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खान ग्लोबल स्टडीज केस में सुनवाई, पुलिस से मांगी केस डायरी

 पटना  राजधानी पटना के मुसल्लहपुर हाट स्थित खान ग्लोबल स्टडीज में हुए बवाल और फायरिंग मामले में मंगलवार को अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान फैजल खान उर्फ खान सर के दोनों गार्डों को राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर तत्काल फैसला सुनाने के बजाय पुलिस को अपडेटेड केस डायरी और अन्य जरूरी दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 20 जून को होगी। इसी दिन फैजल खान से जुड़े मामले की भी सुनवाई प्रस्तावित है। उन्‍हें 20 जून तक के लिए गिरफ्तारी से राहत मिली है। वहीं, ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के संचालक रौशन आनंद के सहयोगियों की ओर से भी जमानत याचिका दायर किए जाने की चर्चा तेज है। फैजल खान पर हत्‍या का आरोप इधर, एक दिन पहले जेल से बाहर आए रौशन आनंद ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने फैजल खान और एक कोल्ड स्टोरेज मालिक पर अपने भाई प्रिंस यादव की हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि सोमवार देर रात सहरसा में प्रिंस यादव का अंतिम संस्कार किया गया। उनके चाचा ने मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और समर्थक शामिल हुए। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। प्रिंस यादव के बड़े चाचा मनोज यादव के अनुसार, बेटे की मौत की खबर सुनने के बाद उसके माता-पिता गहरे सदमे में हैं और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। तेजस्‍वी यादव ने की सीबीआई जांच की मांग गौरतलब है कि प्रिंस यादव की मौत नेपाल के विराटनगर स्थित एक होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। इस मामले में नेपाल पुलिस ने प्रिंस के पांच दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। घटना के बाद से बिहार और नेपाल दोनों जगह यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जाता है कि पटना पुलिस प्र‍िंस के साथि‍यों को लाने जाएगी। इस बीच पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है। इसके बाद राज्य की राजनीति में भी इस मामले को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।

