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Aaj Ka Rashifal 30 June 2026: मंगलवार का दिन किन राशियों के लिए रहेगा शुभ? जानें करियर, धन और प्रेम का हाल

मेष आप समृद्धि भी देख सकते हैं। आज स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। आज का दिन बदलावों भरा रहने वाला है। एक मजबूत प्रेम जीवन और उत्पादक कार्यालय जीवन बनाए रखें। आज आपको अपने क्रश के साथ टाइम स्पेंड करने का मौका मिलेगा। काम के सिलसिले में यात्रा करनी भी पड़ सकती है। वृषभ आज का दिन पॉजिटिव एनर्जी से भरपूर रहने वाला है। आपको जोखिम लेना पसंद हैं क्योंकि वे आपको मजबूत बनाते हैं। आज प्रेम संबंधों में मुस्कुराहट के साथ खुश रहें। व्यावसायिक सफलता मिलेगी। मिथुन धन से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं होगा। लव के मामले में कभी साथी की बातें भी सुननी चाहिए। इसलिए लेन-देन करते समय सावधान रहें। अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। आज आपकी लव लाइफ बेहतरीन रहेगी। कर्क अपनी डाइट को हेल्दी रखें। आज का दिन हैप्पी-हैप्पी रहने वाला है। नए टास्क के प्रति अलर्ट रहें, जो आपको प्रमोशन भी दिला सकते हैं। अपना बेस्ट परिणाम देने के लिए पेशेवर चुनौतियों को सावधानी के साथ संभालें। सिंह आज के दिन क्लियर करें कि आप सभी व्यवसायिक कार्य पूरा कर लें। धन और स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहना अच्छा होता है। व्यावसायिक चुनौतियों से पार पाने के लिए कोशिश करें। आर्थिक सफलता मिलेगी और स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। कन्या आज फाइनेंस तौर पर दिन शुभ माना जा रहा है। रिश्ते के मुद्दों को जिम्मेदारी के साथ संभालें। अच्छे आधिकारिक रिश्ते का आनंद भी लें। छोटे वित्तीय मुद्दे स्मार्ट तौर पर किए गए खर्च की मांग करते हैं। ड्राइव करते वक्त सावधान रहें। तुला लवर के साथ अधिक समय बिताएं। आज का दिन मिल-जुला रहने वाला है। सफलता कमिटमेंट और मेहनत से आती है। रिश्ते में चल रही उथल-पुथल को आज ही सॉल्व करें। जंक फूड्स से दूरी बनाएं। वृश्चिक दिन रोमांटिक रहेगा, जिससे आपके प्रेम जीवन पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ेगा। आज स्वास्थ्य भी अच्छा रहने वाला है। करियर में कुछ नई जिम्मेदारियां मिलेगी, जो आपके प्रमोशन का कारण भी बन सकती हैं। अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखें। धनु आज के दिन आप समृद्ध रहेंगे। प्रमोशन हासिल करने के लिए नए लक्ष्य की तलाश करें। रिश्ते में सरप्राइज पाने की उम्मीद करें। व्यवसायिक तौर पर आप अच्छे रहेंगे। जंक फूड्स के सेवन से बचें। मकर आज का आपका दिन शुभ रहने वाला है। पैसों की कोई समस्या नहीं होगी। आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। प्रेम संबंधी किसी भी बड़े मुद्दे को कंट्रोल से बाहर नहीं जाने देना चाहिए। खर्च बढ़ सकता है। कुंभ छोटी-मोटी रुकावटों के बावजूद व्यवसायिक रिजल्ट पॉजिटिव रहेंगे। आज का दिन प्रोडक्टिव रहने वाला है। बेहतर उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए पेशेवर मुद्दों का ध्यान रखें। स्वास्थ्य भी आपके पक्ष में है। मीन आज का दिन शानदार रहने वाला है। सेहत थोड़ी गड़बड़ हो सकती है। इसलिए बाहर के खाने से परहेज करें। आर्थिक स्थिति भी अच्छी रहने वाली है। आज आप दिन भर पॉजिटिव फील करेंगे। सिंगल जातकों के लिए दिन खास माना जा रहा है।

India-China Border: आदिवासियों का बड़ा दावा, सीमा क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को लेकर बढ़ी चिंता

