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अब 1.80 लाख आय तक परिवारों की महिलाओं को मिलेंगे हर महीने 2100 रुपये

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार अब लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा बढ़ाने जा रही है। 17 सितंबर से एक लाख से 1.80 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले परिवारों की महिलाओं को भी हर महीने 2,100 रुपये की आर्थिक सहायता मिलनी शुरू हो जाएगी। सरकार ने इस आय वर्ग की प्रदेशभर में करीब 17 लाख महिलाओं को नए लाभार्थी के रूप में चिन्हित किया है। अभी तक एक लाख रुपये की पारिवारिक आय वाले परिवारों की महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल रहा था। योजना के तहत अब तक 10 लाख 10 हजार लाभार्थी हैं। इन्हें 11 किस्तों में कुल 2,254 करोड़ 47 लाख रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। हरियाणा सरकार ने लाडो लक्ष्मी योजना का बजट 5,000 करोड़ से बढ़ाकर 6,500 करोड़ रुपये कर दिया है। नए आय वर्ग की महिलाओं को योजना में शामिल करने के बाद सरकार ने बजट में 1,500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है। आय सीमा बढ़ने से लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ेगी, इसलिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि बढ़े हुए बजट से पात्र महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपये की आर्थिक सहायता नियमित रूप से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। किस जिले में कितने लाभार्थी चिन्हित किए गए एक लाख से 1.80 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले नए लाभार्थियों में फरीदाबाद सबसे आगे है। यहां 2 लाख 22 हजार 562 महिलाओं को चिन्हित किया गया है। इसके बाद सोनीपत में 1 लाख 18 हजार 878, पानीपत में 1 लाख 9 हजार 424, करनाल में 1 लाख 5 हजार 717 और पलवल में 1 लाख 1 हजार 652 महिलाएं योजना के दायरे में आएंगी। वहीं, गुरुग्राम में 92 हजार 17, यमुनानगर में 77 हजार 605, जींद में 73 हजार 152, नूंह में 69 हजार 760, सिरसा में 69 हजार 397 और झज्जर में 67 हजार 513 महिलाओं को चिन्हित किया गया है। हिसार में 67 हजार 177, कैथल में 66 हजार 518 और भिवानी में 66 हजार 14 लाभार्थी हैं। सबसे कम संख्या चरखी दादरी में 24 हजार 159 है। इसके अलावा हांसी में 27 हजार 809 और पंचकूला में 37 हजार 472 महिलाएं चिन्हित की गई हैं। लाडो लक्ष्मी योजना से पंजाब की सियासत साधने की कोशिश हरियाणा की लाडो लक्ष्मी योजना अब पंजाब की चुनावी राजनीति में भी मुद्दा बनती दिख रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की पिछले 11 महीनों में पंजाब में करीब 90 कार्यक्रमों में मौजूदगी और योजना का दायरा बढ़ाने को राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हरियाणा में अब 1.80 लाख रुपये तक सालाना पारिवारिक आय वाली पात्र महिलाओं को 2,100 रुपये मासिक मिलेंगे। भाजपा इसे पंजाब की महिलाओं तक अपना संदेश पहुंचाने के मौके के तौर पर देख रही है। पार्टी हरियाणा की 2,100 रुपये की सहायता की तुलना पंजाब की योजना से कर सकती है। हालांकि दोनों योजनाओं की पात्रता अलग है। पंजाब में योजना का दायरा काफी व्यापक है, जबकि हरियाणा में आय और उम्र जैसी शर्तें हैं। ऐसे में योजना का चुनावी असर इस बात पर निर्भर करेगा कि भाजपा इसे पंजाब में कितना प्रभावी राजनीतिक मुद्दा बना पाती है।  

कोयला संकट के बीच योगी सरकार का प्रभावी प्रबंधन, रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति जारी

