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14 जून 2026 का राशिफल: किस्मत का मिलेगा साथ, इन राशि वालों की चमकेगी नौकरी-कारोबार में किस्मत

मेष आज विद्यार्थियों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए दिन अच्छा है। लेखक, कवि और कलाकारों को सफलता मिल सकती है। सेहत ठीक रहेगी, लेकिन भावनाओं में बहकर कोई फैसला न लें। प्रेम और संतान पक्ष थोड़ा कमजोर रह सकता है। व्यापार अच्छा चलेगा। पीली वस्तु पास रखें। वृषभ आज धन लाभ के अच्छे योग बन रहे हैं। परिवार में खुशखबरी मिल सकती है। सेहत अच्छी रहेगी। प्रेम और संतान से जुड़ी बातें आपके पक्ष में रहेंगी। व्यापार में भी फायदा होगा। लाल वस्तु अपने पास रखें। मिथुन आज मन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी। जरूरत के अनुसार चीजें जीवन में मिलती जाएंगी। प्रेम और संतान से थोड़ी दूरी महसूस हो सकती है। व्यापार अच्छा रहेगा। लाल वस्तु पास रखें। कर्क आज किस्मत आपका पूरा साथ देगी। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के योग बन रहे हैं। जो काम अटके हुए थे, उनमें गति आएगी। सेहत पहले से बेहतर रहेगी। प्रेम और संतान पक्ष भी मजबूत रहेगा। व्यापार में लाभ के संकेत हैं। कुल मिलाकर दिन शुभ रहेगा। पीली वस्तु अपने पास रखें। सिंह आज थोड़ा संभलकर चलने की जरूरत है। परिस्थितियां आपके पक्ष में नहीं दिख रही हैं। किसी भी तरह का जोखिम लेने से बचें। बेवजह विवाद या परेशानी में फंस सकते हैं। प्रेम और संतान की स्थिति सामान्य रहेगी। व्यापार ठीक रहेगा, लेकिन सावधानी जरूरी है। पीली वस्तु का दान करें। कन्या आज घर-परिवार में थोड़ी नोकझोंक हो सकती है, लेकिन भूमि, मकान या वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं। सेहत अच्छी रहेगी। प्रेम और संतान से खुशी मिलेगी। व्यापार में भी लाभ होगा। बस घरेलू तनाव से बचने की कोशिश करें। पीली वस्तु का दान करें। तुला आज व्यापार की स्थिति अच्छी रहेगी। सरकारी कामों में सफलता मिल सकती है। कोर्ट-कचहरी के मामलों में जीत के संकेत हैं। सेहत, प्रेम और व्यापार तीनों ही अच्छे रहेंगे।लाल वस्तु का दान करें। वृश्चिक आज बड़ों का आशीर्वाद मिलेगा। ज्ञान और समझ में बढ़ोतरी होगी। सेहत थोड़ी मध्यम रह सकती है, इसलिए ध्यान रखें। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में सुधार रहेगा। व्यापार में भी लाभ के संकेत हैं। भगवान शिव का जलाभिषेक करें। धनु आज आय के नए स्रोत बन सकते हैं। पुराने कामों से भी पैसा मिलने के योग हैं। सेहत अच्छी रहेगी। प्रेम और संतान से सुख मिलेगा। व्यापार में लाभ होगा। हरी वस्तु पास रखें। मकर आज मन थोड़ा परेशान और बेचैन रह सकता है। खर्च बढ़ सकते हैं। बेवजह चिंता करने से बचें। हालांकि प्रेम, संतान और व्यापार से जुड़ी स्थिति ठीक रहेगी। मां काली को प्रणाम करते रहें। कुंभ आज आपका पराक्रम रंग लाएगा। मेहनत का पूरा फल मिलेगा। व्यापार की स्थिति मजबूत होगी। परिवार और अपनों का सहयोग मिलेगा। सेहत अच्छी रहेगी। प्रेम और संतान का साथ मिलेगा। पीली वस्तु का दान करें। मीन आज जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बीतेगा। मन खुश रहेगा और दिन कुछ हद तक छुट्टी जैसा महसूस होगा। नौकरी, प्रेम, संतान, सेहत और व्यापार- हर क्षेत्र में स्थिति काफी अच्छी रहेगी। सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी। बजरंगबली को प्रणाम करें।

