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सुरक्षा याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, परिवार से भागना बदनामी का कारण

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले एक जोड़े की सुरक्षा याचिका खारिज करते हुए कहा है कि इस तरह के संबंध ‘आधुनिक जीवनशैली’ का हिस्सा हैं, जो पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव में समाज के कुछ वर्गों में अपनाए जा रहे हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि माता-पिता के घर से बच्चों का भागना परिवार की ‘बदनामी’ का कारण बनता है। न्यायमूर्ति संदीप मोदगिल की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि विवाह एक पवित्र संबंध है, जिसे भारत में सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर अत्यधिक सम्मान प्राप्त है। जोड़े का दावा: परिवार कर रहा परेशान अदालत ने कहा कि देश की सांस्कृतिक परंपराओं में नैतिकता और आचार-विचार का विशेष महत्व है, जबकि समय के साथ कुछ लोगों ने लिव-इन रिलेशनशिप को अपनाना शुरू किया है। याचिका में जोड़े ने दावा किया था कि वे दोनों बालिग हैं, एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और भविष्य में विवाह करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे वर्तमान में साथ रह रहे हैं और उनके परिजनों द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है, लेकिन साथ ही यह भी टिप्पणी की कि माता-पिता के घर से भागना उनके सम्मान और गरिमा को प्रभावित करता है। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि लिव-इन संबंधों को वैधता तभी मिलती है जब दोनों पक्ष विवाह योग्य हों, अविवाहित हों और समाज के सामने स्वयं को पति-पत्नी के रूप में प्रस्तुत करते हों। न्यायालय ने यह भी कहा कि केवल कुछ दिनों तक साथ रहने के आधार पर किसी संबंध को लिव-इन मान लेना पर्याप्त नहीं है। अदालत के अनुसार, ऐसे मामलों में पुलिस सुरक्षा देना सामाजिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है और इसे अनुचित माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी रिश्ते को लिव-इन रिलेशनशिप के रूप में स्वीकार करने के लिए कुछ आवश्यक शर्तें होती हैं. दोनों पक्ष विवाह योग्य आयु के होने चाहिए, अविवाहित होने चाहिए और समाज के सामने खुद को पति-पत्नी जैसे रिश्ते में प्रस्तुत करना चाहिए. अदालत ने पाया कि याचिका में स्वयं कहा गया है कि एक पक्ष अभी विवाह योग्य आयु तक नहीं पहुंचा है और भविष्य में विवाह करने की बात कही गई है।  हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कुछ दिनों तक साथ रहने भर से किसी रिश्ते को वैध लिव-इन रिलेशनशिप नहीं माना जा सकता. सिर्फ एक सामान्य दावा कर देने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दोनों वास्तव में ऐसे रिश्ते में हैं, जिसे कानूनी मान्यता दी जा सके. अदालत ने कहा कि किसी रिश्ते को वैधानिक स्वीकार्यता देने के लिए निर्धारित शर्तों का पूरा होना जरूरी है।  जस्टिस मौदगिल ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में पुलिस सुरक्षा का आदेश देना अप्रत्यक्ष रूप से एक अवैध या गैर-मान्यता प्राप्त रिश्ते को स्वीकृति देने जैसा हो सकता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान द्वारा दी गई स्वतंत्रता पूर्णतः निरंकुश नहीं है और उसे कानून की सीमाओं के भीतर ही लागू किया जा सकता है. इन्हीं आधारों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन कपल की सुरक्षा याचिका खारिज कर दी और पुलिस संरक्षण देने से इनकार कर दिया। 

