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टेलीग्राम पर 22 जून 2026 तक बैन: NEET UG के चलते सरकार का बड़ा फैसला

भारत सरकार ने इंस्टेंट मैसेजिंग और सोशल मीडिया ऐप टेलीग्राम को 22 जून 2026 तक बैन कर दिया है. इस बैन का है कि पर लीक से जुड़ी जानकारी को फैलने से रोका जा सके, ताकि NEET UG परीक्षा के दौरान किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े. टेलीग्राम व्हाट्सऐप से अलग है, क्योंकि यह अपने यूजर्स को चैट और हेवी साइज की फाइल्स शेयरिंग का ऑप्शन देता है. मामला तब और गरमा गया जब टेलीग्राम के CEO पावेल दुरोव ने आरोप लगायाकि रिलायंस कंपनी कुछ विदेशी ऐप्स को ब्लॉक कर रही हैं, ताकि वॉट्सऐप को फायदा हो सके. आइए जानते हैं वो 5 खास फीचर्स जो अभी भी व्हाट्सऐप पर नहीं मिलते टेलीग्राम पर लगा बैन सिर्फ कुछ दिनों का है, लेकिन इस बैन की एक बड़ी वजह इसके कुछ ऐसे फीचर्स माने जा रहे हैं जो NEET UG जैसे एग्जाम के दौरान गलत जानकारी या पेपर लीक को तेजी से फैलाने में इस्तेमाल हो सकते हैं. यूजरनेम फीचर, मोबाइल नंबर की जरूरत नहीं टेलीग्राम और व्हाट्सऐप दोनों मैसेजिंग ऐप हैं, लेकिन प्राइवेसी के मामले में टेलीग्राम काफी आगे है. यह यूजर्स को यूजरनेम बनाने की सुविधा देता है. इसकी वजह से ग्रुप में मौजूद लोगों को आपका मोबाइल नंबर नहीं दिखता, बल्कि सिर्फ यूजरनेम दिखाई देता है. यह छोटा सा फीचर प्राइवेसी की एक एक्स्ट्रा लेयर जोड़ देता है. अपने आप खत्म होने वाले मैसेज टेलीग्राम की मदद से आप ऐसे मैसेज भेज सकते हैं जो कुछ समय बाद अपने आप गायब हो जाते हैं. हालांकि ऐसा फीचर व्हाट्सऐप में भी डिसअपीयरिंग मैसेजेस के नाम से मौजूद है, लेकिन टेलीग्राम में यह पहले से आया था. साथ ही व्हाट्सऐप में शेड्यूल मैसेज का ऑप्शन नहीं मिलता, जबकि टेलीग्राम में आप मैसेज भेजने का समय पहले से सेट कर सकते हैं और मैसेज उसी समय डिलीवर होता है. एडवांस चैट कस्टमाइजेशन चैट कस्टमाइजेशन के मामले में टेलीग्राम काफी ज्यादा फीचर्स देता है. यूजर अपनी चैट का कस्टम थीम बना सकते हैं, रंग बदल सकते हैं, एनिमेटेड इमोजी और स्टिकर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे चैट को ज्यादा पर्सनल बनाया जा सकता है. व्हाट्सऐप भी ऐसे कुछ फीचर्स लेकर आ रहा है, लेकिन इनमें से कुछ फीचर्स पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल का हिस्सा हो सकते हैं. बॉट्स और मिनी ऐप्स यह फीचर टेलीग्राम को सबसे अलग बनाता है. ऐसे फीचर्स दूसरे ज्यादातर मैसेजिंग ऐप्स में देखने को नहीं मिलते. टेलीग्राम में आप चैट के अंदर बॉट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो कई काम अपने आप कर सकते हैं. जैसे टास्क ऑटोमेट करना, ग्रुप मैनेज करना, पोल बनाना या गेम खेलना. इस वजह से टेलीग्राम सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप नहीं रह जाता, बल्कि कई तरह के काम करने वाला एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन जाता है. बड़े ग्रुप और मैसेज एडिटिंग फीचर टेलीग्राम का सबसे बड़ा फीचर इसके बड़े ग्रुप हैं. इस ऐप पर 2 लाख तक मेंबर्स वाला ग्रुप बनाया जा सकता है और एक साथ सभी लोगों तक मैसेज पहुंचाया जा सकता है. वहीं व्हाट्सऐप में ग्रुप की लिमिट काफी कम है. इसी वजह से बड़े स्तर पर जानकारी फैलाने के लिए टेलीग्राम ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. मैसेज एडिटिंग फीचर भी काफी फेमस है. इसकी मदद से भेजे गए मैसेज को बाद में एडिट किया जा सकता है, जबकि मैसेज का टाइमस्टैम्प वही रहता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने इस फीचर को लेकर टेलीग्राम से कुछ बदलाव करने की मांग की है.

अंडे में खून की बूंद क्यों दिखती है? जानिए इसका वैज्ञानिक कारण

अंडे को प्रोटीन और न्यूट्रिएंट्स का सबसे अच्छा सोर्स माना जाता है इसलिए कई लोग रोजाना अंडे का सेवन करते हैं. लेकिन कई बार जब अंडे को पैन में तोड़ने के लिए फोड़ते हैं तो योक (पीला भाग) या एल्ब्यूमेन (सफेद भाग) पर लाल रंग की खून की बूंद या धब्बा दिखाई देता है. इसे देखकर अक्सर लोग डर जाते हैं और पूरा अंडा फेंक देते हैं. लोग सोचने लगते हैं कि क्या यह अंडा खराब है या फिर फर्टिलाइज्ड (जिससे चूजा बनता है) हो चुका है? अब ऐसे में हर किसी के मन में सवाल उठता है कि ये ब्लड स्पॉट कैसे आता है और क्या उससे कुछ नुकसान हो सकता है? तो आइए इस बारे में जानते हैं. क्यों आ जाती है अंडे के अंदर खून की बूंद? हेल्थलाइन का कहना है, अंडे में दिखने वाले ये ब्लड स्पॉट्स पूरी तरह से नेचुरल होते हैं और इन्हें देखकर घबराने की जरूरत नहीं है. दरअसल, अंडे में खून का धब्बा दिखाई देने के पीछे एक सिंपल बायोलॉजिकल प्रोसेस है. जब मुर्गी के शरीर के अंदर अंडा बन रहा होता है तो योक उसके ओवरी (अंडाशय) से रिलीज होता है. ओवरी में कई छोटी-छोटी ब्लड वेसल्स होती हैं और अंडा रिलीज होने के दौरान अगर इनमें से कोई भी बारीक ब्लड वेसल फट जाती है तो खून की एक छोटी सी बूंद योक पर लग जाती है. यूएसयू डिजिटल कॉमन्स पर पब्लिश्ड यूटा स्टेट यूनिवर्सिटी एक्सटेंशन गाइड के अनुसार, यदि ब्लड वेसल ओवरी में फटती है तो धब्बा योक पर दिखता है और यदि अंडा आगे बढ़ने के बाद ओविडक्ट (अंडवाहिनी) में ब्लीडिंग होती है तो यह धब्बा अंडे के सफेद भाग में आ जाता है. यह मुर्गी की उम्र, जेनेटिक्स, विटामिन A की कमी या अचानक बढ़े स्ट्रेस के कारण हो सकता है. क्या ब्लड स्पॉट वाले अंडे को खाना सुरक्षित है? आम जनता के बीच यह सबसे बड़ा कन्फ्यूजन है कि क्या इस अंडे को खाने से कोई बीमारी हो सकती है. यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) का कहना है, ब्लड स्पॉट वाले अंडे खाने के लिए पूरी तरह से सेफ हैं. USDA अंडा ग्रेडिंग मैनुअल के नियमों के अनुसार, ऐसे अंडों को ग्रेड-बी कैटेगरी में रखा जाता है लेकिन ये अनसेफ नहीं होते. यदि आपको यह धब्बा देखने में अच्छा नहीं लग रहा है तो आप चाकू की नोक या चम्मच से उस लाल हिस्से को निकालकर अलग कर सकते हैं और बाकी बचे अंडे को आराम से पकाकर खा सकते हैं. बस ध्यान रखें कि अंडे को अच्छी तरह से कुक किया गया हो.

मृत व्यक्ति की वस्तुओं को लेकर गरुड़ पुराण की मान्यता: मोह और संतुलन पर जोर

मृत्यु जीवन का एक अटल सत्य है. जब कोई अपना इस दुनिया को छोड़कर जाता है, तो पीछे सिर्फ यादें ही नहीं छोड़ता बल्कि कई सवाल भी छोड़ जाता है. उन्हीं सवालों में से एक है कि क्या मृत व्यक्ति के कपड़े, गहने, बिस्तर और अन्य सामान घर में संभालकर रखना चाहिए या उन्हें विदा कर देना चाहिए? यह सवाल केवल परंपरा या आस्था का नहीं, बल्कि मनोविज्ञान और भावनाओं से भी जुड़ा है. कुछ लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, तो कुछ इसे शांति और संतुलन से जोड़कर देखते हैं. ऐसे में गरुड़ पुराण क्या कहता है, इसे समझना जरूरी हो जाता है. गरुड़ पुराण क्या कहता है? गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु केवल शरीर का अंत नहीं, बल्कि आत्मा की एक नई यात्रा की शुरुआत है. शास्त्र कहते हैं कि मृत्यु के बाद व्यक्ति का मोह पूरी तरह समाप्त नहीं होता है. वह जिन वस्तुओं से जुड़ा होता है, वो हैं कपड़े, घड़ी, गहने, उनसे भावनात्मक संबंध बना रहता है. इसलिए शास्त्र यह सलाह देते हैं कि मृत व्यक्ति की चीजों को संभालने में संतुलन जरूरी है. उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि आत्मा और परिवार दोनों को मानसिक शांति देना है. कपड़ों को लेकर क्या करें? मृत व्यक्ति के कपड़े सबसे ज्यादा दुविधा पैदा करते हैं. क्योंकि वे शरीर के सबसे करीब रहते हैं और उनसे गहरा भावनात्मक जुड़ाव होता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, कपड़ों को लंबे समय तक संभालकर रखना उचित नहीं माना गया है. इन्हें सम्मानपूर्वक दान कर देना चाहिए. यह न केवल एक परंपरा है, बल्कि एक मानसिक प्रक्रिया भी है. जिससे व्यक्ति अपने दुख से धीरे-धीरे बाहर निकल पाता है. गहने और घड़ी का महत्व कपड़ों के विपरीत, गहनों को अलग दृष्टि से देखा गया है. क्योंकि वे केवल उपयोग की वस्तु नहीं, बल्कि परिवार की विरासत भी होते हैं. गहनों को रखा जा सकता है, लेकिन शुद्धि के बाद उन्हें नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में अपनाना चाहिए. वहीं घड़ी को लेकर विशेष सावधानी बताई गई है. अगर घड़ी बंद या खराब हो, तो उसे घर में रखना रुके हुए समय का प्रतीक माना जाता है. तस्वीरों को कहां रखें? तस्वीरें भावनात्मक रूप से सबसे ज्यादा असर डालती हैं. लेकिन, पितरों की तस्वीरें मंदिर में नहीं रखनी चाहिए. घर के हर कोने में तस्वीरें लगाना भी उचित नहीं होता है. शास्त्र कहते हैं कि तस्वीरें ऐसी जगह रखें जहां वे प्रेरणा दें, न कि हर दिन दुख की याद दिलाएं. बिस्तर और रोजमर्रा की वस्तुएं बिस्तर, गद्दा, तकिया जैसी चीजें व्यक्ति के जीवन के आखिरी दिनों से जुड़ी होती हैं. इन्हें बदल देना या हटाना बेहतर माना गया है. वैज्ञानिक रूप से भी इनमें बैक्टीरिया हो सकते हैं. हालांकि, पलंग जैसी वस्तुओं को अच्छी तरह साफ करके इस्तेमाल किया जा सकता है. असली संदेश क्या है? गरुड़ पुराण का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि संतुलन सिखाना है. हर चीज को न तो पूरी तरह पकड़कर रखें और न ही बिना सोचे समझे त्याग दें. जरूरी है यह समझना कि क्या वह वस्तु आपके लिए प्रेरणा है या मानसिक बोझ?

