samacharsecretary.com

दहलीज पर ठहरा मानसून, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कब बरसेंगे बादल? IMD ने दिया अपडेट

भोपाल / रायपुर   दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon 2026) की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है. दक्षिण भारत से आगे बढ़ने के बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास ठहर गया है, तो वहीं पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करने के बाद मानसून बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रुक गया है. मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत 16 राज्यों में बारिश का इंतजार बढ़ गया है।  मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ वालों को करना होगा मानसून का इंतजार मौसम विभाग के अनुसार, 13 जून 2026 तक केरलम, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडू, महाराष्ट्र, आंध प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, त्रिपुरा, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, असम, मेघालय, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा तक मानसून पहुंच चुका है. वहीं छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश,जम्मू खस्वीर,पंजाब, हरियाणा, दिल्ली के लोगों को अभी थोड़ा और इंतेजार करना होगा।   छत्तीसगढ़ की दहलीज पर अटका मानसून बता दें कि मानसून की रफ्तार फिलहाल छत्तीसगढ़ की दहलीज पर आकर अटक गया है. इधर, मौसम विभाग ने बताया कि 15 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के बचे हुए हिस्सों- तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ गया है।  मौसम विभाग ने बताई संभावित तारीख मौसम विभाग ने बताया कि अगले 4-5 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ेगी. बता दें कि छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मानसून की दस्तक 13 जून और मध्य प्रदेश में 15 जून के आसपास हो जाती है, लेकिन इस मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने के कारण इसकी रफ्तार थम गई है. मौसम विभाग की माने तो मध्य प्रदेश में 18-19 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून दस्तक दे सकता है. हालांकि दोनों राज्यों में प्री मानसून एक्टिव है, जिसके चलते लगातार बारिश हो रही है।  MP-छत्तीसगढ़ में प्री मानसून एक्टिव इस बीच मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है. छत्तीसगढ़ में अगले पांच दिनों तक प्रदेश के कई स्थानों में तेज हवा के साथ हल्की बारिश की संभावना है. कई जगहों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी भी चल सकता है. वहीं मध्य प्रदेश में 30 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. राजधानी भोपाल, सागर, रायसेन, सीहोर में तेज बारिश होगी, जिससे मौसम सुहाना रहेगा. हालांकि कई जिलों में तेज धूप रहेगी। 

पेरिस ओलिंपिक में अनजाने में गोल्ड जीतने वाली मार्गरेट एबॉट की हैरान करने वाली कहानी

