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मदरसों पर सर्वे के बाद बड़ा एक्शन, 252 बंद और 100 को नोटिस से मचा हड़कंप

कोलकाता पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार का राज्य के मदरसों पर कहर टूटा है। 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है और करीब 100 दूसरे मदरसों को कारण बताओ नोटिस भेजा है। यह आदेश राज्य भर में हुए सर्वे के बाद दिया गया है, जिसमें पाया गया कि ऐसे कई संस्थानों के पास जरूरी मंजूरी और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के मंत्री क्षुदीराम टुडू ने कहा कि जिन मदरसों के पास जरूरी मंजूरी है, वे चलते रहेंगे। जून की शुरुआत से पश्चिम बंगाल के सभी जिलों में सरकारी और प्राइवेट मदरसों के इंफ्रास्ट्रक्चर, मंज़ूरी की स्थिति और मैनेजमेंट सिस्टम का आकलन करने के लिए विभाग ने फील्ड-लेवल सर्वे किया था। अधिकारियों ने कहा कि मदरसों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके जवाबों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। टुडू ने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देशों के बाद यह काम शुरू किया गया था ताकि अलग-अलग जिलों में अधिकृत और अनधिकृत मदरसों की संख्या का पता लगाया जा सके। मंत्री ने आगे कहा, "252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है, जबकि 100 अन्य को जरूरी मंजूरी और बुनियादी ढांचे की कमी के लिए कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।" बार-बार मिल रही थी शिकायतें राज्य के पंचायती राज मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि मदरसों को लेकर कई विवाद हुए हैं और दावा किया कि कई मामलों में चरमपंथी गतिविधियों में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किए गए लोग ऐसे कुछ संस्थानों में शिक्षक के तौर पर काम करते पाए गए। उन्होंने कहा, "मदरसों के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिल रही थीं। मदरसों से देश विरोधी गतिविधियां करने वाले लोगों के मामले सामने आए हैं।" उन्होंने आगे कहा कि कानून के हिसाब से और सरकारी इजाजत से चलने वाले मदरसे चलते रहेंगे। लेकिन सरकार मदरसों को बिना सोचे-समझे खोलने और परेशानी खड़ी करने की इजाजत नहीं देगी।" विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि सभी मदरसों को एक जैसा नहीं देखना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर हर अंत्योदय परिवार को मिलेंगे दो मुफ्त दीये, कुम्हारों की बढ़ेगी कमाई