केंद्र सरकार ने परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में किया अधिसूचित

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार द्वारा विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के विकास के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से जशपुर के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे जशपुर जिले को इस परियोजना के माध्यम से पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इससे क्षेत्र की जनता को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलने के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों, पर्यटन संभावनाओं और सांस्कृतिक वैभव से समृद्ध जशपुर इस रेल परियोजना के माध्यम से देश के प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक केंद्रों से बेहतर रूप से जुड़ सकेगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, व्यापार, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे तथा वनांचल क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास को निरंतर प्राथमिकता दी जा रही है। रेल, सड़क, ऊर्जा और अन्य आधारभूत अधोसंरचना परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना इसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है। मुख्यमंत्री  साय ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव का समस्त प्रदेशवासियों की ओर से हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना जशपुर और आसपास के क्षेत्रों की प्रगति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला सिद्ध होगी।

रतलाम के डायल-112 हीरोज ट्रेन से गिरकर घायल हुए युवक को त्वरित सहायता देकर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  रतलाम जिले के थाना रावटी क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता एवं संवेदनशील कार्यवाही से ट्रेन से गिरकर घायल हुए एक युवक को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। डायल-112 टीम की त्वरित सहायता से युवक को शीघ्र चिकित्सकीय सुविधा मिल सकी। 12 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना रावटी क्षेत्र अंतर्गत कोटड़ा गाँव के पास एक युवक ट्रेन से गिरकर घायल हो गया है तथा उसे तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना रावटी क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री बहादुर दांगी एवं पायलट श्री शाहिद अली ने मौके पर पहुंचकर पाया कि कोटड़ा गाँव के समीप ट्रेन से गिरने के कारण एक युवक घायल हो गया था। डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घायल युवक को एफआरव्ही वाहन की सहायता से सुरक्षित शासकीय अस्पताल रावटी पहुँचाया। समय पर मिली सहायता के कारण घायल युवक को शीघ्र चिकित्सकीय सुविधा प्राप्त हो सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता प्रदान करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ नागरिकों की सुरक्षा एवं जीवन  

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की बेटी पर अभद्र टिप्पणी करने वालों को सीएम की कड़ी चेतावनी, मामला संज्ञान में आते ही कराई गई एफआईआर

