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Road Accident Report 2024: देश में 4.87 लाख सड़क हादसे, 1.77 लाख लोगों की मौत; चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने

 नई दिल्ली भारत में साल 2024 के दौरान हुए सड़क हादसों को लेकर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी की है. इसमें मरने वालों की संख्या बढ़कर 1.77 लाख से अधिक हो गई. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, देश में पिछले साल करीब 4.87 लाख दुर्घटनाएं दर्ज की गईं. ये संख्या 2023 के मुकाबले 1.48 प्रतिशत अधिक है।  न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रोड एक्सीडेंट इन इंडिया 2024 की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2024 में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 4,87,707 सड़क हादसे हुए. ये सभी मामले पुलिस विभागों द्वारा दर्ज किए गए हैं।  इन हादसों में 1,77,175 लोगों की मौत हुई और 4,71,441 लोग घायल हुए हैं. इसका मतलब है कि देश में हर घंटे औसतन 56 एक्सीडेंट हुए और 20 लोगों ने अपनी जान गंवाई।  तमिलनाडु में सबसे ज्यादा हादसे, यूपी में सबसे ज्यादा मौतें इस रिपोर्ट से पता चलता है कि देश के अलग-अलग राज्यों में हादसों की स्थिति कितनी गंभीर है. साल 2024 में तमिलनाडु सड़क हादसों के मामले में सबसे ऊपर रहा. यहां साल भर के भीतर सबसे ज्यादा 67,526 सड़क हादसे दर्ज किए गए. वहीं उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 24,118 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई।  रिपोर्टस के अनुसार, एक्सप्रेसवे को मिलाकर सिर्फ नेशनल हाईवे (NH) पर ही साल भर में कुल 1,50,958 हादसे (31.0%) हुए. राज्य राजमार्गों पर 1,03,538 हादसे दर्ज किए गए. जबकि 2,33,211 दुर्घटनाएं अन्य सड़कों पर हुईं।  इसमें से नेशनल हाईवे पर 64,772 (36.6%) मौतें हुईं, स्टेट हाईवे पर 39,277 (22.2%) मौतें और अन्य सड़कों पर 73,126 (41.3%) मौतें दर्ज की गईं. साल के दौरान हुई कुल 1,64,378 जानलेवा दुर्घटनाओं में से 59,043 (35.9%) नेशनल हाईवे पर, 36,392 (22.1%) स्टेट हाईवे पर और 68,943 (41.9%) अन्य सड़कों पर हुईं है।  दोपहिया वाहन सवार सबसे ज्यादा शिकार मंत्रालय की रिपोर्ट में ये बात भी पूरी तरह स्पष्ट की गई है कि सड़क पर चलने वाले दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों की जिंदगी सबसे ज्यादा खतरे में है. हादसों में जान गंवाने वालों में सबसे बड़ा हिस्सा (46.2%) बाइक और स्कूटी चलाने वालों का था. दुर्घटनाओं में शामिल गाड़ियों की बात करें तो भी दोपहिया वाहनों की संख्या सबसे ज्यादा रही।  इसके बाद सड़क पार करने वाले या फुटपाथ पर चलने वाले पैदल लोग इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है. इनकी कुल मौतों में हिस्सेदारी 20.6 प्रतिशत दर्ज की गई. वहीं कार, टैक्सी, वैन और हल्के मोटर वाहनों (LMVs) का इस्तेमाल करने वालों की हिस्सेदारी कुल मौतों में 12.4 प्रतिशत रही. कुल मिलाकर, दोपहिया वाहनों के बाद सबसे ज्यादा मौतें हल्की गाड़ियों और फिर भारी ट्रकों या लॉरियों की चपेट में आने की वजह से हुईं। 

पेपर लीक पर सख्ती: 551 शहरों में NEET प्रश्नपत्र की डिलीवरी के लिए अभेद्य सुरक्षा घेरा, जानिए पूरा प्लान

