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Cancer Alert: मोटापा और तनाव बना रहे बीमारी की वजह, पुरुषों में ओरल- महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर बढ़ा

मुंबई  तनाव, मोटापे और बिगड़ी हुई जीनवशैली की वजह से शहरों में कैंसर के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के डेटा के मुताबिक भारत में उत्तर पूर्व के राज्य बिहार, बंगाल उड़ीसा में ओरल कैंसर के साथ लंग्स कैंसर इसोफेगस और स्टमक कैंसर के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं. और ये आंकड़ा राष्ट्रीय औसत के भी आगे निकल गया है।  पुरुषों में अगर सबसे ज्यादा मामले ओरल कैंसर के हैं तो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर. सर्वाइकल कैंसर ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरों में तेजी से बढ़ा है. कैसे टाटा मेमोरियल अब कैंसर को लेकर अवेयरनेस के साथ कैंसर फैलने से पहले उसके बचाव की रणनीति पर काम कर रहा है. आर्युवेद पर शुरु होने वाले क्लीनिकल ट्रायल क्या कैंसर के उपचार में नई खोज साबित होंगे. टाटा मैमोरियल हॉस्पिटल क्यों प्राइमरी स्क्रीनिंग पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है।  शहरी जिंदगी का तनाव और मोटापा कैंसर की जड़ टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के रिसेप्शन से लेकर रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट तक मरीज और उनके परिजन ही दिखाई देते हैं. कैंसर के इलाज की पहली और आखिरी उम्मीद है ये अस्पताल. उम्मीद की यहां आ गए तो ज़िंदगी बच सकती है. रेडियोलॉजी एंव एकेडेमिक्स डिपार्टमेंट के हेड डॉ. सुयश कुलकर्णी बताते हैं, ''देश भर से यहां लोग आते हैं. हालांकि हमारे और सेंटर भी हैं, लेकिन एक ट्रेडिशनल जो मरीज का रहता है उसे भरोसा होता है कि अगर मुंबई टाटा मेमोरियल में पहुंच गए तो सब ठीक हो जाएगा।  हम ये पूरी कोशिश करते भी हैं. लेकिन चुनौती ये है कि कैंसर के मामले अब तेजी से बढ़ रहे हैं. और ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी इलाकों में इनकी तादाद ज्यादा है.'' डॉ. कुलकर्णी बताते हैं, ''शहरी जिंदगी का तनाव मोटापा और बिगड़ती लाइफस्टाइल इसकी सबसे बड़ी वजह है. दूसरा एक खतरा पेस्टिसाइड्स से भी है.'' वे कहते हैं, ''तनाव सीधे आपके शरीर के सेल्फ डिफेंस सिस्टम पर अटैक करता है. सीधे इम्यूनिटी प्रभावित होती है. तनाव से दूरी योग और एक्सरसाइज ये लाइफ स्टाइल में शामिल किये जाने की जरुरत है।  ये राज्य हैं जहां तेजी से फैल रहा है कैंसर भारत में उत्तर पूर्व के राज्य बिहार, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा इन राज्यों में इसोफेगस कैंसर, लंग्स कैंसर ओरल कैंसर और स्टमक कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल की डॉक्टर शर्मिला पिंपरे के मुताबिक, ''अगर हम एक औसत देखें तो अगर हर एक लाख लोगों में 110 लोगों को कैंसर है तो इन राज्यों में ये आंकड़ा 210 तक पहुंच रहा है. यहां पर मुख्य वजह फूड हैबिट्स के साथ स्मोकिंग भी है. इसी तरह से अगर हम महिलाओं में देखें तो ग्रामीण इलाकों से ज्यादा मामले ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के हैं।  आर्युवेद कैंसर में कितना कारगर क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी कैंसर पर किस तरह से पूरी रोकथाम हो सके, इसके लिए प्रयास चिकित्सा की दूसरी विधाओं में भी किए जा रहे हैं. टाटा मैमोरियल हॉस्पिटल एक पूरा सैटअप तैयार कर रहा है. जहां पर आयुष के डॉक्टर्स के साथ पहले आर्युवेद का मेडिकल कल्टिनेशन किया जाएगा. उसके बाद क्लीनिकल ट्रायल भी शुरु होंगे. महाराष्ट्र के खोपोली में इसकी तैयारी हो रही है।  डॉ. शर्मिला बताती हैं, ''आयुष युनानी जो भी दूसरी पद्धतियां हैं उनके भी क्लीनिकल ट्रायल होंगे और फिर एविडेंस के साथ हम इस निश्कर्ष पर पहुंच सकेंगे कि ये कितना कारगर है. खोपोली में 27 एकड़ में ये तैयारी चल रही है.'' वे कहती हैं, ''अभी लोग कीमोथैरेपी छोड़कर आर्युवेद ट्रीटमेंट लेते हैं. लेकिन क्लनिकली साबित हो जाने के बाद ही इस पर जाना चाहिए. इसके लिए ही हम प्रयास कर रहे हैं कि क्या एलोपैथिक के साथ इन दवाओं की भी मदद ली जा सकती है. लेकिन क्लीनिकल ट्रायल के बाद ही परिणाम जान लेने के बाद ही इस मामले में कुछ स्पष्ट हो सकेगा।  कैंसर रोकने अवेयरनेस कैम्प 13 से 15 साल के बच्चे टारगेट टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल केवल रोकथाम ही नहीं कैंसर के लिए जरुरी सावधानी क्या रखनी चाहिए इसके लिए भी जागरुकता अभियान चला रहा है. खास बात ये है कि ये कैम्पेन स्कूल के 13 से 15 साल के बच्चों को टारगेट करके डिजाइन किया गया है. टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल की डॉ मंजूर सैंगर बताती हैं, ''असल में इस एज ग्रुप को चुनने की खास वजह ये है कि ये बच्चे खुद तो स्मोकिग करने से पहले संभाल लेंगे. ये परिवार में भी एक कैटेलिस्ट बनेंगे और सिगरेट से लेकर एल्कोहल रोकने का काम करेंगे. ये बच्चे अगर इस उम्र में संभल गए तो कॉलेज में भी ये इस सबसे दूर रहेंगे। 

मध्य प्रदेश में कचरे के पहाड़ होंगे साफ, 30 से अधिक डंपिंग साइटों पर जमा 12 लाख टन कचरे का निपटारा

भोपाल  मध्य प्रदेश में वर्षों पुराने कचरे के ढेर आमजन के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं। राज्य सरकार ने तय किया है कि वर्ष 2027 तक कचरे के ढेर का शत-प्रतिशत निपटान किया जाएगा। प्रदेश के मुख्य सचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इसका हलफनामा भी दिया गया है। दरअसल, प्रदेश में वर्षों पुराने लैंडफिल, खुले मैदानों पर बिना किसी वैज्ञानिक प्रबंधन के जमा हुए कचरे के पुराने ढेर हैं। प्रदेश की 30 से अधिक डंपिंग साइटों पर 12 लाख टन से ज्यादा कचरा इकट्ठा होने की जानकारी सामने आई है। सरकार का दावा है कि इसका थर्ड पार्टी सत्यापन भी कराया जा रहा है। वर्षों से लैंडफिल या अन्य स्थानों पर जमा हो गए कचरे से पर्यावरण पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इसे प्रतिबंधित करने के लिए बायोरेमेडिएशन, जैव-खनन (बायोमाइनिंग), और स्थिरीकरण जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है। यह एक चुनौती है लेकिन इसे संसाधित करके भूमि को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे में राज्य सरकार ने तय किया कि अगले वर्ष तक शहरों से ऐसे कचरे ढेर साफ किए जाएंगे। बता दें, जून 2026 तक लीगेसी वेस्ट (वर्षों पुराने कचरे के ढेर) का अनिवार्य रूप से निपटान करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन यह संभव नहीं हो सका। इसके लिए बकायदा निकायों को यह भी घोषणा पत्र देने के निर्देश दिए गए थे कि उनके शहर में लीगेसी वेस्ट नहीं है। अब वर्ष 2027 के अंत तक कचरे के ढेर के निपटान का लक्ष्य रखा गया है। एक ओर मप्र के शहर स्वच्छता के सिरमौर, दूसरी तरफ वर्षों पुराना कचरा निपटान चुनौती मध्य प्रदेश के शहर स्वच्छता में देश में लगातार नंबर वन बने हुए है। आठ बार से इंदौर सबसे स्वच्छतम शहर बना हुआ है, दूसरे नंबर पर भोपाल है तो निकायों ने भी स्वच्छता में अपनी एक अलग जगह बनाई है। इन सबके बावजूद प्रदेश के शहरों में वर्षों से जमा कचरे का निपटान चुनौती बना हुआ है। यह कचरे का ढेर प्रदेश के स्वच्छता मिशन पर बट्टा लगा रहा है। ऐसे में लीगेसी वेस्ट प्रोजेक्ट को लेकर नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने समस्त आयुक्त एवं संभागीय संयुक्त संचालकों को निर्देशित किया है कि निकाय स्तर पर शत-प्रतिशत स्रोत पृथकीकरण एवं प्रतिदिन संग्रहित होने वाले कचरे का नियमित पूर्ण प्रसंस्करण हो। जिन नगरीय निकायों में लीगेसी वेस्ट डंपसाइट रेमेडिएशन का कार्य प्रगतिरत है। उनकी समीक्षा कर वर्ष 2027 तक कार्य पूर्ण करें।

