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स्टेज-4 ब्रेस्ट कैंसर में नई दवाओं से बढ़ी उम्मीद, एम्स में मरीजों के इलाज के बेहतर विकल्प

भोपाल स्तन कैंसर की चौथी स्टेज सुनते ही मरीज और परिवार अक्सर उम्मीद छोड़ने लगते हैं, लेकिन हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के मामले में इलाज की तस्वीर अब बदल रही है। आधुनिक लक्षित दवाओं ने उन मरीजों के लिए भी उपचार के नए रास्ते खोले हैं, जिनका कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका है। एम्स भोपाल की चिकित्सा कैंसर विज्ञान एवं रक्त रोग विभाग की संकाय सदस्य डॉ. आकांक्षा चौधरी ने भोपाल ऑन्कोलॉजी अपडेट्स 2026 में हेर-टू पॉजिटिव मेटास्टेटिक स्तन कैंसर के एक मामले पर विशेषज्ञ चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने नई लक्षित दवाओं और मरीज की बीमारी के अनुसार उपचार चुनने की आधुनिक पद्धति की जानकारी साझा की। बीमारी की पहचान से तय होगा इलाज डॉ. चौधरी के अनुसार अब कैंसर का उपचार केवल यह देखकर तय नहीं किया जाता कि बीमारी किस अंग में है या किस चरण में पहुंची है। कैंसर कोशिकाओं की विशेषताओं की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि मरीज के लिए कौन-सा उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है। हेर-टू एक प्रोटीन है, जो कुछ स्तन कैंसर कोशिकाओं की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में पाया जाता है। ऐसे कैंसर को हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर कहा जाता है। जब यह स्तन से निकलकर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल जाता है तो इसे मेटास्टेटिक यानी चौथी स्टेज का कैंसर माना जाता है। नई दवाओं से बढ़े उपचार के विकल्प विशेषज्ञ चर्चा में ट्रास्टुजुमैब डेरक्सटेकैन, पर्टुजुमैब और टुकाटिनिब जैसी नई लक्षित दवाओं पर चर्चा हुई। इन उपचारों ने चौथी स्टेज के हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर में बीमारी को नियंत्रित करने की संभावनाएं बढ़ाई हैं। इनके साथ मरीजों के लंबे समय तक बेहतर जीवन जीने की उम्मीद भी पहले की तुलना में बढ़ी है। डॉ. चौधरी ने बताया कि कुछ वर्ष पहले हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के उपचार के विकल्प काफी सीमित थे। लगातार हो रही चिकित्सा प्रगति के कारण अब मरीज की बीमारी की विशेषताओं के आधार पर कई उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। राहत: आयुष्मान से लक्षित इलाज एम्स भोपाल में हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के मरीजों के लिए आधुनिक लक्षित उपचार  उपलब्ध हैं। ट्रास्टुजुमैब आधारित लक्षित उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क उपलब्ध है। इसके अलावा एम्स भोपाल के चिकित्सा कैंसर विज्ञान विभाग में स्तन कैंसर समेत उन्नत कैंसर के मरीजों के लिए लक्षित दवाओं, इम्यूनोथेरेपी और मरीज की बीमारी के अनुसार व्यक्तिगत उपचार की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।  महिलाओं के लिए जरूरी संदेश हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर की रिपोर्ट आने का मतलब यह नहीं है कि उपचार के विकल्प खत्म हो गए। खासकर बीमारी के शरीर में फैल जाने के बाद भी आधुनिक उपचार से बीमारी को नियंत्रित करने की संभावनाएं मौजूद हैं। इसलिए स्तन में गांठ, आकार में बदलाव, त्वचा या निप्पल में असामान्य परिवर्तन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, कैंसर की सही पहचान और विशेषज्ञ चिकित्सक से उपचार शुरू करना सबसे महत्वपूर्ण है। 

दिवाली-छठ के लिए रेलवे का बड़ा तोहफा, 15 स्पेशल ट्रेनें शुरू; फटाफट बुक करें टिकट

