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फडणवीस-उद्धव की मुलाकात पर शिंदे का तंज, बोले ‘चालाक दोस्त से रहें सावधान’

 मुंबई  महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय अचानक सरगर्मी बढ़ गई, जब दो धुर विरोधी नेता एक ही फ्लाइट में एक साथ सफर करते नजर आएं। दोनों नेता मुंबई से नागपुर जा रही एक फ्लाइट में बैठे थे। सीएम देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे की इस हवाई यात्रा खबरों पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का रिएक्शन आया है। दरअसल, शिंदे से जब फडणवीस और उद्धव के एक ही विमान में सफर करने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस इतने समझदार हैं कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि चालाक और षड्यंत्रकारी दोस्त कितना खतरनाक हो सकता है। 2019 चुनाव को लेकर क्या कहा? एकनाथ शिंदे ने 2019 चुनाव की ओर इशारा करते हुए बोले कि जब भाजपा और तत्कालीन अविभाजित शिवसेना ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव एक साथ लड़ा था, लेकिन बाद में ठाकरे द्वारा कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार बनाने के बाद वे अलग हो गए थे। आने वाले दिनों में पता चलेगा परिणाम ठाकरे से उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के साथ एक ही विमान में यात्रा करने के बारे में पूछा गया, तो शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने कहा कि दोनों के बीच उच्च स्तरीय चर्चा हुई थी। वहीं जब उनसे बातचीत के परिणाम के बारे में पूछा गया, तो ठाकरे ने कहा कि आने वाले दिनों में इसका परिणाम पता चल जाएगा, जिससे राजनीतिक चर्चाओं को और हवा मिली। हालांकि, भाजपा ने बैठक के किसी भी राजनीतिक महत्व को खारिज करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विभिन्न दलों के नेता अक्सर सौहार्दपूर्ण व्यक्तिगत संबंध साझा करते हैं।

निवेशकों के लिए अहम रहेगा नया सप्ताह, भारत-अमेरिका ट्रेड डील और आर्थिक आंकड़ों पर टिकी बाजार की नजर

 नई दिल्ली  भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होने वाला है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील, कच्चे तेल की कीमत, एफआईआई का रुझान और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से शेयर बाजार की चाल निर्धारित होगी। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अगले हफ्ते निवेशकों की निगाहें रहेंगी। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा था कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। उनका यह बयान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात के बाद आया था। दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत होने की उम्मीद इस प्रस्तावित समझौते से दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत होने की उम्मीद है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसकी वजह ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट पर मालवाहक जहाज को निशाना बनाना था। हालांकि, हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमत में बड़ी गिरावट देखने को मिली है और ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर के आसपास बना हुआ है। घरेलू आर्थिक डेटा भी बाजार की चाल को प्रभावित करेगा। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट का डेटा आएगा 29 जून को इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट का डेटा जारी होगा। 30 जून को मई का राजकोषीय घाटे और व्यापार संतुलन, 1 जुलाई को जीएसटी, ऑटो सेल्स एवं मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और 2 जुलाई को सर्विसेज और कंपोजिट पीएमआई और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े आएगा। बीता हफ्ता शेयर बाजार के लिए कैसा रहा? इस हफ्ते सेंसेक्स 0.39 प्रतिशत बढ़कर 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,056 पर बंद हुआ। इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल की कम कीमतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में सुधार के संकेतों के कारण इस हफ्ते भारतीय रुपया मजबूत हुआ। हालांकि, निवेशक यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बदलाव की संभावना को लेकर सतर्क बने रहे, क्योंकि इससे ग्लोबल कैपिटल फ्लो पर असर पड़ सकता है।  

