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वास्तु दोष का असर: घर की गलत दिशा में बाथरूम से बढ़ सकती हैं आर्थिक समस्याएं

 आज के समय में बड़े शहरों में रहने वाले लोग ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों में रहने वाले लोग भी अनजाने में कई बार अपने घर में ऐसी गलत निर्माण करवा लेते हैं, जिसका असर उनके जीवन पर पड़ता है. सुविधा और आधुनिकता के चलते कई बार घर की दिशा और ऊर्जा संतुलन पर ध्यान नहीं दिया जाता, जिससे वास्तु दोष उत्पन्न हो जाते हैं. आज के समय में 90 के दशक के बाद से घरों में अटैच्ड बाथरूम का चलन काफी बढ़ गया है. पहले जहां एक पूरे परिवार के लिए एक ही बाथरूम होता था, वहीं अब हर कमरे के साथ बाथरूम होना आम बात हो गई है. सुविधा और प्राइवेसी के लिहाज से यह सही है, लेकिन कई बार इसकी दिशा पर ध्यान नहीं दिया जाता है. आइए पंडित कमल नंदलाल जी से जानते हैं बाथरूम की सही दिशा. बाथरूम की ये दिशा है अशुभ वास्तु के अनुसार बाथरूम का संबंध राहु से माना जाता है. ऐसे में अगर बाथरूम गलत दिशा में बना हो, तो यह जीवन में समस्याएं पैदा कर सकता है. खासतौर पर उत्तर दिशा में बना टॉयलेट गंभीर वास्तु दोष माना जाता है. उत्तर दिशा को देव दिशा कहा गया है. यह कुबेर की दिशा होती है, जो धन और समृद्धि के देवता माने जाते हैं. यही दिशा धन के आगमन की भी मानी जाती है. वहीं दक्षिण दिशा को धन के संचय की दिशा कहा गया है. इसलिए तिजोरी अक्सर दक्षिण दिशा में रखने की सलाह दी जाती है. अगर उत्तर दिशा में कोई वास्तु दोष होता है, खासकर टॉयलेट, तो इससे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है. कमाई होने के बावजूद बचत नहीं हो पाती और धीरे-धीरे आर्थिक संकट बढ़ने लगता है. आजकल फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स में यह समस्या काफी आम हो गई है. ऐसे में अगर आपके घर में भी उत्तर दिशा में टॉयलेट बना हुआ है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. एक सरल उपाय से इसके दुष्प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है. घर का केंद्र (ब्रह्मस्थान) घर के बिल्कुल बीचोबीच कभी भी बाथरूम या टॉयलेट नहीं होना चाहिए. क्या है बाथरूम की शुभ दिशा दक्षिण-पश्चिम का बाहरी हिस्सा (South of South-West) यदि उत्तर-पश्चिम में जगह न हो, तो दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम के बीच के हिस्से (SSW) में भी टॉयलेट बनाया जा सकता है. केवल स्नानघर (Only Bathroom/Shower Area) के लिए दिशा यदि आप केवल नहाने की जगह (बिना कमोड/टॉयलेट सीट के) बना रहे हैं, तो इसके लिए पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा बेहद शुभ होती है. यहां से आने वाली सुबह की धूप और सकारात्मक ऊर्जा स्वास्थ्य के लिए अच्छी मानी जाती है. करें ये उपाय अगर आपका टॉयलेट उत्तर दिशा में बना हुआ है तो उसके अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए आप एक हरे रंग की कांच की बोतल लें और उसमें मनी प्लांट का पौधा लगाएं. इस बोतल को घर की उत्तर दिशा में रख दें. यह उपाय उत्तर दिशा की ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करता है और वास्तु दोष के प्रभाव को कम करता है.