नई दिल्ली दिवाली और छठ पर्व पर घर जाने की योजना बना रहे रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है. भारतीय रेलवे ने त्योहारों के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए 15 स्पेशल ट्रेन चलाने का ऐलान किया है. इन ट्रेनों के लिए टिकट बुकिंग की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।  रेलवे के 60 दिन के एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) नियमों के तहत IRCTC ऐप, वेबसाइट और काउंटर पर सुबह 8 बजे से टिकटों की बुकिंग शुरू हो गई है. इस साल 8 नवंबर 2026 को दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा, जिसके चलते उत्तर और पूर्व भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों में सीटें तेजी से भरने की संभावना है. ऐसे में रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे आखिरी समय की आपाधापी और लंबी वेटिंग लिस्ट से बचने के लिए जल्द से जल्द अपने टिकट बुक कर लें।  यहां देखें रेलवे की ओर से शुरू की गई 15 स्पेशल ट्रेनों की लिस्ट     मुंबई सेंट्रल – कटिहार – मुंबई सेंट्रल (09189/09190): 5 सितंबर से 17 नवंबर के बीच 77 अतिरिक्त फेरे.     कानपुर सेंट्रल – गुवाहाटी – कानपुर सेंट्रल (04127/04128): 10 सितंबर से 11 दिसंबर के बीच 14 अतिरिक्त फेरे.     कटिहार – अमृतसर – कटिहार (05736/05735): 9 सितंबर से 27 नवंबर के बीच 12 अतिरिक्त फेरे.      डिब्रूगढ़ – कोलकाता – डिब्रूगढ़ (05932/05931): 5 सितंबर से 30 नवंबर के बीच 13 अतिरिक्त फेरे.     वाराणसी – दिल्ली – वाराणसी (04209/04210)     अयोध्या कैंट – आनंद विहार टर्मिनल (04213/04214  द्विसाप्ताहिक)      चंडीगढ़ – पटना जंक्शन (04512/04511  साप्ताहिक)     फिरोजपुर कैंट – पटना जंक्शन (04616/04615  साप्ताहिक)      आनंद विहार टर्मिनल – जोगबनी (04008/04007  साप्ताहिक)      आनंद विहार टर्मिनल – मुजफ्फरपुर (04028/04027  द्विसाप्ताहिक)      दिल्ली – सीतामढ़ी – दिल्ली (04010/04009  साप्ताहिक)     नई दिल्ली – कानपुर सेंट्रल सुपरफास्ट (02456/02455)      बरौनी – नई दिल्ली – बरौनी स्पेशल (02563/02564)     दरभंगा – नई दिल्ली – दरभंगा स्पेशल (02569/02570)  इन रूटों पर रहेगी सबसे ज्यादा मारामारी बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़े प्रमुख रूटों जैसे दिल्ली-पटना, मुंबई–पटना, बेंगलुरु-पटना, अहमदाबाद-पटना, दिल्ली-गोरखपुर, वाराणसी-दिल्ली और कानपुर-दिल्ली पर यात्रियों की सबसे ज्यादा टिकटों के लिए मामारी रहने की आशंका है।     ऐसे पाएं कंफर्म टिकट      मास्टर लिस्ट बनाएं: टिकट बुकिंग शुरू होने से पहले ही IRCTC प्रोफाइल में यात्रियों के नाम, उम्र और बर्थ की जानकारी (Master List) सेव कर लें.      समय से पहले लॉगिन करें: सुबह 8 बजे बुकिंग शुरू होने से 5 मिनट पहले लॉगिन कर लें.      तेज पेमेंट मोड चुनें: भुगतान में लगने वाले समय को बचाने के लिए UPI या IRCTC Wallet का प्रयोग करें.

मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य निवेशकों के लिए दीर्घकालिक विकास साझेदारी का एक विश्वसनीय मंच तैयार करना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

दुबई में मध्यप्रदेश के वैश्विक निवेश मिशन की प्रभावशाली शुरुआत मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य निवेशकों के लिए दीर्घकालिक विकास साझेदारी का एक विश्वसनीय मंच तैयार करना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहले दिन प्रवासी भारतीय समुदाय, राजनयिक नेतृत्व और वैश्विक निवेश नेटवर्क से हुआ सशक्त संवाद दुबई में मध्यप्रदेश की शिल्प कला से जुड़ रहा वैश्विक समुदाय भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में अपने चार दिवसीय वैश्विक निवेश एवं व्यापारिक दौरे के प्रथम दिवस की शुरुआत विभिन्न उच्चस्तरीय गतिविधियों और महत्वपूर्ण संवादों के साथ की। इस दौरे का उद्देश्य मध्यप्रदेश को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), वैश्विक औद्योगिक साझेदारियों तथा दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग के लिए एक अग्रणी निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। प्रतिनिधिमंडल 7 से 9 सितम्बर 2026 तक आयोजित एआईएम कांग्रेस 2026 में भाग लेकर राज्य की औद्योगिक क्षमताओं, निवेश अवसरों और विकास दृष्टि को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। दुबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल का स्वागत भारतीय मिशन के अधिकारियों द्वारा किया गया। इसके पश्चात होटल फॉर्च्यून एट्रियम में संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे प्रवासी भारतीय समुदाय ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम में जितेंद्र वैद्य के नेतृत्व में लगभग 50 प्रवासी भारतीयों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रवासी भारतीय समुदाय को राज्य के विकास और वैश्विक ब्रांडिंग में महत्वपूर्ण साझेदार बताया। ओडीओपी एवं जीआई उत्पाद प्रदर्शनी का किया उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ताज दुबई, बिजनेस बे में आयोजित मध्यप्रदेश के ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) एवं भौगोलिक संकेतक (जीआई) उत्पादों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का उद्घाटन कर मध्यप्रदेश की समृद्ध हस्तशिल्प, हथकरघा और पारंपरिक कला विरासत को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया। प्रदर्शनी में राज्य के छह विशिष्ट विरासत उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिनमें बैतूल का बेल मेटल क्राफ्ट, अशोकनगर की चंदेरी साड़ी, खरगोन के महेश्वर की महेश्वरी साड़ी, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, भोपाल की जरी-जरदोजी तथा ग्वालियर कारपेट शामिल हैं। ये उत्पाद मध्यप्रदेश के पारंपरिक कौशल, सांस्कृतिक विविधता और निर्यात क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य इन उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना, अंतर्राष्ट्रीय खरीददारों से जोड़ना तथा कारीगरों के लिए नए आर्थिक अवसर सृजित करना है। भारतीय राजनयिक नेतृत्व के साथ रणनीतिक विचार-विमर्श मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संयुक्त अरब अमीरात में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल तथा दुबई एवं नॉर्थ अमीरात के भारत के महावाणिज्य दूत डॉ. ई. विष्णु वर्धन रेड्डी के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक में यूएई में कार्यरत भारतीय मिशन की भूमिका, निवेश आकर्षण की संभावनाएं तथा मध्यप्रदेश और यूएई के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान राज्य में उपलब्ध औद्योगिक भूमि, विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी, निवेशक-अनुकूल नीतियों, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं तथा औद्योगिक अवसंरचना को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। साथ ही यूएई के संप्रभु निवेश कोषों, प्रमुख कॉर्पोरेट समूहों, व्यापारिक संगठनों और संस्थागत निवेशकों के साथ संपर्क स्थापित करने के लिये भारतीय मिशन के सहयोग का आग्रह किया गया। मुख्यमंत्री ने राजदूत और महावाणिज्य दूत को आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में सक्रिय भागीदारी के लिए भी आमंत्रित किया। अरब संसद के अध्यक्ष के साथ उच्चस्तरीय संवाद प्रथम दिवस की एक अन्य महत्वपूर्ण गतिविधि अरब संसद के अध्यक्ष महामहिम मोहम्मद अहमद अल यामाही के सम्मान में आयोजित विशेष दोपहर भोज रहा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अरब देशों और मध्यप्रदेश के बीच व्यापार, निवेश, कृषि, पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्रों में व्यापक सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने अरब निवेशकों को मध्यप्रदेश के नवकरणीय ऊर्जा, औषधि निर्माण, चिकित्सा उपकरण, वस्त्र, लॉजिस्टिक्स, उन्नत विनिर्माण और शहरी अवसंरचना क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम मोहम्मद अहमद अल यामाही तथा उनके नेतृत्व वाले अरब व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल को मध्यप्रदेश का दौरा करने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में सहभागी बनने का आमंत्रण दिया। बैठक के दौरान खाद्य प्रसंस्करण, कृषि मूल्य श्रृंखला, कोल्ड चेन अवसंरचना, कृषि लॉजिस्टिक्स तथा दीर्घकालिक निर्यात सहयोग की संभावनाओं पर विशेष रूप से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने जीआईएस-2027 के लिए मध्य पूर्व और अफ्रीका क्षेत्र के अनेक देशों के संसदीय नेताओं एवं संसद अध्यक्षों को महामहिम यामाही द्वारा विशेष आमंत्रण प्रेषित किए। आमंत्रित गणमान्य व्यक्तियों में अल्जीरिया, बहरीन, कोमोरोस, जिबूती, मिस्र, इराक, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, लीबिया, मॉरिटानिया, मोरक्को, ओमान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, सूडान, सीरिया, ट्यूनीशिया, संयुक्त अरब अमीरात तथा यमन के संसदीय प्रमुख शामिल हैं। इन आमंत्रणों के माध्यम से मध्यप्रदेश और पश्चिम एवं अफ्रीकी देशों के बीच निवेश, व्यापार, उद्योग, अवसंरचना विकास, नवाचार तथा आर्थिक सहयोग को नई गति देने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन देशों के संसदीय नेतृत्व को मध्यप्रदेश की निवेशक-अनुकूल नीतियों, आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना और जीआईएस-2027 के माध्यम से उपलब्ध वैश्विक साझेदारी के अवसरों से अवगत कराते हुए सम्मेलन में सक्रिय सहभागिता का आग्रह किया। वैश्विक मीडिया के समक्ष प्रस्तुत हुई मध्यप्रदेश की विकास दृष्टि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया संवाद में मध्यप्रदेश की औद्योगिक, अवसंरचनात्मक, पर्यटन तथा लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को वैश्विक मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि निवेशकों के लिए दीर्घकालिक विकास साझेदारी का एक विश्वसनीय मंच तैयार करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की सिंगल विंडो प्रणाली, त्वरित स्वीकृति तंत्र, प्रगतिशील औद्योगिक नीतियों तथा राज्य की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति को निवेशकों के लिए विशेष आकर्षण बताया। एआईएम कांग्रेस 2026 के ‘टाइकून्स रात्रि भोज’ कार्यक्रम में सहभागिता दुबई दौरे के प्रथम दिवस का समापन एआईएम कांग्रेस 2026 के विशेष आमंत्रण-आधारित उच्चस्तरीय नेटवर्किंग कार्यक्रम ‘टाइकून्स रात्रि भोज’ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सहभागिता के साथ हुआ। यह कार्यक्रम एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी की मेजबानी में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सॉवरेन वेल्थ फंड्स, फैमिली ऑफिस, संस्थागत निवेशकों, वैश्विक कॉर्पोरेट नेतृत्वकर्ताओं, वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों तथा नीति-निर्माताओं ने भाग लेकर वैश्विक निवेश एवं आर्थिक सहयोग के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर महामहिम इंजीनियर सुल्तान अहमद बिन सुलेयम अल मंसूरी, अध्यक्ष, दुबई चैंबर्स; महामहिम मोहम्मद अली राशिद लूता, अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, दुबई चैंबर्स; महामहिम जासेम मोहम्मद अलबुदैवी, महासचिव, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC); महामहिम अब्दुल्ला बिन आदेल फखरो, उद्योग … Read more

सरकारी कर्मचारियों को बड़ी सौगात, बकाया DA की 2 किश्तें और 15% बढ़ेगी पेंशन; लीव एनकैशमेंट भी

हैदराबाद  त्योहारी सीजन से ठीक पहले सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले हो गई है.आंध्र प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है.मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कर्मचारियों की लंबे समय से अटकी मांगों को पूरा करते हुए  उन्हें बड़ा तोहफा दिया है.12वें पे रिवीजन कमीशन (PRC) के गठन से लेकर 1 अक्टूबर की सैलरी में 2 किश्तों का बकाया महंगाई भत्ता ( DA), सरेंडर लीव कैश और बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए 15% तक पेंशन बढ़ोतरी का ऐलान किया गया है।  सरकार के इन फैसलों से कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.जानिए सैलरी और पेंशन को लेकर लिए गए इस फैसले का फायदा आपको कब से मिलने जा रहा है… 12वें पे रिवीजन कमीशन को मंजूरी मुख्यमंत्री ने 12वें वेतन आयोग (PRC) के गठन को मंजूरी दे दी है. यह कमीशन सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और दूसरे भत्तों की समीक्षा करेगा.कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, यह कमीशन 1 जुलाई 2023 से बनना था. अब इसके गठन का ऐलान होने से कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है.हालांकि, अभी नई सैलरी कितनी बढ़ेगी, इसका ऐलान नहीं हुआ है. इसके लिए कमीशन की सिफारिशों का इंतजार करना होगा।  1 अक्टूबर की सैलरी में मिलेगा 2 किश्तों का DA सरकार ने दो लंबित महंगाई भत्ते की किश्तें जारी करने का फैसला किया है. इनका भुगतान 1 अक्टूबर 2026 की सैलरी के साथ किया जाएगा.ये दोनों किश्तें 1 जुलाई 2024 और 1 जनवरी 2025 से बकाया हैं. यानी कर्मचारियों को एक साथ इन दोनों किश्तों का  DA मिलेगा।  पेंशनर्स को भी इन दोनों किश्तों का लाभ मिलेगा. इससे उनकी पेंशन में भी बढ़ोतरी होगी. हालांकि, हर कर्मचारी या पेंशनर को मिलने वाली रकम उसकी मौजूदा सैलरी या पेंशन के अनुसार अलग-अलग होगी।  2022 की सरेंडर लीव का पैसा कब मिलेगा? कर्मचारियों के लिए एक और बड़ा फैसला लिया गया है. सरकार ने 2022 की बची हुई सरेंडर लीव का पैसा संक्रांति तक देने का ऐलान किया है.सरेंडर लीव का मतलब है कि कर्मचारी अपनी छुट्टी नहीं लेते. इसके बदले उन्हें छुट्टी के पैसे मिलते हैं. इसे लीव एनकैशमेंट भी कहा जाता है.सिविल कर्मचारियों को हर साल एक सरेंडर लीव मिलेगी. वहीं, पुलिसकर्मियों को उनकी ड्यूटी को देखते हुए दो सरेंडर लीव मिलेंगी.इतना ही नहीं, पुलिसकर्मियों को एक अतिरिक्त सरेंडर लीव का पैसा आने वाले दशहरा के आसपास दिया जाएगा।  बुजुर्ग पेंशनर्स को 15% तक ज्यादा पेंशन पेंशनर्स के लिए भी बड़ा ऐलान हुआ है. सरकार ने एक्स्ट्रा पेंशन की सुविधा जनवरी 2027 से फिर शुरू करने का फैसला किया है.इसके तहत 70 साल से अधिक उम्र वाले पेंशनर्स को 10% अतिरिक्त पेंशन मिलेगी. वहीं, 75 साल से अधिक उम्र वालों को 15% अतिरिक्त पेंशन मिलेगी.यह बढ़ोतरी मौजूदा पेंशन के आधार पर होगी. यानी पात्र पेंशनर्स को अपनी वर्तमान पेंशन के ऊपर अतिरिक्त रकम मिलेगी।  कर्मचारी स्वास्थ्य योजना में भी सुधार सरकार ने कर्मचारी स्वास्थ्य योजना यानी EHS को बेहतर बनाने का भी फैसला लिया है.इसके तहत सरकार हर महीने NTR वैद्य सेवा ट्रस्ट को नियमित भुगतान करेगी. इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए स्वास्थ्य योजना को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलेगी।  सरकार पर ₹2,880 करोड़ का अतिरिक्त बोझ इन सभी फैसलों से राज्य सरकार पर हर साल करीब ₹2,880 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा.सरकार का कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स की लंबित मांगों को पूरा करने के लिए ये फैसले लिए गए हैं. वहीं, कर्मचारी संगठनों ने भी इन घोषणाओं का स्वागत किया है। 

उत्तराखंड में नए निकाहनामे की तैयारी, एक पत्नी के रहते दूसरी शादी पर रोक; रजिस्टर्ड मौलवी जरूरी

देहरादून  उत्तराखंड वक्फ बोर्ड नए निकाहनामे का मॉडल जारी करेगा, इस निकाहनामे के आने के बाद कोई मौलवी किसी व्यक्ति की एक पत्नी के रहते दूसरा निकाह नहीं करा सकेंगे और न ही किस अन्य धर्म की युवती की शादी करवा सकेगा, अगर कोई  गलत तरीके से निकाह करवाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी यानी अब तमाम मौलवियों को निकाहनामा के मुताबिक ही शादियां करवानी होगी. उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड, धर्मांतरण कानून के बाद अब निकाहनामे का मॉडल जारी किया जाएगा, इसको लेकर उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने अपनी बोर्ड बैठक में इस बात का प्रस्ताव बनाया है और इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए अब शासन को भेजा जाएगा , उत्तराखंड में अब तमाम मौलवियों को निकाहनामे में अपना नाम रजिस्टर करवाना होगा और वहीं मौलवी अब उत्तराखंड में मुस्लिम विवाह करवा सकेंगे।  रजिस्टर्ड मौलवी ही करवा पाएंगे निकाह नया निकाहनामा आने के बाद  केवल रजिस्टर्ड मौलवी ही निकाह करा सकेंगे. गलत तरीके से दूसरा निकाह करने वाले लोगों या गलत निकाहनामा जारी करने वालों के विरुद्ध उचित धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी. उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने एनडीटीवी को बताया कि यूसीसी के नियमों को ध्यान में रखते हुए अब ऐसा निकाहनामा मॉडल जारी किया जाएगा जिसमें केवल एक निकाह का ही प्रावधान होगा. उन्होंने बताया कि निकाहनामे में दूसरे, तीसरे या चौथे निकाह का कोई कॉलम नहीं होगा. उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया है कि एक पत्नी के रहते दूसरा निकाह पूरी तरह अवैध होगा।  दूसरे धर्म की लड़की से विवाह इस निकाहनामे के तहत नहीं कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी. नए निकाहनामे के बाद निकाह को रजिस्टर्ड कराना भी अनिवार्य होगा. बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने जानकारी देते हुए बताया कि इस निकाहनामा के जारी होने के बाद दूसरे धर्म की लड़की का विवाह इस निकाहनामा मैं नहीं किया जा सकेगा अगर कोई दूसरे धर्म की लड़की या लड़के का विवाह होता है तो उसके लिए स्पेशल मैरिज एक्ट का प्रावधान है।  नया निकाहनामा समाज को जोड़ने वाला होगा- उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया कि वक्फ बोर्ड की 4 महीने पहले हुई बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाया गया था और प्रस्ताव में सभी बिंदुओं पर ध्यान रखा गया बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि मुस्लिम धर्म का भी इसमें ध्यान रखा गया है नया निकाहनामा समाज को जोड़ने वाला होगा. निकाह पढ़ाने वाले मौलवियों के लिए स्पेशल एक आइडेंटिटी नंबर भी जारी किया जाएगा और वही मौलवी निकाह करवाएंगे. निकाहनामा में इस बात का रिकॉर्ड रखा जाएगा कि कितने लोगों की शादियां हुई हैं, कितने लोगों का तलाक हुआ है। 

Cancer Alert: मोटापा और तनाव बना रहे बीमारी की वजह, पुरुषों में ओरल- महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर बढ़ा

