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समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये पंजीयन 10 अक्टूबर तक

भोपाल  खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये किसान पंजीयन प्रक्रिया का निर्धारण कर दिया गया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। पंजीयन 15 सितम्बर से शुरू हो रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा। सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था ‌द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा। उपार्जित फसल के भुगतान हेतु बैंक खाता किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाएगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते में भुगतान करने में किसी कारण से समस्या उत्पन्न होने पर किसान ‌द्वारा पंजीयन में उपलब्ध कराये गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकेगा। किसान पंजीयन के समय किसान को बैंक खाता नंबर और IFSC कोड की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। अक्रियाशील बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम, बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। पंजीयन व्यवस्था में बेहतर सेवा प्राप्त करने के लिए यह जरूरी होगा कि किसान अपने आधार नंबर से बैंक खाता और मोबाईल नंबर को लिंक कराकर उसे अपडेट रखें। सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही 1 रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा। आधार नंबर का वेरिफिकेशन पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा। किसानों को करें एसएमएस विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं। किसान पंजीयन की सभी प्रक्रियाएँ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।  

खेल बना काल! अशोकनगर में कुएं में समाए चार मासूम, एक ही परिवार के बच्चों की दर्दनाक मौत

अशोकनगर चंदेरी-थाना चंदेरी अंतर्गत ग्राम विक्रमपुर में सोमवार को एक हृदयविदारक हादसे में एक ही परिवार के चार सगे भाइयों की कुएं में डूबने से मौत हो गई। मृतकों में देव (9 वर्ष), त्रिदेव (7 वर्ष), महादेव (6 वर्ष) और प्रयांश (4 वर्ष) शामिल हैं। चारों बच्चे बलवीर कुशवाहा के पुत्र बताए गए हैं। 4 मासूम सगे भाइयों की मौत जानकारी के अनुसार चारों बच्चे सोमवार सुबह करीब 10 बजे खेलने के लिए घर से निकले थे। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण पिता मजदूरी करने के लिए सुबह ही काम पर चले गए थे। वहीं बच्चों की मां पिछले करीब तीन महीने से अपने मायके में रह रही है। ऐसे में घर पर बच्चों की देखरेख की स्थिति भी घटना के बाद चर्चा का विषय बनी हुई है। दोपहर करीब 1:30 बजे चारों बच्चों के शव खेत पर बने कच्चे कुएं में तैरते हुए मिले। सूचना मिलते ही ग्रामीणों की मदद से शवों को बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चंदेरी भेजा गया। शवों पर मिले रक्त के निशान, पोस्टमार्टम से खुलेगा राज घटना के बाद बच्चों के शवों से रक्त निकलने की बात सामने आई है। प्रारंभिक तौर पर जलीय जीवों, जैसे मछली अथवा केंकड़ों द्वारा शवों को नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हालांकि बच्चों की मौत के वास्तविक कारण और शरीर पर मौजूद चोट अथवा अन्य निशानों की स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस जांच में इन बिंदुओं पर भी रहेगा फोकस चारों बच्चों की एक साथ कुएं में डूबने की घटना को लेकर पुलिस द्वारा घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। इसमें यह पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि बच्चे कुएं तक कैसे पहुंचे, कुएं में गिरने की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं तथा क्या चारों एक साथ कुएं में गिरे या किसी बच्चे को बचाने के प्रयास में अन्य बच्चे भी हादसे का शिकार हुए। इसके अलावा कुएं की गहराई, सुरक्षा व्यवस्था, मुंडेर अथवा जाली की स्थिति, घटनास्थल का निरीक्षण, शवों पर मिले निशान तथा आसपास मौजूद लोगों के बयान भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर भी पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। यह भी पढ़ें- सागर में जहरीली शराब ने 10 लोगों की छीनी आंखों की रोशनी, 100 से ज्यादा पीड़ितों में दिखे धुंधलापन के लक्षण तहसीलदार ने राहत राशि का दिया भरोसा घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। दिलीप दरोगा तहसीलदार चंदेरी द्वारा आरबीसी 6(4) के तहत नियमानुसार राहत राशि प्रदान किए जाने की बात कही गई है। चार बच्चों की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक और भावनात्मक संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन से पीड़ित परिवार को शीघ्र राहत उपलब्ध कराने की उम्मीद है। चार मासूम भाइयों की एक साथ मौत की खबर से विक्रमपुर गांव में शोक की लहर है। परिवार की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता और हरसंभव मदद उपलब्ध कराने की मांग की है।  

