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सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के 5 साल बाद देश को मिलेगी पहली NDA-प्रशिक्षित महिला फाइटर पायलट

चंडीगढ़  भारतीय सैन्य इतिहास में 13 जून 2026 का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज होने जा रहा है। वर्ष 2021 में महिलाओं को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश देने संबंधी ऐतिहासिक फैसले के पांच वर्ष बाद देश को एनडीए रूट से पहली महिला फाइटर पायलट मिलने जा रही है। चरखी दादरी जिले के गांव छपार की बेटी ईशिता सांगवान आज भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में स्थायी कमीशन प्राप्त कर नया इतिहास रचेंगी। हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी डुंडीगल में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान ईशिता को स्थायी कमीशन प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही वह एनडीए के पहले महिला बैच से फाइटर पायलट बनने वाली देश की पहली अधिकारी बन जाएंगी। देशभर में थीं केवल दो सीटें,पहली महिला फाइटर पायलट बनेंगी ईशिता ईशिता की सफलता उनकी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प की कहानी है। वर्ष 2021 में जब महिलाओं के लिए एनडीए के द्वार खुले, तब वह 12वीं कक्षा की छात्रा थीं। पिता से इस अवसर की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने फाइटर पायलट बनने का लक्ष्य तय कर लिया। राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के लिए वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में केवल दो सीटें उपलब्ध थीं। ईशिता ने लिखित परीक्षा और एसएसबी साक्षात्कार में सफलता प्राप्त करने के साथ-साथ फाइटर पायलट बनने के लिए अनिवार्य कंप्यूटरीकृत पायलट चयन प्रणाली (सीपीएसएस) परीक्षा भी पहली ही कोशिश में उत्तीर्ण कर ली। खड़कवासला से डुंडीगल तक तय किया गौरवपूर्ण सफर पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में तीन वर्ष की कठिन सैन्य प्रशिक्षण अवधि के दौरान ईशिता ने हर चुनौती का सामना किया। इसके बाद उन्होंने एयर फोर्स अकादमी, डुंडीगल में उन्नत उड़ान प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। पासिंग आउट परेड के बाद वह भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम का हिस्सा बनकर देश की वायु सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाएंगी। ईशिता एक शिक्षित परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता चरण सिंह सांगवान विद्यालय प्राचार्य हैं, जबकि माता अनीता सांगवान शिक्षिका हैं। परिवार के अनुसार उनकी सफलता में स्वर्गीय दादी लिछमा देवी के आशीर्वाद और परिवार के निरंतर सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जुड़वां बहन आस्था एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं, जबकि भाई आर्यन पुणे से बीटेक कर रहे हैं। ईशिता सांगवान की यह उपलब्धि न केवल चरखी दादरी और हरियाणा, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। यह बदलते भारत की उस नई तस्वीर को भी रेखांकित करती है, जहां बेटियां अब हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं और आसमान भी उनकी उड़ान को सीमित नहीं कर पा रहा।

आजमगढ़ बनेगा खास आम की खेती का केंद्र, दुनिया के सबसे महंगे आम का मदर प्लांट तैयार

आजमगढ़  यूपी के पूर्वांचल की धरती पर अब दुनिया का सबसे महंगा आम उगेगा। आजमगढ़ में जापान के प्रसिद्ध मियाजाकी आम का मदर प्लांट तैयार हो रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र लैदौरा इस आम के पेड़ से कलम तैयार करने में जुटा है। ऐसे में दो लाख रुपये किलो वाला मियाजाकी आम जिले की पहचान बनेगा। वहीं सोनभद्र में भी एक व्यक्ति ने अपने बाग में मियाजाकी आम का पौधा लगाया है। जापान का प्रसिद्ध मियाजाकी आम दुनिया का सबसे महंगा आम है। स्वाद और खुशबू में लाजवाब होने के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जापानी मियाजाकी आम की कीमत दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम है। स्थानीय बाजार में भी इसकी कीमत 70 हजार रुपये से दो लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक रहती है। कृषि विज्ञान केंद्र लैदौरा में मियाजाकी आम के पौधे तैयार किए गए हैं। इनका प्रयोग मदर प्लांट के रूप में किया जा रहा है। उद्यान वैज्ञानिक मदर प्लांट के पौधों से कलम तैयार कर मियाजाकी आम के पौधे लोगों को मुहैया कराएंगे। कलम से तैयार पौधे तीन से पांच साल में फल देने लगेंगे जबकि बीज वाले पौधे लगाने पर फल आने में करीब 10 साल का समय लग जाता है। लाल-जामुनी और हरे रंग का मिश्रण है खासियत मियाजाकी की पैदावार सोनभद्र के छपका गांव में भी हो रही है। गहरा लाल-जामुनी और हरे रंग का मिश्रण इस आम की खासियत होती है। वरिष्ठ अधिवक्ता उमेशधर दुबे ने पिछले साल 15 अगस्त को इसका पौधा लगाया था। इसका छिलका चमकदार होता है और स्वाद में बहुत मीठा होता है। कब लगा सकते हैं पौधे लैदौरा के प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि दुनिया के सबसे महंगे आम जापानी मियाजाकी का पौधा तैयार किया गया है। पुणे की नर्सरी से लाकर इसे लगाया गया है। इसका प्रयोग मदर प्लांट के तौर पर किया जाएगा। कलम से तैयार पौधों को लगाने का सही समय जुलाई से सितंबर तक होता है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में है नर्सरी अभी तक पश्चिम बंगाल के कोलकाता की एग्रो नर्सरी, ग्रीनरी नर्सरी ठाकुरनगर और महाराष्ट्र के पुणे स्थित नर्सरी ही इस जापानी मियाजाकी आम के पौधे उपलब्ध कराती हैं। जापानी मियाजाकी आम का एक पौधा 1500 से 5000 रुपये तक में मिलता है। मध्य प्रदेश के जबलपुर और ओडिशा में भी इसकी खेती होने लगी है। आजमगढ़ के चार ब्लॉकों रानी की सराय, मिर्जापुर, अहरौला और पवई में प्रमुखता से आम की खेती होती है। इन चार ब्लॉकों के करीब 12 प्रतिशत क्षेत्रफल में आम के बाग मौजूद हैं।

भीषण गर्मी में रेलवे का खास इंतजाम, प्लेटफॉर्म पर फोगर-स्प्रिंकलर से मिल रही ठंडी फुहार

