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लापरवाह ठेकेदारों पर सख्त एक्शन, राज्यमंत्री गौर ने ब्लैकलिस्ट करने के दिए निर्देश

लापरवाह ठेकेदारों एक्शन की तैयारी, राज्यमंत्री गौर ने ब्लैक लिस्ट करने के दिए निर्देश विकास कार्यों की हुई समीक्षा, 3 दिनों में लंबित कार्य पूर्ण करने के दिये निर्देश भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने मंगलवार को मंत्रालय में विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में निर्माण कार्यों में देरी और लापरवाही पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए नगर निगम के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जो ठेकेदार निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं कर रहे हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाए। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि जनता की सुविधा से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में जिन विकास कार्यों के वर्कऑर्डर जारी हो चुके हैं, उनका शीघ्र भूमि पूजन कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाए, जिससे आमजन को समय पर इन सुविधाओं का लाभ मिल सके। बैठक में उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति और समय-सीमा की विस्तार से समीक्षा की तथा अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग कर कार्यों को तय समय में पूर्ण कराने के निर्देश दिए।  

राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड: शादी, तलाक और संपत्ति नियमों में बड़े बदलाव की संभावना

जयपुर जयपुर की एक बुजुर्ग महिला वर्षों से अपने पैतृक घर के एक हिस्से पर हक की लड़ाई लड़ रही है। दूसरी तरफ, एक युवती अदालतों के चक्कर काटते हुए यह साबित करने में लगी है कि शादी के बाद भी उसे बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। कहीं एक महिला अपने पति की दूसरी शादी के खिलाफ न्याय चाहती है, तो कहीं लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाला एक जोड़ा सामाजिक पहचान की तलाश में है। अब राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता की तैयारी के साथ इन तमाम कहानियों का भविष्य बदल सकता है। सरकार ने बढ़ाया पहला बड़ा कदम राज्य सरकार ने यूसीसी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित कमेटी कानून का मसौदा तैयार करेगी। लेकिन यह सिर्फ एक नया कानून नहीं होगा, बल्कि राजस्थान के करोड़ों लोगों की निजी जिंदगी को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा सामाजिक बदलाव साबित हो सकता है। शादी के नियमों में बड़ा बदलाव अगर यूसीसी लागू होती है तो सबसे बड़ा असर विवाह व्यवस्था पर दिखाई देगा। प्रदेश में किसी भी धर्म का व्यक्ति एक से ज्यादा शादी नहीं कर सकेगा। अभी अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, लेकिन नए कानून के बाद विवाह के नियम एक समान हो सकते हैं। इसका मतलब यह होगा कि शादी केवल सामाजिक या धार्मिक रस्म नहीं रहेगी, बल्कि कानूनी रूप से पंजीकृत संबंध बन जाएगी। महिलाओं को मिल सकती है नई ताकत विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी। आज भी कई मामलों में महिलाएं दूसरी शादी, भरण-पोषण और वैवाहिक अधिकारों को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ती हैं। एक समान कानून इन विवादों को कम कर सकता है। महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए अलग-अलग कानूनों की व्याख्या पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बेटियों के अधिकारों की नई कहानी यूसीसी का दूसरा बड़ा प्रभाव संपत्ति के अधिकारों पर पड़ सकता है। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में आज भी कई परिवारों में बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का हिस्सा देने को लेकर अनिच्छा दिखाई देती है। हालांकि कानून पहले से अधिकार देता है, लेकिन व्यवहार में स्थिति अलग है। यूसीसी लागू होने के बाद संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर एक समान व्यवस्था बनने की संभावना है, जिससे बेटा और बेटी दोनों के अधिकारों को और स्पष्ट कानूनी मजबूती मिल सकती है। लिव-इन रिलेशनशिप भी आएंगे कानूनी दायरे में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार ऐसे संबंधों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जा सकता है। समर्थकों का कहना है कि इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकार सुरक्षित होंगे, जबकि आलोचक इसे निजी जीवन में सरकारी दखल के रूप में देखते हैं। लेकिन इतना तय है कि पहली बार ऐसे रिश्ते कानूनी बहस के केंद्र में आ जाएंगे। शादी और तलाक का रिकॉर्ड बनेगा जरूरी शादी और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण भी आम लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाएगा। आज भी प्रदेश में हजारों विवाह केवल सामाजिक और धार्मिक स्तर पर संपन्न होते हैं, जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होता। बाद में संपत्ति, पहचान, भरण-पोषण या वैवाहिक विवादों के दौरान यही सबसे बड़ी समस्या बन जाती है। रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होने से ऐसे विवादों में कमी आ सकती है परंपराओं और कानून के बीच संतुलन की चुनौती हालांकि यूसीसी का रास्ता पूरी तरह आसान नहीं होगा। राजस्थान की सामाजिक संरचना बेहद विविध है। यहां अलग-अलग धर्म, समुदाय और परंपराएं सदियों से साथ-साथ चलती रही हैं। ऐसे में नया कानून लागू होने पर कई सवाल भी उठेंगे। क्या सभी समुदाय इसे समान रूप से स्वीकार करेंगे? क्या पारंपरिक रीति-रिवाजों और आधुनिक कानूनी व्यवस्था के बीच संतुलन बन पाएगा? यही वह चुनौती है जिस पर गठित कमेटी को सबसे ज्यादा काम करना होगा। जनजातीय समुदायों के लिए अलग व्यवस्था संभव सरकार ने संकेत दिए हैं कि स्थानीय जनजातीय समुदायों को उनकी सांस्कृतिक और संवैधानिक विशेषताओं के आधार पर नए कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो राजस्थान में यूसीसी का स्वरूप अन्य राज्यों से कुछ अलग भी हो सकता है। दूसरे राज्यों के अनुभवों पर भी नजर उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है। गुजरात और असम भी इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। अब राजस्थान इस बहस का नया केंद्र बनने जा रहा है। लेकिन यहां सवाल सिर्फ कानून का नहीं है। सवाल उन महिलाओं का है जो बराबरी चाहती हैं। उन बेटियों का है जो अपने हिस्से का सम्मान मांगती हैं। उन परिवारों का है जो वर्षों से अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं के बीच उलझे हुए हैं। विधानसभा से घर-घर तक पहुंचेगी बहस आने वाले महीनों में जब कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी और विधानसभा में इस पर बहस होगी, तब सिर्फ एक विधेयक पर चर्चा नहीं होगी। चर्चा इस बात पर होगी कि क्या राजस्थान अपनी सामाजिक संरचना में एक ऐसा बदलाव स्वीकार करने के लिए तैयार है, जो लोगों के निजी जीवन, पारिवारिक रिश्तों और अधिकारों की परिभाषा को नए सिरे से लिख सकता है। एक कानून से कहीं बड़ी कहानी फिलहाल यूसीसी एक प्रस्ताव है, लेकिन इसकी आहट ने प्रदेश में एक नई बहस शुरू कर दी है। यह बहस अदालतों से निकलकर घरों तक पहुंच चुकी है। और शायद यही इसकी सबसे बड़ी कहानी है। आने वाले समय में यह तय होगा कि यूसीसी केवल कानून बनकर रह जाती है या फिर राजस्थान के सामाजिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करती है।