 नई दिल्‍ली  खेल जगत में कई विचित्र घटनाएं देखने को मिलती हैं, पर ऐसा भी हुआ है जब कोई महिला दुनिया के सबसे बड़े खेल मंच पर गोल्‍ड मेडल जीतती है, लेकिन उसे जीवन भर अपनी इस उपलब्धि के बारे में पता ही न चले? यह अद्भुत कहानी है गोल्फ खिलाड़ी मार्गरेट एबॉट की। 15 जून 1878 को जन्मीं एबॉट दुनिया की पहली महिला ओलिंपिक चैंपियन तो बनीं, लेकिन अपनी ही जीत के जश्न से हमेशा अनजान रहीं। भारत की मिट्टी से जुड़ी इस गुमनाम चैंपियन की कहानी दिलचस्प है। इसने महिलाओं के लिए खेलों के दरवाजे खोले। मार्गरेट एबॉट     जन्म: 15 जून 1878     मृत्यु: 10 जून 1955 कोलकाता से शुरू हुआ सफर मार्गरेट एबॉट का जन्म भारत के कोलकाता (कलकत्ता) में हुआ था। उनके पिता चार्ल्स पैटरसन एबॉट एक अमेरिकी व्यापारी थे। वह ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में बिजनेस करते थे। पिता के निधन के बाद उनका परिवार वापस अमेरिका लौट गया और शिकागो में बस गया। यहीं पर उनकी मां मैरी ने एक संपादक के रूप में अपनी नई शुरुआत की। शिकागो के इसी माहौल में मार्गरेट ने पहली बार गोल्फ खेलना शुरू किया। अखबार में देखा विज्ञापन 1890 के दशक के अंतिम वर्षों में कला की बारीकियां सीखने के लिए मार्गरेट अपनी मां के साथ पेरिस आ गईं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने गोल्फ खेलना जारी रखा। एक दिन उन्होंने पेरिस के अखबार में 4 अक्टूबर 1900 को होने वाले एक गोल्फ टूर्नामेंट का विज्ञापन देखा। यह प्रतियोगिता पेरिस से कुछ मील दूर स्थित कॉम्पिएन गोल्फ क्लब में होने वाली थी। गोल्फ के शौक के चलते मार्गरेट और उनकी मां मैरी दोनों ने इसमें हिस्सा लेने का फैसला किया। अनजाने में रचा ओलिंपिक का इतिहास 1900 का पेरिस ओलिंपिक आज के भव्य ओलिंपिक खेलों जैसा बिल्कुल नहीं था। इसे पेरिस में चल रहे 'विश्व मेले' के एक हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था। इस आयोजन में इतनी अव्यवस्था थी कि अधिकांश खिलाड़ियों को यह मालूम ही नहीं था कि वे ओलिंपिक का हिस्सा बन रहे हैं। मार्गरेट भी इन्हीं खिलाड़ियों में से एक थीं। उन्होंने अपने शानदार खेल के दम पर पहला स्थान हासिल किया वहीं उनकी मां सातवें नंबर पर रहीं। इस तरह वह अनजाने में ही अमेरिका और दुनिया की पहली महिला ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट बन गईं। 70 साल बाद खुला दुनिया की पहली चैंपियन का राज     मार्गरेट ने अपनी पूरी जिंदगी यही सोचकर गुजार दी कि उन्होंने पेरिस में सिर्फ एक सामान्य गोल्फ टूर्नामेंट जीता था।     1955 में उनका निधन हो गया और उनके चैंपियन बनने का रहस्य लगभग 70 सालों तक दफन रहा।     बाद में अमेरिकी ओलिंपिक बोर्ड की अधिकारी पाउला वेल्च की नजर न्यूयॉर्क के ओलिंपिक मुख्यालय में लगी एबॉट की एक पुरानी तस्वीर पर पड़ी।     पाउला ने गहरी छानबीन की, पुराने दस्तावेज खंगाले और तब जाकर यह सच्चाई दुनिया के सामने आई कि वह ओलिंपिक चैंपियन थीं।     1984 में उनके बेटे फिलिप एबॉट ने अपनी मां की इस उपलब्धि पर एक लेख लिखकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।     ऐसे दौर में जब महिलाओं का खेलों में आना वर्जित माना जाता था, मार्गरेट एबॉट की यह अनजानी सफलता आज भी खेल जगत के लिए एक अनमोल प्रेरणा है।  

श्रीडूंगरगढ़ में मंत्री सुमित गोदारा का संवाद, एनएफएसए लाभार्थियों को मिला प्रमाण पत्र