नईदिल्ली  भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के स्थानीय 'नाह' आदिवासी समुदाय ने दावा किया है कि चीन इस क्षेत्र में उनकी जमीन हथिया रहा है। उन्होंने दावा किया है कि नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चीनी सेना ने भारतीय जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे लेकर आदिवासी संगठन 'नाह वेलफेयर सोसाइटी' ने जिला प्रशासन को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपा है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 6 सालों के अंदर चीनी सेना ने उनके पूर्वजों की खेती और मवेशियों को चराने वाले जमीन के एक बहुत बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय लोगों ने बताया कि, चीन पिछले 10 से 15 सालों से इस इलाके में धीरे-धीरे पैर पसार रहा था, लेकिन 2020 के बाद से उसकी रफ्तार बहुत ज्यादा बढ़ गई है। किन इलाकों पर कब्जा? आदिवासी संगठन ने अपर सुबनसिरी के 'ताक्सिंग' क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच अलग जगहों पर चीन की संदिग्ध और आक्रामक गतिविधियों की सूची प्रशासन को सौंपी है। उनके मुताबिक 2020 तक ये इलाके पूरी तरह उनके नियंत्रण में थे, लेकिन अब इस पर चीन का नियंत्रण है। ये इलाके हैं- ओयिंग- यह स्ट्रेटेजिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाका है। पोत्रंग (झील): यह स्थानीय लोगों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है। तिन्दिनतांग (टीजी): ताक्सिंग हेडक्वार्टर के बिल्कुल नजदीक स्थित इलाका। पनिआर (चुजार्टा क्षेत्र): स्थानीय आदिवासियों का पारंपरिक क्षेत्र। मरपन (मर्नाफे): यहां चीनी सैनिकों की आवाजाही देखी गई है। 'भारतीय सीमा में चीनी सड़कें और मिलिट्री कैंप' नाह वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष केरु चादर ने अपने ज्ञापन में बेहद चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने एक बयान में कहा, "हमें अपनी भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है और वे सालों से हमारी जमीन की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन ये कोशिशें काफी साबित नहीं हो रही हैं। ताक्सिंग क्षेत्र में चीनी पीएलए (PLA) जिस इरादे और बिजली की रफ्तार से आगे बढ़ रही है, वह बेहद खतरनाक है।" उन्होंने आगे कहा, “हम हर दिन, इंच-दर-इंच अपनी मातृभूमि को चीन के हाथों खो रहे हैं। चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र के भीतर पक्की सड़कें और अपने मिलिट्री कैंप तक बना लिए हैं।” इस मामले पर नाचो विधानसभा क्षेत्र के विधायक नाकाप नालो ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। विधायक नालो ने एक बयान में कहा, "यह सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा है। स्थानीय लोगों ने जो आरोप लगाए हैं, जिला प्रशासन और सेना को उसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि करनी चाहिए।" वहीं इस पूरे मामले पर फिलहाल अरुणाचल प्रदेश की सरकार या केंद्र सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भारत का अभिन्न हिस्सा है अरुणाचल गौरतलब है कि चीन अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं मानता। वह इसे 'जांगनान' (दक्षिण तिब्बत) कहता है और इस पर अपना ऐतिहासिक दावा ठोकता है। अपनी संप्रभुता दिखाने के लिए चीन अक्सर अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नए चीनी नाम जारी करता है, वहां के नागरिकों को स्टेपल वीजा देता है और सीमा के पास बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की भी कोशिश करता है। हालांकि भारत ने कई मौकों पर यह स्पष्ट कर दिया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और नाम बदलने से जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती।

चीन दौरे पर उठे सवालों के बीच बांग्लादेश के विदेश मंत्री का जवाब, बोले- PM भीख का कटोरा लेकर नहीं गए

ढाका  अक्सर 'भीख का कटोरा' की चर्चा पाकिस्तान के संदर्भ में होती है, पाकिस्तान अमूमन दुनिया भर से मदद मांगने के लिए जाता रहता है. लेकिन इस बार ये चर्चा बांग्लादेश को लेकर हो गई. चर्चा भी ऐसी हुई कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री बुरा मान गए. दरअसल बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के चीन दौरे पर एक अजीब विवाद पैदा हो गया है. मीडिया की ओर से बार बार चीन से मिलने वाली आर्थिक मदद पर सवाल पूछने पर बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने चिढ़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान चीन कोई भीख का कटोरा लेकर नहीं गए हैं. वे वहां दोनों देशों के बीच संबंधों की दशा-दिशा तय करने गए हैं।  बांग्लादेश के विदेश मंत्री पीएम के दौरे पर ढाका में पत्रकारों से बात कर रहे थे. उन्होंने कहा कि किसी भी देश का नेता 'भीख का कटोरा' लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में शामिल नहीं होते हैं।  बीजिंग से मिलने वाली सीधी प्रोजेक्ट सहायता के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा, "आपने नकद राशि मिलने की बात की. भाइयों, कृपया ऐसे सवाल न पूछें; इससे हमें बहुत शर्मिंदगी होती है।  "प्रधानमंत्री दोनों देशों के बीच संबंधों की दिशा, विषय-वस्तु, कद, दायरा और गहराई तय करने के लिए वहां गए थे. सरकार का कोई भी प्रमुख दूसरे देश के नेता के साथ कागज और पेंसिल लेकर नहीं बैठता और न ही वे कोई भीख का कटोरा लेकर जाते हैं. कृपया थोड़ी आत्म-सम्मान बनाए रखें।  खलीलुर ने ये बातें  विदेश मंत्रालय में आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहीं, जो प्रधानमंत्री की हालिया मलेशिया और चीन यात्राओं के संबंध में थी।  बता दें कि बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में भारी जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी  की सरकार के मुखिया तारिक अपनी पहली विदेश यात्रा पर निकले और 21 जून को मलेशिया पहुंचे. अगले दिन वह उत्तर-पूर्वी चीन के शहर डालियान गए।  वहाां वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की सालाना बैठक में शामिल होने के बाद, वह तीन दिन की राजकीय यात्रा शुरू करने के लिए बुधवार को बीजिंग पहुंचे।  इस यात्रा के दौरान तारिक ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रीमियर ली कियांग के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत की. ढाका और बीजिंग ने अलग-अलग क्षेत्रों में 17 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।  दोनों देशों के  बीच 13 समझौते पर हस्ताक्षर हुए.  इनमें तीस्ता नदी मास्टर प्लान, तकनीकी सहायता के लिए चीन का समर्थन.  मोंगला पोर्ट और अनवारा के पास आर्थिक क्षेत्र का विकास. बुनियादी ढांचा जिनमें सड़कें, पुल, रेलवे, ऊर्जा, पर्यावरण-अनुकूल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन विकास में सहयोग शामिल है। 

लवकुश की कमाई सिर्फ ₹12 हजार, फिर भी VIP एरिया में बन रहा घर, तस्वीरों ने बढ़ाए सवाल

 अयोध्या  राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संपत्तियों को लेकर अब नए खुलासे हो रहे हैं. आजतक की टीम मामले में गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा द्वारा खरीदी गई एक ऐसी ही प्रॉपर्टी तक पहुंची. यह मकान अयोध्या-लखनऊ हाईवे के किनारे स्थित बनबीरपुर गांव में बन रहा है और स्थानीय लोगों का दावा है कि यह घर लवकुश मिश्रा का ही है।  आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक, लवकुश मिश्रा ने राम मंदिर में नौकरी के दौरान अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर यह जमीन खरीदी थी. दस्तावेजों के मुताबिक, यह जमीन सोहावल तहसील के मंगसी परगना इलाके में कमल स्वरूप सिंह से 8 लाख 80 हजार रुपये में खरीदी गई थी. वर्तमान में इस प्रॉपर्टी की कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है. आजतक को इस जमीन से जुड़े दाखिल-खारिज के दस्तावेज भी मिले हैं।  दस्तावेजों के मुताबिक, जमीन का दाखिल-खारिज 6 मार्च 2026 को सुप्रिया मिश्रा, निवासी मीनापुर भगोली, तहसील रुदौली, जिला अयोध्या के नाम पर किया गया. पड़ोस में रहने वाले राजकुमार पांडे ने लवकुश मिश्रा की तस्वीर देखकर पहचान की और कहा कि यही व्यक्ति इस निर्माणाधीन मकान का मालिक है. उन्होंने बताया कि फरवरी महीने से यहां मकान का निर्माण कार्य चल रहा था और दो दिन पहले तक मजदूर काम कर रहे थे. हालांकि, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद से परिवार दिखाई नहीं दे रहा है और रविवार से यहां काम भी बंद हो गया है।  अयोध्या के वकील नहीं करेंगे आरोपियों की पैरवी इस  बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा फैसला लेते हुए आरोपियों की पैरवी नहीं करने का ऐलान किया है. बार एसोसिएशन की सोमवार को हुई सामान्य सभा की बैठक में यह निर्णय लिया गया. बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि कोई वकील आरोपियों की ओर से केस लड़ता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।  बैठक के दौरान वकीलों ने यह भी मांग की कि मामले से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तीन दिनों के भीतर अयोध्या छोड़ देना चाहिए. वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो शहर की नाकेबंदी की जाएगी. चंपत राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव थे और अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य थे. दोनों ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया है।  फैजाबाद बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने कहा, 'मंदिर के चढ़ावे की चोरी से हमारी भावनाएं आहत हुई हैं. फैजाबाद के सभी वकीलों ने गिरफ्तार आरोपियों का बचाव नहीं करने पर सहमति जताई है.' इस फैसले के बाद फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा का एक वीडियो भी वायरल हुआ. वीडियो में वह कहते सुनाई दे रहे हैं, 'कोई भी वकील इस मामले में आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा. अगर कोई ऐसा करता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. हम मामले की सीबीआई जांच की भी मांग करते हैं।  यह घटनाक्रम अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम की निगरानी में चल रही जांच के बीच सामने आया है. अब तक इस मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिन्हें सोमवार को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. वहीं चंपत राय का बयान भी दर्ज किया गया है. इस मामले में जिन 8 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, उनमें- रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडे, रामा शंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव शामिल हैं।  अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोप क्या हैं? राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप इस महीने तब सामने आए जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया कि 7 से 7.5 करोड़ रुपये के चढ़ावे का गबन हुआ है. इसके बाद विपक्ष के कई नेताओं ने इससे भी बड़े दावे किए. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या दौरे के दौरान कहा था कि भगवान राम को चढ़ाए गए हीरे-जवाहरात तक चोरी हो गए. उन्होंने आरोप लगाया, 'भक्तों द्वारा चढ़ाए गए हीरे और कीमती पत्थर चोरी हो गए, 200 करोड़ रुपये नकद चोरी हो गए और 200 किलो चांदी भी गायब हो गई.' इसी तरह अन्य विपक्षी नेताओं ने भी 70 किलो चांदी, 1250 किलो सोना और 200 करोड़ रुपये नकद चोरी होने के आरोप लगाए और सरकार से जवाबदेही की मांग की।  हालांकि, राम मंदिर ट्रस्ट ने एक प्रेस रिलीज जारी करके इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ावे के रूप में दिए गए सोने चांदी के आभूषण और अन्य जेवरात पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका पूरा हिसाब मौजूद है. ट्रस्ट ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सामने आई घटनाओं से वह 'स्तब्ध, आहत और बेहद दुखी' है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इन आरोपों की जांच की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि मामले की सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद की जाएगी। 

बिहार में RJD नेता पर सेल्स टैक्स विभाग की कार्रवाई, सिवान के 4 ठिकानों पर सर्वे

सिवान. राजद नेता सह व्यवसायी अरुण गुप्ता के चार ठिकानों पर रविवार को सेल्स टैक्स विभाग की टीम ने एक साथ सर्वे की कार्रवाई की। सुबह शुरू हुई यह कार्रवाई देर शाम तक जारी रही। विभाग की अलग-अलग टीमें विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और संबंधित परिसरों पर पहुंचीं तथा कर संबंधी दस्तावेजों, बिल, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और अन्य कारोबारी अभिलेखों की गहनतापूर्वक जांच की। इस दौरान हरदिया मोड़ स्थित वीआईपी मॉल, मैरवा थानान्तर्गत मैरवा बाजार स्थित वीआइपी प्रतिष्ठान व पचरूखी थाना अंतर्गत उम्मेद पैलेस सह रेस्टोरेंट सहित अन्य जगहों पर सर्वे की कार्रवाई की गई। सर्वे के दौरान अधिकारियों ने जीएसटी रिटर्न, स्टाक रजिस्टर, कंप्यूटर में उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया। टीम ने आवश्यक दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच भी शुरू कर दी है। हालांकि, कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की जब्ती या कर चोरी की पुष्टि को लेकर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। सेल्स टैक्स विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह नियमित जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और सर्वे पूरा होने के बाद ही तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जांच पूरी होने तक विभाग ने विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया है। उधर, सर्वे की सूचना मिलते ही संबंधित परिसरों के बाहर लोगों की भीड़ जुट गई। कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और कारोबारी हलकों में भी चर्चा का माहौल बना रहा। फिलहाल, विभाग सर्वे के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और डिजिटल रिकार्ड का परीक्षण कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसी प्रकार की कर अनियमितता मिली है या नहीं तथा आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

जलापूर्ति व्यवस्था जांचने गांव-गांव जाएंगे जलशक्ति मंत्री, ग्रामीणों से लेंगे सीधा फीडबैक

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार जल जीवन मिशन को केवल योजनाओं तक सीमित न रखकर उसकी जमीनी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में भी लगातार सक्रिय है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए अब जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह स्वयं गांवों में जाकर नल से जलापूर्ति व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करेंगे। 15 से 25 जुलाई के बीच प्रस्तावित इस विशेष अभियान के तहत जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह एक दर्जन से अधिक जिलों के गांवों का दौरा करेंगे। इस दौरान वे न केवल पेयजल आपूर्ति और पानी की गुणवत्ता की जांच करेंगे, बल्कि ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी जानेंगे। इस अभियान में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके साथ रहेंगे। जलशक्ति मंत्री और विभागीय अधिकारी गांवों में रात्रि विश्राम भी करेंगे। इस दौरान ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित किया जाएगा और योजनाओं की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन होगा। निरीक्षण के दौरान गांवों में 'जल अर्पण' कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें ग्रामीणों को जलापूर्ति व्यवस्था के संरक्षण और संचालन में सहभागी बनाया जाएगा। जिलों के दौरे के साथ ग्रामीणों से लिया जाएगा फीडबैक 15 और 16 जुलाई को जलशक्ति मंत्री ललितपुर, झांसी और जालौन के गांवों का औचक निरीक्षण करेंगे। इसके बाद 18 और 19 जुलाई को सुल्तानपुर, जौनपुर, मिर्जापुर और सोनभद्र के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर जलापूर्ति व्यवस्था का जायजा लेंगे। इन सभी स्थानों पर वे ग्रामीणों से सीधा फीडबैक लेकर योजनाओं के प्रभाव का मूल्यांकन करेंगे। यमुना की सफाई के लिए संतों और ग्रामीणों से संवाद 24 जुलाई को जलशक्ति मंत्री मथुरा में संतों के साथ विशेष संवाद करेंगे। इस बैठक में यमुना नदी की स्वच्छता और संरक्षण को लेकर सुझाव लिए जाएंगे। साथ ही यमुना तटवर्ती ग्रामीणों को भी इस अभियान से जोड़कर नदी सफाई के प्रति जागरूक किया जाएगा। जलापूर्ति में लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन मुख्यालय में सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी जिले से जलापूर्ति संबंधी शिकायत प्राप्त होती है तो संबंधित चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता के विरुद्ध जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी चीफ इंजीनियरों को प्रत्येक परियोजना की व्यक्तिगत समीक्षा करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी चीफ इंजीनियर अपने स्तर पर भी गांवों में जल अर्पण कार्यक्रम का आयोजन करें। इन आयोजनों में ग्रामवासियों को जलापूर्ति की व्यवस्था सौंपने के साथ-साथ ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति भी सचेत किया जाए।

मोहाली के गुरुद्वारे में मारपीट मामले में नया मोड़, निहंग के कथित आपत्तिजनक फोटो वायरल

मोहाली. मोहाली के सोहाना स्थित गुरुद्वारा सिंह शहीदां में रविवार को निहंग बाबा जसदीप सिंह पर हमले की कोशिश और उसके बाद हुए हंगामे के मामले में नया खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक निहंग बाबा जसदीप सिंह और निहंग विक्की थोमस के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही थी। इसी विवाद के बीच विक्की थॉमस के करीबी भगत सिंह दुआबी के ड्राइवर लवली की पिटाई हुई, जिसके बाद मामला और बढ़ गया। वहीं, विक्की थोमस ने अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर करीब 11 मिनट का वीडियो और कुछ फोटोज शेयर किए हैं। इनमें विक्की थोमस ने दावा किया कि उसके पास निहंग जसदीप सिंह से जुड़ी कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें हैं। उसने आरोप लगाया कि तस्वीरों में जसदीप सिंह एक दूसरे निहंग के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहा है। हालांकि वीडियो में यह नहीं बताया गया कि ये तस्वीरें कब और कहां की हैं और न ही उनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि हो सकी है। वीडियो के दौरान थोमस ने एक कथित वीडियो काॅल का हिस्सा भी साझा किया। उसका दावा है कि बातचीत में जसदीप सिंह ने तस्वीरों को अपना बताया, लेकिन साथ ही कहा कि उस समय वह नशे की हालत में था। इस कथित बातचीत की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की, जबकि कुछ लोगों ने वीडियो में किए गए दावों की सत्यता पर सवाल उठाए। फिलहाल तस्वीरों और वीडियो काल से जुड़े दावों की किसी भी जांच एजेंसी या पुलिस की ओर से पुष्टि नहीं की गई है। मामले को लेकर अभी तक संबंधित पक्षों या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। निहंगों के स्वागत समारोह में हुआ था हंगामा उत्तराखंड के कर्णप्रयाग मारपीट मामले में जमानत मिलने के बाद पंजाब लौटे निहंगों के स्वागत के लिए गुरुद्वारा सिंह शहीदां में समारोह आयोजित किया गया था। इसी दौरान एक युवक बाबा जसदीप सिंह के पास पहुंचा और कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। वहां मौजूद निहंगों और संगत ने युवक को पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी। घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर भी वायरल हुआ। विक्की थोमस के करीबी के ड्राइवर ने की थी हमले की कोशिश सूत्रों के अनुसार लवली और जसदीप सिंह के बीच पहले तीखी बहस हुई थी। इसके बाद मामला मारपीट तक पहुंच गया। इसी घटनाक्रम को रविवार को हुए पूरे विवाद की वजह माना जा रहा है। उधर बाबा जसदीप सिंह ने दावा किया कि एक दिन पहले उनकी और विक्की थोमस के बीच फेसबुक पर भी तीखी नोकझोंक हुई थी। उनका आरोप है कि इसके बाद पांवटा साहिब, नाडा साहिब और रविवार को सोहाना स्थित गुरुद्वारा सिंह शहीदां में भी उन पर हमला करने की कोशिश की गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब इस पूरे विवाद को लेकर जत्थेदार आपस में बैठकर फैसला करेंगे।

चैंबर ऑफ कॉमर्स ने बस्तर IG सुन्दरराज पी का किया सम्मान, भावभीनी विदाई के साथ जताया आभार

जगदलपुर. बस्तर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने आईजी सुन्दरराज पी का सम्मान समारोह आयोजित किया. एनआईए में पदोन्नति मिलने पर चेम्बर भवन में उनका अभिनंदन किया गया. व्यापारी प्रतिनिधियों ने उनके कार्यकाल को बस्तर के लिए महत्वपूर्ण बताया. उनकी सरल कार्यशैली और आम लोगों से सहज संवाद की सराहना की गई. नक्सल उन्मूलन अभियान में उनकी भूमिका को विशेष रूप से याद किया गया. चेम्बर पदाधिकारियों ने कहा कि उनके नेतृत्व में पुलिस की.सकारात्मक पहचान मजबूत हुई. सम्मान समारोह में अभिनंदन पत्र भेंट कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं. बड़ी संख्या में व्यापारी और चेम्बर के पदाधिकारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे. वक्ताओं ने बस्तर में उनके योगदान को लंबे समय तक याद रखने की बात कही. कार्यक्रम में सौहार्दपूर्ण वातावरण के बीच सभी ने उन्हें शुभकामनाएं दीं. सम्मान समारोह बस्तर और पुलिस प्रशासन के बेहतर समन्वय का भी प्रतीक बना. कार्यक्रम का समापन उनके सफल भविष्य की कामना के साथ हुआ.