इंदौर बनेगा नई परिवहन नीति का केंद्र, 11-12 सितंबर को होगा यात्री परिवहन विजन समिट

 इंदौर मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन की तस्वीर बदलने की तैयारी है। प्रदेश सरकार इंदौर में 11 और 12 सितंबर को यात्री परिवहन विजन समिट-2026 आयोजित करने जा रही है। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होने वाली दो दिवसीय समिट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। समिट का मुख्य फोकस मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा पर रहेगा। सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में यात्री परिवहन को केवल बसों की संख्या बढ़ाने तक सीमित न रखते हुए इसे आधुनिक तकनीक, बेहतर कनेक्टिविटी, डिजिटल सुविधाओं और निजी क्षेत्र की भागीदारी से जोड़ा जाए। निजी बस ऑपरेटर से लेकर टेक्नोलॉजी कंपनियां होंगी शामिल समिट में निजी बस ऑपरेटर, बस निर्माता, परिवहन विशेषज्ञ, नीति निर्माता, निवेशक, टेक्नोलॉजी कंपनियां और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन सभी के बीच प्रदेश की भविष्य की परिवहन व्यवस्था को लेकर चर्चा होगी। खास बात यह है कि सरकार पीपीपी मॉडल के जरिए यात्री बसों के संचालन को बढ़ावा देने की दिशा में भी रोडमैप तैयार करेगी। इससे निजी क्षेत्र को परिवहन व्यवस्था में बड़े स्तर पर भागीदारी का मौका मिलेगा।  बस सेवा से लेकर एआई तक पर होगी चर्चा समिट में यात्री परिवहन से जुड़े कई आधुनिक क्षेत्रों पर चर्चा होगी। इनमें इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन मोबिलिटी, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, डिजिटल टिकटिंग, फ्लीट मैनेजमेंट, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई और डेटा एनालिटिक्स, स्मार्ट बस स्टॉप, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम और मोबिलिटी फाइनेंस प्रमुख हैं। सरकार का जोर ऐसी परिवहन व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें यात्री को बस की जानकारी, टिकटिंग और यात्रा से जुड़ी सुविधाएं डिजिटल माध्यम से आसानी से मिल सकें।  12 क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं समिट में मोबिलिटी सेक्टर के 12 संभावनाशील क्षेत्रों को प्रमुखता से सामने रखा जाएगा। इनमें बस निर्माण, इलेक्ट्रिक एवं हाइड्रोजन मोबिलिटी, डिजिटल टिकटिंग, फ्लीट मैनेजमेंट, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई एवं एनालिटिक्स, स्मार्ट बस स्टॉप, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, मोबिलिटी-एज-ए-सर्विस और परिवहन वित्त जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के लिए मध्यप्रदेश में निवेश और साझेदारी के नए अवसर तलाशे जाएंगे।  सरकार और उद्योग के बीच सीधे संवाद पर जोर समिट की एक खास बात सरकार और उद्योग जगत के बीच सीधे संवाद को माना जा रहा है। इसमें शामिल कंपनियों को प्रदेश सरकार के संबंधित अधिकारियों के साथ वन-टू-वन बैठक का अवसर भी मिलेगा। कंपनियां अपने तकनीकी समाधान और बिजनेस मॉडल प्रस्तुत कर सकेंगी। इसके जरिए पायलट प्रोजेक्ट, निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी की संभावनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश होगी। मोबिलिटी विजन-2030 का रोडमैप होगा तैयार यात्री परिवहन विजन समिट से प्रदेश के लिए मोबिलिटी विजन-2030 को आगे बढ़ाने की दिशा में भी काम होगा। इसमें पीपीपी मॉडल को गति देने, डिजिटल-फर्स्ट मोबिलिटी फ्रेमवर्क तैयार करने, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने और सरकार-उद्योग के बीच सहयोग मजबूत करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। समिट में छह प्रमुख विषयों पर विशेष फोकस रहेगा। इनमें पीपीपी आधारित मोबिलिटी, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम, वित्तीय स्थिरता, स्वच्छ मोबिलिटी, एकीकृत टिकटिंग और बेहतर यात्री अनुभव शामिल हैं।  

इंदौर में 11-12 सितंबर को होगा ‘यात्री परिवहन विजन समिट-2026’, सुरक्षित और हरित परिवहन पर मंथन