150 साल पुराना बलरामपुर का स्वयंसिद्ध हनुमान मंदिर, नेपाल तक है आस्था

बलरामपुर जहाँ एक तरफ गहरी नीरवता है और दूसरी तरफ सरोवर का अनंत विस्तार, ठीक उन दोनों के बीच एक पीपल की छांव तले विराजते हैं संकटमोचन हनुमान। न भव्य शिखर, न विशाल प्रांगण, फिर भी डेढ़ सदी से यहाँ आस्था का जो दीप जल रहा है, वह आज नेपाल की सीमाओं तक अपनी रोशनी बिखेर रहा है। यही है बलरामपुर के रानी तालाब स्थित वह हनुमान मंदिर, जिसे लोग चमत्कारी भी कहते हैं और स्वयंसिद्ध भी, क्योंकि यहाँ जो माँगा जाता है, वह मिलता जरूर है। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर को छोटी काशी यूं ही नहीं कहा जाता। इस प्राचीन नगर की गलियों में इतिहास सांस लेता है। नीलबाग महल हो, राजा की ड्योढ़ी हो या सदियों पुराने शिवालय, हर ओर गौरवशाली अतीत की छाप है। लेकिन इन सबके बीच रानी तालाब का हनुमान मंदिर अपनी एक अलग ही पहचान रखता है, जहाँ धर्म, प्रकृति और आस्था का अनूठा त्रिभुज बनता है। स्वयंसिद्ध है यह धाम मंदिर की भौगोलिक स्थिति ही इसे असाधारण बनाती है। पूरब में एकांत भूमि, पश्चिम में शांत सरोवर और उन दोनों के मध्य एक विशाल पीपल वृक्ष, जिसके नीचे युगों से बजरंगबली विराजमान हैं। शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार ऐसा संयोग जहाँ भी बनता है, वह स्थान स्वयंसिद्ध हो जाता है। यानी वहाँ स्थापित देवता साक्षात जागृत अवस्था में होते हैं और भक्तों की पुकार सीधे उन तक पहुँचती है। रानी तालाब का यह मंदिर उसी दिव्य श्रेणी में आता है। डेढ़ सदी की अटूट विरासत मंदिर का इतिहास लगभग 150 वर्ष पुराना है। इसकी स्थापना स्थानीय निवासी शंभू नाथ ने की थी। शुरुआत में यह केवल पीपल के नीचे स्थापित एक मूर्ति थी, कोई दीवार नहीं, कोई छत नहीं। लेकिन जब भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने लगीं तो मंदिर की महिमा स्वयं फैलती गई। लोग स्वेच्छा से जुड़ते गए, जनसहयोग से निर्माण होता गया और आज उसी स्थान पर एक सुंदर एवं सुव्यवस्थित मंदिर खड़ा है। भले ही वह केवल 100 वर्ग गज में समाया हो, पर उसकी आस्था का कोई आयाम नहीं। दशकों से इस मंदिर की सेवा और देखरेख पंडित रामदुलारे और उनका परिवार निःस्वार्थ भाव से करता आ रहा है। पाँच मंगलवार की मन्नत और बाबा का वचन मंदिर के पुजारी राम दुलारे के अनुसार यहाँ हनुमान जी को बेसन के लड्डू और सिंदूर अर्पित करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि जो भक्त लगातार पाँच मंगलवार पूर्ण श्रद्धाभाव से यह प्रसाद चढ़ाते हुए मन्नत माँगता है, बाबा उसे कभी खाली हाथ नहीं लौटाते। कहते हैं कि उसकी नैया बजरंगी अवश्य पार लगाते हैं। मंदिर के ठीक सामने शिवलिंग स्थापित है और उसके पीछे पेड़ की ओट में शनिदेव की मूर्ति विराजमान है। तीनों देवशक्तियों का यह संगम इस स्थान को और भी पवित्र बनाता है। प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहाँ भजन कीर्तन और सुंदरकांड का पाठ होता है, जो पूरे परिसर को एक अलौकिक ऊर्जा से भर देता है। नेपाल तक फैली आस्था की लहर इस मंदिर की ख्याति केवल बलरामपुर तक सीमित नहीं है। गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती, बस्ती, सिद्धार्थनगर जैसे जिलों से हजारों श्रद्धालु यहाँ नियमित रूप से आते हैं। यहाँ तक कि पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी भक्त मन्नत लेकर इस द्वार पर पहुँचते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर वे पुनः आभार व्यक्त करने लौटते हैं। यही इस मंदिर की सबसे बड़ी गवाही है। बड़े मंगल पर उमड़ता है जनसैलाब ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल पर इस मंदिर का दृश्य अविस्मरणीय होता है। दूर-दूर से आए भक्त प्रसाद और ध्वजा लेकर उमड़ पड़ते हैं। हनुमान जयंती पर भव्य आयोजन होते हैं और पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठता है। यह नजारा देखकर सहज ही अनुभव होता है कि रानी तालाब का यह हनुमान मंदिर महज एक धार्मिक स्थल नहीं, यह लाखों लोगों की श्रद्धा, आस्था और विश्वास की जीवंत त्रिवेणी है, जो डेढ़ सदी से बह रही है और आने वाली पीढ़ियों तक बहती रहेगी।

ब्रिटेन में 16 साल से कम बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का ऐलान

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है, उन्होंने बताया है कि वह अब 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने जा रहे हैं. ब्रिटेन अपने इस फैसले की मदद से बच्चों पर सोशल मीडिया की वजह से पड़ने वाले नकारात्मक असर को खत्म करना चाहता है. बीते साल ऑस्ट्रेलिया ने टीनएजर्स और बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन किया था. फिर उसके बाद यूरोप समेत कई देशों ने इस फैसले की तारीफ की थी. हाल ही में कनाडा ने भी ऐलान किया था कि वह सोशल मीडिया के लिए नियम बदलने जा रहा है और बच्चों के इस्तेमाल करने को लेकर नियम बदलेगा. ब्रिटेन प्रधानमंत्री ने कहा- आसान नहीं था फैसला कीर स्टारमर ने आगे बताया है कि यह फैसला उनके लिए आसान नहीं है. कई बड़ी कंपनियां सरकार को अपना फैसला वापस लेने के लिए दबाव डाल रही हैं, लेकिन ये फैसला होकर रहेगा. ब्रिटेन प्रधानमंत्री ने X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करके इस फैसले के बारे में जानकारी दी है और बताया है कि अधिकतर माता-पिता ने उनको बताया है कि उनके बच्चे स्मार्टफोन चलाने का आदि हो चुके हैं. ब्रिटेन प्रधानमंत्री का पोस्ट ब्रिटेन प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा है कि हम 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस को बैन करने जा रहे हैं. आज के दौर में बच्चों को ऐसी दुनिया में खुद को ढालना पड़ रहा है, जहां तकनीक उनकी जिंदगी के हर पहलू में दखल दे रही है. मैं अब इसे और जारी नहीं रहने दे सकता. इसलिए हम बच्चों को उनका बचपन वापस देने जा रहे हैं. टेक कंपनियों को कई नियम लागू करने को कहा ब्रिटेन ने हाल ही के दिनों में टेक कंपनियों के ऊपर दबाव बनाया है. सरकार ने इन कंपनियों से उम्र सत्यापन लागू करने और अपने एल्गोरिद्म में बदलाव करने के लिए के लिए कहा है. साथ ही बच्चों को अश्लील तस्वीर आदि से दूर रखने के लिए नए कदम उठाने को कहा है. ब्रिटेन की सरकार चाहती है की ऑनलाइन गेमिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर होने वाले लाइव स्ट्रीमिंग को भी बच्चों के लिए प्रतिबंधित किया जाए.

दूसरे वनडे में कुलदीप-यशस्वी की एंट्री संभव, प्लेइंग इलेवन में बदलाव की तैयारी

नई दिल्ली अफगानिस्तान के खिलाफ जारी वनडे सीरीज में भारत ने धर्मशाला में बारिश से प्रभावित मैच में आसान जीत दर्ज करके तीन मैचों की श्रृंखला में 1-0 से बढ़त बना रखी है। दूसरे मैच में जीत हासिल करने पर उसे अजेय बढ़त मिल जाएगी। हालांकि भारतीय टीम इससे कहीं आगे की सोच रही है। विश्व कप पहले से पहले लगभग दो दर्जन मैच खेलने हैं और टीम प्रबंधन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह विभिन्न संयोजनों को आजमाएगा। अफगानिस्तान के खिलाफ मौजूदा श्रृंखला इस दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। शुभमन गिल ने मैच से पहले दिया बयान भारतीय टीम प्रबंधन अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए विभिन्न संयोजनों को आजमाना चाहता है। इस लिहाज से दूसरा वनडे अहम होने वाला है। भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने धर्मशाला वनडे से पहले कहा, 'हमारा सारा ध्यान अलग-अलग संयोजन आजमाने और यह देखने पर है कि हमारे लिए वास्तव में क्या कारगर साबित होगा। इस खिलाड़ी की हो सकती है एंट्री अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे वनडे मैच में कुलदीप यादव और यशस्वी जायसवाल को खेलने का मौका मिल सकता है। कुलदीप की हाल की फॉर्म अच्छी नहीं रही है लेकिन उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें मौका दिया जा सकता है क्योंकि वह बीच के ओवरों में खेल पर नियंत्रण बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके आने से हर्ष दुबे को अपनी जगह गंवानी पड़ सकती है। इसके साथ ही यशस्वी जायसवाल को भी मौका मिलने की संभावना है। उनके आने से ईशान किशन को बाहर होना पड़ेगा। प्रिंस यादव को करना होगा इंतजार तेज गेंदबाजी विभाग में पदार्पण करने वाले गुरनूर बराड़ ने प्रभावित किया और उन्हें संभवतः एक और मैच खेलने का मौका दिया जाएगा। पहले वनडे में उन्होंने 27 रन देकर 3 विकेट हासिल किए थे। आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करने वाले प्रिंस यादव को ऐसे में अपनी बारी के लिए इंतजार करना होगा। जहां तक अफगानिस्तान का सवाल है तो उसके बल्लेबाजों को सामूहिक रूप से अच्छा प्रदर्शन करना होगा। पहले वनडे में सलामी बल्लेबाज रहमानुल्लाह गुरबाज ने आक्रामक शतक लगाया लेकिन उन्हें दूसरे छोर से खास सहयोग नहीं मिला। टीम इस प्रकार हैं: भारत: शुभमन गिल (कप्तान), यशस्वी जयसवाल, केएल राहुल, कुलदीप यादव, नितीश कुमार रेड्डी, प्रसिद्ध कृष्णा, श्रेयस अय्यर, रोहित शर्मा, हार्दिक पंड्या, वॉशिंगटन सुंदर, हर्ष दुबे, इशान किशन, अर्शदीप सिंह, गुरनूर बराड़, प्रिंस यादव। अफगानिस्तान: हशमतुल्लाह शाहिदी (कप्तान), सेदिकुल्लाह अटल, रहमानुल्लाह गुरबाज़ (विकेटकीपर), इकराम अलिखिल (विकेटकीपर), अजमतुल्लाह उमरजई, बिलाल सामी, नांगेयालिया खरोती, फरीद अहमद मलिक, एएम ग़ज़नफ़र, मोहम्मद नबी, राशिद खान, दरविश रसूली, इब्राहिम जादरान, जिया उर रहमान शरीफी।

