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सुकमा में ‘तेजस कार्यशाला’ का आयोजन, स्टार्टअप और फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी संभावनाओं पर होगी चर्चा

सुकमा में आयोजित होगी 'तेजस कार्यशाला' स्टार्टअप, ओडीओपी और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े अवसरों की मिलेगी जानकारी रायपुर  युवाओं, महिलाओं, किसानों और नए उद्यमियों को स्वरोजगार तथा उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, सुकमा द्वारा 3 जुलाई को शबरी ऑडिटोरियम, सुकमा में एक दिवसीय 'तेजस कार्यशाला' का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला स्टार्टअप इंडिया (DPIIT) के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। कार्यशाला का उद्देश्य जिले के युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों, किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों (एमएसएमई) तथा स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक लोगों को शासकीय योजनाओं और नए व्यवसाय के अवसरों की जानकारी देना है। कार्यशाला में विशेषज्ञ प्रतिभागियों को स्टार्टअप पंजीकरण, विभिन्न शासकीय योजनाओं, बैंक ऋण, वित्तीय सहायता, मार्केटिंग, ब्रांडिंग तथा व्यवसाय शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने के बारे में सरल एवं उपयोगी जानकारी देंगे। साथ ही वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी), फूड प्रोसेसिंग, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों, चेंबर ऑफ कॉमर्स, एमएसएमई इकाइयों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, लाइवलीहुड कॉलेज, शासकीय महाविद्यालयों, एफपीओ, कृषक उत्पादक संगठनों तथा जिले के इच्छुक युवाओं और उद्यमियों को आमंत्रित किया गया है। यह कार्यशाला स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, नए रोजगार के अवसर सृजित करने, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा सुकमा जिले में उद्यमिता और आर्थिक विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग नहीं दे सकता रिकवरी का आदेश

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग सलाहकार और सिफारिश करने वाली संस्था है। उसे कमर्शियल विवाद में पैसे की रिकवरी का आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हालांकि ”छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995” के तहत आयोग की सलाह आमतौर पर राज्य सरकार के लिए बाध्यकारी हो सकती है, लेकिन वह असल में रिकवरी का आदेश जारी करके किसी सक्षम अधिकारी की शक्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकती। छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा 23 सितंबर 2022 को जारी आदेश को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद सुनवाई कर रहे थे। याचिकाकर्ता कमला मोटर्स ने 21 लाख रुपये में एक हार्वेस्टर बेचने का सौदा किया। इसके लिए 30,000 रुपये का एडवांस दिया गया। चूंकि तय समय के भीतर बैंक फाइनेंस का इंतजाम नहीं हो सका और कोविड-19 महामारी के कारण डिलीवरी में भी देरी हुई, इसलिए यह सौदा पूरा नहीं हो सका। हालांकि प्रतिवादी को फाइनेंस मिलने के बाद गाड़ी डिलीवरी के लिए उपलब्ध करा दी गई, लेकिन रेस्पॉन्डेंट ने सौदा रद्द किया और उसके बाद आयोग सहित कई अधिकारियों के पास शिकायतें दर्ज कराईं। आयोग ने कलेक्टर को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता से 1,26,500 रुपये वसूलें और यह रकम खरीदार को दें। याचिकाकर्ता का तर्क था कि आयोग को पैसे की रिकवरी का आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है और अधिनियम, 1995 के तहत उसकी शक्तियां केवल सिफारिश करने तक सीमित हैं। ”छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995” की धारा 9 का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि आयोग के काम मुख्य रूप से सलाहकार और सिफारिश करने वाले स्वभाव के हैं। कोर्ट ने कहा कि हालांकि आयोग की सलाह आमतौर पर राज्य सरकार के लिए बाध्यकारी होती है, लेकिन कानून उसे न्यायिक शक्तियां नहीं देता है। विभिन्न पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जांच या पूछताछ के मकसद से सिविल कोर्ट की कुछ शक्तियां दिए जाने से आयोग सिविल कोर्ट नहीं बन जाता। कोर्ट ने कहा कि आयोग के सामने आया विवाद हार्वेस्टर मशीन की बिक्री से जुड़े कमर्शियल सौदे से पैदा हुआ। याचिकाकर्ता से ₹1,26,500 की वसूली करने और उसे प्रतिवादी नंबर 3 को भुगतान करने का निर्देश देकर आयोग ने अपनी कानूनी शक्तियों के दायरे से बाहर जाकर काम किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे निर्देश को सिर्फ़ एक सिफ़ारिश नहीं माना जा सकता और यह आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर का काम था।

राज्य में 4.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य का 10 प्रतिशत बोनी पूर्ण

रायपुर  प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती किसानी का कार्य तेजी के साथ शुरू हो गया है। राज्य में अब तक 4.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 10 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री  रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।  प्रदेश के किसानों को अब तक 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद और 3.09 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून की बौछारों के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। राज्य में अब तक 7.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 10 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 02 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में अब तक 96.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है।   अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 4.30 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 3.09 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 62 प्रतिशत है। गत वर्ष इसी अवधि में 2.67 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया था। इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 13.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 7.28 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 47 प्रतिशत है।    अधिकारियों बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियते हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। खरीफ सीजन 2026 के लिए 30 जून की स्थिति में 5525 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 4517 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है।

CM योगी शुक्रवार को करेंगे उत्तर प्रदेश आम महोत्सव का शुभारंभ, किसानों और बागवानों को मिलेगा बड़ा मंच

सीएम योगी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश आम महोत्सव का करेंगे शुभारंभ  इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगा आयोजन, 3 से 5 जुलाई तक चलेगा 04 जुलाई को 'जन भवन' में किया जाएगा आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन: उद्यान मंत्री महोत्सव में 07 श्रेणियों और 56 वर्गों में लगभग 800 से अधिक आम की प्रजातियां की जाएंगी प्रदर्शित यूपी से आम और पल्प के निर्यात में भारी उछाल, वर्ष : 2025-26 में ₹12.67 करोड़ मूल्य के 3563 मीट्रिक टन आम का हुआ रिकॉर्ड निर्यात  लखनऊ, 'उत्तर प्रदेश आम महोत्सव -2026' का आयोजन 3 से 5 जुलाई तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर में होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को त्रिदिवसीय महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। महोत्सव में 07 श्रेणियों और 56 वर्गों में लगभग 800 से अधिक आम की प्रजातियों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह जानकारी उद्यान,कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि 4 जुलाई को 'जन भवन', लखनऊ में आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।  मेजबान उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के प्रतिनिधि व निर्यातक लेंगे हिस्सा उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में मेजबान उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के उ‌द्यान विभाग के प्रतिनिधि, प्रगतिशील बागवान एवं निर्यातक हिस्सा लेंगे। उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में प्रदर्शन के लिए रखे गए आम के पौधे बिक्री के लिए भी उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने अपील की कि महोत्सव में आए नागरिक अपने साथ कम से कम एक पौधा ले जाकर अवश्य रोपित करें।  बच्चों के लिए होंगी प्रतियोगिताएं उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में बच्चों के लिए आम खाने की प्रतियोगिता और आम से बने व्यंजनों (पकवानों) की प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण होगी। साथ ही बागवानों के लिए उन्नत तकनीक, तुड़ाई उपरान्त प्रबन्धन, कीट-व्याधि नियंत्रण और विपणन पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित होंगी। बागवानों को सीधा बाजार देने के लिए पहली बार 04 जुलाई को 'जन भवन', लखनऊ में आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।  आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश आम उत्पादन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश के 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग 61.96 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है, जो पूरे देश के कुल आम उत्पादन का लगभग 26.22 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश के दशहरी, लंगड़ा, चौसा, गौरजीत, लखनऊ सफेदा, रटौल और आम्रपाली जैसी प्रजातियां दुनिया भर में विख्यात हैं। इनका लखनऊ, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज मण्डलों में बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। विदेशों में भी निर्यात किया जाता है उप्र का आम एपीडा (APEDA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश से आम के निर्यात में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। वर्ष 2024-25 में जहां ₹2.63 करोड़ मूल्य का 404 मीट्रिक टन आम व पल्प निर्यात हुआ था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर ₹12.67 करोड़ मूल्य का 3,563 मीट्रिक टन हो गया है। उत्तर प्रदेश का आम यूनाइटेड किंगडम (लंदन), यूएई, सऊदी अरब, मलेशिया, सिंगापुर, कुवैत, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, कतर और रूस जैसे विकासशील व विकसित देशों को निर्यात किया जा रहा है। इस वर्ष भी महोत्सव के अवसर पर प्रदेश से अन्य देशों को आम का निर्यात किया जाएगा। कई जनपदों में स्थापित किए गए मैंगो पैक हाउस लखनऊ, सहारनपुर, वाराणसी और अमरोहा में आधुनिक मैंगो पैक हाउस स्थापित किए गए हैं, जहाँ अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत आम की प्रीप्रोसेसिंग और उपचार किया जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट के पास फलों की टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट सेंटर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे भविष्य में औद्यानिक निर्यात को और अधिक रफ्तार मिलेगी। आम को कीटों/रोगों से बचाने, उनका आकार, स्वाद और चमक सुधारने के लिए इस वर्ष विभाग द्वारा किसानों को लगभग 1.50 करोड़ फल बैग वितरित किए गए हैं। अनुत्पादक और पुराने पड़ चुके बागों के कैनोपी प्रबन्धन हेतु प्रति हेक्टेयर इकाई लागत पर 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है।

हसदेव नदी पर पुल, बिजली विभाग का सब डिवीजन कार्यालय और सर्वसुविधायुक्त मंगल भवन की घोषणा

रायपुर स्थानीय स्वशासन लोकतंत्र की सबसे सशक्त कड़ी है और नगर पंचायतें केवल प्रशासनिक इकाइयाँ नहीं, बल्कि नागरिकों की आकांक्षाओं को धरातल पर उतारने का प्रभावी माध्यम हैं। नवगठित नगर पंचायत बम्हनीडीह के प्रथम जनप्रतिनिधियों के कंधों पर केवल एक नगर के विकास की नहीं, बल्कि एक नई कार्यसंस्कृति और जनविश्वास की नींव रखने की जिम्मेदारी है।मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह में नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष  रमेश कुमार डडसेना एवं सभी पार्षदों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनता ने जिस विश्वास के साथ उन्हें दायित्व सौंपा है, उसका प्रतिफल पारदर्शी प्रशासन, संवेदनशील कार्यशैली और विकास के रूप में दिखाई देना चाहिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बम्हनीडीह के विकास को नई गति देने वाली तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए दहिदा-बम्हनीडीह के बीच हसदेव नदी पर पुल निर्माण, बिजली विभाग का सब डिवीजन कार्यालय तथा सर्वसुविधायुक्त मंगल भवन के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आधारभूत संरचनाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और सुविधासंपन्न बनाना है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में विकास को नई गति देते हुए हर वर्ग के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को पक्के घर, किसानों को उनकी उपज का सम्मानजनक मूल्य, महिलाओं को महतारी वंदन योजना के जरिए आर्थिक संबल तथा युवाओं के लिए रोजगार और अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि विकास का लाभ बिना किसी भेदभाव के समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल बड़े शहरों के विकास से नहीं, बल्कि बम्हनीडीह जैसे उभरते नगरों को सशक्त बनाने से होगा। राज्य सरकार ऐसे सभी नगरीय क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, बेहतर नागरिक सेवाओं और सुनियोजित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बम्हनीडीह नगर पंचायत जनभागीदारी, सुशासन और विकास का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगी तथा आने वाले वर्षों में क्षेत्र की नई पहचान बनेगी। समारोह में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, सांसद मती कमलेश जांगड़े, विधायक  किरण सिंह देव ने भी जनता को संबोधित किया।  इस अवसर पर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष  अनुराग सिंहदेव, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष  सौरभ सिंह,  नारायण चंदेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

कम पानी और कम अवधि वाली फसलें अपनाने के लिए किसानों को करें प्रेरित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को चुनौती नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समयबद्ध तैयारी के अवसर के रूप में लिया जाए। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए किसानों को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में इस वर्ष प्रदेश में संभावित अल्प वर्षा की स्थिति के मद्देनज़र किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित अन्य संबंधित विभागों की अब तक की पूर्व तैयारियों की गहन समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि प्रदेश का प्रत्येक किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक सोच और उचित तैयारी के साथ करे। समय पर सही निर्णय और विभागों के प्रभावी समन्वय से हम संभावित अल्प वर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर तथा कोदो-कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने के साथ किसानों के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को जल्दबाजी में बुआई नहीं करने के लिए भी प्रेरित किया जाए। खेतों में पर्याप्त नमी आने के बाद ही बुआई की जाए तथा नमी संरक्षण के उपाय अपनाए जाएं। साथ ही कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि कृषि वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों के सुझावों को प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचाया जाए, जिससे वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसल का चयन कर सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार संभावित अल्प वर्षा की स्थिति पर सतत निगरानी रखे हुए है। सभी संबंधित विभाग पूर्व नियोजित कार्य योजना के अनुसार समन्वित रूप से कार्य करें और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि किसानों का हित सर्वोपरि है और उनकी समृद्धि तथा कृषि उत्पादन को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी। अगले दो वर्षों की तैयारी प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वैकल्पिक स्रोतों का चिन्हांकन एवं टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार कर अमृत 2.0 के अंतर्गत जल प्रदाय योजनाओं का समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जायेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की ग्रामवार समीक्षा, बंद/अपूर्ण नल-जल योजनाओं की मरम्मत का 90 दिवसीय अभियान चलाया जाएगा। "जलाभिषेक 2.0" अंतर्गत प्रदेश में पुराने तालाबों, बावड़ियों, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं का सर्वे एवं जीर्णोद्धार, वीबीपी रामजी अभिसरण से प्रति विकासखंड न्यूनतम 100 जल संरचनाओं का पुनर्जीवन 2 वर्षों में किया जायेगा। भूजल पुनर्भरण अभियान के तहत सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम एवं खेत-तालाब निर्माण का मिशन मोड कार्यक्रम; "खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में" सिद्धांत पर चलाया जाएगा। नहरों की सफाई मरम्मत रबी से पूर्व पूर्ण, टेल-एंड तक पानी पहुंचाने की जवाबदेही तय की जायेगी। कम जल मांग वाली फसलों यथा दलहन, तिलहन, अन्न (मोटे अनाज) प्रोत्साहन एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन, ग्रीष्मकालीन धान/मूंग पर जल उपलब्धता आधारित सलाह, धान क्षेत्रों में सीधी बुवाई एवं वैकल्पिक गीला-सूखा पद्धति एवं प्रत्येक जिले के लिए कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जा रहा है। जल विद्युत एवं जलाशय प्रबंधन के तहत सभी प्रमुख जलाशयों (इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर, गांधीसागर) के लिए रूल कर्व का कड़ाई से पालन; जल उपयोग की प्राथमिकता दी जाएगी। पहले पेयजल, फिर सिंचाई, फिर विद्युत उत्पादन का स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जा रहा है।     रियल-टाइम मॉनिटरिंग एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड बनाए जाएंगे।     जन-जागरूकता महाअभियान "जल गंगा संवर्धन" की तर्ज पर जनभागीदारी आधारित सतत् अभियान चलाए जाएंगे।     प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट आकस्मिक योजना बनाई जाएगी। आरबीसी 6 (4) अंतर्गत क्षति सर्वे के लिये राजस्व, कृषि एवं पंचायत अमले का संयुक्त प्रशिक्षण अभी से पूर्ण; डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं सैटेलाइट इमेजरी आधारित क्षति आंकलन प्रणाली का सत्यापन कराया जायेगा, जिससे सर्वे 15 दिवस में पूरा हो सके।     फसल बीमा का कवरेज विस्तार एवं दावा तत्परता से हो, इस संबंध में कार्यवाही की जाएगी। आकस्मिकता की स्थिति से निपटने के लिए राज्य की तैयारियां     राज्य स्तरीय मॉडल आकस्मिक कार्य योजना तैयार कराकर विभागीय पोर्टल पर अपलोड कराई गई हैं।     विभिन्न योजनाओं में फसल प्रदर्शनों, उन्नत फसल किस्मों के बीज वितरण के लक्ष्य जिलों को जारी किये गए हैं।     वर्षा जल संरक्षण के लिये बलराम तालाब अन्तर्गत जिलों को लक्ष्य जारी किये गए ।     सोशल मीडिया का अधिकाधिक उपयोग कर कृषकों को जागरूक करना।     मौसम के पूर्वानुमान, फसलों में मौसम अनुसार किये जाने वाले कार्यों तथा अन्य समसामयिक सलाह कृषकों को उनके मोबाइल संदेश भेजकर उपलब्ध कराई जा रही है।     सभी जिले के कलेक्टर्स को सिंचाई, जल भराव की स्थिति, जीवन रक्षक सिंचाई हेतु विद्युत की उपलब्धता, सूखे की निगरानी व्यवस्था के लिये समस्त विभागों से कार्यवाही की नियमित समीक्षा के लिये निर्देश दिये गए हैं।     26 से 30 जून की अवधि में आयोजित ग्राम सभाओं में आकस्मिक कार्य योजना की चर्चा की गई। बैठक में राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा, सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग, किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना, मत्स्य पालन राज्य मंत्री  नारायण सिंह पंवार, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव  मनीष रस्तोगी, अन्य प्रमुख सचिव, सचिव एवं अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।  

ज्वार और बाजरा खेती पर हरियाणा सरकार देगी सब्सिडी, किसानों के लिए नई योजना शुरू

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने ज्वार और बाजरा की खेती करने वाले किसानों के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (पोषक-अनाज) के तहत अनुदान योजना शुरू की है। योजना के तहत किसानों को प्रदर्शन प्लांट लगाने, प्रमाणित बीज खरीदने, पोषक तत्व प्रबंधन और पौध संरक्षण के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। योजना के लिए आवेदन 16 जून से शुरू हो चुके हैं। इसका लाभ लेने के लिए किसान हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इस योजना का उद्देश्य ज्वार और बाजरा का उत्पादन बढ़ाना, खेती की लागत कम करना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करना है। इसके साथ ही सरकार बेहतर बीजों के इस्तेमाल और आधुनिक खेती को बढ़ावा देना चाहती है। यह योजना फिलहाल हरियाणा के भिवानी, गुरुग्राम, हिसार, झज्जर, जींद, महेंद्रगढ़, मेवात, रेवाड़ी, रोहतक और चरखी दादरी सहित 10 ज़िलों में लागू है। किन कामों पर मिलेगा अनुदान? खरीफ़ सीज़न में ज्वार और बाजरा के समूह प्रदर्शन प्लांट लगाने पर किसानों को 3,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता मिलेगी। एक किसान अधिकतम 5 एकड़ तक इसका लाभ ले सकता है। यानी अधिकतम 15000 रुपये का अनुदान ले सकता है। प्रत्येक क्लस्टर 25 एकड़ का होगा और एक ही किसान को लगातार दो वर्षों तक एक ही क्लस्टर में दोबारा लाभ नहीं मिलेगा। कृषि सामग्री खरीदने के बाद उसकी रसीद पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। योजना के तहत प्रमाणित बीज खरीदने पर भी अनुदान मिलेगा। 10 वर्ष से कम पुरानी किस्मों के बीज पर 3,000 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो), 10 वर्ष से अधिक पुरानी किस्मों के बीज पर 1,500 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो) और संकर बीज पर 10,000 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो) सहायता मिलेगी। इस मद में एक किसान अधिकतम 2.5 एकड़ तक लाभ ले सकता है। जिस किसान को एक बार सहायता मिल जाएगी, वह अगले दो वर्षों तक इसी मद में दोबारा सहायता नहीं ले सकेगा। पोषक तत्व और पौध संरक्षण पर भी मिलेगी सहायता सूक्ष्म पोषक तत्व, चूना, जिप्सम, सल्फर आधारित उर्वरक, जैव उर्वरक और अन्य मृदा सुधारकों की खरीद पर 1,000 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो) अनुदान मिलेगा। इसी तरह पौध संरक्षण के लिए आईपीएम, जैव-कीटनाशक, पीपी रसायन और खरपतवारनाशकों की खरीद पर भी 1,000 रुपये प्रति एकड़ या लागत का 50 प्रतिशत (जो कम हो) सहायता दी जाएगी। इन दोनों मदों में एक किसान अधिकतम 5 एकड़ तक लाभ ले सकता है और सहायता मिलने के बाद अगले दो वर्षों तक उसी मद में दोबारा लाभ नहीं मिलेगा। योजना का लाभ लेने के लिए किसान 18 जुलाई 2026 तक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग वेबसाइट agriharyana. gov. in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कृषि सामग्री हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार की सिफ़ारिश के अनुसार सरकारी, अर्द्धसरकारी, सहकारी समिति या अधिकृत विक्रेता से खरीदनी होगी। योजना के दिशा-निर्देशों का पालन करना भी ज़रूरी होगा।

लाखों विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सुरक्षित डिजिटल व्यवहार का लिया संकल्पमध्यप्रदेश पुलिस एवं स्कूल शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप एवं पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के निर्देशन में प्रदेश को साइबर अपराधों से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित राज्यव्यापी "सेफ क्लिक 2.0" साइबर जागरूकता अभियान के अंतर्गत बुधवार को एक महत्वपूर्ण जन-जागरूकता पहल की गई। स्कूल शिक्षा विभाग एवं राज्य साइबर पुलिस के समन्वय से प्रदेश के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में आयोजित प्रार्थना सभाओं के दौरान लाखों विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शैक्षणिक स्टाफ ने "साइबर शपथ"लेकर सुरक्षित एवं जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने का संकल्प लिया। प्रदेश भर में एक साथ आयोजित इस अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने तथा डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। राजधानी भोपाल से लेकर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक विद्यालयों में साइबर सुरक्षा का संदेश एक साथ प्रसारित हुआ और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक इस पहल में सहभागिता की। वर्तमान डिजिटल युग में बच्चे एवं युवा इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। इसी कारण वे साइबर ठगी, ऑनलाइन उत्पीड़न, फर्जी लिंक, फेक न्यूज तथा अन्य साइबर अपराधों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में यह जागरूकता विकसित करना है कि डिजिटल दुनिया में प्रत्येक क्लिक सोच-समझकर करना आवश्यक है तथा थोड़ी-सी सावधानी उन्हें बड़ी आर्थिक एवं सामाजिक हानि से बचा सकती है। साइबर शपथ के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने अपनी व्यक्तिगत एवं गोपनीय जानकारी, जैसे पासवर्ड, ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी तथा निजी विवरण किसी भी अनजान व्यक्ति से साझा नहीं करने, सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्तियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने, भ्रामक एवं अपुष्ट सूचनाएं साझा न करने, ऑनलाइन गेमिंग एवं चैटिंग के दौरान किसी भी प्रकार के लालच अथवा धमकी से प्रभावित न होने तथा किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि अथवा साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना देने का संकल्प लिया। इस राज्यव्यापी कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व से ही सभी जिला शिक्षा अधिकारियों एवं विद्यालयों के प्राचार्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। विद्यालयों में शिक्षकों ने शपथ के साथ विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के मूलभूत सिद्धांतों, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग तथा ऑनलाइन सतर्कता के संबंध में भी जानकारी प्रदान की। मध्यप्रदेश पुलिस का विश्वास है कि समाज के सबसे महत्वपूर्ण वर्ग—विद्यार्थियोंको साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाकर साइबर अपराधों की रोकथाम की दिशा में दीर्घकालीन एवं प्रभावी परिणाम प्राप्त होंगे। जागरूक विद्यार्थी न केवल स्वयं सुरक्षित रहेंगे, बल्कि अपने परिवार एवं समाज को भी साइबर अपराधों के प्रति सतर्क करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मध्यप्रदेश पुलिस एवं स्कूल शिक्षा विभाग ने इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करने वाले प्रदेश के सभी जिला अधिकारियों, शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की है कि सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाएं तथा किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की सूचना तत्कालराष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन1930 अथवा संबंधित पुलिस इकाई को दें।  

ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिनों का रोजगार, प्रतिदिन 300 रुपये की मजदूरी

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) ग्राम योजना' का शुभारंभ किया गया। सुकमा जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों, पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। 125 दिनों का रोजगार, 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुकमा कलेक्टर  अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  मुकुंद ठाकुर ने योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसके तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा तथा प्रतिदिन 300 रुपये की मजदूरी दी जाएगी। योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। महिलाओं और युवाओं को मिलेगा आत्मनिर्भर बनने का अवसर योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ कौशल विकास, वित्तीय सहायता और आजीविका आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा। जनप्रतिनिधियों ने बताया ग्रामीण विकास की बड़ी पहल कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष मती मंगम्मा सोयम ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष  महेश कुमार कुंजाम, जिला पंचायत सदस्य  कोरसा सन्नू, जनप्रतिनिधि  धनीराम बारसे सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने योजना को ग्रामीण विकास, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। केंद्रीय मंत्री के संबोधन का हुआ लाइव प्रसारण कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के संबोधन का लाइव प्रसारण भी किया गया। इसमें विकसित भारत के निर्माण में ग्रामीण भारत की भूमिका, रोजगार सृजन और आजीविका के नए अवसरों पर विस्तार से जानकारी दी गई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती जिला प्रशासन का विश्वास है कि इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से सुकमा के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे, लोगों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। यह योजना आत्मनिर्भर गांव और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

हर बुधवार थानों में जन सुनवाई, रांची में शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था

रांची राजधानी रांची में आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से बुधवार को जिले के सभी थाना और ओपी में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जिलेभर के विभिन्न थानों में कुल 240 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 134 मामलों का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया, जबकि शेष मामलों में जांच शुरू कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में फरियादी अपनी शिकायतें लेकर संबंधित थानों पहुंचे। कई मामलों का तत्काल समाधान किया गया, जबकि जटिल मामलों में पुलिस अधिकारियों ने जांच का आश्वासन देते हुए आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी। चुटिया, नगड़ी, पुंदाग, बुढ़मू, डोरंडा, लालपुर, सुखदेवनगर, डेली मार्केट सहित जिले के सभी थाना और ओपी में आयोजित इस कार्यक्रम में थाना प्रभारियों के साथ अन्य पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों ने प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुना और यथासंभव मौके पर ही उसका समाधान करने का प्रयास किया। प्राप्त शिकायतों में सबसे अधिक मामले जमीन विवाद और पारिवारिक विवाद से जुड़े रहे, जिन पर पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई की। प्रत्येक बुधवार मिलेगा शिकायतों के समाधान का अवसर रांची पुलिस की इस पहल के तहत अब प्रत्येक बुधवार जिले के सभी थाना और ओपी में जन शिकायत समाधान कोषांग लगाया जाएगा। इसमें डीएसपी रैंक के अधिकारियों सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे, ताकि लोगों की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। पुलिस का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस और आम जनता के बीच संवाद को मजबूत करना तथा लोगों को स्थानीय स्तर पर ही न्याय उपलब्ध कराना है। पहले छोटी-बड़ी शिकायतों के लिए लोगों को वरीय अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें अपने ही थाना क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। जमीन विवाद से लेकर धोखाधड़ी तक की सुनवाई वरीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार जन शिकायत समाधान कार्यक्रम में जमीन विवाद, पारिवारिक विवाद, आपसी रंजिश, चोरी, डकैती, धोखाधड़ी समेत अन्य स्थानीय समस्याओं से जुड़े मामलों की सुनवाई की जा रही है। अधिक से अधिक मामलों का मौके पर ही निष्पादन करने का प्रयास किया जाता है, जबकि गंभीर मामलों में तत्काल जांच शुरू कर दी जाती है। ग्रामीणों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ रांची पुलिस का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक राहत मिलेगी। अब उन्हें अपनी शिकायत लेकर जिला मुख्यालय नहीं आना पड़ेगा। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी तथा स्थानीय स्तर पर शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया और तेज होगी। पुलिस ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे प्रत्येक बुधवार अपने संबंधित थाना या ओपी में आयोजित जन शिकायत समाधान कार्यक्रम में पहुंचकर इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। प्रमुख थानों का प्रदर्शन     बरियातू थाना: 7 आवेदन प्राप्त, 5 का निष्पादन।     सदर थाना: 8 आवेदन प्राप्त, 6 का निष्पादन।     लालपुर थाना: 9 आवेदन प्राप्त, 7 का निष्पादन।     चुटिया थाना: 10 आवेदन प्राप्त, किसी भी मामले का मौके पर निष्पादन नहीं हो सका।     लोअर बाजार थाना: 3 आवेदन प्राप्त, 2 का निष्पादन।     कोतवाली थाना: 11 आवेदन प्राप्त, 6 का निष्पादन।     धुर्वा थाना: 3 आवेदन प्राप्त, 1 का निष्पादन।     पंडरा ओपी: 8 आवेदन प्राप्त, 5 मामलों का निष्पादन।