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मध्य प्रदेश कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं ने पकड़ा जोर, मंत्रियों को हटाए जाने के बाद सियासी हलचल बढ़ी

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजनीति में से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां भाजपा प्रदेश कार्यसमिति में से कई मंत्रियों को हटाया गया है। खास बात यह है कि ये मंत्री संघ, संगठन और सिंधिया गुट से आते हैं। इसके चलते राज्य कैबिनेट के विस्तार को लेकर चिंता बढ़ी है। वहीं, राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। बता दें कि हाल ही में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बहुप्रतिक्षित सूची में 106 सदस्यों को शामिल किया, जबकि 40 नेताओं को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनने का मौका मिला। वहीं, स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची में केवल 70 साल की उम्र पार कर चुके नेताओं को ही जगह मिली। जानकारी के अनुसार, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की सूची में से चार कैबिनेट मंत्रियों को हटाया गया है। जिसमें कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला, प्रद्युम्न सिंह तोमर, करण सिंह वर्मा, नागर सिंह चौहान का नाम शामिल है। यह मंत्री संघ, संगठन और सिंधिया गुट से आते हैं। अब इन मंत्रियों की बैचेनी बढ़ी हुई है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इन मंत्रियों को कार्यसमिति में से इसलिए हटाया गया है क्योंकि ये पार्टी के लिए प्रभावशाली काम करने में असमर्थ रहे। बताया जा रहा है ये मंत्री पार्टी समीकरण में फिट नहीं बैठ रहे थे। अब कार्यसमिति में सीएम सहित 18 मंत्रियों को जगह मिली है। जिसमें कैबिनेट मंत्री सहित राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कृष्णा गौर का नाम शामिल है। भिंड के मेहगांव से विधायक राकेश शुक्ला को कार्यसमिति में जगह नहीं मिली। वर्तमान में वह नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा का बतौर कैबिनेट मंत्री जिम्मा संभाल रहे हैं। 1998 में पहला चुनाव लड़ा था और जीते भी। लेकिन 2013 में पार्टी द्वारा टिकट काटने से नाराज होकर बगवात कर निर्दलीय लड़े और हार गए। 2018 में भी चुनाव हारे लेकिन 2023 में दोबारा विधायक चुने और मंत्री बने। आलीराजपुर विधानसभा क्षेत्र से चौथी बार निर्वाचित हुए नागर सिंह को पहली बार कैबिनेट मंत्री बनाया गया। नागर को भी कार्यसमिति में जगह नहीं दी गई। कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे प्रद्युम्न सिंह तोमर कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे। लेकिन बाद में बगावत के दौर में सिंधिया के साथ भाजपा का दामन थामा और शिवराज सरकार में भी मंत्री बने। उसके बाद मोहन सरकार में भी ऊर्जा मंत्री का जिम्मा संभाल रहे हैं। सिंधिया के करीबी नेताओं में माने जाते हैं, लेकिन इस बार कार्य समिति से इन्हें बाहर कर दिया। सिंधिया खेमे के मंत्री तुलसीराम सिलावट को जगह मिली है। वर्मा सीहोर जिले की इछावर सीट से 8वीं बार विधायक चुने गए। तीसरी बार मंत्री बने हैं और लगातार दूसरी बार राजस्व मंत्री बने हैं। पूर्व सीएम शिवराज सिंह के दौरान भी राजस्व मंत्री रहे लेकिन कार्यसमिति में जगह नहीं बना पाए। प्रदेश कार्यसमिति की सूची सामने आने के बाद समूची पार्टी और कार्यकर्ताओं को सिर्फ मंत्री मंडल विस्तार का इंतजार है। लेकिन उससे पहले मौजूदा 4 कैबिनेट मंत्रियों को कार्यसमिति में जगह नहीं मिलने से सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गरम है।

रिकॉर्डतोड़ गर्मी से यूरोप बेहाल! फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन में 40°C पार, आखिर क्यों ज्यादा प्रभावित होते हैं यूरोपीय?