लखनऊ कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि से देशभर में कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने और तापीय विद्युत उत्पादन में आई कमी के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को संभालने के लिए प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया है। विषम परिस्थितियों के बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन प्रबंधन उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए प्रदेश के ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत और बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार और कई स्थानों पर उससे अधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने सोमवार को विद्युत आपूर्ति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में निर्धारित शिड्यूल के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए जहां से भी विद्युत उपलब्ध हो, उसे प्राप्त कर आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाए। 1500 से 2000 मेगावाट की कमी के बावजूद आपूर्ति वर्तमान में कोयले की कमी के कारण उत्तर प्रदेश को सामान्य दिनों की तुलना में करीब 1500 से 2000 मेगावाट विद्युत की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में विद्युत की मांग भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ी है। वहीं कोयले की कमी के कारण लगभग 35 गीगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। विंड एवं हाइड्रो पावर के उत्पादन में भी कमी आई है। इसके बावजूद वर्तमान परिस्थितियों में लगभग 27,000 मेगावाट तक की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील और नगर पंचायत क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली देने की कोशिश की जा रही है। जल्द मिलेगी अतिरिक्त बिजली रात्रि में 2000 से 3000 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध न हो पाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित कटौती की जा रही है। हालांकि आगामी दो-तीन दिनों में अनपरा डी, हरदुआगंज-ई तथा जवाहरपुर की बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाइयों के उपलब्ध होने से लगभग 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की संभावना है। इसके अलावा अनपरा के कोयले को लैंको की ओर डायवर्ट करने तथा बारा में कोयला आपूर्ति में सुधार के चलते रात्रि में अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने से लगभग 700 मेगावाट विद्युत उपलब्धता एवं आपूर्ति में वृद्धि हुई है। योगी सरकार का फोकस, जनता को अधिकतम राहत पावर कारपोरेशन प्रबंधन का कहना है कि वर्ष 2017 एवं 2021 जैसी कोयला आपूर्ति संबंधी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करते हुए दिन के समय प्रदेश के सभी क्षेत्रों में कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत एवं बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक घंटे विद्युत आपूर्ति देने का प्रयास लगातार जारी है। कोयला आपूर्ति में सुधार के लिए कोयला मंत्रालय के उच्च प्रबंधन से भी समुचित कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

एमपी ट्रांसको ने मूंदी एक्स्ट्रा हाई टेंशन सब स्टेशन में ऊजीकृत किया 50 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर

भोपाल  मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने 132 केवी सबस्टेशन मूंदी (खंडवा) में 50 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊजीकृत किया है। इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से मूंदी सब स्टेशन की क्षमता बढ़कर 90 एमवीए की हो गई है जिससे जहाँ सबस्टेशन में बढ़ते लोड का उचित प्रबंधन किया जा सकेगा, वहीं मूंदी सबस्टेशन में दूसरा ट्रांसफार्मर लगने से निमाड़ अंचल के इस क्षेत्र के ट्रांसमिशन नेटवर्क को सुदृढ़ता, फ्लेक्सेविलिटी और विश्वसनीयता प्रदान हुई है। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि 132 के वी सबस्टेशन मूंदी में वर्तमान और भविष्य में बढते लोड को देखते हुए 40 एमवीए क्षमता के अतिरिक्त 50 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किया गया है। इस क्षमता वृद्धि से मूंदी सबस्टेशन से जुड़े हजारों घरेलू, कृषि विद्युत उपभोक्ताओं को सीधा लाभ होगा अब उन्हें और अधिक गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति उपलब्ध रहेगी। एमपी ट्रांसको खंडवा के अतिरिक्त मुख्य अभियंता  सुरेंद्र सोलंकी ने बताया कि 132 के वी मूंदी सबस्टेशन में इस अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर को स्थापित कर ऊर्जीकृत करने से खंडवा जिले की ट्रांसफार्मेसन कैपेसिटी में बढोत्तरी 2342 एम वी ए की हो गई है, वही मूंदी सब स्टेशन की ट्रांसफार्मेसन कैपेसिटी बढ़कर 90 एमवीए की हो गई है।  सोलंकी ने बताया कि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी खंडवा जिले में अपने 7 सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है जिनमें 400 केवी सबस्टेशन छैगांव माखन, 220 केवी सबस्टेशन छनैरा, तथा 132 केवी के खंडवा, मूंदी, सिंगोट, छैगांव माखन एवं पंधाना सबस्टेशन शामिल है।400 केवी सबस्टेशन की क्षमता 630, 220 केवी की 1000 तथा 132 केवी सब स्टेशनों की क्षमता 712 एम वी ए की है जिससे खंडवा जिले की कुल क्षमता 2342 एम वी ए की हो गई है। एमपी ट्रांसको की ट्रांसपोर्टेशन कैपेसिटी बढ़कर हुई 85448 एमवीए एमपी ट्रांसको प्रदेश में अपने 417 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सब स्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है जिसमें 400 केवी के 14 सब स्टेशन, 220 केवी के 88 सबस्टेशन एवं 132 केवी के 315 सबस्टेशन शामिल हैं। एमपी ट्रांसको के प्रदेश में कुल 1056 पावर ट्रांसफार्मर क्रियाशील है जिसमें 400 केवी के 41, 220 के वी वोल्टेज लेवल के 220 और 132 के वी के 795 ट्रांसफार्मर शामिल हैं। इस 50 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से एमपी ट्रांसको की कुल ट्रांसफारमेशन कैपेसिटी (पारेषण क्षमता) बढ़कर 85488 एमवीए की हो गई है।  