सुरक्षित सफर और ग्रीन मोबिलिटी हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव इन्दौर में 11-12 सितम्बर को होगी ‘यात्री परिवहन विजन समिट-2026’ इन्दौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में आधुनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार के साथ सुरक्षित सफर और ग्रीन मोबिलिटी को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'एक्स' पर कहा कि मध्यप्रदेश में सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण अनुकूल यात्री परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से आगामी 11 एवं 12 सितम्बर को इंदौर में ‘यात्री परिवहन विजन समिट-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का संकल्प है कि हर यात्री को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक परिवहन मिले। सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और प्रभावी बनाने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यात्री परिवहन विजन समिट इसी दिशा में भविष्य की ठोस रूपरेखा तैयार करेगा। उल्लेखनीय है कि समिट में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण तथा इसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका पर विशेषज्ञों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। समिट का फोकस सुरक्षित परिवहन के साथ हरित परिवहन और बेहतर मोबिलिटी की दिशा में नए अवसर तलाशने पर केंद्रित रहेगा। यह समिट प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, टिकाऊ और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए संभावित निवेश और साझेदारी के नए द्वार खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।  

सेमीकंडक्टर सेक्टर में MP की बढ़ेगी भूमिका, मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- प्रदेश निभाएगा अग्रणी भूमिका

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में मध्यप्रदेश निभाएगा अग्रणी भूमिका : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई गति देने के लिए मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार है। मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर कहा कि राज्य में अत्याधुनिक तकनीक, निवेश और नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिससे मध्यप्रदेश देश के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण केंद्र बन सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेमीकंडक्टर तकनीक भारत के आत्मनिर्भर और विकसित भविष्य की आधारशिला है। देश में तकनीकी क्षेत्र में हो रहे बदलाव और विकास में मध्यप्रदेश भी सहभागी बन रहा है। सेमीकंडक्टर इंडिया प्रोग्राम 2.0 में मध्यप्रदेश अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। केंद्र सरकार द्वारा 6 राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने के बाद इस क्षेत्र में देश की गति तेज हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी नीतिगत पहल, निवेश-अनुकूल वातावरण और औद्योगिक क्षमता के जरिए इस राष्ट्रीय अभियान को नई ऊंचाई देगा। उल्लेखनीय है कि इंदौर में अगले महीने 23-24 अक्टूबर को ‘एमपी सेमीकंडक्टर समिट-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। समिट में देश-विदेश के निवेशक, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति-निर्माता एक मंच पर जुटेंगे। यहां प्रदेश में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने, निवेश की संभावनाओं, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार पर व्यापक विचार-मंथन होगा।  

Bank Holiday: 7-13 सितंबर के बीच कब और कहां बंद रहेंगे बैंक? यहां देखें राज्यवार सूची

नई दिल्ली आज  से नया हफ्ता शुरू हो रहा है. ऐसे में बहुत से लोग बैंक जाकर अपना काम निपटाने की तैयारी कर रहे होंगे.ज्यादातर लोग  ये सोच रहे होंगे कि इस हफ्ते किस दिन बैंक जाकर अपना काम निपटाया जाए. लेकिन बैंक जाने से पहले यह पता होना जरूरी है कि उस दिन आपके शहर में बैंक खुला है या बंद है.कहीं ऐसा न हो कि आप काम लेकर बैंक पहुंचें और वहां ताला लगा मिले.इससे आपका समय तो बर्बाद होगा ही इसके साथ आपको बेवजह बैंक के चक्कर भी काटने पड़ सकते हैं।  इसलिए  यहां हम आपको बता रहे हैं कि 7 से 13 सितंबर के बीच किस दिन, किस शहर में और किस वजह से बैंक बंद रहेंगे।  क्या 7 से 10 सितंबर के बीच बैंक खुले रहेंगे? भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के हॉलिडे लिस्ट के मुताबिक, 7 सितंबर से 10 सितंबर तक यानी  सोमवार से गुरुवार  तक ज्यादातर राज्यों में बैंक  खुले रहने वाले हैं.. हालांकि, बैंक की छुट्टियां राज्य और शहर के हिसाब से अलग हो सकती हैं. इसलिए अगर आपका काम जरूरी है, तो बैंक जाने से पहले अपने नजदीकी ब्रांच से जरूर कंफर्म करलें।  11 सितंबर को कहां-कहां बैंक बंद? 11 सितंबर, शुक्रवार को जयपुर में  निगम चुनाव की वजह से बैंक बंद रहेंगे. इस दिन जयपुर में बैंक शाखाओं में सामान्य कामकाज प्रभावित रहेगा. ऐसे में अगर आप जयपुर में रहते हैं और बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो पहले ही जाकर काम निपटा लेना चाहिए। 11 सितंबर को दिल्ली में सरकारी छुट्टी की घोषणा की गई है.यह फैसला 18वें ब्रिक्स लीडर्स समिट से पहले लिया गया है.ऐसे में दिल्ली में सरकारी ऑफिस  में कामकाज प्रभावित हो सकता है. इसका असर कुछ बैंक शाखाओं पर भी पड़ सकता है. हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि बैंक उस दिन बंद ही रहेगा. इसलिए दिल्ली में बैंक जाने से पहले बैंक की छुट्टियोंके बारे में पता कर लेना बेहतर रहेगा।  12 सितंबर को देशभर में बैंक बंद 12 सितंबर, शनिवार को देशभर में बैंक बंद रहेंगे.इस दिन असम के गुवाहाटी में श्रीमंत शंकरदेव की तिरोभाव तिथि के कारण भी बैंक बंद रहेंगे. आरबीआई के नियमों के मुताबिक, हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक शाखाओं में छुट्टी रहती है. इसके अलावा, सभी रविवार को भी देशभर में बैंक बंद रहते हैं।  13 सितंबर को बैंक में छुट्टी 13 सितंबर, रविवार को देशभर में बैंक बंद रहेंगे. रविवार को बैंक  में  साप्ताहिक छुट्टी होती है.इसलिए अगर आपको बैंक जाकर कोई काम कराना है, तो 12 और 13 सितंबर के दिन जाने का प्लानिंग न करें।  सितंबर में आगे कब-कब बंद रहेंगे बैंक? सितंबर में आने वाले दिनों में भी कई शहरों में गणेश चतुर्थी सहित  क्षेत्रीय छुट्टियों  और वीकेंड के कारण बैंक बंद रह सकते हैं.. यहां जानिए आने वाले दिनों में कब-कब बैंक की छुट्टी रहेगी…     14 सितंबर को गणेश चतुर्थी और अन्य क्षेत्रीय त्योहारों के कारण बेलापुर, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई, नागपुर, पणजी और विजयवाड़ा में बैंक बंद रहेंगे.     15 सितंबर को संवत्सरी, नुआखाई और गणेश चतुर्थी के कारण अहमदाबाद, भुवनेश्वर और पणजी में बैंक की छुट्टी रहेगी.     21 सितंबर को श्रीमंत शंकरदेव जन्मोत्सव और श्री नारायण गुरु समाधि के कारण भुवनेश्वर और तिरुवनंतपुरम में बैंक बंद रहेंगे.     22 सितंबर को करमा पूजा के कारण रांची में बैंक की छुट्टी रहेगी.     23 सितंबर को महाराजा हरि सिंह जी की जयंती के कारण जम्मू और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे.     25 सितंबर को इंद्रजात्रा के कारण गंगटोक में बैंक की छुट्टी रहेगी.     26 सितंबर को महीने का चौथा शनिवार है. इसलिए देशभर में बैंक बंद रहेंगे. बैंक बंद होने पर भी बिना दिक्कत के हो जाएंगे ये सारे काम ज्यादातर लोग ये सोच कर परेशान हो जाते हैं कि बैंक बंद है तो पैसे के लेनदेन जैसे जरूरी काम कैसे होगा. आपको बता दें कि इसके लिए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि बैंक बंद होने का मतलब यह नहीं है कि उस दिन बैंकिंग से जुड़े काम सारे के सारे अटक जाएंगे. बैंक छुट्टी के दिन भी आप इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एनईएफटी, आरटीजीएस और एटीएम जैसी सर्विस का इस्तेमाल कर सकते हैं।  यानी दोस्तों और परिवार को लोगों को जब चाहे पैसे भेज सकते हैं, जरूरत पड़ने पर UPI से पहले मंगा सकते हैं…और कैश की जरूरत पड़े तो बैंक जाकर फटाफट पैसे निकाल सकते हैं.  हालांकि, जो काम बैक ब्रांच में जाकर होने वाला है, जैसे  चेक से जुड़े काम या डॉक्यूमेंट जमा करना ये सबछुट्टी के दिन नहीं हो पाएंगे. ये तभी होगा जब बैंक खुलेंगे।   

PM Kisan की 24वीं किस्त से पहले किसान कर लें ये काम, लैंड सीडिंग नहीं हुई तो नहीं मिलेगा पैसा