अयोध्या पर बयान के बाद योगी का पलटवार, बोले- मथुरा पर रुख साफ करें अखिलेश यादव

लखनऊ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव से श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। योगी ने अखिलेश को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह धार्मिक बनने का प्रयास कर रहे हैं तो अब उन्हें मथुरा के बारे में भी बोलना चाहिए। अखिलेश के अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाने के बयान सीएम योगी ने कहा, मुल्ला-मौलवियों के सामने घुटने टेकने वले अयोध्या को क्या धार्मिक नगरी बनाएंगे?वह पहले आप अपना इतिहास देखें। अखिलेश ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी को लेकर जारी जांच के बीच शनिवार को कहा था कि लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है और अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह अयोध्या को एक ‘बेमिसाल’ धार्मिक व पवित्र नगरी के रूप में विकसित करेंगे। सपा प्रमुख पर सीएम योगी का तंज योगी ने हाथरस में एक सभा को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख का नाम लेते हुए तंज कसा, ‘अखिलेश जी, अयोध्या को तो राम भक्तों ने संवार दिया। आप मथुरा की बात करिए। अगर सचमुच अपने आपको धार्मिक कहलाने का प्रयास कर रहे हो तो मथुरा-वृंदावन पर खुलकर बोलिए, श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर खुलकर बोलिए। यह भी कहिए कि श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की तर्ज पर ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति का अभियान चलना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि को भी सम्मान मिलना चाहिए। हमारी सरकार सुविधाएं उपलब्ध करा रही है लेकिन आपमें (अखिलेश में) हिम्मत नहीं है, क्योंकि आपने एक वर्ग के सामने घुटने टेकने के अलावा प्रदेश के विकास के लिए कोई एजेंडा नहीं रखा है।’ अयोध्या अपनी पहचान के लिए आप पर मोहताज नहीं योगी ने जोर देकर कहा, 'बात अयोध्या, मथुरा और काशी के उत्थान तथा उनकी पौराणिक पहचान को सुदृढ़ करने की होनी चाहिए। धूल झोंकने का काम मत करिए। अयोध्या अपनी पहचान के लिए आप पर मोहताज नहीं है।' उन्होंने कहा, 'अयोध्या की अपनी पहचान है और उसने दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।' मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अखिलेश यादव एक बयान में कह रहे थे कि उनकी सरकार आएगी तो अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाएगी। अरे, आप क्या धार्मिक नगरी बनाएंगे? अपना इतिहास देखिए। राम भक्तों पर गोली आपके ही लोगों ने चलाई थी। आपकी ही समाजवादी पार्टी की सरकार ने गोली चलवाई थी।’ जेलों में जन्माष्टमी के आयोजन पर सपा सरकार ने लगाई थी रोक सीएम योगी ने कहा, 'आप (अखिलेश) भूल गए कि आपने थानों और जेलों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन तक को रोक दिया था। कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था। जब हमारे जनप्रतिनिधि कह रहे थे कि हाथरस में 22 से अधिक मंदिरों का सौंदर्यीकरण हुआ तो क्या यह सपा शासन में संभव था? उनके समय में यह संभव नहीं था।' पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को आजमगढ़ में एक विवाह समारोह में शामिल होने के बाद पत्रकारों से कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी निंदनीय और चिंता का विषय है। अखिलेश ने कहा, 'दान में गबन की खबरों के बाद सरकार को दबाव में आकर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करना पड़ा। हालांकि, इससे यह सवाल उठता है कि एसआईटी की रिपोर्ट एक खास व्यक्ति को ही क्यों सौंपी गई है।'

शालू जिंदल को मिला ‘CSR Visionary Leader of the Year’ सम्मान, सामाजिक सरोकारों में उत्कृष्ट योगदान का मिला सम्मान

 शालू जिन्दल को 'सीएसआर विजनरी लीडर ऑफ द ईयर' का सम्मान नई दिल्ली/रायपुर  जिन्दल फाउंडेशन की चेयरपर्सन श्रीमती शालू जिन्दल को सामाजिक विकास के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट नेतृत्व और अनुकरणीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित 'सीएसआर विजनरी लीडर ऑफ द ईयर' अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान नई दिल्ली के एयरोसिटी स्थित होटल प्राइड प्लाजा में 'द ब्रेनालिटिक्स' द्वारा हाल ही में आयोजित '7वें भारत सीएसआर एंड सस्टेनेबिलिटी समिट एंड अवार्ड्स 2026' में प्रदान किया गया। यह सम्मान देश भर में विभिन्न समुदायों का जीवन स्तर सुधारने और उनके कल्याण के लिए जिन्दल फाउंडेशन के माध्यम से श्रीमती शालू जिन्दल द्वारा किये गए दूरदर्शी और समर्पित प्रयासों की कड़ी में मील का एक पत्थर है। उनके कुशल मार्गदर्शन में फाउंडेशन ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, आजीविका, जल और स्वच्छता, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, पर्यावरणीय विकास, कला व संस्कृति और सामाजिक उत्थान जैसे अनेक क्षेत्रों में अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई है। इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्रीमती शालू जिन्दल ने इस अवार्ड को फाउंडेशन की सेवा यात्रा से जुड़े सहयोगियों, साझेदारों और टीम के सामूहिक प्रयासों और उनके समर्पण का सम्मान बताया, जो सामाजिक उत्थान के पवित्र प्रयासों में निरंतर योगदान कर रहे हैं। जिन्दल फाउंडेशन के बारे में – जिन्दल स्टील की सामाजिक सेवा शाखा 'जिन्दल फाउंडेशन' देशभर में लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और समाज में समान अवसरों व खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, बुनियादी ढांचे के विकास, पर्यावरण संरक्षण, खेल तथा कला एवं संस्कृति जैसे विविध क्षेत्रों में जनकल्याणकारी पहल के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

