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बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सख्ती, ब्रिटेन PM ने सोशल मीडिया प्रतिबंध का किया ऐलान

लंदन  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है, उन्होंने बताया है कि वह अब 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने जा रहे हैं. ब्रिटेन अपने इस फैसले की मदद से बच्चों पर सोशल मीडिया की वजह से पड़ने वाले नकारात्मक असर को खत्म करना चाहता है।  बीते साल ऑस्ट्रेलिया ने टीनएजर्स और बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन किया था. फिर उसके बाद यूरोप समेत कई देशों ने इस फैसले की तारीफ की थी. हाल ही में कनाडा ने भी ऐलान किया था कि वह सोशल मीडिया के लिए नियम बदलने जा रहा है और बच्चों के इस्तेमाल करने को लेकर नियम बदलेगा।  ब्रिटेन प्रधानमंत्री ने कहा- आसान नहीं था फैसला  कीर स्टारमर ने आगे बताया है कि यह फैसला उनके लिए आसान नहीं है. कई बड़ी कंपनियां सरकार को अपना फैसला वापस लेने के लिए दबाव डाल रही हैं, लेकिन ये फैसला होकर रहेगा।  ब्रिटेन प्रधानमंत्री ने X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करके इस फैसले के बारे में जानकारी दी है और बताया है कि अधिकतर माता-पिता ने उनको बताया है कि उनके बच्चे स्मार्टफोन चलाने का आदि हो चुके हैं।  ब्रिटेन प्रधानमंत्री का पोस्ट  ब्रिटेन प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा है कि हम 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस को बैन करने जा रहे हैं।   आज के दौर में बच्चों को ऐसी दुनिया में खुद को ढालना पड़ रहा है, जहां तकनीक उनकी जिंदगी के हर पहलू में दखल दे रही है. मैं अब इसे और जारी नहीं रहने दे सकता. इसलिए हम बच्चों को उनका बचपन वापस देने जा रहे हैं।  टेक कंपनियों को कई नियम लागू करने को कहा  ब्रिटेन ने हाल ही के दिनों में टेक कंपनियों के ऊपर दबाव बनाया है. सरकार ने इन कंपनियों से उम्र सत्यापन लागू करने और अपने एल्गोरिद्म में बदलाव करने के लिए के लिए कहा है. साथ ही बच्चों को अश्लील तस्वीर आदि से दूर रखने के लिए नए कदम उठाने को कहा है।  ब्रिटेन की सरकार चाहती है की ऑनलाइन गेमिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर होने वाले लाइव स्ट्रीमिंग को भी बच्चों के लिए प्रतिबंधित किया जाए। 

वनडे टीम चयन का काउंटडाउन शुरू, इंग्लैंड दौरे से पहले विराट-हार्दिक को लेकर बढ़ी चर्चा