नई दिल्ली NEET 2026 री-एग्जाम को लेकर केंद्र सरकार ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं. 21 जून को होने वाली परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों और अन्य गोपनीय सामग्री की सुरक्षित ढुलाई सुनिश्चित करने के लिए दो-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है.सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को इस पूरी प्रक्रिया में अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है.सरकार का लक्ष्य है कि परीक्षा सामग्री पूरी तरह सुरक्षित तरीके से देशभर के परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे और किसी भी तरह की गड़बड़ी या सुरक्षा चूक की संभावना न रहे।  प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा व्यवस्था सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने परीक्षा सामग्री की ढुलाई और निगरानी के लिए दो-स्तरीय सुरक्षा कवर तैयार किया है. इसके तहत प्रश्नपत्रों और अन्य गोपनीय दस्तावेजों की पैकिंग, परिवहन और वितरण के दौरान CRPF और CISF के जवान लगातार सुरक्षा घेरा बनाए रखेंगे.परीक्षा से जुड़ी हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी ताकि किसी भी स्तर पर गोपनीयता से समझौता न हो।  551 शहरों तक कैसे पहुंचेगा NEET का पेपर? इस बार परीक्षा सामग्री को देशभर में पहुंचाने के लिए बड़े स्तर का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तैयार किया गया है. प्रश्नपत्रों को सबसे पहले हैदराबाद और अहमदाबाद स्थित प्रमुख केंद्रों से भेजा जाएगा.इसके बाद एयर और रोड ट्रांसपोर्ट के संयुक्त नेटवर्क के जरिए सामग्री को देश के लगभग 551 हब शहरों तक पहुंचाया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया को हब एंड स्पोक मॉडल के तहत संचालित किया जा रहा है, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों तक भी समय पर सामग्री पहुंच सके।  वायुसेना के विमान और हेलिकॉप्टरों का होगा इस्तेमाल सूत्रों का कहना है कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षित और तेज ढुलाई के लिए भारतीय वायुसेना के विमान और हेलिकॉप्टर भी लगाए गए हैं. परीक्षा सामग्री के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवान भी यात्रा करेंगे.इन जवानों का पूरा विवरण पहले ही रक्षा मंत्रालय को उपलब्ध कराया गया है ताकि उनके लिए आवश्यक यात्रा अनुमति और सुरक्षा मंजूरी समय पर जारी की जा सके।  यात्रा से पहले जमा करने होंगे हथियार सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात CAPF जवानों के लिए विशेष प्रोटोकॉल भी तय किया गया है. जो जवान सैन्य विमानों या हेलिकॉप्टरों में यात्रा करेंगे उन्हें उड़ान से पहले अपने सरकारी हथियार जमा कराने होंगे.यात्रा के दौरान हथियार सुरक्षित स्थान पर रखे जाएंगे और गंतव्य तक पहुंचने के बाद संबंधित जवानों को वापस सौंप दिए जाएंगे।  11 जून से शुरू हुई प्रश्नपत्र पहुंचाने की प्रक्रिया परीक्षा सामग्री को विभिन्न राज्यों और शहरों तक पहुंचाने का काम 11 जून से शुरू हो चुका है. अगले कई दिनों तक लगातार प्रश्नपत्र और अन्य गोपनीय सामग्री निर्धारित केंद्रों तक भेजी जाएगी.सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासनिक टीमें इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रही हैं ताकि निर्धारित समय के भीतर सभी केंद्रों पर सामग्री पहुंच जाए।  परीक्षा खत्म होते ही शुरू होगा रिवर्स ऑपरेशन सिर्फ प्रश्नपत्र पहुंचाना ही नहीं बल्कि परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं और अन्य दस्तावेजों को वापस सुरक्षित तरीके से लाना भी इस मिशन का हिस्सा है.21 जून को परीक्षा समाप्त होने के बाद उसी शाम से OMR उत्तर पुस्तिकाओं और अन्य परीक्षा सामग्री को एकत्र करने का अभियान शुरू हो जाएगा. इसके लिए भी अलग से सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई है।  हर स्‍टेप पर रहेगी कड़ी निगरानी परीक्षा सामग्री के प्रस्थान से लेकर केंद्रों तक पहुंचने और फिर OMR शीट्स की वापसी तक पूरी प्रक्रिया पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर रहेगी. परिवहन, भंडारण और वितरण के हर चरण को संवेदनशील मानते हुए विशेष निगरानी की जा रही है.अधिकारियों का कहना है कि इस बार सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के स्तर पर व्यापक तैयारी की गई है ताकि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराई जा सके।  देश के सबसे बड़े परीक्षा अभियानों में से एक 21 जून को होने वाला NEET 2026 री-एग्जाम देश के सबसे बड़े परीक्षा अभियानों में से एक माना जा रहा है. लाखों अभ्यर्थियों से जुड़ी इस परीक्षा के लिए सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासन, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और रक्षा संस्थानों के बीच व्यापक समन्वय स्थापित किया गया है.केंद्र सरकार का मानना है कि मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और सख्त निगरानी के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सकता है। 

क्या होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाएगा भारत? G7 शिखर सम्मेलन में मोदी-मैक्रों की अहम बैठक

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच फ्रांस ने भारत को एक अहम समुद्री सुरक्षा पहल में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की होने वाली द्विपक्षीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।  फ्रांस कई साझेदार देशों के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में फ्री शिपिंग और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बहुराष्ट्रीय पहल पर काम कर रहा है. इस पहल में भारत को भी शामिल किए जाने की संभावना है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।  रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की बातचीत में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, सैन्य उपकरणों की खरीद, रणनीतिक साझेदारी और पश्चिम एशिया के ताजा हालात प्रमुख मुद्दे होंगे. हाल के महीनों में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा वैश्विक चिंता बन गई है।  भारत-अमेरिका-कतर समेत कई देशों की अलग मीटिंग G7 सम्मेलन के इतर पश्चिम एशिया पर केंद्रित एक विशेष बैठक भी होगी, जिसमें भारत, अमेरिका, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं के शामिल होने की संभावना है. इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा हो सकती है।  विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा की जानकारी देते हुए कहा कि मोदी और मैक्रों की बैठक में पश्चिम एशिया समेत सभी वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी. उन्होंने संकेत दिया कि विभिन्न देशों द्वारा हाल में की गई नई पहलों और घोषणाओं पर भी विचार-विमर्श होगा।  फ्रांस युद्ध में शामिल नहीं, लेकिन समुद्री सुरक्षा जरूरी फ्रांसीसी अधिकारियों ने कहा कि समुद्री मार्गों का खुला और सुरक्षित रहना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है. उनका कहना है कि फ्रांस किसी युद्ध का हिस्सा नहीं है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है।  फ्रांस ने भारत को अपना प्रमुख रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का स्तर बेहद मजबूत है. रिपोर्ट में फ्रांसीसी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि, भारत अब G7 से जुड़े लगभग सभी प्रमुख मंचों का हिस्सा बन चुका है और वैश्विक मामलों में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है. इस बीच सिबी जॉर्ज ने यह भी संकेत दिया कि 14 से 16 जून के बीच होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाकिया यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ अहम ऐलान किए जा सकते हैं। 

CM डॉ. यादव की अपील: 14 जून के ऑनलाइन योग सत्र में हर नागरिक बढ़-चढ़कर ले भाग

14 जून को योग के ऑनलाइन सत्र में हर नागरिक हो शामिल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेशवासियों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की अपील "घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग" के संकल्प को साकार करने में बनें सहयोगी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समस्त प्रदेशवासियों से ऑनलाइन योग सत्र में शामिल होने की अपील की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसने आज सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का मार्ग दिखाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक वैश्विक जनआंदोलन के रूप में स्थापित हुआ है। आज अनेक राष्ट्र योग के महत्व को स्वीकार और अंगीकार कर चुके हैं। योग दिवस 21 जून पर अनेक आयोजनों के साथ ही 14 जून को विशेष ऑनलाइन सत्र आयोजित किया जा रहा है। बीस मिनिट के इस ऑनलाइन सत्र में कोई भी नागरिक हिस्सा ले सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : 2026 के सातवें काउन्ट डाउन के अवसर पर आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने 14 जून, 2026 को प्रातः 06:15 बजे से 07:35 बजे तक एक विशेष ऑनलाइन योग सत्र के आयोजन का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को योग से जोड़ते हुए स्वस्थ, जागरूक एवं निरोग समाज का निर्माण करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठजनों, विद्यार्थियों, शासकीय सेवकों एवं सामाजिक संगठनों से आग्रह किया है कि वे इस ऑनलाइन योग सत्र में अधिकाधिक संख्या में सहभागी बनें और योग को अपनी दैनिक जीवन शैली का अभिन्न अंग बनाएं। टोल फ्री नंबर सुविधा कार्यक्रम से जुड़ने के लिए टोल-फ्री नम्बर 1800-315-7008 पर मिस्ड कॉल देकर पंजीयन किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से की गई अपील में कहा है कि आइए, हम सभी मिलकर "घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग" के संकल्प के साथ अब हर घर योग को गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाने में सहभागी बनें और स्वस्थ मध्यप्रदेश और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।  

पहली बार 12 परमाणु हथियार तैनात करने की रिपोर्ट से PAK में खलबली, सामने आया बड़ा रिएक्शन

नई दिल्ली दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन और सैन्य ताकत को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आई है. वैश्विक हथियारों की निगरानी करने वाली संस्था 'स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट' (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के बाद पूरे पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इतिहास में पहली बार अपने परमाणु हथियारों को केवल स्टॉकपाइलमें रखने के बजाय सीधे तौर पर ऑपरेशनल मोड में तैनात कर दिया है।  इस खुलासे के तुरंत बाद पाकिस्तान सरकार और वहां के विदेश मंत्रालय की तरफ से बेहद डरा हुआ बयान सामने आया है, जिसमें इस्लामाबाद ने खुले तौर पर माना है कि भारत की परमाणु ताकत अंतरराष्ट्रीय अनुमानों से कहीं ज्यादा बड़ी और घातक हो सकती है।  भारत की परमाणु ट्रायड और 'कैनिस्टराइजेशन' तकनीक से सहमा इस्लामाबाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वे नई दिल्ली की तेजी से बढ़ती रणनीतिक क्षमताओं और बदलते परमाणु रुख पर बहुत बारीक नजर रख रहे हैं. पाकिस्तान ने विशेष रूप से भारत की मिसाइल प्रणालियों के कैनिस्टराइजेशन को लेकर गहरी चिंता जताई है।  कैनिस्टराइजेशन ऐसी अत्याधुनिक तकनीक है जिसमें परमाणु वॉरहेड को पहले से ही मिसाइल के अंदर सील करके रखा जाता है, जिससे युद्ध की स्थिति में मिसाइल को बहुत कम समय में और बेहद तेजी से दागा जा सकता है।  पाकिस्तान ने भारत की परमाणु-सक्षम पनडुब्बियों के जरिए समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता के विस्तार और लंबी दूरी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) प्रणालियों के विकास को अपनी सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।  पहली बार 'डिप्लॉयड' मोड में आए भारतीय न्यूक्लियर वॉरहेड रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास वर्तमान में लगभग 190 परमाणु वॉरहेड मौजूद हैं. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण और ध्यान देने वाली बात यह है कि इन 190 वॉरहेड्स में से 12 को 'ऑपरेशनल रूप से तैनात' श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है. यह पहली बार है जब किसी वैश्विक रक्षा एजेंसी ने भारत के परमाणु हथियारों के एक हिस्से को केवल भंडार के रूप में न देखकर, पूरी तरह से सक्रिय सैन्य तैनाती के रूप में दर्ज किया है।  पाकिस्तान ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि जमीन, हवा और समुद्र तीनों मोर्चों से परमाणु हमला करने की भारत की क्षमता अब पूरी तरह परिपक्व और सुरक्षित हो चुकी है, जो किसी भी संकट के समय भारत की 'ऑपरेशनल रेडीनेस' यानी युद्ध की तैयारियों को कई गुना बढ़ा देती है।  अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गिड़गिड़ाया पाकिस्तान, कहा- वैश्विक शक्तियां ध्यान दें भारत की इस बढ़ती सैन्य और परमाणु ताकत से घबराए पाकिस्तान ने अब दुनिया के अमीर और ताकतवर देशों से गुहार लगानी शुरू कर दी है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से भारत को उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियां और आधुनिक हथियार सप्लाई करने वाले देशों से अपील की है कि वे इस पर तुरंत रोक लगाएं।  इस्लामाबाद का तर्क है कि भारत की यह आधुनिक होती सैन्य शक्ति दक्षिण एशिया में रणनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा के संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ देगी. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह बयान उसकी अपनी आंतरिक कमजोरियों और भारत के मुकाबले रक्षा बजट में लगातार पिछड़ने की हताशा को दर्शाता है, क्योंकि भारत लगातार 'नो फर्स्ट यूज' की नीति पर कायम रहते हुए अपनी संप्रभुता को मजबूत कर रहा है। 

सरकारी कर्मचारियों को कब मिलेगी खुशखबरी? प्रमोशन का मामला CM मोहन यादव के पाले में

भोपाल  मध्य प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर एक बेहद निराशाजनक खबर सामने आई है. दरअसल प्रदेश में पिछले 10 सालों से थमी हुई प्रमोशन की प्रक्रिया अब एक बार फिर कानूनी फेरबदल के भंवर में फंस गई है. हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी होने और फैसला सुरक्षित होने के बाद भी, मुख्य न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरण के कारण अब नए सिरे से बेंच का गठन होगा और दोबारा सुनवाई की जाएगी. इससे न केवल सेवारत कर्मचारियों का इंतजार लंबा हो गया है, बल्कि राज्य की आगामी नई भर्तियों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।  मई 2016 से पूरी तरह ठप है पदोन्नति व्यवस्था मध्य प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित पदोन्नति मई 2016 से पूरी तरह से रुकी हुई है. दरअसल हाईकोर्ट द्वारा पदोन्नति नियम 2002 को निरस्त किए जाने के बाद से पूरी प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है. सरकार ने प्रशासनिक काम सुचारू रूप से चलाने के लिए कई अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार तो सौंप दिया, लेकिन उन्हें इस पद का कोई वित्तीय लाभ प्राप्त नहीं हुआ. पद रिक्त न होने के कारण नीचे के पदों पर नई नियुक्तियां भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।  ​नए नियम भी कोर्ट में उलझे, सामान्य वर्ग की आपत्ति गौरतलब ​है कि, पदोन्नति का रास्ता साफ करने के लिए राज्य सरकार ने सभी पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श कर नए नियम तैयार किए थे. हालांकि सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने इन नए नियमों पर गहरी आपत्ति जताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी. तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गहन सुनवाई की. सरकार ने नए नियमों के पक्ष में कई मजबूत तर्क रखे और आखिरकार 17 फरवरी को अदालत ने इस पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।  मुख्य न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट जाने से फंसा पेच कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी बताते हैं कि, ''​सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि सामान्य परिस्थितियों में सुरक्षित रखे गए फैसलों को 90 दिनों से अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए. इसी निर्देश के कारण कर्मचारियों में उम्मीद जागी थी कि जून के प्रथम सप्ताह में अंतिम निर्णय आ जाएगा. लेकिन इसी बीच मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में हो गई. नियमानुसार अब इस मामले की सुनवाई के लिए पहले नई बेंच का गठन किया जाएगा और नए सिरे से पूरी बहस सुनी जाएगी, जिसमें काफी समय लग सकता है।  ​ढाई लाख पदों की नई भर्तियों भी पर पड़ेगा सीधा असर विशेषज्ञ के अनुसार, इस कानूनी गतिरोध का सीधा असर राज्य सरकार के रोजगार लक्ष्यों पर भी पड़ रहा है. सरकार ने वर्ष 2028 तक ढाई लाख पदों पर भर्ती का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. वर्तमान में 78 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मामला लंबित होने से 13 प्रतिशत पद पहले से रुके हैं. अब प्रमोशन रुकने से पुराने पद खाली नहीं होंगे, जिससे स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में नई भर्तियां पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई हैं। 

MP में कपास पर मेहरबान मोहन यादव सरकार, मंडी टैक्स 50% कम; किसानों की बढ़ी उम्मीदें

बुरहानपुर  मध्यप्रदेश में कपास यानी सफेद सोना उगाने वाले किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है. हाल ही में मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने कपास उत्पादक किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है, कपास पर लागू मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत (एक रुपए प्रति सैकड़ा) से घटाकर 0.50 प्रतिशत (50 पैसे प्रति सैकड़ा) कर दिया गया है, बीतें दिनों विधायक अर्चना चिटनीस ने मुख्यमंत्री के सामने कपास पर मंडी शुल्क घटाने की मांग रखी थी. अब सीएम ने चिटनिस की मांग पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. उइससे कपास उत्पादक किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं।  फिर खिल उठेगा कपास उद्योग मोहन यादव सरकार के इस निर्णय से कपास उत्पादक किसानों, व्यापारियों सहित कृषि आधारित उद्योगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जाग उठी है. किसानों ने बताया कि बुरहानपुर में करीब एक दशक से ज्यादा समय से कपास उद्योग प्रभावित हो चुका है, अधिकांश जिनिंग फैक्ट्रियां बंद करके उद्योगपतियों ने पलायन किया है, लेकिन अब मंडी शुल्क कम किए जाने से दोबारा कपास जिनिंग शुरू होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।  प्रदेश के इन कपास उत्पादक क्षेत्रों को होगा फायदा इस निर्णय का सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है, जो उद्योग पलायन कर चुके हैं, वह दोबारा लौट सकते हैं. खास बात यह है कि मोहन यादव सरकार के इस फैसले से न सिर्फ बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, इंदौर, आलीराजपुर, झाबुआ, छिंदवाड़ा, बैतूल, सिवनी, क्षेत्र बल्कि संपूर्ण प्रदेश के कपास उत्पादक किसानों और कपास आधारित उद्योगों को लाभ होगा. मध्य प्रदेश का में उत्पादित कपास अधिक मात्रा में मध्यप्रदेश की जिनिंग, प्रेसिंग सहित प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचेगा, इससे प्रदेश में स्थानीय स्तर पर उत्पादन और व्यापारिक गतिविधियों में इजाफा होगा।  मंडी शुल्क घटने से लाभ मिलेगा, रकबा बढ़ेगा कपास उत्पादक किसान सुनील महाजन ने सीएम डॉ. मोहन यादव के निर्णय को स्वागत योग्य बताया है. किसान सुनील ने कहा, '' इससे कपास उत्पादक किसानों को लाभ होगा, साथ ही जो उद्योग पलायन कर चुके है, अब मंडी शुल्क घटाए जाने के बाद दोबारा जीवित होंगे. अब तक मंडी शुल्क ज्यादा होने के कारण कपास फसल से किसानों का मोहभंग हो गया था, लेकिन अब कपास का रकबा दोबारा बढ़ेगा, इससे जिनिंग फैक्ट्री संचालको भी लाभ मिलेगा. सरकार से मांग है कि भारतीय कपास निगम (CCI) का खरीदी केंद्र बुरहानपुर में स्थापित किया जाए और किसानों का पंजीयन किया जाए, इससे किसानों को राहत मिलेगी।  सीएम के सामने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा : अर्चना चिटनिस बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस ने बताया, '' मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुरहानपुर में निमाड़ इंडस्ट्रियल मीट में शिरकत की थी, यहां उन्होंने उद्यमी संवाद कार्यक्रम में उद्योगपतियों को संबोधित किया था, इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव से कपास पर मंडी शुल्क कम करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था. हमने सीएम से कहा था कि महाराष्ट्र की तुलना में अधिक मंडी शुल्क होने से मध्य प्रदेश के किसान, व्यापारी सहित जिनिंग उद्योग प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान का सामना कर रहे हैं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मांग को गंभीरता से लिया, उन्होंने हाल ही में कैबिनेट की बैठक में शुल्क में कमी का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।