चेन्नई से दिल्ली तक बवाल: के. वेंकट नारायण की नियुक्ति पर विपक्ष ने उठाए सवाल

चेन्नई तमिलनाडु सरकार के एक फैसले ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कारोबारी और फिल्म प्रोड्यूसर के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में तमिलनाडु का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया है। इस पद को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। विपक्ष ने इस नियुक्ति को लेकर सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है। एक साल के लिए बनाया गया नया पद राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, यह पद फिलहाल एक साल के लिए बनाया गया है। मुख्य सचिव एम. साई कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी किया। नियुक्ति की बाकी शर्तों की घोषणा बाद में की जाएगी। क्या होता है स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव का काम? नई दिल्ली में तमिलनाडु के स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव की जिम्मेदारी केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच तालमेल बनाने की होती है। इस पद पर बैठा व्यक्ति मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की बैठकों का समन्वय करता है, केंद्र की योजनाओं और फंडिंग पर नजर रखता है, नीति से जुड़े मामलों की निगरानी करता है और संसद सत्र के दौरान राज्य के सांसदों के साथ समन्वय बनाने में मदद करता है। अब तक इस अहम पद पर आमतौर पर अनुभवी राजनेताओं की नियुक्ति होती रही है। कौन हैं के. वेंकट नारायण? के. वेंकट नारायण बेंगलुरु स्थित KVN ग्रुप के चेयरमैन हैं। उनकी कंपनी रियल एस्टेट और एंटरटेनमेंट सेक्टर में काम करती है। वह पहले प्रेस्टीज ग्रुप के CEO भी रह चुके हैं। साल 2020 में उन्होंने KVN प्रोडक्शंस की शुरुआत की और अब वही कंपनी मुख्यमंत्री विजय की आखिरी फिल्म 'जना नायकन' को प्रोड्यूस कर रही है। माना जा रहा है कि राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले यह विजय की अंतिम फिल्म होगी। विपक्ष ने उठाए सवाल इस नियुक्ति को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। DMK के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने कहा कि तमिलनाडु के हितों की रक्षा करने वाले इतने अहम पद पर एक फिल्म प्रोड्यूसर की नियुक्ति करना उस पद की गरिमा को कम करता है। वहीं BJP के तमिलनाडु अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने सवाल उठाया कि कर्नाटक से करीबी संबंध रखने वाला व्यक्ति दिल्ली में तमिलनाडु का प्रभावी प्रतिनिधित्व कैसे करेगा। उन्होंने इसे राज्य के लोगों के साथ "बड़ा विश्वासघात" बताया। AIADMK ने आरोप लगाया कि सरकार कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के इशारों पर काम कर रही है, जबकि AMMK प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने कहा कि सरकार प्रशासनिक योग्यता के बजाय निजी करीबी लोगों को बड़े पद दे रही है। TVK ने किया बचाव विजय की पार्टी TVK ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि वेंकट नारायण ने फिल्म 'जना नायकन' के निर्माण के दौरान विजय का मुश्किल समय में साथ दिया था और यह नियुक्ति उसी सहयोग के प्रति आभार जताने का तरीका है। पार्टी का यह भी कहना है कि वेंकट नारायण को बड़े कॉर्पोरेट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट संभालने का लंबा अनुभव है, इसलिए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। पहले ज्योतिषी, अब प्रोड्यूसर… बढ़ा विवाद यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री विजय अपने करीबी लोगों की नियुक्तियों को लेकर विवादों में आए हैं। इससे पहले उनके लंबे समय से मैनेजर रहे जगदीश पलानीस्वामी को प्राइवेट सेक्रेटरी (पॉलिटिकल) बनाया गया था। वहीं ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल को ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (पॉलिटिकल) (OSD) नियुक्त किया गया था, लेकिन भारी आलोचना के बाद सरकार को वह फैसला वापस लेना पड़ा।