लंदन /पेरिस  यूरोप इस समय रिकॉर्डतोड़ हीटवेव की चपेट में है. फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों, रेल नेटवर्क और बिजली व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है।  सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में फ्रांस की सड़कों की ऊपरी परत भीषण गर्मी के कारण नरम पड़ती और पिघलती नजर आ रही है. वहीं जर्मनी में अत्यधिक तापमान की वजह से ट्राम की पटरियां टेढ़ी हो गईं, जिसके कारण कई जगह सेवाएं रोकनी पड़ीं या उनकी रफ्तार कम करनी पड़ी।  रॉयटर्स के मुताबिक, यह हीटवेव 20 जून के आसपास शुरू हुई और कुछ इलाकों में सामान्य से 18 डिग्री सेल्सियस तक अधिक तापमान दर्ज किया गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति 'ओमेगा ब्लॉक' नाम के मौसमीय पैटर्न और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त असर का परिणाम है. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जो यूरोप में गर्मी की भयावह स्थिति को दिखाते हैं।  भारतीयों से ज्यादा यूरोपीय लोगों को क्यों सताता है? जब यूरोप में तापमान 40 डिग्री पहुंचता है तो लोग कहते हैं कि जीवन रुक गया है. अस्पताल भर जाते हैं. मौतें बढ़ जाती हैं. वहीं भारत में कई इलाकों में 40-45 डिग्री आम बात है, लोग काम करते रहते हैं. यह फर्क सिर्फ तापमान का नहीं, बल्कि कई अन्य कारणों की वजह से है. आइए समझते हैं दोनों में अंतर…  नमी का असर – सबसे बड़ा अंतर सबसे महत्वपूर्ण अंतर ह्यूमिडिटी (नमी) का है. भारत में गर्मी के मौसम में नमी बहुत ज्यादा होती है, लेकिन लोग इससे अभ्यस्त हैं. यूरोप में जब 40 डिग्री आता है तो अक्सर सूखी गर्मी होती है, लेकिन कई बार नमी भी बढ़ जाती है. जब नमी ज्यादा होती है तो पसीना सूखता नहीं है. शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं हो पाता. इसे वेट बुल्ब टेम्परेचर कहते हैं. यूरोप में 40 डिग्री के साथ अगर नमी 60-70% हो जाए तो इंसान के लिए खतरनाक हो जाता है. भारत में लोग लंबे समय से गर्मी झेल रहे हैं, इसलिए उनका शरीर बेहतर तरीके से ढल जाता है।  ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एयर कंडीशनर (AC) खरीदने के लिए लोगों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं. दुकान के बाहर इतनी भीड़ है कि मानो खरीदारी नहीं, बल्कि होड़ मची हो। वहीं एक अन्य वीडियो में भीषण गर्मी के कारण सड़क का डामर नरम पड़ता और पिघलता नजर आ रहा है।  एक और वीडियो में यूरोप के समुद्र तटों (बीच) पर लोगों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है. गर्मी से राहत पाने के लिए हजारों लोग समुद्र किनारे पहुंच गए, जिससे वहां मेले जैसा माहौल बन गया। फ्रांस में गर्मी के कारण अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है. कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई, जबकि गर्म नदियों के कारण कुछ परमाणु बिजली संयंत्रों का उत्पादन भी घटाना पड़ा. इटली, जर्मनी और मध्य यूरोप के कई हिस्सों में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि यूरोप में कभी 'सदी में एक बार' आने वाली ऐसी भीषण हीटवेव अब जलवायु परिवर्तन की वजह से कहीं ज्यादा बार देखने को मिल सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाएं और गंभीर हो सकती हैं. इमारतें और घर कैसे बने हैं? यूरोप की इमारतें ठंड के लिए बनाई गई हैं. दीवारें मोटी, इंसुलेशन अच्छा पर गर्मी निकालने की व्यवस्था कम. जब 40 डिग्री की गर्मी पड़ती है तो घर के अंदर भी तापमान बहुत बढ़ जाता है. वहां एयर कंडीशनर कम घरों में हैं।  भारत में घरों में छतें ऊंची, खिड़कियां बड़ी, पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल आम है. लोग दोपहर में आराम करते हैं. शाम को काम करते हैं. यूरोप में ऐसी आदत नहीं है. स्कूल, ऑफिस और अस्पताल भी गर्मी के लिए तैयार नहीं होते।  सूर्य की तीव्रता यूरोप हाई एल्टीट्यूड पर स्थित है, इसलिए वहां गर्मियों में दिन बहुत लंबे (15 से 17 घंटे) हो जाते हैं. साफ आसमान और कम वायु प्रदूषण के कारण सीधी धूप बहुत तेज और चुभने वाली लगती है।  रात का तापमान और आराम यूरोप की हीटवेव में रात का तापमान भी बहुत ऊंचा रहता है. शरीर को ठंडा होने का मौका नहीं मिलता. लगातार गर्मी से थकान, दिल का दौरा और मौतें बढ़ जाती हैं. भारत में दिन में गर्मी ज्यादा होती है लेकिन रात में तापमान काफी गिर जाता है. इससे शरीर को राहत मिलती है. यही वजह है कि भारत में 40 डिग्री सहन करना यूरोप की तुलना में आसान पड़ता है।  लोगों की आदत और स्वास्थ्य भारतीय शरीर गर्मी के लिए ज्यादा तैयार रहता है. बचपन से गर्मी में खेलना, काम करना सिखाया जाता है. पसीना आना, ज्यादा पानी पीना, छाछ-निम्बू पानी जैसी चीजें आम हैं।  यूरोप में ज्यादातर लोग ठंडे मौसम में रहते हैं. उनकी त्वचा पतली, शरीर गर्मी सहने के लिए कम तैयार होता है. खासकर बुजुर्ग और बच्चे जल्दी प्रभावित होते हैं. फ्रांस, जर्मनी, इटली जैसी जगहों पर 40 डिग्री में हजारों अतिरिक्त मौतें हो जाती हैं।  तैयारियां और सरकारी व्यवस्था भारत में हीटवेव एक्शन प्लान है. स्कूलों की छुट्टी, पानी की व्यवस्था, जागरूकता अभियान चलते हैं. लोग जानते हैं कि दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर कम निकलना चाहिए।  यूरोप में अचानक गर्मी आने पर सरकारें भी हैरान रह जाती हैं. अस्पताल तैयार नहीं होते, बिजली की मांग बढ़ने से ग्रिड फेल हो जाते हैं. ट्रेनें रुक जाती हैं, सड़कें पिघल जाती हैं।  जलवायु परिवर्तन का प्रभाव वैज्ञानिक कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन यूरोप को तेजी से गर्म कर रहा है. पहले वहां 40 डिग्री बहुत दुर्लभ था, अब लगभग हर साल हो रहा है. यूरोप अब भी अनुकूलन (Adaptation) की प्रक्रिया में है  भारत गर्म देश है, इसलिए 40-45 डिग्री नया नहीं. लेकिन भारत को भी चिंता करनी चाहिए क्योंकि गर्मी और बढ़ रही है. दिल्ली, राजस्थान में 48-50 डिग्री भी पहुंच रहा है।  क्या सीख सकते हैं दोनों देश?     यूरोप को भारत से सीखना चाहिए- हल्के कपड़े, दिन की आदतें बदलना, … Read more

