samacharsecretary.com

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा, योगी सरकार ने इको क्लब्स के लिए ₹65.64 करोड़ की राशि जारी की

पर्यावरण संरक्षण को नई गति, योगी सरकार ने इको क्लब्स के लिए जारी की ₹65.64 करोड़ की लिमिट – प्रत्येक परिषदीय विद्यालय को ₹5,000 की दर से उपलब्ध कराई गई लिमिट – इको क्लब्स के गठन, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर और सुझावात्मक गतिविधियां भी जारी – जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, ई-वेस्ट प्रबंधन और सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान पर रहेगा विशेष फोकस लखनऊ,   योगी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को नई गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में समग्र शिक्षा अंतर्गत 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' की गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु लगभग ₹65.64 करोड़ (₹6563.95 लाख) की लिमिट जारी कर दी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों को ₹5,000 प्रति विद्यालय की दर से लिमिट उपलब्ध कराई जाएगी। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों, सहायक लेखा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों एवं जिला समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि जारी की गई लिमिट का तीन दिन के भीतर विद्यालयों को हस्तांतरण सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही इको क्लब्स के उद्देश्य, गठन, अधिसूचना, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर तथा सुझावात्मक गतिविधियों के अनुरूप समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाए।  निर्धारित मदों में होगा लिमिट का उपयोग प्रत्येक विद्यालय को उपलब्ध कराई गई ₹5,000 की लिमिट का उपयोग निर्धारित मदों में किया जाएगा। इसमें इको क्लब की गतिविधियां, जागरूकता कार्यक्रम, पौधरोपण, कम्पोस्ट निर्माण, आवश्यक शिक्षण सामग्री, स्टेशनरी तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अन्य गतिविधियां शामिल हैं। विद्यालयों को निर्धारित वित्तीय मानकों का पालन करते हुए व्यय करना होगा तथा सभी खर्च के अभिलेख सुरक्षित रखना होगा। अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी पर विशेष बल योगी सरकार ने विद्यालय प्रबंधन समिति, अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को विद्यालय परिसर से बाहर समाज तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है। सभी विद्यालयों को इको क्लब गठन, गतिविधियों, फोटो, वीडियो तथा प्रगति रिपोर्ट निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी एवं जिला स्तर के अधिकारी नियमित समीक्षा करेंगे। प्रत्येक विद्यालय में गठित होगा इको क्लब निर्देशों के अनुसार सभी पात्र प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ का गठन किया जाएगा। प्रधानाध्यापक क्लब के संरक्षक होंगे, जबकि एक शिक्षक को प्रभारी बनाया जाएगा। विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को क्लब से जोड़कर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। क्लब की अधिसूचना जारी होगी, उसका पंजीकरण निर्धारित पोर्टल पर कराया जाएगा तथा विद्यालय स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक गतिविधि का अभिलेखीकरण और समय-समय पर उसकी समीक्षा भी की जाएगी। मिशन लाइफ के सात विषयों पर होगा विशेष फोकस इको क्लब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (मिशन लाइफ) के सात प्रमुख विषयों से जोड़ा जाएगा। इनमें स्वस्थ एवं सतत जीवनशैली अपनाना, टिकाऊ खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देना, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, कचरा कम करना एवं पुनर्चक्रण, ई-वेस्ट प्रबंधन तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाना शामिल है। उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार को बढ़ावा देना है। मासिक कैलेंडर के अनुसार चलेंगी गतिविधियां आदेश के साथ जुलाई से मार्च तक का विस्तृत गतिविधि कैलेंडर भी साझा किया गया है। जुलाई में पौधरोपण एवं हरित परिसर, अगस्त में किचन गार्डन और कम्पोस्ट निर्माण, सितंबर में ई-वेस्ट प्रबंधन, अक्टूबर में कचरा पृथक्करण एवं पुनर्चक्रण, नवंबर में ऊर्जा संरक्षण, दिसंबर में जल संरक्षण, जनवरी में सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान तथा फरवरी और मार्च में स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण एवं विश्व जल दिवस से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त पोस्टर, निबंध, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी, रैली, शपथ, प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों तथा समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। विद्यालय स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त गतिविधियां भी आयोजित कर सकेंगे।

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से होगा देश का विकास: राज्यपाल

जयपुर  राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि प्राचीन भारत में आठ लाख गुरुकुल थे। इनमें व्यावहारिक जीवन के लिए 18 विद्याएं और 64 कलाओं का ज्ञान विद्यार्थियों को दिया जाता था। गुरुकुल में समग्र जीवन से जुड़ा ज्ञान विद्यार्थियों को मिलता था। इसमें नैतिकता को सर्वोच्च स्थान दिया गया था। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति प्राचीन ज्ञान से आधुनिक विज्ञान के विकास के समन्वय से भारत के सर्वांगीण विकास से जुड़ी है।  बागडे सोमवार को पूर्णिमा विश्वविद्यालय में विद्याभारती के सहयोग से आयोजित "भारतीय ज्ञान परंपरा-पारंपरिक ज्ञान से आधुनिक शिक्षा, शोध और नवाचार" विषयक पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने 16 वीं शताब्दी में महाराणा प्रताप के दरबारी लेखक चक्रपाणी मिश्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने "विश्व वल्लभ" ग्रन्थ लिखा। इसमें भू जल की खोज, मौसम की भविष्यवाणी, जल शुद्धिकरण, कुंड निर्माण, बावड़ियां और पर्यावरण संरक्षण की विरल जानकारिया हैं। उन्होंने कहा कि यह ग्रन्थ बागवानी, वृक्ष से संबंधित बीमारियां, उन्हें दूर करने के उपायों, कृषि वानिकी आदि की उन्नत तकनीक पर बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां लिए है। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परम्परा की यही विशेषता रही है कि वह युगीन संदर्भों में ऐसी उपयोगी तकनीक से जुड़ी थी, जिसे आज आधुनिक विज्ञान कहा जा रहा है।       उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा प्रणाली मुख्य रूप से वैदिक परंपरा थी। हमारे यहां शिक्षा केवल पाठ्य पुस्तकों पर आधारित नहीं थी बल्कि जीवन के सर्वांगीण विकास से जुड़ी रही है। इसमें नैतिकता को सबसे अधिक प्रमुखता दी गई थी। उन्होंने कहा कि प्रभु राम ने भी गुरुकुल शिक्षा पद्धति से शिक्षा पाई। इसी से वह मर्यादा पुरुषोत्तम हुए। उन्होंने कहा कि विश्वामित्र ने दशरथ से राम को आश्रमों में राक्षसों के उत्पात से बचाने के लिए मांग लिया था। उन्होंने कहा कि विश्वामित्र ने ही सिखाया कि हिंसा का प्रतिकार कई बार जब उसी भाषा में नहीं दिया जाता तो हिंसा से ग्रस्त डरपोक समाज बनता है। हिंसा का प्रतिकार ही हमारे यहां अहिंसा का सर्वोत्तम मार्ग है।    