बिलासपुर  भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच यात्रियों को राहत देने के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने बिलासपुर जंक्शन पर विशेष व्यवस्था की है। स्टेशन के प्लेटफॉर्मों पर रूफ-टॉप वॉटर स्प्रिंकलर और हाई-प्रेशर मिस्टिंग सिस्टम (फोगर) लगाए गए हैं, जिनसे लगातार पानी की बारीक फुहारें छोड़ी जा रही हैं। इससे प्लेटफॉर्म का तापमान कम हो रहा है और यात्रियों को गर्मी से काफी राहत मिल रही है। बिलासपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 सहित अन्य प्रमुख प्लेटफॉर्मों की छतों पर पाइपलाइन के जरिए मिस्टिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। फोगर से निकलने वाली पानी की बेहद महीन बूंदें आसपास के गर्म वातावरण को ठंडा करती हैं, जिससे यात्रियों को चिलचिलाती धूप के बीच भी अपेक्षाकृत ठंडक का एहसास होता है। गर्मी से परेशान यात्रियों ने रेलवे की इस पहल की सराहना की है। यात्री प्लेटफॉर्म पर पड़ रही फुहारों का आनंद लेते दिखाई दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था गर्मी के दौरान सफर को अधिक आरामदायक बना रही है। रेलवे ने सिर्फ फोगर सिस्टम ही नहीं लगाया है, बल्कि यात्रियों के लिए ठंडे पेयजल और शरबत की व्यवस्था भी की है। अधिकारियों के अनुसार गर्मी के मौसम में यात्रियों को अधिकतम राहत पहुंचाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। प्रदेश के इन रेलवे स्टेशनों पर भी व्यवस्था लागू दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा बिलासपुर के अलावा रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और गोंदिया रेलवे स्टेशनों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की गई है। रेलवे का मानना है कि बढ़ते तापमान और हीटवेव के प्रभाव को देखते हुए इस तरह की सुविधाएं यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही हैं।     बिलासपुर स्टेशन पर यात्रियों के लिए किए गए विशेष इंतजाम     प्लेटफॉर्म पर रूफ-टॉप वॉटर स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया गया।     हाई-प्रेशर मिस्टिंग और फोगर सिस्टम से ठंडी फुहारें छोड़ी जा रही हैं।     यात्रियों के लिए ठंडे पानी और शरबत की व्यवस्था।     हीटवेव के दौरान प्लेटफॉर्म का तापमान कम करने का प्रयास।     सोशल मीडिया पर रेलवे की इस पहल की जमकर तारीफ। भीषण गर्मी में काफी मिल रही राहत सोशल मीडिया पर भी बिलासपुर स्टेशन के फोगर सिस्टम के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग इसे रेलवे का यात्री हित में उठाया गया अभिनव और सराहनीय कदम बता रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच प्लेटफॉर्म पर मिल रही यह ठंडी फुहारें यात्रियों के लिए किसी राहत भरी बारिश से कम नहीं हैं। प्रमुख प्लेटफॉर्मो पर लगाए गए हैं हाई प्रेशर मिस्ट शावर रेलवे अधिकारियों के अनुसार बिलासपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 समेत प्रमुख प्लेटफॉर्मों की छतों पर पाइपलाइन बिछाकर हाई-प्रेशर मिस्ट शावर लगाए गए हैं। इनसे निकलने वाली पानी की बेहद बारीक बूंदें आसपास के गर्म वातावरण को तेजी से ठंडा करती हैं, जिससे प्लेटफॉर्म पर तापमान में उल्लेखनीय कमी महसूस होती है। गौरतलब है कि इस बार देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चल रहा है। ऐसे में रेलवे द्वारा अपनाया गया यह ‘कूलिंग मॉडल’ यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस अनोखी व्यवस्था के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और लोग इसे रेलवे का स्मार्ट व यात्री हितैषी कदम बता रहे हैं।

60 किलोग्राम भार वर्ग में करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

भोपाल मध्यप्रदेश राज्य बॉक्सिंग अकादमी, भोपाल की प्रतिभावान मुक्केबाज माही लामा का चयन चीन में आयोजित होने वाले World Cup of Boxing 2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। माही लामा 60 किलोग्राम भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता 15 से 20 जून 2026 तक चीन में आयोजित की जाएगी, जिसके लिए भारतीय दल आज रात चीन के लिए रवाना होगा। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश की मजबूत उपस्थिति माही लामा का भारतीय टीम में चयन मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाओं के निरंतर उभरते स्तर और राज्य बॉक्सिंग अकादमी में उपलब्ध कराए जा रहे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का प्रमाण है। विश्व स्तरीय इस प्रतियोगिता में उनकी सहभागिता प्रदेश के लिए गौरव का विषय है तथा यह राज्य में विकसित हो रही उत्कृष्ट खेल संस्कृति को भी दर्शाता है। कठोर परिश्रम और उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम माही लामा ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी पहचान बनाई है। उनकी निरंतर मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्हें भारतीय टीम में स्थान प्राप्त हुआ है। अब वे विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन करेंगी। प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत माही लामा की यह उपलब्धि प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह सफलता दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प, नियमित अभ्यास और उचित मार्गदर्शन के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है। उनकी उपलब्धि प्रदेश में खेलों के प्रति युवाओं के उत्साह को और अधिक प्रोत्साहित करेगी। खेल मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने दी शुभकामनाएँ सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने माही लामा को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि माही लामा चीन में आयोजित बॉक्सिंग वर्ल्ड कप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगी।    

तीन सदस्यीय दल करेगा आरोपों की गहन जांच

लखनऊ  योगी सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह दल तीर्थ क्षेत्र में दानपात्रों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की जांच कर शासन को अपनी रिपोर्ट देगा। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस. तथा विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार को एसआईटी का सदस्य बनाया गया है। गौरतलब है कि अयोध्या स्थित तीर्थ क्षेत्र में दान पात्रों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को गंभीरता से लेते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल गठित किए जाने का अनुरोध किया था। ट्रस्ट के अनुसार, अफवाहों पर रोक लगाने और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए इसकी गहन जांच आवश्यक है। यह तीर्थ क्षेत्र की छवि और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने की गहरी साजिश है, जिसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्रस्ट के इस अनुरोध को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से तीन वरिष्ठ अधिकारियों के विशेष जांच दल का गठन किया है। यह टीम पूरे प्रकरण की गहन छानबीन कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।

महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल: उद्धव ठाकरे के 6 सांसदों के बागी होने के दावे, फिर चर्चा में शिंदे फैक्टर

मुंबई संसद में अपना संख्या बल बढ़ाने की कोशिशों में जुटे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी बगावत से नई उम्मीदें दिखाई देने लगी हैं. टीएमसी के बागी गुट ने 19 लोकसभा सांसदों का समर्थन हासिल करने का दावा किया है और ये सभी बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन करने को तैयार हैं. अगर यह दावा सही साबित होता है तो संसद में NDA की ताकत बढ़ेगी और उसके लिए कई महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान हो सकता है।  दरअसल, पिछले संसद सत्र में एनडीए को संविधान संशोधन से जुड़े कुछ अहम विधेयकों पर बहुमत नहीं मिलने के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. ऐसे में गठबंधन अब विपक्षी दलों के सांसदों को अपने पक्ष में लाने की संभावनाएं तलाश रहा है. सूत्रों का कहना है कि टीएमसी के बाद अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पर भी नजरें टिक गई हैं।  उद्धव सेना में टूट की अटकलें तेज रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा जोरों पर है कि महाराष्ट्र में महायुति की विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद से ही उद्धव ठाकरे की पार्टी में असंतोष गहराता जा रहा है. अब यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि पार्टी के कुछ सांसद अलग राह चुन सकते हैं. लोकसभा में शिवसेना (UBT) के कुल 9 सांसद हैं और दल-बदल कानून से बचने के लिए कम से कम 6 सांसदों को किसी अन्य दल में विलय करना होगा।  रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अगर ऐसा कोई कदम उठता है तो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सबसे स्वाभाविक विकल्प हो सकती है. माना जा रहा है कि शिंदे ने पिछले कुछ वर्षों में राज्यभर में अपना संगठनात्मक आधार मजबूत किया है और कई स्थानीय नेताओं को अपने साथ जोड़ने में सफलता हासिल की है. वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे का प्रभाव अब मुख्य रूप से मुंबई और कुछ शहरी इलाकों तक ही सिमट कर रह गया है।  ‘विचारधारा बदलने का खामियाजा भुगत रहे उद्धव’ शिवसेना (यूबीटी) गुट के सांसदों के एकनाथ शिंदे के संपर्क में होने की खबरों पर बीजेपी नेता राम कदम ने बड़ा बयान दिया है. ANI से बातचीत में कदम ने कहा कि उद्धव ठाकरे विचारधारा बदलने का खामियाजा पहले ही भुगत चुके हैं और आगे भी भुगतेंगे. उन्होंने कहा कि उनके सभी नेता निश्चित रूप से उन्हें छोड़ देंगे. राम कदम ने कहा, ‘जिस तरह ममता बनर्जी ने अपनी विचारधारा बदली और उसका असर उद्धव ठाकरे पर भी पड़ा और उन्होंने भी अपनी विचारधारा बदल ली, तो विचारधारा बदलने का नुकसान उद्धव ठाकरे पहले भी झेल चुके हैं और भविष्य में भी झेलेंगे. उनके सभी नेता उन्हें छोड़ देंगे, यह तय है।  360 के आंकड़े पर NDA की नजर सूत्रों के मुताबिक, संसद में एनडीए की आगे की रणनीति काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वह लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के कितना करीब पहुंच पाता है. वर्तमान में 540 सदस्यीय लोकसभा में तीन सीटें खाली हैं और किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है. टीएमसी में संभावित टूट और विपक्षी दलों के कुछ सांसदों के समर्थन की संभावनाओं ने एनडीए को उम्मीद दी है कि वह भविष्य में अपने संख्या बल को और मजबूत कर सकता है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को उद्यमियों को देंगे प्रोत्साहन राशि, भू-आवंटन पत्र और हितलाभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को करेंगे उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि, भू-आवंटन पत्र और हितलाभ का वितरण "समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश" कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में भोपाल  प्रदेश में उद्यमिता को नई दिशा देने के साथ रोजगार सृजन को गति प्रदान कर "विकसित मध्यप्रदेश" बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए रविवार 14 जून को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में वृहद कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विभिन्न जिलों के एमएसएमई उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स तथा अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रोत्साहन राशि का वितरण करेंगे। इस दौरान उद्यमियों को भू-आवंटन पत्र, स्टार्टअप नीति अंतर्गत स्वीकृत विभिन्न लाभ और मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत युवाओं को हितलाभ भी वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए एमएसएमई उद्यमियों एवं स्टार्टअप प्रतिनिधियों से सीधा संवाद भी करेंगे। संवाद के माध्यम से उद्यमी अपने अनुभव साझा करेंगे तथा राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नीतियों और योजनाओं के प्रभाव के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही वे उद्यमिता को और अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव और अपेक्षाएं भी प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप विशेष रूप से विभाग द्वारा प्रदेश में औद्योगिक निवेश, उद्यमिता संवर्धन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देंगे। प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेंद्र सिंह द्वारा विभाग की प्रमुख उपलब्धियों, योजनाओं एवं भावी कार्ययोजना का उल्लेख किया जाएगा। कार्यक्रम की थीम समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश" रखी गई है। सूक्ष्म लघु,उद्यम विभाग कार्यक्रम में प्रदेश में औद्योगिक निवेश, उद्यमिता संवर्धन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित करेगा। यह कार्यक्रम प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र, स्टार्टअप पारिस्थितिकी और नवाचार आधारित औद्योगिक विकास को नई ऊर्जा प्रदान करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार मानते हुए निरंतर ऐसी नीतियां और व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिले और युवाओं में स्वरोजगार की भावना विकसित हो तथा नवाचार को प्रोत्साहन प्राप्त हो। राज्य की नई औद्योगिक एवं निवेशोन्मुखी नीतियों के परिणामस्वरूप प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों को उद्यम स्थापना के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। संवाद से प्राप्त सुझाव प्रदेश की औद्योगिक एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी को और अधिक सुदृढ़ बनाने में उपयोगी सिद्ध होंगे। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि, बैंकिंग संस्थानों के पदाधिकारी, निवेशक, स्टार्टअप संस्थापक, युवा उद्यमी तथा प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए हितग्राही बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन केवल हितलाभ वितरण तक सीमित न रहकर उद्यमिता को जन-आंदोलन का स्वरूप देने, नवाचार आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा आत्मनिर्भर एवं विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में सामूहिक संकल्प का अवसर भी बनेगा। मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल उद्योगों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना, उन्हें रोजगार मांगने वाले के बजाय रोजगार सृजित करने वाला बनाना तथा नवाचार, कौशल और उद्यमिता के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना भी है। "समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश" कार्यक्रम इसी व्यापक सोच और दूरदृष्टि को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।  

चंद दिनों में ही लगभग 6.73 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा, 30 हजार दर्शकों के बैठने की होगी व्यवस्था

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश खेल अवसंरचना के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसी क्रम में गोरखपुर में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम तेजी से आकार ले रहा है। लगभग 392.94 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का करीब 6.73 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह स्टेडियम न केवल पूर्वांचल बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  करीब 46 एकड़ क्षेत्र में विकसित होगा, दर्शकों की क्षमता 30 हजार होगी योगी सरकार का यह ड्रीम प्रोजेक्ट गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला साबित होगा। स्टेडियम का 16 मई 2026 को भूमिपूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम हुआ था। इसके बाद से निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। मिट्टी भरने का काम पूरा हो गया है। पाइलिंग का काम चल रहा है। खेल निदेशालय के मुताबिक, वर्तमान में स्टेडियम का भौतिक निर्माण कार्य लगभग 6.73 प्रतिशत पूरा हो चुका है और कार्य निर्धारित समय सीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य 23 दिसंबर 2027 तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूर्ण करना है। करीब 46 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला यह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम 30 हजार दर्शकों की क्षमता वाला होगा। खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए होंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं गोरखपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के लिए वित्तीय संसाधनों की भी मजबूत व्यवस्था की गई है। इस परियोजना हेतु पेट्रोलियम मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने सीएसआर फंड से 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने पर सहमति दी है। शेष राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जा रही है। परियोजना को गति देने के लिए राज्य सरकार ने प्रथम किस्त के रूप में 63 करोड़ 39 लाख रुपये की धनराशि भी स्वीकृत कर दी है। इस खेल परिसर में खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। स्टेडियम का निर्माण ग्राउंड प्लस टू फ्लोर मॉडल पर किया जा रहा है।  अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लगेंगी लाइट्स मुख्य मैदान में खिलाड़ियों के लिए सात प्लेइंग पिच और चार प्रैक्टिस पिच बनाई जाएंगी। रात्रिकालीन मुकाबलों के आयोजन को ध्यान में रखते हुए स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप चार हाई मास्ट फ्लड लाइट्स लगाई जाएंगी। इससे दिन-रात दोनों समय मैच आयोजित किए जा सकेंगे। स्टेडियम के निर्माण से क्षेत्र के युवाओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की मेजबानी का अवसर भी प्राप्त होगा। इससे गोरखपुर की पहचान केवल धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक प्रमुख खेल केंद्र के रूप में भी स्थापित होगी। क्रिकेट हब के रूप में तैयार हो रहा उत्तर प्रदेश- खेल सचिव खेल सचिव सुहास एल.वाई. ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश में क्रिकेट हब के रूप में डवलप हो रहा है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम वाराणसी का काम पूरा होने की स्टेज पर है। इसी तरह गोरखपुर में निर्माण कार्य तेजी पर है और अयोध्या का स्टेडियम बनकर तैयार है। लखनऊ के इकाना स्टेडियम में आईपीएल मैच हो रहे हैं। खेल निदेशक आरपी सिंह ने कहा कि गोरखपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण से पूर्वांचल में खेलों को नई दिशा मिलेगी। गोरखपुर और आसपास के जिलों में क्रिकेट समेत अन्य खेलों की सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय खिलाड़ियों को अब अपनी प्रतिभा निखारने के लिए बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

कबीर के दोहे से बदली जिंदगी: तानों से निकलकर भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंचे लोकेंद्र आर्य