मुंबई  तनाव, मोटापे और बिगड़ी हुई जीनवशैली की वजह से शहरों में कैंसर के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के डेटा के मुताबिक भारत में उत्तर पूर्व के राज्य बिहार, बंगाल उड़ीसा में ओरल कैंसर के साथ लंग्स कैंसर इसोफेगस और स्टमक कैंसर के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं. और ये आंकड़ा राष्ट्रीय औसत के भी आगे निकल गया है।  पुरुषों में अगर सबसे ज्यादा मामले ओरल कैंसर के हैं तो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर. सर्वाइकल कैंसर ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरों में तेजी से बढ़ा है. कैसे टाटा मेमोरियल अब कैंसर को लेकर अवेयरनेस के साथ कैंसर फैलने से पहले उसके बचाव की रणनीति पर काम कर रहा है. आर्युवेद पर शुरु होने वाले क्लीनिकल ट्रायल क्या कैंसर के उपचार में नई खोज साबित होंगे. टाटा मैमोरियल हॉस्पिटल क्यों प्राइमरी स्क्रीनिंग पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है।  शहरी जिंदगी का तनाव और मोटापा कैंसर की जड़ टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के रिसेप्शन से लेकर रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट तक मरीज और उनके परिजन ही दिखाई देते हैं. कैंसर के इलाज की पहली और आखिरी उम्मीद है ये अस्पताल. उम्मीद की यहां आ गए तो ज़िंदगी बच सकती है. रेडियोलॉजी एंव एकेडेमिक्स डिपार्टमेंट के हेड डॉ. सुयश कुलकर्णी बताते हैं, ''देश भर से यहां लोग आते हैं. हालांकि हमारे और सेंटर भी हैं, लेकिन एक ट्रेडिशनल जो मरीज का रहता है उसे भरोसा होता है कि अगर मुंबई टाटा मेमोरियल में पहुंच गए तो सब ठीक हो जाएगा।  हम ये पूरी कोशिश करते भी हैं. लेकिन चुनौती ये है कि कैंसर के मामले अब तेजी से बढ़ रहे हैं. और ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी इलाकों में इनकी तादाद ज्यादा है.'' डॉ. कुलकर्णी बताते हैं, ''शहरी जिंदगी का तनाव मोटापा और बिगड़ती लाइफस्टाइल इसकी सबसे बड़ी वजह है. दूसरा एक खतरा पेस्टिसाइड्स से भी है.'' वे कहते हैं, ''तनाव सीधे आपके शरीर के सेल्फ डिफेंस सिस्टम पर अटैक करता है. सीधे इम्यूनिटी प्रभावित होती है. तनाव से दूरी योग और एक्सरसाइज ये लाइफ स्टाइल में शामिल किये जाने की जरुरत है।  ये राज्य हैं जहां तेजी से फैल रहा है कैंसर भारत में उत्तर पूर्व के राज्य बिहार, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा इन राज्यों में इसोफेगस कैंसर, लंग्स कैंसर ओरल कैंसर और स्टमक कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल की डॉक्टर शर्मिला पिंपरे के मुताबिक, ''अगर हम एक औसत देखें तो अगर हर एक लाख लोगों में 110 लोगों को कैंसर है तो इन राज्यों में ये आंकड़ा 210 तक पहुंच रहा है. यहां पर मुख्य वजह फूड हैबिट्स के साथ स्मोकिंग भी है. इसी तरह से अगर हम महिलाओं में देखें तो ग्रामीण इलाकों से ज्यादा मामले ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के हैं।  आर्युवेद कैंसर में कितना कारगर क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी कैंसर पर किस तरह से पूरी रोकथाम हो सके, इसके लिए प्रयास चिकित्सा की दूसरी विधाओं में भी किए जा रहे हैं. टाटा मैमोरियल हॉस्पिटल एक पूरा सैटअप तैयार कर रहा है. जहां पर आयुष के डॉक्टर्स के साथ पहले आर्युवेद का मेडिकल कल्टिनेशन किया जाएगा. उसके बाद क्लीनिकल ट्रायल भी शुरु होंगे. महाराष्ट्र के खोपोली में इसकी तैयारी हो रही है।  डॉ. शर्मिला बताती हैं, ''आयुष युनानी जो भी दूसरी पद्धतियां हैं उनके भी क्लीनिकल ट्रायल होंगे और फिर एविडेंस के साथ हम इस निश्कर्ष पर पहुंच सकेंगे कि ये कितना कारगर है. खोपोली में 27 एकड़ में ये तैयारी चल रही है.'' वे कहती हैं, ''अभी लोग कीमोथैरेपी छोड़कर आर्युवेद ट्रीटमेंट लेते हैं. लेकिन क्लनिकली साबित हो जाने के बाद ही इस पर जाना चाहिए. इसके लिए ही हम प्रयास कर रहे हैं कि क्या एलोपैथिक के साथ इन दवाओं की भी मदद ली जा सकती है. लेकिन क्लीनिकल ट्रायल के बाद ही परिणाम जान लेने के बाद ही इस मामले में कुछ स्पष्ट हो सकेगा।  कैंसर रोकने अवेयरनेस कैम्प 13 से 15 साल के बच्चे टारगेट टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल केवल रोकथाम ही नहीं कैंसर के लिए जरुरी सावधानी क्या रखनी चाहिए इसके लिए भी जागरुकता अभियान चला रहा है. खास बात ये है कि ये कैम्पेन स्कूल के 13 से 15 साल के बच्चों को टारगेट करके डिजाइन किया गया है. टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल की डॉ मंजूर सैंगर बताती हैं, ''असल में इस एज ग्रुप को चुनने की खास वजह ये है कि ये बच्चे खुद तो स्मोकिग करने से पहले संभाल लेंगे. ये परिवार में भी एक कैटेलिस्ट बनेंगे और सिगरेट से लेकर एल्कोहल रोकने का काम करेंगे. ये बच्चे अगर इस उम्र में संभल गए तो कॉलेज में भी ये इस सबसे दूर रहेंगे। 

मध्य प्रदेश में कचरे के पहाड़ होंगे साफ, 30 से अधिक डंपिंग साइटों पर जमा 12 लाख टन कचरे का निपटारा

भोपाल  मध्य प्रदेश में वर्षों पुराने कचरे के ढेर आमजन के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं। राज्य सरकार ने तय किया है कि वर्ष 2027 तक कचरे के ढेर का शत-प्रतिशत निपटान किया जाएगा। प्रदेश के मुख्य सचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इसका हलफनामा भी दिया गया है। दरअसल, प्रदेश में वर्षों पुराने लैंडफिल, खुले मैदानों पर बिना किसी वैज्ञानिक प्रबंधन के जमा हुए कचरे के पुराने ढेर हैं। प्रदेश की 30 से अधिक डंपिंग साइटों पर 12 लाख टन से ज्यादा कचरा इकट्ठा होने की जानकारी सामने आई है। सरकार का दावा है कि इसका थर्ड पार्टी सत्यापन भी कराया जा रहा है। वर्षों से लैंडफिल या अन्य स्थानों पर जमा हो गए कचरे से पर्यावरण पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इसे प्रतिबंधित करने के लिए बायोरेमेडिएशन, जैव-खनन (बायोमाइनिंग), और स्थिरीकरण जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है। यह एक चुनौती है लेकिन इसे संसाधित करके भूमि को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे में राज्य सरकार ने तय किया कि अगले वर्ष तक शहरों से ऐसे कचरे ढेर साफ किए जाएंगे। बता दें, जून 2026 तक लीगेसी वेस्ट (वर्षों पुराने कचरे के ढेर) का अनिवार्य रूप से निपटान करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन यह संभव नहीं हो सका। इसके लिए बकायदा निकायों को यह भी घोषणा पत्र देने के निर्देश दिए गए थे कि उनके शहर में लीगेसी वेस्ट नहीं है। अब वर्ष 2027 के अंत तक कचरे के ढेर के निपटान का लक्ष्य रखा गया है। एक ओर मप्र के शहर स्वच्छता के सिरमौर, दूसरी तरफ वर्षों पुराना कचरा निपटान चुनौती मध्य प्रदेश के शहर स्वच्छता में देश में लगातार नंबर वन बने हुए है। आठ बार से इंदौर सबसे स्वच्छतम शहर बना हुआ है, दूसरे नंबर पर भोपाल है तो निकायों ने भी स्वच्छता में अपनी एक अलग जगह बनाई है। इन सबके बावजूद प्रदेश के शहरों में वर्षों से जमा कचरे का निपटान चुनौती बना हुआ है। यह कचरे का ढेर प्रदेश के स्वच्छता मिशन पर बट्टा लगा रहा है। ऐसे में लीगेसी वेस्ट प्रोजेक्ट को लेकर नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने समस्त आयुक्त एवं संभागीय संयुक्त संचालकों को निर्देशित किया है कि निकाय स्तर पर शत-प्रतिशत स्रोत पृथकीकरण एवं प्रतिदिन संग्रहित होने वाले कचरे का नियमित पूर्ण प्रसंस्करण हो। जिन नगरीय निकायों में लीगेसी वेस्ट डंपसाइट रेमेडिएशन का कार्य प्रगतिरत है। उनकी समीक्षा कर वर्ष 2027 तक कार्य पूर्ण करें।

इंदौर बनेगा नई परिवहन नीति का केंद्र, 11-12 सितंबर को होगा यात्री परिवहन विजन समिट

