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PM Kisan की 24वीं किस्त से पहले किसान कर लें ये काम, लैंड सीडिंग नहीं हुई तो नहीं मिलेगा पैसा

नई दिल्ली  देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बार फिर खुशखबरी है. पीएम किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाली 2,000 रुपये की राशि की 24वीं किस्त अगले महीने अक्टूबर में आ सकती है. इस योजना के तहत सालभर में कुल 6,000 रुपये मिलते हैं, जो 2-2 हजार की तीन किस्तों में जारी किए जाते हैं. योजना की 23वीं किस्त जून महीने में जारी की गई थी. इस लिहाज से अक्टूबर में फिर 4 महीने पूरे होने पर 24वीं किस्त जारी होने की पूरी संभावना है. इस बार योजना की समीक्षा को और पुख्ता बनाया जा रहा है, जिसके लिए पात्र किसानों को लैंड सीडिंग करवाना जरूरी होगा, तभी किस्त का पैसा मिलेगा।  योजना से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि अक्टूबर में त्योहारी सीजन भी शुरू हो रहा है. नवरात्र की शुरुआत के साथ ही हिंदू त्योहारों का भी श्रीगणेश हो जाएगा. यही वजह है कि अगले महीने 24वीं किस्त के आने की प्रबल संभावना जताई जा रही है. सरकार ने इस योजना की लगातार समीक्षा भी की है, ताकि पात्र किसानों को इसका फायदा दिलाया जा सके. इसी प्रक्रिया में किसानों की ई-केवाईसी कराने के साथ ही लैंड सीडिंग कराने का भी निर्देश जारी किया गया है।  कुछ किसानों को मिलेंगे 4 हजार रुपये इस बार कुछ किसानों को 2 की जगह 4 हजार मिलने की संभावना है. दरअसल, 23वीं किस्त में कई किसानों को उनकी ई-केवाईसी और जमीन का सत्यापन पूरा नहीं होने की वजह से पैसा नहीं मिला था. ऐसे में जिन किसानों ने अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा कर लिया और जमीनों का सत्यापन भी हो चुका है, उन्हें पिछला बकाया भी मिल जाएगा. इसका मतलब है कि 24वीं किस्त के साथ ही 23वीं किस्त का पैसा भी दिया जाएगा. इस तरह, तमाम किसानों के खाते में इस बार 2 की जगह 4 हजार की राशि आएगी. अगर आपकी भी 23वीं किस्त का पैसा नहीं मिला है तो सभी सत्यापन और ई-केवाईसी पूरी कर लें ताकि पिछले किस्त का पैसा भी मिल सके।  बिना लैंड सीडिंग के नहीं मिलेगा पैसा इस बार बिना लैंड सीडिंग के किसानों को 24वीं किस्त का पैसा नहीं मिलेगा. लैंड सीडिंग का मतलब है कि किसानों की जमीन की जानकारी को पीएम किसान के रिकॉर्ड से जोड़ना और उसका सत्यापन करना. दरअसल, पीएम किसान योजना में उन्हीं लैंड होल्डिंग किसानों को इसका फायदा दिया जाएगा, जिनकी पात्रता राज्य सरकारों के भूमि रिकॉर्ड में दर्ज होती है. लिहाजा अगर आपको भी योजना के तहत 24वीं किस्त का पैसा उठाना है तो इसकी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना जरूरी होगा।  कैसे सुधारें अपनी लैंड सीडिंग     किसी किसान को अगर अपनी जमीन के स्टेटस से जुड़ी कोई समस्या दिखती है तो सबसे पहले राज्य सरकार के भूमि रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना और जमीन की जानकारी देनी चाहिए।      किसान अपने जिले के राजस्व विभाग या सरकार की निर्धारित व्यवस्था के जरिये अपने रिकॉर्ड में सुधार करा सकते हैं।      किसान चाहें तो पीएम किसान की वेबसाइट पर जाकर नो योर स्टेटस के जरिये अपने भुगतान और ई-केवाईसी से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।      इसके लिए pmkisan.gov.in पर जाएं और रजिस्ट्रेशन नंबर व कैप्चा डालकर ओटीपी के जरिये लॉग इन करें।   

महाकाल सवारी को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 2000 से ज्यादा पुलिसकर्मी रहेंगे तैनात