दुर्गम पहाड़ी एवं जंगल क्षेत्रों में ड्रोन और पैदल सर्चिंग कर 27 क्विंटल से अधिक अवैध गांजे की फसल जब्त

भोपाल मध्यप्रदेश में अवैध मादक पदार्थों की खेती, तस्करी एवं परिवहन के विरुद्ध प्रदेश में लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में बड़वानी जिले में अवैध गांजे की खेती के विरुद्ध “ऑपरेशन ग्रीन स्ट्राइक” के तहत अब तक की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। कार्रवाई में 27 क्विंटल से अधिक गांजे के पौधे बरामद किए गए। जब्त मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत 01 करोड़ 15 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। यह कार्यवाही पुलिस महानिरीक्षक, ग्रामीण जोन इंदौर, पुलिस उप महानिरीक्षक, निमाड़ रेंज खरगोन तथा पुलिस अधीक्षक बड़वानी के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस सेंधवा के नेतृत्व में बड़वानी, खरगोन एवं खंडवा जिलों के 400 से अधिक पुलिसकर्मियों की 12 टीमों द्वारा की गई। थाना वरला क्षेत्र के दुर्गम पहाड़ी एवं जंगल इलाकों में अवैध रूप से की जा रही गांजे की खेती के विरुद्ध विशेष अभियान संचालित किया गया। टीमों द्वारा थाना वरला क्षेत्र के 19 गांवों में एक साथ सघन सर्चिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान ड्रोन तकनीक की सहायता लेने के साथ ही पुलिस टीमों ने दुर्गम पहाड़ी एवं जंगल क्षेत्रों में पैदल पहुंचकर संदिग्ध स्थानों की गहन तलाशी ली। अभियान के दौरान ग्राम डोकलियापानी, धवलियागीर, बागदरी, टाकियापानी एवं आड़नदी के दूरस्थ पहाड़ी एवं जंगल क्षेत्रों में अवैध गांजे की खेती किए जाने वाले 5 खेतों का पता लगाकर कार्रवाई की गई, जिनमें 26 हजार से अधिक गांजे के पौधे जब्त किए गए, जिनका कुल वजन 27 क्विंटल से अधिक तथा अनुमानित कीमत 1 करोड़ 15 लाख से अधिक है। पुलिस द्वारा जब्त किए गए खेत वन भूमि पर स्थित पाए गए हैं। इस संबंध में वन विभाग से संबंधित पट्टाधारियों/कब्जाधारियों की जानकारी प्राप्त की जा रही है। प्राप्त जानकारी के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों की खेती एवं तस्करी के नेटवर्क के विरुद्ध अभियान को निरंतर प्रभावी बनाया जा रहा है। दुर्गम एवं वन क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक, आधुनिक संसाधनों तथा विभिन्न जिलों के पुलिस बल के समन्वित उपयोग से ऐसी गतिविधियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने परिवारजनों के साथ विधि-विधान से की गणपति की स्थापना और पूजा-अर्चना

रायपुर  गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर आज मुख्यमंत्री निवास में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में भगवान  गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अपने परिवारजनों के साथ पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाज से विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान  गणेश बुद्धि, और विवेक के प्रतीक हैं। किसी भी शुभ कार्य का प्रारंभ भगवान गणेश की आराधना से करने की हमारी प्राचीन परंपरा रही है। गणेशोत्सव हमारी आस्था का पर्व होने के साथ ही समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकजुटता को सुदृढ़ करने वाला उत्सव भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में तीज-त्योहारों और उत्सवों का विशेष महत्व है। हमारे पर्व हमें अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ परिवार और समाज को भी एक सूत्र में पिरोते हैं। गणेशोत्सव का उल्लास भी हमें सामूहिकता, सद्भाव और लोकमंगल की भावना से जोड़ता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के परिवारजन, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  आलोक सिंह तथा मुख्यमंत्री निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