नई दिल्ली इंग्लैंड के दौरे पर जुलाई में खेली जाने वाली 3 मैचों की वनडे इंटरनेशनल सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान इसी सप्ताह होने की उम्मीद है। पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के अलावा दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली और ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या पर निगाहें रहेंगी। विराट और हार्दिक चोट के कारण अफगानिस्तान के खिलाफ जारी तीन मैचों की वनडे सीरीज से बाहर हैं, जबकि रोहित शर्मा फॉर्म में नहीं हैं। पहले मैच में भी कलाई में चोट लगने के बाद वे थोड़े से असहज नजर आए थे। अगर रोहित पर बोर्ड और सिलेक्टर सख्त होते हैं को उनका अगला विश्व कप खेलने का सपना टूट सकता है। हालांकि, इस बात की संभावना बहुत कम है। टीम इंडिया का चुनाव करते समय सिलेक्टर्स विराट कोहली और हार्दिक पांड्या की फिटनेस रिपोर्ट को भी देखेंगे। विराट कोहली मांसपेशियों में खिंचाव के कारण इस अफगानिस्तान सीरीज का हिस्सा नहीं है, जबकि हार्दिक पांड्या भी चोट की वजह से वनडे सीरीज से बाहर हैं। हार्दिक पांड्या फिट हो गए थे, लेकिन आखिरी की कुछ ड्रिल्स और ट्रेनिंग के दौरान उनके पैर में चोट लगी और वे कुछ सप्ताह के लिए फिर से क्रिकेट ऐक्शन से दूर चले गए। वे अभी भी बेंगलुरु स्थिति बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हैं। सिलेक्टर्स चाहेंगे कि हार्दिक पांड्या और विराट कोहली फिट हो जाएं, ताकि एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन मैनेजमेंट वर्ल्ड कप 2027 के लिए तलाश सके। नंबर 3 पर विराट कोहली की जगह अफगानिस्तान सीरीज में ईशान किशन खेल रहे हैं, जबकि हार्दिक की जगह पर नीतीश कुमार रेड्डी को मौका दिया जा रहा है। हार्दिक पांड्या के लाइक टू लाइक रिप्लेसमेंट इस वक्त रेड्डी ही नजर आते हैं। सिलेक्टर्स चाहेंगे कि हार्दिक को फॉर्म में लौटने और वनडे क्रिकेट से तालमेल बिठाने के लिए पर्याप्त मौके मिल जाएं। नीतीश को भी तैयार किया जा रहा है। रोहित की फॉर्म चिंता का कारण वहीं, अगर बात रोहित शर्मा की करें तो वे फॉर्म में नहीं हैं, जो चिंता का विषय है। सिलेक्टर्स और बोर्ड की ओर से पहले ही ऐसी रिपोर्ट्स आ चुकी हैं कि उन्हें सीरीज दर सीरीज देखा जाएगा। पिछली सीरीज भी उनकी अच्छी नहीं थी, जबकि आईपीएल 2026 भी अच्छा नहीं रहा था। अब अफगानिस्तान के खिलाफ पहला वनडे मैच में उनसे रन नहीं बने। वे रन आउट होने से पहले रनों के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। हालांकि, अभी इस सीरीज के दो मुकाबले बाकी हैं, जिनमें रन बनाकर वह खुद की पोजिशन को मजबूत कर सकते हैं। वे प्रूवन मैच विनर हैं।

‘सोओगे नहीं तो रिप्लेस कर देंगे’ बयान पर मचा बवाल, संचिता उगले केस के बाद इंडस्ट्री की कार्यसंस्कृति पर बहस तेज

मुंबई  30 साल की टीवी एक्ट्रेस संचिता उगले के सुसाइड केस ने टीवी इंडस्ट्री को हैरान कर दिया है. अब एक्ट्रेस आंचल खुराना ने संचिता की मौत पर रिएक्ट किया है. उन्होंने चमचमाती हुई ग्लैमर इंडस्ट्री के बीच कैसे एक्टर्स स्ट्रगल करते हैं, वो किन मुश्किलों से होकर गुजरते हैं, इसका खुलासा किया है।  संचिता की मौत पर बोलीं आंचल आंचल अपनी पोस्ट में इंडस्ट्री पर बरसी हैं. उन्होंने कहा- एक और टीवी एक्ट्रेस संचिता ने सुसाइड कर लिया है. चैनल को टीआरपी चाहिए, प्रोड्यूसर को बजट बचाना है और ऑडियंस को एंटरटेनमेंट चाहिए. लेकिन कभी ये सोचा है कि एक एक्टर पर क्या गुजरती है. एक छोटी सी बात पर रिप्लेसमेंट, किसी के साथ सोओगे नहीं तो रिप्लेसमेंट, किसी से बहस कर लोगे तो रिप्लेसमेंट, सेल्फ रिस्पेक्ट बचाओगे तो रिप्लेसमेंट, या फिर तुम्हारे डेज काट देंगे. कभी किसी ने असल में सोचा है कि एक एक्टर पर क्या बीत रही है।  ''हर सुबह उठकर हम ऑडिशन देते हैं. फिर रात को वही रिजेक्शन के बाद सो जाते हैं. सब कहते हैं स्ट्रॉन्ग बनो लेकिन कब तक स्ट्रॉन्ग बनना है ये कोई नहीं बताता.. रही बात चैनल और प्रोड्यूसर्स की तो वो सबसे गलीच लोग होते हैं. उनको अपने प्रॉफिट, बेनिफिट से ऊपर कुछ नहीं दिखता. मेरे साथ भी हुआ है. अगर आपका परफॉर्मेंस अच्छा है फिर भी वो 1000 रुपये के लिए आपको रिजेक्ट कर देंगे. या फिर आप किसी को लाइन देने या किसी के साथ कुछ करने को तैयार नहीं हैं तो आपको रिप्लेस कर देंगे।  आंचल ने एक्टर्स से अपील कर सुसाइड जैसे कदम ना उठाने की अपील की है. उनका कहना है जब कहीं कोई बात ना बने. सब खत्म लगे तो अपने घर चले जाओ. उन्होंने भी ऐसा ही किया है. वो भी डिप्रेशन और स्ट्रेस में थीं. तब कोई काम नहीं आता. आंचल ने बताया कि कैमरे पर मुस्कुराता हुआ एक्टर अंदर से काफी परेशान हो सकता है. उसकी जिंदगी में तूफान मचा होता है।   बात करें संचिता की तो, 14 जून को उन्होंने सुसाइड किया है. ऐसा कदम एक्ट्रेस ने क्यों उठाया, इसकी जांच चल रही है. संचिता की मौत ने सभी को हैरान परेशान कर दिया है। 