बड़वानी ‘गांव वाले पिताजी से कहते कि तेरा ये लंगड़ा लड़का खुद तो किसी काम का नहीं है, हमारे बच्चों को भी बिगाड़ रहा है। पिताजी मुझे डांटते, घर से बाहर जाने के लिए मना करते।’ यह कहना है बाएं पैर से दिव्यांग लोकेंद्र आर्य का। उनका सिलेक्शन दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया (DCCBI) की इंडिया-ए टीम में हुआ है। वह 13 से 15 जून तक हरियाणा के यमुनानगर में होने वाले केसरी दिव्यांग टूर्नामेंट-2026 में इंडिया-ए की ओर से मैदान में उतरेंगे। सिलेक्शन के बाद लोग बधाई देने घर आ रहे हैं। मिठाई खिला कर फूल माला पहनाकर स्वागत कर रहे हैं। पिता रूमा आर्य पेशे से किसान हैं। बड़वानी जिले में सेंधवा के मोरदड़ गांव पहुंची। यहां लोकेंद्र और पिता से बात करके उनका सफर जानने की कोशिश की। क्रिकेट खेलने पर हंसी उड़ाते थे लोग यहां टीले पर बने कच्चे मकान के सामने बड़ा सा शामियाना लगा है। चारपाई के साथ 20-25 कुर्सियां रखी हैं। घर के बाहर फूलों की मालाएं और गुलदस्ते लिए किसी का इंतजार कर रहे हैं। इतने में घर के अंदर से एक 27 साल का युवक एक पैर से लंगड़ाते हुए बाहर आया। माला और गुलदस्ता लिए खड़े लोग उसे एक-एक कर माला पहनाते और फोटो खिंचवाने लगता है। ये वही लोग हैं, जो इसे कभी लंगड़ा कहकर चिढ़ाते थे। उसके पिता से कहते- ऐसा बेटा पैदा किया है, किसी काम का नहीं है। ये क्या करेगा। दाएं हाथ के बल्लेबाज लोकेंद्र वर्तमान में दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन मध्यप्रदेश की सतपुड़ा डिवीजन (ग्रामीण) टीम के कप्तान हैं। बचपन में लोगों ने उनके पैरों की कमजोरी को लेकर ताने दिए थे। क्रिकेट खेलने पर हंसी उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी ताकत बनाया। लोग बोलते- हमारे बच्चों को बिगाड़ देगा लोकेंद्र कहते हैं कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए मैंने क्या कुछ नहीं सुना और सहा है, ये मैं ही जानता हूं। लोगों के तानों से परेशान होकर पिताजी बचपन में ही विकलांग आश्रम में छोड़ आए थे। वे भी क्या करते, ताने और घर के हालत ऐसे नहीं थे कि मेरी इलाज और पढ़ाई के साथ देखभाल कर पाते। सोचता था कि जिंदगी ऐसे ही कट जाएगी। क्रिकेट खेलने का शौक, तो तीन-चार साल की उम्र से ही था। खड़ा तो ठीक से हो नहीं पाता था, लेकिन प्लास्टिक का बैट जरूर अपने पास ही रखता था। थोड़ा बड़ा हुआ, तो लकड़ी के पल्ले को बैट बना लिया। अपने गांव के हम उम्र बच्चों के साथ खेलना शुरू कर दिया। तब गांव वाले पिताजी से कहते कि तेरा ये लंगड़ा लड़का खुद तो किसी काम का नहीं है, हमारे बच्चों को भी बिगाड़ रहा है। पिताजी भी मुझे डांटते, घर से बाहर जाने के लिए मना करते। छोटा था, इसलिए कुछ समझ नहीं पाता था। आश्रम से मिली नई राह और जिंदगी विकलांग सेवा आश्रम में शुरुआती दिन मुश्किल से कटे। हर पल मां की याद आती थी। सोचता था, मेरा पैर ऐसा क्यों है? क्यों मैं अपने दोनों छोटे भाइयों की तरह अपने घर में रह सकता। आश्रम पहुंचा, तो वहां सीनियर्स को क्रिकेट खेलते देखा। मन को तसल्ली हुई। धीरे-धीरे अपने दोस्तों के साथ मैं भी क्रिकेट खेलने लगा। वहां जो हमारे वार्डन थे, वो हमेशा मोटिवेट करते। जितनी पढ़ाई करना हो करो, जितना खेलना हो खेलो। कबीर के दोहे ने दी प्रेरणा आश्रम में हम लोग प्रार्थना भी करते थे। कबीर ग्रंथावली का एक दोहा है- मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत। कहै कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीति॥ पहले तो इस दोहे को ऐसे ही दोहरा लेते थे। लेकिन, जब इसका अर्थ समझ आया, तो अमल करना शुरू कर दिया। सोच लिया कि अब किसी भी हालत और कीमत में अपने आपको और अपने मन को कभी हारने नहीं देना है। लोकेंद्र कहते हैं कि 2021 में विश्व दिव्यांग दिवस पर दिव्यांग क्रिकेटर टीम के कप्तान ब्रजेश द्विवेदी के बारे में पता चला। उनके बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला वे IIT इंदौर में नौकरी करते हैं। दो-तीन दिन बाद उनसे मिलने IIT इंदौर पहुंच गया। उन्हें क्रिकेट को लेकर अपने जुनून के बारे में बताया। उन्होंने मेरा ट्रायल कराया। इसके कुछ महीने बाद ही खास तौर से हमारे लिए सतपुड़ा डिवीजन के नाम से टीम बन गई। चंदे से खरीदी पहली किट शुरुआत में लेदर बॉल से खेलने के दिक्कत हुई। किट भी नहीं थी। दोस्तों ने चंदा जमा कर किट की व्यवस्था की। शुरुआत में सेंधवा के किला परिसर स्थित मंडी में डामर सड़क पर खेले। इसके बाद निवाली के खेल परिसर में प्रैक्टिस करना शुरू किया। आज भी यहां से हर शनिवार रविवार को सेंधवा से 20 किमी दूर निवाली मैच खेलने जाते हैं। तीन साल पहले मेरी शादी हुई। आईटीआई करने के बाद बीए कर रहा हूं। बेटी को खेलते देख मिलता है सुकून तीन साल पहले 22 मार्च 2023 को टिकेश्वरी से शादी हुई। एक बेटी है। जब बेटी होने वाली थी, उस समय मन में डर था। लगता था कि कहीं बच्चा भी मेरी तरह तो नहीं होगा। ऐसे में पत्नी का समय समय डॉक्टरों से उपचार ओर जांच करवाते रहे। खुशी होती है, जब अपनी बेटी को सभी बच्चों के साथ अच्छे से खेलता देखता हूं।