कोयला कर्मियों के परिवारों को राहत, दुर्घटना बीमा और छात्रवृत्ति में हुआ बड़ा इजाफा

धनबाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 76वें जन्मदिन 17 सितंबर के अवसर पर केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी कोयला श्रमिकों के नाम विशेष संदेश जारी करेंगे। इसमें श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए कई महत्वपूर्ण कल्याणकारी सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। नियमित कोयला कर्मचारियों को एक करोड़ रुपये तक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और संविदा श्रमिकों को 40 लाख रुपये तक दुर्घटना बीमा की सुविधा प्रमुख है। खनन दुर्घटना में मृत्यु पर अनुग्रह राशि 15 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये किए जाने की भी जानकारी दी गई है। साथ ही एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2026 के तहत 1.25 करोड़ से अधिक आजीविकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इससे वित्तीय निश्चितता, परिचालन स्थिरता, निरंतर रोजगार और खनन क्षेत्रों से जुड़े समुदायों के हितों की रक्षा में मदद मिलेगी। दुर्घटना में परिवारों को 25 लाख, स्वास्थ्य-सुरक्षा पर जोर ‘वी केयर’ पहल के तहत खनन दुर्घटना में मृत्यु होने पर नियमित और संविदा, दोनों श्रेणियों के श्रमिकों के परिवारों को समान रूप से 25 लाख रुपये अनुग्रह राशि देने की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त नियमित कर्मियों के लिए एक करोड़ और संविदा श्रमिकों के लिए 40 लाख रुपये तक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा उपलब्ध है। श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए आवधिक चिकित्सा परीक्षण, निवारक स्वास्थ्य जांच तथा विशेषज्ञ स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। कोयला कंपनियों के कर्मचारियों को यूनिफॉर्म के लिए प्रतिवर्ष 12,500 रुपये देने की व्यवस्था भी संदेश में शामिल है। वहीं, 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले पात्र श्रमिकों को 8.33 प्रतिशत प्रदर्शन-संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआइ) का लाभ देने की जानकारी दी जाएगी। बच्चों की छात्रवृत्ति बढ़ी 350 प्रतिशत, पूर्व कर्मियों को ई-निवारण की सुविधा ‘प्रेरणा-सीआइएल छात्रवृत्ति योजना’ के तहत कोयला कर्मचारियों के बच्चों की छात्रवृत्ति राशि में करीब 350 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पूर्व कर्मचारियों और उनके परिवारों को ई-निवारण पोर्टल के जरिए अपनी शिकायतों की स्थिति देखने की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले कोयला श्रमिक देश की ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारत ने पहली बार एक अरब टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा पार कर उसे दोबारा हासिल किया है। वैश्विक परिस्थितियों के बीच ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद भारतीय कोयले ने बिजली संयंत्रों में ईंधन की कमी नहीं होने दी।

सीएम योगी का बड़ा संदेश: शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण जरूरी, अनावश्यक शिकायत करने वालों पर भी हो कार्रवाई