चंडीगढ़  हरियाणा में इस बार 17 सितंबर को जलने वाला दीया सिर्फ घरों को रोशन नहीं करेगा, बल्कि प्रदेश के कुम्हारों के चाक को भी रफ्तार देगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान के तहत घर-घर मिट्टी के दीये जलाने की तैयारी है। अभियान से जुड़े प्रचार में इसे ‘आशीर्वाद का दीया’ कहा जा रहा है। हरियाणा सरकार ने इस आयोजन में एक दिलचस्प कड़ी जोड़ी है। दीयों की खरीद किसी बड़े सप्लायर या बाहर के बाजार से नहीं, बल्कि संबंधित जिले के स्थानीय कुम्हारों से ही की जाएगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशालय ने सभी जिलों को दीयों की खरीद और वितरण के लिए लक्ष्य निर्धारित कर दिए हैं। यानी सरकारी अभियान की रोशनी का सीधा लाभ उस पारंपरिक कारीगर तक पहुंचाने की कोशिश है, जिसका चाक बदलते बाजार में लगातार धीमा पड़ता जा रहा है। हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा मंजूरी देने के बाद जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों को निर्देश जारी किए गए हैं। परिपत्र में कहा गया है कि निर्धारित संख्या में दीयों की खरीद समय रहते पूरी की जाए, ताकि वितरण में किसी तरह की देरी न हो। दीयों की गुणवत्ता, आकार और उपयोग योग्य स्थिति का ध्यान रखने को कहा गया है। साथ ही यह भी सलाह दी गई है कि खरीद स्थानीय स्तर पर इस तरह की जाए कि अधिक से अधिक कुम्हार परिवारों को इसका लाभ मिल सके। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को केवल खरीद तक सीमित नहीं रहने, बल्कि दीयों को संबंधित लाभार्थियों तक समय पर पहुंचाने और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं खरीद और वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने तथा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार काम पूरा करने पर भी जोर है। अधिकारियों को अभियान की गतिविधियों का समुचित रिकार्ड रखने और उच्च स्तर पर रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है। रोशनी के साथ स्थानीय हुनर को सहारा इस पहल का सबसे अहम पहलू यह है कि सरकारी आयोजन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया है। सामान्यतः बड़े आयोजनों में सामान की खरीद केंद्रीकृत तरीके से होती है, लेकिन यहां जिले के कुम्हार को ही प्राथमिकता देने से सरकारी मांग सीधे उसके घर तक पहुंचेगी। एक तरफ हजारों घरों में परंपरागत मिट्टी के दीये जलेंगे, दूसरी तरफ कुम्हार परिवारों को दीवाली के सीजन से पहले ही बड़ा काम मिलेगा। परिपत्र में जिलों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि निर्धारित मात्रा की खरीद और वितरण अभियान की भावना के अनुरूप हो। इस लिहाज से 17 सितंबर की शाम जलने वाला दीया महज प्रतीकात्मक रोशनी नहीं होगा, बल्कि ‘स्थानीय से खरीदो और स्थानीय को मजबूत करो’ का संदेश भी देगा। प्रत्येक को मिलेंगे दो दीये मुफ्त, 79.52 लाख दीये बंटेंगे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को प्रदेश के हर अंत्योदय परिवार को दो-दो दीये निशुल्क उपलब्ध करवाए जाएंगे। विभाग ने प्रति दीया एक रुपये की दर निर्धारित की है। प्रदेश में कुल 39 लाख 76 हजार 273 राशन कार्ड हैं। इनके लिए कुल 79 लाख 52 हजार 546 दीये आवंटित किए जाने हैं, जो कि निशुल्क होंगे। हिसार में सबसे ज्यादा 5 लाख 76 हजार 608 दीये दिए जाएंगे।

BRICS देश घटाएंगे डॉलर पर निर्भरता, स्थानीय मुद्रा में कारोबार बढ़ाने की तैयारी

नई दिल्ली  दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स सम्मेलन में अमेरिकी डॉलर के खिलाफ मुहिम शुरू हो गई है। वहीं साझा BRICS करेंसी को लेकर स्थिति साफ हो गई है। भारत सरकार ने कहा है कि फिलहाल समूह में ऐसी किसी करेंसी का प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटाने और पेमेंट सिस्टम को जोड़ने पर चर्चा जारी है। यानी ब्रिक्स देश अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता करना चाहते हैं। विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर दलेला ने बताया कि फिलहाल ब्रिक्स में साझा करेंसी शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटाने को लेकर बातचीत काफी समय से चल रही है। दलेला के मुताबिक, स्थानीय मुद्रा में भुगतान को द्विपक्षीय व्यापार की लागत घटाने के एक व्यावहारिक तरीके के तौर पर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम के विकल्प के बजाय उसे पूरक बनाना है। Navbharat TimesBRICS डिनर में परोसी गई हिमालय की गुच्छी, कीमत ₹40000 किलो तक, जानें इस महंगी मशरूम से कैसे शुरू करें बिजनेस डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब डॉलर पर निर्भरता कम करने यानी डी-डॉलराइजेशन को लेकर दुनिया भर में चर्चा तेज है। ब्रिक्स सम्मेलन में शनिवार को जारी New Delhi Declaration में भी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश के सेटलमेंट को बढ़ावा देने पर चल रही चर्चाओं का उल्लेख किया गया है। पीयूष गोयल ने की थी अपील भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी 11 सितंबर को BRICS बिजनेस फोरम में सदस्य देशों से अपने पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की अपील की थी। गोयल ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और UPI का उदाहरण देते हुए कहा था कि UPI अब 11 देशों में स्वीकार किया जाता है। उन्होंने BRICS देशों से पेमेंट सिस्टम को जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने का आग्रह किया। अमेरिका क्यों है चिंतित? BRICS में डॉलर से दूरी बनाने की किसी भी कोशिश को अमेरिका के लिए चुनौती के तौर पर देखा जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही BRICS देशों को साझा करेंसी बनाने या डॉलर के विकल्प का समर्थन करने के खिलाफ चेतावनी दे चुके हैं। नवंबर 2024 में ट्रंप ने कहा था कि अगर ब्रिक्स देश नई करेंसी बनाते हैं या डॉलर की जगह किसी दूसरी करेंसी को समर्थन देते हैं, तो उन पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है।

UCC को लेकर अमित शाह का बड़ा दावा, 2029 से पहले 21 राज्यों में होगा लागू

नई दिल्ली केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने यूसीसी को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहाकि साल 2029 तक एनडीए के शासन वाले 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 30 दिन के सेवा संकल्प अभियान का ऐलान करते हुए अमित शाह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भाजपा और सहयोगी दल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाएंगे। मुंबई में सेवा संकल्प अभियान को लेकर मीडिया को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि हमने कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की है। हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि साल 2029 के पहले भाजपा शासित सभी 21 प्रदेशों में समान नागरिक संहिता लागू करने में सफल होंगे। प्रधानमंत्री ने दुनिया में बढ़ाया भारत का मान इस दौरान अमित शाह ने कहा कि पिछले 12 साल में दुनिया में भारत का कद काफी बढ़ा है। दुनिया का कोई भी मुद्दा हो, आज भारत के प्रधानमंत्री की राय को अहमियत दी जाती है। दुनिया भर में लोग भारतीय पासपोर्ट रखने वाले भारतीय नागरिक को सम्मान की नजर से देखते हैं। नरेंद्र मोदी जी ने भारतीय पासपोर्ट की अहमियत बढ़ाने का काम किया है। इसका नतीजा यह है कि वे दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं, जिन्हें सर्वे में 68 फीसदी अप्रूवल रेटिंग मिली है। उन्होंने आगे कहा कि 36 देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिए हैं, जो भारत के ‘भारत रत्न’ जैसे ही हैं। यह विदेशों में भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों में यह विश्वास पैदा किया है कि 15 अगस्त, 2047 तक भारत सभी क्षेत्रों में सभी देशों से आगे होगा। उन्होंने ने देश में सभी क्षेत्रों में बदलाव की शुरुआत की है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि साल 2014 में भारत को ‘फ्रेजाइल फाइव’ में शामिल किया गया था, लेकिन आज यह शीर्ष पांच देशों में शामिल है।

अप्रैल-मई 2027 में पंचायत चुनाव संभव, 19 अक्टूबर की मतदाता सूची से तय होगा वोटिंग अधिकार

