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गुड़-रोटी खिलाकर सीएम योगी ने की गोसेवा स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा मुख्यमंत्री ने

गोरखपुर  गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान शनिवार सुबह जनता दर्शन लगाकर जनसेवा करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंदिर की गोशाला में जाकर गोसेवा में भी रमे रहे। उन्होंने स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा। गुड़-रोटी खिलाया और गोशाला के कार्यकर्ताओं को गोवंश के समुचित देखभाल के निर्देश दिए। गोरखनाथ मंदिर प्रवास पर शनिवार प्रातः काल सीएम योगी की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं तो गोसेवा उनकी दिनचर्या में शामिल रहती है।  शनिवार सुबह भी मुख्यमंत्री, मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए गोशाला में पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया। गोशाला में सीएम योगी ने गोवंश के माथे पर हाथ फेरा, थपकी देखे दुलारा और अपने हाथों से उन्हें गुड़-रोटी खिलाया। गोसेवा के दौरान गोशाला परिसर में विचरण कर रहे मोरों पर भी मुख्यमंत्री ने स्नेह बरसाया।

उप मुख्यमंत्रीशर्मा पहुंचे नक्सलियों की मांद कहलाने वाले ग्राम किसकोड़ो, ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं

रायपुर कभी नक्सल संगठन का मजबूत गढ़ और बस्तर में नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम किसकोड़ो में शुक्रवार 26 जून को ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जिस स्थान पर कभी नक्सलियों की चौपाल लगती थी, वहीं उप मुख्यमंत्रीविजय शर्मा ने देर शाम को ग्रामीणों के बीच जनचौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं। वर्षों तक भय और हिंसा का दंश झेल रहा यह गांव अब लोकतंत्र, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है।         गांव पहुंचने पर उप मुख्यमंत्रीविजय शर्मा का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद किया और एक-एक व्यक्ति की समस्याएं, मांग एवं सुझाव गंभीरता से सुनी। इस दौरान ग्राम किसकोड़ो सहित आसपास की आठ पंचायतों के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।      ग्रामीणों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, विद्युत व्यवस्था, बंडापाल में सब-स्टेशन निर्माण, खाद भंडारण केंद्र, स्कूल की बाउंड्रीवाल तथा मातला मार्ग पर पाइप पुलिया निर्माण जैसी अनेक मांगें रखीं। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश देते हुए अस्पताल तक मरीजों के आवागमन के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने तथा विद्युत व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसकोड़ो को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। यहां पहुंचे ग्रामीणों में अपने क्षेत्र के विकास के लिए उत्साह देखकर उप मुख्यमंत्री ने कहा वर्षों तक डर के साए में रहने के बाद जल्द से जल्द विकास करने की जो ललक आज ग्रामीणों में दिख रही है वह अविश्वसनीय है। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 तक किसकोड़ो एरिया कमेटी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र थी, जिसे अब नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया जा चुका है। हाल ही में गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए बोर खनन कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किसकोड़ो का निरीक्षण भी किया।      जनचौपाल में ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि पहले यहां नक्सलियों की चौपाल लगती थी, आज पहली बार शासन के उप मुख्यमंत्री की चौपाल लगी है। यह किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि पहले शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। बच्चों को जबरन नक्सली संगठन में शामिल करने का प्रयास किया जाता था और सरकारी कर्मचारी भी यहां पदस्थापना होने के बावजूद कार्यभार ग्रहण करने से कतराते थे। आज वही गांव विकास, सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से कहा कि कभी भय और बंदूक की पहचान रखने वाला किसकोड़ो अब विकास, विश्वास और लोकतंत्र का नया प्रतीक बनकर उभर रहा है। यहां गूंज रहे "भारत माता की जय" के उद्घोष इस बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को जैविक कृषि के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बेहतर प्रशिक्षण के साथ उनका सर्टिफिकेशन करने की भी आवश्यकता है, आसपास की सभी पंचायतों को मिलाकर ब्रांडिंग का कार्य किया जाए। उन्होंने लघु वनोपज प्रसंस्करण के लिए व्यवस्था निर्माण के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर कांकेरनिलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एएसपीआकाश श्रीश्रीमाल, जिला पंचायत सीईओहरेश मंडावी, एडीएमएएस पैकरा, एसडीएम अंतागढ़राहुल रजक सहित अन्य अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