अफ्रीका का सबसे अमीर देश सेशेल्स: पर्यटन और निवेश से बनी समृद्धि की कहानी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन दिनी दौरे पर सेशेल्स पहुंच गए हैं. वे वहां 50 वें राष्ट्रीय दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में 29 जून को शामिल होंगे. बीते शनिवार को सेशेल्स की धरती पर उतरते ही वहां के राष्ट्रपति डॉ पैट्रिक हर्मिनी ने उनका स्वागत किया. पीएम मोदी की इस यात्रा के बहाने सेशेल्स और भारत के रिश्ते के बारे में जानेंगे. यह भी कि आखिर यह छोटा सा द्वीपीय देश कैसे अफ्रीका का सबसे अमीर देश बन गया? सेशेल्स एक छोटा द्वीपीय देश है. यह हिन्द महासागर में स्थित है. आबादी महज 1.35 लाख है. क्षेत्रफल लगभग 450 वर्ग किलो मीटर है. यह 115 द्वीपों का एक समूह है. जमीन बहुत कम है. फिर भी यह अफ्रीका का सबसे अमीर देश माना जाता है. हैलो सेफ प्रॉसपेरिटी इंडेक्स 2026 के मुताबिक सेशेल्स अफ्रीका के सबसे अमीर देशों की सूची में टॉप पर है. उसे 98.09 अंक मिले हैं. मॉरीशस और अल्जीरिया इस सूची में क्रमशः दूसरे एवं तीसरे नंबर पर हैं. एजेंसी ने रैंकिंग तय करने में केवल प्रति व्यक्ति आय को महत्व नहीं दिया है. कुल पांच मानकों के आधार पर रैंकिंग तय हुई है. इनमें खरीदने की शक्ति, प्रति व्यक्ति आय, मानव विकास सूचकांक, आय का समान वितरण और सापेक्ष गरीबी को आधार बनाया गया है. प्रति व्यक्ति आय 42110 अमेरिकी डॉलर है. 256 साल पुराना है भारत-सेशेल्स का रिश्ता सेशेल्स छोटा देश भले ही है लेकिन भारत के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है. यहां पहली स्थाई बस्ती साल 1770 में बसाई गई. उस पहली खेप में जो 27 नागरिक यहां पहुंचे, उनमें पांच भारतीय भी थे. बाद में तमिलनाडु, बिहार, गुजरात और देश के अन्य हिस्सों से भी लोग पहुंचे. आज देश का हर आठवां व्यक्ति भारतवंशी मूल का है. 29 जून 1976 को सेशेल्स को ब्रिटेन से आजादी मिली और यह स्वतंत्र देश के रूप में दुनिया के नक्शे पर उभरा. इस छोटे से द्वीपीय देश पर पहले फ्रांसीसी और फिर बाद में ब्रिटेन ने राज किया. समृद्धि की आधारशिला है पर्यटन पर्यटन सेशेल्स की मुख्य कमाई का स्रोत है. यहां के समुद्र, बीच और नेचर पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. यहां लक्जरी रिसोर्ट बन गए हैं. विदेशी पर्यटक महंगा खर्च करते हैं. होटल, यात्रा, खाना और गतिविधियां सरकार को राजस्व देती हैं. निजी निवेशकों ने भी यहां पूंजी लगाई है. पर्यटन ने नौकरियां बढ़ाईं. स्थानीय सेवाओं और कारीगरों को फायदा हुआ. इस देश में हर साल 3.5 से 4 लाख तक विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं. मतलब देश की आबादी से कई गुना ज्यादा पर्यटक आते हैं. यहां सबसे ज्यादा पर्यटक यूरोप से आते हैं. फिर एशिया की बारी है. हाल के वर्षों में भारतीयों की ठीक-ठाक संख्या पहुँच रही है. मत्स्य और समुद्री संसाधन से भी होती है कमाई समुद्री मछली और समुद्री जीवन भी सेशेल्स की आमदनी का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है. पास के जल क्षेत्र में मछली प्रचुर मात्रा में मिलती है. मछली पालन और निर्यात से विदेशी मुद्रा आती है. समुद्री पर्यटन जैसे डाइविंग ने भी योगदान दिया. समुंद्री संरक्षण ने संसाधन को टिकाऊ बनाया. इस माध्यम से सेशेल्स हर साल 30 से 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर की कमाई साल भर में करता है. सेशेल्स के कुल घरेलू निर्यात में 90 फीसदी हिस्सा मछली का है. निवेश और आर्थिक नीतियां सरकार ने विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया. निवेशकों को सरल नियम और कर प्रोत्साहन दिए गए. बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेस को विकसित किया गया. कई विदेशी कंपनियों ने यहां शाखाएं खोलीं. छोटे व्यवसायों को समर्थन मिला. नवाचार और सेवा क्षेत्र पर ध्यान दिया गया. यूएई, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका, चीन और भारत ने भी यहां निवेश किया हुआ है. यह निवेश मूलतः पर्यटन, अक्षय ऊर्जा, रियल स्टेट, मछली पालन आदि क्षेत्रों में हुए हैं. कैसी है वित्तीय और कर व्यवस्था? सेशेल्स ने कर नीति में लचीलापन रखा. कुछ सेवाओं पर कर कम रखा गया. यह नीति निवेश को आकर्षित करती है. निजी बैंकिंग और निवेश सेवाएं मजबूत हुईं. सरकार ने सार्वजनिक खर्च में समझदारी दिखाई. वित्तीय प्रबंधन ने देश की आय स्थिर रखी. यहां आयकर, व्यावसायिक कर, और वैल्यू एडेड टैक्स लागू है. यह व्यवस्था देशी-विदेशी सब पर समान है. विदेशी सहायता और अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध सेशेल्स ने वैश्विक साझेदारों से मदद ली. विकास परियोजनाओं में अनुदान और ऋण मिला. अंतरराष्ट्रीय संबंधों ने पर्यटन और व्यापार को बढ़ाया. राष्ट्रों के साथ द्विपक्षीय समझौते हुए. ये समझौते निवेश और सुरक्षा दोनों में मददगार रहे.सेशेल्स ने स्वास्थ्य और शिक्षा पर ज्यादा जोर दिया. साधारण शिक्षा तक अच्छी पहुंच हुई. स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर हुईं. इनसे उत्पादकता बढ़ी. छोटी आबादी में कुशल मजदूरी का लाभ मिला. कौशल विकास ने सेवा क्षेत्र को मजबूत किया. सेशेल्स ने प्रकृति को बचाने पर जोर दिया. नेचर और बायोडायवर्सिटी संरक्षण ने पर्यटन को स्थायी बनाया. समुद्री रिज़र्व बनाए गए. पर्यटन और संरक्षण में संतुलन रखा गया. यह नीतियां दीर्घकालिक आमदनी सुनिश्चित करती हैं. चुनौतियां और सीमाएं भी कम नहीं छोटा आकार और सीमित संसाधन सेशेल्स के सामने चुनौतियां हैं. जलवायु परिवर्तन से खतरे बनते हैं. आर्थिक निर्भरता पर्यटन पर जोखिम है. महंगाई और आय असमानता भी समस्याएं हैं. फिर भी सरकार ने योजनाएं बनाकर सुधार किए. प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के क्या हैं मायने? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे ने जोर दिया कि सेशेल्स अफ्रीकी साझेदार है. दौरे ने द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ किया. यह दौरा आर्थिक सहयोग और निवेश पर सकारात्मक संकेत देता है. ऐसे दौरे से व्यापार और पर्यटन में और अवसर बन सकते हैं. सरल शब्दों और संक्षेप में कहें तो सेशेल्स की समृद्धि कई कारणों का मेल है. पर्यटन इसका मुख्य स्तंभ है. समुद्री संसाधन, निवेश-अनुकूल नीतियां और अच्छा प्रशासन भी महत्वपूर्ण हैं. पर्यावरण संरक्षण और मानव विकास ने स्थिरता दी है. छोटी आबादी ने प्रति व्यक्ति आय बढ़ने में मदद की. प्रधानमंत्री मोदी के दौरे जैसे कदम दोस्ती और सहयोग बढ़ाते हैं. हालांकि, आगे की राह एकदम आसान नहीं है. आगे चुनौतियां बनी रहेंगी. पर अपनी सही नीतियों से सेशेल्स टिकाऊ समृद्धि बनाए रख सकता है.       

पटना समेत कई जिलों में गर्मी का असर, उत्तर बिहार में भारी बारिश की संभावना

 पटना बिहार में इन दिनों मौसम का दोहरा मिजाज देखने को मिल रहा है। राज्य के एक हिस्से में आंधी-बारिश हो रही है, तो दूसरे हिस्से में लू और भीषण गर्मी पड़ रही है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना की ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व बिहार में बादल छाए रहने की संभावना है। वहीं बाकी हिस्सों में भीषण गर्मी और हीट वेव का असर बना रहेगा। इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के मुताबिक, सुपौल, अररिया, कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया, सहरसा और मधेपुरा जिलों के अनेक स्थानों पर भारी बारिश की आशंका जताई गई है। इन इलाकों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर परेशानी की स्थिति बन सकती है। वहीं उत्तर-पश्चिम, उत्तर-मध्य, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व बिहार में मेघ गर्जन, बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। जबकि दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार में भी गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने की संभावना है। इन जिलों में लू का प्रकोप बारिश के बीच दक्षिण-पश्चिम बिहार के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी भी लोगों को परेशान करेगी। मौसम विभाग ने भभुआ (कैमूर), बक्सर और रोहतास जिलों में हीट वेव चलने की चेतावनी जारी की गई है। ऐसे में लू के प्रकोप से बचने के लिए इन क्षेत्रों के लोगों अनावश्यक घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की गई है। मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, पश्चिम चंपारण, सीवान, मुजफ्फरपुर, दरभंगा जिले में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 24 से 26 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। वहीं उत्तर-पूर्व बिहार के अररिया, पूर्णिया, सुपौल अधिकतम तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। इसके अलावा, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार के पटना, गया, बक्सर, भोजपुर यहां गर्मी का असर अधिक रहेगा और अधिकतम तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।  

हाथरस से सियासी वार: सीएम योगी ने अखिलेश को मथुरा पर खुली चुनौती दी

लखनऊ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने  दावा किया था कि उनकी सरकार आई तो अयोध्या को धार्मिक सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। अखिलेश के इसी दावे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार की तीखा हमला किया। सीएम योगी ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि अयोध्या की पहचान बन चुकी है। अगर हिम्मत है तो यही बात मथुरा के लिए बोलकर दिखाइए। यह बोलकर दिखाइए कि जैसे अयोध्या के लिए श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन चला उसी तरह श्रीकृष्ण मुक्ति के लिए आंदोलन चलना चाहिए। सीएम योगी हाथरस में करोड़ों की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करने के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कल अखिलेश यादव का एक बयान पढ़ रहा था। वह कह रहे थे कि उनकी सरकार आएगी तो अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाएंगे। सीएम योगी ने कहा कि आप क्या धार्मिक नगरी बनाएंगे, रामभक्तों पर गोली तो समाजवादी पार्टी की ही सरकार ने चलवाई थी। राम भक्तों की मेहनत से अब जब अयोध्या त्रेता युग का स्मरण करा रही है तो आपके मुंह में भी पानी आने लगा है। अयोध्या के लिए पश्चाताप, रामलला का जाकर दर्शन कीजिए योगी ने कहा कि अखिलेश जी अयोध्या को तो रामभक्तों ने सजा औऱ संवार दिया है। आप उसकी चिंता मत कीजिए, पश्चाताप कीजिए। एक बार कम से कम रामलला का दर्शन कर लीजिए, उसी से सद्बुद्धि आएगी। अब तैयारी कीजिए कि हम कृष्ण कन्हैया के लिए भी कुछ कर सकें। अब मथुरा की बात कीजिए। अगर सचमुच अपने को धार्मिक कहलाने का प्रयास कर रहे हैं तो मथुरा-वृंदावन और श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर खुलकर बोल दीजिए। अखिलेश को चुनौती देते हुए कहा कि यह बोलकर दिखाइए कि श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का भी अभियान चलना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण की भूमि को भी सम्मान मिलना चाहिए। मुल्ला-मौलवियों के आगे घुटने टेकने का ही एजेंडा सीएम योगी ने कहा कि हमारी सरकार बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम कर रही है। युद्धस्तर पर हम प्रयास कर रहे हैं लेकिन आप में हिम्मत नहीं है क्योंकि आप पर मुल्ला और मौलवियों के सामने घुटने टेकने के अलावा कोई एजेंडा नहीं है जिससे प्रदेश का विकास हो सके। कोई ऐसा एजेंडा नहीं है जिससे अयोध्या, मथुरा या काशी का उत्थान हो और उनकी पौराणिक पहचान स्थापित हो। कब्रिस्तान के पैसों को मंदिरों की ओर डायवर्ट किया कहा कि आंखों में धूल झोंकने का प्रयास मत कीजिए। अयोध्या पहचान की मोहताज नहीं है, अयोध्या ने दुनिया के सामने अपनी पहचान को बनाया हुआ है। आपने तो थानों में और जेलों में कृष्ण जन्माष्टमी मनाने पर भी रोक लगा दी थी। कांवर यात्रा पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। समाजवादी सरकार में पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री की तरफ जाता था, हमने उसे मंदिरों की तरफ डायवर्ट किया है। अखिलेश ने क्या कहा था अखिलेश यादव ने शनिवार को अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की चर्चा करते हुए कहा था कि हम धर्मनिष्ठता और सत्यनिष्ठता के साथ ये संकल्प लेते हैं कि नई सरकार बनाकर ‘अयोध्या’ को एक ऐसी अनुपम-अनुकरणीय धार्मिक नगरी के रूप में विकसित करेंगे, जहां विश्व भर से आए श्रद्धालु सच्ची आध्यात्मिकता की अद्वितीय अनुभूति करेंगे। अखिलेश ने एक्स पर लिखा था कि प्रभु के आशीर्वाद के साथ, हम अयोध्या के सनातन मान को आस्था-श्रद्धा, अखंड विश्वास और सच्ची भावना के ‘सियाराम-धाम’ के रूप में पुनर्स्थापित और पल्लवित करेंगे। इससे अयोध्यावासियों के भी परंपरागत गौरवभान और अधिकारों को पुन: स्थापित करेंगे।