भुसावल-इटारसी रेल रूट पर बढ़ेगी रफ्तार, नई लाइनों से ट्रेनों की लेटलतीफी होगी कम

बुरहानपुर   मध्य प्रदेश से मुंबई जाने वाली ट्रेनें अब इटारसी रूट पर नहीं पिटेंगी, साथ ही साथ अब इस रूट की ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी. दरअसल, भुसावल-इटारसी मुबंई रूट की तीसरी और चौथी लाइन का काम शुरू हो गया है. इस लाइन के बनने से इटारसी जंक्शन पर भी दबाव कम होगा और ट्रेनें तेज रफ्तार से मुंबई रूट पर दौड़ेंगी. मुंबई जाने वाले मध्य प्रदेश के यात्रियों को इससे बड़ी राहत मिलेगी।  देश के सबसे व्यस्त रेल रूटों में से एक है भुसावल-इटारसी रूट मध्य प्रदेश से होकर गुजरा इटारसी-भुसावल रूट देश के सबसे व्यस्ततम रेल रूटों में से एक है. इस रेल रूट से रोजाना 50 नियमित और एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं, जबकि 100 से ज्यादा लंबी दूरी की ट्रेनें गुजरती हैं. वर्तमान में दो लाइनें होने के बावजूद इस रूट पर भारी दबाव होता है. यही वजह है कि केंद्र सरकार द्वारा भुसावल-इटारसी के बीच तीसरी व चौथी लाइन बनाने के कार्य को प्राथमिकता दी गई है।  मुंबई जाने वाली यात्रियों को होगा फायदा मध्य प्रदेश के इटारसी जंक्शन से होते हुए महाराष्ट्र के मुंबई व अन्य शहरों को जाने वाले यात्रियों को इससे फायदा होगा. तीसरी व चौथी लाइन तैयार होने से ट्रेनों का वेटिंग टाइम कम होगा और तकनीकी समस्या आने या किसी अन्य ट्रेन की देरी की वजह से सारी ट्रेनें प्रभावित नहीं होंगी. इससे सीधे तौर पर यात्रियों को फायदा होगा।  तीसरी और चौथी लाइन के लिए काम तेज बुरहानपुर से लगे लालबाग रेलवे स्टेशन से भुसावल-इटारसी रेलखंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है. इस रेलवे लाइन में अड़ंगा बन रहे अतिक्रमणों को भी तोड़ने की कार्रवाई शुरू हुो गई है. शनिवार को चिंचाला क्षेत्र में हुए अतिक्रमण को रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ सहित जिला प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई को अंजाम देकर तोड़ दिया ह., एसडीएम अजमेर सिंह गौड़, सीएसपी गौरव पाटिल और लालबाग पुलिस, जीआरपी सहित आरपीएफ ने व्यवस्थाओ को संभाला, इस दौरान रेल भूमि की जद में आ रहे मकानों को हटाया गया है।  बुरहानपुर के रेलवे स्टेशन के पास ग्राम चिंचाला में भी रेलवे और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने रेल भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की. इस दौरान अतिक्रमण करने वाले करीब 17 मकानों को तोड़ा गया. रेलवे प्रशासन ने करीब दो महीने पहले ही प्रभावित लोगों को अतिक्रमण हटाने के नोटिस जारी किए थे।  एसडीएम अजमेर सिंह के मुताबिक, '' रेलवे अधिकारियों ने कहा है कि अतिक्रमण की जद में आ रही भूमि खाली होने के बाद जल्द ही तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा, इससे रेलवे यातायात को गति मिलेगी, जिन-जिन स्थानों पर अतिक्रमण हुआ है, वहां अतिक्रमण हटाओ मुहीम शुरू हो चुकी है। 

अब और तेज होगा सफर! भारतीय रेलवे ला रहा 220 किमी/घंटा रफ्तार वाली ट्रेनें, सुरक्षा के लिए ब्लैक बॉक्स भी

धनबाद  देश में बुलेट ट्रेन की तैयारियों के बीच रेलवे ने अब 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सेमी हाई स्पीड ट्रेन दौड़ाने के लिए भी कसरत शुरू कर दी है।आईसीएफ यानी इंटीग्रल रेल फैक्ट्री में 100 वंदे भारत और 50 वंदे भारत स्लीपर के नए रैक का निर्माण होगा। अमृत भारत 3.0 वर्जन पटरी पर उतारने की तैयारी शुरू होगी।साथ ही 220 किमी की स्पीड से फर्राटा भरने वाली सेमी हाई स्पीड ट्रेन के रैक भी विकसित किए जाएंगे। इतना ही नहीं हवाई जहाज की तरह यात्री ट्रेनों में ब्लैक बाक्स भी होंगे। देश के अन्य जोन के साथ पूर्व मध्य रेल में ट्रेनों के मेंटेनेंस को डिजिटाइज किया जाएगा। प्रधान मुख्य यांत्रिक अभियंताओं की इसी सप्ताह होनेवाली पीसीएमई कॉन्फ्रेंस में इन सभी एजेंडा को शामिल किया गया है। रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक यांत्रिक-इंजीनियर कोचिंग प्रांजल मिश्रा की ओर से सभी जाेन को पत्र जारी किए जाने के बाद संबंधित जोनल रेलवे ने प्रेजेंटेशन समर्पित कर दिया है। आग लगने से पहले और बाद की हर गतिविधि को कैद करेगा ब्लैक बाक्स हवाई जहाज में ब्लैक बाक्स अत्यंत मजबूत इलेक्ट्रानिक डिवाइस है, जिसका उपयोग विमान दुर्घटना के कारणों एवं अंतिम समय की गतिविधियों का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसे विमान हादसे की जांच का सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक हिस्सा माना जाता है। ठीक इसी तरह ट्रेनों में लगे आग के लिए फायर डिटेक्शन सिस्टम और फायर डिटेक्शन सप्रेशन सिस्टम के लिए ब्लैक बाक्स लगाए जाएंगे। इससे मजबूत और छेड़छाड़ रहित डाटा लागर तैयार होगा। इसका उद्देश्य घटना की जांच के लिए आग लगने से पहले और बाद की गतिविधियों, सिस्टम को चालू ट्रिगर्स और सिस्टम के कामकाज के जुड़े पैरामीटर को रिकार्ड किया जा सकेगा। वंदे भारत और अमृत भारत में आन बोर्ड कंडीशन मॉनीटरिंग सिस्टम वंदे भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनों में ओबीसीएमएस यानी आन बोर्ड कंडीशन मानीटरिंग सिस्टम अपनाए जाएंगे। यह एक अहम डायग्नोस्टिक तकनीक है जिसकी मदद से ट्रेनों के पहिए व बेयरिंग की सुरक्षा, कार्यक्षमता और रियम टाम हेल्थ मॉनीटरिंग हो सकेगी। इससे दुर्घटनाओं की रोकथाम में काफी हद तक मदद मिलेगी। नए कोचिंग डिपो व पुराने के अपग्रेडेशन के साथ कम समय में मेंटेनेंस नए कोचिंग डिपो, कोचिंग टर्मिनल के निर्माण के साथ पुराने कोचिंग डिपो के अपग्रेडेशन की स्थिति संबंधित जोन के पीसीएमई स्पष्ट करेंगे। रैक मेंटेनेंस को कम समय में करने, स्मार्ट मेंटेनेंस और कर्मचारियों से जुड़ी बेंचमार्किंग पर भी नीतिगत चर्चा होगी। कैरेज एंड वैगन विभाग के कर्मचारियों के लिए दुर्घटना व बेपटरी होने जैसी घटनाओं के लिए ट्रेनिंग माड्यूल तय होगा। गरीब रथ ट्रेनों के रैक के उपयोग पर भी निर्णय होंगे।  