हरियाणा में मेयर टीम अधूरी, चुनाव के एक साल बाद भी नहीं भरी गईं अहम कुर्सियां

अंबाला. प्रदेश के नगर निगमों में अजीब तस्वीर दिखाई दे रही है। शहरों को मेयर मिल चुके हैं, सदन बन चुके हैं, पार्षद शपथ ले चुके हैं, लेकिन सत्ता की दो अहम कुर्सियां सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर की अब भी खाली हैं। मार्च 2025 में हुए नगर निगम चुनावों के बाद गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, रोहतक, करनाल, पानीपत और यमुनानगर में मेयरों ने कामकाज संभाल लिया। मई 2026 में अंबाला, सोनीपत और पंचकूला में भी नए सदन अस्तित्व में आ गए। लेकिन प्रदेश के अधिकांश नगर निगमों में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। मार्च 2025 में मानेसर नगर निगम का भी चुनाव हुआ था केवल यहीं पर सीनियर और डिप्टी मेयर का चुनाव हो सका है। नगर निगम कानून आज भी उस दौर की कहानी कहता है जब मेयर का चुनाव पार्षद किया करते थे। अब मेयर सीधे जनता चुनती है, लेकिन कानून की कई धाराओं में आज भी पार्षदों द्वारा मेयर चुनने का जिक्र दर्ज है। नगर निगम की राजनीति में सीनियर डिप्टी मेयर का पद केवल सम्मान का विषय नहीं होता। इसे अक्सर भविष्य की राजनीति का लांचिंग पैड माना जाता है। पंचकूला का नाम शायद इसलिए भी याद रखा जाएगा क्योंकि वहां 2021 से 2026 तक का पूरा कार्यकाल निकल गया है। अंबाला में हाई कोर्ट की लेनी पड़ी थी शरण अंबाला में 2013 में निगम बनने के बाद मेयर के साथ-साथ निर्धारित समय के भीतर सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव भी हो गया था। दूसरे कार्यकाल में मामला इतना लंबा खिंचा कि चुनाव कराने के लिए तत्कालीन छह पार्षदों जिनमें जसबीर सिंह, फकीर चंद, राजेश मेहता, अमनदीप कौर, राजेश सिंगला इत्यादि को हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। दिसंबर 2020 में चुनाव हुए, जनवरी 2021 में शपथ ग्रहण हुआ, लेकिन सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के चुनाव आठ दिसंबर 2022 में जाकर हुए। लगभग दो साल तक दोनों कुर्सियां खाली रहीं। इस साल अंबाला में 13 मई को चुनाव परिणाम आए, 28 मई को शपथ ग्रहण होने के बावजूद अगली प्रक्रिया का इंतजार जारी है।