 रांची झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले वर्ष अप्रैल-मई माह में होना है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर इसे लेकर जिलों में तैयारियां चल रही हैं। इसके तहत मतदान केंद्रों का निर्धारण किया जा रहा है। हालांकि पंचायत चुनाव ट्रिपल टेस्ट के बाद ही होना है। ट्रिपल टेस्ट के माध्यम से ओबीसी श्रेणी को चुनाव में आरक्षण प्रदान किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को दी जाएगी। वर्ष 2022 में पंचायत चुनाव ओबीसी को आरक्षण दिए बिना ही संपन्न हुआ था। इसपर काफी विवाद हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर ट्रिपल टेस्ट कराकर ओबीसी को आरक्षण देते हुए पिछले वर्ष नगर निकाय चुनाव संपन्न कराया था। ऐसे में पूरी संभावना है कि अगले वर्ष होनेवाले पंचायत चुनाव में भी ओबीसी को आरक्षण दिया जाएगा। इसके लिए पंचायती राज विभाग को कैबिनेट से स्वीकृति लेनी होगी।ट्रिपल टेस्ट कराने में दो-तीन माह का समय लग सकता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अक्टूबर माह तक सरकार इसपर निर्णय ले लेगी। 19 अक्टूबर 2026 की अर्हता तिथि से हो सकता चुनाव चूंकि राज्य में पंचायत चुनाव अगले वर्ष होना है, इसलिए पूरी संभावना है कि यह चुनाव 19 अक्टूबर 2026 की अर्हता तिथि से हो। इस तिथि तक मतदाता बननेवाले नागरिक पंचायत चुनाव में मतदान कर सकेंगे। दरअसल, एसआइआर के तहत 19 अक्टूबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होना है। इसके बाद तय हो जाएगा कि राज्य में मतदाताओं की संख्या कितनी है। मतदाता सूची के प्रकाशन होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग भारत निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची का आंकड़ा देने का अनुरोध कर सकता है। यह आंकड़ा मिलने के बाद पंचायत स्तर पर मतदाता सूची का विखंडन किया जाएगा। फैक्ट फाइल     झारखंड में पंचायतों की संख्या : 4,345     ग्राम पंचायतों के सदस्यों की संख्या : 53,479     मुखिया के पद : 4,345     पंचायत समिति सदस्य के पद : 5,341     जिला परिषद सदस्य के पद : 536  

NSE IPO में निवेश का मौका, ₹1,785 प्राइस बैंड और ₹207 GMP ने बढ़ाई उम्मीद

नई दिल्ली नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO को लेकर निवेशकों के बीच लगातार उत्सुकता बनी हुई है। प्राइस बैंड सामने आने के बाद अब NSE IPO के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) पर भी बाजार की नजर है। उपलब्ध ग्रे मार्केट आंकड़ों के मुताबिक NSE के शेयर करीब ₹207 के प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। अगर ₹1,785 के अपर प्राइस बैंड में मौजूदा GMP को जोड़ा जाए, तो अनुमानित कीमत करीब ₹1,992 बैठती है। यानी ग्रे मार्केट संकेतों के आधार पर शेयर करीब 11.60 फीसदी प्रीमियम के साथ लिस्ट हो सकता है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि GMP अनौपचारिक बाजार का संकेत है और यह NSE की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं देता। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। पिछले 10 सेशन के दौरान NSE IPO के GMP में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इस अवधि में प्रीमियम करीब ₹192 के निचले स्तर से बढ़कर ₹310 तक पहुंचा था। मौजूदा ₹207 का GMP इस ऊपरी स्तर से काफी नीचे है। इससे संकेत मिलता है कि ग्रे मार्केट में शुरुआती उत्साह कुछ कम हुआ है। ऐसे में निवेशकों के लिए सिर्फ GMP के आधार पर IPO में पैसा लगाना उचित नहीं होगा। कंपनी की वैल्यूएशन, कारोबार, बाजार की स्थिति और IPO की कीमत को भी ध्यान में रखना जरूरी है। NSE ने IPO के लिए ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। पात्र निवेशकों के लिए इश्यू 16 सितंबर 2026 से खुलेगा, जबकि अन्य निवेशकों के लिए बोली 17 सितंबर से शुरू होगी। IPO 21 सितंबर को बंद होगा। अपर प्राइस बैंड पर इश्यू का टोटल साइज करीब ₹22,561.57 करोड़ तक हो सकता है। यह IPO पूरी तरह OFS (Offer for Sale) है। इसका मतलब है कि NSE को इस इश्यू से नई पूंजी नहीं मिलेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। निवेशक न्यूनतम 8 शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं और इसके बाद 8 शेयरों के गुणक में बोली लगाई जा सकेगी। इस OFS में SBI (State Bank of India) सबसे बड़ा शेयर बेचने वाला निवेशक है, जो करीब 1.60 करोड़ शेयर ऑफर करेगा। कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (Canada Pension Plan Investment Board) और अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (Aranda Investments) भी बड़ी हिस्सेदारी बेचने वालों में शामिल हैं। दूसरी ओर NSE में 10.72 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली LIC इस OFS में अपने शेयर नहीं बेच रही है। RHP के मुताबिक NSE का कोई पहचान योग्य प्रमोटर नहीं है। कर्मचारियों के लिए आरक्षित हिस्से में आवेदन करने वाले पात्र कर्मचारियों को ₹170 प्रति शेयर की छूट दी जाएगी। NSE के शेयर BSE के मेन बोर्ड पर लिस्ट होंगे। ऐसे में IPO की कीमत और GMP दोनों ही निवेशकों के लिए अहम संकेत हैं, लेकिन अंतिम फैसला कंपनी की वित्तीय स्थिति और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए।  