बदलेगा बस्तर का भविष्य! मुख्यमंत्री साय बोले- अब विकास, रोजगार और समृद्धि की नई कहानी लिखेगा संभाग

रायपुर  नक्सलवाद का दंश झेलते-झेलते बस्तर चार दशकों तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहा, लेकिन अब नक्सलवाद की समाप्ति के साथ केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर को देश का सबसे सुंदर और विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  आज राजधानी रायपुर में आयोजित ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शशांक शर्मा, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में काफी पीछे रह गया था। अब परिस्थितियां बदल रही हैं और एक नए, विकसित तथा समृद्ध बस्तर के निर्माण का अवसर प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिनसे आमजन को मूलभूत सुविधाओं सहित सभी आवश्यक सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि दो दिन पूर्व ही यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण किए हैं। उनके नेतृत्व में देश ने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनमें नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली सफलता भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया गया। उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व समाज में विश्वास और उत्साह का संचार करता है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश में माओवाद के विरुद्ध सामूहिक संकल्प विकसित हुआ। सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा, आम जनता खुलकर माओवाद के विरोध में सामने आई और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद की। इस संघर्ष में लेखकों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बस्तर आए थे, जहां उन्होंने पत्रकारों से मुलाकात कर उनके योगदान की सराहना की थी।

क्या आप ज्यादा पैसे देकर पी रहे हैं ट्रेन की चाय? रेलवे के तय रेट जानकर रह जाएंगे हैरान

नई दिल्ली भले ही ट्रेन की चाय कैसी भी हो, लेकिन जब लोग ट्रेन में सफर करते हैं तो चाय पी ही लेते हैं. आपने देखा होगा कि ट्रेन में कई तरह की चाय मिलती है, एक चाय तो वो होती है, जो बिना टी बैग के होती है, लेकिन एक वो होती है जिसमें टी बैग भी होता है. इन चाय के रेट भी अलग-अलग वसूले जाते हैं. लेकिन, क्या आप  जानते हैं कि ट्रेन में बिकने वाली चाय की असली रेट कितनी होती है यानी सरकार की ओर से इनकी कितनी रेट तय की गई है? बता दें कि इससे ज्यादा रेट में ट्रेन में चाय नहीं बेची जा सकती है।  आमतौर पर ट्रेन में वेंडर या कैटरिंग स्टाफ एक कप चाय 10 रुपये में बेचते हैं, लेकिन असली रेट काफी अलग है. रेलवे की आधिकारिक कैटरिंग दरों के अनुसार, सामान्य ट्रेनों में मिलने वाली 150 मिलीलीटर स्टैंडर्ड चाय की कीमत सिर्फ 5 रुपये तय है. अगर आपको इसी कैटेगरी की चाय 10 रुपये में बेची जा रही है तो उसकी कीमत तय दर से दोगुनी है।  लेकिन, टीबैग वाली चाय के रेट अलग है. रेलवे के नियमों के अनुसार, टी बैग वाली चाय 10 रुपये की मिलती है. इसके अलावा इंस्टेंट कॉफी के रेट भी 10 रुपये हैं. हालांकि कुछ विशेष ट्रेनों में व्यवस्था अलग होती है. उदाहरण के लिए हमसफर ट्रेनों में एवीएम मशीन के  जरिए चाय दी जा रही है तो उस चाय की कीमत 10 रुपये तय है. यहां 100 मिलीलीटर चाय 120 मिलीलीटर के कप में दी जाती है।  ऐसे में जब भी आप चाय खरीदें तो इस बात का ध्यान रखें कि आखिर आप कौनसी चाय पी रहे हैं, वो स्टैंडर्ड चाय है या फिर वेंडिंग मशीन वाली चाय. रेलवे में सभी ट्रेनों के लिए एक जैसी कैटरिंग व्यवस्था नहीं होती. सामान्य मेल-एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों में स्टैंडर्ड चाय का रेट 5 रुपये रखा गया है, जबकि कुछ प्रीमियम सेवाओं और वेंडिंग मशीन आधारित व्यवस्था में कीमत अधिक हो सकती है।  क्या हैं पानी की बोतल से जुड़े नियम? भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, ट्रेन में सिर्फ रेल नीर ही बेचा जा सकता है और उसकी एक लीटर वाली बोतल की रेट 14 रुपये है. ये स्टेशन और ट्रेन दोनों में बराबर है. लेकिन, अगर कुछ परिस्थिति में वेंडर रेल नीर के अलावा दूसरी पानी की बोतल बेचता है तो वो भी कुछ निश्चित कंपनियों का पानी ही ट्रेन में बेचा जा सकता है. इसमें भी खास बात ये है कि दूसरी कंपनी की पानी की बोतल भी 14 रुपये में ही बेचनी होगी. यानी ट्रेन में कोई भी 14 रुपये से ज्यादा दाम में पानी की बोतल नहीं बेच सकता है।  

सोनम रघुवंशी ने तोड़ी चुप्पी, मीडिया से बातचीत में बताईं कई अहम बातें

इंदौर  राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी और फिलहाल जमानत पर रिहा सोनम रघुवंशी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब दिया है। मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में सोनम ने साफ कहा कि उसके नेपाल भागने की खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं और लोगों को ऐसी अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। कोर्ट परिसर से बाहर निकलते समय पत्रकारों ने जब उससे सवाल किए तो उसने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का सम्मान कर रही है और अदालत द्वारा तय सभी शर्तों का पालन कर रही है। इंदौर लौटने को लेकर पूछे गए सवाल पर भी सोनम ने फिलहाल कोई संभावना नहीं जताई और कहा कि अभी उसका वहां जाने का कोई मन नहीं है। लोकेशन बताने से किया इनकार सोनम ने यह जरूर स्वीकार किया कि वह शिलांग में रह रही है, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने ठिकाने की जानकारी साझा करने से मना कर दिया। आर्थिक खर्च और जीवन-यापन से जुड़े सवालों को भी उसने निजी विषय बताते हुए टाल दिया। परिवार के आरोपों पर पलटवार गौरतलब है कि राजा रघुवंशी के बड़े भाई ने हाल ही में आरोप लगाया था कि सोनम देश छोड़कर नेपाल जा सकती है और मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए। अब सोनम ने सामने आकर इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। जमानत पर कानूनी लड़ाई जारी सोनम को निचली अदालत से राहत मिलने के बाद जांच एजेंसी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। जमानत रद्द कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और अदालत का फैसला आना बाकी है। कैसे बना देशभर में चर्चा का विषय यह मामला? राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों मेघालय पहुंचे थे। इसके बाद उनके अचानक लापता होने से सनसनी फैल गई। बाद में राजा का शव मिलने और जांच में कई चौंकाने वाले खुलासों के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सोनम को भी आरोपी बनाया गया था।

कूनो में राष्ट्रपति मुर्मु का विशेष कार्यक्रम, आदिवासी समुदाय से मुलाकात और चीता सफारी की तैयारी पूरी

ग्वालियर  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सोमवार, 22 जून को चीतों की धरती श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में आ रही हैं। राष्ट्रपति यहां सहरिया आदिवासियों की संस्कृति से रूबरू होंगी और उनसे चर्चा भी करेंगी। इसके अलावा कूनो नेशनल पार्क में दो नंबर बाड़ा और तीन-ए बाड़ा में तैयारियां जारी हैं क्योंकि यहां राष्ट्रपति को सफारी का अनुभव कराए जाने का प्रस्तावित है। तीन-ए बाड़ा में यहां जन्मी चीता मुखी व उसके चार शावक चीते हैं। कूनो में जोर शोर से तैयारियां की जा रही हैं चार हैलीपेड तैयार किए जा चुके हैं और आदिवासियों को चिन्हित भी किया जा रहा है जिन्हें राष्ट्रपति से मिलवाया जाएगा। इसके अलावा चीता मित्र भी इस दौरान मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति 21 जून को ग्वालियर होकर कूनो पहुंच जाएंगी और रात्रि विश्राम यहीं कर 22 जून को यहां विजिट प्रस्तावित है। बता दें, राष्ट्रपति दौपद्री मुर्मु इन दिनों मप्र के प्रवास पर हैं जिस क्रम में उनका ग्वालियर चंबल आगमन प्रस्तावित है। श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में उनके आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था सहित मैदानी इंतजाम किए जा रहे हैं। चार हैलीपेड तैयार कर दिए गए हैं और 200 बैरीकेड से हद तैयार की जा रही है। श्योपुर पुलिस प्रशासन की ओर से नो फ्लाइंग जोन के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। आदिवासियों को प्रशिक्षण भी मिलेगा सहरिया आदिवासियों के गांवों की श्योपुर जिले में काफी संख्या है, इन आदिवासियों को पहले चीते को लेकर जागरूक भी किया जा चुका है और कई चीता मित्र की भूमिका भी निभा रहे हैं। ऐसे में कुछ आदिवासियों को चिन्हित कर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है क्योंकि राष्ट्रपति सहरिया आदिवासियों से चर्चा कर सकती हैं। वन विभाग की ओर से वन रक्षकों को भी चीता मित्रों से संपर्क करने के लिए निर्देश मिले हैं। मुखी चीता को सफारी में देख सकती हैं राष्ट्रपति जानकारी के अनुसार मादा चीता मुखी को सफारी के दौरान राष्ट्रपति को दिखाया जा सकता है क्योंकि यह पहली भारतीय मादा चीता है। दोनों बाड़ों में विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।  

पेट्रोल को रिप्लेस करेगा E100 Fuel? किसानों के लिए वरदान, लेकिन राह में कई बड़ी चुनौतियां