राज्यपाल ने कहा कि अंग्रेजो ने जब देश पर शासन किया तब जो गजेटियर निकाले उनमें यह सामने आया कि हमारे देश में 8 लाख गुरुकुल थे। भारत तब बहुत बड़ा था। पाकिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका आदि भारत में ही थे। गुरुकुल में शिक्षा निशुल्क थी। इनका खर्च आम जन के सहयोग से निकलता था। प्राचीन शिक्षा में ज्ञान मौखिक रूप में अधिक प्रचलित था। श्रुति परंपरा के साथ शिष्य ज्ञान का श्रवण करते थे। उस पर चिंतन और मनन करते थे। व्यावहारिक जीवन के लिए 18 विद्याएं और 64 कलाएं थी। इनका ज्ञान विधार्थी पाते थे। उन्होंने कहा कि गुरुकुल में समग्र ज्ञान दिया जाता था। शिक्षा कौशल से जुड़ी थी। उन्होंने रणकपुर के जैन मंदिरों का उदाहरण देते हुए कहा कि शिल्प में यह इसीलिए अद्वितीय है कि इसका निर्माण कला कौशल से हुआ था।        राज्यपाल ने कहा कि लार्ड मैकाले ने इसीलिए भारत की शिक्षा पद्धति बदली कि यहां तब नैतिकता प्रबल थी। समृद्ध विरासत थी। अंग्रेजों ने इसलिए यह तरकीब निकाली की देश की शिक्षा पद्धति यदि बदल दी जाती है तो लंबे समय तक देश को गुलाम बनाए रखा जा सकता है। इसके अंतर्गत देश के उद्योग धंधे बंद कर दिए गए। देश के निवासियों को भूखे मरने पर बाध्य किया गया।     उन्होंने महर्षि कणाद की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने अणु परमाणु का ज्ञान सदियों पहले विश्व को दे दिया था परंतु आधुनिक विज्ञान में उनका नाम नहीं लिया जाता। उन्होंने कहा कि  दशमलव पद्धति का ज्ञान भारत से शुरू हुआ। इसी से दुनिया में गिनती प्रारम्भ हुई। उन्होंने कहा कि पश्चिम में टुकड़ों टुकड़ों में ज्ञान देने की परम्परा है वहीं भारत आरम्भ से ही समग्र ज्ञान के विज्ञान से जुड़ा रहा। प्राचीन भारत कला, चिकित्सा, धातुविज्ञान आदि सभी में अग्रणी था।  राज्यपाल ने बप्पा रावल की चर्चा करते हुए कहा कि अपने समय में उन्होंने अरबों को भारत से सौ साल के लिए खदेड़ा था। उन्होंने पाकिस्तान में पिंडी यानी विश्राम किया था। उनके नाम से फिर रावल पिंडी नगर बसा था। उन्होंने महर्षि अरविंद घोष के चिंतन आलोक में विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने, संयम और शांति के साथ नैतिक मूल्यों को बढ़ाए जाने का आह्वान किया।       सांसद  मदन राठौड़ ने भारतीय ज्ञान परंपरा की चर्चा करते हुए कहा कि भारत में आरम्भ से ही विज्ञान विकसित अवस्था में था। उन्होंने पुराणों की चर्चा करते हुए कहा कि उनमें जो उन्नत विमान, तकनीकी के किस्से कहानियां हैं, उनका आज वैज्ञानिक आधार दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान सोने की चिड़िया कहलाता था, इसलिए पाश्चात्य देश यहां आने के लिए प्रयत्नशील थे। ज्ञान किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, इसे भी हमारे देश ने विश्व को सिखाया।  इससे पहले राज्यपाल एवं अन्य अतिथियों ने कांफ्रेस के पोस्टर का विमोचन किया। पूर्णिमा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष  शशिकांत सिंधी ने शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

पन्ना पुलिस की बड़ी सफलता, त्वरित कार्रवाई से अपहृत युवक सकुशल बरामद

पन्ना पुलिस की त्वरित कार्रवाई से अपहृत युवक सकुशल दस्तयाब 10 लाख रुपये की फिरौती की मांग करने वाले आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश जारी पन्ना "देशभक्ति, जनसेवा" के मूल मंत्र के अनुरूप मध्यप्रदेश पुलिस ने पन्ना जिले में अपहरण के एक गंभीर प्रकरण में त्वरित कार्रवाई करते हुए अपहृत युवक को सकुशल दस्तयाब कर मानवीय संवेदनशीलता, तकनीकी दक्षता एवं प्रभावी पुलिसिंग का परिचय दिया है। विषम परिस्थितियों में पूरी रात चलाए गए सर्च ऑपरेशन के परिणामस्वरूप युवक को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। 27 जून की रात्रि लगभग 8:00 बजे थाना पवई क्षेत्र से सूचना प्राप्त हुई कि स्थानीय कपड़ा व्यापारी श्री राजेश कुमार डेंगरे के 20 वर्षीय पुत्र अंशुल उर्फ कान्हा का अज्ञात व्यक्तियों द्वारा अपहरण कर लिया गया है तथा उसकी रिहाई के लिए 10 लाख रुपये की फिरौती की मांग की जा रही है। सूचना मिलते ही थाना पवई पुलिस ने मामले की गंभीरता से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया। पुलिस अधीक्षक पन्ना श्रीमती निवेदिता नायडू के निर्देशन में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। साथ ही तकनीकी विश्लेषण एवं डिजिटल इनपुट के लिए साइबर सेल को तत्काल सक्रिय किया गया। पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर तंत्र एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के आधार पर संभावित स्थानों पर लगातार तलाश की। रात्रि के दौरान लगातार वर्षा, घने जंगल एवं दुर्गम मार्ग जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद पुलिस बल ने कई किलोमीटर तक पैदल सर्च अभियान संचालित किया। लगातार प्रयासों एवं सुनियोजित रणनीति के परिणामस्वरूप पुलिस टीम ने हथकुरी के समीप जंगल क्षेत्र से अपहृत युवक अंशुल उर्फ कान्हा को सकुशल दस्तयाब कर लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी अंधेरे का लाभ उठाकर मौके से फरार हो गए, जिनकी तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर लगातार दबिशें दी जा रही है। पुलिस द्वारा प्रकरण के सभी पहलुओं की गंभीरता एवं निष्पक्षता के साथ जांच की जा रही है। मामले में संलिप्त आरोपियों की पहचान कर ली गई है तथा उनकी शीघ्र गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं। मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा किसी भी गंभीर अपराध की सूचना पर त्वरित, प्रभावी एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सतत कार्यरत है।  

जनजातीय छात्रावासों के विद्यार्थियों को बढ़ी शिष्यवृत्ति, सरकार ने जारी किए नए आदेश

भोपाल  मध्यप्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग ने वर्ष 2026-27 में छात्रावास एवं आश्रमों में निवासरत विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति की दरों में वृद्धि करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों की बेहतर शिक्षा के लिए सतत‍निर्णय ले रही है। इसी क्रम में राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि अनुसूचित जनजाति के छात्रावास/आश्रमों में रहने वाले छात्र/छात्राओं की शिष्यवृत्ति की दरों को प्रत्येक वर्ष माह मार्च के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर निर्धारित कर माह जुलाई में छात्रावास / आश्रम प्रारंभ होने से प्रभावशील होगी। जारी आदेश के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर वर्ष 2026-27 के लिए शिष्यवृत्ति की नई दरें निर्धारित की गई हैं। अब छात्रावास एवं आश्रमों में रहने वाले बालक विद्यार्थियों को 1,720 रुपये प्रतिमाह तथा बालिका विद्यार्थियों को 1,770 रुपये प्रतिमाह शिष्यवृत्ति प्रदान की जाएगी।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का असर, सेवा सेतु पोर्टल बना जनता के लिए भरोसेमंद मंच

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन का असर, सेवा सेतु पोर्टल बना आमजन की उम्मीदों का मजबूत आधार घर बैठे मिला स्थायी जाति प्रमाण पत्र, समय और धन की हुई बचत; डिजिटल सेवाओं से रोजगार की राह हुई आसान, ग्रामीणों में बढ़ा शासन पर विश्वास रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल सेवा वितरण को नई दिशा मिल रही है। शासन की जनहितैषी सोच और तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा सेवा सेतु पोर्टल आज प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए भरोसेमंद माध्यम बन चुका है। इस पोर्टल के जरिए शासकीय सेवाएं अब घर बैठे सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रही हैं, जिससे आमजन का समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा शासन के प्रति विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है। रायगढ़ जिले की तहसील पुसौर के ग्राम भाठनपाली निवासी अजय कुमार प्रधान की सफलता की कहानी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की डिजिटल सुशासन की सोच को साकार करती है। लंबे समय से स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वे सरकारी कार्यालयों के लगातार चक्कर लगा रहे थे। बार-बार तहसील कार्यालय जाने से समय और आर्थिक संसाधनों की हानि हो रही थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आवश्यक प्रमाण पत्र समय पर प्राप्त नहीं हो पा रहा था। इसके कारण वे कई सरकारी नौकरियों में आवेदन करने से भी वंचित रह जाते थे। इसी दौरान उन्हें सेवा सेतु पोर्टल की जानकारी मिली। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन किया। पूरी प्रक्रिया बेहद सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक रही। निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका आवेदन स्वीकृत हुआ और उन्हें स्थायी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया। इस प्रमाण पत्र ने न केवल उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान किया, बल्कि रोजगार के नए अवसरों के द्वार भी खोल दिए। प्रमाण पत्र मिलने के बाद अजय कुमार प्रधान ने रोजगार सहायक के पद के लिए आवेदन किया। अब वे स्वयं सेवा सेतु पोर्टल का लाभ लेने के साथ-साथ अपने गांव के अन्य लोगों को भी जाति, आय, निवास सहित विभिन्न शासकीय प्रमाण पत्रों और सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेवा सेतु पोर्टल ने सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर समाप्त कर दिए हैं। अब घर बैठे आवेदन करना, समय पर सेवाएं प्राप्त करना और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार डिजिटल तकनीक के माध्यम से सुशासन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। सेवा सेतु पोर्टल इसी सोच का सशक्त परिणाम है, जिसने शासकीय सेवाओं को आमजन के द्वार तक पहुंचाकर प्रशासन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाया है। यह पहल न केवल नागरिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध करा रही है, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास का मजबूत सेतु भी बन रही है। अजय कुमार प्रधान की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन आधारित डिजिटल पहल ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। सेवा सेतु पोर्टल आज केवल एक ऑनलाइन मंच नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए सुविधा, विश्वास और सशक्तिकरण का माध्यम बन चुका है।

ओबीसी छात्रों के लिए मुफ्त कंप्यूटर प्रशिक्षण, 10 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन

 लखनऊ   उत्तर प्रदेश की योगी सरकार युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारपरक योजनाओं को नई दिशा मिली है। इसी क्रम में पिछड़ा वर्ग के युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई ओ लेवल एवं सीसीसी कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना युवाओं के लिए बड़ी सौगात बनकर सामने आई है। योगी सरकार ने इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दिया है। इच्छुक छात्र-छात्राएं 10 जुलाई 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट http://obccomputertraining.upsdc.gov.in पर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 1 अगस्त 2026 से प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से कराया जाता है प्रशिक्षण पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित इस योजना के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के युवक-युवतियों को 'ओ' लेवल और 'सीसीसी' कंप्यूटर प्रशिक्षण निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का लाभ उन्हीं ओबीसी छात्र-छात्राओं को मिलेगा, जिन्होंने इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया हो। साथ ही उनके माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय 1 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। इसके अलावा लाभार्थी किसी अन्य शिक्षण संस्थान से छात्रवृत्ति प्राप्त नहीं कर रहा हो। विशेष बात यह है कि प्रशिक्षण भारत सरकार की नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से कराया जाता है।  तीन महीने में पूरा होता है सीसीसी कोर्स 'ओ' लेवल कंप्यूटर प्रशिक्षण की अवधि एक वर्ष निर्धारित है,  जबकि 'सीसीसी' कोर्स तीन महीने में पूरा होता है। दोनों ही पाठ्यक्रम रोजगार की दृष्टि से बेहद उपयोगी माने जाते हैं। इस योजना के तहत 'ओ' लेवल प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 15,000 रुपये की राशि सरकार द्वारा वहन की जाती है। वहीं 'सीसीसी' प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 3,500 रुपये का भुगतान सीधे विभाग द्वारा किया जाता है। इससे छात्रों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ता है और वे पूरी तरह निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं। पिछले वर्ष हजारों छात्रों ने प्रशिक्षण किया प्राप्त वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत कुल 29,191 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें 22,407 छात्रों ने 'ओ' लेवल और 6,784 छात्रों ने 'सीसीसी' कोर्स पूरा किया है। प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 299 संस्थाएं इस योजना के तहत चयनित हैं। इनमें 52 संस्थान केवल ओ लेवल, 43 संस्थान केवल सीसीसी और 204 संस्थान दोनों कोर्स संचालित कर रहे हैं।  पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने सभी पात्र छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे 10 जुलाई 2026 तक विभाग की ओर से जारी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन जरूर करें। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल युवाओं को डिजिटल रूप से दक्ष बनाएगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और रोजगार के लिए सक्षम बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

रिम्स का औचक निरीक्षण, वित्त मंत्री और स्वास्थ्य सचिव ने व्यवस्था सुधारने के दिए निर्देश

रांची. झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह ने सोमवार दोपहर अचानक राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) पहुंचकर वहां की चिकित्सा व्यवस्था का औचक निरीक्षण किया. दोनों आलाधिकारी ठीक दोपहर 12 बजे रिम्स के ट्रॉमा बिल्डिंग पहुंचे और सेंट्रल इमरजेंसी के साथ-साथ क्रिटिकल केयर विभाग के आईसीयू (ICU) का भ्रमण किया. निरीक्षण के दौरान आईसीयू वार्ड में कई जगह खाली स्थान देखकर वित्त मंत्री और स्वास्थ्य सचिव ने रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिन्हा को आड़े हाथों लिया. उन्होंने सख्त लहजे में पूछा कि यहां बेड क्यों नहीं हैं? इस पर रिम्स प्रशासन द्वारा सफाई दी गई कि पुराने बेड टूट गए हैं और नए बेड की खरीद की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है. वेंटिलेटर की धीमी खरीद प्रक्रिया पर सचिव ने जताई नाराजगी बेड की कमी पर जवाब मिलने के तुरंत बाद स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह ने अस्पताल में जीवन रक्षक उपकरणों की उपलब्धता को लेकर रिम्स प्रबंधन से सवाल किए. उन्होंने पूछा कि अति आवश्यक वेंटिलेटरों की खरीदारी में अब तक इतनी देरी क्यों हुई है? रिम्स प्रबंधन ने इस पर अपनी दलील देते हुए बताया कि फिलहाल 13 नए वेंटिलेटरों की खरीद की कागजी प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा. इस दौरान मंत्री और सचिव को क्रिटिकल केयर विभाग के एक्सपेंशन को लेकर आगामी योजनाओं से भी अवगत कराया गया. अधिकारियों को बताया गया कि परिसर स्थित बीएसएनएल (BSNL) की पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर वहां जल्द ही 16 नए बेड स्थापित किए जा रहे हैं, जिस पर काम शुरू हो चुका है. 20 दिन में होगी गवर्निंग बॉडी की बैठक अस्पताल की बदहाली को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य सचिव ने रिम्स प्रशासन को तत्काल सभी अधूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का सख्त निर्देश दिया. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगले 15 से 20 दिनों के भीतर रिम्स गवर्निंग बॉडी (GB) की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक होने वाली है. उस बैठक से पहले अस्पताल की इन सभी बुनियादी कमियों और खामियों को हर हाल में दूर कर लिया जाना चाहिए. इसके बाद सचिव ने रिम्स के सभी विभागाध्यक्षों (HOD) के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की. उन्होंने साफ निर्देश दिया कि रिम्स परिसर के जितने भी जर्जर और अनुपयोगी भवन हैं, उन्हें अविलंब तोड़कर वहां नए और आधुनिक चिकित्सा भवनों का निर्माण कराया जाए. उन्होंने याद दिलाया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में रिम्स को राज्य भर में अग्रणी भूमिका निभानी है, इसलिए आंतरिक व्यवस्था में अमूल-चूल सुधार लाना अनिवार्य है. पलामू के एक ही परिवार के पांचवें सदस्य की मौत वित्त मंत्री और स्वास्थ्य सचिव करीब एक घंटे तक ट्रॉमा बिल्डिंग में रहे. इस दौरान उन्होंने एक दुखद मामले का भी संज्ञान लिया. रिम्स के क्रिटिकल आईसीयू वार्ड में भर्ती पलामू के एक ही परिवार के प्रभावित सदस्यों में से सोमवार को पांचवें मरीज की भी इलाज के दौरान मौत हो गई. वहीं, इसी परिवार की छठवीं महिला सदस्य की स्थिति भी अभी गंभीर बनी हुई है, जिनका इलाज वेंटिलेटर सपोर्ट पर चल रहा है. हालांकि, डॉक्टरों के मुताबिक महिला की तबीयत में पहले की तुलना में आंशिक सुधार देखा गया है, लेकिन एहतियातन उन्हें आईसीयू में ही रखा गया है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सोमवार को व्यक्तिगत रूप से पीड़ित परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया. उन्होंने डॉक्टरों की टीम को निर्देश दिया कि महिला को बचाने के लिए देश के बेहतरीन से बेहतरीन चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया जाए.

पंजाब में दर्दनाक हादसा, जालंधर-पठानकोट हाईवे पर दो कारें भिड़ीं, 4 लोगों की मौत

जालंधर. जालंधर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर किशनगढ़ के पास सोमवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे दो कारों की आमने-सामने टक्कर में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सड़क सुरक्षा फोर्स (एसएसएफ) के प्रभारी एएसआइ रणजीत सिंह ने बताया कि सुबह करीब साढ़े पांच बजे उन्हें सूचना मिली कि किशनगढ़ अड्डे से आगे एक ढाबे के सामने दो कारों की भीषण टक्कर हुई है, जिसमें चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है और पांच लोग घायल हैं। सूचना मिलते ही एसएसएफ की टीम मौके पर पहुंची। जांच में पता चला कि पीबी-07-सीए-1510 नंबर की एक मारुति बलेनो कार भोगपुर की ओर से जालंधर जा रही थी। किशनगढ़ अड्डा पार करने के बाद कार अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर पार कर दूसरी लेन में चली गई और सामने से आ रही उत्तर प्रदेश नंबर की क्रेटा से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बलेनो कार में सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान रुपिंदर सिंह पुत्र सुरिंदर सिंह, निवासी होशियारपुर, हरप्रीत कौर पत्नी रुपिंदर सिंह, अर्शदीप सिंह पुत्र रुपिंदर सिंह तथा संतोष कौर के रूप में हुई है। वहीं, क्रेटा कार में सवार पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने एसएसएफ टीम के पहुंचने से पहले ही उन्हें उपचार के लिए नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। घायलों की पहचान अलीना खान पुत्री अब्दुल सईद खान, अब्दुल सईद खान, परवीन खान पुत्र अब्दुल सईद खान, अब्दुल फैसल खान पुत्री अब्दुल सईद खान तथा मैनाल खान पुत्री अब्दुल सईद खान के रूप में हुई है। सभी घायल बरेली (उत्तर प्रदेश) के निवासी हैं।

संत कबीर महोत्सव में मुख्यमंत्री साय और राज्यपाल गहलोत ने किया वृक्षारोपण, सेवा और समरसता का दिया संदेश