बच्चों की धड़कन से तय होगा पास या फेल, AI स्कूल के इस मॉडल पर उठे सवाल

न्यूयॉर्क अमेरिकी स्कूलों में भविष्य की शिक्षा के नाम पर चौंकाने वाला सच सामने आया है। यहां एडमिशन के लिए बच्चों को हार्ट मॉनिटर से जोड़कर पूरी क्लास के सामने उनके पैरेंट्स की आलोचनात्मक वीडियो दिखाये जाते हैं, जहां दिल की धड़कन बढ़ने पर वे फेल हो जाते हैं। सहनशीलता सिखाने का यह अमानवीय एआई मॉडल बच्चों की मानसिक सेहत को कैसे प्रभावित कर रहा है। आइए जानते हैं। सिलिकॉन वैली का अल्फा स्कूल, कमरे में ऐसा सन्नाटा था कि सिर्फ दीवार पर लगे विशाल मॉनीटर की बीप-बीर सुनाई दे रही थी। यह अस्पताल का आईसीयू नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा का दावा करने वाला अत्याधुनिक एआई स्कूल है। कमरे में 14 साल के रेयान कुर्सी पर अकेला बैठा था, उसके सीने पर एक हर्ट मॉनीटर लगा था। उसके दिल की धड़कन पूरी क्लास के सामने बड़े पर्दे पर दिख रही थी। उसकी धड़कन सामान्य थी, नियम था कि धड़कन 10 प्रतिशत से ऊपर नहीं जानी चाहिए। अगर गई तो वह फेल। तभी उसके माता-पिता का वाडियो चलाया गया। उस वीडियो में वे रेयान की कमियों, उसकी गलतियों और उसकी नाकामी की कड़ी आलोचना कर रहे थे। पूरी क्लास यह वीडियो देख रही थी। रेयान के लिए यह बहुत मुश्किल था। उसकी धड़कन बढ़ने लगी, पहले 82, फिर 85 और अंत में 87, उसने अपनी मुठ्ठियां भींच लीं और आंखें बंद कर लीं। वीडियो खत्म होने पर उसकी औसत धड़कन 87 थी, वह एक धड़कन से पास हो गया, लेकिन एक हफ्ते तक उसके हाथ कांपते रहे। यह सिर्फ एक टेस्ट नहीं है। इस स्कूल में बच्चों से बॉट्स की मदद से कुछ ही दिन में पूरा कोर्स खत्म करवाया जाता है। उनसे गंदे टॉयलेट साफ कराए जाते हैं और सोशल मीडिया पर खुद को बेचना सिखाया जाता है। इन तरीकों को सहनशीलता और हिम्मत सिखाना कहा जा रहा है, लेकिन असल में यह बच्चों की भावनाओं के कुचलने जैसा है। मशीन ने दिल की रफ्तार तो नाप ली, पर बच्चे के अंदर का डर और घुटन नहीं नाप सकी।