पुरुष शॉट पुट स्पर्धा में 20.40 मीटर के शानदार प्रदर्शन के साथ एशियाई खेल 2026 के लिए किया क्वालीफाई

भोपाल मध्यप्रदेश राज्य एथलेटिक्स अकादमी के प्रतिभावान खिलाड़ी समरदीप सिंह ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 24 से 28 जून 2026 तक आयोजित 65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। प्रतियोगिता के चौथे दिन सायंकालीन सत्र में आयोजित पुरुष शॉट पुट स्पर्धा में समरदीप सिंह ने 20.40 मीटर का प्रभावशाली थ्रो करते हुए रजत पदक अर्जित किया। एशियाई खेल 2026 के लिए किया क्वालीफाई समरदीप सिंह ने अपने शानदार प्रदर्शन के बल पर एशियाई खेल 2026 के लिए निर्धारित क्वालीफिकेशन मानक भी प्राप्त कर लिया है। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने न केवल पदक हासिल किया, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर भी सुनिश्चित किया। यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का परिणाम है। राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की सशक्त पहचान 65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में समरदीप सिंह का यह प्रदर्शन मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाओं की निरंतर प्रगति और खेल अकादमियों में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रमाण है। राष्ट्रीय मंच पर पदक जीतने के साथ एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई करना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। खेल मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने समरदीप सिंह को इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समरदीप आगामी एशियाई खेलों में भी देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा समरदीप सिंह की यह सफलता प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि समर्पण, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प के बल पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट सफलता प्राप्त की जा सकती है।  

लगातार दूसरे दिन जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान लगातार दूसरे दिन शनिवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने आवास के लिए जरूरतमंद लोगों को आवास दिलाने और गंभीर बीमारियों से पीड़ितों के इलाज में भरपूर आर्थिक सहायता देने का आत्मीय भरोसा देते हुए कहा कि जरूरतमंदों के इलाज और मकान की व्यवस्था सरकार कराएगी।  जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने करीब 200 लोगों से मुलाकात की। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे और एक-एक कर उनकी समस्याओं को सुना। उनके प्रार्थना पत्र लिए और निस्तारण के लिए संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और प्रभावी होना चाहिए। इस अवसर पर सीएम ने लोगों से कहा कि सरकार हर जरूरतमंद और पात्र व्यक्ति को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा हर समस्या के प्रभावी निस्तारण के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जन समस्याओं पर संवेदनशीलता दिखाएं।  जनता दर्शन में एक महिला ने सीएम योगी से कहा कि उनके पास रहने के लिए अपना मकान नहीं है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि उन्हें सरकार की योजना के तहत आवास दिलाया जाएगा। हर बार की तरह इस बार भी कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। एम्स दिल्ली में इलाज कर रही महिला को सीएम ने राहत कोष से आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया। एक अन्य महिला की इलाज संबंधी समस्या सुनने के बाद उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उनके इलाज की व्यवस्था गोरखपुर एम्स या बीआरडी मेडिकल कॉलेज में की जाए।   जमीन कब्जा किए जाने से संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि यदि कोई दबंग किसी की जमीन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। जनता दर्शन में परिजनों के साथ आए बच्चों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खूब दुलारा और आशीर्वाद दिया। साथ ही उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए चॉकलेट दीं। मुख्यमंत्री ने परिजनों से कहा कि वे अपने बच्चों को स्कूल जरूर भेजें।

शुभेंदु सरकार लाने जा रही सख्त कानून, बिना सुनवाई एक साल की हिरासत के प्रस्ताव पर विवाद तेज

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सराकार अगले सप्ताह विधानसबा में दो अहम विधेयक पेश करने वाली है। इन विधेयकों के जरिए समाज विरोधी गतिविधियों की परिभाषा को विस्तार दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इन विधेयकों में बिना किसी सुनवाई के 12 महीने तक की हिरासत का प्रावधान होगा। इसके अलावा अपराधियों की संपत्ति की नीलामी करके पीड़ितों की भरवाई का भी प्रावधान किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक 2026 और पश्चिम बंगाल कानून व्यवस्था (संशोधन) विधेयक अगले सप्ताह विधानसभा में पेश किए जाएंगे। इसी तरह के कानून उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी बनाए गए थे जिनपर विवाद भी हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य सुनियोजित अपराध, उगाही, अवैध खनन, तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है। अधिकारियों ने बताया कि इस विधेयक में ऐसा प्रावधान है कि बिना सुनवाई के ही किसी अपराधी को एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसके अलावा अगर कोई अपराधी किसी को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाता है तो उसकी संपत्तियों की नीलामी करके उसकी भरपाई की जाएगी। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक असामाजिक गतिविधियों में, अवैध खनन, बालू का खनन, उत्खनन, वन्य संपदा का दोहन भी शामिल है। विधेयकों पर होने लगा बवाल टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और समाज विरोधी गतिविधियां नियंत्रण विधेयक 2026 विवादास्पद कानून है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानुन और मीसा से भी ज्यादा कठोर कानून बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के ही एक साल तक हिरासत में रखा जा सके, उसमें न्यायिक सुरक्षा कहां रही। ऐसे में शक के आधार पर ही पुलिस को बेहिसाब ताकत मिल जाती है। सोमवार को यूसीसी विधेयक भी होगा पेश पश्चिम बंगाल की सरकार सोमवार को बजट सत्र के दौरान ही यूसीसी विधेयक भी पेश करने वाली है। इसके साथ ही दो अन्य विधेयक पेश किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सार्वजनिक अव्यवस्था, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और तोड़फोड़ जैसी गतिविधयों से निपटना बताया गया है। बीजेपी का कहना है कि राजनीतिक हिंसा, संगठित अपराध और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों को रोकना ही इसका मकसद है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही इस तरह के कड़े कानून को लेकर घोषणा कर दी थी। यह नया कानून 1972 के पुराने कानून की जगह लेने वाला है। अधिकारियों ने कहा कि यह विधेयक उन घटनाओं के लिए तैयार किया गया है जिनमें हिंसक भीड़ पुलिस स्टेशनों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाती थी। विधेयक में क्या प्रावधान है इस प्रस्तावित कानून में कई अपराधों को गैरजमानती श्रेणी में रखा जाएगा। इसके अलावा संगठित अपराध, उनकी फंडिंग करने वालों, अवैध हथियार, विस्फोटक, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों को परिभाषित किया गया है। इस विधेयक में 'गुंडा' ऐसे व्यक्ति को बताया गया है जो कि आदतन असामाजिक गतिविधियों का हिस्सा होता है और किसी गिरोह या फिर सिंडिकेट में शामिर रहता है। इसके अलावा बीएनए, शस्त्र अधिनियम, अनैतिक व्यापार रोकथाम अधिनियम, एनडीपीएस ऐक्ट के तहत जिसके खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई हो उसे भी गुंडा माना जाएगा। इस विधेयक में हिरासत के नियमें में बदलाव के साथ ही एक साल तक प्रतिबंध, आवागमन पर रोक, पुलिस के पास नियमित रिपोर्टिंग, असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने पर धन, संपत्ति और दस्तावेजों की तलाशी का अधिकारी भी दिया गया है। अगर कोई इसका विरोध करता है तो यह संज्ञेय या फिर गैर जमानती अपराध माना जाएगा। चर्चा है कि यूसीसी कानून बनाने से पहले ही सरकार विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून ला रही है।  

‘बिना आंख’ वाला F-35! पेंटागन ने रडार के बिना सौंपे 6 स्टील्थ फाइटर जेट, जानें पूरी कहानी

वाशिंगटन अमेरिका की सबसे एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट F35 की कहानी अब एक बड़े घोटाले और देरी की मिसाल बन गई है. पेंटागन ने हाल ही में मरीन कॉर्प्स को छह F35 फाइटर जेट बिना रडार के डिलीवर कर दिए हैं. नया एएन/एपीजी-85 रडार सिस्टम अप्रैल 2028 तक प्रोडक्शन शुरू नहीं होगा।  F35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ग्रेगरी मासिएलो ने सीनेट की सुनवाई में साफ कहा कि बिना रडार वाले ये जेट्स पूरी तरह मिशन कैपेबल नहीं माने जा सकते. यह बात इतनी सच्ची है कि इसे कोई छिपा नहीं सकता. दुनिया का सबसे महंगा फाइटर प्रोग्राम, जो अब तक 400 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुका है, अब बिना आंखों वाले विमानों को डिलीवर कर रहा है।  ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स को बुलाकर मिसाइल स्टॉक की कमी पर सवाल किए. उसी समय पेंटागन F35 जैसे जेट्स बिना मुख्य हिस्से के दे रहा है. भारत के संदर्भ में यह खबर बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप ने भारत की यात्रा के दौरान और पहले कई बार भारतीय वायुसेना (IAF) को F35 ऑफर किया था।  प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के समय ट्रंप ने कहा था कि वे भारत को F35 स्टेल्थ फाइटर उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार कर रहे हैं. यह ऑफर भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को ऊंचाई देने वाला था लेकिन अब इस प्रोग्राम की समस्याएं भारत के लिए सोचने वाली बात हैं।  F35 प्रोग्राम की महंगाई और समस्याएं  F35 लाइटनिंग II को दुनिया का सबसे एडवांस्ड स्टेल्थ फाइटर माना जाता है. इसमें एक से ज्यादा रोल हैं – जमीन पर हमला, हवा में लड़ाई और टोही. लेकिन इसका कुल खर्च अब 2 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया है, जो इसे इतिहास का सबसे महंगा हथियार प्रोग्राम बनाता है. एक जेट की कीमत 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा है, लेकिन रखरखाव, अपग्रेड और लाइफ साइकिल कॉस्ट इसे और महंगा बनाती है।  अब नया AN/APG-85 रडार पुराने APG-81 की जगह लेने वाला था. यह ज्यादा पावरफुल AESA रडार है, जो बेहतर टारगेट डिटेक्शन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता देता है. लेकिन नाक के अंदर माउंटिंग सिस्टम में बदलाव की वजह से पुराना रडार फिट नहीं हो पा रहा।  इसलिए लॉकहीड मार्टिन ने कुछ जेट्स नाक में बैलास्ट लगाकर डिलीवर किए. मरीन कॉर्प्स ने इंतजार किया, लेकिन अब छह जेट्स बिना रडार के उनके पास हैं. जनरल मासिएलो ने माना कि ये जेट्स ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं, लेकिन असली लड़ाई में पूरी क्षमता नहीं दिखा सकते।  यह समस्या सिर्फ रडार तक सीमित नहीं. F35 प्रोग्राम लंबे समय से देरी, कॉस्ट ओवररन और कम तैयार दरों से जूझ रहा है. कई रिपोर्ट्स कहती हैं कि तैयार जेट्स का छोटा प्रतिशत ही पूरी तरह मिशन तैयार रहता है. ट्रंप ने कॉन्ट्रैक्टर्स से मिसाइल स्टॉक की कमी पर जवाब मांगा, जो दिखाता है कि अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री सप्लाई चेन की दिक्कतों से गुजर रही है।  ट्रंप का भारत दौरा और F35 ऑफर  ट्रंप ने भारत यात्रा के दौरान और इससे पहले मोदी के व्हाइट हाउस दौरे पर F35 का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को अरबों डॉलर के हथियार बेचेगा और F35 का रास्ता भी खोलेगा. यह ऑफर भारत को क्वाड और इंडो-पैसिफिक में चीन के खिलाफ मजबूत बनाने का संकेत था. भारत के पास अभी राफेल, Su-30MKI जैसे जेट्स हैं, लेकिन पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर IAF को नई ताकत दे सकता था।  भारत ने हालांकि इस ऑफर को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ट्रेड टेंशन और टैरिफ की वजह से भारत ने दिलचस्पी नहीं दिखाई. भारत Make in India पर जोर देता है. रूस, फ्रांस के साथ लंबे संबंध रखता है. F35 खरीदने पर अमेरिकी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, रखरखाव और इस्तेमाल पर सख्त शर्तें लगती हैं, जो भारत को पसंद नहीं आतीं. ट्रंप का ऑफर दिखाता है कि अमेरिका भारत को रणनीतिक पार्टनर मानता है।  भारत अगर F35 खरीदता तो क्या होता?  एक तरफ यह IAF को स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, बेहतर सेंसर और नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर देता. पाकिस्तान और चीन के एयर डिफेंस को चीरने में मदद करता. लेकिन दूसरी तरफ, बिना रडार वाले जेट्स की डिलीवरी, देरी और भारी खर्च भारत के बजट पर बोझ बन सकता था. भारत एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट AMCA जैसे अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. F35 जैसी विदेशी टेक्नोलॉजी खरीदने से पहले इन समस्याओं को समझना जरूरी है।  F35 प्रोग्राम की समस्याएं अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री की कमजोरियों को उजागर करती हैं. सप्लाई चेन, प्रोडक्शन डिले और कॉस्ट कंट्रोल में दिक्कतें हैं. ट्रंप इन मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन समाधान आसान नहीं. भारत के लिए यह सबक है कि कोई भी हथियार परफेक्ट नहीं होता. रडार, सॉफ्टवेयर, इंजन और रखरखाव सब पर निर्भर रहना पड़ता है।  F35 2028 तक नया रडार मिलने के बाद बेहतर हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह प्रोग्राम चुनौतियों से भरा है. भारत को ट्रंप के ऑफर पर फिर से सोचना चाहिए, लेकिन अपनी शर्तों पर. संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और लागत प्रभावी डील जरूरी है।  यह मामला सिर्फ एक जेट का नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध और रक्षा खरीद की जटिलताओं का है. भारत जैसे देश को मजबूत एयर फोर्स चाहिए, लेकिन बिना आंखों वाला विमान नहीं. ट्रंप की यात्रा और ऑफर ने नए द्वार खोले, लेकिन फैसला सावधानी से लेना होगा. F35 की कहानी जारी है – महंगा, शक्तिशाली लेकिन अभी सही नहीं।   

77 करोड़ के कर्ज मामले में हाईकोर्ट सख्त, बैंक को सेल सर्टिफिकेट जारी करने की मंजूरी

 रांची  झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि डेट्स रिकवरी अपीलेट ट्रिब्यूनल (डीआरएटी) के अध्यक्ष अपनी प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल कर कोई न्यायिक या स्थगन आदेश पारित नहीं कर सकते। अदालत ने कर्जदार द्वारा अपनाई गई कानूनी दांवपेच की रणनीति बताते हुए उनकी कड़ी निंदा की और बैंक को सफल नीलामी खरीदार के पक्ष में तुरंत सेल सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि कर्जदार पर 77 करोड़ से अधिक का बकाया है। यह जनता का पैसा है जिसे कानूनन वसूला जाना जरूरी है। कर्जदार ने लोन चुकाने का कोई प्रयास नहीं किया, बल्कि केवल वसूली प्रक्रिया को टालने के लिए कानूनी दांवपेंच अपनाए। एकल पीठ ने उक्त निर्णय इंडियन बैंक बनाम मां ललिता हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड और नीलामी खरीदार यशोदा हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर लिमिटेड द्वारा दायर दो अलग-अलग रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुनाया। क्या है पूरा मामला? देवघर स्थित मां ललिता हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ने अस्पताल स्थापित करने के लिए इंडियन बैंक (पूर्व में इलाहाबाद बैंक) से करोड़ों रुपये का लोन लिया था, जो बाद में बढ़कर ₹19.45 करोड़ तक पहुंच गया। लोन न चुकाने के कारण 31 दिसंबर 2009 को इस खाते को एनपीए घोषित कर दिया गया। साल 2015 में बैंक और अस्पताल प्रबंधन के बीच एक समझौता हुआ, जिसके बाद बैंक ने अस्पताल की जब्त संपत्ति वापस लौटा दी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया। इसके बाद बैंक ने करीब 70.92 करोड़ की बकाया राशि की वसूली के लिए सरफेसी एक्ट के तहत नए सिरे से कार्रवाई शुरू की। बैंक ने सात अप्रैल 2026 को अस्पताल की संपत्तियों की नीलामी की, जिससे 44.22 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इस नीलामी में यशोदा हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर लिमिटेड सबसे बड़ा बोलीदाता बनकर उभरा और उसने पूरी रकम जमा कर दी। डीआरएटी के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी), रांची के बंद होने का हवाला देते हुए कर्जदार अस्पताल ने इलाहाबाद स्थित अपीलेट ट्रिब्यूनल (डीआरएटी) में याचिका दाखिल की डीआरएटी के अध्यक्ष ने आरडीबी एक्ट की धारा 17ए के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 10 अप्रैल 2026 को बैंक को नीलामी की रकम स्वीकार करने की अनुमति तो दी, लेकिन खरीदार को सेल सर्टिफिके जारी करने पर रोक लगा दी थी। इस स्थगन आदेश के खिलाफ बैंक और नीलामी खरीदार दोनों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट की अहम टिप्पणियां और फैसला हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डीआरएटी के आदेश को पूरी तरह अधिकार क्षेत्र से बाहर माना। पीठ ने कहा कि कर्जदार ने कोर्ट में पहले भी अर्जी दी थी, जहां उन्हें राहत पाने के लिए दो करोड़ जमा करने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने वह राशि जमा नहीं की और चालाकी से डीआरएटी में बिना कोई प्री-डिपाजिट किए राहत पा ली, जो कि पूरी तरह से अनुचित है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआरएटी द्वारा 10 अप्रैल 2026 और 21 अप्रैल 2026 को जारी अंतरिम स्थगन आदेशों को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि अब बैंक द्वारा नीलामी खरीदार के पक्ष में सेल सर्टिफिकेट जारी करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।

पूंजी तक पहुंच, निरंतर क्षमता वृद्धि जरूरी

भोपाल अंतराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर समृद्ध एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश थीम पर रवींद्र भवन में शनिवार को हुई समिट के दौरान नये बाज़ार, नई उड़ान और पूंजी की व्यवस्था सत्रों मे निवेशको, उद्यमियों और विभिन्न व्यावसायिक तथा बैंकिंग संस्थाओं के बीच सार्थक संवाद हुआ। एमएसएमई एवं स्वयं सहायता समूहों के लिए नवीन बाज़ार अवसर इस सत्र में एमएसएमई के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों, विशेषकर सीमित बाजार पहुंच, पर ध्यान केंद्रित किया गया तथा निर्यात, डिजिटल कॉमर्स, शोध एवं विकास, जोखिम कम करने तथा लॉजिस्टिक्स के क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधानों पर विचार-विमर्श किया गया। सुश्री अंकिता पांडे, सीनियर प्रोजेक्ट कंसल्टेंट एंड यंग एलएलपी (मॉडरेटर) एवं विशेषज्ञों ने संस्थागत सहयोग के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें फियो (FIEO) ने प्रथम बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को दस्तावेजीकरण, बाजार चयन तथा वैश्विक व्यापार गतिकी के संबंध में मार्गदर्शन देकर निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाने पर बल दिया। सीएसआईआर-एएमपीआरआई के डॉ. भास्कर ने कच्चे एवं अपशिष्ट पदार्थों को मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित करने में नवाचार तथा सतत प्रक्रियाओं की भूमिका पर बल दिया तथा शोध एवं उद्योग के मध्य सुदृढ़ सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। ओएनडीसी (ONDC) तथा ईसीजीसी (ECGC) के प्रतिनिधियों ने बाजार पहुंच विस्तार हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तथा विशेष रूप से छोटे एवं नवीन निर्यातकों के लिए भुगतान जोखिमों से सुरक्षा हेतु निर्यात्त ऋण बीमा के लाभों को रेखांकित किया। चर्चा में इंडिया पोस्ट के विस्तृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को एक विश्वसनीय एवं किफायती समाधान के रूप में उजागर किया गया तथा यह निष्कर्ष निकाला गया कि एमएसएमई डिजिटल उपकरणों, नवाचार, वित्तीय संरक्षण तथा सुदृढ़ सप्लाई चेन सहायता का लाभ उठाकर प्रभावी रूप से अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकते हैं। पूंजी तक पहुंच सत्र से एमएसएमई को मिला नया क्षेत्र नई पीढ़ी के एमएसएमई के लिए वित्त-पोषण सत्र में मॉडरेटर सुश्री ऋचा सिंह, सीनियर मैनेजर, अन्र्स्ट एंड यंग एलएलपी ने तकनीकी सत्र का संचालन किया।विकसित हो रहे वित्त पोषण परिदृश्य पर चर्चा की गई तथा डिजिटल एवं वैकल्पिक वित्त-पोषण माध्यमों के द्वारा ऋण प्राप्ति में आने वाली बाधाओं को कम करने पर बल दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के बावजूद, एमएसएमई को समय पर एवं सुलभ वित प्राप्त करने में कोलैटरल की कमी, अपूर्ण दस्तावेज़ीकरण तथा सीमित क्रेडिट इतिहास जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चर्चा में डिजिटल लेनदेन के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया गया, जिसमें यूपीआई डेटा को नकद प्रवाह तथा साख-योग्यता के आकलन हेतु एक उपयोगी उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। बैंकिंग दृष्टिकोण से एमएसएमई द्वारा वित्तीय अनुशासन बनाए रखने, दस्तावेजीकरण में सुधार करने तथा ऋण पात्रता बढ़ाने हेतु सुदृढ साख प्रोफाइल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इनवॉइस डिस्काउंटिंग के माध्यम से कार्यशील पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में ट्रेड्स (TReDS) की भूमिका को भी रेखांकित किया गया, जिससे त्वरित नकदी प्रवाह तथा औपचारिक क्रेडिट ट्रेल स्थापित करने में सहायता मिलती है। सत्र में यह निष्कर्ष निकाला गया कि एमएसएमई को विकास के लिए पूंजी तक पहुंच तथा सतत विस्तार सक्षम बनाने में डिजिटल अंगीकरण, वित्तीय साक्षरता, वैकल्पिक वित्त पोषण तथा सुदृढ़ संस्थागत सहयोग को समाहित करने वाला एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र आवश्यक है। दोनों सत्रों में नव उद्यमियों के प्रश्नों और शंकाओं का समाधान भी किया गया।   

किराना घराने की विरासत से निकली सुर-तपस्या: गोंडा की बंकू बहनों को मिला राष्ट्रीय सम्मान

गोंड  एक तरफ किताबें, दूसरी तरफ भक्ति का दीप और बीच में दो ऐसी बेटियाँ जिन्होंने साबित कर दिया कि उम्र छोटी हो तो क्या, संकल्प बड़ा हो तो पहाड़ भी झुक जाते हैं। उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले की श्रुतिका बंकू और रितिका बंकू आज देश के उन चुनिंदा नामों में शामिल हैं, जो स्कूल की पढ़ाई करते हुए भी भजन-कीर्तन के मंचों पर राष्ट्रीय स्तर की पहचान बना चुकी हैं। अवध की इस धरती से उठी इनकी भक्ति की आवाज़ आज रामनगरी अयोध्या से लेकर झारखंड, हिमाचल और राजस्थान तक गूँज रही है। किराना घराने की इन दो बेटियों ने अपने सुर, साधना और समर्पण से न केवल परिवार का, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है。 रांची में उपराष्ट्रपति के प्रतिनिधि ने किया विशेष सम्मान बंकू बेटियों के नाम से देशभर में पहचानी जाने वाली इन दोनों बहनों की प्रतिभा अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जा रही है। हाल ही में झारखंड की राजधानी रांची में उपराष्ट्रपति के प्रतिनिधि एवं राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने इन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया। इससे पहले भी देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री इन्हें सम्मान से नवाज़ चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सम्मान और अयोध्या में सांस्कृतिक विभाग से जुड़ाव इनकी राष्ट्रीय पहचान को और मज़बूत करता है। पढ़ाई के साथ-साथ भजन-कीर्तन की साधना में भी अव्वल श्रुतिका बंकू इस समय कक्षा 12वीं और रितिका बंकू कक्षा 11वीं की छात्रा हैं। इतनी कम उम्र में जहाँ एक ओर वे अपनी पढ़ाई में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर भजन-कीर्तन और जागरण के मंचों पर उनकी निरंतर उपस्थिति यह साबित करती है कि सच्ची लगन हो तो शिक्षा और साधना साथ-साथ चल सकती हैं। राजस्थान के सीकर में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय अग्र गौरव पुरस्कार से नवाज़ा गया, जबकि अयोध्या की पावन भूमि पर उन्हें जागरण शक्ति की उपाधि से विभूषित किया गया जो उनकी आध्यात्मिक निष्ठा का सबसे बड़ा प्रमाण है। तीन पीढ़ियों की संगीत विरासत से मिली भक्ति की शक्ति श्रुतिका और रितिका की यह प्रतिभा अचानक नहीं उभरी, इसके पीछे है तीन पीढ़ियों की अटूट संगीत साधना। दादी श्रीमती लक्ष्मी देवी और माँ श्रीमती नमिता बंकू स्वयं संगीत शिक्षा से जुड़ी हैं और वर्षों से न केवल अपने परिवार में, बल्कि समाज की अन्य बेटियों को भी संगीत का संस्कार दे रही हैं। गोण्डा के प्रतिष्ठित किराना घराने की इस विरासत ने श्रुतिका और रितिका को वह नींव दी है, जिस पर उनकी भक्ति, उनका सुर और उनका समर्पण टिका है। यही कारण है कि इनकी प्रस्तुति में केवल सुर-ताल नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक अनुभूति भी झलकती है। राम नगरी से पहाड़ों तक गूँजते हैं इनके भजन, नम हो जाती हैं श्रोताओं की आँखें अयोध्या की रामनगरी हो या हिमाचल की पहाड़ियाँ, झारखंड की धरती हो या राजस्थान का मरुस्थल, जहाँ भी ये दोनों बहनें मंच पर उतरती हैं, वहाँ का माहौल भक्तिरस से सराबोर हो जाता है। राम नाम, हनुमान चालीसा और देवी-देवताओं के भजन जब इनकी वाणी से निकलते हैं, तो श्रोताओं की आँखें नम हो जाती हैं और मन श्रद्धा से भर उठता है। घर-घर पहुँचा रही हैं सनातन की ज्योति, आने वाली पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणा आज जब युवा पीढ़ी तेज़ी से पश्चिमी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है और परंपराएँ पीछे छूटती जा रही हैं, ऐसे समय में अवध की ये दो बेटियाँ सनातन धर्म की ज्योति को घर-घर पहुँचाने का बीड़ा उठाए हुए हैं। अपने भावपूर्ण और आध्यात्मिक गायन के ज़रिए वे यह संदेश दे रही हैं कि हमारी सनातन परंपराएँ केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की भी दिशा हैं। श्रुतिका और रितिका बंकू निःसंदेह आने वाली पीढ़ी के लिए एक जीवंत प्रेरणा हैं, जहाँ भक्ति, शिक्षा और संस्कार एकसाथ फलते-फूलते हैं।

रायगढ़ के किसान अरुण सॉ ने अनानास की खेती से बदली तकदीर, बने प्रेरणा स्रोत

रायपुर  कभी खेत की मेड़ पर शौक से लगाए गए कुछ अनानास के पौधों ने रायगढ़ के एक किसान की जिंदगी बदल दी। सकरबोगा पंचायत के ग्राम साल्हेओना निवासी प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ आज दो एकड़ में अनानास की खेती कर सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र में कृषि नवाचार और विविधीकरण की मिसाल बन गई है। शौक से शुरू हुआ, बना व्यावसायिक मॉडल            अरुण सॉ पहले धान समेत पारंपरिक फसलें उगाते थे। वर्षों पहले घरेलू उपयोग के लिए उन्होंने मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए। पौधों की अच्छी बढ़वार और फलों की गुणवत्ता देखकर उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया। पौधों से निकलने वाले प्ररोहों को अलग कर दोबारा रोपने का सिलसिला चलता रहा। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनका हौसला बढ़ाया। धीरे-धीरे यह प्रयोग दो एकड़ के बगीचे में बदल गया। आज उनके खेत में आम और अमरूद के बीच कतारबद्ध अनानास के पौधे बहुफसली खेती का सफल उदाहरण पेश करते हैं। कम लागत, बेहतर मुनाफा             अनानास की खेती की सबसे बड़ी खासियत कम लागत है। इसमें खाद, कीटनाशक और सिंचाई की जरूरत कम होती है, जिससे उत्पादन खर्च नियंत्रित रहता है। वहीं बाजार में मांग लगातार बनी रहती है। अरुण सॉ के खेत में तैयार हर फल गुणवत्ता के हिसाब से 40 से 80 रुपये तक बिकता है। प्ररोहों की बिक्री से भी आय                फलों के साथ-साथ पौधों से निकलने वाले प्ररोहों की बिक्री भी उनकी आय का बड़ा जरिया बन गई है। बेहतर कमाई देख आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलें अपनाने लगे हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।            अरुण सॉ कहते हैं कि खेती में सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, सही फसल चुनने, नई तकनीक अपनाने और विशेषज्ञों की सलाह मानने से मिलती है। स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनें तो कम जमीन-सीमित संसाधनों में भी अच्छी आमदनी संभव है।