इंदौर के उभरते कराटे सितारों का कमाल, राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर बढ़ाया गौरव

इंदौर  उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित हुई राष्ट्रीय स्तर की कराटे प्रतियोगिता में इंदौर के होनहार खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 4 से 7 जून 2026 तक संचालित हुई केआईओ (KIO) राष्ट्रीय सब-जूनियर, कैडेट एवं जूनियर कराटे चैंपियनशिप 2026 में इंदौर के युवा कराटेबाजों ने उत्कृष्ट खेल कौशल का परिचय दिया। इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप में खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल छह पदक अपने नाम किए, जिसमें एक स्वर्ण पदक और पांच कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार सफलता से खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय पटल पर अपनी वॉरियर मार्शल आर्ट्स अकादमी का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया है।   पदक विजेताओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन कराटे अकादमी के मुख्य कोच राहुल जाट ने प्रतियोगिता के परिणामों की जानकारी देते हुए बताया कि चैंपियनशिप में इंदौर की प्रतिभावान खिलाड़ी यशस्वी सोनी ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए अपनी श्रेणी में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके साथ ही अकादमी के अन्य होनहार खिलाड़ियों में होमेश गुर्जर, मानवी मिश्रा, श्रुत जैन, पहर शर्मा और स्तुति गौर ने भी कड़े मुकाबलों में अपनी प्रतिभा दिखाते हुए देश भर से आए प्रतिद्वंदियों को मात दी और कांस्य पदक जीतकर शहर का गौरव बढ़ाया। राष्ट्रीय मंच पर खिलाड़ियों का सराहनीय प्रयास पदक विजेताओं के अतिरिक्त इंदौर के अन्य कराटे खिलाड़ियों ने भी इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप में अपनी तकनीकी और जुझारू क्षमता से सभी को प्रभावित किया। कोच राहुल जाट के अनुसार प्रतियोगिता के विभिन्न मुकाबलों में दिया चतुर्वेदी, काव्या गुर्जर, राजविका परमार, अद्विका चौधरी, भाव्या परमार तथा रोनित थापा ने भी राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया। भले ही ये खिलाड़ी पदक तालिका में स्थान बनाने से चूक गए, लेकिन राष्ट्रीय मंच पर उनके इस जुझारू खेल प्रदर्शन ने खेल अकादमी के सम्मान को और अधिक बढ़ाया है। खेल प्रेमियों और पदाधिकारियों ने दी शुभकामनाएं इंदौर के मार्शल आर्ट्स खिलाड़ियों की इस अभूतपूर्व राष्ट्रीय उपलब्धि पर स्थानीय खेल प्रेमियों, प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों के अभिभावकों ने गहरा हर्ष व्यक्त किया है। खिलाड़ियों की इस बड़ी सफलता पर इंदौर जिला सेइकोकाई के अध्यक्ष अजय शुक्ला, संगठन के सचिव मयूर यादव तथा अमेय शर्मा ने सभी पदक विजेताओं और प्रतिभागी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई दी। पदाधिकारियों ने खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि इंदौर के इन बच्चों ने राष्ट्रीय स्तर पर शहर का मान बढ़ाया है और उन्होंने सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।   

हथकरघा उद्योग को बढ़ावा, उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर

 लखनऊ  बुनकरों को आधुनिक तकनीक वाली मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस संदर्भ में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि लाखों बुनकर परिवारों की आजीविका का भी प्रमुख आधार है। इसलिए विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी बुधवार को पिकप भवन में उन्होंने राज्य हथकरघा निगम, यूपिका, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों तक सभी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए। उन्होंने राज्य हथकरघा निगम एवं यूपिका के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में निर्मित हथकरघा एवं वस्त्र उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप विकसित किया जाए। उत्पादों की ऑनलाइन एवं ऑफलाइन मार्केटिंग को और सुदृढ़ बनाने, ई-कामर्स प्लेटफार्म से जुड़ाव बढ़ाने तथा नए बाजारों की तलाश करने के निर्देश भी दिए। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति, बजट व्यय, निगमों की वित्तीय स्थिति, उत्पादन एवं विपणन संबंधी उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

कोचिंग संस्थानों के विवाद में बढ़ी हलचल, अलख पांडे बोले—हम खान सर के साथ

 पटना पटना के दो बड़े कोचिंग संस्थानों के मालिकों के बीच चल रहे विवाद में अलग-अलग कोचिंग संचालक भी कूद पड़े हैं। हाल ही में गुरु रहमान ने रौशन आनंद सर के भाई की मौत पर दुख जताते हुए कहा था कि खान सर झूठ बहुत बोलते हैं। अब मशूहर फिजिक्स वाला के निदेशक अलख पांडेय ने भी इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। अलख पांडेय ने कहा है कि वो खान सर के साथ हैं। फिजिक्सवाले के टीचर अलख पांडेय ने कहा, 'मुझे खान सर पर कुछ बोलने के लिए काफी कमेंट मिल रहे हैं। एक बात बताइए अगर आपके भाई के उपर कोई बात आएगी तो आप बैठ कर वीडियो बनाएंगे या फिर उसकी मदद करने की कोशिश करेंगे। एक इंसान जो देश के लिए इतना कुछ कर रहा है। उसने शिक्षा काफी सस्ती कर दी। पिछले 5 साल से वो यूट्यूब पर और सोशल मीडिया पर बिल्कुल सस्ती शिक्षा दे रहा है। उस इंसान का कोई कर्त्व्य नहीं बनता था कि वो बिहार में आकर सस्ते अस्पताल खोले,सस्ता इलाज करे तो वो उसने आप सब के लिए किया। आज उसका परिणाम क्या मिलता है, तो फैजल खान ने ये किया, फैजल खान ने वो किया।' अलख पांडेय ने आगे कहा कि अभी हमारी खान सर से जब अंतिम बातचीत हो रही थी तो हम लोग यही बात कर रहे थे कि जो भी सच्चाई है वो सामने आनी चाहिए। निष्पक्ष जांच हो जाए। पुलिस सामने आकर सब सच-सच बोल दे। अगर मेरे भाई के अंदर कोई कमी निकल जाती है तो दे देना सजा। इतना विश्वास है रखते हैं। हम अंत तक खान सर के साथ खड़े हैं। शुरुआत से अंत तक। रौशन आनंद सर के भाई के साथ जो हुआ वो बहुत दुख की बात है। उसमें भी हम प्रशासन और पुलिस से सच्चे दिल से यही निवेदन करेंगे कि जिसका भी नाम आए उसे फांसी दे दी जाए और उसपर कड़ी कार्रवाई हो। गुरु रहमान ने क्या कहा था आपको बता दें कि इससे पहले गुरु रहमान ने फैजल खान उर्फ खान सर के बीच चल रहे विवाद पर कहा था कि रौशन आनंद का अपने भाई को खो देना एक ह्रदय विदारक घटना है और मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वो उनके भाई को अपने चरणों में स्थान दें। साथ ही साथ रौशन आनंद और उनके माता-पिता तथा परिजनों की सहनशीलता बढ़े। इस दुख की घड़ी में मैं प्रत्येक पल रौशन के साथ हूं। इस बार तो अति हो गई है। लेकिन खान झूठ बहुत ज्यादा बोलता है। सुबह क्या बोलेगा, दोपहर में क्या बोलेगा और रात में क्या बोलेगा यह नहीं पता है।

इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड टेस्ट में रोमांच: बाउंसरों के बीच फिलिप्स का जुझारू अर्धशतक करीब

