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प्रदेशभर में धर्मकांटों की जांच अभियान, 18 जब्त, अनियमितताओं पर चार लाख रुपये के करीब जुर्माना

जयपुर उपभोक्ता मामलात मंत्री श्री सुमित गोदारा के निर्देशानुसार राज्य में निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा उपभोक्ताओं के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विधिक माप विज्ञान विभाग द्वारा 23 से 25 जून तक प्रदेशभर में धर्मकांटों (वे-ब्रिज) का विशेष सघन निरीक्षण अभियान चलाया गया।  अभियान के दौरान कुल 311 धर्मकांटों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में 179 संस्थानों पर विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर कार्रवाई करते हुए 3 लाख 99 हजार 500 रुपए का जुर्माना लगाया गया। वहीं गंभीर अनियमितताओं के मामलों में 18 धर्मकांटे भी जब्त किए गए।  निरीक्षण में 116 मामलों में बिना सत्यापन के धर्मकांटे संचालित पाए गए। इसके अलावा 98 मामलों में सत्यापन प्रमाण-पत्र प्रदर्शित नहीं किया गया, 48 मामलों में मानक बाट सत्यापित नहीं मिले, जबकि 27 संस्थानों पर अनिवार्य एक टन मानक भार उपलब्ध नहीं था। वहीं 2 मामलों में निर्धारित अधिकतम स्वीकार्य त्रुटि से अधिक वजन पाया गया, जिससे व्यापारिक लेन-देन की पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित होने की आशंका है।  जिला स्तर पर ब्यावर में सर्वाधिक 34 हजार 500, चूरू में 30 हजार, हनुमानगढ़ में 26 हजार, अलवर में 22 हजार 500 तथा अजमेर में 18 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। साथ ही अलवर जिले में सर्वाधिक 9 धर्मकांटे जब्त किए गए। विभाग की ओर से बताया कि व्यापारिक लेन-देन में उपयोग होने वाले सभी धर्मकांटों का समय पर सत्यापन कराना, सत्यापन प्रमाण-पत्र का सार्वजनिक प्रदर्शन करना तथा निर्धारित मानक भार उपलब्ध रखना अनिवार्य है। इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध विधिक माप विज्ञान अधिनियम एवं नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने सभी धर्मकांटा संचालकों से अपील की है कि वे अपने उपकरणों का समय पर सत्यापन कराएं, आवश्यक मानक भार उपलब्ध रखें तथा सभी वैधानिक प्रावधानों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित करें। विभाग द्वारा भविष्य में भी प्रदेशभर में ऐसे विशेष निरीक्षण अभियान नियमित रूप से संचालित किए जाएंगे, ताकि व्यापारिक गतिविधियों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और उपभोक्ताओं का विश्वास कायम रखा जा सके।

योगी सरकार की पहल से उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमियों का संरक्षण तेज, पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियां हो चुकी हैं अधिसूचित, 36 जिलों से नए प्रस्ताव मिले जल संरक्षण, पर्यावरण और जैव विविधता को बचाने के लिए सरकार चला रही विशेष अभियान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।      मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं। इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

गोमती नदी के उद्गम स्थल के विकास पर योगी सरकार का फोकस, ₹1.04 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी

योगी सरकार 1.04 करोड़ से संवारेगी गोमती नदी का उद्गम स्थल पर्यटन विभाग की पहल, पीलीभीत जिले में स्थित मां गोमती उद्गम स्थल पर विकसित होंगी पर्यटन सुविधाएं गोमती नदी की प्रदेश में 960 किमी. की है यात्रा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा सम्मान मां गोमती के उद्गम स्थल के विकास से खुलेगा पर्यटन का नया अध्याय: मंत्री जयवीर सिंह लखनऊ/पीलीभीत  उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा, नैमिषारण्य और विंध्य धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के व्यापक विकास के बाद अब प्रदेश सरकार ने जीवनदायिनी मां गोमती नदी के उद्गम स्थल को भी विश्वस्तरीय पर्यटन एवं आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में पीलीभीत जनपद के पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र की कलीनगर तहसील स्थित गोमती उद्गम स्थल के विकास के लिए पर्यटन विभाग ने 1.04 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की है। इसके तहत प्रथम चरण में 78 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन का नया आकर्षण बनेगा। करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नदियों के तटों पर हुआ है। प्रदेश की जीवनदायिनी एवं सांस्कृतिक आस्था की प्रतीक गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा ग्राम के समीप गोमत ताल (पूर्व नाम फुलहर झील) से होता है। सनातन परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित गोमती नदी प्रदेश के विशाल भूभाग को सिंचित करते हुए करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार है। उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा गोमती उद्गम स्थल को एक प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। पर्यटन आकर्षण के लिए होंगे कई काम परियोजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। इसके तहत लगभग 48.69 लाख रुपये की लागत से बहुउद्देशीय हॉल बनाया जाएगा, जबकि 13.44 लाख रुपये से आधुनिक शौचालय ब्लॉक और 9.45 लाख रुपये से शेड का निर्माण कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त इंटरलॉकिंग मार्ग, आकर्षक उद्यान एवं सौंदर्यीकरण, सोलर आधारित सुविधाओं, अन्य यात्री सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) को मिली है। धार्मिक विरासत को मिलेगा सम्मान गोमती नदी को सनातन परंपरा में विशेष सम्मान प्राप्त है। इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा क्षेत्र स्थित पौराणिक फुलहर झील (गोमत ताल) से होता है। लगभग 960 किलोमीटर की यात्रा करते हुए यह नदी पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर आदि जनपदों को जीवन प्रदान करती हुई अंततः गाजीपुर जिले में गंगा नदी में समाहित हो जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने गोमती नदी में स्नान कर पुण्य अर्जित किया था। वहीं नैमिषारण्य में 33 कोटि देवी-देवताओं की तपस्थली भी गोमती नदी के तट पर ही मानी जाती है। यही कारण है कि गोमती नदी प्रदेश की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की वाहक मानी जाती है। मां गोमती सनातन आस्था की प्रतीक मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अपनी प्राकृतिक धरोहरों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मां गोमती का उद्गम स्थल महज एक भौगोलिक बिंदु न होकर, हमारी सनातन आस्था और लोकजीवन का महत्वपूर्ण स्थल भी है। इसके समग्र विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। हमारा प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक पवित्र धरोहर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर सम्मानजनक स्थान दिलाया जाए।

यमुना जल परियोजना पर हरियाणा-राजस्थान में समझौता, राजस्थान को मिलेगा पेयजल

चंडीगढ़ केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में सोमवार को नई दिल्ली में यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के संबंध में हरियाणा सरकार और राजस्थान सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में हुए इस समझौते के अंतर्गत हरियाणा व राजस्थान के लोगों की पानी से जुड़ी लगभग तीन दशक पुरानी समस्या का समाधान हो गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए सहकारी संघवाद के मंत्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। दोनों राज्यों के बीच हुआ जल समझौता इस बात का उदाहरण है कि अगर राज्य सहकारी संघवाद की सोच को आगे बढ़ाएं तो तीन दशक पुरानी समस्या भी सरलता से सुलझ सकती है। समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइप लाइनों के जरिये राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। इन तीन पाइप लाइनों का व्यास 3.6 मीटर से भी अधिक होगा, जिनके माध्यम से राजस्थान और हरियाणा राज्यों के लोगों के लिए पेयजल की व्यवस्था होगी। अमित शाह ने कहा कि यह समझौता दोनों राज्यों के लिए विन-विन सिचुएशन का अच्छा उदाहरण है। समझौते में वित्तीय जिम्मेदारी, लागत साझीकरण, जल आवंटन और जल छोड़ने के प्रोटोकाल के साथ रखरखाव का बारीकी से ध्यान रखा गया है। हरियाणा, राजस्थान और विशेषकर केंद्रीय जल आयोग ने इस समझौते का जो प्रारूप बनाया है वह आने वाले कई दशकों तक विवादहीन समझौते के रूप में स्थापित रहेगा। समझौते के बाद राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में भी पीने का पानी पहुंचाने की व्यवस्था हो जाएगी। परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के जरिये राजस्थान के हिस्से का यमुना का पानी पहुंचाना है। इससे राज्य, अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बंटवारे पर 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा। इस परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। हथनीकुंड बैराज से राजस्थान तक बिछेगी पाइपलान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि यमुना जल परियोजना को लेकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में लगातार हरियाणा और राजस्थान के बीच बैठकें हुई। एमओयू के अंतर्गत हरियाणा में जुलाई और अक्टूबर के बीच जो वर्षा का सरप्लस पानी होता है, राजस्थान उसे पाइपलाइन के माध्यम से ले जाकर पेयजल के लिए उपयोग करेगा। इस परियोजना के अंतर्गत हथनीकुंड बैराज से राजस्थान तक पाइपलाइन बिछाई जाएगी और सरप्लस पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। बैठक में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी समेत राजस्थान व केंद्र सरकार के अधिकारी मौजूद रहे।

इन्फ्लुएंसर मीट से चमकेगा छत्तीसगढ़ पर्यटन, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दुनिया देखेगी प्रदेश की खूबसूरती

इन्फ्लुएंसर मीट से छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान, डिजिटल मंचों पर गूंजेंगी प्रदेश की खूबसूरती पाँच दिवसीय फेम टूर में मैनपाट, सतरेंगा और रामगढ़ महोत्सव का अनुभव ले रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय वैभव रायपुर डिजिटल माध्यमों के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड द्वारा 26 से 30 जून 2026 तक पाँच दिवसीय "इन्फ्लुएंसर मीट एवं फेमिलराइजेशन (फेम) टूर" का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित प्रमुख सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि उनके माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार देश और दुनिया तक पहुंच सके। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मैनपाट, प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सतरेंगा तथा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के रामगढ़ महोत्सव का भ्रमण कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान इन्फ्लुएंसर्स प्राकृतिक छटा, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक लोककलाओं, पर्यटन सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही वे विभिन्न डिजिटल मंचों के लिए आकर्षक फोटो, वीडियो और रचनात्मक सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की विशेषताएं लाखों दर्शकों तक पहुंचेंगी। मैनपाट अपनी मनोहारी वादियों, तिब्बती संस्कृति, झरनों और प्राकृतिक आकर्षणों के कारण प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान रखता है। वहीं सतरेंगा इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ गंतव्य है, जहां विशाल जलाशय, प्राकृतिक वातावरण और रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके साथ ही रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागी छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और ऐतिहासिक विरासत से भी रूबरू हो रहे हैं। यह आयोजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा के नेतृत्व, प्रबंध संचालक विवेक आचार्य के सक्षम संचालन तथा उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड की टीम द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है। आयोजन का अंतिम दिन 30 जून को निर्धारित है। डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर्यटन प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में इस इन्फ्लुएंसर मीट के माध्यम से तैयार की जा रही डिजिटल सामग्री छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को देश और दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता और दृश्यता बढ़ेगी, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, हस्तशिल्प, लोककला, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।  इस प्रकार के नवाचार आधारित प्रचार अभियान राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आगामी समय में भी पर्यटन के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे अभिनव प्रयास निरंतर किए जाते रहेंगे।

रामगढ़ महोत्सव: कवि सम्मेलन और रामलीला ने बांधा समां

रायपुर.  सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के प्रथम दिवस में संस्कृति, साहित्य और लोककला का अद्भुत संगम देखने को मिला। महोत्सव में प्रस्तुत विविध सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। नई दिल्ली के ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य रामलीला, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय उदयपुर की छात्राओं द्वारा 'जटायु मोक्ष' की भावपूर्ण नृत्य-नाटिका तथा कवि सम्मेलन कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे। नई दिल्ली से आए ख्याति प्राप्त कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का अत्यंत प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति कराई। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता को सशक्त अभिनय, प्रभावी संवाद, आकर्षक वेशभूषा, भव्य मंच सज्जा और मधुर संगीत के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और दर्शक कलाकारों के अभिनय से अभिभूत नजर आए। इसी क्रम में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, उदयपुर की बालिकाओं ने 'जटायु मोक्ष' पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। भगवान श्रीराम और जटायु के प्रसंग को बालिकाओं ने अत्यंत संवेदनशील एवं प्रभावशाली अभिनय तथा नृत्य के माध्यम से साकार किया। भावपूर्ण अभिव्यक्ति, उत्कृष्ट मंच संचालन, पारंपरिक वेशभूषा और सुमधुर संगीत के समन्वय ने प्रस्तुति को अत्यंत जीवंत बना दिया। बालिकाओं की इस प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों की आंखें नम कर दीं और पूरा सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा। उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास ने सभी का मन मोह लिया। महोत्सव का एक अन्य प्रमुख आकर्षण कवि सम्मेलन रहा, जिसमें प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओज, वीर, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य एवं समसामयिक विषयों पर आधारित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया, वहीं हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया। कवियों की दमदार प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। इसके अतिरिक्त लोकगीत, सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य, स्वागत गीत एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी महोत्सव को भव्यता प्रदान की। स्थानीय एवं क्षेत्रीय कलाकारों ने सरगुजा की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपनी कला का उत्कृष्ट परिचय दिया। रामगढ़ महोत्सव का उद्देश्य सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत एवं साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से जोड़ना है। प्रथम दिवस के भव्य और सफल आयोजन ने इस उद्देश्य को सार्थक रूप से अभिव्यक्त किया।

पेंशन बढ़ाने की मांग पर MP हाईकोर्ट का फैसला, एरियर और अतिरिक्त वेतन वृद्धि देने से किया इनकार

जबलपुर  हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने वेतन पुनरीक्षण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वेतन पुनरीक्षण के समय कर्मचारियों द्वारा चुना गया विकल्प बाद में बदला नहीं जा सकता। कोर्ट ने अतिरिक्त वेतनवृद्धि के आधार पर पेंशन और एरियर बढ़ाने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि स्वेच्छा से संशोधित वेतनमान स्वीकार करने वाला कर्मचारी बाद में पुरानी वेतन व्यवस्था का लाभ नहीं मांग सकता। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका निरस्त मामले में पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिका में अतिरिक्त इंक्रीमेंट को आधार बनाकर पेंशन के पुनर्निर्धारण और एरियर भुगतान की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिका को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम, 2009 के नियम-नौ में कर्मचारियों को दो स्पष्ट विकल्प दिए गए हैं। संशोधित वेतनमान स्वीकार करने के बाद पुरानी व्यवस्था का लाभ नहीं युगलपीठ ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने एक जनवरी, 2006 से संशोधित वेतनमान लागू करने का विकल्प चुना है तो वह बाद में पुरानी वेतन व्यवस्था में अतिरिक्त इंक्रीमेंट जोड़कर पेंशन पुनर्निर्धारण की मांग नहीं कर सकता। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नियम कर्मचारियों को स्वतंत्र रूप से विकल्प चुनने का अधिकार देते हैं, लेकिन विकल्प चुनने के बाद उसके परिणामों से पीछे हटने की अनुमति नहीं दी जा सकती। नियम-नौ को कोर्ट ने माना वैध हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम, 2009 के नियम-नौ को वैध ठहराते हुए कहा कि कर्मचारी एक साथ दो वित्तीय लाभ का दावा नहीं कर सकते। इसी आधार पर कोर्ट ने पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया।

ओलंपिक 2028 में क्रिकेट की वापसी, पुरुष और महिला वर्ग में छह-छह टीमें खेलेंगी

नई दिल्ल  इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) और इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ने सोमवार को लास एंजिलिस-2028 ओलंपिक के क्वालिफिकेशन की घोषणा कर दी है। इन खेलों के साथ ही क्रिकेट की ओलंपिक में लंबे अंतराल बाद वापसी हो रही है। इसके लिए पहली बार आईसीसी ओलंपिक क्वालिफायर का आयोजन किया जाएगा। आईसीसी ने बयान जारी कर बताया है कि पुरुष और महिला दोनों वर्ग में छह-छह देश हिस्सा लेंगे। इसमें अफ्रीका, एशिया, यूरोप और ओसनिया को निश्चित तौर पर जगह मिलेगी। ऐसा होगा क्वालिफिकेशन हर इवेंट के लिए पांच क्वालिफिकेशन जगह आईसीसी के मौजूदा टूर्नामेंट्स और टी20 रैंकिंग के आधार पर तय की जाएंगी और ये मौजूदा एफटीपी के हिसाब से होगा जो पहले से ही मंजूर किया जा चुका है। वहीं छठे और आखिरी स्थान का फैसला नए आईसीसी ओलंपिक क्वालिफायर से होगा जो 2027 में होगा। इस समय खेले जा रहा आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप-2026 से एक स्थान पक्का हो गया है। ऑस्ट्रेलिया, ग्रेट ब्रिटेन (इंग्लैंड), भारत और साउथ अफ्रीका ने एशिया, यूरोप, अफ्रीका और ओसनिया से उच्च रैंकिंग के आधार पर क्वालिफाई कर लिया है। ये जगह एक उपमहाद्वीप के आधार पर तय हुई हैं। वेस्टइंडीज को नहीं मिलेगा मौका इन खेलों में वेस्टइंडीज की टीम दिखाई नहीं देगी और न ही उसे कोटा मिलेगा क्योंकि वह एक ऐसा आईसीसी सदस्य है जिसमें कई कैरिबियन देश हैं जो आईओसी से नेशनल ओलंपिक कमेटी (एनओसी) के तौर पर मान्यता प्राप्त नहीं हैं। अगर उनकी पुरुष और महिला टीम 31 दिसंबर 2026 तक रैंकिंग में शीर्ष आठ टीमों में शामिल रहती है तो इसके लिए अलग से एक कैरिबियन क्वालिफायर इवेंट कराया जाएगा जिससे ये तय होगा कि कौनसी एनओसी आईसीसी ओलंपिक क्वालिफायर में हिस्सा लेगी। जहां तक अमेरिका की बात है तो वह बतौर मेजबान के तौर पर क्वालिफाई करेगा और पुरुष तथा महिला इवेंट दोनों में खेलेगा। अगर अमेरिका महिला टीम सभी पैमानों पर खरी नहीं उतरती है तो फिर ये जगह क्वालिफाई नहीं कर पाए देशो में एक मार्च 2027 तक सबसे ऊंची रैंकिंग रखने वाली टीम को दी जाएगी। अमेरिका की पुरुष टीम के साथ भी यही होगा बस रैंकिंग की तारीख एक मार्च की जगह 31 दिसंबर 2026 होगी। पुरुष वर्ग में बाकी की जगह आईसीसी टी20 रैंकिंग के हिसाब से तय होंगी। दोनों वर्गों में आखिरी स्थान आईसीसी ओलंपिक क्वालिफायर 2027 से तय होगा जिसमें आठ देश हिस्सा लेगे। इस टूर्नामेंट की तारीखें जल्दी ही सामने आएंगी। ऐसा होगा फॉर्मेट आईसीसी ने बताया है कि जो देश ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करेंगे उनको तीन-तीन टीमों के दो ग्रुप में बांटा जाएगा। हर टीम एक-दूसरे के खिलाफ एक-एक मैच खेलेगी। वहीं दो मैच दूसरे ग्रुप की उन टीमों से खेलेगी जो समान स्थान पर नहीं होंगी। टॉप-2 टीमें गोल्ड और सिल्वर के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगी। वहीं तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमें ब्रॉन्ज मेडल के लिए खेलेंगी। पुरुष और महिला वर्ग में मिलाकर कुल 28 मैच खेले जाएंगे। ये सभी मैच पोमोना में क्रिकेट के लिए बनाए गए खास स्टेडियम में होंगे।

सिपाही भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी का खुलासा, बिहार में 2 वीक्षक गिरफ्तार, 3 के खिलाफ FIR

हाजीपुर. केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती), बिहार, पटना द्वारा बिहार पुलिस, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, बिहार पुलिस दूरसंचार (वितंतु) तथा तकनीकी अराजपत्रित संवर्ग में सिपाही (प्रचालक) पदों पर नियुक्ति के लिए 28 जून को आयोजित लिखित परीक्षा में बड़ी धांधली पकड़ी गई। नोबेल क्रिएटिव एकैडमी वासुदेवपुर चपुता केंद्र पर दो वीक्षक संदिग्ध गतिविधि करते पकड़े गए। मामले में स्टेटिक दंडाधिकारी ने केंद्र अधीक्षक सहित तीन के विरुद्ध काजीपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। हाजीपुर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सह स्टेटिक दंडाधिकारी सुशील कुमार ने वीक्षक मुकुल कुमार, सचिन कुमार एवं केंद्र अधीक्षक डॉ. आराधना के विरुद्ध काजीपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस प्राथमिकी के आधार पर जांच में जुट गई है।   कमरा नंबर-1 में पकड़ी गई धांधली प्राथमिकी के अनुसार 28 जून को 12:00 से 02:00 बजे तक एकल पाली में परीक्षा आयोजित थी। परीक्षा समाप्ति के बाद स्टेटिक दंडाधिकारी सुशील कुमार, जोनल दंडाधिकारी सह वरीय उप समाहर्ता तनुजा एवं नगर थाना के पुलिस अवर निरीक्षक कुमार प्रमोद सिंह जब कमरा संख्या-1 में पहुंचे तो दो वीक्षकों को संदिग्ध गतिविधि करते देखा। पूछताछ में वीक्षकों ने अपना नाम मुकुल कुमार एवं सचिन कुमार बताया।   वीक्षक के हाथ में मिला 1 से 100 तक का सॉल्वड आंसर मुकुल कुमार के हाथ में एक कागज का टुकड़ा मिला, जिस पर क्रमांक 1 से 100 तक उत्तर लिखा था। प्रत्येक क्रमांक के सामने 1-A, 2-A, 3-B, 4-B से लेकर 99-B, 100-C तक लिखा हुआ पाया गया। उक्त उत्तर पत्र को जब्त कर लिया गया।  केंद्र अधीक्षक ने वीक्षकों को भगाया इसी दौरान केंद्र अधीक्षक डॉ. आराधना भी कमरे में पहुंचीं। दोनों वीक्षकों को नोवेल क्रिएटिव एकेडमी के कार्यालय में बैठाकर पूछताछ शुरू की गई। इस बीच केंद्र अधीक्षक ने अधिकारियों से बकझक करते हुए दोनों वीक्षकों को भगा दिया और कहा कि जरूरत पड़ने पर बुला दिया जाएगा। बार-बार कहने पर भी केंद्र अधीक्षक ने वीक्षकों को नहीं बुलाया। प्राथमिकी दर्ज कराने से किया इनकार, मिलीभगत का आरोप स्टेटिक दंडाधिकारी के अनुसार, वीक्षक के पास से प्रश्न पत्र के हल जैसी आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जिम्मेदारी केंद्र अधीक्षक की थी, लेकिन उन्होंने थाना जाकर प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया और घर वापस चली गईं। कई बार फोन करने पर भी उन्होंने वीक्षक के विरुद्ध कार्रवाई से इनकार किया। इससे स्पष्ट है कि वीक्षकों की संदिग्ध गतिविधि में केंद्र अधीक्षक की मिलीभगत है। मुकुल कुमार, सचिन कुमार और केंद्र अधीक्षक डॉ. आराधना सहित अन्य के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

छत्तीसगढ़ के 813 हज यात्रियों की सफल वापसी, राज्य हज कमेटी ने किया भव्य स्वागत

रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य से हज कमेटी के माध्यम से हज यात्रा पर गए सभी हज यात्री हज की इबादत सफलतापूर्वक पूर्ण कर सकुशल स्वदेश लौट आए हैं । राज्य के हाजियों का अंतिम जत्था आज मुंबई पहुंचा । मुंबई में एयरपोर्ट पर छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्जा एजाज़ बेग ने अगवानी करते हुए समस्त हाजियों की गुलपोशी की । छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने आज जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि, हज 2026 के लिए राज्य गठन उपरांत से अब तक की सर्वाधिक संख्या में राज्य के 29 जिलों से हज यात्री प्रस्थान किये  कुल 813 हज यात्रियों की स्वदेश वापसी पूर्ण हो गई है। उन्होंने बताया कि, इस वर्ष राज्य से 417 पुरुष एवं 396 महिला हज यात्रियों ने हज 2026 की सआदत  हासिल की। राज्य के हज यात्रियों द्वारा चुने गये विकल्प अनुसार मुम्बई ईम्बारकेशन प्वाइंट से 451, नागपुर से 290, दिल्ली से 14, अहमदाबाद से 02, बैंगलोर से 06, हैदराबाद से 42, जयपुर से 01, लखनऊ से 05 एवं कोलकाता से 02 हाजियों की सकुशल स्वदेश वापसी संपन्न हुई। राज्य के हज यात्रियों का मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट पर आज अंतिम जत्था दिनांक 29/06/2026 को मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट पहुंचा। हज यात्रियों की वापसी के अवसर पर राज्य हज कमेटी द्वारा हाजियों का एयरपोर्ट में गुलपोशी से इस्तकबाल किया गया एवं लगेज उपरांत प्रत्येक हाजी को पवित्र जल ज़म ज़म उपलब्ध कराया गया।  सभी हाजियो ने राज्य हज कमेटी के द्वारा की गई बेहतरीन व्यवस्था के लिए देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी,प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी, डॉ. श्याम बिहारी जायसवाल कैबिनेट मंत्री छ.ग.शासन का आभार व्यक्त किया। हज कमेटी के चेयरमैन बेग ने बताया कि, हज यात्रियों की सुविधाओं में वृद्धि करते हुए हज कमेटी द्वारा हज 2026 के हज यात्रियों को, 20 दिवस शाॅर्ट हज पैकेज, ऑनलाइन डाक्यूमेंट अपलोडिंग, पासपोर्ट जमा नहीं करने की सुविधा, प्रत्येक जिले में स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीकाकरण की सुविधा, संभाग स्तरीय विशेष हज प्रशिक्षण की सुविधा,  हज के दौरान बुलेट एवं मेट्रो ट्रेन से यात्रा की सुविधा, मीना में प्रत्येक हाजी का नाम एवं कवर नंबर युक्त सोफा कम बेड की सुविधा  उपलब्ध कराई गई जिससे हज यात्रियों की यात्रा  आरामदायक रही। राज्य के  हज यात्रियों के मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट के अंतिम जत्थे की वापसी के अवसर पर आज छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग, हज कमेटी के सदस्य मौलाना अमीर बेग, कार्यपालन अधिकारी/सचिव डॉ. खुशबू उस्मान उपस्थित रहें।