लखनऊ राजधानी लखनऊ में गोमतीनगर स्थित लोक आयुक्त कार्यालय में उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस पर सोमवार को समारोह आयोजित किया गया। इसमें सीएम योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने लोक आयुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा ने किया।इस दौरान संगठन की पांच दशक की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी में संगठन के गठन से लेकर अब तक की यात्रा, कार्यप्रणाली, शिकायतों की जांच और प्रमुख उपलब्धियों को क्रमवार प्रदर्शित किया गया। यहां बताते चलें कि लोक आयुक्त संगठन भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच में अहम भूमिका निभाता है। समारोह में लोक आयुक्त प्रशासन के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है किसी संस्था से जुड़ा जन विश्वास  इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत किसी संस्था से जुड़ा सामान्यजन का विश्वास है। गुड गवर्नेंस आमजन के विश्वास पर निर्भर करता है। उन्होंने सुशासन के लक्ष्यों को भी गिनाया। कहा कि किसी संस्था में सामान्य व्यक्ति बेझिझक आए और नियमानुसार परिणाम को समयबद्ध प्राप्त कर सके। यही हमारी कसौटी होती है। शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो। साथ ही अनावश्यक शिकायत करने वालों पर भी शिकंजा कसने का काम भी हो।   जनविश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी  सीएम ने कहा कि संस्था के गठन मात्र से समस्या का समाधान नहीं होता। जन-विश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी है। संविधान निर्माताओं ने भारत की व्यवस्था के लिए संसदीय लोकतंत्र दिया। यदि जनप्रतिनिधि ने विश्वास खोया तो सरकार गई।     अनावश्यक शिकायत करने वालों पर कसना होगा शिकंजा  सीएम ने आगे कहा कि आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन, जनता दर्शन आदि के जरिये जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान कराया जाता है। हालांकि, कुछ लोग अनावश्यक शिकायत भी लेकर आते हैं, बताते हैं कि मेरी व्यक्तिगत समस्या नहीं है, लेकिन किसी के खिलाफ शिकायत करनी है। यदि हम प्रमाण मांगते हैं तो आनाकानी भी होती है।  एक अनुभव साझा करते हुए सीएम ने कहा कि एक सज्जन ने एक विद्यालय के खिलाफ शिकायत की। जांच में शिकायत झूठी निकली तो उन्होंने कहा कि पूरे जिले के विद्यालयों की जांच की जाए। ऐसी झूठी शिकायतों को खारिज किया जाना चाहिए। किसी संस्था को विश्वास के प्रतीक के रूप में स्थापित करने के लिए आवश्यक है कि अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी विश्वास व्यक्त करे कि मेरी समस्या का समाधान होगा। तकनीक के कारण अब पीडीएस की शिकायत नहीं  सीएम ने कहा कि लोक आयुक्त संगठन ने टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग किया है। 