नई दिल्ली द ओवल मैदान पर खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच एक बेहद कड़ा और रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। दिन के आखिरी सेशन में जब इंग्लिश तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर अपनी रफ्तार से कहर बरपा रहे थे तब कीवी ऑलराउंडर ग्लेन फिलिप्स ने उनका डटकर सामना किया। ढलती दोपहर की धूप में चश्मा (सनग्लासेस) पहनकर बल्लेबाजी कर रहे फिलिप्स को आर्चर की एक तीखी बाउंसर सीधे जा लगी लेकिन उन्होंने दर्द को छुपाते हुए मुस्कुराकर अपनी टीम के ड्रेसिंग रूम की तरफ थंब्स-अप (अंगूठा) दिखाया जो पहले दिन का सबसे यादगार पल बन गया। ग्लेन फिलिप्स अपनी टीम के लिए खड़े रहे मैच की बात करें तो टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत अच्छी रही लेकिन उसके टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में नाकाम रहे। टॉम ब्लंडेल ने एक जुझारू अर्धशतक जमाया जबकि डेरिल मिचेल और रचिन रविंद्र ने भी उपयोगी योगदान दिया। हालांकि, नियमित अंतराल पर विकेट गिरने के कारण मेहमान टीम मैच पर पूरी तरह शिकंजा नहीं कस सकी। ऐसे में निचले मध्यक्रम में ग्लेन फिलिप्स की पारी न्यूजीलैंड के लिए संकटमोचक साबित हुई। जोफ्रा आर्चर ने किया परेशान दूसरी तरफ, इंग्लैंड के युवा गेंदबाजी आक्रमण ने न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। अपना पहला टेस्ट खेल रहे सोनी बेकर ने अपनी लाइन-लेंथ से प्रभावित किया, जबकि जैकब बेथेल ने शाम के सत्र में दो महत्वपूर्ण विकेट चटकाकर इंग्लैंड की मैच में वापसी कराई। इसके बावजूद, पूरी पारी के दौरान जोफ्रा आर्चर ही आकर्षण का केंद्र रहे जिन्होंने अपनी शॉर्ट-पिच गेंदों से कीवी बल्लेबाजों की कड़ी परीक्षा ली। फिफ्टी के करीब हैं फिलिप्स आर्चर और फिलिप्स के बीच की जंग ने टेस्ट क्रिकेट के पारंपरिक रोमांच को जीवंत कर दिया। आर्चर लगातार अपनी गति और आक्रामकता से फिलिप्स को छका रहे थे और उन्हें बत्तख की तरह झुकने पर मजबूर कर रहे थे। लेकिन फिलिप्स ने भी हार नहीं मानी और शरीर पर गेंदें झेलने के बावजूद क्रीज पर डटे रहे। उन्होंने न सिर्फ आर्चर के बाउंसरों के तूफान को झेला बल्कि न्यूजीलैंड की पारी को बिखरने से भी बचाया। पहले दिन का खेल खत्म होने तक ग्लेन फिलिप्स 49 रन बनाकर नाबाद लौटे और वह अपने अर्धशतक से महज एक रन दूर हैं। चोटों और दर्द के बावजूद चश्मा पहनकर मुस्कुराते हुए आर्चर का सामना करने के उनके अनोखे अंदाज ने ओवल के मैदान पर मौजूद दर्शकों का दिल जीत लिया।

रेलवे का बड़ा फैसला! मेंटेनेंस के चलते हर शुक्रवार बंद रहेगा पठानकोट नैरोगेज सेक्शन, 2 जोड़ी ट्रेनें भी रद्द

पठानकोट  करीब पौने चार साल तक बंद रहने के बाद दोबारा शुरू हुई नैरोगेज ट्रेन सेवा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। रेलवे ने ट्रैक की मरम्मत और रखरखाव का हवाला देते हुए नूरपुर रोड-बैजनाथ के बीच चल रही दो जोड़ी ट्रेनों को अगले आदेश तक रद्द कर दिया है। रेलवे के इस फैसले से यात्रियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जिस ट्रैक को लगभग पौने चार वर्षों तक बंद रखा गया, उसकी मरम्मत और रखरखाव का कार्य उसी दौरान पूरा किया जाना चाहिए था। अब जब रेल सेवा बहाल हो चुकी है और लोग फिर से ट्रेन का उपयोग करने लगे हैं, तो हर सप्ताह ट्रेनों का संचालन बंद रखने का फैसला उनकी समझ से परे है। फरवरी में ही मिल गई थी सेफ्टी क्लीयरेंस फरवरी में चक्की पुल को मंजूरी मिलने के बाद रेलवे अधिकारियों ने कई बार इस सेक्शन पर रेल सेवा जल्द बहाल करने का दावा किया था। फरवरी से मई तक मौसम भी अनुकूल रहा, जिससे ट्रैक की व्यापक मरम्मत और रखरखाव का कार्य आसानी से किया जा सकता था। इसके बावजूद उस दौरान कोई विशेष मेंटेनेंस अभियान नहीं चलाया गया। अब, ट्रेन सेवा शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद रखरखाव का हवाला देकर सेवाएं बंद किए जाने से लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेलवे अपनी प्रशासनिक खामियों और अधूरे कार्यों को छिपाने की कीमत यात्रियों से वसूल रहा है, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में बसों का लेना होगा सहारा ट्रेन सेवाएं बंद होने से पठानकोट, नूरपुर, ज्वालामुखी, कांगड़ा, पालमपुर और बैजनाथ की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को मजबूरन बसों का सहारा लेना पड़ेगा। इससे उन्हें रेल किराए की तुलना में कई गुना अधिक खर्च वहन करना होगा। रेलवे के आदेश के अनुसार ट्रेन संख्या 52462 (बैजनाथ पपरोला-नूरपुर रोड) और 52474 (नूरपुर रोड-बैजनाथ पपरोला) को अगले आदेश तक रद्द रखा जाएगा। इसके अलावा, ट्रैक और अन्य संरचनाओं के रखरखाव के लिए प्रत्येक शुक्रवार कांगड़ा वैली रेलवे सेक्शन में सभी नैरोगेज यात्री ट्रेन सेवाएं बंद रहेंगी। फैसले पर पुनर्विचार करे रेलवे रेल यात्रियों और स्थानीय संगठनों ने रेलवे मंत्रालय से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमित रखरखाव आवश्यक है, तो इसके लिए पूरे दिन ट्रेन सेवाएं बंद करने के बजाय कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि हजारों यात्रियों को असुविधा का सामना न करना पड़े। यात्रियों का सवाल है कि जब रेलवे को ट्रैक की स्थिति और रखरखाव की जरूरतों की पहले से जानकारी थी, तो सेक्शन शुरू करने से पहले सभी जरूरी कार्य पूरे क्यों नहीं किए गए। उनका मानना है कि सेवा बहाल होने के कुछ ही समय बाद लिया गया यह फैसला रेलवे की कार्यप्रणाली और योजना निर्माण पर सवाल खड़े करता है। वहीं, इस मामले में रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण विभाग को यह कदम उठाना पड़ रहा है।  

टेलीग्राम पर 22 जून 2026 तक बैन: NEET UG के चलते सरकार का बड़ा फैसला

भारत सरकार ने इंस्टेंट मैसेजिंग और सोशल मीडिया ऐप टेलीग्राम को 22 जून 2026 तक बैन कर दिया है. इस बैन का है कि पर लीक से जुड़ी जानकारी को फैलने से रोका जा सके, ताकि NEET UG परीक्षा के दौरान किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े. टेलीग्राम व्हाट्सऐप से अलग है, क्योंकि यह अपने यूजर्स को चैट और हेवी साइज की फाइल्स शेयरिंग का ऑप्शन देता है. मामला तब और गरमा गया जब टेलीग्राम के CEO पावेल दुरोव ने आरोप लगायाकि रिलायंस कंपनी कुछ विदेशी ऐप्स को ब्लॉक कर रही हैं, ताकि वॉट्सऐप को फायदा हो सके. आइए जानते हैं वो 5 खास फीचर्स जो अभी भी व्हाट्सऐप पर नहीं मिलते टेलीग्राम पर लगा बैन सिर्फ कुछ दिनों का है, लेकिन इस बैन की एक बड़ी वजह इसके कुछ ऐसे फीचर्स माने जा रहे हैं जो NEET UG जैसे एग्जाम के दौरान गलत जानकारी या पेपर लीक को तेजी से फैलाने में इस्तेमाल हो सकते हैं. यूजरनेम फीचर, मोबाइल नंबर की जरूरत नहीं टेलीग्राम और व्हाट्सऐप दोनों मैसेजिंग ऐप हैं, लेकिन प्राइवेसी के मामले में टेलीग्राम काफी आगे है. यह यूजर्स को यूजरनेम बनाने की सुविधा देता है. इसकी वजह से ग्रुप में मौजूद लोगों को आपका मोबाइल नंबर नहीं दिखता, बल्कि सिर्फ यूजरनेम दिखाई देता है. यह छोटा सा फीचर प्राइवेसी की एक एक्स्ट्रा लेयर जोड़ देता है. अपने आप खत्म होने वाले मैसेज टेलीग्राम की मदद से आप ऐसे मैसेज भेज सकते हैं जो कुछ समय बाद अपने आप गायब हो जाते हैं. हालांकि ऐसा फीचर व्हाट्सऐप में भी डिसअपीयरिंग मैसेजेस के नाम से मौजूद है, लेकिन टेलीग्राम में यह पहले से आया था. साथ ही व्हाट्सऐप में शेड्यूल मैसेज का ऑप्शन नहीं मिलता, जबकि टेलीग्राम में आप मैसेज भेजने का समय पहले से सेट कर सकते हैं और मैसेज उसी समय डिलीवर होता है. एडवांस चैट कस्टमाइजेशन चैट कस्टमाइजेशन के मामले में टेलीग्राम काफी ज्यादा फीचर्स देता है. यूजर अपनी चैट का कस्टम थीम बना सकते हैं, रंग बदल सकते हैं, एनिमेटेड इमोजी और स्टिकर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे चैट को ज्यादा पर्सनल बनाया जा सकता है. व्हाट्सऐप भी ऐसे कुछ फीचर्स लेकर आ रहा है, लेकिन इनमें से कुछ फीचर्स पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल का हिस्सा हो सकते हैं. बॉट्स और मिनी ऐप्स यह फीचर टेलीग्राम को सबसे अलग बनाता है. ऐसे फीचर्स दूसरे ज्यादातर मैसेजिंग ऐप्स में देखने को नहीं मिलते. टेलीग्राम में आप चैट के अंदर बॉट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो कई काम अपने आप कर सकते हैं. जैसे टास्क ऑटोमेट करना, ग्रुप मैनेज करना, पोल बनाना या गेम खेलना. इस वजह से टेलीग्राम सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप नहीं रह जाता, बल्कि कई तरह के काम करने वाला एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन जाता है. बड़े ग्रुप और मैसेज एडिटिंग फीचर टेलीग्राम का सबसे बड़ा फीचर इसके बड़े ग्रुप हैं. इस ऐप पर 2 लाख तक मेंबर्स वाला ग्रुप बनाया जा सकता है और एक साथ सभी लोगों तक मैसेज पहुंचाया जा सकता है. वहीं व्हाट्सऐप में ग्रुप की लिमिट काफी कम है. इसी वजह से बड़े स्तर पर जानकारी फैलाने के लिए टेलीग्राम ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. मैसेज एडिटिंग फीचर भी काफी फेमस है. इसकी मदद से भेजे गए मैसेज को बाद में एडिट किया जा सकता है, जबकि मैसेज का टाइमस्टैम्प वही रहता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने इस फीचर को लेकर टेलीग्राम से कुछ बदलाव करने की मांग की है.