25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों में ‘आंगन मिलन सेवा’

रायपुर  बलरामपुर जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले ’सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी और सामाजिक सरोकार से जोड़ने की दिशा में बलरामपुर जिले में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में ’आंगन मिलन सेवा‘ (आंगनबाड़ी सम्मान एवं मातृ सम्मान) कार्यक्रम 25 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के मंशानुरूप इस पहल के तहत जिले के सभी ’2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों’ में आने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए जनसहयोग से खिलौने उपलब्ध कराए जाएंगे। ‘आंगन मिलन सेवा’ का उद्देश्य आंगनबाड़ी केन्द्रों को बच्चों के लिए और अधिक आनंदमय, आकर्षक तथा सीखने के अनुकूल वातावरण प्रदान करना है। इस पहल में जिले के नागरिकों की सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। ’खिलौना दान इस आयोजन का सबसे आत्मीय और संवेदनशील पक्ष होगा’, जिसके माध्यम से जिलेवासी आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ सेवा, स्नेह और अपनत्व का भाव साझा कर सकेंगे। ’घर में रखे खिलौने भी बनेंगे किसी बच्चे की खुशी का कारण’ कलेक्टर  चंदन संजय त्रिपाठी ने जिलेवासियों से अपील की है कि उनके घरों में ऐसे ’सुरक्षित, स्वच्छ एवं उपयोगी खिलौने’, जिनका अब उपयोग नहीं हो रहा है, वे उन्हें आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को भेंट कर सकते हैं। इसके साथ ही इच्छुक नागरिक अपनी स्वेच्छा से नए खिलौने खरीदकर भी बच्चों को दान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए किया गया छोटा-सा प्रयास भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। जिले के नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और व्यवसायिक प्रतिष्ठान 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच अपने निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंचकर इस जनभागीदारी अभियान में शामिल हो सकते हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों की पहली पाठशाला कलेक्टर  त्रिपाठी ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की ’पहली पाठशाला’ हैं। यहीं से बच्चों में सीखने, समझने, संवाद करने और सामाजिक व्यवहार की प्रारंभिक नींव तैयार होती है। ऐसे में इन केन्द्रों को बच्चों के लिए अधिक जीवंत और सीखने योग्य बनाने में समाज की सहभागिता निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने जिलेवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि आपका छोटा-सा सहयोग किसी बच्चे के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकता है और उसकी सीखने की यात्रा को और समृद्ध कर सकता है। बच्चों के लिए किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव को मजबूत करने में योगदान देता है। खिलौनों से खेल-खेल में सीखने की मजबूत होगी नींव बच्चों के लिए खिलौने केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे उनके ’रचनात्मक, बौद्धिक और सामाजिक विकास’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेल-खेल में बच्चे नई चीजों को समझते हैं, अपनी कल्पनाशक्ति को विकसित करते हैं और भाषा तथा सामाजिक व्यवहार से जुड़े कौशल सीखते हैं। जनसहयोग से प्राप्त खिलौनों का उपयोग आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने में किया जाएगा, जहां वे ’खेलते हुए सीख सकें, अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर सकें और सीखने की प्रक्रिया का आनंद उठा सकें।’  इससे आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की रुचि और सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा। सेवा से संकल्प और संकल्प से जनभागीदारी की ओर ‘आंगन मिलन सेवा’ केवल खिलौना दान तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि यह समाज में ’संवेदनशीलता, सहयोग और अपनत्व की भावना को मजबूत करने का अवसर’ भी है। एक ओर जहां बच्चों को उनके विकास के लिए उपयोगी संसाधन मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर समाज के विभिन्न वर्गों को बच्चों के साथ सीधे जुड़कर सेवा का अवसर मिलेगा। जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा’ में सक्रिय सहभागिता निभाएं। अपने घर में अनुपयोगी लेकिन सुरक्षित और उपयोगी खिलौने किसी आंगनबाड़ी केन्द्र में दान करें या अपनी इच्छा के अनुसार नए खिलौने उपलब्ध कराएं। यह जनभागीदारी पहल 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों के नन्हे-मुन्नों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के साथ-साथ सेवा, स्नेह और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी नई मजबूती देगी। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जिले में यह संदेश भी जाएगा कि बच्चों के बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है।  

20 रुपये का सिक्का 5-6 रुपये में तैयार, एजेंटों को 15 रुपये तक में बेचता था गिरोह

सहारनपुर यूपी के सहारनपुर में पीएनबी बैंक की करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपए के नकली नोटों की जांच के बीच ही नकली सिक्कों की फैक्ट्री ने खलबली मचाई हुई है। इसके सिंडिकेट की नींव दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखी गई थी। नकली सिक्कों के इस कारोबार में मुनाफे का बड़ा खेल सामने आया है। पुलिस पूछताछ के मुताबिक 20 रुपये का एक नकली सिक्का तैयार करने में करीब पांच से छह रुपये खर्च होते थे। तैयार सिक्के एजेंटों को 12 से 15 रुपये तक में बेचे जाते थे। कम लागत और अधिक अंकित मूल्य के कारण गिरोह ने बड़े पैमाने पर उत्पादन को कारोबार का आधार बनाया। छह मशीनों से रोजाना 10 से 12 हजार सिक्के तैयार किए जाने की बात सामने आई है। गिरोह के मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह और सहारनपुर निवासी हिमांशु उर्फ गुल्लू की मुलाकात तिहाड़ जेल में ही हुई थी। पुलिस का दावा है कि इसी मुलाकात ने सहारनपुर में नकली सिक्कों की फैक्ट्री खड़ी कर दी। सहारनपुर पुलिस के मुताबिक उपकार वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा था। उस समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। जेल में उसकी मुलाकात हिमांशु से हुई। दोनों जेल से बाहर आए तो संपर्क बना रहा। इसके बाद सहारनपुर में नकली सिक्कों के कारोबार की योजना तैयार हुई और धीरे-धीरे अन्य लोग भी इससे जुड़ते गए। अलग-अलग हिस्सों में बंटा था काम गिरोह ने काम को अलग-अलग हिस्सों में बांट रखा था। कोई मशीन और उत्पादन की जिम्मेदारी संभालता था तो कोई तैयार सिक्कों को एजेंटों तक पहुंचाता था। तीतरों क्षेत्र में मशीनें लगाकर बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया गया। पुलिस के अनुसार गिरोह में करीब आठ लोग सक्रिय थे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तिहाड़ में बनी इस कड़ी ने बाहर निकलने के बाद कितने लोगों को अपने साथ जोड़ा और नेटवर्क किन-किन शहरों तक पहुंचा। पुलिस को मिले सात रजिस्टर और आठ मोबाइल इस सवाल का जवाब तलाशने में अहम साबित हो सकते हैं। जांच एजेंसियां पुराने संपर्कों, एजेंटों और संभावित सहयोगियों की पहचान में जुटी हैं। नेपाल में भी फैक्ट्री लगाने की कोशिश पुलिस से बचने के लिए नेपाल में छिपे उपकार ने वहां भी नकली सिक्कों के निर्माण का ठिकाना खड़ा करने की कोशिश की थी। अब वर्षों बाद उसी नेटवर्क का उत्पादन केंद्र यूपी के सहारनपुर में तैयार किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक उपकार वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के धंधे में सक्रिय है। पहले सुनार का काम करने वाले उपकार ने सिक्के बनाने की तकनीकी जानकारी को बाद में नकली करेंसी के इस कारोबार में इस्तेमाल किया। वर्ष 2017 में उसे हरियाणा के कोंडली से गिरफ्तार किया गया था। सहारनपुर में तैयार सिक्कों को खपाने के लिए भी नेटवर्क तैयार था। एजेंटों के जरिए माल शराब ठेकों, टोल प्लाजा और किराना दुकानों तक पहुंचाया जाना था। जांच में पंजाब से बिहार और पश्चिमी यूपी तक संपर्क सामने आए हैं। मधुबनी, भदोही और बदायूं के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस अब मोबाइल और रजिस्टरों के जरिए एजेंटों, मशीनों की व्यवस्था और सप्लाई चैन से जुड़े लोगों की कड़ियां जोड़ रही है। पंजाब से बिहार तक फैला नेटवर्क नकली सिक्कों के इस नेटवर्क की पहुंच कई राज्यों तक सामने आई है। मुख्य आरोपी उपकार लूथरा पंजाब का रहने वाला है। पुलिस जांच में पंजाब के साथ बिहार और उत्तर प्रदेश के मधुबनी, भदोही व बदायूं के नाम सामने आए हैं। पुराने संपर्कों और जेल में हुई मुलाकातों के बाद सहारनपुर में नेटवर्क खड़ा किया गया था।