महाकाल दर्शन होंगे महंगे? लाइट एंड साउंड शो का टिकट ₹100, सभी सुविधाएं लेने पर खर्च ₹1050

उज्जैन  बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की जेब पर और बोझ बढ़ने वाला है। महाकाल मंदिर परिसर में चलने वाले प्रसिद्ध लाइट एंड साउंड शो को देखने के लिए अब श्रद्धालुओं को 100 रुपए प्रति व्यक्ति का शुल्क देना होगा।गौरतलब है कि करीब 7 महीने तक मुफ्त संचालन के बाद अब इस शो को पेड किया गया है। 18 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है शो इस शो का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 अक्टूबर 2025 को दीपावली के अवसर पर किया था। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने इसे करीब 18 करोड़ 7 लाख रुपए की लागत से तैयार किया है। करीब 25 मिनट के इस शो में वॉटर स्क्रीन, फाउंटेन, लेजर लाइट और बेहतरीन साउंड इफेक्ट्स के जरिए भगवान महाकाल, मां क्षिप्रा और प्राचीन अवंतिका नगरी (उज्जैन) की गौरव गाथा दिखाई जाती है। शुल्क लगाने के पीछे मंदिर समिति का तर्क मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस भव्य शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने करीब 1.5 लाख रुपए का खर्च आ रहा है। मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, इसी खर्च को पूरा करने और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए 100 रुपए का एंट्री शुल्क रखने का फैसला लिया गया है। हर माह 15 लाख रुपए कमाई का अनुमान कमाई के लिहाज से देखें तो मंदिर समिति को इस फैसले से अच्छी आय होने की संभावना है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, रोजाना करीब 500 श्रद्धालु लाइट एंड साउंड शो देखने पहुंच रहे हैं। यदि प्रत्येक श्रद्धालु से 100 रुपए शुल्क लिया जाता है तो समिति को प्रतिदिन लगभग 50 हजार रुपए की आय होगी। इस हिसाब से एक महीने में करीब 15 लाख और सालभर में लगभग 1.8 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है, जबकि शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह व्यवस्था मंदिर समिति के लिए आय का एक नया स्रोत भी बन सकती है। संध्या और शयन आरती के लिए भी लेते हैं 250 रुपए यह पहली बार नहीं है जब महाकाल मंदिर में किसी सुविधा के लिए शुल्क बढ़ाया या लगाया गया हो। इससे पहले भी कई बदलाव हुए हैं। 19 फरवरी 2026 से संध्या आरती और शयन आरती के लिए भी 250 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जा रहा है, जबकि इससे पहले यह फ्री थी। वीआईपी या शीघ्र दर्शन के लिए पहले से ही शुल्क लिया जा रहा है। श्रद्धालु बोले- बढ़ जाएगा आर्थिक बोझ महाकाल मंदिर में रोज हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भस्म आरती में ही रोजाना करीब 1700 श्रद्धालुओं को ऑनलाइन प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में लाइट एंड साउंड शो पर शुल्क लगने के बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का खर्च बढ़ जाएगा। जहां एक तरफ मंदिर प्रशासन इसे मेंटेनेंस के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं श्रद्धालुओं के एक वर्ग का कहना है कि धार्मिक परिसर में होने वाले इस शो को पहले की तरह ही मुफ्त रखा जाना चाहिए था, क्योंकि आरती और शो के शुल्कों से आम भक्तों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।