2017 में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) में सबसे अधिक शिकायत खाद्यान्न वितरण की आती थी। जनता दर्शन में 100 में से 60 शिकायतें पीडीएस की होती थी। इससे परेशान होकर लगातार हम बैठक करते थे, फिर हमने तकनीक का प्रयोग किया। ई-पॉस मशीन लगाकर उसे मुख्यालय पर स्क्रीन लगाकर जोड़ दिया। इसके बाद यदि 80 हजार राशन कोटे की दुकानों में किसी ने कुछ इधर-उधर किया तो तुरंत अलर्ट आ जाता है। इससे हेराफेरी की गुंजाइश शून्य हो गई। साढ़े 9 साल में 34 लाख राजस्व मामलों का निस्तारण सीएम ने राजस्व विभाग के मामलों का भी जिक्र किया। कहा कि 2017 में भूमि संबंधी विवाद, पैमाइश, वरासत, नामांतरण से जुड़े 34 लाख मामले लंबित थे। इससे अनावश्यक विवाद होते थे। केवल वरासत से जुड़े लगभग छह लाख मामले लंबित थे। सभी के निस्तारण की समयसीमा तय की गई। तय किया गया कि लैंड यूज की समस्या का समाधान 30 दिन में नहीं हुआ तो इसे डीम्ड मान लिया जाएगा, यानी गलत होने पर निस्तारण करने वाले की जवाबदेही तय होगी। साढ़े 9 साल में 34 लाख मामले का निस्तारण हुआ, लेकिन 9 साल में 9 लाख और मामले भी सामने आए। वरासत, पैमाइश आदि की समस्याओं का समाधान किया गया।  हर तहसील में दिया गया रोबोट  सीएम ने कहा कि पैमाइश में शिकायत मिली कि लेखपाल ने जरीब में थोड़ा इधर-उधर कर दिया है। अब इस समस्या का भी समाधान हो गया। इसके लिए हर तहसील में रोबोट दे दिया है। इतनी पारदर्शिता हुई कि एक इंच भी कोई इधर-उधर नहीं कर सकता। टेक्नोलॉजी दिलाएगी शिकायतों के अंबार से मुक्ति  सीएम ने कहा कि टेक्नोलॉजी का उपयोग कर शिकायतों के अंबार का समाधान निकाल सकते हैं। हो सकता है कि लोकसेवक को बचाने का प्रयास होता है, लेकिन शिकायत जब लोक आयुक्त संगठन के पास जाती है तो वह मेरिट के आधार पर समाधान निकालता है। कई बार जब व्यक्ति को ताकत मिलती है तो वह उदंडतापूर्ण व्यवहार करने लगता है, उस पर अंकुश जरूरी है।   यूपी में 14 सितंबर 1977 को गठित हुआ लोक आयुक्त संगठन  सीएम ने कहा कि आजादी के बाद लगा होगा कि आने वाले समय में नेतृत्व देने वाले लोग ही व्यवस्था में गदर मचा डालेंगे, तब इमरजेंसी के तत्काल बाद बनी पहली सरकार ने लोक आयुक्त संगठन के निर्माण की तरफ कदम बढ़ाए। उत्तर प्रदेश में लोक आयुक्त संगठन का विधिवत कार्य 14 सितंबर 1977 को प्रारंभ हुआ। उस समय न्यायमूर्ति विशंभर दयाल ने उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त संगठन को नेतृत्व प्रदान किया था। तबसे प्रारंभ हुई संगठन की यह यात्रा न्यायमूर्ति संजय मिश्र के नेतृत्व में नई पहचान, नई आभा के साथ जारी है। विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत  सीएम ने कहा कि बहुत सारी समस्याओं के समाधान को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया गया है। 2014 में सत्ता संभालने के बाद पीएम मोदी ने जनधन अकाउंट खोलने की बात की तो विपक्ष ने खिल्ली उड़ाई। आज जनधन अकाउंट की ताकत सबके सामने है। अब डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में धनराशि जाती है। विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत है।  उन्होंने विधवा, निराश्रित, वृद्धजन की बेचारगी को बताते हुए 2017 के पहले मिलने वाली राशि में घूसखोरी का भी जिक्र करते हुए कहा कि अब यूपी में ऐसा नहीं है। सरकार डीबीटी के माध्यम से सीधे अकाउंट में 1.10 करोड़ लोगों को वार्षिक 12 हजार पेंशन दे रही है। व्यवस्था से बिचौलिए समाप्त कर दिए गए। इस दौरान लोक … Read more