 इंदौर मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन की तस्वीर बदलने की तैयारी है। प्रदेश सरकार इंदौर में 11 और 12 सितंबर को यात्री परिवहन विजन समिट-2026 आयोजित करने जा रही है। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होने वाली दो दिवसीय समिट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। समिट का मुख्य फोकस मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा पर रहेगा। सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में यात्री परिवहन को केवल बसों की संख्या बढ़ाने तक सीमित न रखते हुए इसे आधुनिक तकनीक, बेहतर कनेक्टिविटी, डिजिटल सुविधाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी से जोड़ा जाए। निजी बस ऑपरेटर से लेकर टेक्नोलॉजी कंपनियां होंगी शामिल समिट में निजी बस ऑपरेटर, बस निर्माता, परिवहन विशेषज्ञ, नीति निर्माता, निवेशक, टेक्नोलॉजी कंपनियां और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन सभी के बीच प्रदेश की भविष्य की परिवहन व्यवस्था को लेकर चर्चा होगी। खास बात यह है कि सरकार पीपीपी मॉडल के जरिए यात्री बसों के संचालन को बढ़ावा देने की दिशा में भी रोडमैप तैयार करेगी। इससे निजी क्षेत्र को परिवहन व्यवस्था में बड़े स्तर पर भागीदारी का मौका मिलेगा।  बस सेवा से लेकर एआई तक पर होगी चर्चा समिट में यात्री परिवहन से जुड़े कई आधुनिक क्षेत्रों पर चर्चा होगी। इनमें इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन मोबिलिटी, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, डिजिटल टिकटिंग, फ्लीट मैनेजमेंट, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई और डेटा एनालिटिक्स, स्मार्ट बस स्टॉप, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम और मोबिलिटी फाइनेंस प्रमुख हैं। सरकार का जोर ऐसी परिवहन व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें यात्री को बस की जानकारी, टिकटिंग और यात्रा से जुड़ी सुविधाएं डिजिटल माध्यम से आसानी से मिल सकें।  12 क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं समिट में मोबिलिटी सेक्टर के 12 संभावनाशील क्षेत्रों को प्रमुखता से सामने रखा जाएगा। इनमें बस निर्माण, इलेक्ट्रिक एवं हाइड्रोजन मोबिलिटी, डिजिटल टिकटिंग, फ्लीट मैनेजमेंट, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई एवं एनालिटिक्स, स्मार्ट बस स्टॉप, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, मोबिलिटी-एज-ए-सर्विस और परिवहन वित्त जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के लिए मध्यप्रदेश में निवेश और साझेदारी के नए अवसर तलाशे जाएंगे।  सरकार और उद्योग के बीच सीधे संवाद पर जोर समिट की एक खास बात सरकार और उद्योग जगत के बीच सीधे संवाद को माना जा रहा है। इसमें शामिल कंपनियों को प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों के साथ वन-टू-वन बैठक का अवसर भी मिलेगा। कंपनियां अपने तकनीकी समाधान और बिजनेस मॉडल प्रस्तुत कर सकेंगी। इसके जरिए पायलट प्रोजेक्ट, निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी की संभावनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश होगी। मोबिलिटी विजन-2030 का रोडमैप होगा तैयार यात्री परिवहन विजन समिट से प्रदेश के लिए मोबिलिटी विजन-2030 को आगे बढ़ाने की दिशा में भी काम होगा। इसमें पीपीपी मॉडल को गति देने, डिजिटल-फर्स्ट मोबिलिटी फ्रेमवर्क तैयार करने, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने और सरकार-उद्योग के बीच सहयोग मजबूत करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। समिट में छह प्रमुख विषयों पर विशेष फोकस रहेगा। इनमें पीपीपी आधारित मोबिलिटी, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम, वित्तीय स्थिरता, स्वच्छ मोबिलिटी, एकीकृत टिकटिंग और बेहतर यात्री अनुभव शामिल हैं।  

इंदौर में 11-12 सितंबर को होगा ‘यात्री परिवहन विजन समिट-2026’, सुरक्षित और हरित परिवहन पर मंथन

सुरक्षित सफर और ग्रीन मोबिलिटी हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव इन्दौर में 11-12 सितम्बर को होगी ‘यात्री परिवहन विजन समिट-2026’ इन्दौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में आधुनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार के साथ सुरक्षित सफर और ग्रीन मोबिलिटी को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर कहा कि मध्यप्रदेश में सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण अनुकूल यात्री परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से आगामी 11 एवं 12 सितम्बर को इंदौर में ‘यात्री परिवहन विजन समिट-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का संकल्प है कि हर यात्री को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक परिवहन मिले। सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और प्रभावी बनाने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यात्री परिवहन विजन समिट इसी दिशा में भविष्य की ठोस रूपरेखा तैयार करेगा। उल्लेखनीय है कि समिट में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण तथा इसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका पर विशेषज्ञों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। समिट का फोकस सुरक्षित परिवहन के साथ हरित परिवहन और बेहतर मोबिलिटी की दिशा में नए अवसर तलाशने पर केंद्रित रहेगा। यह समिट प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, टिकाऊ और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए संभावित निवेश और साझेदारी के नए द्वार खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।  

सेमीकंडक्टर सेक्टर में MP की बढ़ेगी भूमिका, मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- प्रदेश निभाएगा अग्रणी भूमिका

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में मध्यप्रदेश निभाएगा अग्रणी भूमिका : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई गति देने के लिए मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार है। मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर कहा कि राज्य में अत्याधुनिक तकनीक, निवेश और नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिससे मध्यप्रदेश देश के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण केंद्र बन सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेमीकंडक्टर तकनीक भारत के आत्मनिर्भर और विकसित भविष्य की आधारशिला है। देश में तकनीकी क्षेत्र में हो रहे बदलाव और विकास में मध्यप्रदेश भी सहभागी बन रहा है। सेमीकंडक्टर इंडिया प्रोग्राम 2.0 में मध्यप्रदेश अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। केंद्र सरकार द्वारा 6 राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने के बाद इस क्षेत्र में देश की गति तेज हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी नीतिगत पहल, निवेश-अनुकूल वातावरण और औद्योगिक क्षमता के जरिए इस राष्ट्रीय अभियान को नई ऊंचाई देगा। उल्लेखनीय है कि इंदौर में अगले महीने 23-24 अक्टूबर को ‘एमपी सेमीकंडक्टर समिट-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। समिट में देश-विदेश के निवेशक, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति-निर्माता एक मंच पर जुटेंगे। यहां प्रदेश में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने, निवेश की संभावनाओं, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार पर व्यापक विचार-मंथन होगा।