FD भुगतान में 11 साल की देरी पर बैंक को झटका, उपभोक्ता को मिला पूरा मुआवजा

नई दिल्ली अगर आपने भी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करा रखा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कई लोग मानते हैं कि FD सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प है, लेकिन अगर बैंक ही मैच्योरिटी के बाद आपकी रकम लौटाने में आनाकानी करे तो क्या होगा? ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें एक व्यक्ति को अपनी 5 लाख रुपये की FD की रकम पाने के लिए लगभग 11 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। आखिरकार, अदालत ने बैंक को कड़ी फटकार लगाते हुए न केवल पूरी रकम लौटाने, बल्कि 12% ब्याज और 10,000 रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह मामला केरल के त्रिशूर निवासी सेतुमाधवन का है। उन्होंने बैंक में 5 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट कराई थी, जिसकी मैच्योरिटी 2 जून 2015 को पूरी हो गई थी। जब वे अपनी जमा राशि लेने बैंक पहुंचे, तो बैंक ने तकनीकी कारणों का हवाला देकर भुगतान करने से इनकार कर दिया। काफी प्रयासों के बावजूद जब पैसा नहीं मिला, तो उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया। उपभोक्ता आयोग ने सभी की जांच के बाद 31 दिसंबर 2021 को बैंक को आदेश दिया कि वह सेतुमाधवन को 5 लाख रुपये के साथ 12% सालाना ब्याज और 10,000 रुपये मुआवजा व मुकदमे का खर्च भी अदा करे। लेकिन, बैंक ने इस आदेश का पालन करने के बजाय अदालत में चुनौती देने का फैसला किया। बैंक ने पहले केरल हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन वह भी 825 दिन की देरी से। बैंक का तर्क था कि उस दौरान उसका प्रबंधन एक प्रशासक के अधीन था, इसलिए समय पर अपील नहीं की जा सकी। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इस दलील को खारिज कर दिया और उपभोक्ता आयोग के फैसले को सही ठहराया। इसके बाद भी बैंक पीछे नहीं हटा और मामले को हाईकोर्ट की बड़ी बेंच के सामने ले गया। इस बार बैंक ने दलील दी कि वह एक सहकारी बैंक है और इसलिए इस विवाद का निपटारा उपभोक्ता आयोग नहीं, बल्कि सहकारी समिति कानून के तहत होना चाहिए। हालांकि, 2 जून 2026 को केरल हाईकोर्ट की बड़ी बेंच ने भी बैंक की सभी दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून लोगों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया खास कानून है और यह अन्य कानूनों के अतिरिक्त लागू होता है। इसलिए कोई भी बैंक या संस्था उपभोक्ता आयोग के अधिकार क्षेत्र से बच नहीं सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि जनता का पैसा रखने वाले बैंक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी समय पर ग्राहकों को उनका पैसा लौटाना है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में बैंक के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब बैंक खुद यह नहीं नकार रहा कि जमा राशि लौटानी है, तब केवल तकनीकी बहानों के आधार पर ग्राहक को परेशान करना बेहद निंदनीय है। अदालत ने कहा कि बैंक जैसे संस्थानों को जनता का विश्वास बनाए रखना चाहिए, न कि ग्राहकों को सालों तक न्याय के लिए भटकाना चाहिए। हालांकि, सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से 6 महीने का समय मांगा गया, ताकि वह भुगतान कर सके। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए बैंक को 6 महीने के भीतर पूरी राशि, 12% ब्याज और 10,000 रुपये मुआवजा देने का अंतिम मौका दिया। यह फैसला देशभर के करोड़ों FD निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। अगर किसी बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा मैच्योरिटी के बाद भी आपकी जमा राशि नहीं लौटाई जाती है, तो आप उपभोक्ता आयोग या अदालत का सहारा ले सकते हैं। अदालतों ने कई बार स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के साथ लापरवाही करने वाले बैंकों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाएगा। एक्सपर्ट का मानना है कि यह फैसला बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करेगा। साथ ही यह भी साबित करता है कि उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़कर न्याय प्राप्त कर सकते हैं, भले ही उसमें थोड़ा समय क्यों न लगे।  

बीडीए की बड़ी परियोजना: पीलीभीत बाइपास रोड सिक्सलेन और आठ लेन विस्तार की तैयारी तेज

बरेली  शहर के पीलीभीत बाइपास रोड पर प्रस्तावित सिक्स लेन का कार्य 50 प्रतिशत से अधिक पूर्ण हो गया है। परियोजना के अगले दो माह में पूर्ण होने और आमजन को सौंपने की संभावना जताई जा रही है। इसके लिए बीडीए की ओर से 60 करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है। परियोजना के तहत बैरियर-टू से बड़ा बाईपास तक मार्ग को सिक्सलेन में बदला जा रहा है। वहीं, बैरियर टू से सेटेलाइट तक मार्ग को आठ लेन बनाने के लिए मंगलवार को निविदा टेक्निकल बिड खोली जाएगी। बीडीए अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में सड़क व फुटपाथ पर गिट्टी का कार्य लगभग पूर्ण कर लिया गया है। माना जा रहा है कि अब डीबीएम और वीसी का कार्य भी अगले दो माह में पूर्ण कर लिया जाएगा। पीलीभीत बाइपास सिक्सलेन मार्ग बना रहा बीडीए उल्लेखनीय है कि, शहर के सबसे व्यस्ततम मार्गों में एक पीलीभीत बाईपास मार्ग (बरेली एयरपोर्ट स्थित बैरियर-टू से बड़ा बाईपास तक) अब तक सिर्फ दो लेन होने की वजह से आए दिन जाम की समस्या बनी रहती थी। साथ ही दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। सड़क को चौड़ी करने के लिए पूर्व मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी ने बीते वर्ष बैरियर-टू से बड़ा बाईपास तक 4.86 किमी. मार्ग के फोरलेन निर्माण के लिए 136 करोड़ की कार्ययोजना शासन को प्रेषित की थी। अब तक 50 प्रतिशत से अधिक प्रगति का दावा इसके लिए कुछ धनराशि बीडीए से भी मांगी गई थी। मगर, परियोजना की स्वीकृति में लग रहे समय को देखते हुए अब बीडीए ने खुद मार्ग को चौड़ीकरण करने का निर्णय लिया। इस मार्ग पर एयरपोर्ट भी स्थित है। मार्ग के महज दो लेन होने के कारण एयरपोर्ट जाने वाले लोगों और दिल्ली, मुंबई व अन्य महानगरों से आने वाले यात्रियों को जाम के चलने परेशानी का सामना करना पड़ता था। 30 जून को खोली जाएगी निविदा इसी मार्ग पर ही सेटेलाइट से बड़ा बाईपास तक कई बड़े मैरिज हाल, होटल-रेस्टोरेंट व अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हैं। अब इस मार्ग चौड़ीकरण के बीच ही वर्तमान मंडलायुक्त भूपेंद्र एस चौधरी ने बीडीए को सेटेलाइट से बैरियर-टू तक आठ लेन व दो सर्विस लेन बनाने के लिए निर्देश दिए हैं, इसके लिए बीडीए की ओर से आमंत्रित निविदा 30 जून को खोली जाएगी। इस मार्ग के बनने के बाद शहर की तस्वीर बदलने की बात कही जा रही।