उज्जैन  भगवान महाकालेश्वर की सोमवार को निकलने वाली राजसी सवारी को लेकर पुलिस ने सुरक्षा का अभेद घेरा तैयार किया है। सवारी मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में 2000 से ज्यादा पुलिस अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहेंगे। भीड़ में होने वाली चोरी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 100 से ज्यादा जवान सादी वर्दी में तैनात किए जाएंगे। वहीं 100 से ज्यादा ऊंचे भवनों से पुलिसकर्मी पूरे सवारी मार्ग पर निगरानी रखेंगे। आसमान से 10 ड्रोन कैमरे और जमीन पर सीसीटीवी कैमरों के जरिये भी लगातार निगरानी की जाएगी। एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि सवारी की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए इंदौर, देवास, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, दतिया, शिवपुरी से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। ड्यूटी में लगाए गए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सवारी मार्ग, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर होटल, लाज और धर्मशालाओं की भी लगातार चेकिंग की जा रही है। राजसी सवारी में उमड़ने वाली भारी भीड़ के बीच मोबाइल, पर्स, मंगलसूत्र और चेन चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस ने विशेष टीम बनाई है। 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी सादी वर्दी में भीड़ के बीच तैनात रहेंगे। संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। सवारी व्यवस्था में करीब 100 महिला पुलिसकर्मियों की भी ड्यूटी लगाई गई है। 20 मार्गों पर प्रतिबंध, सात जगह पार्किंग राजसी सवारी के दौरान शहर में यातायात व्यवस्था भी बदली रहेगी। यातायात पुलिस ने 20 मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित करने और जरूरत के अनुसार कुछ मार्गों को डायवर्ट करने की योजना बनाई है। श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए सात स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है। यातायात डीएसपी दिलीपसिंह परिहार ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग बनाई गई है। भोपाल, इंदौर और देवास की ओर से आने वाले श्रद्धालु वाकणकर पार्किंग, मन्नत गार्डन, हरिफाटक ब्रिज के नीचे और कर्कराज पार्किंग में वाहन खड़े कर सकेंगे। बड़नगर और नागदा की ओर से आने वाले श्रद्धालु- कार्तिक मेला मैदान, मक्सी और आगर की ओर से आने वाले श्रद्धालु क्षीरसागर स्टेडियम और सामाजिक न्याय परिसर में वाहन पार्क करेंगे। इन मार्गों पर वाहनों का प्रवेश रहेगा प्रतिबंधित     हरिफाटक टी से बेगमबाग की तरफ जाने वाले सभी प्रकार के वाहन।     दानीगेट से रामानुज कोट तरफ जाने वाले समस्त प्रकार के वाहन।     गुदरी चौराहा से कहारवाड़ी से होकर रामघाट तरफ जाने वाले वाहन।     तेलीवाड़ा से कमरीमार्ग तरफ आने वाले सभी प्रकार के वाहन।     निकास चौराहा से तेलीवाडा की ओर वाहन नहीं ले जा सकेंगे।     क्षीरसागर से कंठाल चौराहा की ओर।     बियावानी से तेलीवाड़ा की तरफ।     नरेंद्र टॉकीज से कंठाल तरफ आने वाले समस्त प्रकार के वाहन।     दानीगेट से रामानुज कोट तरफ, गुदरी चौराहा से कहारवाडी से होकर रामघाट, तेलीवाड़ा से कमरी मार्ग तरफ आने वाले समस्त प्रकार के वाहन प्रतिबंधित रहेंगे।     भार्गव तिराहे से टंकी चौक तरफ, केडी गेट से कमरीमार्ग तरफ आने वाले, चक्रतीर्थ टर्निंग से दानीगेट तरफ, शंकराचार्य से दानीगेट, तोपखाने से लोहे का पुल, नलिया बाखल से बेगमबाम चौराहा, बारह खोली से बेगमबाग की तरफ सभी प्रकार के वाहन प्रतिबंधित रहेंगे। इन मार्गों से होगी आकस्मिक निकासी     महाकाल घाटी से हरिफाटक टी, हरिफाटक चौराहा।     महाकाल घाटी से लोहे का पुल होते हुए दौलतगंज, देवासगेट।     गणगौर दरवाजे से छोटी रपट होते हुए।     कमरी मार्ग से केडी गेट होते हुए पत्ती बजार, जूना सोमवारिया।     मुसद्दीपुरा चौराहा से डाबरी पीठा होकर नई सड़क।     भगत जी चौराहे से छोटा सराफा होकर नमकमंड़ी से नई सड़क ।     छत्री चौक बैंक आफ इंडिया के सामने से लखेरवाड़ी होकर लोहे का पुल अथवा नमक मंड होकर नई सड़क।     हरिसिद्धि पाल से हरसिद्धि तरफ।     गुदरी चौराहा से कसाई बाडा बांसफोड़ की गली तरफ।  

8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों को मिल सकते हैं 14 लाख रुपये तक, जानिए कैसे बनेगा पूरा हिसाब

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग की टीम अब अगली बैठक चेन्‍नई में करने वाली है. इसके बाद कुछ और शहारों में इसकी बैठक होगी, फिर फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी. इसके बाद कर्मचारी कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार करेंगे, तब जाकर 8वां वेतन आयोग देश में लागू कर दिया जाएगा।  1 करोड़ से ज्‍यादा के कर्मचारी और पेंशनर्स भले ही 8वां वेतन आयोग कभी भी लागू किया जाए, लेकिन यह जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जनवरी 2026 से जोड़कर एक साथ एरियर भेजा जाएगा. आइए जानते हैं यह एरियर कितना हो सकता है।  14 लाख रुपये से ज्‍यादा का एरियर एक कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर 8वां वेतन आयोग लागू होने में 20 महीने की देरी होती है, तो लेवल 7 के कर्मचारियों को 20 महीने के एरियर के तौर पर ₹14 लाख से ज्‍यादा का अमाउंट एकमुश्‍त मिल सकता है. अब आइए जानते हैं लेवल 4 से 7 तक के बीच कर्मचारियों को कितना एरियर दिया जाएगा।     वेतन आयोग के लागू होने में जितनी देरी होगी, बकाया यानी एरियर की रकम उतनी ही बड़ी होती जाएगी. सूत्रों और एक्‍सपर्ट्स का अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग की स‍िफारिशों को पूरी तरह से लागू होने में करीब 20 महीने या उससे ज्‍यादा का समय लग सकता है।         कितना फिटमेंट फैक्‍टर?  अगर 2.57 के फिटमेंट फैक्‍टर के आधार पर बेसिक सैलरी का कैलकुलेशन किया जाता है, तो मंथली पे ज्‍यादा होगा और उतना ही कर्मचरियों को एरियर दिया जाएगा. यह एरियर कर्मचारियों और पेंशनर्स को एकसाथ भेजा जा सकता है।         लेवल 7 के कर्मचारियों की कुल सैलरी एरियर अनुमानित बेसिक पे 7वें वेतन आयोग के तहत 44,900 रुपये माने, तो 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर पर 8वें वेतन आयोग के तहत अनुमानित बेसिक पे ₹1,15,393 होगा. ऐसे में मंथली एरियर ₹70,493 बनेगा और अब 20 महीने का कुल एरियर देखें तो ₹70,493 ✕ 20 = ₹14,09,860 यानी 14.10 लाख रुपये होगा।         लेवल 6 से 4 लेवल तक के कर्मचारियों का कितना एरियर बनेगा  इसी आधार पर कैलकुलेशन करें तो लेवल 6 के कर्मचारियों का 20 महीने बाद एरियर ₹11.11 लाख, लेवल-5 के कर्मचारियों का एरियर ₹9.13 लाख और लेवल-4 के कर्मचारियों को एरियर ₹8 लाख रुपये होगा। 

S-400 की कामयाबी से बढ़ा भरोसा, भारत ने रूस से 5 और सिस्टम खरीदने की तैयारी की

नई दिल्ली रूस ने भारत को 5 और एस-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस सिस्टम देने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मॉस्को ने नई दिल्ली को बिल ऑफ क्वांटिटीज (BOQ) प्रस्ताव भेज दिया है, जिसमें निर्माण और अन्य सामग्री की लागत का ब्योरा दिया गया है। साथ ही दोनों देशों के बीच कीमत को लेकर बातचीत शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने 2018 में रूस के साथ 5.43 अरब डॉलर में 5 एस-400 सिस्टम का सौदा किया था। इस करार के तहत 5वीं और आखिरी प्रणाली नवंबर 2026 में भारत पहुंचने की उम्मीद है। नई खरीद को लेकर अंतिम फैसला कीमत तय होने और वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति करेगी। इस बीच रूस से 2 स्क्वाड्रन एसयू-57 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने को लेकर भी चर्चा तेज है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर भारत ने अभी तक एसयू-57 खरीदने का कोई फैसला नहीं किया है। भारतीय वायुसेना ने रूस के प्रस्ताव में जरूर दिलचस्पी दिखाई है। इसकी एक बड़ी वजह चीन की पांचवीं पीढ़ी के जे-20 लड़ाकू विमानों की तिब्बत में तैनाती मानी जा रही है। चीनी सेना ने पश्चिमी थिएटर कमांड के तहत होतान, ल्हासा और न्यिंगची जैसे हवाई ठिकानों पर जे-20 की मौजूदगी बढ़ाई है। ऐसे में भारत अपनी वायु रक्षा और लड़ाकू विमान क्षमता को मजबूत करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। विमान को सीमा से 314 किमी दूर से बनाया निशाना S-400 सिस्टम ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, एस-400 की लंबी दूरी की मिसाइल ने पाकिस्तान के एक हवाई चेतावनी विमान को भारतीय सीमा से करीब 314 किलोमीटर दूर निशाना बनाया था। पाकिस्तान ने आदमपुर और भुज जैसे हवाई ठिकानों पर तैनात एस-400 प्रणालियों को निशाना बनाने के लिए कामिकेज ड्रोन का इस्तेमाल किया, लेकिन भारतीय वायु रक्षा व्यवस्था के कारण पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भारतीय सीमा के करीब आने से बचते रहे। भारतीय S-400 और आकाश-टीयर सिस्टम की भूमिका को इस दौरान अहम बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार, 10 मई 2025 को पाकिस्तान वायुसेना ने अपने कई हवाई संसाधनों को अफगानिस्तान से लगी डूरंड रेखा के नजदीक स्थित ठिकानों की ओर शिफ्ट कर दिया था। इससे पहले भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तान के कई हवाई ठिकानों को निशाना बनाया था। इसी दौरान भारतीय एस-400 और आकाश-टीयर वायु रक्षा प्रणालियों की ओर से पाकिस्तानी विमानों को नुकसान पहुंचाया गया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 11 से 13 सितंबर के बीच दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आने की संभावना है। इस बीच, भारत-रूस रक्षा सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अकाली दल के सामने सियासी संकट, जनाधार खिसका और BJP से गठबंधन की राह भी मुश्किल