आजमगढ़  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की बेटी पर टिप्पणी करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पिछले दिनों कुछ लोगों ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री के खिलाफ गलत टिप्पणी की थी। जैसे ही यह मेरे संज्ञान में आया, मैंने तत्काल पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। बेटी के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्प्णी स्वीकार नहीं होनी चाहिए। हर बेटी का सम्मान होना चाहिए। हम उन संस्कार में पले-बढ़े हैं, जहां कहा जाता है कि गांव की बेटी-बहन, सबकी बेटी-बहन। अखिलेश यादव दूसरों को उपदेश देते हैं, वह अपने चेलों-चपाटों को भी उपदेश दें कि भाषा संयमित कर लें। उनके लोग बहन-बेटियों, बुजुर्गों, दिवंगत लोगों व वरिष्ठ नेताओं के प्रति कैसी टिप्पणी करते हैं, उन्हें अपने लोगों को संस्कारित करने की आवश्यकता है। अच्छा होगा कि उन्हें समझाएं, नहीं समझा सकते तो हमारे हवाले कर दें, हम समझा देंगे।  सीएम योगी शनिवार को आजमगढ़ में 955 करोड़ से अधिक लागत की 39 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के बाद जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों की मांग पर सीएम ने घोषणा की कि महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में उनकी भव्य अश्वारोही प्रतिमा लगेगी। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को पुरानी जेल को कन्वेंशन सेंटर के रूप में तैयार करने के लिए कार्ययोजना बनाने का भी निर्देश दिया।  बार-बार वोट पाने वाले भी आपके हितैषी नहीं  मुख्यमंत्री ने कहा कि आजमगढ़ का गौरवशाली इतिहास रहा है। ऋषि-मुनियों की साधना से पवित्र यह धरती साहित्यिक साधना का केंद्रबिंदु रही है। देश को स्वतंत्र कराने का जज्बा इस जनपद में रहा है। जिस जनपद में हस्तशिल्प, कारीगर, किसान, ऊर्जावान युवा हैं, वह जनपद पहचान के लिए क्यों मोहताज हुआ। यह प्रश्न/पीड़ा लेकर मैं बार-बार आजमगढ़ आता हूं। जिन्होंने हमें बांटा और विभाजित किया, वे लगातार आपका समर्थन पाते थे, लेकिन वे कभी आपके हितैषी नहीं थे। पहचान को मोहताज था आजमगढ़, आज सबका सम्मान सीएम ने कहा कि 2017 के पहले आजमगढ़ पहचान के लिए मोहताज था। तब यहां विश्वविद्यालय, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, हरिहरपुर में संगीत महाविद्यालय नहीं था। एयरपोर्ट भी ठीक से काम नहीं कर पा रहा था। आजमगढ़ की साड़ी और मुबारकपुर की ब्लैक पॉटरी को मंच नहीं मिल पा रहा था। अभी प्रदर्शनी में सबने अपने नई कहानी सुनाई। ब्लैक पॉटरी और साड़ी से जुड़े कारीगरों ने कहा कि जबसे यूपी में डबल इंजन की भाजपा सरकार आई,  तबसे हमारा कारोबार कई गुना बढ़ा है। हम भी पैसा कमा रहे हैं, परिवार और हमसे जुड़े लोग भी सम्मान का जीवनयापन कर रहे हैं। 2014 के पहले भ्रष्टाचार था भारत की पहचान  सीएम ने कहा कि नया भारत दुनिया को लोहा मनवा रहा है, जबकि 2014 के पहले भारत की पहचान भ्रष्टाचार के नाम पर होती थी। दुनिया में सम्मान नहीं था। लोग देश की सुरक्षा में सेंध लगाते थे, सरकार मौन रहती थी और दुश्मन आंख दिखाता था। नक्सलवाद था, गरीब की सुनवाई नहीं थी लेकिन आज पीएम मोदी के नेतृत्व में हमारी पीढ़ी नए भारत का दर्शन कर रही है। महाराजा सुहेलदेव ने आक्रांताओं को नाकों चने चबवाए सीएम ने कहा कि राष्ट्रनायक महाराजा सुहेलदेव ने विदेशी आक्रांताओं को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। भयभीत आक्रांता भारत की धरती पर नहीं आते थे,  लेकिन जब हम जाति, क्षेत्र, भाषा व परिवारवाद के नाम पर बंटने लगे तो मोहम्मद गोरी का हमला हुआ। महाराजा पृथ्वीराज चौहान ने उस कायर आक्रांता को 17 बार परास्त किया, वह हर बार माफी मांगता था। एक बार चूक हुई तो उसने धोखे से पृथ्वीराज चौहान को बंधक बना दिया, फिर उनके साथ जो व्यवहार किया, वह सबके सामने है। विश्वविद्यालय में महाराज सुहेलदेव की लगेगी अश्वारोही प्रतिमा  सीएम ने चेताया कि हम वह गलती बार-बार करते थे, जिसका परिमार्जन महाराज सुहेलदेव ने 1000 वर्ष पहले किया था, लेकिन बाद की पीढ़ी उनसे प्रेरणा नहीं ले पाई। बहराइच में आक्रांता सालार मसूद गाजी मियां के नाम पर आयोजन होता था, लेकिन हमने कहा कि किसी विदेशी आक्रांता को सम्मान नहीं मिलना चाहिए। आयोजन महाराजा सुहेलदेव के नाम पर होना चाहिए। नया भारत गुलामी के किसी भी प्रतीक को स्वीकार नहीं करेगा। अब बहराइच में महाराजा का भव्य स्मारक बन गया है। जब आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की बात आई तो मैंने कहा कि यह जरूर बनेगा। पीएम मोदी ने कहा कि आजमगढ़ में महाराज सुहेलदेव के नाम पर विश्वविद्यालय बने तो अति उत्तम होगा। मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों की मांग पर सीएम ने कहा कि विश्वविद्यालय में महाराज सुहेलदेव की भव्य अश्वारोही प्रतिमा भी लगेगी।  जितनी तेज गति, उतनी तेज प्रगति सीएम योगी ने कहा कि आजमगढ़ में आज एयरपोर्ट, पूर्वांचल एक्सप्रेस है। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज कहीं भी जाना हो फोरलेन की कनेक्टिविटी है। आज आजमगढ़ से एक घंटे में गोरखपुर, डेढ़ से दो घंटे में वाराणसी और ढाई घंटे में लखनऊ पहुंचते हैं। प्रगति का आधार गति होती है, जितनी तेज गति, उतनी तेज प्रगति। आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी व वाराणसी की साड़ी को एक जनपद-एक उत्पाद के माध्यम से मंच मिला है।  हरिहरपुर का संगीत घराना बढ़ा रहा शास्त्रीय संगीत की परंपरा मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिहरपुर का संगीत घराना शास्त्रीय संगीत की परंपरा को फिर से मंच प्रदान कर रहा है। निरहुआ जैसे कलाकार भोजपुरी की मिठास को दुनिया में पहुंचा रहे हैं। इस धरा पर वीर कुंवर सिंह ने 1857 में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए थे। यह साहित्यकार अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की धरती है।  हर गलत काम के लिए बदनाम किया जाता था आजमगढ़ सीएम ने पूछा कि हर आतंकी घटना में क्यों संजरपुर का नाम आता था। हर गलत काम के लिए आजमगढ़ को क्यों बदनाम किया जाता था, क्योंकि तब सरकार नकारात्मक सोच रखती थी, स्वार्थ के लिए युवाओं का दुरुपयोग करती थी। गरीब के लिए स्वास्थ्य, आवास, शौचालय, राशन की सुविधा नहीं थी। युवाओं की नौकरी को लेकर सौदेबाजी होती थी। बेटी की सुरक्षा, पढ़ाई, शादी के लिए सरकार की कोई स्कीम नहीं थी। निराश्रित महिलाओं, बुजुर्गों व दिव्यांगजनों को महज 300 रुपये पेंशन मिलती थी। वह भी छह महीने में एक बार आती थी और उसमें आधा पैसा कमीशनखोरी में चला जाता था। आज सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर स्नातक की … Read more