रूपनगर के पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संदोआ पर पुलिस का शिकंजा, देह व्यापार केस में भेजा समन

 रूपनगर देह व्यापार से जुड़े एक मामले में रूपनगर के पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संदोआ को पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। उन्हें 22 जून को सुबह 11 बजे संबंधित जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। रूपनगर पुलिस की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि थाना आनंदपुर साहिब में 17 फरवरी 2026 को दर्ज एफआईआर नंबर 32 की जांच जारी है। एसएसपी रूपनगर मनिंदर सिंह ने मामले की जांच थाना आनंदपुर साहिब और थाना सदर के एसएचओ को सौंपी है। डीएसपी दीपइंदर सिंह द्वारा जारी नोटिस के अनुसार पूर्व विधायक अमरजीत सिंह संदोआ को 22 जून को सुबह 11 बजे जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इसके लिए थाना सदर रूपनगर के एसएचओ को आवश्यक कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, थाना आनंदपुर साहिब के एसएचओ को एफआईआर से संबंधित रिकॉर्ड के साथ निर्धारित समय पर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। मामले में सभी संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। नोटिस जारी होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में मामले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच पूरी होने तक विस्तृत टिप्पणी करने से इन्कार किया है।  

मुख्य द्वार पर जल छिड़काव: वास्तु अनुसार घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का उपाय

 घर का मुख्य द्वार ही वह स्थान है जहां से सकारात्मक ऊर्जा और धन का आगमन होता है. अगर आप भी अपने घर में बरकत और शांति चाहते हैं, तो सुबह के समय मुख्य द्वार पर जल छिड़कने का छोटा सा उपाय आपके लिए बेहद प्रभावी साबित हो सकता है. मुख्य द्वार पर जल छिड़काव के चमत्कारी लाभ लक्ष्मी का आगमन: ताजा जल पवित्रता का प्रतीक है, जो धन और सौभाग्य को घर की ओर आकर्षित करता है. नकारात्मक ऊर्जा का नाश: यह द्वार की दहलीज को शुद्ध करता है और रात भर में जमा हुई नकारात्मक शक्तियों व बुरी नजर को खत्म करता है. राहु दोष का निवारण: मुख्य द्वार राहु से संबंधित माना गया है.  सुबह जल छिड़कने से राहु का नकारात्मक प्रभाव कम होता है, जिससे अचानक आने वाली मुसीबतें और पारिवारिक कलह दूर होती है. पितृ देवों का आशीर्वाद: पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ सुबह के समय प्रवेश द्वार पर आते हैं.  जल की स्वच्छता उन्हें तृप्त करती है और उनका आशीर्वाद मिलता है. कैसे छिड़के जल सही समय: यह उपाय सुबह सोकर उठने के बाद, सूर्योदय से पहले या ठीक बाद करें. पहले द्वार के सामने झाड़ू लगाएं, फिर जल छिड़कें. तांबे का पात्र: जल को रात भर तांबे के लोटे में रखे,  सुबह उसका इस्तेमाल करें. तांबे के औषधीय गुण और शुद्धिकरण की शक्ति  के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है. इन चीजों को मिलाकर बनाएं उपाय को और शक्तिशाली हल्दी का पानी: एक चुटकी हल्दी मिलाने से गंभीर आर्थिक रुकावटें दूर होती हैं. सेंधा नमक: सप्ताह में एक बार (विशेषकर शुक्रवार को) पानी में सेंधा नमक मिलाकर छिड़काव करें. यह जिद्दी नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सेहत को बेहतर करता है. गंगाजल या गुलाब जल: इसकी कुछ बूंदें घर में शांति और सद्भाव बनाए रखती हैं. दिशा संबंधी सावधानियां (Directional Precautions) वास्तु के अनुसार दिशा के अनुसार जल का इस्तेमाल करें: शुभ दिशाएं: यदि मुख्य द्वार उत्तर (North), उत्तर-पूर्व (North-East) या पूर्व (East) में है, तो जल के उपाय सबसे ज्यादा फायदेमंद हैं. सावधानी: दक्षिण (South), दक्षिण-पूर्व (SE) या दक्षिण-पश्चिम (SW) दिशा वाले द्वार पर जल का छिड़काव कम करें. इन अग्नि वाली दिशाओं में पानी का ज्यादा जमाव अस्थिरता या आर्थिक नुकसान की वजह बन सकता है. यहा केवल हल्की सफाई पर ध्यान दें.

पाकिस्तान समर्थित साजिश का खुलासा, लश्कर के इशारे पर खड़ा हुआ नेटवर्क; NIA ने कसी नकेल

अमृतसर  पंजाब के अमृतसर में रहने वाला अंकुश कपूर पूरी तरह पाकिस्‍तान की कठपुतली बन चुका था. पाकिस्‍तान में बैठे आकाओं के इशारे पर उसने अमृतसर में नार्को-टेरर की पूरी लंका तैयार कर ली थी. उसकी इस लंका के तार सिर्फ अमृतसर या पंजाब तक सीमित नहीं थे, बल्कि उसका नेटवर्क इटली, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तक फैल चुका था. अब नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने उसकी इस लंका के दहन की पूरी तैयारी कर ली है. इसकी सिलसिले में एनआईए ने अंकुश के अमृतसर स्थिति बंगले को जब्‍त कर लिया है।  एनआईए का दावा है कि इस बंगले को नार्को-टेरर की काली कमाई से तैयार किया गया था. जांच में सामने आया है कि आरोपी अंकुश कपूर ही लश्‍कर-ए-तैयबा के नार्को-टेरर नेटवर्क को भारत में संभाल रहा था. अंकुश कपूर के संबंध दुबई में बैठे उन लोगों से थे, जिनके तार सीधे तौर पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे. एनआईए का मानना है कि यह नेटवर्क केवल नशीले पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका मकसद ड्रग्स से होने वाली कमाई को आतंकी गतिविधियों तक पहुंचाना भी था।  सूत्रों के अनुसार, पाकिस्‍तान ड्रग से होने वाली कमाई का इस्‍तेमाल आतंक की जड़ों को मजबूत करने के लिए करता आया है. आरोपी अंकुश कपूर भी इसी कड़ी का एक अहम चेहरा था. वह लश्‍कर के इशारे पर ड्रग्‍स की तस्करी के साथ स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन में अहम भूमिका निभाता था. एनआईए की जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क के तार सिर्फ भारत और पाकिस्तान तक सीमित नहीं थे. इसका नेटवर्क इटली, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तक फैला हुआ था।  जांच में यह भी सामने आया है कि ड्रग्स की कमाई को अगल अगल तरीके से विभिन्न देशों में भेजा जाता था. बाद में, इसी कमाई का इस्‍तेमाल आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाता था. मंगलवार को जिस मकान को जब्त किया गया, उसे यूएपीए के तहत आतंक से अर्जित संपत्ति माना गया है. जांच एजेंसी के अनुसार, अंकुश कपूर को टेरर फंडिंग, आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियों के तहत गिरफ्तार किया गया था. उस पर एनडीपीएस एक्ट और भारतीय दंड संहिता (आईपीएस) की विभिन्न धाराओं के तहत भी मामले दर्ज हैं. इस पूरे मामले में अब तक 26 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। 

सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन: 22 जून 2026 से बदल सकती है कई राशियों की किस्मत

 ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का चाल बदलना बहुत बड़ी बात मानी जाती है. सभी ग्रहों के राजा सूर्य देव जब अपना नक्षत्र बदलते हैं, तो इसका असर हम सभी के जीवन पर पड़ता है. आने वाली 22 जून 2026 से सूर्य देव एक नया नक्षत्र शुरू करने जा रहे हैं.  ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, इस बदलाव से कुछ लोगों की किस्मत के दरवाजे खुलने वाले हैं. खासकर 3 राशियों के लिए यह समय धन-दौलत और सफलता की नई शुरुआत लेकर आएगा. किन राशियों को मिलेगा फायदा? सूर्य का यह बदलाव इन 3 राशियों के लिए बेहद खास रहने वाला है: मेष राशि: आपके लिए यह समय बहुत अच्छा रहेगा. ऑफिस में आपको प्रमोशन मिल सकता है, जो काम लंबे समय से अटके थे, वे पूरे हो जाएंगे. आपको अचानक पैसों का लाभ भी हो सकता है, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी. सिंह राशि: सूर्य देव इस राशि के स्वामी हैं, इसलिए इसका सबसे ज्यादा और अच्छा असर आप पर पड़ेगा.  आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा, समाज में मान-सम्मान मिलेगा.  अगर कोई सरकारी काम अटका है, तो उसमें सफलता मिल सकती है.  लोग आपकी बातों को गंभीरता से लेंगे. कन्या राशि: आपके पास पैसा आने के नए रास्ते खुलेंगे. ऑफिस में आपकी मेहनत की तारीफ होगी. अच्छे परिणाम मिलेंगे. अगर आप कहीं पैसा निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह सही समय है. परिवार में भी खुशहाली का माहौल रहेगा. जीवन में आएंगे ये अच्छे बदलाव सूर्य के इस बदलाव से आपकी सुख-सुविधाएं बढ़ेंगी. आपमें एक नया जोश देखने को मिलेगा. आप पहले से ज्यादा बेहतर फैसले ले पाएंगे , मुश्किल समय में भी मजबूती से खड़े रहेंगे.  आपकी सेहत में भी सुधार होगा. सूर्य देव की कृपा पाने के आसान उपाय     इस दौरान सूर्य देव को खुश करने के लिए आप ये छोटे-छोटे उपाय कर सकते हैं:     रोज सुबह उठकर तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल चढ़ाएं.     'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें.     रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना बहुत शुभ माना गया है.  

रांची समेत कई जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, 60 किमी रफ्तार से चलेंगी हवाएं

रांची झारखंड में मौसम का मिजाज बदलने वाला है. प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनने और झारखंड में मॉनसून की बेरुखी के बाद गुरुवार से एक बार फिर मॉनसून के सक्रिय होने की संभावना बढ़ गई है. मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार और शुक्रवार को राज्य के कई हिस्सों में मौसम बदलने की संभावना है.   18-19 जून का मौसम गुरुवार और शुक्रवार यानी 18 और 19 जून को रांची सहित 17 जिलों में दोपहर के बाद मौसम बदलने की संभावना है. इनमें खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, गिरिडीह, धनबाद, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ शामिल हैं. इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आंधी चलने तथा मेघ गर्जन के साथ वज्रपात होने की आशंका है. मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. बाकी सात जिलों में भी तेज हवा के साथ मेघ गर्जन, वज्रपात और कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग ने इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के मुताबिक रांची में 18 जून और 19 जून को रांची का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. 20 जून का मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 20 जून को राज्य में आंशिक बादल छाए रहेंगे. कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है. राज्य के कुछ हिस्सों में वज्रपात होने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है. जून में हुई कम बारिश मौसम विभाग के अनुसार, इस साल एक जून से 17 जून के बीच झारखंड में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है. एक जून से 17 जून तक झारखंड में सामान्य से 56 प्रतिशत कम बारिश हुई है. इस अवधि में सामान्य बारिश 67 मिमी होनी चाहिए थी.

शहरीकरण की मार, दिल्ली में तेजी से बढ़े खराब पर्यावरण वाले इलाके

नई दिल्ली  दिल्ली में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और निर्माण गतिविधियों का असर पर्यावरण पर साफ दिखाई देने लगा है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक, पिछले 32 वर्षों में सेंट्रल दिल्ली ने अपने सबसे बेहतर इकोसिस्टम का करीब 73.8 प्रतिशत हिस्सा खो दिया है। कभी राजधानी के सबसे समृद्ध पर्यावरणीय क्षेत्रों में शामिल सेंट्रल दिल्ली का बड़ा हिस्सा अब खराब पर्यावरण की श्रेणी में पहुंच गया है। जामिया मिलिया इस्लामिया के भूगोल और पर्यावरण विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन 'क्रॉसिंग द इकोलॉजिकल थ्रेशोल्ड' में 1991 से 2023 तक के सैटेलाइट आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार, सेंट्रल दिल्ली में बेहतरीन प्राकृतिक स्वास्थ्य वाली जमीन 1991 में 13.88 वर्ग किलोमीटर थी, जो 2023 में घटकर सिर्फ 3.63 वर्ग किलोमीटर रह गई। खराब पर्यावरण वाले इलाके बढ़े     अध्ययन में यह भी सामने आया कि पूरी दिल्ली में खराब पर्यावरण वाले क्षेत्रों में 50.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।     सबसे ज्यादा गिरावट उत्तरी दिल्ली में दर्ज की गई, जहां खराब पर्यावरण वाला क्षेत्र बढ़कर 131.18 वर्ग किलोमीटर हो गया।     दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में ऐसे क्षेत्रों में 132 प्रतिशत और पश्चिमी दिल्ली में करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।     पूर्वी दिल्ली, शाहदरा और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में अच्छी पर्यावरणीय स्थिति वाले क्षेत्र अब बहुत कम बचे हैं।     इसके लिए अंधाधुंध शहरीकरण, औद्योगिक गतिविधियां और यमुना के फ्लडप्लेन में लगातार कमी को प्रमुख कारण बताया गया है।     हालांकि दक्षिणी दिल्ली और नई दिल्ली जिले से कुछ राहत की तस्वीर भी सामने आई है।  

तरबूज की खट्टी-मीठी शिकंजी: गर्मी में ताजगी और एनर्जी का फ्रूटी ड्रिंक

जून की इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और तपती धूप में घर से बाहर निकलते ही शरीर की पूरी एनर्जी खत्म हो जाती है. ऐसे में बॉडी को तुरंत हाइड्रेट करने के लिए हम अक्सर नींबू पानी या सोडा शिकंजी का सहारा लेते हैं. लेकिन रोज-रोज वही पुराना स्वाद पीकर अगर आपका मन भर गया है तो इस बार अपने समर ड्रिंक को एक फ्रूटी और मजेदार ट्विस्ट दें. आज हम आपके लिए लेकर आए हैं तरबूज की खट्टी-मीठी शिकंजी. तरबूज के नैचुरल मीठे स्वाद के साथ नींबू की खटास, पुदीने की ताजगी और खास मसालों का यह मेल मुंह में जाते ही स्वाद का ऐसा बम फोड़ेगा कि आप बाजार के सारे मॉकटेल भूल जाएंगे. यह न सिर्फ आपके शरीर को अंदर से बर्फ जैसा ठंडा रखेगी, बल्कि आपको लू से भी बचाएगी. आइए जानते हैं इसे बनाने की सबसे आसान विधि. सामग्री (Ingredients) तरबूज के टुकड़े: 2 कप (बीज निकाले हुए) नींबू का रस: 2 बड़े चम्मच ताजा पुदीना पत्ती: 10-12 काला नमक: 1/2 छोटी चम्मच भुना जीरा पाउडर: 1/2 छोटी चम्मच चाट मसाला: 1/4 छोटी चम्मच सादा नमक: एक चुटकी बर्फ के टुकड़े: आवश्यकतानुसार ठंडा पानी या सोडा वॉटर: 1 गिलास चीनी या शहद: 1 चम्मच अगर तरबूज कम मीठा हो तो शहद न मिलाएं बनाने का तरीका सबसे पहले तरबूज के टुकड़ों को मिक्सर जार या ब्लेंडर में डालें. साथ में पुदीने की पत्तियां और नींबू का रस डालकर बिना पानी मिलाए इसे अच्छी तरह ब्लेंड कर लें ताकि एक स्मूथ जूस तैयार हो जाए. तैयार हुए तरबूज के जूस को एक बड़ी छलनी की मदद से छान लें, ताकि अगर कोई छोटा बीज या रेशा रह गया हो तो वह निकल जाए. अगर आपको पल्प पसंद है तो आप बिना छाने भी इस्तेमाल कर सकते हैं. अब इस छाने हुए जूस में काला नमक, सादा नमक, भुना जीरा पाउडर और चाट मसाला डालकर अच्छी तरह चम्मच से मिक्स करें. अगर तरबूज थोड़ा फीका है, तो आप इस स्टेज पर थोड़ा सा शहद या पिसी चीनी मिला सकते हैं. सर्विंग ग्लास में 2-3 पुदीने की पत्तियां हाथ से तोड़कर डालें, साथ में एक नींबू की पतली स्लाइस और ढेर सारे बर्फ के टुकड़े डालें. अब गिलास में आधा तैयार किया हुआ मसालेदार तरबूज का जूस डालें और ऊपर से चिल्ड पानी या सोडा वॉटर डालकर मिक्स करें. ऊपर से थोड़ा सा भुना जीरा पाउडर स्प्रिंकल करें और पुदीने की पत्ती से गार्निश करके गरमा-गरम धूप से आए मेहमानों को तुरंत परोसें.