गैंगस्टरों के खिलाफ पुलिस की बड़ी तैयारी, विशेष स्क्वाड करेगा नेटवर्क का सफाया

चंडीगढ़. सेक्टर-11 में श्री कुमार केमिस्ट के कैशियर जानकी दास की शनिवार को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या की घटना से व्यापारी व उद्योगपति वर्ग में खासी दहशत हैं। गैंगस्टरों की ओर से रंगदारी के लिए आ रहे फोन काॅल ने चंडीगढ़ पुलिस और कारोबारियों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। शहर के केमिस्ट संचालकों समेत अन्य कारोबारियों को फ्रांस, कनाडा और अन्य विदेशी नंबरों से काल कर लगातार रंगदारी मांगी जा रही है। रंगदारी व संगठित आपराधिक गतिविधियों पर नकेल कसने के चंडीगढ़ पुलिस ने मास्टर प्लान तैयार किया है। डीजीपी डाॅ. सागर प्रीत हुड्डा ने कहा शहर में गैंगस्टरों का नेटवर्क खत्म करने के लिए स्पेशल एंटी-गैंगस्टर स्क्वाड गठित किया जा रहा है। स्पेशल एंटी-गैंगस्टर स्क्वाड बनाने का उद्देश्य शहर में हाल के समय में बढ़ी गैंगस्टर गतिविधियों, रंगदारी काल, व्यापारियों को मिल रही धमकियों और सेक्टर-11 के केमिस्ट हत्याकांड जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण करना रहेगा। इसके साथ ही चंडीगढ़ पुलिस अब गैंगस्टर गतिविधियों, रंगदारी नेटवर्क और सुपारी किलिंग जैसे मामलों पर विशेष फोकस करेगी। स्पेशल स्क्वाड गैंगस्टरों की पहचान, निगरानी, गिरफ्तारी और उनके आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करने का काम करेगी। हत्या के अगले दिन ही फिर धमकी जानकी दास हत्याकांड के एक दिन बाद ही सेक्टर-16 और सेक्टर-19 स्थित मेडिकल स्टोर संचालक को धमकी भरे संदेश मिलने का मामला सामने आया। संदेश में एक दिन के भीतर मांग पूरी करने की चेतावनी दी गई थी। संचालक के पास विदेशी नंबर से कॉल भी आई, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया और तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है तथा कॉल और संदेश भेजने वालों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। व्यापारियों में दहशत शनिवार को हुए गोलीकांड और उसके अगले ही दिन धमकियों के बाद केमिस्ट समुदाय समेत कारोबारी वर्ग में भय का माहौल। इसको लेकर चंडीगढ़ केमिस्ट एसोसिएशन (सीसीए) का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को डीजीपी डाॅ. सागर प्रीत हुड्डा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने हत्याकांड के मामले में आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी, व्यापारियों की सुरक्षा मजबूत करने और रंगदारी व संगठित आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की। इसके साथ कहा कि व्यापारियों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बैठक के दौरान डीजीपी ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनी और भरोसा दिलाया कि मामले में शामिल आरोपितों के खिलाफ सख्त और निर्णायक कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा व्यापारिक प्रतिष्ठानों और बाजारों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। एंटी-गैंगस्टर स्क्वाड के प्रमुख काम गैंगस्टरों की पहचान और निगरानी करना। रंगदारी फिरौती, धमकी और वसूली के मामलों की जांच करना। शूटरों और गैंग सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाना। अपराधियों के नेटवर्क और फंडिंग का पता लगाना। गैंगस्टरों को हथियार, वाहन या अन्य संसाधन उपलब्ध कराने वालों पर कार्रवाई करना। इंटरनेट मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म पर गैंगस्टरों की गतिविधियों की निगरानी करना। अन्य राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करना। व्यापारियों, उद्योगपतियों और आम लोगों को मिलने वाली धमकियों की जांच करना। गैंगवार, सुपारी किलिंग और संगठित अपराध को रोकने के लिए खुफिया जानकारी जुटाना।

नाम की गलती से परेशान ग्रामीण को शिविर में मिला न्याय

जयपुर  माता—पिता ने नाम रखा डूंगरदास लेकिन पटवारी की लापरवाही से राजस्व रेकार्ड में नाम दर्ज हुआ डूंगरराम। बैंक पास बुक, आधार, जन आधार और अन्य रेकार्ड में असली नाम डूंगरदास चलता रहा। अब उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत अन्य योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल सकता था क्योंकि खेत हो गया डूंगरराम के नाम और बैंक पास बुक डूंगरदास के नाम। एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर काट काट कर थक गया और अब यह डर घर कर गया कि नाम दुरूस्ती से पहले ईश्वर के यहां से बुलावा आ गया तो जमीन उसकी संतान के नाम नहीं हो पायेगी क्योंकि जमीन डूंगरराम के नाम है और डूंगरराम नाम का कोई आदमी उस गांव में था ही नहीं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने डूंगरदास जैसे लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए ही ग्रामीण सेवा शिविर अभियान चला रखा है। जैसलमेर जिले की ग्राम पंचायत खींया में आयोजित शिविर में डूंगरदास की जमीन के रेकार्ड में 10 मिनट में उसका गलत नाम डूंगरराम हटा कर वास्तविक नाम दर्ज किया गया।  वर्षों से चली आ रही समस्या का शिविर में ही समाधान होने पर डूंगरदास के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए उनका आभार प्रकट किया है। अब उसे उन सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, जिनका अब तक पात्र तो था लेकिन नाम में त्रुटि के कारण अब तक वंचित था।                  जैसलमेर जिले की ही ग्राम पंचायत सादा में आयोजित शिविर में वर्षों से लंबित नाम शुद्धिकरण की समस्या का भी मौके पर ही समाधान किया गया।       शिविर में चेतनाराम, भागूराम, नेताराम एवं चन्द्रेश ने राजस्व अभिलेखों मेंदर्ज नामों की त्रुटियों के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। दस्तावेज चैक करने के बाद शिविर में ही पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी ने इनको  नाम शुद्धिकरण पत्र प्रदान किए गए। इसी प्रकार ग्राम पंचायत लोहारकी निवासी मीना पत्नी बाबूनाथ के जीवन में यह शिविर उम्मीद की नई किरण लेकर आया और वर्षों से संजोया गया उसका आवासीय भूखण्ड  पट्टे का सपना पूरा हुआ। उसने बताया कि श्री भजनलाल शर्मा ने उसे और उसके परिवार को इतना बड़ा उपहार दिया, वे उनकी इस पहल को कभी नहीं भूलेंगे।

नाम की गलती से परेशान ग्रामीण को शिविर में मिला न्याय

जयपुर  माता—पिता ने नाम रखा डूंगरदास लेकिन पटवारी की लापरवाही से राजस्व रेकार्ड में नाम दर्ज हुआ डूंगरराम। बैंक पास बुक, आधार, जन आधार और अन्य रेकार्ड में असली नाम डूंगरदास चलता रहा। अब उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत अन्य योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल सकता था क्योंकि खेत हो गया डूंगरराम के नाम और बैंक पास बुक डूंगरदास के नाम। एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर काट काट कर थक गया और अब यह डर घर कर गया कि नाम दुरूस्ती से पहले ईश्वर के यहां से बुलावा आ गया तो जमीन उसकी संतान के नाम नहीं हो पायेगी क्योंकि जमीन डूंगरराम के नाम है और डूंगरराम नाम का कोई आदमी उस गांव में था ही नहीं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने डूंगरदास जैसे लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए ही ग्रामीण सेवा शिविर अभियान चला रखा है। जैसलमेर जिले की ग्राम पंचायत खींया में आयोजित शिविर में डूंगरदास की जमीन के रेकार्ड में 10 मिनट में उसका गलत नाम डूंगरराम हटा कर वास्तविक नाम दर्ज किया गया।  वर्षों से चली आ रही समस्या का शिविर में ही समाधान होने पर डूंगरदास के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए उनका आभार प्रकट किया है। अब उसे उन सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, जिनका अब तक पात्र तो था लेकिन नाम में त्रुटि के कारण अब तक वंचित था।                  जैसलमेर जिले की ही ग्राम पंचायत सादा में आयोजित शिविर में वर्षों से लंबित नाम शुद्धिकरण की समस्या का भी मौके पर ही समाधान किया गया।       शिविर में चेतनाराम, भागूराम, नेताराम एवं चन्द्रेश ने राजस्व अभिलेखों मेंदर्ज नामों की त्रुटियों के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। दस्तावेज चैक करने के बाद शिविर में ही पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी ने इनको  नाम शुद्धिकरण पत्र प्रदान किए गए। इसी प्रकार ग्राम पंचायत लोहारकी निवासी मीना पत्नी बाबूनाथ के जीवन में यह शिविर उम्मीद की नई किरण लेकर आया और वर्षों से संजोया गया उसका आवासीय भूखण्ड  पट्टे का सपना पूरा हुआ। उसने बताया कि श्री भजनलाल शर्मा ने उसे और उसके परिवार को इतना बड़ा उपहार दिया, वे उनकी इस पहल को कभी नहीं भूलेंगे।

शहरी विकास और पर्यटन पर जोर, दंतेवाड़ा के लिए तैयार होगा नया मास्टर प्लान

दंतेवाड़ा. दंतेवाड़ा को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की कवायद तेज हो गई है. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए शहर का मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. योजना का उद्देश्य यातायात, पार्किंग और स्वच्छता जैसी चुनौतियों का समय रहते समाधान करना है. मां दंतेश्वरी मंदिर के आसपास सुविधाओं का विस्तार भी प्रस्तावित है. नगर विकास को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. नदी प्रदूषण रोकने और सीवरेज प्रबंधन को लेकर भी गंभीर पहल की गई है. भैरम बाबा मंदिर क्षेत्र में नदी कटाव रोकने के निर्देश दिए गए हैं. शहर के चौक-चौराहों का नामकरण महापुरुषों के नाम पर करने की घोषणा हुई है. बच्चों के लिए मनोरंजन सुविधाओं के विस्तार की भी योजना बनाई गई है. इसी क्रम में करीब डेढ़ करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया. नई अधोसंरचनाओं से व्यापार, स्वच्छता और जनसुविधाओं को मजबूती मिलेगी. दंतेवाड़ा को धार्मिक और आधुनिक नगर के रूप में विकसित करने की दिशा में यह अहम कदम माना जा रहा है.