  नई दिल्ली E100 Fuel Explained- Pros & Cons: पेट्रोल महंगा है, डीजल का भविष्य धुंधला है और इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर अभी भी रेंज एंजायटी का साया मंडरा रहा है. ऐसे में सरकार ने अब एक नया दांव चला है. E100 फ्यूल को मंजूरी मिल गई है और दावा किया जा रहा है कि यह भारत की तेल आयात पर निर्भरता कम कर सकता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई प्योर इथेनॉल पर चलने वाली गाड़ियां पेट्रोल को रिप्लेस कर पाएंगी, या फिर यह भी लंबा प्रयोग साबित होगा? आइए समझते हैं कि E100 फ्यूल आखिर है क्या, इसके फायदे क्या हैं और इसकी राह में कौन-कौन सी बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं।  केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बड़ी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि, E100 फ्यूल के लिए नियमों को मंजूरी दे दी गई है. इसके लिए उन्होंने रात 8 बजे फाइल पर हस्ताक्षर किए और अब E100 फ्यूल कानूनी रूप से देश में इस्तेमाल होने के लिए तैयार है।  सरकार के इस फैसले के बाद एक बार फिर इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल चर्चा में है. केंद्रीय मंत्री का कहना है कि, आने वाले डेढ़-दो महीनों में हुंडई, टोयोटा और एमजी मोटर जैसी कंपनियां भी अपनी फ्लेक्स फ्यूल कारों को पेश करेंगी. हाल ही में उन्होंने मारुति सुजुकी की लोकप्रिय कार वैनगआर के फ्लेक्स फ्यूल वर्जन को पेश किया था. जिसे शुरुआत में फ्लीट ऑपरेटर्स (कैब सर्विस प्रोवाइडर्स) के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. आगे चलकर कंपनी इसे प्राइवेट व्हीकल के तौर पर भी पेश कर सकती है।  क्या है E100 फ्यूल? E100 एक ऐसा फ्यूल है जिसमें लगभग 100 प्रतिशत इथेनॉल होता है और इसमें पारंपरिक पेट्रोल नहीं मिलाया जाता. इथेनॉल एक ऐसा फ्यूल है, जिसे गन्ना, मक्का, चावल और और कृषि अपशिष्ट जैसी चीजों से तैयार किया जाता है. भारत में अभी E20 पेट्रोल का इस्तेमाल पहले से ही हो रहा है. जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है. E100 इसी दिशा में अगला कदम है, जिसे पूरी तरह इथेनॉल पर चलने के लिए तैयार किया गया है।  E20 फ्यूल के इस्तेमाल को लेकर पहले ही तमाम शिकायतें सामने आ चुकी हैं. कई वाहन मालिकों ने कहा है कि, E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद उनके वाहनों का माइलेज गिरा है और साथ ही मेंटनेंस कॉस्ट भी बढ़ी है. इस बात से सरकार भी इंकार नहीं कर रही है, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने सोशल नेटवर्किंग साइट 'X' पर अपने एक बयान में कहा है कि, "रेगुलर पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम होने के कारण, माइलेज में मामूली कमी आती है. जो E10 के लिए डिज़ाइन किए गए और E20 के लिए कैलिब्रेट किए गए चार पहिया वाहनों के लिए अनुमानित 1-2%, और अन्य वाहनों के लिए लगभग 3-6% है।  E100 फ्यूल पर इतना जोर क्यों? सरकार की मानें तो भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में विदेशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. ऐसे में सरकार E100 फ्यूल के जरिए इंपोर्टेड तेल पर निर्भरता कम करना चाहती है. देश में तैयार होने वाला इथेनॉल के जरिए तेल आयात पर होने वाला खर्च भी घट सकता है।  बताया जा रहा है कि, इसका एक बड़ा फायदा किसानों को भी मिलेगा. इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सकती है. सरकार के अनुसार इथेनॉल प्रोग्राम की वजह से अब तक कच्चे तेल के आयात में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है और किसानों को करीब 80,000 करोड़ रुपये की एक्स्ट्रा इनकम हुई है।  क्या E100 फ्यूल पेट्रोल की जगह ले सकता है? अब एक बड़ा सवाल ये है कि, क्या E100 फ्यूल पूरी तरह से पेट्रोल को रिप्लेस कर सकता है. सैद्धांतिक रूप से E100 फ्यूल पेट्रोल की जगह ले सकता है, लेकिन यह बदलाव तुरंत संभव नहीं है. इसके लिए स्पेशली डिजाइन किए गए वाहनों की जरूरत होगी. मौजूदा समय में भारत की सड़कों पर चल रही करोड़ों पेट्रोल कारें, बाइक और स्कूटर E100 फ्यूल पर चलने के लिए तैयार नहीं हैं. ये वाहन रेगुलर पेट्रोल या E20 फ्यूल के लिए बनाए गए हैं।  इन वाहनों में एक बड़ी संख्या उनकी भी है, जो पूरी तरह से E20 फ्यूल के लिए भी तैयार नहीं है. यही कारण है कि, पुराने वाहन मालिकों को नए फ्यूल के इस्तेमाल के बाद तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. एक अनुमान है कि, आने वाले सालों में E20 और E100 फ्यूल दोनों साथ-साथ मौजूद रहेंगे. धीरे-धीरे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या बढ़ने के बाद ही E100 का इस्तेमाल बड़े स्तर पर संभव हो पाएगा।  किन वाहनों में इस्तेमाल होगा E100? E100 फ्यूल हर वाहन में नहीं डाला जा सकता. इथेनॉल का गुण और व्यवहार पेट्रोल से बिल्कुल अलग होता है, इसलिए इंजन, फ्यूल पंप, इंजेक्टर और फ्यूल लाइन में विशेष बदलाव करने पड़ते हैं. इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहन जरूरी होते हैं. मारुति सुजुकी ने वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप पेश किया है, जिसे E100 जैसे हाई इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल पर चलाया जा सकता है. दोपहिया सेगमेंट में हीरो मोटोकॉर्प ने स्प्लेंडर और HF डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन भी पेश किए हैं. इसके अलावा सुजुकी के पोर्टफोलियो में भी एक मॉडल है और होंडा ने भी अपनी सीबी 350 के फ्लेक्स फ्यूल मॉडल को पेश किया था, जिसे अब डिस्कंटीन्यू किया जा चुका है।  फ्लेक्स-फ्यू वाले वाहन और उनकी कीमत वाहन     कीमत (एक्स-शोरूम) HF Deluxe Flex Fuel     72,792 रुपये  Splendor+ Flex Fuel     82,710 रुपये  Suzuki Gixxer SF 250 Flex Fuel     2,26,382 रुपये Maruti Wagon R Flex Fuel     बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं  E100 फ्यूल के बड़े फायदे E100 फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे भारत की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो सकती है. चूंकि इथेनॉल देश में ही तैयार किया जा सकता है, इसलिए इसका इसका इस्तेमाल बढ़ा कर पेट्रोल की कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद की जा रही … Read more