DGP कैलाश मकवाणा से नीदरलैंड के कॉन्सुल जनरल की शिष्टाचार भेंट, द्विपक्षीय सहयोग पर हुई चर्चा

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से नीदरलैंड के कॉन्सुल जनरल ने की शिष्टाचार भेंट मध्यप्रदेश पुलिस के नवाचारों, सेफ क्लिक 2.0 एवं नशे से दूरी है जरूरी अभियान पर हुई सार्थक चर्चा भोपाल पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से नीदरलैंड के मुंबई स्थित कॉन्सुल जनरल (Consul General) नबील ताउआती ने आज पुलिस मुख्यालय, भोपाल में शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर कॉन्सुल जनरल के साथ मुंबई के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार कौस्तुभ परिहार एवं कृषि सलाहकार प्रसाद पारते भी उपस्थित रहे। भेंट के दौरान पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा कानून-व्यवस्था सुदृढ़ीकरण, आधुनिक पुलिसिंग, तकनीकी नवाचार एवं नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से संचालित राज्यव्यापी 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस अभियान के माध्यम से नागरिकों, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं विभिन्न संस्थानों तक व्यापक स्तर पर साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता पहुंचाई जा रही है। पुलिस महानिदेशक ने प्रदेश सरकार एवं मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित 'नशे से दूरी है जरूरी' अभियान की भी जानकारी देते हुए बताया कि युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने, समाज में जागरूकता बढ़ाने तथा मादक पदार्थों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रदेशभर में समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से नशामुक्त एवं सुरक्षित समाज के निर्माण की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस निरंतर कार्यरत है। बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच जनसुरक्षा, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर सुरक्षा, जागरूकता अभियानों तथा आपसी सहयोग एवं अनुभवों के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई। कॉन्सुल जनरल नबील ताउआती ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा जनहित में संचालित नवाचारों एवं व्यापक जन-जागरूकता अभियानों की सराहना करते हुए भविष्य में पारस्परिक सहयोग एवं संवाद को और सुदृढ़ बनाने की इच्छा व्यक्त की। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस प्रकार के सौहार्दपूर्ण संवाद से आपसी समझ एवं सहयोग को नई दिशा मिलेगी तथा जनहित एवं सुरक्षा से जुड़े विषयों पर ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन प्राप्त होगा।  

राज्यपाल पटेल से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल पटेल से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सौजन्य भेंट भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल से सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोक भवन पहुंचकर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यपाल पटेल को मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने को लेकर 9 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त होने, यूसीसी को लेकर मिल रहे व्यापक जन समर्थन एवं इस संदर्भ में राज्य सरकार की आगामी कार्य योजना से भी अवगत कराया। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के सफल क्रियान्वयन, गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा में प्रस्तावित शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों, 4 कृषि उपजों को हाल ही में मिले जीआई टैग से संबंधित किसानों को मिलने वाले लाभ, सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार, एमएसएमई एवं स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन से जुड़े विभिन्न प्रयासों एवं सरकार को मिली उपलब्धियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।  

कमलनाथ के ‘लापता’ पोस्टरों से गरमाई छिंदवाड़ा की राजनीति, भाजपा और कांग्रेस में जुबानी जंग तेज

छिंदवाड़ा पूर्व मुख्यमंत्री और छिंदवाड़ा विधायक कमलनाथ एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में हैं। छिंदवाड़ा के ग्राम जैतपुर में ग्रामीणों ने कमलनाथ के लापता होने के पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टरों में क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को प्रमुखता से सामने रखा गया है। भाजपा ने साधा निशाना भाजपा सांसद बंटी विवेक साहू ने आरोप लगाया है कि छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र वर्तमान में कई समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन विधायक कमलनाथ जनता के बीच नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने पेयजल संकट, ग्रामीण इलाकों में अधूरी व्यवस्थाओं और बारिश की कमी से बढ़ रही परेशानियों को लेकर कमलनाथ पर सवाल उठाए हैं। 2 अप्रैल को हुआ था आखिरी दौरा कमलनाथ आखिरी बार 2 अप्रैल को छिंदवाड़ा दौरे पर आए थे। इसके बाद उनकी क्षेत्र में सक्रियता को लेकर भाजपा लगातार सवाल उठा रही है। छिंदवाड़ा की राजनीति में बढ़ी हलचल लोकसभा चुनाव के बाद छिंदवाड़ा की राजनीति में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। भाजपा जिले में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सक्रिय है, जबकि कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंक को बनाए रखने की कोशिश में जुटी है। ऐसे में जैतपुर में लगाए गए पोस्टरों को आगामी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

चंडीगढ़ प्रशासन को मिला नया सचिव, IAS हरप्रीत सिंह सूदन की तीन साल के लिए नियुक्ति

 चंडीगढ़  केंद्र सरकार की कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने पंजाब कैडर के आईएएस अधिकारी हरप्रीत सिंह सूदन (2013 बैच) की तीन वर्ष के लिए चंडीगढ़ प्रशासन में सचिव (सुपर टाइम स्केल से नीचे) के पद पर नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति इंटर-कैडर डेप्युटेशन के तहत पंजाब कैडर से एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर में की गई है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी आदेश के अनुसार गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने मंजूरी प्रदान की है। आदेश के तहत हरप्रीत सिंह सूदन को तीन वर्ष की अवधि के लिए चंडीगढ़ प्रशासन में सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है। हरप्रीत सिंह सूदन वर्तमान में पंजाब सरकार में खेल निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। अब वे पंजाब कैडर से डेप्युटेशन पर चंडीगढ़ प्रशासन में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। प्रशासनिक हलकों में इस नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चंडीगढ़ प्रशासन में सचिव स्तर पर उनकी नियुक्ति से विभिन्न विभागों के प्रशासनिक कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। डीओपीटी ने नियुक्ति संबंधी आदेश गृह मंत्रालय, पंजाब सरकार तथा संबंधित अधिकारियों को भी भेज दिए हैं।

हज 2026: राज्य के सभी 813 हज यात्री सुरक्षित लौटे, मिर्जा एजाज बेग ने दी जानकारी

 राज्य के सभी 813 हज यात्रियों  की स्वदेश वापसी पूर्ण-मिर्ज़ा एजाज बेग छत्तीसगढ़ के हाजियों का अंतिम जत्था आज मुंबई पहुंचा  रायपुर   छत्तीसगढ़ राज्य से हज कमेटी के माध्यम से हज यात्रा पर गए सभी हज यात्री हज की इबादत सफलतापूर्वक पूर्ण कर सकुशल स्वदेश लौट आए हैं । राज्य के हाजियों का अंतिम जत्था आज मुंबई पहुंचा । मुंबई में एयरपोर्ट पर छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्जा एजाज़ बेग ने अगवानी करते हुए समस्त हाजियों की गुलपोशी की । छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने आज जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि, हज 2026 के लिए राज्य गठन उपरांत से अब तक की सर्वाधिक संख्या में राज्य के 29 जिलों से हज यात्री प्रस्थान किये  कुल 813 हज यात्रियों की स्वदेश वापसी पूर्ण हो गई है। उन्होंने बताया कि, इस वर्ष राज्य से 417 पुरुष एवं 396 महिला हज यात्रियों ने हज 2026 की सआदत  हासिल की। राज्य के हज यात्रियों द्वारा चुने गये विकल्प अनुसार मुम्बई ईम्बारकेशन प्वाइंट से 451, नागपुर से 290, दिल्ली से 14, अहमदाबाद से 02, बैंगलोर से 06, हैदराबाद से 42, जयपुर से 01, लखनऊ से 05 एवं कोलकाता से 02 हाजियों की सकुशल स्वदेश वापसी संपन्न हुई। राज्य के हज यात्रियों का मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट पर आज अंतिम जत्था दिनांक 29/06/2026 को मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट पहुंचा। हज यात्रियों की वापसी के अवसर पर राज्य हज कमेटी द्वारा हाजियों का एयरपोर्ट में गुलपोशी से इस्तकबाल किया गया एवं लगेज उपरांत प्रत्येक हाजी को पवित्र जल ज़म ज़म उपलब्ध कराया गया।  सभी हाजियो ने राज्य हज कमेटी के द्वारा की गई बेहतरीन व्यवस्था के लिए देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी,प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी, डॉ. श्याम बिहारी जायसवाल कैबिनेट मंत्री छ.ग.शासन का आभार व्यक्त किया। हज कमेटी के चेयरमैन श्री  बेग ने बताया कि, हज यात्रियों की सुविधाओं में वृद्धि करते हुए हज कमेटी द्वारा हज 2026 के हज यात्रियों को, 20 दिवस शाॅर्ट हज पैकेज, ऑनलाइन डाक्यूमेंट अपलोडिंग, पासपोर्ट जमा नहीं करने की सुविधा, प्रत्येक जिले में स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीकाकरण की सुविधा, संभाग स्तरीय विशेष हज प्रशिक्षण की सुविधा,  हज के दौरान बुलेट एवं मेट्रो ट्रेन से यात्रा की सुविधा, मीना में प्रत्येक हाजी का नाम एवं कवर नंबर युक्त सोफा कम बेड की सुविधा  उपलब्ध कराई गई जिससे हज यात्रियों की यात्रा  आरामदायक रही। राज्य के  हज यात्रियों के मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट के अंतिम जत्थे की वापसी के अवसर पर आज छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग, हज कमेटी के सदस्य मौलाना अमीर बेग, कार्यपालन अधिकारी/सचिव डॉ. खुशबू उस्मान उपस्थित रहें।

जल विवाद का निकला समाधान, अमित शाह की मौजूदगी में हरियाणा और राजस्थान के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता

पंचकूला. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सोमवार को हरियाणा और राजस्थान के बीच जल बंटवारे को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ। दोनों राज्यों की सरकारों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी मौजूद रहे। समझौते के तहत मानसून के दौरान हरियाणा पाइप लाइन के जरिए राजस्थान को पानी भेजेगा। समझौते के तहत वर्ष 1994 में हुए अपर यमुना रिवर बोर्ड के जल बंटवारा समझौते के अनुसार राजस्थान को उसके हिस्से का पानी उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इससे लंबे समय से लंबित जल वितरण से जुड़े मुद्दों के समाधान की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस समझौते के बाद रेणुका डैम, किशाऊ डैम और लखवार डैम जैसी बहुप्रतीक्षित बांध परियोजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में भी तेजी आने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से पेयजल उपलब्धता, सिंचाई क्षमता और जल संरक्षण को बड़ा लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार ने इस समझौते को राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया है। माना जा रहा है कि इससे जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, अंतरराज्यीय समन्वय और भविष्य की जल सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।