अंडे में खून की बूंद क्यों दिखती है? जानिए इसका वैज्ञानिक कारण

अंडे को प्रोटीन और न्यूट्रिएंट्स का सबसे अच्छा सोर्स माना जाता है इसलिए कई लोग रोजाना अंडे का सेवन करते हैं. लेकिन कई बार जब अंडे को पैन में तोड़ने के लिए फोड़ते हैं तो योक (पीला भाग) या एल्ब्यूमेन (सफेद भाग) पर लाल रंग की खून की बूंद या धब्बा दिखाई देता है. इसे देखकर अक्सर लोग डर जाते हैं और पूरा अंडा फेंक देते हैं. लोग सोचने लगते हैं कि क्या यह अंडा खराब है या फिर फर्टिलाइज्ड (जिससे चूजा बनता है) हो चुका है? अब ऐसे में हर किसी के मन में सवाल उठता है कि ये ब्लड स्पॉट कैसे आता है और क्या उससे कुछ नुकसान हो सकता है? तो आइए इस बारे में जानते हैं. क्यों आ जाती है अंडे के अंदर खून की बूंद? हेल्थलाइन का कहना है, अंडे में दिखने वाले ये ब्लड स्पॉट्स पूरी तरह से नेचुरल होते हैं और इन्हें देखकर घबराने की जरूरत नहीं है. दरअसल, अंडे में खून का धब्बा दिखाई देने के पीछे एक सिंपल बायोलॉजिकल प्रोसेस है. जब मुर्गी के शरीर के अंदर अंडा बन रहा होता है तो योक उसके ओवरी (अंडाशय) से रिलीज होता है. ओवरी में कई छोटी-छोटी ब्लड वेसल्स होती हैं और अंडा रिलीज होने के दौरान अगर इनमें से कोई भी बारीक ब्लड वेसल फट जाती है तो खून की एक छोटी सी बूंद योक पर लग जाती है. यूएसयू डिजिटल कॉमन्स पर पब्लिश्ड यूटा स्टेट यूनिवर्सिटी एक्सटेंशन गाइड के अनुसार, यदि ब्लड वेसल ओवरी में फटती है तो धब्बा योक पर दिखता है और यदि अंडा आगे बढ़ने के बाद ओविडक्ट (अंडवाहिनी) में ब्लीडिंग होती है तो यह धब्बा अंडे के सफेद भाग में आ जाता है. यह मुर्गी की उम्र, जेनेटिक्स, विटामिन A की कमी या अचानक बढ़े स्ट्रेस के कारण हो सकता है. क्या ब्लड स्पॉट वाले अंडे को खाना सुरक्षित है? आम जनता के बीच यह सबसे बड़ा कन्फ्यूजन है कि क्या इस अंडे को खाने से कोई बीमारी हो सकती है. यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) का कहना है, ब्लड स्पॉट वाले अंडे खाने के लिए पूरी तरह से सेफ हैं. USDA अंडा ग्रेडिंग मैनुअल के नियमों के अनुसार, ऐसे अंडों को ग्रेड-बी कैटेगरी में रखा जाता है लेकिन ये अनसेफ नहीं होते. यदि आपको यह धब्बा देखने में अच्छा नहीं लग रहा है तो आप चाकू की नोक या चम्मच से उस लाल हिस्से को निकालकर अलग कर सकते हैं और बाकी बचे अंडे को आराम से पकाकर खा सकते हैं. बस ध्यान रखें कि अंडे को अच्छी तरह से कुक किया गया हो.