सड़कों की खुदाई बिना पटना में रुकेगा गंगा का प्रदूषण, 3 नए STP से होगा सीवेज का ट्रीटमेंट

पटना बिहार की राजधानी पटना में गंगा में सीधे गिर रहे सीवेज पर रोक लगाने के लिए अब सड़कों और घनी गलियों में बड़े पैमाने पर खोदाई की जरूरत नहीं होगी। दानापुर कैंट से मित्तन घाट तक गंगा में मिलने वाले 31 प्रमुख नालों को इंटरसेप्शन एंड डायवर्जन (आइएंडडी) तकनीक से जोड़ा जाएगा। नालों के पानी को गंगा में पहुंचने से पहले ही रोककर एसटीपी ले जाया जाएगा। वहां उपचार के बाद ही पानी को नदी में छोड़ा जाएगा। इस परियोजना के तहत तीन नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने का प्रस्ताव है। इनकी उपचार क्षमता 34.8 करोड़ लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) होगी। प्रस्तावित एसटीपी दीघा नहर, मंदिरी और मित्तन घाट में बनाए जाएंगे। बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) के अनुसार, परियोजना का काम मानसून के बाद शुरू होगा। 2028 की शुरुआत तक काम पूरा करने का लक्ष्य है। आइएंडडी तकनीक में नालों के अंतिम छोर पर विशेष इंटरसेप्शन स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इससे गंदा पानी गंगा में सीधे गिरने के बजाय वहीं रोक लिया जाएगा। इसके बाद डाइवर्जन चैनल के माध्यम से सीवेज को एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। इस व्यवस्था में शहर की सड़कों को खोदकर हर जगह नई सीवेज लाइन बिछाने की जरूरत कम होगी। परियोजना के तहत दीघा नहर, मंदिरी और मित्तन घाट के पास एसटीपी प्रस्तावित है। तीनों प्लांट में सीवेज के उपचार के लिए एसबीआर (सीक्वेंसिंग बैच रिएक्टर) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे नालों से आने वाले सीवेज का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा सकेगा। सीवेज को नालों से एसटीपी तक पहुंचाने के लिए परियोजना में सात स्थानों दानापुर कैंट, दीघा घाट नाला, कुर्जी नाला, राजापुर नाला, मंदिरी नाला, अंटा घाट तथा मित्तन घाट पर इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आइपीएस) बनाने का भी प्रस्ताव है, जिसकी कुल क्षमता प्रतिदिन 40.89 करोड़ लीटर होगी। अलग-अलग इलाकों से आने वाले सीवेज को इन पंपिंग स्टेशनों पर एकत्र किया जाएगा। इसके बाद पंपिंग सिस्टम के माध्यम से उसे संबंधित एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। कुर्जी और राजापुर नाले की सफल टैपिंग कुर्जी और राजापुर नाले की टैपिंग सफल होने के बाद नई व्यवस्था की जा रही है। क्योंकि, इन दोनों नाले का गंदा पानी सीधे दीघा एसटीपी तक पहुंच रहा है। यहां रोजाना 4.50 करोड़ लीटर गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जा रहा है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य गंगा में सीधे गिरने वाले अनुपचारित सीवेज को रोकना है। 34.8 करोड़ लीटर प्रतिदिन की अतिरिक्त उपचार क्षमता तैयार होने से राजधानी में सीवेज शोधन की व्यवस्था मजबूत होगी। इससे गंगा में प्रदूषण का दबाव कम होने के साथ पानी की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। साथ ही, तेजी से बढ़ते राजधानी के लिए भविष्य में सीवेज प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था तैयार करने में भी मदद मिलेगी। प्रस्तावित सात इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन का विवरण जगह                   क्षमता (प्रतिदिन करोड़ लीटर में) दानापुर कैंट                   1.05 दीघा घाट नाला               8.15 कुर्जी नाला                      6.25 राजापुर नाला                  8.67 मंदिरी नाला                   13.69 अंटा घाट                        2.21 मित्तन घाट                      0.85 प्रस्तावित तीन एसटीपी का विवरण जगह         क्षमता (प्रतिदिन लीटर में)     लागत (करोड़ में) दीघा नहर     8.5 करोड़                           187.17 मंदिरी           24.5 करोड़                        616.55 मित्तन घाट     1.8 करोड़                           39.95 फायदे     गंगा में गंदा पानी जाने से रुकेगा, जलीय जीवों को मिलेगा लाभ।     नई सड़क और गलियों की बार-बार खुदाई से बचेगा शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर।     नई पाइपलाइन का बड़ा नेटवर्क बिछाने के बजाय टैपिंग से लागत घटेगी।     सीवेज का वैज्ञानिक उपचार होने से संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा कम होगा। एसटीपी की कुल क्षमता का 60.65 प्रतिशत ही उपयोग राजधानी में निकलने वाले गंदे पानी के शोधन के लिए बनाए गए आठ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कुल क्षमता 36.75 करोड़ लीटर प्रतिदिन है। वर्तमान में प्रतिदिन 22.29 करोड़ लीटर लीटर गंदे पानी का शोधन किया जा रहा है। एसटीपी की कुल क्षमता का करीब 60.65 प्रतिशत उपयोग हो रहा है। एसटीपी के माध्यम से शहर के विभिन्न इलाकों से निकलने वाले सीवेज को ट्रीट किया जाता है, ताकि बिना शोधन के गंदा पानी सीधे नदियों और जलस्रोतों में नहीं पहुंचे।  