नैनो उर्वरकों से बढ़ रहा उत्पादन, मिट्टी संरक्षण को भी मिल रही मजबूती

रायपुर कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों के बढ़ते उपयोग से किसानों को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, जो कम मात्रा में अधिक दक्षता के साथ फसलों को आवश्यक पोषण उपलब्ध करा रहे हैं। सरगुजा जिले के ग्राम भगवानपुर के प्रगतिशील किसान  सत्यनारायण ने नैनो उर्वरकों के उपयोग से प्राप्त अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों से वे अपनी लगभग तीन एकड़ कृषि भूमि में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार इस तकनीक से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है तथा उत्पादन में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।  सत्यनारायण ने बताया कि नैनो उर्वरकों का उपयोग पर्णीय छिड़काव (फोलियर स्प्रे) के रूप में किया जाता है, जिससे पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं और उनका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है। इससे फसलों को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है तथा उत्पादन क्षमता में वृद्धि देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जबकि नैनो उर्वरकों के उपयोग से पोषक तत्वों का अनावश्यक अपव्यय कम होता है। इससे मिट्टी की उर्वरता और उत्पादक क्षमता को बनाए रखने में सहायता मिलती है, जो टिकाऊ कृषि के लिए महत्वपूर्ण है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरकों की उपयोग दक्षता अधिक होने के कारण किसानों को कम मात्रा में बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है। यही कारण है कि प्रदेश में किसानों का रुझान नैनो उर्वरकों की ओर लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण, प्रदर्शन और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। किसानों को नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी देकर उन्हें कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।  सत्यनारायण ने अन्य किसानों से भी नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग कर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ अपनी कृषि भूमि की उर्वरता को भी लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं। इससे खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य के लिए सुरक्षित बन सकती है।  

ज्ञान भारतम् मिशन में हो रहा है पाण्डुलिपियों का डिजिटल संरक्षण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मठ मंदिरों के साथ-साथ कई घरों में भी प्राचीन पाण्डुलिपियां सुरक्षित हैं। हमारी सांस्कृतिक स्मृतियां, ज्ञान, परम्पराएं, विज्ञान और दर्शन पाण्डुलिपियों के रूप में अभी तक विद्यमान हैं। इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। इस अमूल्य विरासत के संरक्षण, संवर्धन और दस्तावेजीकरण के लिए ज्ञान भारतम् मिशन की पहल राष्ट्रीय स्तर पर आरंभ की गई है। जिसके अंतर्गत वर्ष 1950 से पहले की पाण्डुलिपियों का डिजिटल रूप से संरक्षण किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत मंदिरों, मठों, आश्रमों, पुस्तकालयों और शैक्षणिक व शोध संस्थाओं के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों और घरों में ताड़पत्र, ताम्रपत्र, प्रस्तर, भोजपत्र, पोथियों आदि के रूप में विद्यमान पाण्डुलिपियों का संरक्षण होना है। प्रदेश के एतिहासिक और सांस्कृतिक व धार्मिक रूप से समृद्ध है। यहां के धार्मिक स्थलों के साथ-साथ कई परिवारों तथा व्यापारिक संस्थानों के पास भी पर्याप्त मात्रा में पाण्डुलिपियां विद्यमान हैं। भारत की ज्ञान परम्परा को सुरक्षित रखने के इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रदेशवासियों को प्रोत्साहित करना जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स वीसी में ज्ञान भारतम् मिशन के संबंध में यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में हुई बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई और अपर मुख्य सचिव संस्कृति  शिव शेखर शुक्ला उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि प्रदेश के जिलों में उपलब्ध पाण्डुलिपियों की अनुमानित संख्या 10 लाख 24 हजार 571 हैं। पाण्डुलिपियों के संरक्षण के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति द्वारा ज्ञान भारतम् मोबाइल एप के माध्यम से पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण और उनकी अपलोडिंग की जा रही है। इस मिशन के लिए भारत सरकार और प्रदेश के पुरातत्व विभाग द्वारा प्रत्येक जिले के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पाण्डुलिपि संरक्षण अभियान के लिए पाण्डुलिपि धारकों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें अभियान से जोड़ने के लिए जिला स्तर पर गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन गतिविधियों में शैक्षणिक संस्थानों और शोधार्थियों के भागीदारी सुनिश्चित की जाए।    

विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया आह्वान

वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से नवाचार व अनुसंधान को राष्ट्र निर्माण तथा जनकल्याण से जोड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत के पास विज्ञान, कृषि, चिकित्सा, उद्यम, आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। शनिवार को विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि कोई भी अनुसंधान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य आर्थिक उन्नयन, लोककल्याण और भारत को शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करना होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि विज्ञान भारती का सातवां राष्ट्रीय अधिवेशन ज्ञान की पावन धरा काशी में आयोजित हो रहा है, जिसमें 1300 से अधिक प्रतिनिधि पंजीकरण करा चुके हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय महामना मदन मोहन मालवीय की साधना का परिणाम है और इसकी स्थापना का उद्देश्य काशी को उसकी प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की पहचान दिलाना था। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का समन्वय भारत को विकसित राष्ट्र बनाने तथा विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का केंद्र मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक विज्ञान की प्रभावी यात्रा लगभग 400-500 वर्षों की है, जबकि भारत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का केंद्र रहा है। 2000 वर्ष पूर्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत थी। विदेशी आक्रमणों के कठिन दौर में भी यह 24-25 प्रतिशत बनी रही, लेकिन स्वतंत्रता के समय घटकर 1.5 से 2 प्रतिशत रह गई। भारत का किसान केवल किसान नहीं था, बल्कि वह इन्वेंटर और नवाचारी भी था। प्राकृतिक खेती, पशुपालन और भूमि की उर्वरता बनाए रखने की पारंपरिक व्यवस्थाएं उसकी वैज्ञानिक सोच का प्रमाण थीं। उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि, गोरक्षा और वाणिज्य भारतीय अर्थव्यवस्था की परस्पर जुड़ी हुई व्यवस्थाएं थीं। लेकिन समय के साथ हम रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भर हो गए और अपनी मूल परंपराओं से दूर होते चले गए। विदेशी आक्रांताओं, वामपंथियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को कमतर दिखाया सीएम योगी ने कहा कि भारतीय व्यापारी केवल व्यापार नहीं करता था, बल्कि देश को जोड़ने का कार्य करता था। भारतीय कारीगर भी केवल शिल्पकार नहीं बल्कि उद्यमी था, जिसने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाया। आज भी आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए वही मॉडल प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री ने महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयोगों ने यह सिद्ध किया था कि पौधों में भी संवेदनशीलता और चेतना होती है। यदि एक पौधा सकारात्मक और नकारात्मक व्यवहार का प्रभाव समझ सकता है तो समाज पर नकारात्मक सोच के प्रभाव का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। विदेशी आक्रांताओं, वामपंथी विचारधाराओं और भारत-विरोधी प्रवृत्तियों ने लंबे समय तक भारतीय ज्ञान परंपरा और गौरव को कमतर दिखाने का प्रयास किया, जिससे समाज अपनी जड़ों से दूर होता गया। भारतीय जीवन पद्धति का हर पक्ष विज्ञान से जुड़ा हुआ मुख्यमंत्री ने अपने बचपन की स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि उत्तराखंड के गांव में उनकी माता छोटी-छोटी क्यारियों में सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित करती थीं। भारतीय जीवन पद्धति का हर पक्ष विज्ञान से जुड़ा हुआ है। रसोई में हल्दी और मसालों के उपयोग से लेकर दैनिक जीवन की अनेक परंपराओं तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई देता है। कोविड महामारी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने 140 करोड़ की आबादी के बावजूद महामारी का प्रभावी मुकाबला किया। यह भारतीयों की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता और पारंपरिक जीवनशैली का परिणाम था। गांवों में मार्च से अक्टूबर तक पशुओं को खेतों में बांधने की परंपरा प्राकृतिक और गो-आधारित खेती का उत्कृष्ट उदाहरण थी। इस व्यवस्था के कमजोर होने के साथ खेती की लागत बढ़ी, भूमि की उर्वरता प्रभावित हुई और कृषि संकट गहराया। एमएसएमई के कारण घटी बेरोजगारी दर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में परंपरागत उद्यमों को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू किया गया। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के माध्यम से कारीगरों को तकनीक, डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़ा गया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश का निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जिनमें लगभग तीन करोड़ लोग कार्यरत हैं तथा बेरोजगारी दर तीन प्रतिशत से नीचे आ गई है। प्रकृति के प्रत्येक तत्व में उपयोगिता और अनुसंधान की संभावनाएं अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने तक्षशिला विश्वविद्यालय के आयुर्वेदाचार्य जीवक का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि शिक्षा पूर्ण होने के बाद गुरु ने जीवक को ऐसी वनस्पति खोजने का निर्देश दिया जिसमें औषधीय गुण न हों। लंबे समय तक खोज के बाद जीवक ने बताया कि उन्हें ऐसी कोई वनस्पति नहीं मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि का प्रमाण है, जिसमें प्रकृति के प्रत्येक तत्व में उपयोगिता और अनुसंधान की संभावनाएं देखी जाती हैं। विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार के अनगिनत अवसर युवा वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि, चिकित्सा, तकनीक, एमएसएमई, उद्यम और विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार के अनगिनत अवसर मौजूद हैं। उन्होंने विज्ञान भारती को सुझाव दिया कि प्रत्येक अधिवेशन के साथ नवाचार प्रदर्शनी आयोजित की जाए, अधिवेशन से पहले नवाचार प्रतियोगिताएं कराई जाएं और उत्कृष्ट शोधकर्ताओं एवं नवाचारकर्ताओं को मंच पर सम्मानित किया जाए। साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालयों तथा अन्य सरकारी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर शोधकर्ताओं को अपने नवाचारों का प्रस्तुतीकरण करने का अवसर उपलब्ध कराया जाए। इस अवसर पर विज्ञान भारती के अखिल भारतीय पालक अधिकारी सुनील आंबेडकर, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ शेखर सी माण्डे, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजीत चतुर्वेदी, आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रोफेसर अमित पात्रा व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