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और कर्नाटक के राज्यपाल  थावरचंद गहलोत आज राजधानी रायपुर के सोनपैरी स्थित सद्गुरु कबीर आश्रम में कबीर जयंती के अवसर पर आयोजित संत कबीर महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने गुरु असंग देव का आशीर्वाद लेकर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। राज्यपाल  थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू ने आश्रम परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। गुरु असंग देव ने कहा कि संत कबीर ने समाज से पाखंड, कुरीतियों और आडंबर को समाप्त करने के लिए अवतार लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में आपसी प्रेम तथा संवाद कम होता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने सेवा, परमार्थ, गौसेवा, वृक्षारोपण और ग्राम विकास को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सेवा से ही सच्चा सुख और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। गुरु असंग देव ने कहा कि एक समय नक्सलवाद के कारण जिन क्षेत्रों में जाना कठिन था, वहां अब शांति स्थापित हो चुकी है और विकास की गंगा बह रही है। लाखों गरीबों के लिए आवास बन रहे हैं और प्रदेश विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल  थावरचंद गहलोत ने कहा कि संत कबीर ने सत्य, समरसता, मानव सेवा और सद्भाव का जो संदेश दिया, वह आज भी पूरे समाज और राष्ट्र के लिए पथप्रदर्शक है। उन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच और आडंबर से ऊपर उठकर मानव मात्र को प्रेम, सत्य और विवेक के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज जब समाज सामाजिक विभाजन और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब संत कबीर की वाणी पहले से अधिक प्रासंगिक है। राज्यपाल ने सोनपैरी कबीर आश्रम द्वारा शिक्षा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आश्रम राष्ट्र निर्माण की चेतना को सशक्त बनाते हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत कबीर की तपोभूमि और उनके अनुयायियों की पावन धरती है। उन्होंने कहा कि उनका बचपन कबीरपंथी समाज के बीच बीता है और संत कबीर की वाणी का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि संत कबीर ने अपना संपूर्ण जीवन समाज में फैली कुरीतियों, छुआछूत, जाति-पांति और आडंबर के विरुद्ध जनजागरण में समर्पित किया। उन्होंने निर्भीक होकर सत्य का साथ दिया और अपने सरल किंतु प्रभावशाली विचारों से समाज को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज भी उनकी शिक्षाएं समाज में प्रेम, भाईचारे और समरसता की प्रेरणा देती हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख आवासों की स्वीकृति मिली है तथा 10 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सुरक्षा बलों के साहस और केंद्र सरकार के सहयोग से शांति एवं विकास का नया दौर शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए पीएम जनमन योजना, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना, श्रीरामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना तथा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में लोगों को मिल रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार ने आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की है। उन्होंने लोगों से इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि तय समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि तीन माह के लिए बढ़ाई जाएगी, जिससे अधिक से अधिक उपभोक्ता सरचार्ज माफी और आकर्षक प्रावधानों का लाभ लेकर अपने लंबित बिजली बिलों का भुगतान कर सकेंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि संत कबीर की वाणी ने समाज को पाखंड, छुआछूत और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध जागृत किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने संत कबीर के मधुर व्यवहार, संयमित वाणी और समाज सुधार के संदेश को अपनाने का आह्वान किया। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं। संत कबीर ने ढोंग और आडंबर से दूर रहकर सत्य और सेवा का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। यदि उनके विचारों को जीवन में उतारा जाए तो समाज और राष्ट्र दोनों का कल्याण संभव है।

रायपुर में बेदखली अभियान पर बवाल, पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई, ग्रामीणों का विरोध

रायपुर. महीनों के उहापोह के बाद आखिरकार प्रशासन की माना क्षेत्र स्थित ग्राम नकटी में बेदखली कार्रवाई शुरू हो गई है. क्षेत्र में अवैध तरीके से बनाए गए मकानों को ढहाने के लिए आधी रात से जेसीबी के साथ करीबन हजार पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं. जानकारी के अनुसार, गांव के वार्ड 16 और 17 में ऐसे 48 अवैध मकान हैं, जिन्हें ढहाने के लिए राजस्व विभाग ने बेदखली का नोटिस चस्पा किया है. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है, इसलिए बेदखली की कार्रवाई की जा रही है. वहीं कार्रवाई का विरोध कर रहे ग्रामीणों का तर्क है कि वे इस जमीन पर सालों से रह रहे हैं. इनमें से कई मकान को पीएम आवास योजना के तहत बनाए गए हैं. बहरहाल, दावे और प्रतिदावे के बीच बेदखली कार्रवाई के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती से गांव में तनाव का माहौल देखने को मिल रहा है. प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ-साथ जिला प्रशासन ने नकटी के 75 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी शुरू कर दी है. एसडीएम ने बताया कि सभी परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में अस्थायी और स्थायी रूप से बसाने की व्यवस्था की जा रही है, आवंटन की प्रक्रिया भी जारी है.