नई दिल्ली  देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बार फिर खुशखबरी है. पीएम किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाली 2,000 रुपये की राशि की 24वीं किस्त अगले महीने अक्टूबर में आ सकती है. इस योजना के तहत सालभर में कुल 6,000 रुपये मिलते हैं, जो 2-2 हजार की तीन किस्तों में जारी किए जाते हैं. योजना की 23वीं किस्त जून महीने में जारी की गई थी. इस लिहाज से अक्टूबर में फिर 4 महीने पूरे होने पर 24वीं किस्त जारी होने की पूरी संभावना है. इस बार योजना की समीक्षा को और पुख्ता बनाया जा रहा है, जिसके लिए पात्र किसानों को लैंड सीडिंग करवाना जरूरी होगा, तभी किस्त का पैसा मिलेगा।  योजना से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि अक्टूबर में त्योहारी सीजन भी शुरू हो रहा है. नवरात्र की शुरुआत के साथ ही हिंदू त्योहारों का भी श्रीगणेश हो जाएगा. यही वजह है कि अगले महीने 24वीं किस्त के आने की प्रबल संभावना जताई जा रही है. सरकार ने इस योजना की लगातार समीक्षा भी की है, ताकि पात्र किसानों को इसका फायदा दिलाया जा सके. इसी प्रक्रिया में किसानों की ई-केवाईसी कराने के साथ ही लैंड सीडिंग कराने का भी निर्देश जारी किया गया है।  कुछ किसानों को मिलेंगे 4 हजार रुपये इस बार कुछ किसानों को 2 की जगह 4 हजार मिलने की संभावना है. दरअसल, 23वीं किस्त में कई किसानों को उनकी ई-केवाईसी और जमीन का सत्यापन पूरा नहीं होने की वजह से पैसा नहीं मिला था. ऐसे में जिन किसानों ने अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा कर लिया और जमीनों का सत्यापन भी हो चुका है, उन्हें पिछला बकाया भी मिल जाएगा. इसका मतलब है कि 24वीं किस्त के साथ ही 23वीं किस्त का पैसा भी दिया जाएगा. इस तरह, तमाम किसानों के खाते में इस बार 2 की जगह 4 हजार की राशि आएगी. अगर आपकी भी 23वीं किस्त का पैसा नहीं मिला है तो सभी सत्यापन और ई-केवाईसी पूरी कर लें ताकि पिछले किस्त का पैसा भी मिल सके।  बिना लैंड सीडिंग के नहीं मिलेगा पैसा इस बार बिना लैंड सीडिंग के किसानों को 24वीं किस्त का पैसा नहीं मिलेगा. लैंड सीडिंग का मतलब है कि किसानों की जमीन की जानकारी को पीएम किसान के रिकॉर्ड से जोड़ना और उसका सत्यापन करना. दरअसल, पीएम किसान योजना में उन्हीं लैंड होल्डिंग किसानों को इसका फायदा दिया जाएगा, जिनकी पात्रता राज्य सरकारों के भूमि रिकॉर्ड में दर्ज होती है. लिहाजा अगर आपको भी योजना के तहत 24वीं किस्त का पैसा उठाना है तो इसकी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना जरूरी होगा।  कैसे सुधारें अपनी लैंड सीडिंग     किसी किसान को अगर अपनी जमीन के स्टेटस से जुड़ी कोई समस्या दिखती है तो सबसे पहले राज्य सरकार के भूमि रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना और जमीन की जानकारी देनी चाहिए।      किसान अपने जिले के राजस्व विभाग या सरकार की निर्धारित व्यवस्था के जरिये अपने रिकॉर्ड में सुधार करा सकते हैं।      किसान चाहें तो पीएम किसान की वेबसाइट पर जाकर नो योर स्टेटस के जरिये अपने भुगतान और ई-केवाईसी से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।      इसके लिए pmkisan.gov.in पर जाएं और रजिस्ट्रेशन नंबर व कैप्चा डालकर ओटीपी के जरिये लॉग इन करें।   

महाकाल सवारी को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 2000 से ज्यादा पुलिसकर्मी रहेंगे तैनात

उज्जैन  भगवान महाकालेश्वर की सोमवार को निकलने वाली राजसी सवारी को लेकर पुलिस ने सुरक्षा का अभेद घेरा तैयार किया है। सवारी मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में 2000 से ज्यादा पुलिस अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहेंगे। भीड़ में होने वाली चोरी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 100 से ज्यादा जवान सादी वर्दी में तैनात किए जाएंगे। वहीं 100 से ज्यादा ऊंचे भवनों से पुलिसकर्मी पूरे सवारी मार्ग पर निगरानी रखेंगे। आसमान से 10 ड्रोन कैमरे और जमीन पर सीसीटीवी कैमरों के जरिये भी लगातार निगरानी की जाएगी। एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि सवारी की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए इंदौर, देवास, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, दतिया, शिवपुरी से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। ड्यूटी में लगाए गए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सवारी मार्ग, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर होटल, लाज और धर्मशालाओं की भी लगातार चेकिंग की जा रही है। राजसी सवारी में उमड़ने वाली भारी भीड़ के बीच मोबाइल, पर्स, मंगलसूत्र और चेन चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस ने विशेष टीम बनाई है। 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी सादी वर्दी में भीड़ के बीच तैनात रहेंगे। संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। सवारी व्यवस्था में करीब 100 महिला पुलिसकर्मियों की भी ड्यूटी लगाई गई है। 20 मार्गों पर प्रतिबंध, सात जगह पार्किंग राजसी सवारी के दौरान शहर में यातायात व्यवस्था भी बदली रहेगी। यातायात पुलिस ने 20 मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित करने और जरूरत के अनुसार कुछ मार्गों को डायवर्ट करने की योजना बनाई है। श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए सात स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है। यातायात डीएसपी दिलीपसिंह परिहार ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग बनाई गई है। भोपाल, इंदौर और देवास की ओर से आने वाले श्रद्धालु वाकणकर पार्किंग, मन्नत गार्डन, हरिफाटक ब्रिज के नीचे और कर्कराज पार्किंग में वाहन खड़े कर सकेंगे। बड़नगर और नागदा की ओर से आने वाले श्रद्धालु- कार्तिक मेला मैदान, मक्सी और आगर की ओर से आने वाले श्रद्धालु क्षीरसागर स्टेडियम और सामाजिक न्याय परिसर में वाहन पार्क करेंगे। इन मार्गों पर वाहनों का प्रवेश रहेगा प्रतिबंधित     हरिफाटक टी से बेगमबाग की तरफ जाने वाले सभी प्रकार के वाहन।     दानीगेट से रामानुज कोट तरफ जाने वाले समस्त प्रकार के वाहन।     गुदरी चौराहा से कहारवाड़ी से होकर रामघाट तरफ जाने वाले वाहन।     तेलीवाड़ा से कमरीमार्ग तरफ आने वाले सभी प्रकार के वाहन।     निकास चौराहा से तेलीवाडा की ओर वाहन नहीं ले जा सकेंगे।     क्षीरसागर से कंठाल चौराहा की ओर।     बियावानी से तेलीवाड़ा की तरफ।     नरेंद्र टॉकीज से कंठाल तरफ आने वाले समस्त प्रकार के वाहन।     दानीगेट से रामानुज कोट तरफ, गुदरी चौराहा से कहारवाडी से होकर रामघाट, तेलीवाड़ा से कमरी मार्ग तरफ आने वाले समस्त प्रकार के वाहन प्रतिबंधित रहेंगे।     भार्गव तिराहे से टंकी चौक तरफ, केडी गेट से कमरीमार्ग तरफ आने वाले, चक्रतीर्थ टर्निंग से दानीगेट तरफ, शंकराचार्य से दानीगेट, तोपखाने से लोहे का पुल, नलिया बाखल से बेगमबाम चौराहा, बारह खोली से बेगमबाग की तरफ सभी प्रकार के वाहन प्रतिबंधित रहेंगे। इन मार्गों से होगी आकस्मिक निकासी     महाकाल घाटी से हरिफाटक टी, हरिफाटक चौराहा।     महाकाल घाटी से लोहे का पुल होते हुए दौलतगंज, देवासगेट।     गणगौर दरवाजे से छोटी रपट होते हुए।     कमरी मार्ग से केडी गेट होते हुए पत्ती बजार, जूना सोमवारिया।     मुसद्दीपुरा चौराहा से डाबरी पीठा होकर नई सड़क।     भगत जी चौराहे से छोटा सराफा होकर नमकमंड़ी से नई सड़क ।     छत्री चौक बैंक आफ इंडिया के सामने से लखेरवाड़ी होकर लोहे का पुल अथवा नमक मंड होकर नई सड़क।     हरिसिद्धि पाल से हरसिद्धि तरफ।     गुदरी चौराहा से कसाई बाडा बांसफोड़ की गली तरफ।  

8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों को मिल सकते हैं 14 लाख रुपये तक, जानिए कैसे बनेगा पूरा हिसाब

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग की टीम अब अगली बैठक चेन्‍नई में करने वाली है. इसके बाद कुछ और शहारों में इसकी बैठक होगी, फिर फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी. इसके बाद कर्मचारी कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार करेंगे, तब जाकर 8वां वेतन आयोग देश में लागू कर दिया जाएगा।  1 करोड़ से ज्‍यादा के कर्मचारी और पेंशनर्स भले ही 8वां वेतन आयोग कभी भी लागू किया जाए, लेकिन यह जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जनवरी 2026 से जोड़कर एक साथ एरियर भेजा जाएगा. आइए जानते हैं यह एरियर कितना हो सकता है।  14 लाख रुपये से ज्‍यादा का एरियर एक कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर 8वां वेतन आयोग लागू होने में 20 महीने की देरी होती है, तो लेवल 7 के कर्मचारियों को 20 महीने के एरियर के तौर पर ₹14 लाख से ज्‍यादा का अमाउंट एकमुश्‍त मिल सकता है. अब आइए जानते हैं लेवल 4 से 7 तक के बीच कर्मचारियों को कितना एरियर दिया जाएगा।     वेतन आयोग के लागू होने में जितनी देरी होगी, बकाया यानी एरियर की रकम उतनी ही बड़ी होती जाएगी. सूत्रों और एक्‍सपर्ट्स का अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग की स‍िफारिशों को पूरी तरह से लागू होने में करीब 20 महीने या उससे ज्‍यादा का समय लग सकता है।         कितना फिटमेंट फैक्‍टर?  अगर 2.57 के फिटमेंट फैक्‍टर के आधार पर बेसिक सैलरी का कैलकुलेशन किया जाता है, तो मंथली पे ज्‍यादा होगा और उतना ही कर्मचरियों को एरियर दिया जाएगा. यह एरियर कर्मचारियों और पेंशनर्स को एकसाथ भेजा जा सकता है।         लेवल 7 के कर्मचारियों की कुल सैलरी एरियर अनुमानित बेसिक पे 7वें वेतन आयोग के तहत 44,900 रुपये माने, तो 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर पर 8वें वेतन आयोग के तहत अनुमानित बेसिक पे ₹1,15,393 होगा. ऐसे में मंथली एरियर ₹70,493 बनेगा और अब 20 महीने का कुल एरियर देखें तो ₹70,493 ✕ 20 = ₹14,09,860 यानी 14.10 लाख रुपये होगा।         लेवल 6 से 4 लेवल तक के कर्मचारियों का कितना एरियर बनेगा  इसी आधार पर कैलकुलेशन करें तो लेवल 6 के कर्मचारियों का 20 महीने बाद एरियर ₹11.11 लाख, लेवल-5 के कर्मचारियों का एरियर ₹9.13 लाख और लेवल-4 के कर्मचारियों को एरियर ₹8 लाख रुपये होगा। 

S-400 की कामयाबी से बढ़ा भरोसा, भारत ने रूस से 5 और सिस्टम खरीदने की तैयारी की

नई दिल्ली रूस ने भारत को 5 और एस-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस सिस्टम देने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मॉस्को ने नई दिल्ली को बिल ऑफ क्वांटिटीज (BOQ) प्रस्ताव भेज दिया है, जिसमें निर्माण और अन्य सामग्री की लागत का ब्योरा दिया गया है। साथ ही दोनों देशों के बीच कीमत को लेकर बातचीत शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने 2018 में रूस के साथ 5.43 अरब डॉलर में 5 एस-400 सिस्टम का सौदा किया था। इस करार के तहत 5वीं और आखिरी प्रणाली नवंबर 2026 में भारत पहुंचने की उम्मीद है। नई खरीद को लेकर अंतिम फैसला कीमत तय होने और वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति करेगी। इस बीच रूस से 2 स्क्वाड्रन एसयू-57 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने को लेकर भी चर्चा तेज है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर भारत ने अभी तक एसयू-57 खरीदने का कोई फैसला नहीं किया है। भारतीय वायुसेना ने रूस के प्रस्ताव में जरूर दिलचस्पी दिखाई है। इसकी एक बड़ी वजह चीन की पांचवीं पीढ़ी के जे-20 लड़ाकू विमानों की तिब्बत में तैनाती मानी जा रही है। चीनी सेना ने पश्चिमी थिएटर कमांड के तहत होतान, ल्हासा और न्यिंगची जैसे हवाई ठिकानों पर जे-20 की मौजूदगी बढ़ाई है। ऐसे में भारत अपनी वायु रक्षा और लड़ाकू विमान क्षमता को मजबूत करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। विमान को सीमा से 314 किमी दूर से बनाया निशाना S-400 सिस्टम ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, एस-400 की लंबी दूरी की मिसाइल ने पाकिस्तान के एक हवाई चेतावनी विमान को भारतीय सीमा से करीब 314 किलोमीटर दूर निशाना बनाया था। पाकिस्तान ने आदमपुर और भुज जैसे हवाई ठिकानों पर तैनात एस-400 प्रणालियों को निशाना बनाने के लिए कामिकेज ड्रोन का इस्तेमाल किया, लेकिन भारतीय वायु रक्षा व्यवस्था के कारण पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भारतीय सीमा के करीब आने से बचते रहे। भारतीय S-400 और आकाश-टीयर सिस्टम की भूमिका को इस दौरान अहम बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 10 मई 2025 को पाकिस्तान वायुसेना ने अपने कई हवाई संसाधनों को अफगानिस्तान से लगी डूरंड रेखा के नजदीक स्थित ठिकानों की ओर शिफ्ट कर दिया था। इससे पहले भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तान के कई हवाई ठिकानों को निशाना बनाया था। इसी दौरान भारतीय एस-400 और आकाश-टीयर वायु रक्षा प्रणालियों की ओर से पाकिस्तानी विमानों को नुकसान पहुंचाया गया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 11 से 13 सितंबर के बीच दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आने की संभावना है। इस बीच, भारत-रूस रक्षा सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।