केयर इकोनॉमी से यूपी में खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, 12 विभाग मिलकर बनाएंगे रोडमैप

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और जरूरतमंदों की देखभाल को अब संगठित सेवा क्षेत्र से जोड़कर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। योगी सरकार ने ‘केयर इकोनॉमी’ को रोजगार सृजन, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा का नया आधार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में सोमवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में समाज कल्याण विभाग की नोडल भूमिका में ‘सतत केयर इकोनॉमी का निर्माण देखभाल कार्य को पहचान, महिलाओं को सशक्तीकरण और समावेशी आजीविका के अवसर’ विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित हुई। राज्य केयर अर्थव्यवस्था रोडमैप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से केयर इकोनॉमी उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन और बुजुर्गों व वंचित वर्गों की सुरक्षा के लिए परिवर्तनकारी कदम साबित होगी। कुशल केयरगिवर्स तैयार करने, उनके प्रशिक्षण और प्रमाणन तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से प्रदेश में मजबूत, समावेशी और टिकाऊ केयर इकोसिस्टम तैयार किया जा सकता है। कार्यशाला व्यापक ‘राज्य केयर अर्थव्यवस्था रोडमैप’ तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बनेगी। 12 विभाग मिलकर तय करेंगे आगे की रणनीति कार्यशाला में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम, कौशल विकास और दिव्यांगजन सशक्तीकरण समेत 12 प्रमुख सरकारी विभागों ने भागीदारी की। इसका उद्देश्य अलग-अलग विभागों की योजनाओं और संसाधनों को एक साझा रणनीति से जोड़कर केयर सेक्टर को व्यवस्थित रूप देना है। इससे देखभाल के पारंपरिक और अनौपचारिक कार्य को भी आर्थिक गतिविधि के रूप में पहचान देने की दिशा में काम होगा। 4 प्रमुख स्तंभों पर हुआ मंथन कार्यशाला में केयर इकोनॉमी के चार प्रमुख स्तंभों पर विशेष चर्चा हुई। पहला, घरेलू और अनौपचारिक देखभाल कार्य का आर्थिक मूल्यांकन कर उसे पहचान और उचित मूल्य देना। दूसरा, महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करना। तीसरा, केयर वर्कफोर्स के लिए मानक प्रशिक्षण, प्रमाणन और टिकाऊ रोजगार की व्यवस्था करना। चौथा, सेवाओं की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए पीपीपी मॉडल, बीमा योजनाओं और सीएसआर फंड के उपयोग की संभावनाएं तलाशना। केयरगिवर्स को प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ने पर जोर समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने केयर इकोनॉमी को सामाजिक जरूरत के साथ-साथ रोजगार का उभरता हुआ क्षेत्र बताते हुए कहा कि प्रदेश में देखभाल सेवाओं को व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए विभागीय समन्वय जरूरी है। प्रशिक्षित और प्रमाणित केयरगिवर्स तैयार होने से जरूरतमंद परिवारों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलेंगी और युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ प्रशिक्षण, प्रमाणन और रोजगार की पूरी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में यूपी सिडको के चेयरमैन वाई.पी. सिंह, महिला एवं बाल विकास सचिव मनीषा त्रिघाटिया, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के उपाध्यक्ष विश्वनाथ, प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव, समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह समेत वित्त, कौशल विकास, स्वास्थ्य और दिव्यांग कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

