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हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, 1 जुलाई से VBG रामजी कानून के तहत 125 दिन का रोजगार

चंडीगढ़. हरियाणा में ग्रामीण रोजगार व्यवस्था एक जुलाई से नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह वीबीजी रामजी अधिनियम के तहत नई रोजगार योजना लागू होगी। इसका राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक शुभारंभ दो जुलाई को आंध्र प्रदेश के तिरुपति में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषक कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। कार्यक्रम में सभी राज्यों के ग्राम विकास मंत्री और अधिकारी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डा. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि राज्य सरकार नई योजना को लागू करने की तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। सोमवार तक इसकी अधिसूचना जारी होने की संभावना है। ग्रामीण विकास संस्थान जिला, खंड और ग्राम स्तर तक अधिकारियों, कर्मचारियों, सरपंचों तथा ग्राम सचिवों को प्रशिक्षण देने का अभियान युद्धस्तर पर चला रहा है, ताकि नई व्यवस्था बिना किसी बाधा के लागू हो सके। हरियाणा लंबे समय से बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में ग्रामीण विकास के क्षेत्र में हरियाणा लंबे समय से बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में गिना जाता है। मनरेगा के तहत समय पर भुगतान, डिजिटल मानिटरिंग और पारदर्शिता के मामले में राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। नई योजना लागू होने के बाद हरियाणा का फोकस रोजगार के साथ-साथ ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण और तकनीक आधारित निगरानी को और प्रभावी बनाने पर रहेगा। नई योजना का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण मजदूरों को मिलेगा। मनरेगा में जहां साल में 100 दिन रोजगार का प्रविधान था, वहीं वीबीजी रामजी योजना के तहत 125 दिन तक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही काम की मांग करने वाले श्रमिकों को शीघ्र रोजगार उपलब्ध कराने, कार्यस्थलों पर अधिक पारदर्शिता लाने और आधुनिक तकनीक का उपयोग श्रमिकों की सुविधा के लिए किया जाएगा, ताकि उनके अधिकार प्रभावित न हो सकें। डॉ. वीरेंद्र चौहान ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि काम मांगने वाले किसी भी श्रमिक का रोजगार का अधिकार व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। आने वाले समय में योजना के तहत कराए जाने वाले विकास कार्यों की सूची का भी विस्तार किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थायी विकास कार्यों को गति मिलेगी।

पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क पर कार्रवाई, पंजाब में 5 आरोपी गिरफ्तार, 15 संदिग्धों पर नजर

जालंधर. पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार तीन युवकों से पूछताछ और काल डिटेल रिकार्ड तथा डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल कर पुलिस ने 15 से अधिक ऐसे लोगों को चिन्हित किया है, जो पिछले कुछ समय से आरोपितों के लगातार संपर्क में थे। इनमें आरोपितों के रिश्तेदार, करीबी परिचित और अन्य संदिग्ध शामिल हैं। संदिग्धों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन उनकी तलाश में पंजाब के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों में छापेमारी की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन लोगों का जासूसी नेटवर्क से कोई संबंध था या नहीं। इसी कड़ी में पांच लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है, हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल हिरासत में लिए गए आरोपितों के मोबाइल से कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिली हैं। पुलिस आरोपितों के बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और विदेशी नंबरों से संपर्क की भी जांच कर रही है। यदि किसी बड़े नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो और गिरफ्तारियां संभव हैं। बता दें कि हाल ही में गिरफ्तार किए गए आरोपितों में सचिन खोसला, भारत वर्मा उर्फ सन्नी और प्रदीप सिंह शामिल हैं, जो पाकिस्तान में गैंग्सटर शहजाद भट्टी और हमास गुज्जर के संपर्क में थे। आरोपित सरकारी कार्यालयों और संवेदनशील स्थानों से सूचनाएं जुटाकर पाकिस्तान भेज रहे थे। पुलिस ने उनके मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए हैं।

618वें गोंचा महापर्व की आज से शुरुआत, बस्तर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होगा भगवान जगन्नाथ का महाभिषेक

जगदलपुर. बस्तर का ऐतिहासिक और विश्वप्रसिद्ध गोंचा महापर्व सोमवार से देव स्नान पूर्णिमा के साथ आरंभ हो रहा है. श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा का वैदिक विधि से महाभिषेक होगा. महाभिषेक के बाद परंपरा अनुसार तीनों देव 15 दिनों के लिए अनसर में रहेंगे और दर्शन बंद रहेंगे. 617 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा इस वर्ष अपने 618वें वर्ष में प्रवेश कर रही है. आषाढ़ शुक्ल पक्ष में आयोजित होने वाला यह पर्व बस्तर की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है. रथयात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु आस्था और उत्साह के साथ शामिल होते हैं. तीनों देवों की प्रतिमाएं भव्य रथों में नगर भ्रमण कर सिरहासार तक पहुंचती हैं. बस्तर की पारंपरिक तुपकी सलामी इस महापर्व की सबसे अनूठी पहचान मानी जाती है. बांस से बनी तुपकी से भगवान को दी जाने वाली सलामी देश में केवल जगदलपुर में ही देखने को मिलती है. सोमवार सुबह शालिग्राम की शोभायात्रा और इंद्रावती के पवित्र जल से महाभिषेक की परंपरा निभाई जाएगी. अब श्रद्धालुओं को 15 जुलाई के नेत्रोत्सव पर पुनः भगवान के दर्शन प्राप्त होंगे. महापर्व को लेकर मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल बना हुआ है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त निर्देश, विकास कार्यों में लापरवाही और गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा

मुख्यमंत्री योगी का सख्त आदेश, विकास कार्यों में खामी बर्दाश्त नहीं, गुणवत्ता सर्वोपरि – सड़क निर्माण में लापरवाही करने पर इंजीनियर और ठेकेदार पर दर्ज होगी एफआईआर  – आगरा में मेट्रो शहर के अनुरूप मिलें सभी मूलभूत सुविधाएं – विकास कार्यों के लिए जनप्रतिनिधि तय करें प्राथमिकता, तुरंत जारी होगा फंड – छुट्टा पशुओं और ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों के चलने पर लगेगी रोक – विकास कार्यों की अड़चनें दूर करने के लिए बनेगा वरिष्ठ अधिवक्ताओं का पैनल आगरा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा मंडल में हो रहे विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था और लोक निर्माण विभाग की प्रस्तावित कार्ययोजना की गहन समीक्षा की। मंडलायुक्त सभागार में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में सीएम ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की कोई कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इन कार्यों की गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। निर्देश दिया कि ग्रामीण रास्तों पर भारी वाहनों के चलने पर तुरंत रोक लगाई जाए। इन सड़कों को क्षति पहंचाने वाले वाहनों के मालिकों से हर्जाना वसूला जाए। उन्होंने कहा कि आगरा अब एक मेट्रो शहर है, इसलिए यहां पानी, सड़क, सीवर और सौंदर्यीकरण जैसी मूलभूत सुविधाएं उसी स्तर की होनी चाहिए।  सड़क निर्माण में लापरवाही पर दर्ज होगी एफआईआर मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने जल जीवन मिशन, अमृत योजना, सीवर लाइन या अन्य किसी भी प्रोजेक्ट के लिए सड़कों की खुदाई के बाद उसके पुनर्निर्माण कार्य पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क और अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। यदि निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कमी पाई जाती है, तो संबंधित कार्यदायी संस्था के इंजीनियर और ठेकेदार की सीधे जवाबदेही तय की जाएगी। ऐसे लोगों पर एफआईआर दर्ज कराकर उन्हें जेल भेजने की कार्रवाई की जाए। जनप्रतिनिधि तय करें अपनी प्राथमिकता, तुरंत जारी होगा फंड बैठक में लोक निर्माण विभाग की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। आगरा मंडल के सभी जनप्रतिनिधियों से मिले प्रस्तावों को 'ई-विश्वकर्मा-2.0' पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। आगरा जनपद में सड़क निर्माण, सुदृढ़ीकरण, पुल और हेलीपैड निर्माण के लगभग 2791 करोड़ रुपये कुल 495 कार्यों की योजना प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने सभी सांसदों, विधायकों और एमएलसी से कहा कि वे अपनी प्राथमिकताओं को जल्द तय करें। यदि प्रस्तावों में कोई संशोधन या सुझाव है, तो तुरंत बताएं ताकि तत्काल स्वीकृति प्रदान कर धनराशि जारी की जा सके और काम शुरू हो। विकास की अड़चनें दूर करने के लिए बनेगा वरिष्ठ वकीलों का पैनल आगरा एयरपोर्ट के विस्तारीकरण, नए पुलों के निर्माण और सड़क चौड़ीकरण में पेड़ों की कटाई को लेकर एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी अड़चनों को सीएम ने काफी गंभीरता से लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों को किसी भी कीमत पर रुकने न दिया जाए। इन अड़चनों को दूर करने के लिए वरिष्ठ और अनुभवी अधिवक्ताओं का एक पैनल बनाकर अदालतों में प्रभावी पैरवी की जाए। साथ ही, जहां सड़क निर्माण में पुराने पेड़ आ रहे हैं, उस जमीन को छोड़कर सड़क चौड़ीकरण का नया विकल्प तैयार किया जाए। ग्रामीण सड़कों को तोड़ने वाले भारी वाहनों से वसूला जाएगा हर्जाना मुख्यमंत्री ने ग्रामीण इलाकों की सड़कों से गुजरने वाले भारी ट्रकों और डंपरों पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सड़कें भारी वाहनों के आवागमन के लिए नहीं बनाई जाती हैं। इन डंपरों के कारण सड़कें समय से पहले टूट जाती हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी असुविधा होती है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि ऐसे भारी वाहनों के ग्रामीण रास्तों पर चलने पर तुरंत रोक लगाई जाए और जो वाहन सड़क को नुकसान पहुंचाएं, उन्हीं से सड़क मरम्मत की क्षतिपूर्ति भी वसूली जाए। अवैध खनन और छुट्टा पशुओं पर लगेगी सख्त लगाम पड़ोसी राज्यों (राजस्थान और मध्य प्रदेश) से होने वाले अवैध खनन और निराश्रित पशुओं की समस्या पर भी मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जाए और अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों के प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय बनाकर छुट्टा पशुओं की समस्या का समाधान निकाला जाए ताकि आगरा के किसानों की फसलों का कोई नुकसान न हो। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग और शहर को जाम से मुक्ति दिलाने पर जोर बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों ने शहर में भारी ट्रैफिक को कम करने के लिए दयालबाग से खंदौली बायपास, यमुना पर नया पुल, एत्मादपुर बाईपास और ग्वालियर रोड पर जलभराव की समस्या को प्रमुखता से रखा। सीएम ने इन सभी प्रस्तावों को कार्ययोजना में शामिल करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने गोवर्धन परिक्रमा मार्ग की खराब हालत पर सख्त निर्देश देते हुए कहा कि नई और बेहतर तकनीक का उपयोग कर परिक्रमा मार्ग का निर्माण प्राथमिकता पर किया जाए, ताकि पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं के पैरों में छाले न पड़ें। बैठक में केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी, महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबीरानी मौर्य, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, गन्ना एवं चीनी मिल मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, सांसद राजकुमार चाहर, सांसद नवीन जैन, विधायक डॉ. जीएस धर्मेश, भगवान सिंह कुशवाह, पुरुषोत्तम खंडेलवाल, चौधरी बाबू लाल, पक्षालिका सिंह, डॉ. धर्मपाल सिंह, महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी आगरा मनीष बंसल, आगरा विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष एम अरुणमोली, नगरायुक्त श्री संतोष कुमार वैश्य, मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह सहित आगरा मंडल के समस्त जनप्रतिनिधिगण व संबंधित समस्त आलाधिकारी मौजूद रहे।

Pune Ketan Murder Case: सिया के खाई के किनारे बैठने की वजह से उठा पर्दा, जांच में खुला बड़ा राज

पुणे पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में पुलिस को कई नए अहम सुराग मिले हैं. जांच अधिकारियों के मुताबिक, मुख्य आरोपी सिया गोयल का वारदात के दौरान बैठना केवल अपने कथित प्रेमी चेतन चौधरी को हमला करने का संकेत देना नहीं था, बल्कि यह उसकी अपनी सुरक्षा के लिए भी पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा था।  पुलिस के अनुसार, 18 जून को लोहगढ़ किले पर बनाई गई योजना के तहत सिया को पानी पीने या जूते का फीता बांधने के बहाने बैठना था. जैसे ही वह बैठती, यह चेतन चौधरी के लिए संकेत होता कि अब केतन अग्रवाल को पीछे से धक्का दिया जा सकता है. पुलिस का कहना है कि दोनों ने यह तरीका इसलिए चुना ताकि धक्का दिए जाने के दौरान यदि केतन खुद को बचाने के लिए सिया को पकड़ने की कोशिश करे तो वह उसकी पहुंच से दूर रहे और खुद खाई में गिरने से बच जाए।  कार की जगह, स्कूटर से गया चेतन जांच में यह भी सामने आया है कि सह-आरोपी चेतन चौधरी ने अपनी मौजूदगी छिपाने के लिए पूरी तैयारी की थी. पुलिस के मुताबिक, वह 18 जून की सुबह पुणे से करीब 90 किलोमीटर दूर लोहगढ़ किले तक कार की बजाय स्कूटर से गया. अधिकारियों का कहना है कि उसने कार इसलिए नहीं ली क्योंकि टोल प्लाजा पर उसकी पहचान दर्ज होने का खतरा था. पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किया गया स्कूटर भी जब्त कर लिया है।  हुडी उतारकर काली टी-शर्ट पहन ली पुलिस के अनुसार, चेतन किले पर चढ़ते समय हुडी पहनकर गया था. बाद में उसने हुडी उतारकर केवल काली टी-शर्ट पहन ली और लौटते समय फिर से हुडी पहन ली. जांचकर्ताओं का मानना है कि उसने पहचान छिपाने और लोगों का ध्यान भटकाने के उद्देश्य से ऐसा किया।   हर कोई सुनना चाहता था सिर्फ इसी सवाल का जवाब  'सिया, आपने आखिर केतन को क्यों मारा ?… ' जैसे ही पुलिस आरोपी सिया गोयल को क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए लोहागढ़ किले पर लेकर पहुंची, सवालों की बौछार शुरू हो गई. हर कोई उसके मुंह से एक जवाब सुनना चाहता था, लेकिन सिया पूरी तरह खामोश रही. उसने न किसी सवाल का जवाब दिया और न ही कोई प्रतिक्रिया दी. इस बीच पुलिस ने जांच में कई नए दावे किए हैं, जिनमें साजिश,  संकेत और पूरी प्लानिंग को लेकर अहम खुलासे शामिल हैं. हालांकि मामले की जांच जारी है।  रविवार को लोहागढ़ किले का माहौल सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग था. पुलिस की कई गाड़ियां, अधिकारियों की मौजूदगी और बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी किले के प्रवेश द्वार पर पहले से मौजूद थे. सभी की निगाहें एक ही गाड़ी पर टिकी थीं, जिसमें पुलिस आरोपी सिया गोयल को लेकर पहुंचने वाली थी. कुछ ही देर में पुलिस का काफिला वहां पहुंचा. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच सिया को वाहन से उतारा गया. जैसे ही वह कैमरों के सामने आई, पत्रकारों ने एक साथ सवाल पूछने शुरू कर दिए. सबसे ज्यादा गूंजा एक ही सवाल सिया, आपने आखिर केतन को क्यों मारा?  इसके बाद कई और सवाल पूछे गए. किसी ने पूछा कि क्या उसे अपने किए पर पछतावा है, तो किसी ने जानना चाहा कि कथित साजिश की वजह क्या थी. लेकिन इन सभी सवालों के बीच सिया पूरी तरह शांत रही. उसने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गई।  एक शब्द नहीं बोली सिया मीडिया के लगातार सवालों के बावजूद सिया ने न कोई बयान दिया और न ही किसी तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त की. कुछ देर बाद वह वापस पुलिस वाहन में बैठ गई. पुलिस सिया गोयल को लोहागढ़ किले पर केवल पूछताछ के लिए नहीं, बल्कि क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए लेकर पहुंची थी. जांच अधिकारियों के मुताबिक, 18 जून को जिस स्थान पर केतन अग्रवाल की मौत हुई थी, वहां घटनाक्रम को दोबारा समझने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई गई. डमी (पुतले) की मदद से पुलिस ने उस पूरे घटनाक्रम को दोहराने की कोशिश की, जैसा आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बताया है. इस दौरान अधिकारियों ने घटनास्थल पर मौजूद दूरी, रास्तों, चट्टानों की स्थिति और घटनाक्रम के संभावित क्रम का भी बारीकी से परीक्षण किया।  पुलिस का दावा: पहले से बनाई गई थी योजना जांच अधिकारियों का कहना है कि अब तक की पूछताछ में सामने आया है कि यह पूरी घटना कथित तौर पर पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा थी. पुलिस के अनुसार, 20 वर्षीय सिया गोयल और 22 वर्षीय चेतन चौधरी ने पहले ही तय कर लिया था कि लोहागढ़ किले पर किस स्थान पर घटना को अंजाम देना है. जांच में यह भी सामने आया है कि सिया को बैठकर चेतन को संकेत देना था. बैठने का बहाना पानी पीना या जूते का फीता बांधना तय किया गया था. जैसे ही वह बैठती, चेतन कथित तौर पर पीछे से आकर केतन अग्रवाल को धक्का देता. पुलिस का दावा है कि दोनों ने इसी योजना के अनुसार कथित वारदात को अंजाम दिया।  बैठने का संकेत क्यों चुना गया? जांच में सामने आई सबसे अहम बात यह है कि बैठने का संकेत केवल इशारा देने का तरीका नहीं था. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि आरोपियों को डर था कि यदि धक्का दिए जाने के बाद केतन गिरते समय सिया को पकड़ने की कोशिश करेगा तो वह भी खाई में गिर सकती है. इसी वजह से कथित तौर पर ऐसा संकेत चुना गया, जिसमें सिया कुछ दूरी पर बैठ जाए और धक्का दिए जाने के समय केतन की पहुंच से बाहर रहे. यदि यह दावा जांच में पुष्ट होता है तो यह पूरे मामले की कथित योजना को और अधिक सुनियोजित बताता है।  चेतन ने भी बनाई थी अलग रणनीति पुलिस के मुताबिक, सह-आरोपी चेतन चौधरी ने भी अपनी मौजूदगी छिपाने के लिए पहले से तैयारी कर रखी थी. जांच अधिकारियों का कहना है कि वह पुणे से करीब 90 किलोमीटर दूर लोहागढ़ किले तक कार से नहीं बल्कि स्कूटर से पहुंचा. पुलिस का मानना है कि उसने ऐसा इसलिए किया ताकि टोल प्लाजा के रिकॉर्ड में उसकी कार दर्ज न हो. जांच टीम ने वह … Read more

US Open Badminton Final: किदांबी श्रीकांत रनर-अप, चीनी ताइपे के सू ली-यांग ने जीता खिताब

नई दिल्ली  भारतीय अनुभवी शटलर किदांबी श्रीकांत का सीजन का पहला खिताब जीतने का सपना टूट गया है। US Open Super 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट के एक बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबले में 33 साल के श्रीकांत को रनर-अप बनकर ही संतोष करना पड़ा। तीन गेम तक चले इस खेल में चीनी ताइपे के सू ली-यांग ने पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 श्रीकांत को करारी शिकस्त दी। एक घंटे से ज्यादा चले इस महामुकाबले में श्रीकांत को 15-21, 21-16, 9-21 से हार का सामना करना पड़ा। इस तरह सू ली-यांग ने अपने करियर का पहला BWF वर्ल्ड टूर खिताब जीता। वहीं, श्रीकांत के लिए इस सीजन का ये पहला फाइनल मैच था।  पहले गेम में सू ने मारी बाजी मैच की शुरुआत में श्रीकांत ने शानदार रफ्तार दिखाई, लेकिन नेट पर हुई एक गलती उनको भारी पड़ी। दरअसल, नेट के ऊपर शॉट खेलने के प्रयास में श्रीकांत का रैकेट नेट के पार चला गया था, जिसके बाद इस अनफोर्स्ड एरर का फायदा सू ने उठाया और लगातार अंक बटोरते हुए 7-2 की बढ़त बना ली।  इसके बाद भारतीय शटलर श्रीकांत ने जबरदस्त कमबैक करते हुए अगले 11 में से 8 अंक जीते और स्कोर 10-10 की बराबरी पर ला दिया। मिड-गेम ब्रेक तक श्रीकांत 11-10 से आगे थे। ब्रेक के बाद सू का पलटवार ब्रेक के बाद चीनी ताइपे के खिलाड़ी ने रैलियों की रफ्तार बढ़ाई और श्रीकांत को गलतियां करने पर मजबूर किया। सू ने 17-12 की बढ़त बनाई और आखिरकार 17 मिनट में यह गेम 21-15 से अपने नाम कर लिया। दूसरे गेम में श्रीकांत का पलटवार दूसरे गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए कांटे की टक्कर देखने को मिली। स्कोर 4-4 से बराबर होने के बाद श्रीकांत ने लगातार तीन अंक बटोरकर 7-4 की लीड ली। सू ने 8-8 से वापसी की कोशिश की, लेकिन श्रीकांत अपने बेहतरीन नेट प्ले की बदौलत ब्रेक तक 11-8 से आगे रहे। ब्रेक के बाद सू ने कुछ दमदार स्मैश लगाए, लेकिन श्रीकांत ने धैर्य बनाए रखा और स्कोर 18-13 कर दिया। सू की गलतियों की बदौलत श्रीकांत को 7 गेम प्वाइंट मिले। हालांकि सू ने 3 गेम प्वाइंट बचाए, लेकिन श्रीकांत ने एक दमदार डाउन-द-लाइन स्मैश मारकर दूसरा गेम 21-16 से जीता और मैच में 1-1 की बराबरी कर ली। तीसरा गेम में सू का आक्रामक रुख निर्णायक गेम में सू ली-यांग ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने सटीक स्मैश की मदद से 4-1 की बढ़त बना ली। श्रीकांत ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन लगातार होती गलतियों के कारण सू ब्रेक तक 11-7 से आगे हो गए। ब्रेक के बाद सू ने मैच पर पूरी तरह शिकंजा कस लिया और लीड को 15-7 और फिर 18-8 कर दिया। श्रीकांत के शॉट्स लगातार कोर्ट से बाहर जाते रहे, जिससे सू को 12 चैंपियनशिप प्वाइंट मिल गए। श्रीकांत ने एक प्वाइंट बचाया, लेकिन अगली ही रैली में सू ने विनिंग शॉट खेलकर मुकाबला 21-9 से अपने नाम कर लिया।

Ram Mandir Trust: भर्ती में गड़बड़ी मिली तो नहीं मिलेगी राहत, सिफारिश वाले कर्मचारियों पर ट्रस्ट सख्त

 अयोध्या अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच जारी है जो हर दिन नए मोड़ ले रही है. इस सब के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है. सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट ने उन कर्मचारियों की नियुक्तियों की समीक्षा शुरू कर दी है, जिन्हें निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के बजाय सिफारिश के आधार पर नियुक्त किया गया था. जांच में यदि किसी नियुक्ति में नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।  नियुक्तियों की प्रक्रिया जांच के दायरे में बताया जा रहा है कि यह फैसला हाल ही में सामने आए कथित दान चोरी प्रकरण के बाद लिया गया है. इस मामले के बाद ट्रस्ट अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई स्तरों पर समीक्षा कर रहा है. इसी क्रम में नियुक्तियों की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में लाई गई है।  सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में सभी नियुक्तियां केवल तय नियमों और निर्धारित चयन प्रक्रिया के अनुसार ही हों. इसके लिए पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और यह देखा जा रहा है कि किन कर्मचारियों की भर्ती नियमानुसार हुई तथा किन मामलों में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।  सिफारिश से भर्ती कर्मचारियों की जांच जानकारी के मुताबिक, ट्रस्ट उन सभी नियुक्तियों का ब्योरा जुटा रहा है, जिन पर सिफारिश या अन्य माध्यमों से भर्ती किए जाने के आरोप लगे थे. यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मचारियों को सेवा से हटाने सहित अन्य प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।  ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का मानना है कि राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय महत्व के धार्मिक स्थल के संचालन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. इसी उद्देश्य से प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह नियमबद्ध बनाने पर जोर दिया जा रहा है।  हालांकि, ट्रस्ट की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है. लेकिन माना जा रहा है कि समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. प्रशासनिक स्तर पर उठाए जा रहे इन कदमों को मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने और व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। 

हरियाणा में राशन व्यवस्था होगी मजबूत, अतिरिक्त अनाज योजना के लिए 5 राज्यों से सीखेगी सरकार

चंडीगढ़. हरियाणा की नायब सरकार गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों लोगों को मिलने वाले राशन की मात्रा बढ़ाने पर विचार कर सकती है। इसके लिए हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की टीम उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली तथा हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों का दौरा करेगी। यह टीम इन राज्यों में जाकर यह पता करेगी कि वहां गरीबों को राशन वितरण करने की व्यवस्था का संचालन कैसे होता है तथा बीपीएल व अंत्योदय श्रेणी में आने वाले लोगों को क्या-क्या तथा कितनी मात्रा में खाद्य वस्तुएं वितरित की जाती हैं। रिपोर्ट आने के बाद अगर इन राज्यों में गरीब लोगों को कुछ अतिरिक्त खाद्य पदार्थ मिल रहे हैं तो वैसी ही व्यवस्था हरियाणा सरकार भी अपनी वितरण सामग्री में जोड़ सकती है। हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने अधिकारियों को अध्ययन कर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने तीन दिन पहले ही सभी जिलों के खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों के साथ हुई आनलाइन बैठक में यह निर्देश जारी किए हैं। सरकार क्यों उठा रही है ये कदम? प्रदेश सरकार केंद्र सरकार की एक राष्ट्र- एक राशन कार्ड प्रणाली को बल देने के लिए यह कदम उठा रही है। प्रदेश में बीपीएल तथा अंत्योदय श्रेणी के करीब 40 लाख कार्ड बने हुए हैं। सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली के तहत हर माह करीब 1.57 करोड़ लाभर्थियों को राशन दिया जा रहा है। इनमें 2.86 लाख अंत्योदय परिवार तथा 37.14 लाख बीपीएल परिवार शामिल हैं। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अंत्योदय परिवार को 35 किलो और बीपीएल परिवारों को प्रति सदस्य पांच किलो गेहूं निश्शुल्क दिया जाता है। सरसों का तेल तथा चीनी भी रियायती दर पर दिए जाते हैं। खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने बताया कुछ राज्यों में चना तथा दाल देने की बात सामने आई है। इसके चलते ही उन्होंने दूसरे राज्यों की वितरण प्रणाली का अध्ययन करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

सुखना झील मानसून के लिए तैयार, गाद हटाने का काम पूरा, पर्यटकों को मिलेगा बेहतर अनुभव

चंडीगढ़. सुखना झील की जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने यूटी इंजीनियरिंग विभाग ने रेगुलेटरी एंड पर चल रहे डी-सिल्टिंग (गाद हटाने) अभियान के तहत करीब 34 हजार घनमीटर मिट्टी की खुदाई का लक्ष्य पूरा कर लिया है। हालांकि मानसून आने तक यह कार्य जारी रहेगा। मुख्य अभियंता सीबी ओझा ने बताया कि डी-सिल्टिंग परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। आईआईटी रुड़की, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की तकनीकी सिफारिशों के आधार पर एक माह पहले झील के सूखे हिस्से में गाद हटाने का कार्य शुरू किया गया था। उन्होंने बताया कि रेगुलेटरी एंड पर लगभग 351 मीटर स्तर तक खुदाई की जा रही है। निकाली गई मिट्टी का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग झील के किनारों (तटबंधों) और पैदल मार्गों को मजबूत एवं ऊंचा करने में किया जा रहा है। कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए हुआ ये काम कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए चार चेन-माउंटेड एक्सकेवेटर, जेसीबी मशीनें और टिप्परों का बेड़ा लगाया गया है। विभाग का मानना है कि डी-सिल्टिंग और तटबंधों को मजबूत करने से झील की जलधारण क्षमता बढ़ेगी, पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी और पर्यटकों के लिए भी सुविधाएं बेहतर होंगी। सुखना झील में अंतिम बार डी-सिल्टिंग का कार्य चार वर्ष से अधिक समय पहले किया गया था। गर्मियों में सबसे पहले रेगुलेटरी एंड का हिस्सा सूखता है, जिससे इस क्षेत्र में गाद हटाने का कार्य संभव हो पाता है। गौरतलब है कि गाद जमने से झील की जल भंडारण क्षमता लगातार प्रभावित हो रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए यूटी प्रशासन ने पिछले वर्ष डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से सुखना झील के समग्र विकास के लिए पांच वर्षीय एकीकृत प्रबंधन योजना (इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान) तैयार की थी। इस योजना में जल स्तर बनाए रखने, जलीय जीवों के संरक्षण, झील की स्वच्छता, पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विस्तार तथा सौर ऊर्जा चालित नौकाओं की संख्या बढ़ाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। करीब 565 एकड़ क्षेत्र में फैली सुखना वेटलैंड का कैचमेंट एरिया लगभग 10,395 एकड़ है। वर्ष 1988 में केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय वेटलैंड घोषित किया था। इसके कैचमेंट क्षेत्र में सुखना वन्यजीव अभयारण्य भी स्थित है। यदि चाहें तो इसे और संक्षिप्त कर फ्रंट पेज या सिटी पेज की अखबारी शैली में भी तैयार किया जा सकता है।

शॉर्टेज का बहाना, 71 करोड़ की धान में फर्जीवाड़ा! छत्तीसगढ़ में सामने आया बड़ा घोटाला

राजनांदगांव. जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अधीन आने वाले चार जिलों में धान सूखत के नाम पर 71 करोड़ की कमी बताए जाने के बाद भी अभी तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पायी है जबकि जांच में प्रारंभिक रूप से यह प्रमाणित हो गया है कि शार्टेज के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया है। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अंतर्गत राजनांदगांव से लेकर मोहला मानपुर, खैरागढ़ और कवर्धा जिले आते हैं। इन जिलों में धान खरीदी के बाद धान शार्टेज के नाम पर एक बड़ा खुलासा हुआ है। बताया गया है कि सभी चारों जिलों को मिलाकर 71 करोड़ का धान शार्टेज बताया गया है। जब शार्टेज का मामला सामने आया, तब प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और जांच कराई गई तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आयी है। खबर है कि जिन गाड़ियों का डीओ काटा गया उन गाड़ियों की धर्मकांटा में तौल होने पर सभी गाड़ी में 8 से 10 किलो धान अधिक पाया गया है। ऐसी स्थिति में धान का शार्टेज होना समझ से परे है, अगर शासन स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई तो करोड़ों रूपये का नुकसान हो सकता है। राशि जमा कराई जा रही – भरत जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के उपाध्यक्ष भरत वर्मा ने बताया कि सोसायटियों में शार्टेज के मामले को गंभीरता से लिया गया है। अब सोसायटियों से शार्टेज की राशि जमा कराई जा रही है।