 जालंधर  पंजाब में अकाली दल के सामने पंथक वोट बैंक को एकजुट करने की बड़ी चुनौती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का मत प्रतिशत घटकर महज 13.42 फीसदी रह गया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे केवल तीन सीटें मिली थीं। यह गिरावट 2017 के बाद से लगातार जारी है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में उसकी पकड़ कमजोर हुई है। पार्टी को अब अपने बिखरे हुए राजनीतिक आधार को फिर से संगठित करना होगा। अकाली दल को 2014 में 26.30 फीसदी और 2019 में 27.45 फीसदी वोट मिले थे लेकिन 2024 में यह आंकड़ा 13.42 फीसदी पर आ गया जिससे पार्टी सिर्फ बठिंडा लोकसभा सीट जीत सकी। इस बीच, सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) को 2024 में करीब 3.82 फीसदी वोट मिले।  निर्दलीय उम्मीदवार अमृतपाल सिंह और सरबजीत सिंह खालसा की जीत ने भी पंथक वोटों के बिखराव को दर्शाया। इन नतीजों से स्पष्ट है कि अकाली दल से दूर हुआ पंथक वोट कांग्रेस, आम आदमी पार्टी या भाजपा के पास पूरी तरह नहीं गया बल्कि इसका एक हिस्सा नई पंथक राजनीति की ओर मुड़ गया है। सुखबीर बादल के नेतृत्व वाला अकाली दल अपने पुराने संगठन को बचाने का प्रयास कर रहा है। वहीं पुनर्सुरजीत धड़ा और वारिस पंजाब दे जैसे समूह भी अपनी पहचान बना रहे हैं। यह स्थिति अकाली राजनीति के सामने विरोधी दलों से भी बड़ी चुनौती पेश करती है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान संकट 1966 में नए पंजाब के गठन के बाद अकाली दल ने क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत जगह बनाई। पार्टी ने 1977, 1985, 1997, 2007 और 2012 में सत्ता हासिल की। हालांकि, 2017 के बाद से इसके चुनावी प्रदर्शन में लगातार गिरावट आई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी तीन सीटों तक सिमट गई। 2024 के लोकसभा चुनाव में मत प्रतिशत में भारी कमी ने इस संकट को और गहरा किया है। नई पंथक राजनीति की ओर गया वोट अकाली दल का वोट बैंक पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसका एक बड़ा हिस्सा अब अलग-अलग पंथिक राजनीतिक धाराओं में बंट गया है। सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) को 2024 में 3.82 फीसदी वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवार अमृतपाल सिंह और सरबजीत सिंह खालसा की जीत भी इसी बदलाव का संकेत है। यह दर्शाता है कि पंथिक वोट राष्ट्रीय दलों के बजाय नई पंथक राजनीति की ओर भी गया है। पुराने गठबंधन की चर्चाएं भाजपा और अकाली दल के पुराने गठबंधन को लेकर पंजाब की राजनीति में चर्चाएं जारी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 18.56 फीसदी और अकाली दल को 13.42 फीसदी वोट मिले थे। दोनों के मत प्रतिशत को जोड़ने पर यह आंकड़ा करीब 31.98 फीसदी होता है। हालांकि, वोटों का शत-प्रतिशत हस्तांतरण हमेशा संभव नहीं होता है। सितंबर 2026 तक भाजपा ने सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही है। 2027 के चुनाव से पहले अकाली दल को अपने बिखरे आधार को एकजुट करना होगा।