युवाओं को नशे से बचाने के लिए योगी सरकार का सख्त संदेश-‘वीडियो सामने आते ही एक्शन’

लखनऊ युवाओं और नाबालिगों को नशे की चपेट में आने से बचाने के लिए योगी सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। सरकार की नीति केवल अवैध और जहरीली शराब पर अंकुश लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कम उम्र के बच्चों तक शराब की पहुंच रोकने पर भी विशेष जोर है। लखनऊ में नाबालिग को शराब बेचने से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही आबकारी विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर यह संदेश साफ कर दिया कि नियमों से खिलवाड़ किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं होगा। सोशल मीडिया एक्स और अन्य प्लेटफॉर्म पर वीडियो प्रसारित होने के बाद सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया और संबंधित के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला आबकारी अधिकारी, लखनऊ ने 11 सितंबर को वीडियो की जांच कराई। जांच में वीडियो विकासनगर थाना क्षेत्र के शुभौली स्थित एक कम्पोजिट दुकान के सेल्समैन की एक व्यक्ति से कहासुनी का पाया गया। वीडियो में सेल्समैन पर नाबालिग बच्चे को शराब बेचने की बात कही जा रही थी। तुरंत हटाया गया सेल्समैन, 30 हजार जुर्माना जांच के दौरान सेल्समैन का व्यवहार उचित नहीं पाए जाने पर उसे तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। इसके साथ ही संबंधित कम्पोजिट दुकान के खिलाफ नियमानुसार प्रशमन की कार्रवाई करते हुए 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। वीडियो सामने आने के बाद इतनी तेजी से हुई कार्रवाई ने साफ किया कि सरकार नाबालिगों तक नशे की पहुंच रोकने के मामले में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। यूपी बना देश के अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार मॉनिटरिंग और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा मामला दोबारा आने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और पारदर्शी नीतियों के चलते पिछले साढ़े चार वर्षों से अधिक समय से प्रदेश में अवैध या जहरीली शराब की बिक्री का कोई मामला सामने नहीं आया है। आबकारी विभाग देश के अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल बन चुका है और इस छवि को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

तेजप्रताप यादव को लगातार मिल रही धमकियां, केंद्र और बिहार सरकार से तत्काल सुरक्षा की मांग

पटना  लगातार मिल रही कथित धमकियों के बीच जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव ने अपनी सुरक्षा को लेकर केंद्र और बिहार सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। तेजप्रताप का दावा है कि पिछले कुछ दिनों से उनके मोबाइल पर बार-बार धमकी भरे फोन आ रहे हैं, जिससे उनकी जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। तेजप्रताप ने इस मामले को लेकर 9 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बिहार के DGP और बिहार के होम सेक्रेटरी को पत्र भेजकर पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सचिवालय थाना, पटना में FIR दर्ज कराने की भी बात कही है। धमकी भरे कॉल का दावा, सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता तेजप्रताप यादव के मुताबिक उन्हें लगातार फोन कॉल के जरिए धमकियां मिल रही हैं। उनका कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार से मामले को गंभीरता से लेने की अपील करते हुए अविलंब पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही धमकी देने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई की मांग भी की है। अमित शाह समेत तीन स्तरों पर पहुंचाया मामला तेजप्रताप ने मामले को सिर्फ बिहार सरकार तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ बिहार के पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग के सचिव को भी पत्र भेजकर सुरक्षा की मांग की है।इससे साफ है कि तेजप्रताप इस मामले को गंभीर सुरक्षा मुद्दे के तौर पर उठा रहे हैं और केंद्र तथा राज्य—दोनों स्तरों पर कार्रवाई चाहते हैं FIR के बाद अब कार्रवाई पर नजर तेजप्रताप यादव ने बताया कि धमकियों के संबंध में सचिवालय थाना, पटना में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है। अब इस मामले में पुलिस जांच और धमकी देने वालों की पहचान पर नजर रहेगी। तेजप्रताप की मांग है कि आरोपित व्यक्तियों की पहचान जल्द की जाए और उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए। “अविलंब पर्याप्त सुरक्षा दी जाए” अपने पत्र में तेजप्रताप ने केंद्र और बिहार सरकार से सुरक्षा व्यवस्था तत्काल मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए उनकी सुरक्षा को लेकर कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि दोनों सरकारें मामले का संज्ञान लेकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेंगी। अब सवाल-तेजप्रताप की सुरक्षा पर सरकार का क्या फैसला? FIR दर्ज होने और केंद्र तथा राज्य के शीर्ष अधिकारियों को पत्र भेजे जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल सरकार के अगले कदम को लेकर है। क्या तेजप्रताप की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी और धमकी देने वालों तक पुलिस कितनी जल्दी पहुंचती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल तेजप्रताप ने पूरे मामले को लेकर सरकार से तत्काल सुरक्षा और सख्त कार्रवाई की मांग कर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर दबाव बढ़ा दिया है।

मॉडल स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन और बेहतर परीक्षा परिणाम पर सरकार का फोकस

जयपुर स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने सोमवार को शासन सचिवालय में स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल योजना सहित विभिन्न आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को अध्यापकों एवं विद्यार्थियो की उपस्थिति, विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों के नामांकन,मानव संसाधन,आधारभूत सुविधाओं तथा निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव यादव ने प्रदेश के मॉडल स्कूलों में रिक्त पदों की स्थिति की समीक्षा करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने मॉडल स्कूलों के परीक्षा परिणामों में और सुधार के लिए विषयवार विश्लेषण एवं आवश्यक शैक्षणिक गतिविधियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने निर्माणाधीन भवनों में भूमि, बिजली, पानी एवं अन्य लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करते हुए कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए भवन निर्माण के साथ आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। एसीएस ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी), नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय, स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल छात्रावास, पीएम-जनमन एवं डीएजेजीयूए के अंतर्गत संचालित एवं निर्माणाधीन छात्रावासों की प्रगति की भी समीक्षा की। केजीबीवी में कुल 51 हजार 950 विद्यार्थियों की क्षमता के विरुद्ध 46 हजार 668 बालिकाएं नामांकित हैं। वहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों सहित अन्य आवासीय संस्थानों में भी नामांकन की स्थिति की समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों को शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रयास करने के निर्देश दिए गए। बैठक में वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत स्वीकृत किए गए आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की प्रगति पर भी चर्चा हुई। नए आवासीय विद्यालयों/छात्रावासों के लिए कार्य स्वीकृत है, जिनमें से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होकर विद्यार्थी रह रहे हैं। छात्रावासों में वॉशिंग मशीन एवं स्वचालित रोटी मेकर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा केजीबीवी में थ्री-फेज विद्युत कनेक्शन से संबंधित कार्यों की भी समीक्षा की गई। विद्यालयों में आधुनिक सुविधाएं मॉडल स्कूलों में स्मार्ट एवं वर्चुअल कक्षाएं, 20 कम्प्यूटर वाले कम्प्यूटर लैब, सीसीटीवी कैमरे, छात्राओं के लिए सेनेटरी नैपकिन, डिस्पेंसरी एवं इन्सीनेरेटर सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य परीक्षण, मासिक अभिभावक-शिक्षक बैठक, स्काउट-गाइड, कला एवं शिल्प, विज्ञान मेले, गणित ओलंपियाड, योग ओलंपियाड, स्कूल बैंड एवं अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं। प्रदेश के 27 शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े जिलों के 134 ब्लॉकों में 134 स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल संचालित हैं। इन विद्यालयों में कुल 57 हजार 565 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 28 हजार 957 बालक एवं 28 हजार 608 बालिकाएं हैं। विद्यालयों में बालिकाओं के लिए 55 प्रतिशत तथा बालकों के लिए 45 प्रतिशत सीटों का प्रावधान है। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत कुल 514 छात्रावास/आवासीय इकाइयां स्वीकृत हैं, जिनमें 422 संचालित हैं तथा 92 निर्माणाधीन अथवा लंबित हैं। केजीबीवी के 389 में से 377 संचालित हैं, जबकि 12 पर कार्य प्रगति पर है। स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूलों के 25 छात्रावासों में 22 संचालित हैं और 3 निर्माणाधीन हैं।