मोहाली में डिफॉल्टर बिल्डरों पर बड़ा एक्शन, गमाडा ने नई अप्रूवल्स पर लगाई पाबंदी

मोहाली ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) ने बकाया जमा न करने वाले बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इसके तहत 20 बिल्डरों की नई मंजूरियों पर तब तक रोक लगा दी गई है, जब तक वे अपना पुराना बकाया चुकता नहीं कर देते।  वहीं, इसके बाद गिल्को रियल एस्टेट ग्रुप ने 57 लाख रुपए जमा करवा दिए हैं। इस सूची में कई नेताओं की कंपनियां भी शामिल हैं। कुछ दिन पहले जिस सनटेक ग्रुप के प्रबंधकों पर ईडी की रेड पड़ी थी, वह कंपनी भी डिफॉल्टरों की सूची में शामिल है। गमाडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर संदीप कुमार ने आदेश जारी किए हैं। उनका कहना है कि बिल्डर्स पर काफी बकाया पेंडिंग है। रिकवरी के लिए अब डिफाल्टर लिस्ट बनाकर उनके सभी नए प्रोजेक्ट की अप्रूवल पर रोक लगा दी है। बाजवा डेवलपर का नाम भी आगे गमाडा की तरफ से पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट (PAPRA) के तहत मंजूर 13 कॉलोनियों से डेवलपर्स द्वारा ली जाने वाली फीस का बकाया 312 करोड़ रुपए है। सूची में सबसे अधिक बकाया मेसर्स बाजवा डेवलपर्स पर है, जिस पर दो मेगा प्रोजेक्ट्स के करीब 150 करोड़ रुपए बकाया हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर पर 47 करोड़, आरकेएम हाउसिंग पर 31 करोड़ और शिवालिक साइट प्लानर्स पर 36 करोड़ रुपए पेंडिंग हैं। गीतू कंस्ट्रक्शन पर 14 करोड़ और मैजेस्टिक प्रॉपर्टीज पर साढ़े सात करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है। करोड़ों की बोली देने वाले भी पीछे गमाडा की डिफॉल्टर सूची में मेगा प्रोजेक्ट्स के नाम सबसे ऊपर हैं। इन्होंने करोड़ों की बोली देकर प्रॉपर्टी खरीदी थी, लेकिन अब भुगतान नहीं कर रहे हैं। सात मेगा प्रोजेक्ट्स से गमाडा को 701 करोड़ रुपए से अधिक बकाया है। इनमें सबसे अधिक बाजवा डेवलपर्स के मेगा प्रोजेक्ट-1 पर 209 करोड़ और मेगा प्रोजेक्ट-2 पर 168 करोड़ रुपए बकाया हैं। सेक्टर-82, 90 और 91 में काम कर रही जनता लैंड प्रमोटर पर भी 152 करोड़ रुपए बकाया हैं। सेक्टर-66ए में सुखम इंफ्रास्ट्रक्चर पर 69 करोड़ रुपए समेत कई अन्य नाम भी सूची में शामिल हैं। इन बिल्डरों ने अभी तक चुकाया है बकाया:- मैसर्स बाजवा डेवलपर्स (मेगा प्रोजेक्ट-1) – ₹209.30 करोड़ मैसर्स बाजवा डेवलपर्स (मेगा प्रोजेक्ट-2) – ₹168.61 करोड़ मैसर्स जनता लैंड प्रमोटर्स (सेक्टर 82, 90, 91) – ₹152.12 करोड़ मैसर्स बाजवा डेवलपर्स (लाइसेंस 22/2014) – ₹127.19 करोड़ मैसर्स सुखम इंफ्रास्ट्रक्चर (सेक्टर 66ए) – ₹69.06 करोड़ मैसर्स चंडीगढ़ रायल सिटी प्रमोटर्स – ₹47.89 करोड़ मैसर्स एचपी सिंह एंड अदर्स (सेक्टर 122) – ₹45.78 करोड़ ग्लोबल्स प्रोजेक्ट्स (सेक्टर 66ए) – ₹34.52 करोड़ आरकेएम हाउसिंग सेक्टर (सेक्टर 111-112) – ₹31.07 करोड़ मैसर्स बाजवा डेवलपर (लाइसेंस 20/2014) – ₹23.40 करोड़ प्रीत लैंड प्रमोटर (सेक्टर 86) – ₹22.14 करोड़ मैसर्स शिवालिक साइट प्लानर्स – ₹20.55 करोड़ मैसर्स शिवालिक साइट प्लानर्स (कासा एस्पान) – ₹15.60 करोड़ मैसर्स गीतू कंस्ट्रक्शंस – ₹14.79 करोड़ द इंडियन कोआपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी सनटेक – ₹11.47 करोड़ मैसर्स बाजवा दामिनी डेवलपर्स – ₹10.65 करोड़ मैसर्स मैजेस्टिक प्रॉपर्टीज – ₹7.13 करोड़ मैसर्स नॉर्थएज डेवलपर्स – ₹1.11 करोड़ मैसर्स राइजिंग स्टार इंफ्रास्ट्रक्चर – ₹0.99 करोड़ मैसर्स गिल्को डेवलपर्स एंड बिल्डर्स – ₹0.57 करोड़  

हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी, डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई से पहले एक्सपर्ट की राय अनिवार्य