AI मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक है: डेका; समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का शुभारंभ

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहायक है, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं-डेका समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया राज्यपाल ने रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका आज डॉ सी.वी. रमन  विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर डेका ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ तकनीक भी निरंतर विकसित हो रही है। ऐसे समय में तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए होना चाहिए। एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित में करें            राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक युग की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो चिकित्सा, कृषि, अर्थव्यवस्था और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में मानव की सहायक बन सकती है, लेकिन यह मानव बुद्धि, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का स्थान नहीं ले सकती। तकनीक को जीवन में सहायक के रूप में अपनाया जाना चाहिए न कि उसे किसी खतरे के रूप में स्थान दिया जाना चाहिए।  उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित के कार्यों में करें। अपने संबोधन में उन्होंने इंटरनेट के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ नकारात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। डिजिटल एडिक्शन न हो यह कोशिश करनी चाहिए। आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग          राज्यपाल ने कहा कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नवाचार और वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से हुआ है। जिस प्रकार अग्नि की खोज ने मानव जीवन को नई दिशा दी, उसी प्रकार आधुनिक विज्ञान और तकनीक भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। स्टार्टअप और नवाचार केवल आर्थिक प्रगति के साधन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम भी हैं। नवाचार के जरिए दिव्यांगजनों के जीवन को सरल बनाया जा सकता है, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं तथा समाज को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और इको-फ्रेंडली जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपनाना आज की आवश्यकता है।  भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता          छत्तीसगढ़ की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक समृद्ध आदिवासी संस्कृति और अपार संभावनाओं वाला राज्य है। यहां के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और अवसरों से जोड़ने की है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि, वन उत्पाद, उद्योग और सेवा क्षेत्र सहित प्रत्येक क्षेत्र में वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर देना होगा। राज्यपाल ने कहा कि भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।  सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का कर रही है प्रयास           कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई की पढ़ाई प्रारंभ की गई है। जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है इस तरह तकनीकी क्षेत्र में भी राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं। आज कंपनियों को जिस तरह के कोर्स की आवश्यकता है उसी के अनुरूप तकनीकी संस्थानों में कोर्स संचालित करने के प्रयास हो रहे हैं। सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का प्रयास कर रही है जिससे  युवा जाब मांगने वाले नहीं बल्कि  देने वाले बने। राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को दिखाई हरी झंडी            कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने एआई के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव में पद्मअजय मांडवी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपना प्रेरक उदबोधन दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों को एआई की उपयोगिता, संभावनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी देगा, विशेष कर ग्रामीण युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई की निशुल्क व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब तैयार किया गया है। कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन            इस अवसर पर राज्यपाल ने आईसेक्ट के वार्षिक प्रतिवेदन एवं कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालक डॉ. ज्योति बाला गुप्ता  और आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी ने किया।  इस कॉन्क्लेव में विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, उद्योग एवं बैंक के अधिकारी, आईसेक्ट इंडिया गु्रप के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उद्यमी उपस्थित रहे।

तक बढ़ी समर्थ सिंह और उनकी मां को राहत नहीं, कोर्ट ने 14 दिन और बढ़ाई न्यायिक हिरासत

भोपाल  भोपाल के हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में बड़ी अपडेट सामने आई है। अदालत ने इस मामले में आरोपी ट्विशा की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह कि न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है। CBI ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी। अब दोनों आरोपी 30 जून तक जेल में रहेंगे। फिलहाल दोनों आरोपी भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद हैं। कोर्ट में दोनों आरोपियों की वर्चुअल सुनवाई की गई। सुरक्षा कारणों को देखते हुए यह फैसला लिया गया। आज की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने मामले की मीडिया ट्रायल पर आपत्ति जताई है और कहा है कि इससे निष्पक्ष जांच प्रभावित हो रही है। गिरिबाला के वकील जॉर्ज कार्लो ने कोर्ट में कहा, मीडिया को मामलें से दूर रखा जाए। गिरिबाला और समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत बढ़ी गिरिबाला सिंह वकील ने कोर्ट से अपील करते हुए कहा कि  ट्विशा के परिजनों और वकीलों को भी मीडिया में बयान देने से रोका जाए। वहीं, आज की सुनवाई के दौरान CBI ने कोर्ट से कहा, फॉरेंसिक और डिजिटल एविडेंस की स्टडी कर रहे हैं, केस से जुड़ कुछ और लोगों से पूछताछ बाकी है। CBI ने कोर्ट में कहा कि हमें अभी ट्विशा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। जांच एजेंसी की मांग पर कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी। 30 जून तक कर जेल में रहेंगे दोनों आरोपी समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को 2 जून को भोपाल की सेंट्रल जेल भेजा गया था। उस समय भोपाल कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रखने के आदेश दिए थे। अब रिमांड बढ़ाकर 30 जून तक कर दी गई है। जेल में VIP ट्रीटमेंट देने का आरोप समर्थ और गिरिबाला सिंह को जेल में विशेष सुविधाएं देने का भी आरोप लगा। जेल जाने के एक दिन बाद दोनों आरोपियों को बैरक से निकालकर जेल अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया था, जिसके बाद भारी बवाल मचा था। ट्विशा के परिवार ने इस VIP ट्रीटमेंट का विरोध जताया था। कैस हुई थी ट्विशा की मौत बता दें कि भोपाल में पूर्व मॉडल ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव ससुराल के टेरेस पर फांसी के फंदे पर लटका मिला। परिवार ने दहेज उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। मामले की जांच अब CBI कर रही है। जेल में वकील से मिलने की छूट मांगने कोर्ट पहुंचीं गिरिबाला सिंह बता दें, ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को भोपाल निवासी समर्थ सिंह से हुई थी, जो पेशे से वकील हैं. परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को कम दहेज लाने को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था. परिवार का कहना है कि शादी के कुछ ही समय बाद से उसके साथ लगातार मानसिक और अन्य प्रकार का उत्पीड़न किया जाने लगा था।  मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य घटना वाली रात की आखिरी फोन कॉल भी है. 12 मई 2026 की रात 9 बजकर 41 मिनट पर ट्विशा ने अपनी मां से बात की थी. परिजनों का दावा है कि बातचीत के दौरान फोन के बैकग्राउंड में उसके पति समर्थ सिंह के चिल्लाने की आवाज सुनाई दे रही थी. इसके कुछ ही क्षण बाद फोन अचानक कट गया।  परिजनों के अनुसार जब बाद में दोबारा फोन किया गया तो कॉल उठाने वाली गिरिबाला सिंह थीं. उन्होंने सीधे ट्विशा की मौत की जानकारी दी. इस घटनाक्रम ने परिवार की शंकाओं को और बढ़ा दिया. रिकॉर्ड के अनुसार उसी रात करीब 10 बजकर 20 मिनट पर समर्थ सिंह ट्विशा को बेहोशी की हालत में भोपाल एम्स लेकर पहुंचे थे. वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।  15 मई 2026 को सामने आई शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले को और उलझा दिया. रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी बताया गया, लेकिन साथ ही ट्विशा के शरीर पर कई चोटों के निशान भी मिलने की बात कही गई. रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें मौत से पहले लगी थीं और संभव है कि किसी कुंद वस्तु के प्रहार से लगी हों।  दहेज प्रताड़ना के आरोपों के बीच CBI जांच पर टिकी सबकी नजर बाद में मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) ने भी की और पति समर्थ सिंह से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की गई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली एम्स में दूसरा पोस्टमार्टम कराया गया और CBI ने भी इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की. अब इस पूरे मामले में दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है. CBI का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. फिलहाल गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है। 

पंजाब में संगठन विस्तार पर जोर, 2027 की तैयारी में आम आदमी पार्टी का बड़ा प्लान

 चंडीगढ़ पंजाब राज्य में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (आप) ने संगठन और सरकार के कामकाज को सीधे जनता तक पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर जनसंपर्क अभियान शुरू करने की रणनीति बनाई है। पार्टी ने अपने मौजूदा विधायकों और हलका इंचार्जों को निर्देश दिए हैं कि वे अगले दो महीनों तक अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार लोक मिलनियां आयोजित कर लोगों के बीच रहें और सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड पेश कर रहे है। पार्टी ने संभावित चुनावी उम्मीदवारों को हर दिन तीन लोक मिलनियां आयोजित करने का लक्ष्य दिया है। इन बैठकों के जरिए न केवल सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी दी जा रही है, बल्कि क्षेत्र के लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को भी जाना जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य है कि 15 अगस्त तक हर विधानसभा क्षेत्र के सभी गांवों और प्रमुख शहरी वार्डों तक पहुंच बनाई जाए। 2027 की शुरुआती चुनावी तैयारी पार्टी के अंदर इसे 2027 के लिए शुरुआती चुनावी तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पहले से ही विभिन्न इलाकों में लोक मिलनियां कर रहे हैं, जबकि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल समेत कई मंत्री भी अपने-अपने क्षेत्रों में जनसभाएं और संवाद कार्यक्रम शुरू कर चुके हैं। जिन विधायकों और हलका इंचार्जों को पार्टी संभावित उम्मीदवार मान रही है, उन्हें अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए रंगला पंजाब फंड से राशि भी उपलब्ध कराई जा सकती है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए करीब 10 करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों की योजना बनाई गई है, ताकि चुनाव से पहले जमीनी स्तर पर काम दिखाई दे सके। जनाप्रतिनिधियों को बाहर न जाने की सलाह पार्टी नेतृत्व ने जनप्रतिनिधियों को अगले दो महीनों तक अपने विधानसभा क्षेत्रों में अधिकतम समय देने और अनावश्यक रूप से क्षेत्र से बाहर न जाने की सलाह भी दी है। वहीं, आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी आने वाले समय में व्यापारियों और उद्योग जगत से जुड़े वर्गों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकते हैं, जिससे पार्टी का समर्थन आधार और व्यापक बनाया जा सके। मानना है कि लगातार जनसंपर्क, विकास कार्यों की प्रस्तुति और लाभार्थी वर्गों से सीधा संवाद, आप की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। पार्टी इस अभियान के जरिए सरकार की योजनाओं को राजनीतिक समर्थन में बदलने की कोशिश में जुटी है।

ड्रग्स फैक्ट्री कार्रवाई पर उठे सवाल, कोर्ट के आदेश के बाद 100 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज

आगर मालवा  मध्य प्रदेश के आगर मालवा पुलिस की कार्रवाई पर राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट ने दो टीआई समेत 100 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। लेकिन पिछले दो दिनों से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बीती रात प्रकरण दर्ज हुआ है। तत्कालीन एसपी विनोद सिंह ने बताया था कि 28 जनवरी को दी गई दबिश के दौरान बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ और ड्रग्स बनाने की सामग्री बरामद करने का दावा किया था। राजस्थान में मध्य प्रदेश के दो थाना प्रभारियों समेत 100 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामला जनवरी 2026 में राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव में हुई NDPS कार्रवाई से जुड़ा है। चौमहला कोर्ट के 13 जून को दिए आदेश पर डग थाने में सोमवार (15 जून) को आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह, एसआई राखी गुर्जर, एएसआई अजय जाट समेत करीब 100 ज्ञात और अज्ञात लोगों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है। पुलिस ने कहा कि जांच में अन्य आरोपियों की पहचान भी की जाएगी। बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ पकड़ने का दावा किया था 21 जनवरी 2026 को आगर पुलिस ने फैजान नाम के युवक को 330 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने बताया था कि ड्रग्स घाटाखेड़ी के शाहिर, मुनव्वर और ताहिर से लाया था। एसपी विनोद सिंह के मुताबिक फैजान की निशानदेही पर 28 जनवरी को 80 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के साथ दबिश दी गई थी। यहां बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ और ड्रग्स बनाने की सामग्री बरामद करने का दावा किया गया था। इस दौरान दो भाई शाहिर खान और मुनव्वर उर्फ राजा गिरफ्तार किए गए थे। पांच पॉइंट्स, जिनसे कार्रवाई पर उठे सवाल     आगर मालवा के तत्कालीन एसपी विनोद कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्रवाई के दौरान दो बंदूकें, एक ग्राइंडर मशीन और दो ड्रम जब्त करने का दावा किया था। जांच के दौरान सामान नया दिखने पर सवाल उठे, लेकिन एसपी ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया था।     दावा किया गया कि कार्रवाई में राजस्थान पुलिस भी शामिल थी, लेकिन जांच में सामने आया कि उसे इसकी जानकारी ही नहीं थी।     एसपी विनोद कुमार सिंह ने कहा था कि ई-साक्ष्य ऐप से कार्रवाई की रिकॉर्डिंग की गई थी, लेकिन जांच में सामने आया कि वीडियोग्राफी नहीं हुई थी।     पुलिस रिकॉर्ड में शाहिर की गिरफ्तारी सुबह 4:40 बजे, मुनव्वर की 4:45 बजे और जब्ती 5:40 बजे दर्शाई गई। जांच में वीडियोग्राफी और सीसीटीवी से सामने आया कि आगर पुलिस की डग थाना क्षेत्र में आखिरी मौजूदगी 5:05 बजे तक ही थी।     बताया गया कि मध्य प्रदेश पुलिस के वाहन घाटाखेड़ी में करीब 30 मिनट ही रुके थे। इसी दौरान तलाशी, गिरफ्तारी, जब्ती और अन्य कार्रवाई का दावा किया गया, जबकि इतने कम समय में NDPS अधिनियम की कानूनी प्रक्रिया पूरी होना संभव नहीं था। परिवार ने शुरुआत से पुलिस कार्रवाई को फर्जी बताया गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान शुरुआत से ही कार्रवाई को फर्जी बताते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश पुलिस ने स्थानीय राजस्थान पुलिस को सूचना दिए बिना घर में प्रवेश किया, परिजन से बदसलूकी की और उनके बेटों को झूठे NDPS प्रकरण में फंसाया। जानें जांच में क्या-क्या सामने आया? कोर्ट के आदेश पर पुलिस विभाग के जांच अधिकारी द्वारा की गई जांच में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे थे। जांच में सामने आया कि पुलिस द्वारा किए गए जब्ती के दावे से संबंधित कई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे और वीडियोग्राफी का दावा भी झूठा था। इसके अलावा, सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि मध्य प्रदेश पुलिस के वाहन गांव में केवल 30 मिनट ही रुके थे, जबकि इतने कम समय में एनडीपीएस अधिनियम के तहत तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं है। इस कार्रवाई पर अब कानूनी सवाल उठ रहे इसी जांच रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, रूपसिंह बैस, उप निरीक्षक राखी गुर्जर, सहायक उप निरीक्षक अजय जाट और पुलिसकर्मी राहुल विश्वकर्मा व शुभम सहित पूरी टीम पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। ऐसे में अब कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज हो गया है। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा यहां से की गई पांच करोड़ की मादक पदार्थ जब्ती की कार्रवाई का खुलासा मध्य प्रदेश में टीम द्वारा किया गया था, लेकिन इस कार्रवाई पर अब कानूनी सवाल उठ रहे हैं। दस लाख रुपये मांगने का भी पुलिस पर आरोप इस्तगासे में पीड़ित ने बताया कि उनसे 10 लाख रुपये की मांग की गई। जब उन्होंने कहा कि किसान लोग इतने रुपये कहां से लाएंगे और रुपये देने में असमर्थता जताई, तो उन्हें आगर थाने ले जाया गया। वहां गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों के खिलाफ दो किलो एमडी, 1 किलो स्मैक, कैटामाइन, नशीले इंजेक्शन, केमिकल ड्रम, 2 राइफलें आदि यानी 5 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त होना बताकर केस दर्ज कर दिया गया। जबकि इनके परिवार के घरों की तलाशी लेने पर 1 ग्राम सामग्री यानी कुछ भी नहीं मिला। केवल एक लाइसेंसशुदा एकनाली बंदूक, एक एयर गन और 7 मोबाइल जब्त किए गए। शाहिर खान और मनोवर खान को पकड़कर ले जाया गया था और वहां ले जाकर उनके ऊपर मादक पदार्थ की सामग्री का केस बना दिया गया। तलाशी-गिरफ्तारी और जब्ती से जुड़े रिकॉर्ड नहीं मिले हमीद खान ने 21 फरवरी 2026 को चौमहला कोर्ट में परिवाद (शिकायती आवेदन) दायर किया। कोर्ट ने उसी दिन जिला पुलिस अधीक्षक झालावाड़ अमित को जांच के आदेश दिए। एसपी ने जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) भागचंद्र मीणा को सौंपी। एएसपी मीणा ने आगर आकर दबिश में शामिल थाना प्रभारी शशि उपाध्याय समेत कई पुलिसकर्मियों के बयान लिए। जांच रिपोर्ट के अनुसार, तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती से जुड़े कई रिकॉर्ड नहीं मिले। जांच रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर FIR के आदेश जांच रिपोर्ट और उपलब्ध सबूतों पर विचार के बाद कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बाद डग थाने में शशि उपाध्याय, रूप सिंह राजपूत, एसआई राखी गुर्जर, एएसआई … Read more

अमेरिका में बड़ा विमान हादसा, B-52 बॉम्बर क्रैश; 8 लोगों ने गंवाई जान

कैलिफोर्निया अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर सोमवार को भयानक हादसा देखने को मिला. यहां B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर विमान हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई. विमान नियमित टेस्ट्स मिशन पर था और स्थानीय समय के मुताबिक 11.20 am पर उड़ा भरी. उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद ये क्रैश हो गया. अमेरिकी वायुसेना ने इसे असहनीय और दुखद हादसा बताया है. एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस के अधिकारियों के मुताबिक हादसा इतना भीषण था कि उसमें किसी के बचने की संभावना नहीं थी. दुर्घटना के बाद घटनास्थल से काले धुएं का विशाल गुबार उठता दिखाई दिया।  वायुसेना ने बताया कि विमान रडार आधुनिकीकरण कार्यक्रम से जुड़े एक टेस्ट मिशन पर था. हादसे में मारे गए लोगों में सैन्य अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और सरकारी ठेकेदार शामिल थे. अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह दुर्घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि B-52 अमेरिकी वायुसेना के सबसे प्रतिष्ठित और लंबे समय से सर्विस में मौजूद विमानों में से एक है।  आखिर क्यों बनाया गया था B-52? B-52 का विकास 1950 के दशक की शुरुआत में शीत युद्ध (Cold War) के दौरान किया गया था. उस समय अमेरिका और सोवियत संघ के बीच परमाणु हथियारों की होड़ चरम पर थी. अमेरिका को ऐसे विमान की जरूरत थी जो हजारों किलोमीटर दूर तक उड़कर परमाणु बम पहुंचा सके और दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला कर सके. इसी टार्गेट को लेकर अमेरिकी कंपनी बोइंग ने B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस का निर्माण किया. यह विमान पहली बार 1952 में उड़ा और 1955 में अमेरिकी वायुसेना में शामिल किया गया।  B-52 हुआ क्रैश. B-52 की सबसे बड़ी खासियतें     ये करीब 31,700 किलोग्राम तक बम और मिसाइलें ले जाने की क्षमता रखता है.     लंबी दूरी तक बिना रुके उड़ सकता है. रास्ते में रीफ्यूलिंग की जरूरत पड़ सकती है.     पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के हथियार ये ले जा सकता है.     हवा में ईंधन भरने के बाद लगभग दुनिया के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकता है.     ये क्रूज मिसाइलों और परमाणु हथियारों को लॉन्च करने में सक्षम है.     मौजूदा B-52H संस्करण आज भी अमेरिकी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का अहम हिस्सा है. किन-किन युद्धों B-52 का हुआ इस्तेमाल हुआ?     वियतनाम युद्ध: 1960 और 1970 के दशक में B-52 ने वियतनाम युद्ध में बड़े पैमाने पर बमबारी की. ‘ऑपरेशन लाइनबैकर’ जैसे अभियानों में इसका व्यापक इस्तेमाल हुआ. अमेरिका का एक B-52 क्रैश भी हुआ और एक झील में गिर गया. इसी कारण वियतनाम में आज भी B-52 लेक है, जहां उसका मलबा पड़ा है।      1991 का खाड़ी युद्ध : इराक के खिलाफ ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म में B-52 ने लंबी दूरी से भारी बमबारी कर अमेरिकी सेना को बढ़त दिलाई।      अफगानिस्तान युद्ध: 2001 में 9/11 हमलों के बाद अफगानिस्तान में तालिबान और अल-कायदा के ठिकानों पर हमलों में इस विमान का इस्तेमाल किया गया।      इराक युद्ध: 2003 में इराक पर अमेरिकी हमलों के दौरान भी B-52 ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।      ISIS के खिलाफ हमले: सीरिया और इराक में ISIS के ठिकानों पर भी B-52 से हमले किए गए।      ईरान युद्ध: हालिया अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान भी B-52H बमवर्षकों को मिशनों में तैनात किया गया था. इसकी मौजूदगी को अमेरिका की सैन्य चेतावनी के तौर पर देखा जाता है।  B-52 अब नहीं बनते हैं दिलचस्प बात यह है कि B-52 का उत्पादन 1962 में ही बंद हो गया था. इसके बावजूद अमेरिकी वायुसेना लगातार इसे आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करती रही है. फिलहाल अमेरिकी वायुसेना के पास B-52H के 76 विमान हैं. अमेरिका ने हाल ही में इसके नए इंजन और आधुनिक रडार सिस्टम लगाने के लिए अरबों डॉलर का प्रोजेक्ट शुरू किया है, ताकि यह विमान 2050 के दशक तक सेवा में बना रह सके।