गेहूं खरीदी में गड़बड़ी पर बड़ा एक्शन

भोपाल सागर जिले में गेहूं खरीदी में गंभीरिया के लक्ष्मी नगर स्थित  देव प्रभाकर हाउस में गंभीर अनियमितताओं और किसानों के हितों से खिलवाड़ के मामले को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर को तत्काल कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। मंत्री  राजपूत के निर्देश पर मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर सहायक आपूर्ति अधिकारी निशांत पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, वहीं जिला आपूर्ति नियंत्रक ज्योति बघेल को सागर जिले प्रभार से हटा कर भोपाल मुख्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री  राजपूत द्वारा कलेक्टर सागर को यह भी निर्देशित किया गया है कि खाद्य विभाग के अतिरिक्त उपार्जन के लिए जिम्मेदार अन्य विभाग के कर्मचारियों की भूमिका की जांच भी की जाए और दोषी होने पर उनके विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई की जाये। मंत्री  राजपूत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों की मेहनत और उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपार्जन प्रक्रिया में यदि कोई अधिकारी, कर्मचारी, संस्था या समूह लापरवाही अथवा भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जाता है तो उसके विरूद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बोरियों में गेहूं के साथ मिट्टी मिलाने का मामला जिले के एक वेयरहाउस में गेहूं की बोरियों में भारी मात्रा में मिट्टी मिलने का मामला सामने आया। प्रारंभिक जांच में कुछ बोरियों में गड़बड़ी दिखाई दी थी। बोरियों में गेहूं के स्थान पर अत्यधिक मात्रा में मिट्टी पाए जाने की पुष्टि हुई। जानकारी के अनुसार कुछ बोरियों में मिट्टी की अधिक मात्रा पाई गई। खाद्य मंत्री  राजपूत के निर्देश पर प्रशासन ने तत्काल जांच शुरू की और संबंधित स्व-सहायता समूह के पदाधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया गया। इसके साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध मंत्री  राजपूत ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही न हो, इसके लिए सरकार लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को सशक्त बनाने, उनकी आय बढ़ाने और कृषि व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति या अधिकारी किसानों के अधिकारों पर कुठाराघात करने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री  राजपूत ने कहा, किसान हमारे अन्नदाता हैं। उनकी मेहनत और विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। गेहूं खरीदी में हुई गड़बड़ी अत्यंत गंभीर मामला है। मैंने तत्काल कार्रवाई करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कदम उठाए हैं। जांच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी, संस्था या अन्य व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। किसानों के हितों की रक्षा करना हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत की जाएगी।    

देवपुर में औषधीय वनस्पतियों पर एक दिवसीय बॉटनाइजेशन कार्यशाला

रायपुर बलौदाबाजार- भाटापारा जिले के वनमंडल बलौदाबाजार के देवपुर परिक्षेत्र में शुक्रवार को औषधीय वनस्पतियों की पहचान और महत्व पर केंद्रित एक दिवसीय बॉटनाइजेशन कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजित की गई।             कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्र में उपलब्ध औषधीय पौधों की पहचान कराना, छाल, पत्ती, तना, जड़, फल एवं फूल के आधार पर वर्गीकरण सिखाना तथा उनके औषधीय महत्व की जानकारी देना था। 80 से अधिक प्रजातियों की पहचान           कार्यक्रम में अर्जुन, आंवला, बहेड़ा, बेल, काली मुसली, हाथीपांव, दूधी, भुईनीम, सतावर, खरहर, ठेलका, नरनारी, गरुड़ सहित लगभग 80 औषधीय वनस्पति प्रजातियों की पहचान कराई गई। विशेषज्ञों ने इन प्रजातियों के पर्यावरणीय व्यवहार, संरक्षण की आवश्यकता और फल, फूल, पत्ती, जड़ आदि के माध्यम से विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। स्वस्थ, निरोग और दीर्घायु जीवनशैली के लिए प्रकृति आधारित ज्ञान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। वैद्यों से लेकर छात्रों तक की भागीदारी               कार्यशाला में वनमंडल बलौदाबाजार, वनमंडल कवर्धा और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान रखने वाले वैद्यगण, वन प्रबंधन समिति के सदस्य, बारनवापारा के गाइड्स और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।            वन मंडल अधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि कार्यशाला का मकसद केवल औषधीय ज्ञान का प्रसार नहीं था, इसका उद्देश्य इस ज्ञान को समाज के अधिक लोगों तक पहुंचाकर वृक्षों एवं वनस्पतियों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण में जनसहभागिता को प्रोत्साहित करना भी है।

निपुण भारत मिशन को नई धार देगी योगी सरकार, जुलाई में प्रदेशभर में होंगी ‘निपुण संकल्प कार्यशालाएं’

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन को और अधिक प्रभावी तथा परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करने के साथ-साथ विद्यालयों में सीखने के परिणामों में सुधार लाने के उद्देश्य से जुलाई में प्रदेश के सभी जनपदों में ‘निपुण संकल्प कार्यशालाओं’ का आयोजन किया जाएगा।  प्रदेश के 33 केंद्रों पर 6 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाली इन कार्यशालाओं में विभिन्न जनपदों के शैक्षणिक अधिकारी और विशेषज्ञ प्रतिभाग करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों की यह पहल निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाने के साथ-साथ प्रदेश के लाखों बच्चों को बेहतर अधिगम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इन कार्यशालाओं के माध्यम से शैक्षणिक सत्र 2026-27 की रणनीति, निपुण विद्यालय लक्ष्य, विद्यालय गुणवत्ता सुधार, निपुण 2.0, बालवाटिका संचालन तथा डेटा आधारित अनुश्रवण की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। शिक्षा सुधार का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है जब योजनाएं और नीतियां प्रभावी रूप से कक्षा-कक्ष तक पहुंचें। इसलिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों, डायट प्राचार्यों, एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटरों तथा जिला समन्वयकों को एक साझा मंच पर लाकर शैक्षणिक गुणवत्ता संवर्धन की रणनीति तैयार की जाएगी। कार्यशालाओं में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की अकादमिक रणनीति, निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर, विद्यालय स्तर पर संचालित गतिविधियों तथा निपुण विद्यालय लक्ष्यों पर विशेष मंथन होगा।  कार्यशालाओं में परख (PARAKH) राष्ट्रीय सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही जिला, ब्लॉक और विद्यालय स्तर पर वार्षिक लक्ष्य निर्धारण, उनकी नियमित समीक्षा तथा डेटा आधारित अनुश्रवण व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी जोर रहेगा। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक विद्यालय में सीखने के परिणामों का सतत मूल्यांकन हो और समयबद्ध सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। निपुण भारत मिशन के विस्तार के अंतर्गत कक्षा 3 से 5 तक प्रस्तावित लक्ष्य आधारित शिक्षण, प्रभावी कक्षा-शिक्षण के लिए 10 प्वाइंट टूलकिट, कैच-अप शिक्षण तथा निपुण प्लस में प्रस्तावित सुधारों पर भी चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही बालवाटिका के प्रभावी संचालन तथा कक्षा 1 से 5 तक शिक्षक संदर्शिका आधारित संरचित शिक्षण पद्धति को विद्यालयों में लागू करने की रणनीति तैयार की जाएगी, जिससे बच्चों की सीखने की नींव और अधिक मजबूत हो सके। कार्यशालाओं में विभागीय प्राथमिकताओं की समीक्षा, एआईपीएफएसएसी पोर्टल के प्रभावी उपयोग, बीईओ और एआरपी के बीच बेहतर समन्वय, विद्यालय गुणवत्ता सुधार की कार्ययोजना तथा शिक्षकों को प्रभावी फीडबैक उपलब्ध कराने जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। इससे शैक्षणिक नेतृत्व को मजबूत करने और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।