जयपुर पंचायत समिति परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गोदारा ने कहा कि गिव अप अभियान ने प्रदेश के 84 लाख लोगों की खोई मुस्कान लौटाई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अगुवाई में प्रदेश में चला यह अभियान देशभर के लिए नजीर बना। अभियान के तहत 82 लाख लोगों द्वारा स्वेच्छा से लाभ त्याग करना देशभर में नजीर है। गोदारा ने कहा कि घर-घर संपर्क के दौरान यह सामने आया कि अपात्र लोग इस योजना का लाभ ले रहे थे जबकि पात्र एवं जरूरतमंद इससे वंचित हैं। खाद्य सुरक्षा अधि​नियम के अनुसार प्रदेश के 4.46 करोड़ लोगों को ही इसका लाभ दिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि इसे ध्यान रखते हुए 1 नवंबर, 2024 को यह अभियान शुरू किया और सक्षम लोगों से स्वेच्छा से एनएफएसए का लाभ त्यागने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि अभियान से प्रेरित होकर 56 लाख ने इसका त्याग किया और 29 लाख ने ईकेवाईसी नहीं करवाई। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने एक दशक से अधिक समय के बाद 26 जनवरी, 2025 को एनएफएसए पोर्टल चालू किया और अब तक 84 लाख वास्तविक पात्रजनों को लाभ दिया जा सका है। उन्होंने कहा कि इन लाभार्थियों को निःशुल्क इलाज, गैस सिलेंडर सब्सिडी और दुर्घटना में मृत्यु होने की स्थिति में परिजनों को पांच लाख रुपए तक की सहायता मिलेगी। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दस साल पूर्व चला ऐसा अभियान गोदारा ने कहा कि दस वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गैस सब्सिडी स्वेच्छा के छोड़ने का अभियान चला। जिसे आमजन का बड़ा समर्थन मिला। गिव अप अभियान को भी आमजन का भरपूर सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसकी सराहना की। इस दौरान उन्होंने लाभार्थियों को खाद्य सुरक्षा प्रमाण पत्र प्रदान किए। जनप्रतिनिधियों में हो सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना गोदारा ने गत ढाई वर्षों में लूणकरणसर क्षेत्र में हुए विकास कार्यों के बारे में बताया और कहा कि इस अवधि में क्षेत्र में पानी, बिजली, सड़क, चिकित्सा, शिक्षा और पशु चिकित्सा के सहित सात प्रमुख क्षेत्रों में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले ढाई सालों में डूंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र प्रदेश के अग्रणी क्षेत्रों में शामिल होगा। गोदारा ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए जनप्रतिनिधियों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। प्रत्येक क्षेत्र में लाभार्थियों से हो रहा संवाद गोदारा ने कहा कि प्रदेश में चले ऐतिहासिक गिव अप अभियान की सफलता के पश्चात मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों के एनएफएसए लाभार्थियों के साथ संवाद करने के निर्देश दिए हैं। इसकी अनुपालना में अब तक नोखा और खाजूवाला में लाभार्थी सम्मेलन आयोजित किया जा चुका है। भविष्य में अन्य विधानसभाओं में भी इसका आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि श्रीडूंगरगढ़ में 34 लाख लोगों ने स्वेच्छा से एनएफएसए का लाभ छोड़ा है, जिससे 30 हजार से अधिक पात्र लोगों को योजना से जोड़कर राहत दी गई है। श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत ने कहा कि गत ढाई वर्षों में क्षेत्र ने विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। क्षेत्र में सड़क, पानी, विद्युत तंत्र सुदृढ़ीकरण सहित आधारभूत सुविधाओं का विकास तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के प्रत्येक गांव में बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मर लगे हैं। जिससे विद्युत तंत्र में आमूलचूल सुधार हुआ है। विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष राम गोपाल सुथार ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मजदूरों, गरीबों, महिलाओं, वृद्धजनों और किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की अनेक योजनाएं इन वर्गों के लिए चलाई जा रही हैं। पात्र व्यक्ति इनका लाभ उठाएं, उन्होंने शहरी और ग्रामीण सेवा शिविरों में अधिक से अधिक लोगों को पहुंचाने का आह्वान किया। इस दौरान जालम सिंह भाटी, रामेश्वर पारीक और छैलू सिंह शेखावत ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में मानमल शर्मा, विनोद गिरी गुसाई, महेंद्रनाथ तंवर, कानाराम, राजकुमार कस्वा, हेमनाथ जाखड़ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अनेक लोगों ने मंत्री गोदारा का मालाएं पहनाकर स्वागत किया। बीकानेर से श्रीडूंगरगढ़ के बीच दर्जनों स्थानों पर हुआ अभिनन्दन इससे पहले बीकानेर से रवाना होने पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा का रायसर, सेरूणा, झंझेउ, जोधासर और लखासर सहित श्रीडूंगरगढ़ तक दर्जनों स्थानों पर भव्य स्वागत हुआ। बड़ी संख्या में लोगों ने की मंत्री गोदारा की अगवानी की। इनमें सेरूणा से पूर्व सरपंच, रणवीर सिंह, गौरीशंकर स्वामी, भगवान स्वामी, झंझेउ से श्री भँवर सिंह तंवर, रीडी से बालू राम जाखड़, मुनीराम जाखड़, बादनूं से नवरत्न घिंटाला, लखासर से भंवर सिंह चंद्रावत, गोपालसर से सीताराम बुढ़िया, कुलदीप सारस्वत सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल रहे।  