मेरिट में आने वाले 7,500 से ज्यादा विद्यार्थियों को मिलेगी स्कूटी

भोपाल  प्रदेश के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव "मुख्यमंत्री स्कूटी योजना" अंतर्गत 19 सितंबर को भोपाल से मेधावी विद्यार्थियों को ई-स्कूटी का वितरण करेंगे। इससे विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा की राह आसान होगी। साथ ही, कॉलेज आने-जाने में भी सहूलियत होगी। राज्य स्तरीय स्कूटी वितरण कार्यक्रम शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिवाजी नगर, भोपाल में सुबह 10 बजे से होगा। मुख्यमंत्री स्कूटी योजना का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में ही 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान आना जरूरी हैं। प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना का लाभ स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में नियमित विद्यार्थी के रूप में अध्ययनरत विद्यार्थी को दिया जाता है। योजना में सभी संकायों के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। 7,500 से अधिक विद्यार्थी होंगे लाभान्वित योजना अंतर्गत शिक्षण सत्र 2025-26 के लिए प्रदेश के 7,500 से अधिक पात्र विद्यार्थियों को ई-स्कूटी का लाभ मिलेगा। योजना में अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिल चुका है लाभ मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक पात्र विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना के संचालन पर अब तक लगभग 246 करोड़ रूपये व्यय किए गए हैं। मुख्यमंत्री स्कूटी योजना मेधावी विद्यार्थियों की मेहनत और उपलब्धि को प्रोत्साहित करने के साथ ही आगे की पढ़ाई के लिए सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करने से शिक्षा के प्रति उनका उत्साह बढ़ रहा है और उच्च शिक्षा की ओर उनकी भागीदारी को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है।  

फिल्म शूटिंग का नया हब बनेगा चंडीगढ़? प्रशासन ने निर्माताओं को दिया न्योता, सिंगल विंडो से मिलेगी ऑनलाइन अनुमति

चंडीगढ़  ‘सिटी ब्यूटीफुल’ अब सिर्फ फिल्मों के पर्दे पर नजर आने वाला शहर नहीं, बल्कि फिल्म निर्माताओं के लिए शूटिंग का पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में प्रशासन कदम बढ़ा रहा है। यहां कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। अब देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं को चंडीगढ़ की ओर आकर्षित करने के लिए प्रशासन ने फिल्म शूटिंग की अनुमति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया है। इसके तहत अलग-अलग विभागों से अनुमति लेने की प्रक्रिया को एक जगह लाया गया और बाद में इसे पूरी तरह ऑनलाइन भी कर दिया गया। प्रशासन की कोशिश अब केवल फिल्मों में चंडीगढ़ को दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि चंडीगढ़ को खुद एक ‘फिल्मिंग डेस्टिनेशन’ और सिनेमाई पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की है। इसी प्रयास के तहत चंडीगढ़ टूरिज्म ने पहली बार पिछले सप्ताह श्रीनगर में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अाफ जम्मू एंड कश्मीर -2026 में हिस्सा लिया और देश-दुनिया के फिल्म निर्माताओं के सामने शहर की फिल्म शूटिंग क्षमता और खूबसूरती को पेश किया। चंडीगढ़ में इन फिल्मों की हो चुकी शूटिंग क्रम     फिल्म का नाम 1     धुरंधर 2     इंडियन-2 3     जट्ट एन जूलियट 4     कैरी ऑन जट्टा 5     द डिप्लोमैट 6     सैम बहादुर 7     शेरशाह 8     फ्लाइंग जट्ट 9     बेशरम 10     निक्का जैलदार 11     जर्सी 12     लाल सिंह चड्ढा 13     पिल 14     दोस्ताना 15     जीरो डार्क थर्टी 2004 से फिल्म निर्माताओं के लिए आसान रास्ता प्रशासक गुलाब चंद कटारिया का भी विशेष फोकस है चंडीगढ़ ज्यादा से ज्यादा फिल्मों में दिखाई दे। चंडीगढ़ में फिल्म और टेलीविजन शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग का फिल्म फैसिलिटेशन सेल वर्ष 2004 से काम कर रहा है। पहले फिल्म निर्माताओं को शूटिंग के लिए अलग-अलग विभागों से एनओसी लेनी पड़ती थी। इसे आसान बनाने के लिए पर्यटन विभाग ने सिंगल विंडो व्यवस्था शुरू की, जिसके माध्यम से जरूरी अनुमतियां एक ही व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराई जाने लगीं। इसके बाद शहर में हिंदी और क्षेत्रीय फिल्मों के साथ टीवी धारावाहिकों की शूटिंग में भी बढ़ोतरी हुई।1 अप्रैल 2022 से शूटिंग की अनुमति की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई। फिल्म निर्माता ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और अनुमति प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है। चंडीगढ़ टूरिज्म की यह व्यवस्था शहर में ‘ईज ऑफ फिल्मिंग’ को मजबूत करने के साथ सिनेमाई पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश का अहम हिस्सा है। फिल्मों में चंडीगढ़ की अलग पहचान चंडीगढ़ फिल्म निर्माताओं के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि एक ही शहर में आधुनिक वास्तुकला, सुनियोजित सेक्टर, चौड़ी सड़कें, हरियाली, विरासत स्थल, बाग और प्राकृतिक खूबसूरती के अलग-अलग दृश्य मिल जाते हैं। ली कार्बुजिए की वास्तुकला से लेकर सुखना झील, राॅक गार्डन, रोज गार्डन और कैपिटल कॉम्प्लेक्स तक शहर का हर हिस्सा कैमरे के लिए अलग पृष्ठभूमि उपलब्ध कराता है। चंडीगढ़ टूरिज्म ने इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में जारी किए गए सिनेमैटिक टूरिज्म ब्रोशर में भी इन्हीं खूबियों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया। इसमें शहर की वास्तुकला, सुनियोजित शहरी ढांचे, सांस्कृतिक विरासत, बागों और प्रमुख पर्यटन स्थलों को फिल्म शूटिंग के लिए संभावित लोकेशन के रूप में पेश किया गया है। पर्दे से पर्यटन तक का सफर प्रशासन अब फिल्मों में दिखाई देने वाली लोकेशनों को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाश रहा है। जिस जगह को दर्शक फिल्म में देखते हैं, उसे वास्तविक जीवन में देखने के लिए पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। इस तरह फिल्म शूटिंग से शहर को प्रचार मिलने के साथ होटल, परिवहन, खानपान और स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को भी फायदा मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली बार चंडीगढ़ की दस्तक 7 से 10 सितंबर तक श्रीनगर, जम्मू और गुलमर्ग में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में चंडीगढ़ की पहली भागीदारी इसी रणनीति का हिस्सा है। महोत्सव में 41 देशों की 135 फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। चंडीगढ़ टूरिज्म ने यहां फिल्म निर्माताओं, प्रोडक्शन हाउस और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को शहर में शूटिंग के लिए आमंत्रित किया। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव सैयद आबिद रशीद शाह का कहना है कि चंडीगढ़ की अलग पहचान और खूबसूरती को वैश्विक फिल्म समुदाय तक ले जाना उद्देश्य है। प्रशासन चाहता है कि फिल्म निर्माता चंडीगढ़ को केवल कहानी की पृष्ठभूमि के तौर पर नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण और सिनेमाई पर्यटन के एक प्रमुख गंतव्य के रूप में देखें।यानी अब चंडीगढ़ की कहानी सिर्फ फिल्मों में नहीं होगी—प्रशासन चाहता है कि फिल्मों की अगली कहानी भी चंडीगढ़ में लिखी जाए।

अखिलेश यादव से भिड़े जयंत चौधरी, बोले- मैंने मुंह खोल दिया तो बहुत मुश्किल हो जाएगी

दिल्ली जयंत चौधरी और अखिलेश यादव में वार-पलटवार जारी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच वार-पलटवार थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत में अखिलेश के बयान से जुड़े सवाल पर जयंत चौधरी भयानक रूप से भड़क गए। जयंत ने कहा कि अगर मैंने मुंह खोल दिया तो अखिलेश यादव को यहां भी खड़े नहीं हो पाएंगे। दरअसल, समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश ने राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख पर तंज कसते हुए कहा था, हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी वे हमें छोड़कर चले गए। जयंत चौधरी ने कहा जयंत चौधरी ने कहा कि यूपी में 403 विधानसभा सीटें हैं। यूपी में चुनाव है। जयंत ने ऐलान करते हुए कहा कि उत्तराखंड में भी चुनाव होंगे और हम वहां भी चुनाव लड़ेंगे। सभी सीटें पर एनडीए की संयुक्त लड़ाई है। हम सब एक हैं। जयंत चौधरी ने कहा कि एकजुट लड़ाई और एकमात्र कोशिश यह सुनिश्चित करना है कि विकास के रास्ते न रुके। जयंत चौधरी ने कहा कि किस पार्टी के चुनाव चिह्न का इस्तेमाल होगा, इस बारे में बात करें तो राजनीतिक पार्टियां समय के साथ अपने चुनाव चिह्न बदलती रहती हैं। मैं अधिकार के साथ एनडीए की बातें करता हूं। मैं गंभीरता के कारण कुछ बातें नहीं कहना चाहता हूं अखिलेश यादव के बयान पर मीडिया के पूछे गए सवाल पर जयंत चौधरी भड़क गए। जयंत ने कहा कि जब हमारा उनके यानी समाजवादी पार्टी के साथ साझा था, तब बंद दरवाजों के पीछे हुई हर बात सार्वजनिक नहीं की गई थी। मैं गंभीरता के कारण कुछ बातें नहीं कहना चाहता हूं। अगर मैं खुलकर उन मामलों को बता दूं, तो यहां भी खड़े होने की भी जगह नहीं बचेगी। अखिलेश यादव आज जिस तरह के हल्केपन बातें कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है। चौधरी चरण सिंह के सम्मान को विधानसभा सीटों की संख्या से नहीं मापा या तय किया जा सकता है। उनके प्रति सम्मान हर किसी के दिल में बसा है और हमेशा रहेगा, चाहे कोई कुछ भी दावा करे। भले ही राष्ट्रीय लोक दल को एक भी सीट न मिले, फिर भी चौधरी चरण सिंह का सम्मान और प्रतिष्ठा कभी कम नहीं होगी।   चवन्‍नी कोई मुद्दा नहीं, विकास का मुद्दा होना चाहिए अखिलेश यादव वाले बयान पर जयंत ने यह भी कहा कि राजनीति मुद्दों पर की जाती है। अखिलेश को नसीहत देते हुए जयंत ने कहा कि चवन्‍नी कोई मुद्दा नहीं है। विकास का मुद्दा होना चाहिए। आज सहारनपुर से दिल्‍ली जाने में केवल डेढ़ घंटे लगते हैं। पहले छह घंटे लगा करते थे।

किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जायेगा, की जा रही सख्त कार्रवाई

भोपाल  सागर जिले के बण्डा क्षेत्र में दूषित शराब के सेवन से बीमार हुए लोगों का हाल जानने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों एवं उनके परिजन से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा चिकित्सकों से उपचार की स्थिति के संबंध में चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना से सरकार बेहद गंभीर है और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्री  राजपूत ने कहा कि दूषित शराब के सेवन से जिन लोगों की मृत्यु हुई है अथवा जो प्रभावित हुए हैं, उनके परिवारों को तीन दिन के अंदर मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन पीड़ितों के पास संबल कार्ड नहीं है, उन्हें भी नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। तीन मरीजों की आंखों में गंभीर परेशानी, भोपाल एम्स भेजने की व्यवस्था : बीएमसी के निरीक्षण के दौरान मंत्री  राजपूत को सुनील विश्वकर्मा, सुल्तान सिंह, गोविंद अहिरवार नाम के तीन मरीजों की आंखों में अधिक परेशानी होने की जानकारी मिली। मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने तत्काल बेहतर उपचार के लिए तीनों मरीजों को भोपाल भेजने की व्यवस्था कराई। मंत्री ने दूरभाष पर भोपाल एम्स के चिकित्सकों से चर्चा कर मरीजों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की और उन्हें तत्काल भोपाल भेजा गया। मंत्री ने कहा कि मरीजों के उपचार में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और सरकार उपचार का पूरा ध्यान रखेगी। शराब माफिया पर कार्रवाई कर पुलिस-प्रशासन ने कमर तोड़ दी दूषित शराब मामले में पुलिस एवं प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई पर मंत्री  राजपूत ने संतुष्टि जताई। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और पुलिस तथा प्रशासन पूरी ताकत के साथ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। शराब माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। सरकार पीड़ितों के साथ खड़ी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। सरकार पीड़ितों के साथ, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई मंत्री  राजपूत ने कहा कि इस दुखद घटना में जिन परिवारों ने अपने परिजन को खोया है, उनके प्रति सरकार की गहरी संवेदनाएं हैं। सरकार पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहायता पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को जिस भी प्रकार की मदद की आवश्यकता होगी, सरकार उसे उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी।