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गर्मियों में स्किन के लिए खीरे के 3 फेस मास्क, टैनिंग और रूखेपन से मिलेगी राहत

गर्मियों के मौसम में तेज धूप और पसीने की वजह से स्किन से जुड़ी समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं. इसके कारण चेहरे पर टैनिंग, रूखापन और जलन जैसी परेशानियां होने लगती हैं. ऐसे में इस मौसम में स्किन की सही देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है. इस मौसम में स्किन को अंदर से ठंडक और पोषण देने के लिए खीरा सबसे बेस्ट और नेचुरल उपाय है. खीरे में भरपूर मात्रा में पानी, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो चेहरे को हाइड्रेट करने के साथ-साथ चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में भी मदद करते हैं. अगर आप भी इस सीजन में टैनिंग, स्किन में जलन या रूखेपन से परेशान हैं तो महंगे प्रोडक्ट्स की बजाय घर पर खीरे से बने कुछ आसान फेस मास्क ट्राई कर सकते हैं. आइए जानते हैं इन्हें बनाने और इस्तेमाल करने का सही तरीका, ताकि आपकी स्किन गर्मियों में भी खिली-खिली और फ्रेश बनी रहे. टैनिंग को दूर करता है अगर गर्मियों में धूप की वजह से चेहरे पर टैनिंग हो गई है तो खीरा और दही का फेस मास्क आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. इसके लिए 2 इंच खीरे को कद्दूकस कर लें और उसे आधी कटोरी दही में मिला दें. अब इसमें आधा चम्मच बेसन मिलाकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर 10 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर नॉर्मल पानी से चेहरा धो लें. चेहरे की जलन कम करने में मदद करता है स्किन में जलन या रेडनेस की समस्या होने पर एलोवेरा और खीरे का फेस मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए 1 चम्मच एलोवेरा जेल में 2 चम्मच कद्दूकस किया हुआ खीरा और आधा चम्मच मुल्तानी मिट्टी मिलाएं. इस पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर 15 मिनट तक लगाकर रखें. इसके बाद चेहरा धोकर जेल-बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाएं. ग्लोइंग स्किन पाने में करता है मदद अगर आप नेचुरल तरीके से ग्लोइंग स्किन पाना चाहते हैं तो खीरे में बादाम का तेल और शहद मिलाकर फेस मास्क तैयार करें. इसे चेहरे पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें और 5 से 7 मिनट बाद धो लें. इससे स्किन सॉफ्ट बनी रहती है और चेहरे पर कुदरती निखार आता है. इन बातों का रखें ध्यान     किसी भी फेस मास्क का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें, खासकर अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है.     बेहतर रिजल्ट के लिए इन फेस मास्क का इस्तेमाल हफ्ते में कम से कम 2 बार जरूर करें.  

Master Plan-2031 में बड़े बदलाव की उठी मांग, फीस घटाने और FAR बढ़ाने से निवेश-रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

चंडीगढ़  चंडीगढ़ के उद्योग संगठनों ने मास्टर प्लान-2031, औद्योगिक नियमों और लैंड यूज पॉलिसी में ऐसे बदलाव करने की मांग की है, जिससे उद्योगों को लाभ हो। सार्वजनिक सुनवाई के दौरान व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने स्क्रीनिंग कमेटी को अपने सुझाव दिए।  उद्योग संगठनों की ओर से प्रतिनिधि के रूप में चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल कन्वर्टेड प्लॉट ओनर्स एसोसिएशन के चेयरमैन चंदर वर्मा ने कहा कि अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) देने के लिए प्रशासन द्वारा रखी गई शर्तें व्यावहारिक नहीं हैं। उनका कहना है कि शहर के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) की क्षमता को आधार बनाकर FAR सीमित करना उचित नहीं है। यदि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की आवश्यकता है, तो यह प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसका बोझ उद्योगों पर नहीं डाला जाना चाहिए। उद्योग संगठनों ने मांग की है कि अतिरिक्त FAR के लिए ली जाने वाली फीस कम की जाए। उनका कहना है कि पंजाब और हरियाणा में यह शुल्क कम है, इसलिए चंडीगढ़ में भी इसे घटाया जाए, ताकि यहां के उद्योग अन्य राज्यों के उद्योगों के बराबर प्रतिस्पर्धा कर सकें। कन्वर्टेड इंडस्ट्रियल प्लॉट को मिले अतिरिक्त FAR व्यापार संगठनों ने सुझाव दिया कि जिन औद्योगिक प्लॉटों का उपयोग बदला गया है, उन्हें अनिवार्य सर्विस एरिया के कारण होने वाले स्थान के नुकसान की भरपाई के लिए 0.50 अतिरिक्त FAR दिया जाए। साथ ही, फैक्ट्री परिसर में कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवास को कुल FAR की गणना से बाहर रखा जाए। उद्योग संगठनों ने प्रशासन के उस प्रस्ताव का भी विरोध किया है, जिसमें अधिक FAR का लाभ लेने के लिए पुरानी इमारत को गिराकर दोबारा निर्माण करना अनिवार्य बताया गया है। उनका कहना है कि मौजूदा इमारतों पर ही अतिरिक्त मंजिलें बनाने की अनुमति दी जाए और मंजूरी की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। इससे उद्योगों का समय और पैसों दोनों की बचत होगी। ग्राउंड कवरेज और मिक्स्ड लैंड यूज में छूट की मांग संगठनों ने सक्रिय मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए अधिक ग्राउंड कवरेज की अनुमति देने की मांग की है। इसके अलावा, फेज-3 की तरह फेज-1 और फेज-2 के औद्योगिक क्षेत्रों में भी मिक्स्ड लैंड यूज की सुविधा लागू करने का सुझाव दिया गया है। उद्योग संगठनों का कहना है कि अनिवार्य सेंट्रल कोर्टयार्ड (आंगन) जैसे नियमों से भवन का उपयोग प्रभावित होता है और उत्पादन क्षमता घटती है। इसलिए इन प्रावधानों में भी व्यावहारिक बदलाव किए जाने चाहिए। साथ ही, जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) या कब्जे के दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति रखने वालों को भी अतिरिक्त FAR का लाभ देने, MSME अधिनियम के तहत सभी सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को मान्यता देने तथा भवन उल्लंघन और मिसयूज से जुड़े लंबित नोटिस वापस लेने की मांग भी की गई। उनका कहना है कि यदि प्रशासन अधिक FAR, कम शुल्क, मिक्स्ड लैंड यूज और सरल नियमों वाली संतुलित नीति लागू करता है, तो चंडीगढ़ में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्योगों का विस्तार होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

यूट्यूबर्स की बढ़ीं मुश्किलें, दूसरी FIR दर्ज; महिला से उगाही और वीडियो हटाने के बदले ₹2 लाख मांगने का आरोप

दुर्ग-भिलाई छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े कथित इंस्टाग्राम चैट विवाद में फंसे 2 यूट्यूबर्स सागर साहू और पुष्पराज सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। महिला की शिकायत पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और उगाही के आरोप में दूसरी FIR दर्ज की है। दरअसल, महिला ग्राहक सेवा केंद्र चलाती हैं। यूट्यूबर्स ने आरोप लगाया था कि वह ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी कर उनके अंगूठे का निशान लगवाकर खाते से पैसे निकाल लेती है। जबकि महिला का आरोप था कि यूट्यूबर्स ने बातचीत को तोड़-मरोड़कर वीडियो तैयार किया। पीड़िता का कहना है कि सोशल मीडिया से वीडियो हटाने के बदले यूट्यूबर्स ने 50 हजार मांगे। 35 हजार रुपए देने के बाद वीडियो तो हटा दिया गया, लेकिन फिर से 2 लाख रुपए की डिमांड की, न देने पर बदनाम करने और नए वीडियो जारी करने की धमकी दी। पुलिस ने महिला की शिकायत पर आरोपी यूट्यूबर्स के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। मामला पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र का है। हालांकि, दोनों ही आरोपी भूपेश बघेल से जुड़े कथित इंस्टाग्राम चैट मामले में जेल में हैं। ब्लैकमेलिंग की पूरी कहानी… जानकारी के मुताबिक शिकायतकर्ता महिला नाम का नेहा मिश्रा है, जो उमदा की रहने वाली है और पिछले 5 सालों से वह गांव में ग्राहक सेवा केंद्र चलाती है। 25 जून को उसने पुरानी भिलाई थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया है कि कुछ समय पहले सागर साहू अपने साथी पुष्पराज सिंह के साथ आधार कार्ड की फोटोकॉपी कराने के बहाने उनके दफ्तर पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने बात को गलत तरीके से दिखाकर वीडियो बनाया और उसे खबर के रूप में वायरल किया। नेहा ने आरोप लगाया है कि 3 जून को वीडियो हटाने के बदले उनसे 50 हजार रुपए की मांग की गई। बदनामी के डर से उसने अपनी जमा पूंजी से 35 हजार रुपए आरोपियों को दे दिए। रकम मिलने के बाद वीडियो हटा दिया गया था। 2 लाख मांगे, नहीं देने पर नई वीडियो वायरल करने की धमकी यह भी आरोप है कि बाद में आरोपियों ने नेहा से फिर 2 लाख रुपए की मांग की। पैसे न देने पर बदनाम करने और नए वीडियो जारी करने की धमकी दी गई। पैसे न देने पर आरोपियों ने 3 से अधिक अलग-अलग वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। इससे महिला की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और उन्हें अपने ग्राहक सेवा केंद्र जाने में भी शर्मिंदगी महसूस हो रही है। पीड़िता ने पुलिस से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस बोली- जांच के बाद करेंगे आगे की कार्रवाई पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने शिकायत की जांच के बाद शुरुआती तौर पर मामला दर्ज किया है। पुलिस ने सागर साहू और पुष्पराज सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 308(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तथ्यों और सबूतों के आधार पर की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 9 दिन पहले भी मामला दर्ज हुआ था यह पहली बार नहीं है जब दोनों यूट्यूबर्स के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई है। करीब 9 दिन पहले भी उनके खिलाफ एक और मामले में केस दर्ज किया गया था। यह मामला महादेव सट्टा ऐप के कथित संचालक सौरभ चंद्राकर के कथित इंस्टाग्राम अकाउंट से जुड़े वायरल स्क्रीनशॉट से संबंधित था। सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम से एक मैसेज दिखाया गया था, जिसमें लिखा था- “नंबर भेजो अपना, बात करना चाहते हैं।” इसी स्क्रीनशॉट के आधार पर दोनों यूट्यूबर्स ने खबरें वायरल की थीं। भूपेश बघेल ने बताया था फर्जी कंटेंट वायरल चैट सामने आने के बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भिलाई-3 थाने पहुंचे थे और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी वायरल चैट और उससे जुड़े कंटेंट को पूरी तरह फर्जी बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि उनकी लीगल टीम फर्जी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।

स्मार्टफोन को हर हफ्ते रीस्टार्ट करना क्यों है जरूरी, जानिए इसके बड़े फायदे

आपने अपना स्मार्टफोन आखिरी बार कब रीस्टार्ट किया था? आम तौर पर जब तक फोन सही काम कर रहा होता है लोग उसे रीस्टार्ट नहीं करते हैं. कई बार लोगों को लगता है कि फोन खराब हो गया और एक रीस्टार्ट से काम बन जाता है और फोन ठीक चलने लगता है. लेकिन ऐसा क्यों होता है? आज ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन को हफ्तों या महीनों तक बंद ही नहीं करते. फोन हमेशा ऑन रहता है और लगातार ऐप्स, नोटिफिकेशन, बैकग्राउंड प्रोसेस और सिस्टम सर्विसेज चलते रहते हैं. इसी वजह से टेक एक्सपर्ट समय-समय पर फोन को रीस्टार्ट करने की सलाह देते हैं. सवाल यह है कि आखिर फोन को कितने दिन में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए? क्या इससे सच में कोई फायदा होता है या यह सिर्फ एक पुरानी आदत है? कई लोगों को लगता है कि फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी तेजी से ड्रेन होती है और फोन की लाइफ कम होने लगती है. एक कॉमन मिथ ये भी है कि लोगों को लगता है फोन रीस्टार्ट करने से अच्छा है ऐप्स को मैनुअली बंद कर दिया जाए. लेकिन ऐप स्वाइप करके बंद करने से प्रोसेस चलता ही रहता है. रीस्टार्ट करने से पूरी तरह बंद होता है. फोन रीस्टार्ट करने से बैटरी पर असर नहीं पड़ता. यहां तक की एक्सपर्ट्स का मानना है कि रीस्टार्ट या फोन रीबूट करने से बैटरी रीकैलिब्रेशन प्रोसेस होता है और बैकग्राउंड ऐप्स बंद होते हैं जिससे हीटिंग इश्यू नहीं होती. हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना सबसे बेहतर माना जाता है सैमसंग समेत कई टेक कंपनियां और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि स्मार्टफोन को कम से कम हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना चाहिए. अगर आप बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जैसे गेम खेलते हैं, वीडियो एडिट करते हैं या दिनभर कई ऐप्स चलाते हैं, तो 3-4 दिन में एक बार रीस्टार्ट करना भी अच्छा माना जाता है. रीस्टार्ट करने से फोन का डेटा डिलीट नहीं होता और न ही कोई फोटो या ऐप हटती है. यह सिर्फ ऑपरेटिंग सिस्टम को नए सिरे से शुरू करता है. रीस्टार्ट करने से क्या फायदा होता है? फोन लगातार चलने पर कई ऐप्स बैकग्राउंड में खुले रहते हैं. इनमें से कुछ ऐप्स जरूरत से ज्यादा रैम इस्तेमाल करने लगते हैं. रीस्टार्ट करने पर ये सभी एक्स्ट्रा प्रोसेस बंद हो जाते हैं और रैम खाली हो जाती है. इससे फोन पहले से ज्यादा स्मूद चल सकता है. अगर किसी ऐप में कोई छोटी तकनीकी गड़बड़ी आ गई हो या सिस्टम किसी वजह से अटक गया हो, तो रीस्टार्ट के बाद यह समस्या कई बार अपने आप ठीक हो जाती है. यही वजह है कि कस्टमर केयर भी अक्सर सबसे पहले फोन रीस्टार्ट करने की सलाह देता है. रीस्टार्ट करने से बैटरी लाइफ पर भी असर पड़ सकता है. जब बेवजह बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स बंद हो जाते हैं, तो प्रोसेसर पर दबाव कम होता है और बैटरी की खपत भी कम हो सकती है. सिर्फ स्पीड ही नहीं, सिक्योरिटी में भी मदद फोन रीस्टार्ट करना सिर्फ परफॉर्मेंस के लिए ही नहीं, बल्कि सिक्योरिटी के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. अमेरिका की National Security Agency (NSA) भी पहले सलाह दे चुकी है कि समय-समय पर फोन रीस्टार्ट करना कुछ तरह के साइबर हमलों और मेमोरी में चल रहे संदिग्ध प्रोसेस को रोकने में मदद कर सकता है. हालांकि यह किसी वायरस का इलाज नहीं है, लेकिन सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जरूर बन सकती है. Google और Apple ने भी हाल के समय में अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में ऐसा फीचर जोड़ा है कि अगर फोन कई दिनों तक लॉक रहे तो वह खुद ही Restart हो जाता है. इसका मकसद फोन के डेटा को ज्यादा सुरक्षित रखना है. रीस्टार्ट के बाद फोन First Unlock मोड में चला जाता है, जहां PIN या पासकोड डाले बिना डेटा एक्सेस नहीं किया जा सकता. किन लोगों को ज्यादा जरूरत है? अगर आपका फोन दो-तीन साल पुराना है, उसमें स्टोरेज लगभग भर चुकी है या आप दिनभर सोशल मीडिया, बैंकिंग, कैमरा और गेमिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो नियमित रीस्टार्ट आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. जो लोग कभी भी फोन बंद नहीं करते, उनके फोन में छोटी-छोटी तकनीकी दिक्कतें जमा होती रहती हैं. रीस्टार्ट इन अस्थायी समस्याओं को काफी हद तक साफ कर देता है. क्या रोज Restart करना चाहिए? रोज रीस्टार्ट करना जरूरी नहीं है. इससे कोई खास एक्स्ट्रा फायदा भी नहीं मिलता. ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना नॉर्मल यूजर के लिए काफी है. अगर आपका फोन पहले से बिल्कुल स्मूद चल रहा है, तब भी हफ्ते में एक बार रीस्टार्ट करना अच्छी आदत मानी जाती है. ऑटो रीस्टार्ट फीचर भी है कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन, खासकर सैमंसग, में ऑटो रीस्टार्ट या ऑटो ऑप्टिमाइजेशन का फीचर मिलता है. इसमें आप तय कर सकते हैं कि फोन रात में किसी तय समय पर अपने आप रीस्टार्ट हो जाए. इससे आपको अलग से याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आपके फोन में यह फीचर मौजूद है, तो उसे हफ्ते में एक बार रात के समय के लिए सेट किया जा सकता है.

मध्य प्रदेश में बाघों की मौत पर बड़ा खुलासा, हाईकोर्ट में NTCA ने माना- शिकार भी है बड़ी वजह

 जबलपुर  देशभर में बाघों की लगातार हो रही अप्राकृतिक मौतों के बीच राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने हाई कोर्ट के समक्ष एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाली स्वीकारोक्ति की है। अप्राकृतिक मौतों में अवैध शिकार प्रमुख कारण अदालत में दायर हलफनामे में एनटीसीए ने स्पष्ट रूप से माना है कि संरक्षित बाघ अभ्यारण्यों तथा उनके आसपास बाघों की हालिया अप्राकृतिक मौतों में अवैध शिकार प्रमुख कारणों में से एक है। स्वयं शीर्ष संरक्षण संस्था ने शिकार की गंभीरता को रेखांकित किया यह स्वीकारोक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब तक बाघों की मौतों को लेकर विभिन्न कारण सामने आते रहे थे, लेकिन कोर्ट के समक्ष स्वयं शीर्ष संरक्षण संस्था ने शिकार की गंभीरता को रेखांकित किया है। संदिग्ध मौतों की न्यायिक समीक्षा की मांग की थी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली की युगलपीठ के समक्ष यह हलफनामा उस जनहित याचिका के जवाब में प्रस्तुत किया गया, जिसे वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने दायर कर बाघ अभ्यारण्यों के भीतर और आसपास लगातार हो रही संदिग्ध मौतों की न्यायिक समीक्षा की मांग की थी। याचिका में दावा किया गया था कि अनेक मामलों में मौतें संगठित शिकार का परिणाम हैं। भारतीय बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतर एनटीसीए ने अपने जवाब में कहा कि देश के बाहर बाघों के अंगों और उनसे निर्मित उत्पादों की अवैध मांग आज भी भारतीय बाघों के अस्तित्व के लिए सबसे गंभीर खतरों में शामिल है। यही कारण है कि इस चुनौती को प्राधिकरण ने अपनी सर्वोच्च संरक्षण प्राथमिकताओं में रखा है। राज्यों को लगातार अलर्ट जारी किए जा रहा है हलफनामे के अनुसार शिकार और वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों को लगातार अलर्ट जारी किए जा रहे हैं तथा सीबीआई, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, डब्ल्यूसीसीबी और संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वित अभियान संचालित किए जा रहे हैं। अब हाई कोर्ट की निगाह केवल इस स्वीकारोक्ति पर नहीं मामले की अगली सुनवाई में अब हाई कोर्ट की निगाह केवल इस स्वीकारोक्ति पर नहीं, बल्कि इस पर भी रहेगी कि देश के राष्ट्रीय पशु की सुरक्षा के लिए घोषित रणनीतियां धरातल पर कितनी प्रभावी सिद्ध होती हैं।

राजस्थान क्रीड़ा अधिनियम के तहत RCA में चुनाव प्रक्रिया में देरी, प्रशासनिक जांच बनी वजह

जयपुर राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव अगले 3 महीने के लिए टल गए हैं. इस दौरान आरसीए की एडहॉक कमेटी का कार्यकाल बरकरार रहेगा. सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा ने आदेश जारी कर कार्यकाल को एक बार फिर अगले तीन महीनों के लिए बढ़ा दिया है. हालांकि, इसमें चुनाव से जुड़ी एक और बड़ी अपडेट है. राजस्थान क्रीड़ा अधिनियम, 2005 की धारा 24 (1) (क) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए रजिस्ट्रार ने समिति की अवधि को आगे बढ़ाने का फैसला लिया. विवादित मामलों को बताया चुनाव में देरी की वजह एडहॉक कमेटी के कार्यकाल बढ़ाने के पीछे कई अहम वजह बताई जा रही हैं. इसमें पूर्ववर्ती कार्यकारिणी की वित्तीय व प्रशासनिक गड़बड़ियों की जांच करना शामिल है. इसके साथ ही राज्य के विभिन्न जिला स्तरीय खेल संघों के विवादित मामलों की जांच भी अभी प्रक्रियाधीन है, ताकि आरसीए के चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के मुताबिक हो सकें. चुनाव कराने के लिए भी निर्देश जारी इससे पहले, मार्च-2024 में आरसीए के निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए इस तीन महीने की कमेटी का गठन हुआ था. लेकिन कई अपरिहार्य और तकनीकी कारणों से समय सीमा के भीतर चुनाव संपन्न नहीं हो सके. इसके बाद से लगातार 3-3 महीनों के लिए समिति का कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है. अब इस ताजा आदेश के बाद समिति को अगले तीन महीनों के भीतर अनिवार्य रूप से चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. इस वजह से फिलहाल चुनाव संभव नहीं इस फैसले के पीछे समिति ने क्रिक्रेट टूर्नामेंट्स को भी अहम वजह बताया है. कमेटी की ओर से तर्क दिया कि वर्तमान खेल सत्र के दौरान खिलाड़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए क्रिकेट टूर्नामेंट्स का लगातार आयोजन कराया जा रहा है. इसकी वजह से सीमित समय में चुनाव कराना संभव नहीं हो पाया.

वास्तु शास्त्र के अनुसार पर्स में ये चीजें रखने से रुक सकती है धन की वृद्धि

 वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारा बटुआ (पर्स) केवल धन रखने का एक साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यक्तिगत ऊर्जा क्षेत्र (Personal Energy Field) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.  जैसे घर की दिशाएं और सजावट हमारे जीवन पर गहरा असर डालती हैं, वैसे ही पर्स में रखी गई वस्तुएं भी सीधे तौर पर हमारी आर्थिक स्थिति और धन के प्रवाह (Cash Flow) को प्रभावित करती हैं. अक्सर हम अनजाने में अपने पर्स को कबाड़खाना बना देते हैं, जिसमें ढेर सारी फालतू चीजें जमा होती रहती हैं. वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि पर्स में नकारात्मक ऊर्जा वाली चीजें रखने से धन का आगमन रुक जाता है. इससे व्यक्ति को अनावश्यक आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यदि आप भी अपने जीवन में आर्थिक स्थिरता और सकारात्मकता चाहते हैं, तो अपने पर्स की ऊर्जा को शुद्ध करना बेहद जरूरी है. 1. पुरानी रसीदें और फालतू कागज हम अक्सर शॉपिंग के बाद मिलने वाली रसीदें या पुराने बिल पर्स में ही भूल जाते हैं.  वास्तु शास्त्र में इन्हें नकारात्मक ऊर्जा का संचय माना जाता है.  ये पुरानी रसीदें हमारे बीते हुए खर्चों की याद दिलाती हैं, जो अवचेतन मन में धन की कमी का डर पैदा करती हैं. इन्हें समय-समय पर हटाते रहें ताकि नई ऊर्जा (पैसा) के लिए जगह बन सके. 2. फटे हुए नोट और पुराने कागजात फटे हुए नोट दरिद्रता को आमंत्रित करते हैं. वास्तु के अनुसार, पैसा माता लक्ष्मी का स्वरूप है, और फटे हुए नोट का पर्स में होना धन के प्रति अनादर दर्शाता है. इससे धन की बचत नहीं हो पाती, पैसा आते ही खर्च हो जाता है.  हमेशा साफ-सुथरे और व्यवस्थित नोट ही रखें. 3. मृत पूर्वजों की तस्वीरें श्रद्धा के कारण लोग अक्सर अपने पूर्वजों की तस्वीरें पर्स में रखते हैं.  लेकिन वास्तु शास्त्र कहता है कि मृत व्यक्तियों की तस्वीरें पर्स में रखने से व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और यह धन की वृद्धि में रुकावट करता है. पूर्वजों को घर के उत्तर-पूर्व या किसी विशेष स्थान पर स्थान देना चाहिए, न कि वॉलेट के अंदर. 4. हिसाब-किताब के कागज उधारी, कर्ज या लेनदेन का हिसाब-किताब रखने वाली पर्चियां पर्स में रखना वास्तु दोष पैदा करता है. यह लगातार आपको तनाव और कर्ज की स्थिति की याद दिलाता है, जिससे मानसिक शांति भी भंग होती है.  धन संबंधी कार्य बिगड़ने लगते हैं. हिसाब-किताब के लिए एक अलग डायरी का उपयोग करें. 5. धारदार और नुकीली चीजें पर्स में पुराने ब्लेड, सेफ्टी पिन, पुरानी चाबियां या कोई भी नुकीली वस्तु रखना नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है.  ये वस्तुएं वास्तु दोष पैदा करती हैं, जो आपके आर्थिक निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं और अनावश्यक विवादों को जन्म देती हैं.

सिरोही जिले के मांडवरिया गांव में मृत्युभोज विवाद: आर्थिक तंगी बनी सामाजिक बहिष्कार की वजह

सिरोही राजस्थान के सिरोही जिले के एक गांव में अंतिम संस्कार के बाद आयोजित मृत्युभोज में पारंपरिक घी के मालपुए नहीं परोसने पर 43 परिवारों का कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह मामला जिले के बरलूट थाना क्षेत्र के मांडवरिया गांव का है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर एक परिवार ने इसी महीने अपने एक सदस्य के निधन के बाद मृत्युभोज में सादा भोजन परोसा था। बरलूट थाने के सहायक उपनिरीक्षक रमेश कुमार ने बताया, ''हमें शिकायत मिली है और मामले की जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया यह मामला पुराने विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है। जांच पूरी होने के बाद प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।'' शिकायत में ये बताया गया शिकायत के अनुसार, आर्थिक तंगी के कारण परिवार मृत्युभोज में परंपरा के अनुरूप घी के मालपुए नहीं बनवा सका और उसकी जगह सामान्य भोजन की व्यवस्था की गई। इससे समुदाय के एक दर्जन से अधिक पंच कथित तौर पर नाराज हो गए और 18 जून को शोकाकुल परिवार के साथ-साथ उसका समर्थन करने वाले 42 अन्य परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का फरमान जारी कर दिया। आवश्यक सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा मृतक सदर राम का पांच जून को निधन हुआ था, जबकि मृत्युभोज का आयोजन 17 जून को किया गया। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि सामाजिक बहिष्कार के बाद उन्हें आवश्यक सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा है। उनका कहना है कि गांव के दुकानदार उन्हें राशन नहीं बेच रहे हैं, उन्हें गांव के कुएं से पानी भरने नहीं दिया जा रहा है और खेत मालिकों ने उन्हें काम पर रखना भी बंद कर दिया है। प्रभावित परिवारों का क्या कहना? प्रभावित परिवारों में शामिल तेजाराम ने संवाददाताओं से कहा, ''स्थिति बहुत कठिन हो गई है। हमें राशन नहीं दिया जा रहा है और यहां तक कि कुएं से पानी भी नहीं भरने दिया जा रहा सामाजिक बहिष्कार का असर पारिवारिक और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ा है। एक अन्य प्रभावित व्यक्ति गोपाल ने कहा, ''20 जून को मेरे एक रिश्तेदार की शादी थी, लेकिन पंचों द्वारा जुर्माना लगाए जाने के डर से मैं उसमें शामिल नहीं हो सका।'' 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा ऐसा बताया गया है कि पंचायत के कथित फरमान में चेतावनी दी गई है कि जो भी व्यक्ति इस बहिष्कार का उल्लंघन करेगा, उस पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और उसे पूरे समाज के लिए भोज भी कराना होगा। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है? प्रभावित परिवारों ने 20 जून को बरलूट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। बृहस्पतिवार को सभी 43 परिवारों के सदस्य न्याय की मांग को लेकर सिरोही के जिलाधिकारी से भी मिले। इस संबंध में जिलाधिकारी रोहिताश्व सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी टिप्पणी उपलब्ध नहीं हो सकी।  

विवेकानंद स्कूल मोड़ से नयासराय तक 6.089 किमी सिक्स लेन सड़क, रांची में यातायात को मिलेगा नया स्वरूप

रांची झारखंड की राजधानी रांची में सड़क ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी परियोजना शुरू होने जा रही है. करीब 177 करोड़ रुपये की लागत से शहर का पहला सिक्स लेन स्मार्ट रोड बनाया जाएगा. यह परियोजना पथ निर्माण विभाग के तहत स्टेट हाईवे अथॉरिटी ऑफ झारखंड द्वारा क्रियान्वित की जाएगी. टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सितंबर तक इसे अंतिम रूप देने की योजना है. इसके बाद इसी वर्ष निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है. किन इलाकों से होकर गुजरेगी यह सड़क यह प्रस्तावित सिक्स लेन सड़क विवेकानंद स्कूल मोड़ से शुरू होकर जगन्नाथ मंदिर, झारखंड हाईकोर्ट के पास से गुजरते हुए नयासराय आरओबी तक जाएगी. कुल 6.089 किलोमीटर हिस्से को सिक्स लेन में विकसित किया जाएगा. इसके बाद नयासराय आरओबी से आगे रिंग रोड तक लगभग 2.12 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण किया जाएगा, जिसे टू लेन के रूप में विकसित किया जाएगा. आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा सड़क ढांचा इस स्मार्ट रोड परियोजना में सिर्फ सड़क चौड़ीकरण ही नहीं बल्कि आधुनिक शहरी सुविधाओं का भी समावेश किया गया है. सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड बनाए जाएंगे ताकि स्थानीय यातायात को सुगम बनाया जा सके. इसके साथ ही साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे शहर में सुरक्षित और व्यवस्थित आवागमन को बढ़ावा मिलेगा. सौर ऊर्जा से जगमगाएगी सड़क इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता सड़क किनारे लगाई जाने वाली सोलर लाइटिंग व्यवस्था है. पूरी सड़क को सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था से रोशन किया जाएगा, जिससे ऊर्जा की बचत होगी और पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्था विकसित की जा सकेगी. यह पहल रांची को स्मार्ट सिटी की दिशा में एक कदम और आगे ले जाएगी. सुरक्षा और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान परियोजना में उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री के उपयोग के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा. सड़क डिजाइन को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यातायात दबाव को आसानी से संभाला जा सके और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो. पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि काम की गुणवत्ता में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शहर के विकास में अहम भूमिका यह सड़क न केवल रांची के यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ने में भी मदद करेगी. इससे हाईकोर्ट, शैक्षणिक संस्थानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी. साथ ही, यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था और शहरी विकास को भी गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

बिहार में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की योजना तेज, 2 हजार पंचायतों में सहायकों की तैनाती का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा गया

पटना बिहार के पंचायतों में दो हजार मत्स्य सहायक की नियुक्ति होगी। फिलहाल दो हजार पंचायतों में मत्स्य सहायकों की नियुक्ति की जाएगी। इससे मछली उत्पादक किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से लेकर तालाब और मत्स्य पालन संबंधी समस्याओं के समाधान तक समय पर सहायता मिल सकेगी। साथ ही, राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। मत्स्य सहायक के पदों के लिए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग की प्रशासी पदवर्ग समिति को भेज दिया है। प्रशासी पदवर्ग समिति से हरी झंडी मिलने के बाद विभाग इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजेगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इन पदों पर नियुक्ति तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से की जाएगी। पहले मत्स्य सहायकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर करने की तैयारी थी, लेकिन अब इन्हें नियमित आधार पर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। योग्यता और वेतन फिशरीज (मात्स्यिकी) में स्नातक या समकक्ष डिग्री अथवा इससे उच्च डिग्री रखने वाले अभ्यर्थी इस पद के लिए पात्र होंगे। वेतन एवं अन्य भत्ते कृषि विभाग के कृषि समन्वयक के समान होंगे। कृषि समन्वयक का पे ग्रेड 2800 रुपये है तथा मूल वेतन 5200 से 20200 रुपये है। क्यों है जरूरत राज्य सरकार ने अगले तीन वर्षों में सालाना 25 लाख टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में राज्य में मछली उत्पादन 10 लाख 28 हजार टन है। आवश्यकता की पूर्ति के लिए अभी आंध्रप्रदेश सहित अन्य राज्यों से मछली मंगानी पड़ती है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डेयरी, फिशरीज एवं पशु संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक में मछली उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य दिया था। वर्तमान में पंचायत स्तर पर मत्स्य अधिकारी नहीं होने के कारण मछली उत्पादक किसानों को समय पर उचित सलाह नहीं मिल पाती। मत्स्य सहायकों की नियुक्ति होने पर वे किसानों को समेकित खेती के तहत तालाब निर्माण और मछली पालन के लिए प्रोत्साहित करेंगे। बिहार में फिलहाल दो हजार पंचायतों में मत्स्य सहायकों की नियुक्ति की जाएगी। इससे मछली उत्पादक किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से लेकर तालाब और मत्स्य पालन संबंधी समस्याओं के समाधान तक समय पर सहायता मिल सकेगी। साथ ही, राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। कैबिनेट से मंजूरी का इंतजार मत्स्य सहायक के पदों के लिए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग की प्रशासी पदवर्ग समिति को भेज दिया है। प्रशासी पदवर्ग समिति से हरी झंडी मिलने के बाद विभाग इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजेगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इन पदों पर नियुक्ति तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से की जाएगी। पहले मत्स्य सहायकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर करने की तैयारी थी, लेकिन अब इन्हें नियमित आधार पर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। फिशरीज (मात्स्यिकी) में स्नातक या समकक्ष डिग्री अथवा इससे उच्च डिग्री रखने वाले अभ्यर्थी इस पद के लिए पात्र होंगे। वेतन एवं अन्य भत्ते कृषि विभाग के कृषि समन्वयक के समान होंगे। कृषि समन्वयक का पे ग्रेड 2800 रुपये है तथा मूल वेतन 5200 से 20200 रुपये है। आयोग द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा।