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17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’, जनभागीदारी और जनसेवा पर रहेगा जोर

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा की 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलेगा अभियान, जनभागीदारी और जनसेवा को दिया जाएगा व्यापक स्वरूप रायपुर.   उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज प्रदेश के सभी नगर निगमों के महापौरों, आयुक्तों, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के अध्यक्षों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की बैठक लेकर सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित वर्चुअल बैठक में अभियान के दौरान संचालित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों, विभागीय समन्वय, जनभागीदारी और प्रचार-प्रसार को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। आगामी 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक देशव्यापी सेवा संकल्प अभियान का आयोजन किया जा रहा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमीत अग्रवाल अहमदाबाद से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक में जुड़े।  उप मुख्यमंत्री साव ने समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों को ‘सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी का व्यापक स्वरूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने जनसेवा के प्रति आभार एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने और विकसित भारत-2047 के संकल्प को जन-जन से जोड़ने के लिए अभियान की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने को कहा। उन्होंने अभियान में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के विकास और जनकल्याण के लिए विगत 25 वर्षो से अनवरत कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत हुई है। साव ने कहा कि आज चीन भी भारत के साथ काम करना चाहता है और रूस के साथ भारत की मित्रता और मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है और ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम है। उप मुख्यमंत्री साव ने अभियान के दौरान किए जाने वाले कार्यों के प्रभावी दस्तावेजीकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभिन्न गतिविधियों और जनभागीदारी से जुड़े कार्यों का व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकरण किया जाए। हर आयोजन की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए तथा उनकी रील तैयार कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की जाए, ताकि अभियान की गतिविधियों और उनके प्रभाव की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि योजनाओं और अभियानों से नागरिकों के जीवन में आए वास्तविक बदलावों को भी प्रमुखता से सामने लाया जाए। इसके लिए लाभार्थियों की वास्तविक कहानियों, गतिविधियों और उपलब्धियों को रिकॉर्ड कर डिजिटल माध्यमों से प्रसारित करने पर ध्यान दिया जाए। बैठक में अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित विभिन्न गतिविधियों की तैयारियों की समीक्षा की गई। इनमें ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘सेवा की कहानी’, ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’, ‘सेवा—मेरा योगदान’, ‘सेवा सेतु अभियान’, ‘रंगोली राष्ट्र’ और ‘राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज’ सहित विभिन्न गतिविधियां शामिल हैं। अभियान का समापन 17 अक्टूबर को ‘जनसेवक महाकुंभ—पंचायत से पार्लियामेंट’ के साथ प्रस्तावित है। साव ने विशेष रूप से ‘सेवा की कहानी’ के तहत वास्तविक लाभार्थियों की प्रेरणादायी कहानियों को सामने लाने और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रचारित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं से लोगों के जीवन में आए वास्तविक बदलावों को सामने लाकर अन्य लोगों को भी प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने ‘सेवा सेतु अभियान’ के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने तथा योजनाओं की जानकारी और सुविधाएं एक स्थान पर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में ‘स्वच्छता ही सेवा–2026’ से जुड़ी गतिविधियों को भी जनभागीदारी के साथ संचालित करने पर विशेष जोर दिया गया। साव ने कहा कि स्वच्छता को व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाए। इसके लिए नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों को अपनी अगुवाई में नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों को सक्रिय रूप से जोड़ने का आह्वान किया जाएगा। साव ने बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे स्थानों और क्षेत्रों को चिन्हित कर विशेष स्वच्छता अभियान चलाए जाएं जहां स्वच्छता के क्षेत्र में प्रभावी परिणाम दिखाई दे सकें। उन्होंने अभियान के दौरान किए गए कार्यों की पहले और बाद की स्थिति दर्ज करने के निर्देश भी दिए, ताकि स्वच्छता प्रयासों से हुए वास्तविक बदलावों को सामने लाया जा सके। उप मुख्यमंत्री ने अभियान की गतिविधियों की नियमित निगरानी, समयबद्ध क्रियान्वयन और बेहतर विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ सेवा की भावना, जनभागीदारी और विकास के संकल्प को जमीनी बदलाव से जोड़ने का माध्यम बने। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेशकुमार क्षीरसागर और अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य भी उप मुख्यमंत्री के साथ समीक्षा बैठक में सर्किट हाउस में मौजूद थे।

सेवा संकल्प अभियान में हर आंगनवाड़ी केंद्र पर होगा ‘आंगन मिलन’, 26 सितंबर से 5 अक्टूबर तक आयोजन

सेवा संकल्प अभियान में प्रदेश के हर आंगनवाड़ी केंद्र पर होगा ‘आंगन मिलन’ 26 सितंबर से 5 अक्टूबर तक तीन दिवसीय आयोजन बच्चों के स्वास्थ्य से मातृ पोषण और हितग्राही संवाद तक होंगे कार्यक्रम भोपाल सेवा संकल्प अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेशभर में ‘आंगन मिलन सेवा’ का आयोजन किया जाएगा। 26 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान में प्रदेश के प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को सेवा, पोषण, सीखने, जनसहभागिता और सम्मान के जीवंत केंद्र के रूप में विकसित करना है। अभियान के माध्यम से बच्चों और माताओं को शासन की योजनाओं से जोड़ने के साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, आशा कार्यकर्ताओं और अन्य फ्रंटलाइन कर्मियों के योगदान को भी सम्मान दिया जाएगा। तीन दिन, तीन प्रमुख आयाम अभियान के लिए प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र की तीन दिवसीय सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार की जाएगी। 26 से 28 सितंबर, 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तथा 2 से 5 अक्टूबर की अवधि में प्रत्येक केंद्र के लिए कार्यक्रम की तिथि निर्धारित की जाएगी। आयोजन से पहले स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिकाधिक माताओं, बच्चों, हितग्राहियों, जनप्रतिनिधियों और समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। पहला दिन बाल स्वास्थ्य एवं आनंदमयी गतिविधियों के नाम रहेगा। तीन से 6 वर्ष के बच्चों के बीच प्रधानमंत्री के संदेश का वाचन एवं कॉमिक वितरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री की अपील का प्रसारण किया जाएगा। बच्चों के लिए खेल, कहानी, चित्रकला और मनोरंजक गतिविधियां होंगी। ‘कहानी सुनाओ-कहानी से जुड़ो’ जैसी गतिविधियों से बच्चों की रचनात्मकता और सीखने की क्षमता को प्रोत्साहित किया जाएगा। बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक जांच कराई जाएगी तथा फल और मिठाई वितरित की जाएगी। दूसरे दिन मातृ स्वास्थ्य एवं पोषण संवाद होगा। गर्भवती एवं धात्री माताओं का स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से गर्भावस्था एवं प्रसवोत्तर अवधि से जुड़े परामर्श भी दिए जाएंगे। माताओं के साथ पोषण संवाद में संतुलित आहार, एनीमिया, स्तनपान और शिशु देखभाल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरल भाषा में जानकारी दी जाएगी। तीसरा दिन ‘मेरी कहानी, मेरी सफलता’ के नाम होगा। इसमें विभागीय योजनाओं से लाभान्वित दो-तीन माताएं अपने अनुभव साझा करेंगी। योजनाओं से मिले लाभ और उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को सामने लाया जाएगा। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना, टेक होम राशन, गर्म पका भोजन सहित पोषण, स्वास्थ्य और महिला-बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। योजनाओं का असर बताएंगी हितग्राहियों की कहानियां ‘आंगन मिलन सेवा’ को जनभागीदारी के साथ डिजिटल माध्यम से भी व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा विभिन्न विभागीय योजनाओं से लाभान्वित लगभग 10 हितग्राहियों की अनुभव एवं सफलता की कहानियां तैयार की जाएंगी। अधिकतम एक मिनट के वीडियो के माध्यम से इन कहानियों को सोशल मीडिया पर साझा किया जाएगा। इनमें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाड़ली लक्ष्मी एवं लाड़ली बहना योजना, टेक होम राशन एवं गर्म पका भोजन के लाभार्थी, कुपोषण से सामान्य श्रेणी में आए बच्चों के अभिभावक, पीएम जनमन/धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के हितग्राही, स्पॉन्सरशिप, पीएम केयर्स, मुख्यमंत्री बाल कोविड सेवा योजना और सुकन्या समृद्धि योजना के लाभार्थियों की सफलता की कहानियां शामिल होंगी। फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं का होगा सार्वजनिक अभिनंदन अभियान में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, आशा कार्यकर्ता और पर्यवेक्षकों के योगदान को विशेष सम्मान दिया जाएगा। स्थानीय समुदाय और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से हितग्राही माताओं, बच्चों तथा सेवा से जुड़े कर्मियों का स्वागत एवं सार्वजनिक अभिनंदन किया जाएगा। कार्यक्रमों के फोटो, वीडियो और रिपोर्टिंग सामग्री का समयबद्ध संकलन कर विभागीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया जाएगा। प्रत्येक आयोजन में स्वच्छता, बैठने की उचित व्यवस्था और बच्चों के लिए सुरक्षित गतिविधि क्षेत्र सुनिश्चित किया जाएगा। सेवा और पोषण को विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने की पहल ‘आंगन मिलन सेवा’ के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों को शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ समुदाय और सरकार के बीच संवाद के प्रभावी मंच के रूप में विकसित किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में सेवा, पोषण, मातृ-शिशु कल्याण और जनसहभागिता को विकसित भारत के राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ते हुए सामूहिक संदेश दिया जाएगा।

भोपाल-वाराणसी सफर होगा आसान, 9,850 करोड़ की लागत से बनेगा नया एक्सप्रेसवे

भोपाल  मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए नए एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा। 9,850 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाले इस नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद भोपाल से वाराणसी की दूरी तय करने में केवल आठ घंटे का समय लगेगा। यह मार्ग दोनों राज्यों के बीच परिवहन व्यवस्था को सुगम बनाएगा। नया एक्सप्रेसवे बनने से यात्रियों के समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। वर्तमान में भोपाल से वाराणसी जाने में काफी समय लगता है, लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यह यात्रा मात्र आठ घंटे में पूरी की जा सकेगी। बुनियादी ढांचा विकास विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह परियोजना क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी।  यात्रा के समय में होगी भारी कटौती एक्सप्रेसवे केवल भोपाल और वाराणसी को ही नहीं जोड़ेगा, बल्कि राज्य के आंतरिक शहरों के बीच भी यात्रा को बेहद आसान और तेज बनाएगा। इस एक्सप्रेसवे की मदद से सतना से सागर की दूरी केवल तीन घंटे में तय की जा सकेगी। वर्तमान मार्ग की तुलना में यह नया मार्ग वाहन चालकों को सीधा और बाधा रहित रास्ता प्रदान करेगा।, सतना और सागर के बीच यात्रा समय में तीन घंटे की यह कटौती स्थानीय व्यापार और दैनिक यात्रियों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी।   9,850 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत इस परियोजना के, निर्माण कार्य पर कुल 9,850 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि का उपयोग भूमि अधिग्रहण, आधुनिक सड़क निर्माण, पुलों के निर्माण और उन्नत सुरक्षा प्रणालियों की स्थापना के लिए किया जाएगा। निर्माण प्राधिकरण के अनुसार, परियोजना में उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण मानकों का पालन किया जाएगा। बजट आवंटन के साथ ही इस एक्सप्रेसवे के निर्माण को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।    आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों को गति नया एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों को उत्तर प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से जोड़ेगा। मध्य प्रदेश के औद्योगिक और परिवहन रिकॉर्ड के अनुसार, सतना से सागर के बीच तीन घंटे में यात्रा संभव होने से विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, भोपाल, सागर, सतना और वाराणसी के बीच माल ढुलाई और यात्रियों की आवाजाही पहले से काफी तेज और सुरक्षित होगी। 

PM मोदी का जन्मदिवस देशभर के लिए खास, इसे विशेष उत्सव के रूप में मनाएं: CM डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी का जन्म दिवस सभी के लिए विशेष उत्सव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनसहभागिता-परस्पर समन्वय और उत्साह व उमंग के साथ हों आयोजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा-संकल्प अभियान के संबंध में जनप्रतिनिधियों को किया वर्चुअली संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सत्ता के नहीं बल्कि निरंतर सेवा और राष्ट्र निर्माण के 25 वर्ष हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री तक की यात्रा में उन्होंने जनसेवा को अपना संकल्प बनाया। प्रधानमंत्री मोदी का जन्म दिवस हम सब के लिए विशेष उत्सव है। सेवा-संकल्प अभियान के शुभारंभ "आशीर्वाद का दीया" से करना अभिनव पहल है। यह दीपक हम सब के मन की प्रसन्नता के प्रकटीकरण का प्रतीक बनेगा। हर गांव और वार्ड में दीपावली जैसा उत्सव आयोजित किया जाएं। संपूर्ण प्रदेश में शासन-प्रशासन, सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि, परस्पर समन्वय से पूर्ण भव्यता और उल्लास के साथ सेवा-संकल्प अभियान में भागीदारी करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को सेवा-संकल्प अभियान के संबंध में मुख्यमंत्री निवास से प्रदेश के जनप्रतिनिधियों से वर्चुअली चर्चा में यह बात कही।  प्रदेश को मिली बड़ी सौगातों से आमजन को कराएं अवगत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा   प्रदेश को दी गई बड़ी सौगातों के संबंध में आमजन को अवगत कराया जाए। "आशीर्वाद का दीया" कार्यक्रम के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी की देश-दुनिया में प्राप्त उपलब्धियों पर चर्चा भी अवश्य की जाये। प्रधानमंत्री मोदी को मध्यप्रदेश को कई सौगातें प्रदान की हैं। मेट्रो ट्रेन, एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज, प्रधानमंत्री आवास, हर घर में नल से जल, किसान कल्याण जैसी कई सौगातें हैं, जिनसे आम आदमी का जीवन बदला है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने हमें दिया ही दिया है, उनके आभार स्वरूप एक दीया प्रज्जवलित करना हम सबका कर्तव्य है। महिला स्व-सहायता समूह, लाड़ली बहना, किसान, पशुपालक, मछुआ, युवा एवं विद्यार्थी तथा स्वामित्व योजना के हितग्राहियों को इस गतिविधि से जोड़ा जाए।  अभियान की अवधि में प्रदेशवासियों को मिलेंगी और भी सुविधाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेवा-संकल्प अभियान 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है। इस अवधि में प्रदेशवासियों को और भी सुविधाएं मिलेंगी। भूमि-स्वामियों के पक्ष में नि:शुल्क रजिस्ट्री प्रक्रिया आरंभ होगी। अभियान के दौरान ही प्रदेश में 50 लाख रजिस्ट्रियां की जाएंगी। अभियान की अवधि में ही 25 सितम्बर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर सुगम यात्री बसों का संचालन भी प्रदेश में आरंभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान में अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि परस्पर समन्वय से मध्यप्रदेश अभियान के संचालन में देश में अपनी विशेष छाप छोड़ेगा।  

महाकाल महालोक में दीपों का भव्य उत्सव, PM मोदी के जन्मदिन पर जलेंगे 25 लाख दीप; 22,500 वालंटियर्स तैनात

उज्जैन  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को पहली बार महाकाल महालोक लाखों दीपों से जगमगाएगा। सेवा संकल्प अभियान के तहत होने वाले इस आयोजन में पुण्यसलिला शिप्रा के प्रमुख घाटों के साथ महाकाल महालोक में करीब 25 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने की तैयारी की गई है। जीरो वेस्ट होगा आयोजन आयोजन को पूरी तरह जीरो वेस्ट इवेंट बनाया जा रहा है। दीप प्रज्ज्वलन व्यवस्था को सात सेक्टर और 250 सब-सेक्टर में बांटा गया है। इसमें करीब 22,500 स्वयंसेवकों की भागीदारी रहेगी। घरों और प्रतिष्ठानों में भी दीप जलाने की अपील की गई है, ताकि आयोजन केवल सरकारी स्तर का कार्यक्रम न रहकर पूरे उज्जैन शहर का उत्सव बने। पीएम नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश में बड़ा सेवा अभियान शुरू होने जा रहा है। सीएम मोहन यादव की पहल पर उज्जैन के महाकाल महालोक सहित प्रदेशभर में 58 लाख आशीर्वाद के दीपक प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। सीएम ने इस आयोजन को प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा के प्रति प्रदेशवासियों के आभार का प्रकटीकरण बताया है। उनके मुताबिक मोदी ने मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक के सफर में गरीब, किसान, युवा, महिला और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया। महाशिवरात्रि पर प्रज्ज्वलित किए थे 11 लाख दीप उल्लेखनीय है कि उज्जैन ने महाशिवरात्रि 2022 में 11 लाख 71 हजार 78 दीप प्रज्ज्वलित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। बाद में अयोध्या में इससे बड़े दीपोत्सव के आयोजन किए गए, इसलिए इस बार मुकाबला केवल दीपों की संख्या का नहीं है। 25 लाख दीपों का आयोजन उज्जैन के लिए यह बताने का अवसर भी है कि उसकी दीप परंपरा केवल रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता को जोड़ने वाली परंपरा बन सकती है। सी भावना के साथ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक 'सेवा संकल्प अभियान' आयोजित किया जाएगा। सरकार इसे सेवा को राजनीतिक और सामाजिक संस्कार के रूप में आगे बढ़ाने की पहल बता रही है। गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री तक 25 साल की यात्रा सीएम यादव ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक सेवा यात्रा की शुरुआत 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में हुई थी। अब इस यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के पड़ाव पर मध्यप्रदेश में सेवा और जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गरीब कल्याण को शासन के केंद्र में रखा गया। मुफ्त राशन, आवास, शौचालय, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव बताया। स्टार्टअप से डिजिटल इंडिया तक, युवाओं के लिए नए अवसर का दावा मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में स्टार्टअप, स्किल डेवलपमेंट, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक इन पहलों ने युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को भी सरकार की उपलब्धियों में गिनाया गया। महिला सशक्तिकरण के लिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, लखपति दीदी और नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी पहलों का भी उल्लेख किया गया। CM मोहन यादव ने गिनाईं MP सरकार की उपलब्धियां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मंत्र के अनुरूप काम कर रही है। सरकार के मुताबिक प्रदेश में 85 हजार से अधिक युवाओं को शासकीय सेवाओं में नियुक्तियां दी गई हैं और आने वाले समय में हर साल एक लाख से ज्यादा युवाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। 34 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव और नए एयरपोर्ट का दावा मुख्यमंत्री के मुताबिक मध्यप्रदेश को करीब 34 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें लगभग 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। सरकार ने प्रदेश को एक वर्ष में सर्वाधिक निवेश आकर्षित करने वाले देश के तीसरे राज्य के रूप में भी बताया। रीवा, दतिया और सतना एयरपोर्ट के लोकार्पण के बाद प्रदेश में एयरपोर्ट की संख्या आठ होने की बात कही गई। केन-बेतवा लिंक परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना को भी सिंचाई विस्तार के लिए अहम बताया गया। विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य पर सरकार का जोर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्षों की सेवा यात्रा से प्रेरणा लेते हुए राज्य सरकार विकसित भारत के साथ विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का दावा है कि सुशासन, निवेश, रोजगार, सिंचाई, ऊर्जा और धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों के विकास के जरिए प्रदेश को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है।  

अमृतसर से आबूधाबी का सफर होगा आसान, 25 अक्टूबर से डायरेक्ट फ्लाइट; 4 घंटे 40 मिनट में पहुंचेंगे

अमृतसर अमृतसर के श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अब आबूधाबी का सफर सीधी उड़ान से महज 4 घंटे 40 मिनट में पूरा होगा। एयर इंडिया एक्सप्रेस 25 अक्टूबर से अमृतसर-आबूधाबी सीधी उड़ान शुरू करने जा रही है।  सप्ताह में तीन दिन बृहस्पतिवार, शनिवार और रविवार को अमृतसर से उड़ान रात 8:40 बजे रवाना होकर 11:50 बजे आबूधाबी पहुंचेगी। वापसी में शुक्रवार, रविवार और सोमवार को उड़ान आबूधाबी से रात 12:55 बजे उड़ान भरकर सुबह 6:15 बजे अमृतसर पहुंचेगी।   अमृतसर से आबूधाबी का सफर 4 घंटे 40 मिनट और वापसी का सफर 3 घंटे 50 मिनट का रहेगा। एयर इंडिया एक्सप्रेस की वेबसाइट पर बुकिंग शुरू हो गई है। फ्लाई अमृतसर इनिशिएटिव के ग्लोबल कन्वीनर समीप सिंह गुमटाला और भारत कन्वीनर योगेश कामरा ने बताया कि आबूधाबी के लिए सीधी उड़ान की काफी समय से मांग थी। कोरोना काल से पहले भी यह सेवा संचालित होती थी, जिसे अब दोबारा शुरू किया जा रहा है। इससे कारोबारियों, पर्यटकों और यूएई में काम करने वाले पंजाबियों को फायदा होगा। पहले यात्रियों को दिल्ली से उड़ान लेनी पड़ती थी या दुबई-शारजाह पहुंचकर सड़क मार्ग से आबूधाबी जाना पड़ता था। नई उड़ान से समय की बचत होगी। अमृतसर एयरपोर्ट से दुबई, शारजाह और आबूधाबी के लिए सप्ताह में एक तरफ 31 उड़ानें हो जाएंगी।  यह उड़ान सप्ताह में तीन दिन गुरुवार, शनिवार और रविवार चलेगी। अमृतसर से फ्लाइट रात 8:40 बजे रवाना होकर उसी दिन रात 11:50 बजे अबू धाबी पहुंचेगी। वापसी की उड़ान अबू धाबी से शुक्रवार, रविवार और सोमवार को रात 12:55 बजे रवाना होगी और सुबह 6:15 बजे अमृतसर पहुंचेगी। अमृतसर से अबू धाबी तक उड़ान का समय करीब 4 घंटे 40 मिनट, जबकि वापसी में लगभग 3 घंटे 50 मिनट रहेगा। फ्लाई अमृतसर इनिशिएटिव के ग्लोबल कन्वीनर समीप सिंह गुमटाला ने कहा कि नई सीधी सेवा से उन यात्रियों को विशेष लाभ होगा, जिन्हें अभी अबू धाबी पहुंचने के लिए दिल्ली से उड़ान लेनी पड़ती है या अमृतसर से दुबई अथवा शारजाह जाकर आगे सड़क मार्ग से यात्रा करनी पड़ती है। सीधी उड़ान से समय और यात्रा खर्च दोनों कम हो सकते हैं। फ्लाई अमृतसर इनिशिएटिव के कन्वीनर योगेश कामरा ने कहा कि अबू धाबी सेवा शुरू होने से अमृतसर की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। उन्होंने दावा किया कि नई उड़ान जुड़ने के बाद दुबई, शारजाह और अबू धाबी के लिए अमृतसर से साप्ताहिक उड़ानों की संख्या करीब 31 तक पहुंच सकती है, हालांकि यह एयरलाइंस के शेड्यूल में बदलाव पर निर्भर करेगी। उन्होंने एयरलाइंस से मस्कट और कुवैत जैसे खाड़ी देशों के अन्य प्रमुख शहरों के लिए भी अमृतसर से सीधी उड़ानें शुरू करने की मांग की।

मेडिकल कॉलेजों के PPP मॉडल को झटका, 9 कॉलेजों में निवेशक नहीं मिले; 300 डॉक्टरों की भर्ती अटकी

भोपाल  प्रशासनिक सुस्ती और नीतिगत विरोधाभास के कारण प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का विस्तार पूरी तरह अटक गया है। एक तरफ 1521 करोड़ से दमोह, छतरपुर और बुधनी में बने मेडिकल कॉलेजों की इमारतें खड़ी हैं और डीन भी पदस्थ हैं।  अयोग्य घोषित होने के बाद न तो दोबारा आवेदन हुआ, न फैकल्टी भर्ती पूरी हुई और न फर्नीचर खरीदा गया; नतीजतन इस सत्र भी 300 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश बंद रहा। दूसरी तरफ, 13 जिलों में प्रस्तावित पीपीपी मॉडल भी फ्लॉप साबित हुआ, जहां टेंडर के बावजूद 9 जिलों में एक भी निजी निवेशक नहीं आया और केवल 4 में बाउंड्रीवॉल का काम शुरू हो सका। तैयार सरकारी कॉलेजों को शुरू करने के बजाय उन्हें भी पीपीपी मोड में धकेलने की नीतिगत उधेड़बुन ने प्रदेश में डॉक्टरों की नई पौध पर ब्रेक लगा दिया है।     सरकारी मॉडल सुस्त: दमोह, छतरपुर और बुधनी में भवन तैयार, फिर भी एनएमसी से मंजूरी नहीं ली; डॉक्टरों की भर्ती भी नहीं     पीपीपी मॉडल फ्लॉप: 13 में से केवल 4 जिलों में काम शुरू, 8 जिलों में एक भी निवेशक नहीं आया; खरगोन का टेंडर निरस्त दमोह, छतरपुर, बुधनी में इमारतें खड़ी पर कमियां अब भी 1. शासकीय कॉलेज: भवन खड़े, डीन पदस्थ, पर 300 सीटों पर ताला दमोह, छतरपुर और बुधनी में मेडिकल कॉलेज की इमारतें तैयार हैं। डीन और सीनियर रेजिडेंट्स पदस्थ किए जा चुके हैं, लेकिन एनएमसी की पहली ही जांच में कमियां मिलने से इन्हें मान्यता नहीं मिली। डिस्क्वालिफाई होने के बाद शासन ने दोबारा आवेदन नहीं किया। खरीदी और भर्ती बंद: जून से शुरू हुई फर्नीचर खरीदी अधूरी है और फैकल्टी भर्ती के परिणाम रोक दिए गए हैं। कागजी टैगिंग: सरकार ने रिकॉर्ड में दिखाने के लिए छतरपुर को सागर और दमोह को जबलपुर स्वशासी कॉलेज से टैग (जोड़) दिया है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। दमोह में अटका काम: सरकार 369 करोड़ रु खर्च कर चुकी है। नर्सिंग कॉलेज और 500 बेड का अस्पताल बनाने थे, जो रोक दी गई है। डीन डॉ. अर्जुन सिंह का कहना है शासन के आदेशानुसार आगे काम होगा। बुधनी और छतरपुर: बुधनी में डीन डॉ. डी. परमहंस पदस्थ हैं और सीनियर रेजिडेंट्स नर्मदापुरम जिला अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं। छतरपुर में डीन डॉ. अमरदीप राय ने प्रक्रिया शुरू की है, पर सुविधाएं नहीं जुटाई गई हैं। 2. पीपीपी मॉडल: 9 जिलों में निवेशकों का इंतजार, 4 में निर्माण की रफ्तार धीमी प्रदेश के 13 जिलों- बैतूल, धार, पन्ना, कटनी, टीकमगढ़, शाजापुर, मुरैना, खरगोन, सीधी, बालाघाट, अशोकनगर, भिंड और गुना में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज मंजूर किए गए थे। इनमें से 9 जिलों में निवेशक न मिलने से काम अधर में लटक गया है। केवल 4 जिलों में निर्माण शुरू हुआ है। धार: केवल यहीं पीपीपी मॉडल आगे बढ़ा, लेकिन जमीन विवाद के कारण प्रक्रिया प्रभावित रही और अब ग्राम पंचायत की एनओसी का इंतजार है। पन्ना: पर्यटन ग्राम जनवार में 5 महीने से काम जारी है। बाउंड्रीवॉल का काम 80% पूरा हुआ है और पिलर खड़े किए जा रहे हैं। कटनी: जिला अस्पताल पर आश्रित मेडिकल कॉलेज का स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है। विरोध के कारण सीएम के दो कार्यक्रम रद्द हुए; अब बिना औपचारिक भूमिपूजन के ही बाउंड्रीवॉल बनाई जा रही है। बैतूल: यहां भी निर्माण कार्य अभी सिर्फ बाउंड्रीवॉल तक ही सीमित है। दूसरी बार मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया "छतरपुर, दमोह और बुधनी मेडिकल कॉलेज की अनुमति एनएमसी स्तर पर पेंडिंग है। एक बार डिस्क्वालिफाई होने के बाद मान्यता के लिए दोबारा आवेदन नहीं किया गया है।" — धनराजू एस., आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग