनके शहीद होने की खबर से पूरा परिवार सदमे में है। 30 मई को ही ड्यूटी पर लौटे थे दानिश भारतीय वायु सेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, हादसे में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा और अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत भी वीरगति को प्राप्त हुए हैं। दानिश की शहादत की खबर मिलते ही कायमनगर गांव में मातम पसरा हुआ है। गांव के लोग और रिश्तेदार लगातार उनके घर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधा रहे हैं।

जापानी मियाजाकी आम की खेती पूर्वांचल में, 2 लाख रुपये किलो तक पहुंची कीमत

लखनऊ  यूपी के पूर्वांचल की धरती पर अब दुनिया का सबसे महंगा आम उगेगा। आजमगढ़ में जापान के प्रसिद्ध मियाजाकी आम का मदर प्लांट तैयार हो रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र लैदौरा इस आम के पेड़ से कलम तैयार करने में जुटा है। ऐसे में दो लाख रुपये किलो वाला मियाजाकी आम जिले की पहचान बनेगा। वहीं सोनभद्र में भी एक व्यक्ति ने अपने बाग में मियाजाकी आम का पौधा लगाया है। जापान का प्रसिद्ध मियाजाकी आम दुनिया का सबसे महंगा आम है। स्वाद और खुशबू में लाजवाब होने के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जापानी मियाजाकी आम की कीमत दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम है। स्थानीय बाजार में भी इसकी कीमत 70 हजार रुपये से दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक रहती है। कृषि विज्ञान केंद्र लैदौरा में मियाजाकी आम के पौधे तैयार किए गए हैं। इनका प्रयोग मदर प्लांट के रूप में किया जा रहा है। उद्यान वैज्ञानिक मदर प्लांट के पौधों से कलम तैयार कर मियाजाकी आम के पौधे लोगों को मुहैया कराएंगे। कलम से तैयार पौधे तीन से पांच साल में फल देने लगेंगे जबकि बीज वाले पौधे लगाने पर फल आने में करीब 10 साल का समय लग जाता है। लाल-जामुनी और हरे रंग का मिश्रण है खासियत मियाजाकी की पैदावार सोनभद्र के छपका गांव में भी हो रही है। गहरा लाल-जामुनी और हरे रंग का मिश्रण इस आम की खासियत होती है। वरिष्ठ अधिवक्ता उमेशधर दुबे ने पिछले साल 15 अगस्त को इसका पौधा लगाया था। इसका छिलका चमकदार होता है और स्वाद में बहुत मीठा होता है। कब लगा सकते हैं पौधे लैदौरा के प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि दुनिया के सबसे महंगे आम जापानी मियाजाकी का पौधा तैयार किया गया है। पुणे की नर्सरी से लाकर इसे लगाया गया है। इसका प्रयोग मदर प्लांट के तौर पर किया जाएगा। कलम से तैयार पौधों को लगाने का सही समय जुलाई से सितंबर तक होता है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में है नर्सरी अभी तक पश्चिम बंगाल के कोलकाता की एग्रो नर्सरी, ग्रीनरी नर्सरी ठाकुरनगर और महाराष्ट्र के पुणे स्थित नर्सरी ही इस जापानी मियाजाकी आम के पौधे उपलब्ध कराती हैं। जापानी मियाजाकी आम का एक पौधा 1500 से 5000 रुपये तक में मिलता है। मध्य प्रदेश के जबलपुर और ओडिशा में भी इसकी खेती होने लगी है। आजमगढ़ के चार ब्लॉकों रानी की सराय, मिर्जापुर, अहरौला और पवई में प्रमुखता से आम की खेती होती है। इन चार ब्लॉकों के करीब 12 प्रतिशत क्षेत्रफल में आम के बाग मौजूद हैं।

‘माइकल’ ने रचा इतिहास: बनी दुनिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली म्यूजिक बायोपिक

  माइकल जैक्सन पर बनी बायोपिक 'माइकल' दुनियाभर में जबरदस्त कमाई कर रही है। इस फिल्म ने एक बड़ा रिकॉर्ड तोड़ा है। यह फिल्म ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली म्यूजिक बायोपिक बन गई है। इसने 'बोहेमियन रैप्सोडी' को पीछे छोड़ दिया है। 'माइकल' का कुल कलेक्शन 'माइकल' 24 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। रिलीज के बाद से इस फिल्म ने दुनिया भर में 911.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कमाई की है। इसने 'बोहेमियन रैप्सोडी' की कुल ग्लोबल कमाई (910.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स के मर्जर से बढ़ेगा कंपटीशन, कंज्यूमर को होगा फायदा; एजेंसी ने निकाले ये निष्कर्ष घरेलू बॉक्स ऑफिस पर कर रही कमाल दुनिया भर में मिली सफलता के अलावा, 'माइकल' घरेलू बॉक्स ऑफिस पर भी अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बायोपिक बन गई है। फिल्म की इस नई कामयाबी ने प्रोड्यूसर ग्राहम किंग के लिए एक और उपलब्धि जोड़ दी है। उन्होंने ऑस्कर जीतने वाली 'बोहेमियन रैप्सोडी' को भी प्रोड्यूस किया था। फिल्म की स्टारकास्ट 'माइकल' के निर्देशक एंटोनी फुक्वा हैं। फिल्म में माइकल जैक्सन के भाई जर्मेन जैक्सन के बेटे जाफर जैक्सन मुख्य भूमिका में हैं। जूलियानो क्रू वाल्डी ने युवा माइकल जैक्सन का किरदार निभाया है। क्या है फिल्म की कहानी? यह फिल्म 'किंग ऑफ पॉप' कहे जाने वाले दिवंगत माइकल जैक्सन के जीवन और करियर की कहानी दिखाती है। यह कहानी 1988 में खत्म होती है और इसमें जैक्सन के ग्लोबल सुपरस्टार बनने के सफर पर फोकस किया गया है।  

नीट री-एग्जाम के लिए पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, परीक्षार्थियों को मिलेगा फ्री बस सफर का लाभ

चंडीगढ़ नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट) की दोबारा होने वाली परीक्षा में देने वाले अभ्यर्थी और एक अटेंडेंट पंजाब रोडवेज की बसों में मुफ्त सफर कर सकेंगे। 20 जून से 22 जून तक पंजाब रोडवेज की सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी। यह घोषणा बुधवार को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में हुई पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक में की गई। पंजाब कैबिनेट के फैसले के अनुसार 21 जून को आयोजित होने वाले नीट री-एग्जाम में शामिल होने वाले सभी छात्र पंजाब रोडवेज की बसों में फ्री यात्रा कर सकेंगे। यह सुविधा परीक्षा से पहले और बाद की यात्रा को ध्यान में रखते हुए तीन दिनों तक उपलब्ध रहेगी। एक अभिभावक को भी मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का निर्णय लिया है। इससे खासकर दूर-दराज के इलाकों से परीक्षा देने आने वाले छात्रों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी। परीक्षा रद्द होने और दोबारा आयोजित किए जाने के बाद कई छात्रों ने यात्रा खर्च और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में आने वाली दिक्कतों को लेकर चिंता जताई थी। छात्रों की इन्हीं समस्याओं और सुझावों को देखते हुए पंजाब सरकार ने यह विशेष व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। मुफ्त सफर सुविधा का वित्तीय बोझ ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा उठाया जाएगा और वित्त विभाग द्वारा इसकी भरपाई की जाएगी। लेक्चरार कैडर के 1,013 पद भरे जाएंगे, आयु सीमा में पांच साल की छूट पंजाब मंत्रिमंडल ने एजुकेशन रिक्रूटमेंट डायरेक्टोरेट के माध्यम से लेक्चरार कैडर (ग्रुप-बी) के बैकलॉग और नए सृजित पदों सहित 1,013 मंजूरशुदा रिक्त पदों को भरने की भी मंजूरी दे दी। कैबिनेट ने स्कूल शिक्षा विभाग में लेक्चरार कैडर के पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए ऊपरी आयु सीमा में पांच साल की एकमुश्त छूट भी दी है। इस कदम का उद्देश्य नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना और सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। लोक निर्माण विभाग में भरे जाएंगे जेई के 156 पद एक और अहम फैसला लेते हुए मंत्रिमंडल ने लोक निर्माण विभाग में 156 जूनियर इंजीनियरों की भर्ती को मंजूरी दे दी है। इसमें जूनियर इंजीनियर (सिविल) के 127 पद और जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) के 29 पद शामिल हैं। इस भर्ती से विभाग का कामकाज और सुचारू बनेगा और प्रभावी योजना, निगरानी और कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी। ये सभी पद पंजाब अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड (पी.एस.एस.एस.बी.) द्वारा सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाएंगे। पटियाला, जालंधर में गीले कचरे पर आधारित सी.बी.जी. प्रोजेक्ट को मंजूरी कचरे के स्थायी प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने नगर निगम पटियाला और नगर निगम जालंधर में 100 टी.पी.डी. की क्षमता वाले गीले कचरे पर आधारित कंप्रेस्ड बायोगैस प्रोजेक्टों को मंजूरी दे दी है और ये प्रोजेक्ट नामांकन के आधार पर एच.पी.सी.एल. रीन्यूएबल एंड ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एच.पी.आर.जी.ई.) को सौंपे जाएंगे। इस प्रोजेक्ट के तहत गीले कचरे की वैज्ञानिक ढंग से प्रोसेसिंग की जाएगी। वहीं, पंजाब के औद्योगिक माहौल को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण फैसले में मंत्रिमंडल ने औद्योगिक और व्यापार विकास नीति-2026 और पंजाब उद्योग क्रांति पहल के तहत विभिन्न सेक्टोरल नीतियों में संशोधनों को भी मंजूरी दी गई है।

एनडीए से निकलकर आसमान की उड़ान, दादरी की दो बेटियां उड़ाएंगी लड़ाकू विमान

चरखी दादरी हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छपार गांव निवासी इशिता सांगवान व भागवी निवासी मीनाक्षी ने देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने साढ़े तीन साल की ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है और हैदराबाद में आज दोनों कमीशन प्राप्त करेंगी। उनकी पहली पोस्टिंग तेलंगाना के बीदर सेंटर में हुई है और अब वो देश के लिए लड़ाकू विमान उड़ाएंगी। खास बात यह है कि एनडीए के जरिए पहली बार देश की दो बेटियां फाइटर पायलट बनी हैं। इशिता सांगवान के पिता चरण सिंह सांगवान ने बताया कि वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया था कि बेटियां भी एनडीए के जरिए सेना में जा सकती हैं। इससे पहले इशिता का सपना सिविल सर्विसेज में जाना था, लेकिन कोर्ट के इस निर्णय के बाद बेटी ने फैसला बदल दिया। उस दौरान इशिता 12वीं की परीक्षा की तैयारियों में जुटी थीं कोर्ट के इस निर्णय के एक माह बाद ही एनडीए की लिखित परीक्षा थी और इशिता ने परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। 6 अगस्त 2022 को ज्वाइनिंग लेटर घर पहुंचा और 9 अगस्त को इशिता ने पुणे जाकर ज्वाइन कर लिया। पिता रविंद्र भी है सेना में है मीनाक्षी के पिता रविंद्र का भी सेना से जुड़ाव रहा है और उनकी बेटी भी एयरफोर्स में जाकर देश सेवा करेगी। मीनाक्षी की इस उपलब्धि पर गांव भागवी में खुशी का माहौल है। सरपंच प्रमिला कुमारी ने बताया कि रविवार को होनहार बेटी के सम्मान में ग्राम पंचायत की ओर से सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। जिसकी तैयारियां चल रही हैं। बेटी इस उपलब्धि पर पूरे गांव को नाज है। उन्होंने बताया कि मीनाक्षी एनडीए के जरिए सेना में जाने वालीं 19 बेटियों के बैच में शामिल थीं। पुणे के खड़गवासला में उन्होंने तीन साल की ट्रेनिंग पूरी की। ट्रेनिंग पूरी होने पर मीनाक्षी को एयरफोर्स विंग मिली। इसके बाद उन्होंने हैदराबाद में छह माह की फाइटर प्लेन उड़ाने की ट्रेनिंग ली, जो हाल ही में पूरी हुई है। यह ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वो हैदराबाद में 13 जून को कमीशन प्राप्त करेंगी। इसके लिए स्वजन हैदाराबाद पहुंच चुके हैं वहीं इशिका के पिता चरण सिंह सांगवान, मां अनीता देवी समेत बहन व भाई भी मौजूद रहेंगे। बेटी की कामयाबी ने सिर फख्र से ऊंचा किया इशिता के पिता चरण सिंह व मां अनीता देवी और मीनाक्षी के पिता रविंद्र का कहना है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। उन्हें आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। दोनों बेटियों ने देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनकर उनका सिर से फक्र से ऊंचा कर दिया है। जून 2025 में इशिता पहुंची थीं पैतृक गांव इशिता सांगवान पुणे में तीन साल की ट्रेनिंग पूरी कर जून 2025 में पैतृक गांव छपार पहुंची थीं। उस दौरान वो सीधे गांव के बाबा जमुना दास मंदिर पहुंची थीं और वहां मत्था टेक कर महंत से आशीर्वाद लिया था। इशिता की उम्र फिलहाल करीब साढ़े 22 साल वर्ष है। माता-पिता का कहना है छुट्टी पर आते ही इशिता दोबारा गांव जाकर स्वजनों व ग्रामीणों से मिलेगी। इशिता व मीनाक्षी बोलीं: असंभव कुछ भी नहीं इशिता सांगवान व मीनाक्षी ने अन्य बेटियों को भी एक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि बेटियां बड़ा लक्ष्य निर्धारित करें और फिर पूरी शिद्दत से उसे पाने के लिए मेहनत करने में जुट जाएं। फिर देखेंगी कि कुछ भी असंभव नहीं है। लक्ष्य प्राप्ति के बाद खुशी मिलती है और ताउम्र उसका फक्र रहता है।  

स्कूलों की प्रार्थना सभा में नया नियम, राष्ट्रगान के साथ राज्यगीत और वैदिक मंत्रों का होगा पाठ

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने 2026-27 सत्र से स्कूलों में राष्ट्रगान, राज्यगीत, वैदिक मंत्र, सरस्वती वंदना और भोजन मंत्र को शामिल करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों और अनुशासन को बढ़ावा देना है। शिक्षा सत्र 2026-27 से लागू होगी नई व्यवस्था छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में शिक्षा सत्र 2026-27 से नई सांस्कृतिक एवं मूल्य आधारित व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत विद्यालयों की दैनिक गतिविधियों में राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जुड़े कार्यक्रमों को नियमित रूप से शामिल किया जाएगा। प्रार्थना सभा में जुड़ेगा सांस्कृतिक और प्रेरणात्मक आयाम नई व्यवस्था के अनुसार सुबह की प्रार्थना सभा केवल राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और देश के महापुरुषों की जीवनी का वाचन भी कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर पर ही भारतीय परंपराओं, आदर्श व्यक्तित्वों और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जाना आवश्यक है। इससे छात्रों में नैतिक शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। भोजन के समय होगा सामूहिक भोजन मंत्र विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के दौरान भी नई पहल लागू की जाएगी। छात्रों को भोजन ग्रहण करने से पहले सामूहिक रूप से भोजन मंत्र का पाठ कराया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे विद्यार्थियों में भोजन के प्रति सम्मान, अनुशासन और सामूहिकता की भावना विकसित होगी। यह व्यवस्था सभी स्कूलों में समान रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। तीन सत्रों में बंटा शेड्यूल विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्कूलों में अब प्रतिदिन तीन अलग-अलग समय पर निर्धारित क्रम में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रातःकालीन सत्र स्कूल प्रारंभ होने पर सुबह की प्रार्थना सभा में एक तय क्रम के अनुसार ये प्रस्तुतियां अनिवार्य होंगी। विद्यालय प्रारंभ होने पर प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में क्रमशः राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीपमंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र तथा महापुरुषों की जीवनी का वाचन कराया जाएगा। इसी प्रकार मध्यान्ह भोजन के समय विद्यार्थियों द्वारा भोजन मंत्र का सामूहिक पाठ किया जाएगा। वहीं विद्यालय की छुट्टी के समय संध्या सत्र में राज्यगीत, गायत्री मंत्र एवं शांति मंत्र का सामूहिक वाचन कराया जाएगा।  जानें क्या है उद्देश्य? स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि इन गतिविधियों के नियमित और प्रभावी संचालन से छात्रों में न केवल राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना मजबूत होगी, बल्कि उनके भीतर नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का भी सही विकास होगा। यह पहल विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय मूल्यों से परिचित कराने में मील का पत्थर साबित होगी। लापरवाही पर होगी कार्रवाई शासन ने स्पष्ट किया है कि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को प्रतिदिन स्कूलों का औचक निरीक्षण करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि इन नियमों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं। निर्धारित क्रम में अवहेलना पाए जा छुट्टी के समय राज्यगीत और शांति मंत्र विद्यालयों में दिन की समाप्ति भी अब एक निर्धारित सांस्कृतिक क्रम के तहत होगी। छुट्टी के समय विद्यार्थियों द्वारा राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का सामूहिक गान किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान और राज्य की गौरवशाली परंपराओं से जोड़ना बताया जा रहा है। इस पहल को शिक्षा और संस्कारों के समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। संस्कृति और शिक्षा के समन्वय पर जोर रायपुर में इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराएं देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके अनुसार विद्यालयों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राज्यगीत और वैदिक मंत्रों को शामिल करने से बच्चों के व्यक्तित्व विकास और संस्कार निर्माण में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने इस निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक पुरंदर मिश्रा ने पूर्ववर्ती सरकारों पर सांस्कृतिक मूल्यों की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज विश्व के कई देशों में भारतीय संस्कृति, योग और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है, ऐसे समय में राज्य की शिक्षा व्यवस्था में इन मूल्यों को स्थान देना एक स्वागतयोग्य पहल है। उन्होंने इस निर्णय के लिए नरेंद्र मोदी,विष्णु देव साय और गजेन्द्र यादव के प्रति आभार भी व्यक्त किया। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर फोकस शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान का केंद्र नहीं होते, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक मूल्यों के विकास का भी प्रमुख माध्यम होते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ सांस्कृतिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखी जा रही है। आने वाले शिक्षा सत्र से यह व्यवस्था राज्यभर के स्कूलों में लागू होने के बाद शिक्षा और संस्कार के संतुलित मॉडल की नई तस्वीर प्रस्तुत कर सकती है। स्कूल समाप्ति पर राज्यगीत और शांति मंत्र का गायन छुट्टी के समय स्कूलों में राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का गायन अनिवार्य किया गया है, जिससे दिन का समापन सकारात्मक वातावरण में हो सके। कड़ाई से लागू होंगे नियम, लापरवाही पर कार्रवाई तय शिक्षा विभाग का मानना है कि इन गतिविधियों से छात्रों में राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना मजबूत होगी। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से औचक निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी नियमों का पालन हो।यदि किसी स्कूल में इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य पर कार्रवाई की जा सकती है। 16 जून से खुलेंगे स्कूल, तैयारियों के सख्त निर्देश Chhattisgarh में सभी स्कूल 16 जून 2026 से खुलेंगे। इसके साथ ही शाला प्रवेश उत्सव 2026 के आयोजन के लिए भी विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।शिक्षकों की शत प्रतिशत उपस्थिति, पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता, टाइम टेबल की तैयारी और स्कूलों की साफ सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

आर्यभट्ट पर टिप्पणी से घिरा Amazon, विज्ञापन के खिलाफ हिंदू संगठन ने उठाई कानूनी कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली  ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन (Amazon) के एक विज्ञापन को लेकर हिंदू संगठन ने आपत्ति जताई है. हिंदू संगठन का कहना है कि अमेजन के एक एड में प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का आपत्तिजनक ढंग से उपहास उड़ाया गया. इस मामले में कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा गया है. सर्वोच्च न्यायालय में कार्यरत और हिंदू जनजागृति समिति की अधिवक्ता अमिता सचदेवा द्वारा भेजी गई इस नोटिस में मांग की गई है कि अमेजन 48 घंटे के भीतर भारतीय जनता से सार्वजनिक माफी मांगे और इस विवादित विज्ञापन को तुरंत वापस ले. मांग पूरी न होने पर अमेजन के विरुद्ध फौजदारी और दीवानी मुकदमा दर्ज किया जाएगा, ऐसा स्पष्ट अल्टीमेटम दिया गया है।  हिंदू संगठन के मुताबिक इस विज्ञापन को लेकर देश भर के राष्ट्रप्रेमी नागरिकों में भारी आक्रोश है और सोशल मीडिया पर ‘अमेज़न का बहिष्कार करो' (#Boycott_Amazon) अभियान तेजी से ट्रेंड कर रहा है।  आयभट्ट जैसी वेशभूषा में मजाकिया तंज यह विवाद ‘अमेज़न नाऊ' (Amazon Now) के प्रचार अभियान से जुड़ा है. जिसमें आर्यभट्ट की वेशभूषा में एक व्यक्ति को ‘‘जीरो डिलीवरी चार्ज खोजने वाले वैज्ञानिक'' के रूप में बेहद मजाकिया और व्यंग्यात्मक ढंग से पेश किया गया है. नोटिस में कहा गया है कि जिस महान ऋषि-तुल्य वैज्ञानिक ने दुनिया को ‘शून्य' की अमूल्य अवधारणा दी और वैश्विक स्तर पर भारत का वैज्ञानिक परचम लहराया, उन्हें केवल व्यावसायिक लाभ के लिए एक ‘कॉर्पोरेट मस्कट' बनाकर उनकी क्रूर थट्टा उड़ाना भारत की महान ज्ञान-विरासत और राष्ट्रीय अस्मिता का जानबूझकर किया गया अपमान है।  पहले भी अमेजन के एड विवादों में आए नोटिस में ध्यान दिलाया गया है कि व्यावसायिक लाभ के लिए भारतीय संस्कृति और हिंदू प्रतीकों का अपमान करने का अमेजन का यह पुराना इतिहास रहा है. इससे पहले भी कंपनी के प्लेटफॉर्म पर हिंदू देवी-देवताओं (भगवान गणेश और माता लक्ष्मी) के चित्रों वाले पायदान, टॉयलेट सीट कवर बेचे जाने और ‘तांडव' वेब सीरीज के माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले सामने आ चुके हैं, जिसके लिए भारी विरोध के बाद कंपनी को माफी मांगनी पड़ी थी।  केवल व्यावसायिक मुनाफे के लिए भारतीय महापुरुषों का जानबूझकर अपमान करने का यह कृत्य संशोधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (धार्मिक भावनाएं आहत करना), धारा 196 व 197 (वैमनस्य फैलाना और राष्ट्रीय अखंडता को बाधित करना) तथा धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने का इरादा) के तहत सीधे आपराधिक और दीवानी कार्रवाई के योग्य है।  48 घंटे में विज्ञापन हटाकर मांगे माफी नहीं तो केस इस पृष्ठभूमि में हिंदू जनजागृति समिति ने अमेज़न को अपनी शर्तें पूरी करने के लिए 48 घंटे का समय दिया है. इसके तहत ‘आर्यभट्ट – अमेज़न नाऊ' विज्ञापन को यु-ट्यूब, इन्स्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और टीवी सहित सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से स्थाई रूप से हटाना होगा. साथ ही, कंपनी को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल, वेबसाइट के होमपेज और देश के अग्रणी समाचार पत्रों में हिंदू समाज और भारतीय संस्कृति से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगनी होगी, तथा भविष्य में राष्ट्रीय प्रतीकों या महापुरुषों का अपमान न करने का एक लिखित वचन पत्र भी देना होगा. अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि दी गई अवधि में कार्रवाई न होने पर अदालत में मुकदमा दायर किया जाएगा।