शतक के बाद ड्रॉप हुए जायसवाल, शशि थरूर बोले- वही हाल जो संजू सैमसन का हुआ था

नई दिल्ली  भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते हुए स्टार सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को इंग्लैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए भारतीय स्क्वाड में जगह नहीं मिली है। सीनियर खिलाड़ियों की टीम में वापसी के चलते जायसवाल को टीम से बाहर का रास्ता देखना पड़ा। चयनकर्ताओं का यह फैसला फैंस और क्रिकेट दिग्गजों के गले नहीं उतर रहा है, क्योंकि जायसवाल ने अपने पिछले ही वनडे मैच में शानदार शतक जड़ा था। जायसवाल को ड्रॉप किए जाने पर अब कांग्रेस सांसद और क्रिकेट प्रेमी शशि थरूर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर चयनकर्ताओं के इस फैसले पर तीखा तंज कसा है और जायसवाल की स्थिति की तुलना संजू सैमसन से की है। शशि थरूर ने क्या कहा? शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जायसवाल के समर्थन में पोस्ट करते हुए लिखा, 'भारत में इस समय टॉप-ऑर्डर का बल्लेबाज होना कितना कठिन काम है! जायसवाल ठीक उसी दौर और अनुभव से गुजर रहे हैं जिससे 2024-25 में संजू सैमसन गुजरे थे— यानी ठीक एक मैच पहले शतक बनाने के बाद अगले ही वनडे मैच से ड्रॉप कर दिया जाना। यह उतना ही बुरा है जितना 1960 के दशक में एक विश्व स्तरीय स्पिनर होना था (जब भारतीय टीम में स्पिनरों की भारी भरकम जगह के कारण कई दिग्गजों को मौका नहीं मिलता था)!' पिछले मैच में ठोका था 110 रनों का दमदार शतक यशस्वी जायसवाल को टीम से बाहर करना इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई वनडे सीरीज के तीसरे और आखिरी मुकाबले में 110 रनों की विस्फोटक शतकीय पारी खेली थी। अपनी इस पारी से उन्होंने साबित किया था कि वह वनडे फॉर्मेट में भी टीम के लिए कितने बड़े मैच विनर बन सकते हैं। हालांकि, इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ सीरीज के लिए जैसे ही सीनियर खिलाड़ियों की स्क्वाड में वापसी हुई, युवाओं में सबसे पहला गाज जायसवाल पर गिरा। संजू सैमसन के पुराने जख्म हुए ताजा शशि थरूर ने अपने पोस्ट के जरिए केरल के विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन के साथ हुए पुराने वाकये को याद दिलाया। साल 2024-25 के दौरान संजू सैमसन ने भी वनडे क्रिकेट में शानदार शतक जड़ा था, लेकिन उसके ठीक बाद सीनियर खिलाड़ियों की वापसी या टीम कॉम्बिनेशन के नाम पर उन्हें अगले ही मैच की टीम से बाहर कर दिया गया था। अब ठीक वैसा ही बर्ताव 24 वर्षीय यशस्वी जायसवाल के साथ दोहराया गया है। हालांकि संजू सैमसन लंबे समय से भारतीय टी20 टीम का हिस्सा हैं और उन्होंने भारत के लिए दो टी20 वर्ल्ड कप भी जीत लिए हैं।  

बिहार में खेल प्रतिभाओं के लिए बड़ा मौका, राज्य खेल सम्मान की प्रक्रिया शुरू

पटना   बिहार के खेल जगत और प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य में खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) ने 'बिहार राज्य खेल सम्मान 2026' के लिए आधिकारिक तौर पर नोटिफिकेशन जारी कर दी है। इस सम्मान के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने वाले प्रतिभावान खिलाड़ियों, अनुभवी कोचों, खेल संघों और खेल अधिकारियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। सरकार के इस कदम से बिहार के खेल गलियारे में भारी उत्साह का माहौल है। यह सम्मान उन लोगों को दिया जाएगा जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा से खेल के मैदान में बिहार का गौरव बढ़ाया है। 24 जून से शुरू होगी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा जारी की गई सूचना के मुताबिक, इस खेल सम्मान के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया कल यानी 24 जून से पूरी तरह शुरू होने जा रही है। इच्छुक और योग्य दावेदार घर बैठे ही इंटरनेट के माध्यम से अपना फॉर्म भर सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 तय की गई है। सभी आवेदकों को 15 जुलाई की शाम 5 बजे से पहले अपना फॉर्म और उससे जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। तय समय सीमा के बाद मिलने वाले किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने जारी किया विशेष QR कोड इस बार पूरी आवेदन प्रक्रिया को बेहद डिजिटल और आसान बनाया गया है ताकि खिलाड़ियों को फॉर्म भरने में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। बिहार राज्य खेल प्राधिकरण ने आवेदन के लिए एक विशेष QR कोड भी जारी किया है, जिसे स्कैन करके खिलाड़ी सीधे मुख्य एप्लीकेशन पेज पर पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, यदि किसी खिलाड़ी या कोच को फॉर्म भरने या दस्तावेज अपलोड करने में कोई दिक्कत आती है, तो उसकी सहायता के लिए विभाग ने एक विशेष हेल्पलाइन नंबर 9031045384 भी जारी किया है। इस नंबर पर कॉल करके खेल सम्मान से जुड़ी किसी भी तकनीकी समस्या या नियम की जानकारी तुरंत हासिल की जा सकती है।

पुराने लखनऊ को राहत: 7 नए सबस्टेशन और 100 फीडर से खत्म होगी बिजली समस्या

लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। पुराने लखनऊ के लोगों की समस्याएं दूर होंगी। पुराने लखनऊ की बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 550 करोड़ रुपये का प्लान तैयार किया गया है। आरडीएसएस योजना के तहत वर्ष 2031 तक की बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 07 नए उपकेंद्र व 01 नया पावर ट्रांसमिशन सबस्टेशन बनाया जाएगा। इसके अलावा 100 नये फीडर बनेंगे। इससे लगभग 10 लाख आबादी को बिजली कटौती व लो-वोल्टेज से निजात मिलेगी। 20-20 एमवीए लोड के बिजली उपकेंद्र बनेंगे लेसा के लखनऊ सेंट्रल जोन के राजाजीपुरम, अपट्रॉन, ऐशबाग, ठाकुरगंज, चौक, रेजीडेंसी, राजभवन, हुसैनगंज, अमीनाबाद क्षेत्र में बेहतर बिजली सप्लाई के लिए सात नये उपकेंद्रों का निर्माण होगा। इसमें तालकटोरा में दो उपकेंद्र बनेंगे। इसके अलावा ऐशबाग, मलपुर (राजाजीपुरम), राजेन्द्र नगर, अर्जुनगंज, बालागंज में एक-एक उपकेंद्र बनेंगे। सभी 20-20 एमवीए लोड के बिजली उपकेंद्र बनेंगे। पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता में वृद्धि पुराने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए क्षेत्र के 11 मौजूदा उपकेंद्रों के पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से हरिहरपुर, अर्जुनगंज, जवाहर भवन, हनुमान सेतु, यूपीआईएल, नूरबाड़ी, अपट्रॉन, आरडीएसओ, ऐशबाग, विधानसभा मार्ग और बालाघाट शामिल हैं। इसके अलावा 33 केवी और 11 केवी की नई लाइन बिछाई जाएगी। नई एलटी लाइन निर्माण में इंसुलेटेड कंडक्टर लगाई जाएगी। 100 नए फीडर से सुधरेगी सप्लाई ओवरलोडिंग की समस्या को खत्म करने के लिए कुल 100 नए फीडर बनाए जाएंगे। मुख्य अभियंता के अनुसार, 07 नए उपकेंद्रों के बनने से 70 नए फीडर तैयार होंगे, जबकि पुराने उपकेंद्रों में 30 अतिरिक्त फीडर जोड़े जाएंगे। इसके अलावा, तालकटोरा में बनने वाले ट्रांसमिशन सबस्टेशन से 14 उपकेंद्रों के लिए नई बिजली लाइनें भी बिछाई जाएंगी। ऐसा होने इलाके बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल जाएगी। इलाके की बिजली व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। दरअलस, लो वोल्टेज और बिजली कटौती की समस्या से उपभोक्ता जूझ रहे। बिजली व्यवस्था बेहतर होने से लोगों को समस्याओं से निजात मिल जाएगी। इलाके के लोगों को भरपूर बिजली मिलने लगेगी। लो-वोल्टेज की समस्या भी खत्म हो जाएगी। ओवरलोडिंग की समस्या भी खत्म हो जाएगी। मध्यांचल निगम को जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा लखनऊ सेंट्रल मुख्य अभियंता रवि अग्रवाल ने बताया कि आरडीएसएस योजना के तहत वर्ष 2031 तक बेहतर बिजली सप्लाई के लिए पुराने लखनऊ में 07 बिजली उपकेंद्रों का निर्माण होगा। इसके अलावा 11 उपकेंद्रों में पावर ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि होगी। साथ ही 100 नये फीडर बनेंगे। मध्यांचल निगम को जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा।

बाल भवन करनाल में ग्रीष्मकालीन शिविर: 200 बच्चों ने कराया रजिस्ट्रेशन

करनाल हरियाणा के करनाल जिले में बच्चों की गर्मियों की छुट्टियों को मजेदार और सिखाने वाला बनाने के लिए जिला बाल कल्याण परिषद ने एक बेहतरीन पहल की है। स्थानीय बाल भवन में आगामी 30 जून तक एक शानदार ग्रीष्मकालीन शिविर यानी समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है। उपायुक्त और परिषद के अध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में चल रहे इस कैंप में बच्चों के व्यक्तित्व को निखारने का काम किया जा रहा है। इस खास कैंप को लेकर बच्चों और अभिभावकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। अबेकस और योगा के साथ महिलाएं सीख रहीं ब्यूटी केयर जिला बाल कल्याण अधिकारी मंजू चौधरी ने बताया कि इस समर कैंप में 5 से 14 साल तक के बच्चों को एक्सपर्ट टीचर्स द्वारा कई तरह की एक्टिविटीज सिखाई जा रही हैं। कैंप में बच्चे मुकेश शर्मा से आर्ट एंड क्राफ्ट, गुंजन से योगा, रायना से डांस और गरिमा भारद्वाज से अबेकस सीख रहे हैं। अबेकस असल में गणित के सवालों को तेजी से हल करने का एक पुराना और मजेदार तरीका है, जिससे बच्चों का दिमाग तेज होता है। इस साल बच्चों के साथ-साथ लड़कियों और महिलाओं के लिए फैशन डिजाइनिंग और ब्यूटी केयर की क्लास भी जोड़ी गई है, जिसमें वे बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। इस कैंप की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक लगभग 200 बच्चों ने अपना रजिस्ट्रेशन यानी दाखिला करवा लिया है। यह क्लासेज रोज सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक बाल भवन में लगती हैं। आज भी कैंप में 155 से ज्यादा बच्चे पहुंचे। खास बात यह है कि निजी स्कूलों के बच्चों के साथ-साथ सरकारी स्कूल, बाल गृह और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब बच्चों को भी इसमें अपनी प्रतिभा निखारने का पूरा मौका दिया जा रहा है। कैंप में आने वाले बच्चों के लिए ठंडे शरबत की छबील लगाई गई है और हर दिन हल्का नाश्ता भी दिया जाता है। डीसी ने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को इस कैंप में भेजने की अपील की है।

फायर सेफ्टी टीम की जांच में मिलीं कई कमियां, खान सर की कोचिंग को 10 दिन की मोहलत

पटना. पटना के बोरिंग रोड स्थित Khan Global Studies में फायर सेफ्टी विभाग की दोबारा जांच के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। विभाग ने संस्थान को फिर से नोटिस जारी करते हुए 10 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने का निर्देश दिया है। यह पिछले 15 दिनों में दूसरी बार है जब कोचिंग को नोटिस मिला है। फायर सेफ्टी टीम की जांच में पाया गया कि संस्थान में अभी भी कई जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है। प्रमुख कमियों में- पर्याप्त इमरजेंसी एग्जिट की कमी फायर अलार्म सिस्टम में खामियां स्प्रिंकलर सिस्टम का अभाव फायर स्टेयर (आपातकालीन सीढ़ी) का अधूरा निर्माण फायर डिटेक्टर सिस्टम का पूरी तरह ऑटोमैटिक न होना इलेक्ट्रिक पैनल के नीचे बैठने की व्यवस्था डीआईजी ने जताई चिंता निरीक्षण के दौरान अग्निशमन विभाग के डीआईजी Manoj Kumar Nat ने कहा कि इलेक्ट्रिक पैनल के नीचे सीटिंग अरेंजमेंट सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा भवन में स्प्रिंकलर सिस्टम भी नहीं मिला, जो आग लगने की स्थिति में गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। 10 दिन में सुधार नहीं हुआ तो हो सकती है सख्त कार्रवाई अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संस्थान को 10 दिनों का अंतिम मौका दिया गया है। यदि निर्धारित समय में सभी कमियों को दूर नहीं किया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग के अनुसार जरूरत पड़ने पर कोचिंग सेंटर को सील भी किया जा सकता है। मुसल्लहपुर और अन्य कोचिंग संस्थानों में भी मिलीं खामियां अग्निशमन विभाग ने पटना के कई कोचिंग संस्थानों का ऑडिट किया। अधिकारियों के मुताबिक अब तक जांचे गए लगभग सभी संस्थानों में किसी न किसी स्तर पर फायर सेफ्टी संबंधी कमियां मिली हैं। दूसरी बार ऑडिट किया गया, लेकिन कई कमियों में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। किसान कोल्ड स्टोरेज परिसर में संचालित: – Kautilya GS Teaching Centre Gyan Bindu GS Academy Khan Global Studies लखनऊ हादसे के बाद बढ़ी सख्ती हाल ही में Lucknow में एक इमारत में आग लगने की घटना में 15 लोगों की मौत के बाद देशभर में कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक भवनों की फायर सेफ्टी जांच तेज कर दी गई है। इसी अभियान के तहत पटना में भी व्यापक ऑडिट चल रहा है। क्या खान सर की कोचिंग पर लगेगा ताला? फिलहाल कोचिंग संस्थान को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया है। हालांकि विभाग ने साफ संकेत दिया है कि यदि 10 दिनों के भीतर सुरक्षा मानकों के अनुसार सुधार नहीं किए गए, तो सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। जिसमें संस्थान को सील करना भी शामिल हो सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में विभाग की अगली जांच काफी महत्वपूर्ण होगी।

नए सत्र के लिए बेसिक शिक्षा विभाग तैयार, 220 दिन की पढ़ाई और निपुण अभियान का होगा विस्तार

लखनऊ  ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 25 जून से नियमित पठन-पाठन शुरू होगा। नए शैक्षिक सत्र में केवल विद्यालय खोलने की औपचारिकता नहीं, बल्कि हर बच्चे के सीखने के स्तर में सुधार, उसकी व्यक्तिगत जरूरतों की पहचान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को यूट्यूब संवाद के माध्यम से शिक्षकों, बेसिक शिक्षा अधिकारियों और राज्य व जिला स्तरीय रिसोर्स पर्सन को यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी को देखते हुए सुबह 10 बजे के बाद बच्चों की आउटडोर गतिविधियां नहीं कराई जाएं। विद्यालयों में ऐसा मित्रवत माहौल बनाया जाए, जहां बच्चे खुलकर अपनी बात रख सकें और शिक्षक उनके मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण भी शुरू किया जाएगा। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तीन वर्ष के बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें बाल वाटिका से जोड़ेंगी, जबकि छह वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चों का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। शिक्षकों को कक्षा पांच से छह में बच्चों के सुचारु प्रवेश और संक्रमण काल को सहज बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पढ़ाई होगी। जो बच्चे अपेक्षित सीखने के स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं, उनके लिए कैच-अप ट्रेनिंग चलाकर विशेष सहयोग दिया जाएगा। शिक्षकों को बच्चों का लगातार आकलन कर नियमित फीडबैक देने और बेहतर कक्षा शिक्षण पद्धतियां अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालयों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने के लिए बच्चों को पुस्तकालय से पुस्तकें जारी की जाएंगी और प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे पठन गतिविधि कराई जाएगी। बच्चों को लेखन, कला और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी के अवसर भी दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 22 जून से विद्यालय प्रशासनिक कार्यों के लिए खुल चुके हैं, जबकि 25 जून से नियमित शिक्षण शुरू होगा। यह व्यवस्था आगामी वर्षों में भी लागू रहेगी। वर्ष में कम से कम 220 दिन पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी और यह भी देखा जाएगा कि वास्तविक शिक्षण कितने घंटे हुआ। निपुण अभियान का विस्तार अब कक्षा एक और दो से आगे बढ़ाकर कक्षा एक से पांच तक किया जाएगा। बच्चों के भाषा और गणित के बुनियादी कौशल विकसित करने के लिए हिंदी, अंग्रेजी और गणित के सरल निपुण लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। राज्य स्तरीय रिसोर्स पर्सन (एसआरपी) का प्रशिक्षण छह जुलाई से शुरू होगा, जबकि नवंबर-दिसंबर में निपुण आकलन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि एसआरपी, एसआरजी और मेंटर शिक्षक केवल निरीक्षण या चेकलिस्ट भरने तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षकों के साथ संवाद कर उनकी शैक्षणिक कमियों को दूर करने में सहयोग करें। उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के अनुभवों को शिक्षा संकुलों में साझा किया जाएगा। शिक्षक दीक्षा पोर्टल, आइ-गाट प्लेटफार्म और ‘द टीचर ऐप’ के माध्यम से प्रशिक्षण सामग्री, लेसन प्लान और एनसीईआरटी की गाइडलाइन का अध्ययन कर अपने शिक्षण को बेहतर बना सकते हैं। साथ ही अभिभावकों और समुदाय से संवाद मजबूत करें। उन्होंने शिक्षकों से स्वयं पढ़ने की आदत विकसित करने, समय प्रबंधन सीखने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की अपील की। मुंशी प्रेमचंद का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और सकारात्मक सोच के साथ हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।  

1.60 लाख वोटों से शुभम शर्मा बने पंजाब यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष

धूरी/संगरूर. पंजाब की राजनीति में धूरी के लिए गौरव का क्षण उस समय आया जब युवा नेता शुभम शर्मा पंजाब यूथ कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष (डेलीगेट) निर्वाचित हुए। संगठनात्मक चुनावों में लगभग 1 लाख 60 हजार वोट हासिल कर शुभम शर्मा ने नया रिकॉर्ड कायम किया व पूरे पंजाब में सबसे अधिक मत प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। धूरी स्थित उनके निवास पर समर्थकों, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों का तांता लग गया व जश्न का माहौल बन गया। शुभम शर्मा की जीत की खुशी साझा करने के लिए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग स्वयं उनके घर पहुंचे। उन्होंने शुभम शर्मा का मुंह मीठा करवाया व उन्हें नई जिम्मेदारी मिलने पर हार्दिक बधाई दी। कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ जीत का उत्सव मनाया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए राजा वड़िंग ने क्या कहा? पत्रकारों से बातचीत करते हुए राजा वड़िंग ने कहा कि पंजाब यूथ कांग्रेस को एक ऊर्जावान, संघर्षशील व युवा नेतृत्व मिला है, जो आने वाले समय में संगठन को नई दिशा और मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि शुभम शर्मा के नेतृत्व में युवा कांग्रेस प्रदेश में युवाओं की आवाज को और प्रभावी ढंग से उठाएगी तथा कांग्रेस पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। शुभम शर्मा की जीत केवल एक संगठनात्मक चुनाव की जीत नहीं है, बल्कि यह पंजाब के युवाओं के कांग्रेस के प्रति बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। शुभम शर्मा को करीब 1.60 लाख वोट प्राप्त हुए उल्लेखनीय है कि पंजाब यूथ कांग्रेस के चुनावों में शुभम शर्मा को करीब 1.60 लाख वोट प्राप्त हुए, जो संगठनात्मक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। उनकी जीत को कांग्रेस के लिए एक मजबूत राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा हुआ है। पंजाब यूथ कांग्रेस अध्यक्ष डेलीगेट शुभम शर्मा ने राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के विधानसभा क्षेत्र धूरी सहित पंजाब भर में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस बड़ी जीत दर्ज करेगी। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में धूरी ही नहीं, बल्कि पूरे पंजाब के हर विधानसभा हलका, हर वार्ड, हर मोहल्ले में यूथ कांग्रेस का सिपाही खड़ा मिलेगा। यूथ कांग्रेस के सदस्यों व कांग्रेस पार्टी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है, पंजाब का यूथ अगली राजनीति की कमान संभालेगा। झूठ, बदलाखोरी की राजनीतिक करने वाली आम आदमी पार्टी को पंजाब से उखाड़ फेंकेंगे।

राम चरण बोले- अच्छी कहानियां आज भी दर्शकों को थिएटर तक खींच लाती हैं, ‘धुरंधर’ की जमकर तारीफ

 साउथ सुपरस्टार राम चरण ने अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘पेड्डी’ और आदित्य धर और रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ की जबरदस्त सफलता पर बात की. उन्होंने दावा किया कि इन फिल्मों की बॉक्स ऑफिस पर मिली जबरदस्त कामयाबी इस बात का सबूत है कि अच्छी कहानियों ने पूरे देश के दर्शकों को एकजुट किया है. अभिनेता ने आगे कहा कि कोविड-19 के बाद सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या कम होने के बावजूद, ‘केजीएफ’ और ‘पुष्पा’ जैसी अच्छी फिल्मों सुपरहिट रही. राम चरण बोले- अच्छी फिल्में आज भी दर्शकों को थिएटर तक खींच लाती हैं रिपब्लिक पत्रिका के शिखर सम्मेलन में राम चरण से पूछा गया कि लोग सिनेमाघरों में आना क्यों बंद कर चुके हैं. उन्होंने कहा, ”जब केजीएफ, पुष्पा 2, धुरंधर, कांतारा, आरआरआर जैसी बेहतरीन फिल्में आती हैं, तो लोग सिनेमाघरों में वापस आने लगते हैं. कोविड के बाद, हम सभी थोड़े डरे हुए थे कि क्या वे वापस आएंगे. भारत में आज भी सिनेमा सबसे किफायती एंटरटेनमेंट ऑप्शन है. पूरा परिवार साथ में फिल्म देखने जाता है और फिल्म खत्म होने के बाद भी उसी की बातें करता रहता है. यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाला एक शानदार एक्सपीरियंस भी है. हां, अगर पॉपकॉर्न के दाम थोड़े कम हो जाएं तो बात और भी बेहतर हो जाएगी.”  धुरंधर की तारीफ करते हुए क्या बोले राम चरण धुरंधर की तारीफ करते हुए राम चरण ने कहा, “मुझे यह फिल्म बेहद शानदार लगी. हाल ही में मैंने इसे OTT पर देखा और फिल्म का हर पहलू बिल्कुल सही तरीके से काम करता है. इसकी कहानी, ट्रीटमेंट और गति सब कुछ शानदार था. इस फिल्म ने लोगों को एकजुट किया है. यही वजह है कि इसने 1800 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन किया. बॉक्स ऑफिस का आंकड़ा सिर्फ कमाई नहीं दिखाता, बल्कि यह बताता है कि कितने लोगों ने फिल्म को पसंद किया.  धुरंधर और धुरंधर- द रिवेंच के बारे में आदित्य की फिल्म ‘धुरंधर’ दिसंबर 2025 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई और इसने दुनिया भर में 1300 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की. ‘धुरंधर: द रिवेंज’ इसी साल मार्च में रिलीज हुई और इसने दुनिया भर में 1800 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन किया. ये दोनों फिल्में जबरदस्त हिट रहीं और इनमें हमजा उर्फ ​​जसकिरत सिंह रंगी (रणवीर) की कहानी दिखाई गई है, जिसे आतंकी शिविरों में घुसपैठ करने के लिए पाकिस्तान के लयारी भेजा जाता है. पेड्डी का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन बुची बाबू सना की फिल्म ‘पेड्डी’, जिसमें राम चरण और जाह्नवी कपूर मुख्य भूमिका में हैं, 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई. ट्रेड वेबसाइट Sacnilk के अनुसार, फिल्म ने भारत में 235 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया और रिलीज के 19 दिनों में दुनिया भर में 331 करोड़ रुपये का कुल कलेक्शन किया.