चंडीगढ़. चिकित्सकीय लापरवाही (मेडिकल नेग्लिजेंस) के मामलों में डॉक्टरों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को लेकर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि स्वतंत्र और सक्षम चिकित्सा विशेषज्ञ की राय के बिना किसी डॉक्टर को आपराधिक मुकदमे में तलब करना कानून की दृष्टि में टिकाऊ नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल मरीज की मृत्यु हो जाने या उपचार असफल रहने भर से डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला नहीं बनता है। न्यायमूर्ति मनीषा बत्रा की पीठ ने निचली अदालत द्वारा जारी समन आदेश को रद करते कहा कि मजिस्ट्रेट ने चिकित्सा साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया और विशेषज्ञ चिकित्सकीय राय का इंतजार किए बिना डाक्टरों को मुकदमे का सामना करने के लिए बुला लिया। अदालत ने इसे गंभीर त्रुटि माना। तरनतारन से जुड़ा है मामला मामला तरनतारन में एक महिला की प्रसव के बाद हुई मृत्यु से जुड़ा था। पति का आरोप था कि पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। शुरू में सामान्य प्रसव का आश्वासन दिया गया, बाद में ऑपरेशन में महिला ने जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। आरोप था कि इसके बाद महिला की हालत बिगड़ गई, अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उसे दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ा, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पति ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आपराधिक शिकायत दायर की थी। प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट ने डाक्टरों को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए (लापरवाही से मृत्यु) सहित अन्य धाराओं के तहत तलब कर लिया था। इसके खिलाफ डॉक्टर हाई कोर्ट पहुंचे। हाई कोर्ट में डाक्टरों की ओर से कहा गया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई चिकित्सकीय साक्ष्य नहीं है जो उनकी लापरवाही साबित करता हो। डॉक्टरों को दोषमुक्त करारा दिया गया एक जांच टीम ने भी रिपोर्ट में डॉक्टरों को दोषमुक्त करार दिया था। अदालत ने पाया कि मजिस्ट्रेट ने केवल इस आधार पर समन जारी कर दिया कि महिला की मृत्यु प्रसव संबंधी जटिलताओं के कारण हुई। अदालत ने कहा कि किसी डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया शुरू होते ही उसे गिरफ्तारी के भय, जमानत की कार्यवाही और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान जैसी गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। यदि बाद में वह निर्दोष भी साबित हो जाए, तब भी उसकी प्रतिष्ठा को हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं होती।

नक्सली संगठन के दबाव में हुई नसबंदी, आत्मसमर्पित नक्सलियों का माइक्रोसर्जरी से उपचार

जगदलपुर. बस्तर में पुनर्वास की एक अनोखी पहल ने कई परिवारों के जीवन में नई खुशियां लौटाई हैं. महारानी अस्पताल में आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों के लिए विशेष सर्जिकल शिविर आयोजित किया गया. शिविर में रिवर्स वासेक्टॉमी जैसी जटिल माइक्रोसर्जरी की गई. ये वे लोग हैं, जिन्हें कभी नक्सली संगठन के दबाव में नसबंदी करानी पड़ी थी. देश के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वैच्छिक सेवाएं देकर ऑपरेशन किए. दो चरणों में अब तक 73 सफल सर्जरी पूरी की जा चुकी हैं. इस पहल का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को सामान्य पारिवारिक जीवन लौटाना है. चिकित्सकों ने इसे मानवीय सेवा का अनूठा उदाहरण बताया. अभियान के सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं. कुछ परिवारों में बच्चों की किलकारियां फिर गूंजने लगी हैं. पुलिस और प्रशासन इसे पुनर्वास मॉडल की बड़ी सफलता मान रहे हैं. बस्तर में बंदूक छोड़ चुके लोगों के जीवन में यह पहल नई उम्मीद लेकर आई है.

चोट से उबरकर नीरज चोपड़ा लौटेंगे मैदान में, दोहा डायमंड लीग से करेंगे सीजन की शुरुआत

नई दिल्ली  चोट से उबरने के बाद बाद भारत के भाला फेंक स्टार नीरज चोपड़ा 19 जून को दोहा डायमंड लीग से इस सीजन में वापसी करेंगे। सोमवार को नीरज की इस घोषणा से उनके इस सीजन के प्रतियोगी कैलेंडर में लौटने को लेकर हफ्तों से चल रही अटकलों को विराम मिल गया है। दो बार के ओलिंपिक पदक विजेता 28 वर्षीय नीरज पीठ की चोट से उबर रहे थे। जिसके कारण वह इस साल अब तक किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाए थे। अब उनकी मैनेजमेंट फर्म वेल स्पोर्ट्स ने इंस्टाग्राम पर घोषणा की कि 2026 का पहला थ्रो दोहा में। इससे यह तय हो गया है कि नीरज तीन दिन बाद प्रतियोगी एक्शन में होंगे। चोपड़ा को इस इवेंट में देर से शामिल किया गया है, क्योंकि 12 जून को आयोजकों द्वारा घोषित सूची में उनका नाम नहीं था। वह सीजन की तैयारी के लिए स्विट्जरलैंड के ओलिंपिक सेंटर में ट्रेनिंग कर रहे हैं। लेकिन अब चोपड़ा ने भी इंस्टाग्राम पर लिखा है कि दोहा में मिलते हैं। वहीं पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम का नाम इस प्रतियोगिता की नवीनतम सूची में नहीं है, जबकि 12 जून को उनके इसमें भाग लेने की घोषणा की गई थी। ऐसे में चोपड़ा का सीधा मुकाबला श्रीलंका के स्टार खिलाड़ी रुमेश थरंगा पथिरागे से होगा। पथिरागे हाल ही में चार जून को डायमंड लीग के रोम चरण में 92.62 मीटर के शानदार थ्रो के साथ सीजन के बेस्ट थ्रोअर बने हैं। इसके अलावा, त्रिनिदाद और टोबैगो के मौजूदा विश्व चैंपियन केशोरन वालकाट और ग्रेनाडा के दो बार के वर्ल्ड चैंपियन एंडरसन पीटर्स से भी नीरज को हमेशा की तरह कड़ी चुनौती मिलेगी। नौ खिलाड़ियों वाले इस इवेंट में अन्य खिलाड़ियों में अमेरिका के विश्व चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता कर्टिस थांपसन, केन्या के जूलियस येगो, चेक गणराज्य के जैकब वाडलेच, मिस्र के मोहम्मद हुसैन अहमद सामेह और आर्तुर फेल्फनर शामिल हैं।

खुद पर लगे आरोपों को भगवंत मान ने किया खारिज, कहा- छवि खराब करने की कोशिश जारी

चंडीगढ़ पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री अकाल तख्त के फैसले पर अपनी सफाई दी. उन्होंने कहा कि पिछले दिन तख्त श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की ओर से एक वीडियो के संबंध में मेरे खिलाफ कुछ हुकमनामे जारी किए गए हैं. भगवंत मान ने कथित विवादित वायरल वीडियो को को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।  सीएम भगवंत मान ने कहा कि वायरल वीडियो में जो शख्स दिखाई दे रहा है वह मैं नहीं हूं. मैं हैरान हूं कि पंथ के इतने बड़े ओहदे पर बैठे लोग सियासी मोहरे की तरह काम कर रहे हैं।  मुख्यमंत्री मान ने कहा कि वायरल वीडियो में जो शख्स है, न तो उसके चेहरा-मोहरा मिलता है और न ही कद काठी मुझसे मिलती है, उसके शारीरिक बनावट पूरी तरह उनसे बिल्कुल अलग है. ये मेरे खिलाफ एक प्रोपेगंडा है।  सीएम भगवंत मान ने कहा कि मैं पंजाब में गुरु की बाणी, पानी, किसानी और जवानी के लिए जो सरकारी फैसला ले रहा हूं वह मेरे विरोधियों को बर्दाश्त नहीं हो रहे हैं. इसलिए मुझे बदनाम करने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं और इसके लिए धर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है. मान ने कहा कि मैं श्री अकाल तख्त को सर्वोच्च संस्था मानता हूं और उसके आगे नतमस्तक होता हूं।  भगवंत मान ने कहा  श्री अकाल तख्त से मत्था लगाने के बारे में न तो मैं सोच सकता हूं और न ही मेरी आने वाली कई पीढ़ियां ऐसा सोच सकती हैं लेकिन श्री अकाल तख्त पर जो सियासी नियुक्तियां हुई हैं और ये लोग जिस तरह के फैसले ले रहे हैं, वह सारी संगत अच्छी तरह जानती है।  ऐसे समय में जब अरविंद केजरीवाल ने भगवंत मान हाल ही में 2027 चुनाव के लिए पार्टी का चेहरा घोषित किया, यह विवाद पंजाब की चुनावी राजनीति पर कितना असर डालेगा, यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है ।  1. आखिर कौन सा वीडियो बना भगवंत मान के लिए मुसीबत? पूरा विवाद एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें एक व्यक्ति कथित तौर पर हाथ में शराब का गिलास लिए सिख गुरुओं और जनरल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों पर शराब के छींटे मारता दिखाई देता है. वीडियो सामने आने के बाद इसे सिख धार्मिक भावनाओं और मर्यादा के अपमान से जोड़कर देखा गया. विपक्षी दलों और कई धार्मिक संगठनों ने दावा किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान हैं. हालांकि, शुरुआत से ही आम आदमी पार्टी और भगवंत मान इस दावे को खारिज करते रहे. सीएम भगवंत मान से जुड़ा यह वीडियो दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में खूब वायरल हुआ था।  2. भगवंत मान ने क्या कहा था? वीडियो वायरल होने के बाद भगवंत मान ने आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया. उनका कहना था कि वीडियो नकली है और आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से तैयार किया गया है. उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक विरोधी उनकी छवि खराब करने और पंजाब सरकार को बदनाम करने के लिए इस तरह की सामग्री फैला रहे हैं. मान ने यह भी कहा कि किसी वीडियो की मौजूदगी मात्र से उसमें दिख रहे व्यक्ति की पहचान सिद्ध नहीं हो जाती।  5 जनवरी 2026 को अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने भगवंत मान को तलब किया और वीडियो की सत्यता की जांच कराने की घोषणा की. 15 जनवरी को मान अकाल तख्त के समक्ष पेश भी हुए।  3. अकाल तख्त की रिपोर्ट में क्या निकला? वायरल वीडियो को बेअदबी का गंभीर मामला मानते हुए इसे गंभीरता को देखते हुए अकाल तख्त ने जनवरी 2026 में भगवंत मान को तलब किया. मुख्यमंत्री ने पेश होकर अपना पक्ष रखा और कुछ दस्तावेज भी जमा कराए. इसके बाद वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए विशेषज्ञ संस्थानों के पास भेजा गया।  जून 2026 में सामने आई रिपोर्ट में कहा गया कि वीडियो में किसी प्रकार की एडिटिंग या एआई जनरेशन के संकेत नहीं मिले. रिपोर्ट के आधार पर अकाल तख्त ने माना कि वीडियो तकनीकी रूप से प्रामाणिक है. हालांकि रिपोर्ट में यह प्रश्न अलग बना रहा कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति निश्चित रूप से भगवंत मान हैं या नहीं।  4. अकाल तख्त ने भगवंत मान को पंथ विरोधी क्यों घोषित किया? जून 2026 में सामने आए फॉरेंसिक रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अकाल तख्त ने भगवंत मान को "गुरु द्रोही" और "पंथ विरोधी" घोषित किया. धार्मिक नेतृत्व का तर्क था कि वीडियो में दिखाई गई गतिविधि सिख परंपराओं और गुरुओं के सम्मान के खिलाफ है. मान ने जांच के दौरान वीडियो को AI बताकर गुमराह करने की कोशिश की।  आकल तख्त ने सिख समुदाय से अपील की गई कि वे इस मामले को गंभीरता से लें. यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अकाल तख्त सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था मानी जाती है और उसके निर्णयों का पंजाब की सामाजिक और राजनीतिक चर्चा पर प्रभाव पड़ता है।  15 से 16 जून 2026 को पांच सिंह साहिबानों की बैठक के बाद अकाल तख्त ने भगवंत मान को "गुरु-दोखी" और "खालसा पंथ विरोधी" घोषित किया. अकाल तख्त का कहना है कि वायरल वीडियो और उससे जुड़े घटनाक्रम ने सिख धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई तथा मान ने जांच के दौरान वीडियो को AI बताकर गुमराह करने की कोशिश की।  5. विपक्षी दलों ने इस विवाद को कैसे भुनाया? अकाल तख्त के फैसले के बाद कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल तीनों ने मुख्यमंत्री पर दबाव बढ़ा दिया. बीजेपी ने सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री खुद ऐसे विवाद में घिरे हैं तो राज्य में नशा मुक्ति और नैतिक शासन की बात कैसे कर सकते हैं. कांग्रेस ने इसे नैतिकता का मुद्दा बताते हुए इस्तीफे की मांग की. वहीं अकाली दल ने इसे सिख मर्यादा और धार्मिक सम्मान का प्रश्न बताते हुए अकाल तख्त के फैसले का खुलकर समर्थन किया. इससे विपक्ष को लंबे समय बाद एक ऐसा मुद्दा मिला है जिस पर लगभग सभी दल एक सुर में दिखाई दे रहे हैं।  6. आम आदमी पार्टी का बचाव क्या है? आम आदमी पार्टी का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट केवल यह बताती है कि वीडियो तकनीकी रूप से असली है, लेकिन इससे यह साबित … Read more