टीएलपीएस रिपोर्ट-2025 से उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों की नई रणनीति बनेगी

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा सुधारों को योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण और सीखने के परिणामों में सतत सुधार को नई दिशा देने की रणनीति पर तेजी से कार्य कर रही है। मंगलवार को बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संयुक्त तत्वावधान में 'टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस) रिपोर्ट-2025, उत्तर प्रदेश' पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संवाद एवं सेमिनार आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का मुख्य विषय 'नीति से व्यवहार तक संवाद' रखा गया है, जिसका उद्देश्य साक्ष्यों को क्रियान्वयन में बदलते हुए शिक्षा सुधारों को सीधे कक्षा-कक्ष तक पहुंचाना है।  अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा करेंगे। इसमें शिक्षा नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, शैक्षिक विशेषज्ञों, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, शिक्षकों तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग लेंगे। राज्य स्तर पर प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, अधिगम सुधार और भविष्य की शैक्षणिक रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। टीएलपीएस रिपोर्ट-2025 का होगा विमोचन सेमिनार का प्रमुख आकर्षण टीएलपीएस उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 का विमोचन होगा। एलएलएफ द्वारा प्रदेश में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) के अंतर्गत किए गए राज्यव्यापी अध्ययन के निष्कर्ष, प्रमुख अंतर्दृष्टियां और अनुशंसाएं प्रस्तुत की जाएंगी। इन निष्कर्षों के आधार पर विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को और प्रभावी बनाने की दिशा तय की जाएगी। प्रभावी शिक्षण और कैच-अप रणनीतियों पर होगा मंथन सेमिनार में प्रभावी शिक्षण के 10 प्रमुख शिक्षण अभ्यासों पर संवाद होगा। साथ ही अधिगम अंतर (लर्निंग गैप) को कम करने के लिए कैच-अप रणनीतियों, परख के निष्कर्षों पर आधारित शैक्षणिक सुधारों तथा साक्ष्य आधारित निर्णय प्रणाली पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके अतिरिक्त निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की दिशा में भविष्य की रणनीतियों पर भी विचार किया जाएगा। जमीनी अनुभवों से मिलेगा शिक्षा सुधारों को बल राज्य स्तरीय सेमिनार में राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक अपने नवाचारी शिक्षण अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा एसआरजी, एआरपी, बीईओ तथा अन्य शैक्षणिक नेतृत्वकर्ताओं के अनुभवों के साथ कक्षा-कक्ष से उभरती वास्तविक सफलता की कहानियों को भी मंच मिलेगा। इन अनुभवों के आधार पर शिक्षण की प्रभावी पद्धतियों को व्यापक स्तर पर लागू करने की रणनीति तैयार की जाएगी। कक्षा-कक्ष तक पहुंचेगा शिक्षा सुधारों का लाभ प्रदेश में निपुण भारत मिशन, शिक्षक क्षमता संवर्धन, गतिविधि आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधनों के उपयोग और विद्यालयी गुणवत्ता सुधार के लिए चल रहे प्रयासों के बीच यह राज्य स्तरीय संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साक्ष्य आधारित नीति, प्रभावी शिक्षण अभ्यास और जमीनी अनुभवों के समन्वय से तैयार होने वाली रणनीतियां शिक्षा सुधारों को नई गति देंगी तथा उत्तर प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, परिणामोन्मुख और बाल-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करेंगी।

China in Mongla Port: हिंद महासागर में बढ़ी चीन की मौजूदगी, भारत ने सेशेल्स के साथ मजबूत की रणनीतिक बढ़त

नई दिल्ली  हिंद महासागर में इन दिनों बड़ी भू-राजनीतिक शतरंज बिछी हुई है. एक तरफ चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के जरिए बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश कर रहा है. पाकिस्तान का ग्वादर, श्रीलंका का हम्बनटोटा, जिबूती में नौसैनिक अड्डा और अब बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट तक उसकी पहुंच इस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. दूसरी ओर भारत भी अब सिर्फ समुद्र की निगरानी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि हिंद महासागर में अपने भरोसेमंद साझेदारों का मजबूत नेटवर्क तैयार कर रहा है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा इसी बड़ी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है. पहली नजर में सेशेल्स एक छोटा सा द्वीपीय देश दिखता है. करीब 460 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और लगभग एक लाख की आबादी वाले इस देश को देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगाए कि इसकी रणनीतिक अहमियत कितनी बड़ी है. लेकिन पश्चिमी हिंद महासागर में फैले इसके 115 द्वीप ऐसे समुद्री इलाके में स्थित हैं, जहां से दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक समुद्री मार्ग गुजरते हैं।  सेशेल्स केवल एक मित्र नहीं, समुद्री सुरक्षा का अहम साझेदार एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया को जोड़ने वाले इन रास्तों से हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल, एलएनजी, कंटेनर कार्गो और जरूरी सामान दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है. भारत के विदेशी व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं समुद्री मार्गों पर निर्भर है. यही वजह है कि नई दिल्ली के लिए सेशेल्स केवल एक मित्र देश नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा के लिए सबसे अहम साझेदार बन चुका है. दिलचस्प बात यह है कि जमीन के लिहाज से छोटा होने के बावजूद सेशेल्स का विशेष आर्थिक क्षेत्र करीब 13 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।  इस विशाल समुद्री इलाके की निगरानी किसी भी छोटे देश के लिए आसान नहीं होती. भारत ने इसी जरूरत को समझते हुए पिछले कई वर्षों में सेशेल्स को डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान, तेज गश्ती नौकाएं, तटीय निगरानी रडार नेटवर्क, हाइड्रोग्राफिक सर्वे और सैन्य प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं. इससे न केवल सेशेल्स की समुद्री क्षमता बढ़ी है, बल्कि पूरे पश्चिमी हिंद महासागर में भारत की निगरानी और साझेदारी भी मजबूत हुई है।  चीन की बढ़ती भूमिका को करेगा काउंटर यह पूरी रणनीति ऐसे समय में सामने आ रही है, जब चीन हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है. बीते एक दशक में बीजिंग ने बंदरगाहों, औद्योगिक परियोजनाओं और समुद्री बुनियादी ढांचे में अरबों डॉलर का निवेश किया है. पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट, श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह और अफ्रीका के जिबूती में उसकी मौजूदगी पहले ही भारत की रणनीतिक चिंताओं का हिस्सा रही है. अब बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट तक चीन पहुंचने जा रहा है. चीन की इस भूमिका को भारत इसे व्यापक परिप्रेक्ष्य में देख रहा है. भारत जानता है कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा केवल जमीन पर नहीं, बल्कि समुद्र में भी तय होगी।  हालांकि, भारत का जवाब चीन की तरह कर्ज आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल नहीं है. भारत की रणनीति भरोसे, क्षमता निर्माण और साझा विकास पर आधारित है. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी साफ कहा है कि भारत किसी भी देश में वही परियोजना आगे बढ़ाता है, जिसे वहां की सरकार और जनता की सहमति प्राप्त हो. यही कारण है कि सेशेल्स के साथ रक्षा सहयोग के साथ-साथ डिजिटल गवर्नेंस, स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, अक्षय ऊर्जा, पर्यटन और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी तेजी से बढ़ रही है।  प्रधानमंत्री मोदी की 2015 की यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी थी. उसी दौरान कोस्टल सर्विलांस रडार सिस्टम की शुरुआत हुई, जिसने समुद्री गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी को नई मजबूती दी. भारत ने डोर्नियर विमान और अन्य रक्षा उपकरण देकर सेशेल्स की समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाई. अब 2026 की यह यात्रा दोनों देशों के बीच 50 वर्षों के राजनयिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की कोशिश है।  भारत की बदलती समुद्री सोच इस यात्रा का एक और अहम संदेश भारत की बदलती समुद्री सोच है. 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सागर’ यानी सेक्युरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन का विजन दिया था. अब इसे ‘महासागर’ यानी म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सेक्युरिटी एंड ग्रोथ एक्रॉल रीजन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. इसका मतलब सिर्फ नौसैनिक सहयोग नहीं, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी, सप्लाई चेन, जलवायु सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को भी समुद्री रणनीति का हिस्सा बनाना है. सेशेल्स इस व्यापक रणनीति का सबसे मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है. भारत और सेशेल्स के रिश्ते केवल रणनीति तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी दो सदियों से अधिक पुराने हैं. भारतीय मूल के हजारों लोग आज भी सेशेल्स की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, व्यापार और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।  यही सामाजिक जुड़ाव दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत बनाता है. बदलती वैश्विक राजनीति में हिंद महासागर का महत्व लगातार बढ़ रहा है. जो देश इस समुद्री क्षेत्र में मजबूत साझेदारी और भरोसेमंद उपस्थिति बनाएगा, वही आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा. ऐसे में यदि चीन मोंगला, ग्वादर और हम्बनटोटा के जरिए अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ा रहा है, तो भारत भी सेशेल्स जैसे विश्वसनीय साझेदारों के साथ अपने समुद्री सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर रहा है।