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यूपी में नया सिस्टम: देर से रजिस्ट्रेशन पर शुल्क और SDM की अनुमति जरूरी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जन्म और मृत्यु (Birth and Death) पंजीकरण को लेकर नई नियमावली लागू हो गई है। प्रदेश सरकार ने रजिस्ट्रेशन सिस्टम को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और व्यवस्थित बनाने के लिए उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियमावली-2026 लागू कर दी गई है। चिकित्सा अनुभाग-7 द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार जन्म, मृत्यु अथवा मृत-जन्म की सूचना अब घटना के 21 दिन के भीतर देना अनिवार्य होगा। नई नियमावली के तहत जन्म या मृत्यु पंजीकरण के लिए 21 दिन के अंदर सूचना देना अनिवार्य कर दिया गया है। जन्म के लिए 21 दिन बाद लेकिन 30 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर 20 रुपये विलंब शुल्क देना होगा। 30 दिन से एक वर्ष तक की देरी होने पर संबंधित अधिकारी की अनुमति के साथ 50 रुपये शुल्क लगेगा, जबकि एक वर्ष से अधिक विलंब होने पर एसडीएम, जिला मजिस्ट्रेट अथवा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश पर 100 रुपये शुल्क देकर पंजीकरण कराया जा सकेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जन्म प्रमाणपत्र में किसी प्रकार के संक्षिप्त नाम स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। नई व्यवस्था में ऑनलाइन पंजीकरण, रिकॉर्ड के स्थायी संरक्षण, त्रुटि संशोधन और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को भी अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है। क्यों जरूरी है जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र शिशु के जन्म पर उसका पंजीकरण कराकर जन्म प्रमाण लेना और किसी व्यक्ति की मृत्यु पर उसका पंजीकरण कराकर मृत्यु प्रमाण पत्र लेना बेहद जरूरी होता है। दरअसल, ये पंजीकरण ही परिवार में किसी नए सदस्य के आगमन या किसी सदस्य के प्रस्थान की अधिकारिक सूचना होते है। ये दोनों प्रमाण पत्र बुनियादी कानूनी दस्तावेज हैं। जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) किसी व्यक्ति की पहचान, उम्र और नागरिकता पहला प्रमाण है। स्कूल में एडमिशन से लेकर नौकरी तक हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) कानूनी रूप से मृत्यु प्रमाणित करने, संपत्ति, बीमा या पेंशन आदि के दावों के लिए अनिवार्य होता है।

RBI हॉलिडे कैलेंडर: मुहर्रम और वीकेंड के चलते जून में कई दिन बंद रहेंगे बैंक

नई दिल्ली अगर अगले सप्ताह बैक से जुड़े कामकाज करने के लिए ब्रांच जाने की योजना बना रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, आज 22 जून से 28 जून 2026 के बीच चार दिन बैंक बंद रहेंगे। बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इस महीने राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और धार्मिक छुट्टियों के कारण कुल 11 छुट्टियों की लिस्ट जारी की है। इसमें दूसरे शनिवार, चौथे शनिवार और सभी रविवार की छुट्टियां भी शामिल हैं। हालांकि, कुछ बैंक की छुट्टियां राज्यों या क्षेत्रों के हिसाब से अलग होती हैं लेकिन सरकारी राष्ट्रीय छुट्टियों के दिन देश भर में बैंक की शाखाएं बंद रहेंगी। अगले हफ्ते कब-कब है छुट्टियां RBI के हॉलीडे कैलेंडर के मुताबिक अगले सप्ताह 25, 26, 27 और 28 जून को बैंक बंद रहेंगे। 25 और 26 जून को मुहर्रम के कारण देश के कई इलाकों में बैंक बंद रहेंगे। 25 जून को विजयवाड़ा में बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 26 जून को अगरतला, आइजोल, बेलापुर, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, हैदराबाद, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना, रायपुर, रांची और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 27 जून को पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे क्योंकि यह चौथा शनिवार है और 28 जून को रविवार है। जून 2026 का छुट्टियों का कैलेंडर 15 जून को यंग मिजो एसोसिएशन (YMA) की स्थापना के उपलक्ष्य में आइजोल में बैंक बंद रहेंगे। राजा संक्रांति के कारण भुवनेश्वर में भी इस दिन बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 25 जून को मुहर्रम के कारण विजयवाड़ा में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा, 26 जून को मुहर्रम के कारण अगरतला, आइजोल, बेलापुर, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, हैदराबाद, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना, रायपुर, रांची और श्रीनगर में बैंक का कामकाज बंद रहेगा। वहीं, 29 जून को संत गुरु कबीर जयंती मनाने के लिए शिमला में बैंक बंद रहेंगे। इसी तरह, 30 जून को रेमना नी नामक क्षेत्रीय सार्वजनिक अवकाश के कारण आइजोल में बैंक बंद रहेंगे। शनिवार और रविवार को छुट्टियां रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार, सभी शेड्यूल्ड और नॉन-शेड्यूल्ड बैंक महीने के हर दूसरे और चौथे शनिवार और हर रविवार को अनिवार्य रूप से बंद रहते हैं। इसका मतलब है कि इन दिनों ग्राहक ब्रांच में मिलने वाली सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे। बता दें कि इस महीने में कुल चार रविवार हैं, इसलिए बैंक 7, 14, 21 और 28 जून को बंद रहेंगे। रविवार के अलावा बैंक 13 जून (दूसरा शनिवार) और 27 जून (चौथा शनिवार) को भी बंद रहेंगे।

बड़े भवनों में सोलर पैनल और ईवी चार्जिंग अनिवार्य, राजस्थान सरकार का नया ग्रीन नियम

जयपुर राजस्थान में भवन निर्माण सेक्टर में ऊर्जा दक्षता (एनर्जी एफिशिएंसी) और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया जाएगा. मॉल, होटल, कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स हो या मल्टीस्टोरी बिल्डिंग, इन्हें ऊर्जा बचाने वाले और पर्यावरण अनुकूल बनाया जाएगा. राजस्थान सरकार ने एनर्जी कंजर्वेशन और सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड-2026 लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है. इसके लागू होने के बाद बिजली बचाने, सोलर एनर्जी अपनाने और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी. यही नहीं, इन नियमों का पालन करने के बाद भवन में अतिरिक्त निर्माण की अनुमति भी मिल जाएगी.    योजना के बारे में समझिए राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम योजना पर काम कर रहा है. ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने इसे अंतिम रूप देने के निर्देश दिए है. इसके तहत छत का आधा हिस्सा सोलर प्लांट के लिए रखना होगा. बड़े भवनों में ईवी चार्जिंग स्टेशन और अलग पार्किंग अनिवार्य होगा. साथ ही उल्लंघन करने पर भवन मालिकों को जुर्माना भी भरना पड़ सकता है.   इन कर्मशियल बिल्डिंग पर लागू होगा नियम ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने समीक्षा बैठक में बताया कि यह कोड मुख्य रूप से उन व्यावसायिक भवनों पर लागू होगा, जिनका बिल्ड अप एरिया 2000 वर्ग मीटर या कनेक्टेड लोड 100 किलोवाट या उससे अधिक हो. कनेक्टेड डिमांड 120 केवीए या उससे अधिक हो. पहली बार मिलेगी ऐसी छूट पर्यावरण-अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए नियमों में पहली बार विशेष वित्तीय व तकनीकी लाभ प्रस्तावित किए गए हैंय कोड के प्लस मानकों का पालन करने वाले भवनों को 5 प्रतिशत और सुपर बिल्डिंग कोड मानकों को पूरा करने वाले भवनों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिल्ट एरिया रेश्यो दिए जाने का प्रावधान है. इसे और अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाने के लिए बहुमूल्य सुझाव भी मांगे गए हैं.

INS दूनागिरी, INS अग्रय और INS संशोधक की एंट्री से भारत की रक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा

नई दिल्ली  पाकिस्तानी नौसेना समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए चीन से हंगोर क्लास की पनडुब्बी लेकर आई है। ऐसे में भारत ने भी पनडुब्बियों को डुबो देने वाले तीन घातक स्वदेशी युद्धपोत नीले समंदर में उतार दिए हैं। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में तीन नए युद्धपोतों INS दुनागिरि, INS अग्रय और INS संशोधक को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने दुश्मनों को स्पष्ट संकेत दिया कि शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य जरूरी है और भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत कर रहा है। पीएम मोदी ने कहा, 'भारत ने हमेशा से समुद्र को सहयोग का माध्यम माना है। लेकिन भारत ये भी जानता है कि शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य आवश्यक है। समृद्धि की रक्षा के लिए सुरक्षा आवश्यक है। भविष्य के निर्माण के लिए आत्मनिर्भरता अनिवार्य है। आज INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक इसी भावना के प्रतीक बनकर भारतीय नौसेना में शामिल हुए हैं।' समंदर में ताकत बढ़ा रही भारतीय नौसेना कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट में आयोजित एक खास समारोह में इन तीनों वॉरशिप को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इनमें एक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरी, दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रेह और तीसरा सर्वे वेसेल लार्ज संशोधक है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब एक ही दिन में तीन वॉरशिप नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं। इससे पहले 15 जनवरी 2025 को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नीलगिरी क्लास का पहला स्टेल्थ फ्रिगेट INS नीलगिरी, डिस्ट्रॉयर INS सूरत और पनडुब्बी INS वागशीर भारतीय नौसेना में शामिल किए गए थे। नेवी को मिला P17A क्लास का पांचवा वॉरिशप इसी साल 30 मार्च को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित पांचवां गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट दूनागिरी भारतीय नौसेना को सौंपा था। दूनागिरी, पूर्ववर्ती INS दूनागिरी का आधुनिक स्वरूप है, जो लींडर क्लास का फ्रिगेट था और 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक नौसेना का हिस्सा रहा। यह 16 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपा गया पी17ए श्रेणी का पांचवां वॉरशिप है। पहले चार जहाजों के निर्माण से मिले अनुभव के आधार पर इसका निर्माण समय 93 महीनों से घटाकर 80 महीने कर दिया गया। INS दूनागिरी की खासियत     INS दूनागिरी में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली लगी है, जो एंटी-शिप और एंटी-सर्फेस युद्ध में बेहद प्रभावी मानी जाती है।     यह वॉरशिप बराक-8 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल आधुनिक एयर डिफेंस गन स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम मल्टी-फंक्शन रडार जैसी अत्याधुनिक सिस्टम से लेस हैं।     यह फ्रिगेट दुश्मन के हमलों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।     INS दूनागिरी लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं और इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।     6,700 टन वजनी यह युद्धपोत 30 नॉट की अधिकतम गति से चल सकता है। INS अग्रेह की खासियत     दुश्मन की सबमरीन से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना शुरू की थी। साल 2019 में 16 वॉरशिप के निर्माण का कांट्रेक्ट दिया गया था, जिनमें आठ कोचिन शिपयार्ड और आठ जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं। इसी परियोजना के तहत निर्मित अग्रेह को भी नौसेना में शामिल किया गया है। इससे पहले आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त, आईएनएस माहे और आईएनएस अंजदीप को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।     INS अग्रेह की खासियत है कि यह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है।     यह जहाज 25 नॉट की रफ्तार से चल सकता है और तकरीबन 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है।     तटीय क्षेत्रों में यह 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता है। INS संशोधक की खासियत     संशोधक की खासियत है कि यह समुद्र तल की स्कैनिंग करना, सुरक्षित नेविगेशन रूट के लिए समुद्री चार्ट तैयार करने के साथ-साथ हाइड्रोग्राफिक सर्वे करना है।     जीआरएसई, कोलकाता में निर्मित इस जहाज में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।     इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के नेवल डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।     110 मीटर लंबा और लगभग 3,800 टन वजनी यह जहाज दो डीजल इंजनों से संचालित होता है।     यह 25 दिनों से ज्यादा समय तक समुद्र में रहने में सक्षम है और इसकी अधिकतम रफ़्तार 18 नॉट है।     भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद संशोधक देश की समुद्री सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र के मैप और सुरक्षित नेविगेशन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

नेतन्याहू सरकार की छवि पर उठे सवाल, जनता में बढ़ा असंतोष

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच भले ही समझौता हो गया है, लेकिन अभी भी मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है। इजरायल लेबनान के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इस बीच एक चौंकाने वाले सर्वे रिपोर्ट सामने आया है। सर्वेक्षण के अनुसार, इजरायली जनता ने साफ संकेत दिया है कि हालिया पश्चिम एशिया संघर्ष और अमेरिका-ईरान समझौते के बाद ईरान मजबूत होकर उभरा है, जबकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार की छवि बुरी तरह धूमिल हुई है। हिब्रू विश्वविद्यालय और अगम संस्थान के सहयोग से 17 से 20 जून के बीच कराए गए सर्वेक्षण में 3,644 लोगों ने भाग लिया। न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, सर्वे में शामिल 92.1 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ईरान ने संघर्ष जीत लिया या इजरायल की तुलना में उसे ज्यादा फायदा हुआ। 82.9 प्रतिशत इजरायलियों ने कहा कि इस युद्ध और उसके परिणामों से इजरायल की दीर्घकालिक सुरक्षा कमजोर हुई है। खास बात यह है कि यह धारणा केवल विपक्षी समर्थकों तक सीमित नहीं है। नेतन्याहू के दक्षिणपंथी राजनीतिक आधार वाले मतदाताओं में भी 93.1 प्रतिशत ने ईरान को मजबूत बताते हुए इसे इजरायल की हार माना। अमेरिका-ईरान समझौते का भारी विरोध इतना ही नहीं, सर्वेक्षण में अमेरिका-ईरान समझौते को इजरायलियों का भारी बहुमत विरोध करता दिखा। 63.2 प्रतिशत लोगों ने समझौते का विरोध किया, जबकि केवल 12.1 प्रतिशत ने इसका समर्थन किया। नेतन्याहू सरकार की छवि पर सबसे गंभीर प्रहार यह रहा कि 72.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने प्रधानमंत्री के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की सफलता वाले दावों पर भरोसा नहीं जताया। 56.4 प्रतिशत लोगों ने युद्ध प्रबंधन को 'विफल' या 'खराब' करार दिया। स्विट्जरलैंड में फिर शुरू हुई अमेरिका-ईरान वार्ता यह सर्वेक्षण ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी और ईरानी अधिकारी रविवार को स्विट्जरलैंड में दीर्घकालिक समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। अस्थायी समझौते को स्थायी बनाने के लिए हो रही इन वार्ताओं में तेहरान का परमाणु कार्यक्रम, तेल निर्यात और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे हैं। ये वार्ताएं लेबनान में जारी तनाव के बीच हो रही हैं। दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों और हिजबुल्लाह के बीच झड़पों के बाद शुक्रवार को घोषित युद्धविराम का दोनों पक्ष उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि लेबनान में स्थायी युद्धविराम वार्ता की सफलता के लिए जरूरी है, जबकि अमेरिका अगले 60 दिनों में व्यापक समझौते की उम्मीद जता रहा है।

भारत में बुलेट ट्रेन का विस्तार, 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी

 नई दिल्ली देश को अगले साल के मध्य में पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली इस बुलेट ट्रेन के लिए काम कई सालों से जारी है। इस बीच, देश के सात नए बुलेट ट्रेन हाई स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी मिल गई है। इसके तहत, दिल्ली से वाराणसी एक हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनेगा, जिसमें बुलेट ट्रेन महज दो घंटे में ही दिल्ली से लखनऊ पहुंचा देगी। वहीं, दिल्ली से वाराणसी के लिए महज तीन घंटे 15 मिनट का ही समय लेगा। ट्रेन की अधिकतम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी और यह हवा से बातें करेगी। मुंबई से अहमदाबाद ( एक घंटे 57 मिनट), मुंबई से पुणे (48 मिनट), बेंगलुरु से चेन्नई (73 मिनट्स), बेंगलुरु से हैदराबाद (2 घंटे 10 मिनट), पुणे से हैदराबाद (2 घंटे 8 मिनट), दिल्ली से लखनऊ (2 घंटे), दिल्ली से वाराणसी (3 घंटे 15 मिनट), दिल्ली से सिलिगुड़ी (6 घंटे) का समय लेगा। इन सात रूट्स पर हाई स्पीड बुलेट ट्रेन चलेगी। दिल्ली से वाराणसी तक लगभग 812 किलोमीटर लंबा रूट होगा। इस पर हाईस्पीड बुलेट ट्रेन की मैक्सिमम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी, जबकि संचालन की स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्ण्व ने कहा, ''पीएम मोदी ने सात नए कॉरिडोर का फैसला लिया है। इसके तहत मुंबई से पुणे 170 किलोमीटर के कॉरिडोर पर सफर सिर्फ 48 मिनट में पूरा होगा। अच्छा इकनॉमिक कॉरिडोर बन जाएगा। पुणे से हैदराबाद जोकि 500 किलोमीटर है लगभग, दो घंटे 8 मिनट में पूरा हो जाएगा। महाराष्ट्र में दो लाख करोड़ का निवेश हो रहा है।'' वहीं, लखनऊ से अयोध्या हाईस्पीड रूट की लंबाई 124 किलोमीटर होगी। दिल्ली से वाराणसी रूट पर चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए राज्य में कई शहरों में स्टेशन रखे गए हैं, ताकि आसपास के रहने वाले लोगों को फायदा मिल सके। दिल्ली, नोएडा, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज, वाराणसी में स्टेशन का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि, आखिरी फैसला बाद में लिया जाएगा। जापान की मदद से बन रही बुलेट ट्रेन बता दें कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है। 508 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने रखी थी। यह परियोजना जापान की शिंकान्सेन तकनीक और आर्थिक मदद से बनाई जा रही है। शुरुआत में इसे 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण और अन्य मंजूरियों में देरी की वजह से इसमें तय समय से ज्यादा लग गया। वर्तमान में निर्माण तेजी से चल रहा है और अधिकांश भूमि अधिग्रहण तथा वैधानिक मंजूरियां पूरी हो चुकी हैं। अगले साल अगस्त में शुरू हो सकती है बुलेट ट्रेन रेल मंत्रालय के अनुसार, गुजरात में कई हिस्सों पर ट्रैक, स्टेशन और वायाडक्ट का काम तेजी से चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि भारत को 15 अगस्त 2027 को अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिलने की संभावना है। पहला सेक्शन सूरत से बिलिमोरा तक होगा, उसके बाद वापी से सूरत तक का सेक्शन होगा। वहीं, मुंबई तक पूरी लाइन 2028-29 तक चालू किए जाने की संभावना है। पूरी तरह शुरू होने पर मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय करीब 2 से 3 घंटे रह जाएगा, जो अभी 6-7 घंटे से अधिक है।

डीएमसी मॉल में आम प्रदर्शनी, लोगों ने खरीदा नहीं सिर्फ फोटो खींचे

धनबाद  धनबाद के डीएमसी माल में आमोत्सव लगा हुआ है। बहुत अधिक नहीं लेकिन 10 स्टाल लगे थे। इन्हीं में एक स्टाल पर बोर्ड टंगा था इसे छुना मना है। बोर्ड देख लोग आते, कीमत पूछते और फिर आम को उठाने के लिए जैसे ही आगे बढ़ते तभी एक भारी आवाज आती। इसे मत छुओ यह मियांजाकी है। कीमत तीन लाख रुपये प्रति किलो। यानी एक आम की कीमत भी 1200 से 1500 रुपये। धनबाद में पहली बार आमोत्सव का आयोजन हुआ और उसमें भी मियांजाकी, खरीदने की हिम्मत किसी में नहीं थी, लेकिन देखने और उसकी तस्वीर लेने का तांता लगा हुआ था। मियांजाकी का यह क्रेज यहां देखने को मिला। जापान का यह आम धनबाद के लिए बहुत खास बना हुआ है। मां धरती फाउंडेशन की ओर से इसकी खेती धनबाद में की जा रही है। फाउंडेशन की ओर से इसे पहली बार धनबाद के बाजार में उतारा गया है। जेएसएलपीएस की ओर से आयोजित किया गया आमोत्सव धनबाद में ग्रामीण विकास शाखा और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड सोसाइटी की ओर से पहली बार आयोजित किए गए आमोत्सव में जिले के ग्रामीण इलाकों से आए किसानों ने अपने आमों को यहां प्रदर्शित किया और उसकी बिक्री भी की। आमोत्सव का उद्घाटन उपायुक्त आदित्य रंजन, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार और उपविकास आयुक्त सन्नी राज ने संयुक्त रूप से किया। उपायुक्त रंजन ने बताया कि इस आयोजन का मकसद धनबाद के आम की बागवानी से जुड़े किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि धनबाद में अभी बहुत अधिक मात्रा में आम की पैदावार नहीं हो रही है, लेकिन योजना है कि मनरेगा के तहत पांच एकड़ में आम के पौधे लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि धनबाद के आम को अन्य प्रदेशों में भी भेजने की योजना है। इसके अलावा धनबाद के बाजारों को सुदृढ़ भी किया जाएगा। टुंडी में आम्रपाली की खेती टुंडी के मछियारी पंचायत से आई अनीता मरांडी ने बताया कि इस बार आम्रपाली आम बहुत अच्छे हुए हैं। सबसे अधिक भीड़ भी उनके ही स्टाल पर रही। उन्होंने बताया कि टुंडी में आम की सामूहिक खेती की गई है। इस बार बरसात में और अधिक पौधे लगाने की योजना है। उन्होंने बताया कि जो पैदावार हो रही है, उसकी खपत धनबाद में ही है।  

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर पुलिस परिवार ने किया सामूहिक योगाभ्यास

भोपाल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज धृति कल्याण शाखा, पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा 25वीं वाहिनी के हॉल में योग कार्यक्रम एवं धृति 23वीं वाहिनी परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस परिवार के सदस्यों में स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, सकारात्मक जीवनशैली तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्रीमती सीमा मकवाणा के साथ श्रीमती प्रियंवदा सक्सेना, श्रीमती अनुपमा कुमार, श्रीमती टिंग रॉय, श्रीमती भारती प्रसाद तथा श्रीमती गीता गोस्वामी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर पुलिस लाइन नेहरू नगर, 23वीं वाहिनी विसबल, 25वीं वाहिनी विसबल, 7वीं वाहिनी विसबल भोपाल तथा झूला घर पुलिस मुख्यालय भोपाल से जुड़े पुलिस परिवार की महिलाओं एवं बच्चियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। योग कार्यक्रम के दौरान सामूहिक सूर्य नमस्कार का आयोजन किया गया तथा महिलाओं एवं बच्चियों द्वारा योग आधारित विभिन्न आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से योग के महत्व, स्वस्थ जीवनशैली, आत्मानुशासन एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने नियमित योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। योग कार्यक्रम के उपरांत धृति 23वीं वाहिनी परिसर में वृक्षारोपण किया गया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के निर्माण का संदेश देते हुए सभी ने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया। संपूर्ण कार्यक्रम सहायक पुलिस महानिरीक्षक (कल्याण) श्रीमती इरमीन शाह के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश पुलिस की सभी इकाइयों, जिलों, रेंज कार्यालयों, पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों एवं वाहिनियों में पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों तथा जवानों ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास किया। योग सत्रों में सहभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक संतुलन एवं शारीरिक फिटनेस का संदेश दिया।  

10 साल की सेवा का मिला फल, कर्मचारियों का अधिकारी बनने का सपना हुआ पूरा

पटना  बिहार के राजस्व कर्मचारियों का अधिकारी बनने का सपना पूरा हो रहा है। अब वे अधिकारी बनने लगे हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (Bihar Revenue and Land Reforms Department) ने पहले चरण में बिहार राजस्व कर्मचारी संवर्ग (क्षेत्रीय अराजपत्रित) के अधीन कार्यरत छह राजस्व कर्मचारियों को बिहार राजस्व सेवा संवर्ग केअधीन राजस्व अधिकारी एवं समकक्ष ग्रेड में पदस्थापित कर दिया है। इन्न्हें उच्च वेतनमान (वेतन स्तर-7) दिया गया है। इनमें कुमार ललन सिंह को औरंगाबाद, राजेश पासवान, उमेश प्रसाद, अवधेश साह, मंजेश कुमार ईश्वर एवं संगीता लोमस को बेगूसराय पदस्‍था‍पित किया गया है। कर्मचारियों एवं अमीन की पदस्‍थापना का हुआ था न‍िर्णय इससे पहले राजस्व कर्मचारियों एवं अमीनों को क्रमश: सहायक राजस्व अधिकारी और सहायक राजस्व अधिकारी (तकनीकी) के पद पर पदस्थापित करने का निर्णय हुआ था। विभाग इसे भी लागू कर रहा है। राजस्व कर्मचारियों की राजस्व अधिकारियों के पद पर प्रोन्नति का प्रविधान पहले से हैं। बिहार राजस्व सेवा के 25 प्रतिशत पद राजस्व कर्मचारियों की पदोन्नति से भरे जाते हैं। शर्त का करना होगा पालन इसके लिए 10 साल की बेदाग सेवा और सीमित परीक्षा उत्तीर्ण होने की शर्त है। लेकिन, यह व्यवस्था नियमित नहीं है। 10 साल की सेवा पूरी कर चुके सैंकड़ों राजस्व कर्मचारी प्रोन्नति के आधार पर राजस्व अधिकारी बनने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पिछले दिनों राजस्व कर्मचारियों के लंबे आंदोलन के बाद विभाग की सक्रियता बढ़ी है। अब प्रोन्नति देने का सिलसिला शुरू हो गया है। चरणबद्ध रूप से प्रोन्‍नत‍ि की प्रक्र‍िया पूरी जाएगी। इंतजार की घड़ी समाप्‍त होने लगी है।

गोरखपुर ने मारी बाजी, नगर निगमों की आय 5850 करोड़ रुपये के पार

 लखनऊ यूपी के नगर निगमों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। नगर निगमों ने पिछले वर्ष की तुलना में 32 प्रतिशत अधिक कमाई की है। नगर निकाय निदेशालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल राजस्व संग्रह 4439.32 करोड़ रुपये (2024-25) से बढ़कर 5850.05 करोड़ रुपये (2025-26) तक पहुंच गया। अब इसी हिसाब से नगर निगमों को विकास का पैसा भी जारी होगा। इसमें गोरखपुर ने बाजी मार ली है। ​राजस्व वृद्धि के मामले में गोरखपुर नगर निगम ने पूरे प्रदेश में अव्वल स्थान हासिल किया है। गोरखपुर नगर निगम ने पिछले वर्ष की तुलना में 109% की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बाद मथुरा-वृंदावन (66%) और वाराणसी (64%) का स्थान है। मेरठ नगर निगम 30 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ प्रदेश के 17 नगर निगमों में आठवें स्थान पर आया है। मेरठ में वित्तीय वर्ष 2025-2026 में कुल राजस्व वसूली 205.44 करोड़ की हुई है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-2025 में 158.08 करोड़ की हुई थी। हालांकि ओवरऑल राजस्व वसूली में लखनऊ नगर निगम प्रदेश में सबसे आगे रहा, जहां 1663.02 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति हुई है। शाहजहांपुर और सहारनपुर में हुई सबसे कम वृद्धि 17 नगर निगमों में सबसे कम राजस्व वृद्धि शाहजहांपुर और सहारनपुर जैसे नगर निगमों में हुई। शाहजहांपुर में मात्र तीन प्रतिशत वृद्धि के साथ कुल राजस्व वसूली 30.14 करोड़ की हुई। सहारनपुर में 10 प्रतिशत वृद्धि के साथ कुल राजस्व वसूली 70.62 करोड़ रुपये की हुई। मुरादाबाद नगर निगम में लंबित पड़े जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र के 800 आवेदन सीएसआर पोर्टल की सुस्ती से नगर निगम में 800 से अधिक जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र अटके हैं। पोर्टल न चलने के कारण आवेदकों की भीड़ नगर निगम कार्यालय में जमा हो रही है मगर उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर, एक जोन में रजिस्ट्रार के न होने से आवेदकों की परेशानी और बढ़ गई है। आवेदनों का समय से सत्यापन नहीं हो पा रहा है और प्रमाणपत्रों पर रजिस्ट्रार की मुहर नहीं लग पा रही है। नगर निगम के कार्यालय में करीब 35 आवेदक पहुंचे, जिनको जन्म अथवा मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए पंजीकरण कराना था मगर पोर्टल न चलने से वापस लौटना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि साइट न चलने से यह दिक्कत आ रही है, वहीं महानगर में जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र के 800 से अधिक आवेदन नगर निगम के सीएसआर पोर्टल पर लंबित हैं। इनका प्रमाण पत्र पोर्टल चालू नहीं होने से जारी नहीं हो पा रहा है। कुछ मामलों में पोर्टल की वजह से दिक्कत आ रही है तो वहीं कुछ मामलों में रजिस्ट्रार के न होने से लोग परेशान हैं।