चार भीषण सड़क दुर्घटनाओं से दहला फतेहाबाद, 12 लोगों ने गंवाई जान

फतेहाबाद. राजस्थान के बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में सोमवार दोपहर स्विफ्ट डिजायर कार और ट्रक की आमने-सामने की भिड़ंत में फतेहाबाद के गांव मताना निवासी पंचायत विभाग से सेवानिवृत सीनियर अकाउंटेंट ओमप्रकाश सुथार (58) समेत उनके परिवार के छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में ओमप्रकाश की पत्नी सोरमा देवी (55), बेटी प्रमिला (30), दोहती यशवी (10), खुशी (8) और पोता रोनित (4) शामिल हैं। इस भीषण दुर्घटना में 10 वर्षीय बच्ची तनवी गंभीर रूप से घायल हो गई, जो जिंदगी की जंग लड़ रही है। उसका बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में उपचार चल रहा है। ओमप्रकाश सुथार महज 15 दिन पहले ही डीडीपीओ कार्यालय से रिटायर हुए थे और परिवार सहित रविवार को मुकाम धाम दर्शन के लिए रवाना हुए थे। सोमवार सुबह दर्शन करने के बाद परिवार कार से वापस फतेहाबाद लौट रहा था। दोपहर करीब ढाई बजे श्रीडूंगरगढ़ थाना क्षेत्र के हेमासर गांव के पास सामने से आ रहे ट्रक से कार की आमने-सामने की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और सड़क पर कई फीट तक टायरों के घिसटने के निशान बन गए। अमानी के पास ओवरलोड निजी बस पलटने से होमगार्ड जवान समेत तीन की जान टोहाना उपमंडल के गांव अमानी के पास फतेहाबाद-भूना-टोहाना रूट की एक प्राइवेट बस अनियंत्रित होकर खेतों में पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में गांव डूल्ट निवासी होमगार्ड जवान बलविंद्र सिंह, भोडी निवासी 70 वर्षीय मोनी देवी और भोडियाखेड़ा निवासी 22 वर्षीय छात्रा बोहती देवी की मौत हो गई। बस में क्षमता से अधिक करीब 80 सवारियां ठंसी हुई थीं और कई यात्री तो छत पर भी बैठे थे। हादसे में 30 से अधिक लोग घायल हो गए, जिन्हें टोहाना के सरकारी व निजी अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त ड्राइवर की जगह परिचालक बस चला रहा था। यात्रियों के अनुसार, बस चला रहे परिचालक के पास अचानक फोन आया, जिससे बस अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराकर पलट गई। रतिया में पिकअप की टक्कर से दो सगे भाइयों ने तोड़ा दम रतिया क्षेत्र के मिराना गांव के पास तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, जहां एक पिकअप ने बाइक सवार दो सगे भाइयों को जोरदार टक्कर मार दी। इस सड़क हादसे में गांव पलांटा निवासी कर्म सिंह (57) और रणजीत सिंह (54) की मौत हो गई। दोनों भाई गुरुद्वारे में माथा टेककर अपने घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में काल ने उन्हें अपना ग्रास बना लिया। पुलिस ने घटना के बाद पिकअप वाहन को अपने कब्जे में ले लिया है और मौके से फरार चालक की सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी है। शहर में युवक ने फंदा लगाकर दी जान, हादसे में घायल युवक की भी उपचार के दौरान मौत सड़क हादसों के अलावा जिले में आत्महत्या और लापरवाही के कारण भी मौत के मामले सामने आए। फतेहाबाद शहर के गांव धारनिया निवासी 25 वर्षीय युवक विक्रम ने मानसिक तनाव के चलते अपने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। वहीं, एक अन्य सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरनगर निवासी और वर्तमान में फतेहाबाद शहर के अशोक नगर निवासी 18 वर्षीय युवक अभिषेक की उपचार के दौरान अस्पताल में मौत हो गई।

हवा में 15 चक्कर लगाने के बाद सुरक्षित उतरी एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट, तकनीकी खामी बनी वजह

कन्नूर  केरल के कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जेद्दाह जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की एक फ़्लाइट में तकनीकी खराबी आने के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. टेकऑफ के तुरंत बाद ही इस दिक्कत का पता चला, जिससे एयरक्राफ़्ट एक घंटे से ज़्यादा समय तक हवा में चक्कर लगाता रहा और फिर सुरक्षित रूप से लैंड कर गया. इस तरह पायलट के समय पर दखल देने से एक बड़ी मुसीबत टल गई।  फ़्लाइट कन्नूर से सुबह 7.30 बजे 150 यात्रियों को लेकर निकली थी. रास्ते में जब एयरक्राफ़्ट मंगलुरु के एयरस्पेस में पहुंचा तो पायलट को तकनीकी दिक्कतें नजर आई. यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फ़्लाइट को तुरंत कन्नूर वापस डायवर्ट करने का तुरंत फैसला लिया गया।  पायलट ने एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क किया और इमरजेंसी लैंडिंग की इजाजत मांगी. हालाँकि, सुरक्षित लैंडिंग के लिए एयरक्राफ़्ट का फ़्यूल लेवल कम करना पड़ा. ऐसा करने के लिए फ़्लाइट ने मंगलुरु एयरस्पेस के ऊपर लगभग पंद्रह बार चक्कर लगाए।  इमरजेंसी में एयरक्राफ्ट को सुरक्षित रूप से लैंड कराने के लिए फ्यूल जलाना एक स्टैंडर्ड तरीका है. पायलट एयरक्राफ्ट का वजन कम करने और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चत करने के लिए यह तरीका अपनाते हैं. ज़्यादा फ्यूल खत्म करने से बड़ी मुसीबतों को रोकने में मदद मिलती है. इसमें लैंडिंग के समय आग लगने का खतरा भी शामिल है, और यह काम एविएशन नियमों के तहत जरूरी सुरक्षा सावधानियों के मुताबिक है. एक घंटे से ज़्यादा हवा में चक्कर लगाने के अनुभव से यात्रियों में काफी चिंता हो गई।  फ्यूल लोड को काफी कम करने के बाद फ्लाइट कन्नूर एयरपोर्ट के रनवे पर सुरक्षित रूप से लैंड हो गई. इमरजेंसी लैंडिंग की आशंका को देखते हुए एयरपोर्ट ने फायर फोर्स, एम्बुलेंस और मेडिकल टीमों सहित इमरजेंसी सिस्टम को स्टैंडबाय पर रखा. अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि एयरक्राफ्ट में सवार सभी 150 यात्री और क्रू मेंबर पूरी तरह सुरक्षित उतर गए।  एयरक्राफ्ट के रनवे पर सुरक्षित रूप से लैंड करने के बाद अधिकारियों और यात्रियों दोनों ने राहत की सांस ली. इसके बाद यात्रियों को टर्मिनल ले जाया गया, जहाँ एयरपोर्ट अधिकारियों ने जरूरी मेडिकल मदद और दूसरी सुविधाओं का इंतजाम किया. यात्रियों का सामान सुरक्षित रूप से निकालने का प्रोसेस भी पूरा कर लिया गया।  डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन समेत एविएशन अथॉरिटीज, टेक्निकल खराबी की सही वजह का पता लगाने के लिए डिटेल में इंस्पेक्शन करेगी. इंस्पेक्शन के बाद ही यह साफ होगा कि खराबी एयरक्राफ्ट के लैंडिंग गियर में थी या किसी दूसरे टेक्निकल सेक्शन में।  मेंटेनेंस का काम करने के लिए एक एक्सपर्ट इंजीनियरिंग टीम कन्नूर पहुंच गई है, और खराबी पूरी तरह से ठीक होने के बाद ही एयरक्राफ्ट को अगली सर्विस के लिए क्लियर किया जाएगा. एयर इंडिया एक्सप्रेस खाड़ी देशों और केरल के बीच सर्विस देने वाली बड़ी एयरलाइन्स में से एक है. मालाबार इलाके में बाहर से आए लोगों के लिए बहुत ज़्यादा भरोसेमंद फ्लाइट से जुड़ी ऐसी घटनाओं ने यात्रियों में काफ़ी चिंता पैदा कर दी है। 

अंडे की एक्सपायरी डेट जानना जरूरी: खराब अंडा खाने से हो सकता है फूड पॉइजनिंग का खतरा

अंडा प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स का काफी अच्छा सोर्स है. इस कारण फिट रहने वाले लोग, हैवी वर्कआउट वाले लोग और हेल्दी ब्रेकफास्ट करने वाले लोग इसे अपनी डाइट में शामिल करते ही हैं. 1 अंडे में करीब 6-7 ग्राम प्रोटीन मिलता है जो रोजाना के प्रोटीन इंटेक को बढ़ाने के लिए काफी होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंडों की भी एक एक्सपायरी डेट होती है? अक्सर लोग मार्केट से अंडे खरीदकर लाते हैं और कई दिनों तक फ्रिज में रखकर खाते रहते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यदि आप एक्सपायर्ड या खराब हो चुके अंडे खाते हैं तो यह सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. तो आइए जानते हैं यदि आपने गलती से एक्सपायरी डेट निकल जाने के बाद खराब अंडा खा लिया तो सेहत को क्या नुकसान हो सकता है. क्या होती है अंडों की एक्सपायरी डेट? यदि आप किसी कंपनी के अंडे खरीदते हैं तो उनकी पैकिंग पर आमतौर पर एक बेस्ट बिफोर या पैक डेट लिखी होती है. हेल्थलाइन का कहना है, रेफ्रिजरेटर में सही तरीके से स्टोर किए गए अंडे पैक होने की तारीख से लगभग 3 से 5 हफ्तों तक बिल्कुल फ्रेश और खाने लायक रहते हैं. इस टाइम पीरियड के बाद भी अंडे खराब नहीं होते, बस उन्हें सही तापमान पर रखा गया हो. हालांकि, कोई भी अंडा हो समय बीतने के साथ अंडों की क्वालिटी, स्वाद और टेक्सचर में बदलाव आने लगता है.   खराब अंडा खाने से सेहत को क्या है खतरा? यदि आपने अनजाने में खराब या एक्सपायर्ड अंडा खा लिया है तो आप फूड पॉइजनिंग का शिकार हो सकते हैं. यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) के अनुसार, खराब अंडों में साल्मोनेला बैक्टीरिया पनपने का सबसे ज्यादा चांस होता है. इसे खाने के 12 से 72 घंटों के भीतर शरीर में लक्षण दिखने लगते हैं. प्रभावित व्यक्ति को तेज बुखार, पेट में मरोड़, दस्त (डायरिया) और उल्टी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों और बच्चों में यह इन्फेक्शन ज्यादा खतरनाक रूप ले सकता है.   खराब अंडों को कैसे पहचानें? मेडिकल न्यूज टुडे के मुताबिक, अंडा सही है या खराब, इसे चेक करने का सबसे पॉपुलर तरीका फ्लोट टेस्ट है. इसके लिए एक कटोरे में ठंडा पानी भरें और उसमें अंडा डालें. अगर अंडा तली में बैठ जाता है तो वह फ्रेश है. अगर अंडा पानी के ऊपर तैरने लगे तो समझ जाएं कि वह पुराना हो चुका है. इसके अलावा अंडा क्रैक करने पर अगर उसमें से अजीब या गंदी बदबू आ रही है तो उसे तुरंत डस्टबिन में फेंक दें.   स्टोरेज की इन गलतियों से बचें सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की गाइडलाइन के अनुसार, अंडों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सही स्टोरेज बहुत जरूरी है. अंडों को कभी भी फ्रिज के दरवाजे में नहीं रखना चाहिए क्योंकि दरवाजा बार-बार खुलने से वहां तापमान बदलता रहता है. अंडों को हमेशा उनके ओरिजिनल कार्टन में रखकर फ्रिज के सबसे ठंडे हिस्से यानी अंदर की शेल्फ पर स्टोर करें जिससे बैक्टीरिया की ग्रोथ को रोका जा सके.

बाहरी फेरी वालों पर पुलिस की नजर, सत्यापन अभियान से सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत

दंतेवाड़ा. क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पुलिस ने सत्यापन अभियान तेज कर दिया है. बचेली में बिना अनुमति घूम-घूमकर सामान बेच रहे एक बाहरी वाहन पर कार्रवाई की गई. वाहन चालक आवश्यक सूचना और दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका. जांच के बाद उस पर जुर्माना लगाया गया. पुलिस ने उसे जिले की सीमा से बाहर जाने के निर्देश दिए. अभियान का उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना है. पुलिस लगातार बाहरी व्यक्तियों और किरायेदारों का सत्यापन कर रही है. नागरिकों से भी सतर्क रहने की अपील की गई है. संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को देने को कहा गया है. मकान मालिकों को किरायेदारों की जानकारी थाने में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं. जनसहयोग को सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है. पुलिस का कहना है कि सतर्कता से ही अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है.

महाभारत के वो 5 गांव आज कहां हैं और क्या हैं उनके आधुनिक नाम? पूरी जानकारी

 महाभारत की कथा से जुड़ी एक बेहद प्रसिद्ध पंक्ति आपने जरूर सुनी होगी, 'जब भगवान श्रीकृष्ण हस्तिनापुर की सभा में पांडवों के लिए मात्र पांच गांव की मांग करते हैं. लेकिन दुर्योधन अहंकार में आकर वह पांच गांव भी देने से मना कर देता है.' इसके बाद क्या हुआ, यह हम सभी जानते हैं महाभारत का विनाशकारी युद्ध. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज के समय में वे पांच गांव कहां स्थित हैं और उनके नाम क्या हैं? आइए जानते हैं इस रोचक और ऐतिहासिक तथ्य को. जब पांडवों को हस्तिनापुर से निकाला गया था, तब उन्होंने इंद्रप्रस्थ को अपनी राजधानी बनाया था. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इंद्रप्रस्थ पहले खांडवप्रस्थ था, जिसे पांडवों ने विकसित किया था. माना जाता है कि आज की दिल्ली का पुराना किला ही प्राचीन इंद्रप्रस्थ का स्थान है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, पुराना किला यमुना नदी के किनारे स्थित था. यहां खुदाई में टेराकोटा के खिलौने और चित्रित मिट्टी के बर्तन मिले हैं, जिनका काल लगभग 1000 ईसा पूर्व माना गया है. ये प्रमाण इंद्रप्रस्थ की ऐतिहासिकता को मजबूत करते हैं. अब बात करते हैं उन पांच गांवों की व्याघ्रप्रस्थ पहला गांव था व्याघ्रप्रस्थ, जिसे आज बागपत के नाम से जाना जाता है. व्याघ्र का अर्थ होता है बाघ, और कहा जाता है कि यहां प्राचीन समय में बाघ पाए जाते थे. इसी स्थान को लाक्षागृह की घटना से भी जोड़ा जाता है, जहां पांडवों को जलाने की साजिश रची गई थी. स्वर्णप्रस्थ दूसरा गांव था स्वर्णप्रस्थ, जिसे आज सोनीपत कहा जाता है. समय के साथ इसका नाम बदलते-बदलते सोनीपत हो गया. यह हरियाणा का एक प्रमुख शहर है. पांडुप्रस्थ तीसरा गांव था पांडुप्रस्थ, जिसे आज पानीपत के नाम से जाना जाता है. यह स्थान नई दिल्ली से लगभग 90 किलोमीटर दूर है और इसके पास ही कुरुक्षेत्र स्थित है, जहां महाभारत का युद्ध हुआ था. तिलप्रस्थ चौथा गांव था तिलप्रस्थ, जिसे आज फरीदाबाद जिले का तिलपत कहा जाता है. यह स्थान बहुत प्राचीन है और यहां से महाभारत काल से भी पहले की सभ्यता के प्रमाण मिले हैं. इन सभी गांवों में तिलपत को सबसे प्राचीन माना जाता है. यह कभी इंद्रप्रस्थ राज्य के अधीन था. कुरुक्षेत्र कुरुक्षेत्र हरियाणा का एक प्रमुख तीर्थस्थल है. यहीं ज्योतिसर में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था. कहा जाता है कि यह पूरा क्षेत्र 48 कोस में फैला हुआ था. इन पांच गांवों के अलावा, महाभारत में सबसे महत्वपूर्ण स्थान हस्तिनापुर को माना जाता है. यह कौरवों की राजधानी थी और पूरा महाभारत इसी के इर्द-गिर्द घूमता है. आज हस्तिनापुर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित है और एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में जाना जाता है. मान्यता है कि एक समय गंगा नदी की भयंकर बाढ़ ने इस पूरे नगर को नष्ट कर दिया था.

छत्तीसगढ़ के स्कूलों में लौटी रौनक, नए सत्र में छात्रों का हुआ पारंपरिक अभिनंदन

रायपुर. छत्तीसगढ़ में आज से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो गई है। गर्मी की छुट्टियों के बाद पहले दिन स्कूल पहुंचे विद्यार्थियों का शिक्षकों ने तिलक लगाकर और किताबें भेंट कर स्वागत किया। स्कूलों में बच्चों के चेहरों पर उत्साह और नई उम्मीदें साफ नजर आईं। खासकर पहली बार स्कूल पहुंचे नौनिहालों के लिए यह दिन यादगार रहा। वहीं राज्य सरकार की ओर से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और अधिक से अधिक बच्चों को स्कूलों से जोड़ने के प्रयास भी तेज किए जा रहे हैं। बता दें कि 30 जून को प्रदेश में शाला प्रवेश उत्सव का बड़ा आयोजन किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और शिक्षा मंत्री शामिल होंगे। फिलहाल नए सत्र के पहले दिन स्कूलों में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ स्कूलों में पढ़ाई के अलावा राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मूल्यों पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार प्रार्थना सभा में नियमित रूप से राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और राज्यगीत ‘अरपा पैरी के धार’ का गायन कराया जाएगा। साथ ही बच्चों को देशभक्ति, अनुशासन और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित होंगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों में इन गतिविधियों के नियमित संचालन के निर्देश दिए हैं। नए शिक्षा सत्र में बच्चों को केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने पर भी विशेष फोकस रहेगा। स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा को अधिक प्रभावी और प्रेरणादायी बनाने के लिए नियमित रूप से राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और राज्यगीत का गायन कराया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियां तेज, मुख्य सचिव ने की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक

छत्तीसगढ़ में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियां तेज  मुख्य सचिव ने ली उच्च स्तरीय बैठक,  “स्वस्थ आयु के लिए योग” थीम निर्धारित  रायपुर,  छत्तीसगढ़ में आगामी 21 जून को 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष योग दिवस की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” निर्धारित की गई है। आयोजन को व्यापक और सफल बनाने के लिए राज्य के मुख्य सचिव विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक ली और तैयारियों की समीक्षा की। सरगुजा में होगा राज्य स्तरीय मुख्य आयोजन          बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का संभावित राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम सरगुजा जिले में आयोजित होगा। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को इसके लिए सभी आवश्यक और पुख्ता तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक जन-भागीदारी           मुख्य सचिव विकासशील ने निर्देश दिए कि भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य के सभी जिलों में योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए। राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत के प्रमुख स्थलों पर अनिवार्य रूप से योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए आयुष विभाग और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को आपस में बेहतर समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है। जिला स्तर पर अधिक से अधिक जन-सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। NEET परीक्षार्थियों का रखा जाएगा विशेष ध्यान            मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि 21 जून को ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा नीट (NEET) की पुनः परीक्षा भी आयोजित की जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि योग दिवस के आयोजनों के कारण नीट परीक्षा केंद्रों और परीक्षार्थियों को किसी भी तरह की असुविधा या तकलीफ न हो। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी और डिजिटल पंजीयन            आयुष विभाग के अधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार द्वारा इस बार व्यापक जनभागीदारी के निर्देश हैं। 14 जून 2026 से सुबह 6.15 बजे से 7.35 बजे तक ऑनलाइन योग अभ्यास सत्र के माध्यम से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आम नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-315-7008 जारी किया गया है, जिस पर मिस्ड कॉल देकर आसानी से पंजीयन कराया जा सकता है। अधिकारियों ने  बताया कि आयुष मंत्रालय द्वारा योग संगम पोर्टल-2026 प्रारंभ किया गया है। जिसके माध्यम से विभिन्न संस्थाएं, विभाग, शैक्षणिक संस्थान, स्थानीय निकाय,  स्वायत्तशासी संस्थाएं, सार्वजनिक उपक्रम योग संस्थान एवं सामुदायिक संगठन दिनांक 21 जून 2026 को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों के लिए पंजीयन एवं  कार्यक्रम के उपरांत विवरण एवं फोटोग्राफ अपलोड किये जा सकते है। शासन के समस्त विभागों के सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त एवं कलेक्टरों को अधीनस्थ संस्थाओं, कार्यालयों को उक्त पोर्टल पर पंजीयन कराने एवं आयोजन उपरांत कार्यक्रम की जानकारी पोर्टल में अपलोड करने हेतु निर्देशित करने कहा गया है। पंजीयन हेतु वेब पोर्टल https//:yoga.ayush.gov.in/yoga-sangam  है।           मंत्रालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, गृह विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद समेत नगरीय प्रशासन, वाणिज्यिक कर, कृषि, श्रम और आयुष विभाग के सचिव एवं योग आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।