मृत व्यक्ति की वस्तुओं को लेकर गरुड़ पुराण की मान्यता: मोह और संतुलन पर जोर

मृत्यु जीवन का एक अटल सत्य है. जब कोई अपना इस दुनिया को छोड़कर जाता है, तो पीछे सिर्फ यादें ही नहीं छोड़ता बल्कि कई सवाल भी छोड़ जाता है. उन्हीं सवालों में से एक है कि क्या मृत व्यक्ति के कपड़े, गहने, बिस्तर और अन्य सामान घर में संभालकर रखना चाहिए या उन्हें विदा कर देना चाहिए? यह सवाल केवल परंपरा या आस्था का नहीं, बल्कि मनोविज्ञान और भावनाओं से भी जुड़ा है. कुछ लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, तो कुछ इसे शांति और संतुलन से जोड़कर देखते हैं. ऐसे में गरुड़ पुराण क्या कहता है, इसे समझना जरूरी हो जाता है. गरुड़ पुराण क्या कहता है? गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु केवल शरीर का अंत नहीं, बल्कि आत्मा की एक नई यात्रा की शुरुआत है. शास्त्र कहते हैं कि मृत्यु के बाद व्यक्ति का मोह पूरी तरह समाप्त नहीं होता है. वह जिन वस्तुओं से जुड़ा होता है, वो हैं कपड़े, घड़ी, गहने, उनसे भावनात्मक संबंध बना रहता है. इसलिए शास्त्र यह सलाह देते हैं कि मृत व्यक्ति की चीजों को संभालने में संतुलन जरूरी है. उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि आत्मा और परिवार दोनों को मानसिक शांति देना है. कपड़ों को लेकर क्या करें? मृत व्यक्ति के कपड़े सबसे ज्यादा दुविधा पैदा करते हैं. क्योंकि वे शरीर के सबसे करीब रहते हैं और उनसे गहरा भावनात्मक जुड़ाव होता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, कपड़ों को लंबे समय तक संभालकर रखना उचित नहीं माना गया है. इन्हें सम्मानपूर्वक दान कर देना चाहिए. यह न केवल एक परंपरा है, बल्कि एक मानसिक प्रक्रिया भी है. जिससे व्यक्ति अपने दुख से धीरे-धीरे बाहर निकल पाता है. गहने और घड़ी का महत्व कपड़ों के विपरीत, गहनों को अलग दृष्टि से देखा गया है. क्योंकि वे केवल उपयोग की वस्तु नहीं, बल्कि परिवार की विरासत भी होते हैं. गहनों को रखा जा सकता है, लेकिन शुद्धि के बाद उन्हें नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में अपनाना चाहिए. वहीं घड़ी को लेकर विशेष सावधानी बताई गई है. अगर घड़ी बंद या खराब हो, तो उसे घर में रखना रुके हुए समय का प्रतीक माना जाता है. तस्वीरों को कहां रखें? तस्वीरें भावनात्मक रूप से सबसे ज्यादा असर डालती हैं. लेकिन, पितरों की तस्वीरें मंदिर में नहीं रखनी चाहिए. घर के हर कोने में तस्वीरें लगाना भी उचित नहीं होता है. शास्त्र कहते हैं कि तस्वीरें ऐसी जगह रखें जहां वे प्रेरणा दें, न कि हर दिन दुख की याद दिलाएं. बिस्तर और रोजमर्रा की वस्तुएं बिस्तर, गद्दा, तकिया जैसी चीजें व्यक्ति के जीवन के आखिरी दिनों से जुड़ी होती हैं. इन्हें बदल देना या हटाना बेहतर माना गया है. वैज्ञानिक रूप से भी इनमें बैक्टीरिया हो सकते हैं. हालांकि, पलंग जैसी वस्तुओं को अच्छी तरह साफ करके इस्तेमाल किया जा सकता है. असली संदेश क्या है? गरुड़ पुराण का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि संतुलन सिखाना है. हर चीज को न तो पूरी तरह पकड़कर रखें और न ही बिना सोचे समझे त्याग दें. जरूरी है यह समझना कि क्या वह वस्तु आपके लिए प्रेरणा है या मानसिक बोझ?

रूपनगर के पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संदोआ पर पुलिस का शिकंजा, देह व्यापार केस में भेजा समन

 रूपनगर देह व्यापार से जुड़े एक मामले में रूपनगर के पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संदोआ को पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। उन्हें 22 जून को सुबह 11 बजे संबंधित जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। रूपनगर पुलिस की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि थाना आनंदपुर साहिब में 17 फरवरी 2026 को दर्ज एफआईआर नंबर 32 की जांच जारी है। एसएसपी रूपनगर मनिंदर सिंह ने मामले की जांच थाना आनंदपुर साहिब और थाना सदर के एसएचओ को सौंपी है। डीएसपी दीपइंदर सिंह द्वारा जारी नोटिस के अनुसार पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संदोआ को 22 जून को सुबह 11 बजे जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इसके लिए थाना सदर रूपनगर के एसएचओ को आवश्यक कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, थाना आनंदपुर साहिब के एसएचओ को एफआईआर से संबंधित रिकॉर्ड के साथ निर्धारित समय पर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। मामले में सभी संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। नोटिस जारी होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में मामले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच पूरी होने तक विस्तृत टिप्पणी करने से इन्कार किया है।