15 हजार करोड़ की किशाऊ परियोजना को मिलेगी रफ्तार, छह राज्यों के बीच होगा करार

 शिमला  देश के लिए महत्वपूर्ण किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण की दिशा में 15 सितंबर को नई दिल्ली में बड़ा कदम उठाया जाएगा। ऊपरी यमुना बेसिन में प्रस्तावित 660 मेगावाट की इस परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और राजस्थान के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में राज्यों के प्रतिनिधि करार करेंगे। हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह, बहुउद्देशीय परियोजनाएं एवं विद्युत, गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोत और सतर्कता आरडी नजीम बैठक में शामिल होंगे। वह परियोजना में हिमाचल के हितों और राज्य की भूमिका को लेकर पक्ष रखेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समझौता हस्ताक्षर समारोह दोपहर 12 से एक बजे तक कर्तव्य भवन-03, जनपथ, नई दिल्ली में होगा। क्या है किशाऊ परियोजना करीब 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली किशाऊ परियोजना की जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर है। परियोजना में जल भंडारण के साथ बहुउद्देशीय उपयोग का प्रविधान है। राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा हिमाचल के हिस्से का पानी परियोजना के तहत हिमाचल के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा। इसके बदले दोनों राज्य हिमाचल के बिजली घटक की लागत में योगदान करेंगे। वहीं, हिमाचल और उत्तराखंड को जल घटक की लागत में वित्तीय योगदान नहीं करना होगा। ऐसे में समझौता हिमाचल के लिए जल संसाधन और बिजली से जुड़े हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

पहलगाम पर चीन का भारत के साथ खड़ा होना, क्या पाकिस्तान से दूरी बढ़ा रहा ड्रैगन?

नई दिल्ली चीन और पाकिस्तान हमेशा कहते रहे हैं कि उनकी दोस्ती हर मौसम में चलती है। चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा साथी है। पाकिस्तान ने चीन को सीपीईसी जैसी परियोजनाओं से अरब सागर तक रास्ता दिया है। लेकिन नई दिल्ली में ब्रिक्स बैठक में एक बात खास रही। चीन उस बैठक में था, जिसमें 2025 के पहलगाम हमले की निंदा हुई। बैठक में आतंकवाद पर सख्ती की बात भी कही गई। घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 के हमले की निंदा की गई। उस हमले में 26 लोग मारे गए थे। इसमें सीमा पार आतंकियों, आतंक को पैसे देने और उनके ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया। भारत के ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन भी नहीं किया गया। फिर भी चीन का इस दस्तावेज पर दस्तखत करना बड़ी बात है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दोनों देशों के रिश्ते बदल रहे हैं? चीन की मौजूदगी क्यों जरूरी है? दरअसल, पहलगाम का जिक्र नया नहीं था। मई में भी ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों ने इस हमले की निंदा की थी। दिल्ली के लिए यह इसलिए बड़ा है क्योंकि चीन पाकिस्तान का करीबी दोस्त माना जाता है। यह बात उस समय हुई जब भारत और चीन 2020 के गलवान झगड़े के बाद रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। शी जिनपिंग नई दिल्ली आए। चीन ने ऐसे बयान पर दस्तखत किए जो भारत की बड़ी सुरक्षा चिंता से जुड़ा है। इसका मतलब यह नहीं कि चीन ने पाकिस्तान को छोड़ दिया। लेकिन सवाल यह है कि जब चीन के अपने फायदे दांव पर हों, तो वह पाकिस्तान का कितना साथ देगा। चीन की सबसे बड़ी समस्या क्या? बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण भारत नहीं है। कारण है चीनी नागरिकों की सुरक्षा। सीपीईसी पर काम कर रहे चीनी मजदूरों पर, खासकर बलूचिस्तान में, बार-बार हमले हो रहे हैं। इस कारण चीन नाराज है। अब चीन खुलकर पाकिस्तान से सुरक्षा सुधारने को कह रहा है। कुछ परियोजनाएं हमलों के बाद कुछ समय के लिए रुकी भी थीं। 2026 में भी यही समस्या है। चीन सीपीईसी 2.0 आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन सुरक्षा पर जोर दे रहा है। पाकिस्तान ने चीनी लोगों और परियोजनाओं की सुरक्षा सुधारने का वादा किया है। यही कारण है कि रिश्ता टूटा नहीं है। लेकिन सीपीईसी पर सुरक्षा की दिक्कतें बढ़ रही हैं। निवेश को लेकर सवाल खबर है कि दोनों देशों के बीच निवेश को लेकर भी फर्क दिख रहा है। खबर है कि चीन की एक बड़ी कंपनी ने पाकिस्तान की बिजली कंपनी खरीदने का प्लान वापस ले लिया। वजह है पैसे की समस्या और सुरक्षा का खतरा। सीपीईसी बड़े चीनी निवेश पर बना था। अब चीन सिर्फ दोस्ती के लिए पैसा नहीं लगाना चाहता। वह देख रहा है कि पैसा वापस आएगा या नहीं और काम सुरक्षित है या नहीं। पाकिस्तान को चीन के पैसे की जरूरत है, लेकिन वह कर्ज और सुरक्षा की समस्या से जूझ रहा है। बता दें कि मई 2026 में शहबाज शरीफ चीन गए। शी जिनपिंग से मुलाकात हुई। दोनों ने दोस्ती और सीपीईसी को और मजबूत करने की बात कही। चीन ने सीपीईसी 2.0 का साथ दोहराया। पाकिस्तान ने सुरक्षा सुधारने का वादा किया। अगस्त में भी दोनों पक्षों ने सीपीईसी पर बात की। यानी चीन दूर नहीं हो रहा। वह पाकिस्तान से और ज्यादा मांग कर रहा है। शायद यही कारण है कि कुछ मुद्दे पर तनाव दिख रहा है। पाकिस्तान और ब्रिक्स पाकिस्तान 2023 से ब्रिक्स में शामिल होना चाहता है। उसने चीन और रूस से मदद मांगी। लेकिन सभी देशों की सहमति चाहिए। भारत का विरोध बड़ी रुकावट है। ब्रिक्स में जाने से पाकिस्तान को ज्यादा पहचान और नई ताकतों से बात करने का मौका मिल सकता है। चीन अब तक भारत के विरोध को पार नहीं कर पाया है। लगता है चीन पाकिस्तान के साथ रिश्ता भी रखना चाहता है और भारत के साथ भी बेहतर संबंध रखना चाहता है। पहलगाम वाले बयान के पीछे क्या कारण? चीन के पाकिस्तान में बड़े हित हैं। सीपीईसी कश्मीर के उस हिस्से से जाता है जो पाकिस्तान के पास है। ग्वादर से अरब सागर तक रास्ता मिलता है। पाकिस्तान भारत के सामने संतुलन भी बनाता है। लेकिन चीन का भारत से बड़ा व्यापार भी है। वह सीमा पर शांति और भारत से अच्छे रिश्ते चाहता है। मोदी और शी रिश्ते सुधारने पर काम कर रहे हैं। ऐसे में चीन नहीं चाहता कि हर मामले में उसे सिर्फ पाकिस्तान का पक्षधर माना जाए। इसलिए ब्रिक्स में पहलगाम की बात इसी दिशा में जाती है। चीन पाकिस्तान का साथी रह सकता है, बिना हर बात पर उसका साथ दिए। क्या रिश्ते खराब हो रहे हैं? पाकिस्तान में लगातार चीनी लोगों पर हमले हो रहे हैं। सीपीईसी की सुरक्षा कमजोर है। निवेश का फायदा साफ नहीं है। परियोजनाओं में देरी है। चीन अब पैसे और सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। साथ ही भारत से रिश्ते सुधारना चाहता है। लेकिन अभी बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। चीन अब भी पाकिस्तान को जरूरी साथी मानता है। पाकिस्तान अब भी चीन की मदद पर बहुत निर्भर है। चीन सीपीईसी 2.0 का साथ दे रहा है। बता दें कि पहले पाकिस्तान चीन को रास्ता और साथ देता था। चीन पाकिस्तान को पैसा, समर्थन और सुरक्षा देता था। अब चीन बदले में ज्यादा चाहता है- अपने लोगों की सुरक्षा, अपने पैसे की सुरक्षा और काम में साफ तस्वीर। इसलिए ब्रिक्स में पहलगाम का जिक्र अहम है। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि चीन ने पाकिस्तान को छोड़ दिया। बात यह है कि पाकिस्तान अब यह नहीं मान सकता कि भारत से टकराव होने पर चीन हर बार अपने आप भारत के खिलाफ खड़ा हो जाएगा। नई दिल्ली के लिए यही बात सबसे बड़ी है।

BRICS डिनर में वेज खाना, राहुल गांधी के पोस्ट से सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के एक पोस्ट ने सोशल मीडिया पर एक अलग बहस छेड़ दी है। अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन खाने का जिक्र किया, जिसके बाद लोगों उनकी पोस्ट पर काफी कमेंट कर रहे हैं । राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत में 80% लोग नॉन-वेजिटेरियन हैं। भारत का नॉन-वेज खाना बहुत स्वादिष्ट होता है। राहुल के इस पोस्ट को BRICS समिट में परोसे गए वेज फूड से जोड़कर देखा जा रहा है। राहुल गांधी ने किया ये पोस्ट बता दें कि, राहुल गांधी ने रविवार 13 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर किया। इस पोस्ट में उन्होंने छोले-भटूरे की फोटो शेयर की। साथ ही कैप्शन में उन्होंने इंडियन नॉन-वेज का जिक्र किया। X पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने लिखा, "80 प्रतिशत इंडियन नॉन-वेजिटेरियन हैं और इंडियन नॉन-वेज खाना बहुत ही ज्यादा स्वादिष्ट होता है। उन्होंने पोस्ट पर मजाकिया अंदाज में ये भी कहा कि उनकी बहन के बनाए छोले-भटूरे भी उतने ही स्वादिष्ट हैं। पोस्ट में शेयर की गई तस्वीर देखकर ऐसा लगता है कि ये छोले-भटूरे कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने अपने हाथों से तैयार किए थे। पोस्ट पर छिड़ी बहस दरअसस, BRICS के आधिकारिक गाला डिनर के मेन्यू में कोई नॉन-वेज डिश शामिल नहीं थी। शाकाहारी मेन्यू को लेकर सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। वहीं राहुल गांधी के इस पोस्ट को BRICS समिट में परोसे गए वेज फूड से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पोस्ट करते हुए लिखा कि मुझे यकीन नहीं हो रहा कि कांग्रेस पार्टी ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है। हमारे मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का आनंद लिया, जो स्वाद और पोषण से भरपूर था और जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं की झलक थी। BRICS के मेन्यू में थे ये डिश दरअसल 12 सितंबर को आयोजित डिनर के मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता, गुजराती खांडवी और मिलेट्स का पुलाव रखा गया था। कश्मीर की मशरूम डिश और मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी परोसी गई थी। मेन्यू के मुताबिक, स्टार्टर के तौर पर खांडवी मिल-फ्यूई थी। मेन स्टार्टर में पनीर लबाबदार से लेकर गुच्छी मार्मिक, केसर, किशमिशन और मामरा बदाम के साथ पकाए गए हिमाचली गुच्छी मशरूम और मिलेट पुलाव था। भारत ने की मेजबानी बता दें कि, भारत में आयोजित दो दिवसीय 18वां BRICS शिखर सम्मेलन रविवार को खत्म हुआ। इस सम्मेलन में 11 सदस्य देशों के नेता एक मंच पर जुटे और कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। साल 2024 में इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल किया गया। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी BRICS का सदस्य बन गया। इसके अलावा, पिछले साल बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को BRICS के साझेदार देशों का दर्जा दिया गया था।