गर्मी बढ़ते ही पंजाब में बिजली की रिकॉर्ड डिमांड, 16 हजार मेगावाट तक पहुंची खपत

पटियाला. पंजाब में भीषण गर्मी और धान की रोपाई के चरम सीजन ने बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव डाल दिया है। सोमवार को राज्य में बिजली की अधिकतम मांग नया रिकॉर्ड बनाते हुए 16,130 मेगावाट तक पहुंच गई। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को केंद्रीय पूल से निर्धारित सीमा से अधिक बिजली लेनी पड़ रही है। इसके बावजूद कई इलाकों में किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। बिजली विभाग के अनुसार सोमवार दोपहर करीब 12 बजे राज्य में बिजली की मांग 16,130 मेगावाट दर्ज की गई। यह इस सीजन की अब तक की सबसे अधिक मांग है। बढ़ते तापमान और धान की फसल के लिए लगातार सिंचाई की जरूरत के कारण बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है। बाहरी ग्रिड से मांगी गई सप्लाई जानकारी के अनुसार पंजाब की निर्धारित ड्रॉअल सीमा 10,350 मेगावाट है, जबकि राज्य वर्तमान में लगभग 10,605 मेगावाट बिजली बाहरी ग्रिड से प्राप्त कर रहा है। इसके अलावा राज्य के विभिन्न बिजली संयंत्रों और अन्य स्रोतों से करीब 5,361 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इसके बावजूद मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बना हुआ है। राज्य के ताप बिजलीघरों में लहरा मोहब्बत संयंत्र से लगभग 556 मेगावाट, गोइंदवाल संयंत्र से 490 मेगावाट, रोपड़ ताप बिजलीघर से 520 मेगावाट, राजपुरा ताप बिजलीघर से 1,326 मेगावाट तथा तलवंडी साबो संयंत्र से 1,581 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं, जलविद्युत परियोजनाओं से लगभग 440 मेगावाट बिजली मिल रही है। ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ रही बिजली बिजली विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बढ़ती मांग और कुछ उत्पादन इकाइयों के प्रभावित होने के कारण अतिरिक्त बिजली बिजली एक्सचेंज से ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ रही है। इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर आर्थिक दबाव भी बढ़ गया है। इसका सबसे अधिक असर किसानों पर दिखाई दे रहा है। धान की फसल के लिए इस समय नियमित सिंचाई जरूरी है, लेकिन कई क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण किसान परेशान हैं। कई स्थानों पर किसानों ने बिजली ग्रिडों के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है और सरकार से निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। शहरों में भी बार-बार हो रही बिजली कटौती बिजली संकट का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। कई शहरों और कस्बों में घरेलू उपभोक्ताओं को भी बार-बार बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच लंबे बिजली कट लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। घरों में पेयजल आपूर्ति, कूलर और अन्य आवश्यक उपकरण भी प्रभावित हो रहे हैं।

आयरन केज व्हील ट्रैक्टरों पर बस्तर प्रशासन सख्त, सड़क सुरक्षा के लिए शुरू हुई कार्रवाई

जगदलपुर. बस्तर जिले में अब लोहे के केजव्हील वाले ट्रैक्टरों के सड़क पर संचालन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी. कलेक्टर के निर्देश पर ऐसे ट्रैक्टरों के खिलाफ चालानी और कानूनी कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं. खेतों में उपयोग होने वाले लोहे के पहिए सड़क पर चलने से डामर और सीमेंट सड़कें तेजी से क्षतिग्रस्त होती हैं. इसके कारण सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है. उच्च न्यायालय के निर्देशों और लोक निर्माण विभाग के आदेशों के पालन में यह कदम उठाया गया है. प्रशासन ने खेतों से निकलते ही केजव्हील हटाकर रबर टायर लगाने को अनिवार्य बताया है. परिवहन और लोक निर्माण विभाग संयुक्त रूप से निगरानी अभियान चलाएंगे. इसके साथ ग्रामीण क्षेत्रों में मोटरयान नियमों को लेकर जनजागरूकता अभियान भी संचालित होगा. किसानों को नियमों की जानकारी देकर सुरक्षित परिवहन के लिए प्रेरित किया जाएगा. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों के उल्लंघन पर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी. इस पहल का उद्देश्य सड़कों की सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण सुनिश्चित करना है. जिला प्रशासन ने सभी किसानों से नियमों का पालन करने की अपील की है.