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क्रैश के बाद बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी ने तूफानी तेजी से किया आगाज

मुंबई  शेयर बाजार में मंगलवार को बड़ा क्रैश देखने को मिला था, लेकिन बुधवार को कारोबार ओपन होते ही सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स गदर मचाए हुए नजर आए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के साथ ही अपने पिछले बंद के मुकाबले 500 अंक से ज्यादा चढ़ गया, तो वहीं इसके कदम से कदम मिलाकर चलते हुए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी छलांग लगाकर 23,200 के पार निकल गया. इस तेजी के बीच ITC, HCL, BEL समेत कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला।  सेंसेक्स-निफ्टी की दमदार शुरुआत बुधवार को शेयर मार्केट में कारोबार ओपन होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,003 की तुलना में उछलकर 74,249 पर खुला और फिर इसके अपनी रफ्तार तेज करते हुए 500 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाकर 75,505 का लेवल छू लिया. बात निफ्टी की करें, तो एनएसई का ये इंडेक्स भी अपने पिछले बंद 23,118 की तुलना में बढ़त के साथ 23,201 पर ओपन हुआ और फिर एक झटके में 23,281 पर जा पहुंचा।  कल क्रैश हो गया था शेयर बाजार पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार में जारी गिरावट ने निवेशकों को तगड़ा नुकसान कराया था और बीते कारोबारी दिन मंगलवार को तो शेयर मार्केट में भूचाल आ गया था. सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स ने शुरुआत तो जोरदार की थी, लेकिन फिर कुछ देर के कारोबार के बाद देखते ही देखते ये बिखर गए थे. शेयर बाजार में कारोबार खत्म होने पर बीएसई का Sensex 777 अंकों की गिरावट लेकर 74,003 के लेवल पर क्लोज हुआ था, जो दिन के हाई लेवल से 1433 अंक की गिरावट थी. वहीं NSE Nifty 279 अंक की गिरावट लेकर 23,118 पर बंद हुआ था और ये इंडेक्स अपने दिन के हाई से 474 अंक फिसला था।  सबसे तेज ये 10 शेयर  सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन शेयर बाजार में आई इस तूफानी तेजी के बीच सबसे ज्यादा रफ्तार से भागते हुए शेयरों की बात करें, तो बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल M&M Share, ITC Share, Reliance Share, HUL Share करीब 2 फीसदी के आसपास बढ़त के साथ ट्रेड करते नजर आए. वहीं मिडकैप कैटेगरी में शामिल शेयरों की लिस्ट में Yes Bank Share (3.20%), Colpal Share (1.50%) चढ़कर कारोबार कर रहा था. स्मॉलकैप कैटेगरी में Appolo Tyre Share, MSUMI, HSCL Share ग्रीन जोन में कारोबार करते नजर आए। 

‘सबसे बड़ा क्रैश शुरू हो चुका है’, Rich Dad Poor Dad के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी की चेतावनी

  नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में तनाव और हमलों का सिलसिला जारी है. कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है. ग्लोबल टेंशन का असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है. इस बीच मशहूर किताब 'रिच डैड पुअर डैड' (Rich Dad Poor Dad) के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बार फिर इतिहास के सबसे बड़े क्रैश को लेकर चेतावनी (Biggest Crash In History Warning) दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर अपने नए पोस्ट के जरिए ये वॉर्निंग दी है, जो तेजी से वायरल (Social Media Viral Post) हो रहा है।  'सबसे बड़े क्रैश की शुरुआत…' रॉबर्ट कियोसाकी ने अपनी वायरल एक्स पोस्ट में कहा कि इतिहास की सबसे बड़ा क्रैश शुरू हो चुका है. लेखक के मुताबिक, उन्होंने पहले ही इसकी भविष्यवाणी कर दी है. उन्होंने लिखा,'2002 में मैंने 'रिच डैड्स प्रोफेसी' (Rich Dad's Prophecy) किताब जारी की थी, जो लोगों को इतिहास की सबसे बड़ी स्टॉक और बॉन्ड मार्केट गिरावट से फायदा उठाने और उसका शिकार न बनने के लिए तैयार करने के मकसद से लिखी गई थी, एक ऐसी गिरावट जो आने वाली थी.' कियोसाकी ने आगे लिखा कि 2026 में वह गिरावट यूरोप और जापान में शुरू हुई, लेकिन अब ये क्रैश पूरी दुनिया में फैल रहा है।  क्रैश के पीछे आखिर वजह क्या?  इतिहास के सबसे बड़े क्रैश की अपनी वॉर्निंग को दोहराते हुए रॉबर्ट कियोसाकी ने इसे पीछे के बड़े कारणों के बारे में भी बताया है. उनके मुताबिक, AI का क्रेज़, ईरान में युद्ध, बहुत ज्यादा कर्ज, और रिटायर हो रही 'बेबी बूम' पीढ़ी इसकी वजह है. उन्होंने अलर्ट करते हुए कहा कि अगर आपके पास 401k, IRA, सुपरएनुएशन या RRSP (एक तरह की रिटायरमेंट सेविंग स्कीम) है, तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं, खासकर अगर आपकी उम्र 40 साल से ज्यादा हो चुकी है।  अभी भी समय है संभल जाएं रिच डैड पुअर डैड के लेखक के मुताबिक, पिछली मंदी 1929 से 1954 तक यानी 25 साल तक चली थी. लेकिन इस क्रैश के दौरान भी जो लोग तैयार थे (उदाहरण के लिए कैनेडी परिवार), उनके लिए 'ग्रेट डिप्रेशन' (महामंदी) जीवन का सबसे खुशहाल समय साबित हुआ था. Robert Kiyosaki ने कहा कि आप इतिहास के इस सबसे बड़े क्रैश का शिकार न बनें, अभी भी थोड़ा समय है, इससे पहले कि आम लोग जागें और घबराहट में बैंकों से पैसे निकालने की होड़ शुरू कर दें।  मैं तो ये कर रहा… आप क्या?  सोशल मीडिया पर खासे एक्टिव रहने वाले रॉबर्ट कियोसाकी का कहना है कि, 'सालों से मैं लोगों को ये बताता आ रहा हूं कि मैं तैयारी के लिए क्या कर रहा हूं. अपना बिजनेस, कमाई देने वाली रियल एस्टेट, तेल के कुओं में निवेश और कैश के बजाय सोना-चांदी (Gold-Silver) और बिटकॉइन जमा करना, क्योंकि मुझे पता था कि नकली पैसे छापने का काम शुरू होगा।  कियोसाकी ने बताया कि मैंने पहले भी मिकी मैनी की लिखी 'द एंट्रोपी ट्रैप' (The Entropy Trap) किताब की सलाह दी है, जो इसी साल 2026 में छपी है और हो सकता है कि यह इस साल आपके पढ़ने के लिए सबसे जरूरी किताब हो. कृपया इसे पढ़ें, यह आज आपका सबसे अच्छा निवेश साबित हो सकता है. अपना ख्याल रखें। 

करीब 50 साल बाद गोमर्डा अभयारण्य में लौटेंगे काले हिरण, बारनवापारा से लाए जाएंगे 25 हिरण

सारंगढ़-बिलाईगढ़   छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के गोमर्डा अभयारण्य में बारनवापारा अभयारण्य से जल्द ही 25 काले हिरणों को स्थानांतरित कर खुले जंगल में आजाद किया जाएगा। वन विभाग ने इस विस्थापन के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं और इसे अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में करने की योजना है। वन मंत्री केदार कश्यप की उपस्थिति में इन हिरणों को नए प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। वर्तमान में बारनवापारा में 80 से अधिक काले हिरण मौजूद हैं। छत्तीसगढ़ के जंगलों में 1970 के दशक में काले हिरण पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। वर्ष 1980 के दशक के बाद वे केवल चिड़ियाघरों में ही दिखाई देते थे। राज्य वन्यजीव बोर्ड की नौवीं बैठक पुनर्स्थापन योजना को स्वीकृति दी गई थी। इसके उपरांत वर्ष 2019 में 77 काले हिरणों को संरक्षण के लिए लाया गया था। इनमें दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान से 50 और बिलासपुर के कानन पेंडारी जूलॉजिकल उद्यान से 27 हिरण शामिल थे।   संरक्षण के शुरुआती चरण में वन विभाग को अनेक चुनौतियों से जूझना पड़ा। दिल्ली चिड़ियाघर से लाकर जंगल में छोड़े गए हिरण जीवित नहीं बच सके। इसके अलावा निमोनिया के कारण लगभग आठ काले हिरणों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद प्रबंधन व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए गए। रणनीति में परिवर्तन करते हुए बिलासपुर से लाए गए हिरणों को नियंत्रित बाड़े में अनुकूलन का पूरा समय दिया गया, जिससे वे प्राकृतिक जीवनशैली को अपना सके।   राज्य में काले हिरणों की आबादी 200 नियमित निगरानी, उचित पोषण और अनुकूल माहौल के परिणामस्वरूप काले हिरणों की संख्या स्थिर हुई और फिर उसमें लगातार वृद्धि होने लगी। राज्य में इनकी कुल आबादी बढ़कर करीब 200 तक पहुंच गई। इस सफलता का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में भी किया था। संख्या बढ़ने पर 60 काले हिरणों को बारनवापारा अभयारण्य के खुले क्षेत्र में छोड़ा गया। इसमें सबसे पहले फरवरी 2022 में 14 हिरणों को मुक्त किया गया था। इसके बाद वर्ष 2024 तथा फरवरी 2026 में 34 अन्य हिरणों को जंगल में आजाद किया गया।  गोमर्डा अभयारण्य में विस्थापन की तैयारी पीसीसीएफ एवं वनबल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के अनुसार काले हिरणों को गोमर्डा अभयारण्य में भेजने के लिए तैयारियां जारी हैं। मंत्री केदार कश्यप की सहमति मिलते ही अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में 25 हिरणों को नए स्थान पर छोड़ दिया जाएगा। लगभग पांच दशकों बाद प्राकृतिक वातावरण में हिरणों का यह पुनर्वास महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

नई Tata Nexon जल्द होगी लॉन्च? टेस्टिंग के दौरान दिखी SUV, डिजाइन से फीचर्स तक होंगे बड़े बदलाव

नई दिल्ली टाटा मोटर्स की नेक्सॉन (Tata Nexon) को लोग काफी पसंद करते हैं. इस कार के नए वर्जन पर कंपनी काम कर रही है. पिछले कुछ दिनों में कार के अपडेटेड अवतार को कई बार टेस्ट करते हुए देखा गया है. टेस्टिंग के वक्त कार कैमोफ्लॉज से ढकी हुई थी. पहले भी कार की कुछ तस्वीरे सामने आई थीं, जिसमें इसके लुक की काफी जानकारी मिली थी।  लेटेस्ट स्पाई शॉट्स में कार के एक्सटीरियर प्रोफाइल का क्लियर व्यू नजर आता है. खासकर रियर सेक्शन जिसे रिडिजाइन किया गया है. टाटा ने नेक्सॉन को 2017 में लॉन्च किया था. तब से अब तक कार को मल्टीपल अपडेट्स मिले है, जिसमें बहुत कुछ बदला है।  भले ही कार की स्टाइलिंग और फीचर्स में बीते 9 सालों में कई अपडेट्स हुए हों, लेकिन कार का बेसिक स्ट्रक्चर लगभग वैसा ही रहा है. नेक्स्ट जेन नेक्सॉन में हमें बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. टाटा कार के बॉडी स्ट्रक्चर और प्रोपोर्शन में कई बदलाव कर सकती है। क्या होगा कार में नया?  भले ही ये कार कैमोफ्लॉग से ढकी हो, लेकिन इसके डिजाइन का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. नेक्सॉन में ज्यादा अपराइट और स्कॉयर ऑफ लुक मिलेगा. मौजूदा नेक्सॉन के मुकाबले इसकी रूफलाइन ज्यादा फ्लैट होगी. वहीं रियर सेक्शन एक कूपे जैसे डिजाइन में आ सकता है।  नेक्स्ट जेन नेक्सॉन में टाटा रियर सीट्स पर हेडरूम को बेहतर कर सकती है. साइड प्रोफाइल से भी ये एसयूवी कूपे जैसी शेप में नजर आती है. इसके अलावा डोर और ग्लासहाउस को भी रिडिजाइन किया जा सकता है. टेलगेट भी मौजूदा नेक्सॉन के मुकाबले ज्यादा ऊंचा लग रहा है. रियर विंड स्क्रीन बड़ी दिख रही है और इसके साथ वाइपर भी है।  टेस्टिंग के दौरान कार पर रूफ स्पॉयलर भी देखा जा सकता है. स्पाई शॉट्स में एक और महत्वपूर्ण चीज नजर आई है और वो है कार में फ्यूल फिलर कैप की लोकेशन. नेक्सॉन में फ्यूर कैप डोर हैंडल के बराबर में आ गया है, जबकि मौजूदा में ये डोर हैंडल से नीचे मिलता है. नई रूफ लाइन, अपराइट रियर प्रोफाइल और ऑल्टर बॉडी प्रोपोर्शन दिखाता है कि टाटा सिर्फ फेसलिफ्ट वाले बदलाव नहीं कर रही है।  इंटीरियर और इंजन  स्पाई शॉट्स में कार के इंटीरियर की झलक भी दिखती है. कार में स्टीयरिंग व्हील, इंफोटेनमेंट सिस्टम और क्लाइमेट कंट्रोल जैसे बहुत से कंपोनेंट मौजूदा नेक्सॉन वाले ही मिल सकते हैं. प्रोडक्शन के नजदीक आने पर इससे जुड़ी दूसरी डिटेल्स भी देखने को मिल सकती हैं।  पावरट्रेन की बात करें, तो इसमें 1.2 लीटर का टर्बो पेट्रोल और 1.5 लीटर का डीजल इंजन ही मिलेगा, जो मौजूदा नेक्सॉन में आता है. सीएनजी भी कार का हिस्सा बन रहेगा. वहीं नेक्सॉन ईवी में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं. ये कार अगले साल यानी 2027 में लॉन्च होगी।   

खेती के साथ मछली पालन से बढ़ी किसानों की आय, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना बनी बदलाव की मिसाल

बदलाव की मिसाल  बदली किसानों की किस्मत प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन बन रहा अतिरिक्त आमदनी का मजबूत जरिया रायुपर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के गांव, गरीब और किसान को सशक्त बनाने के विजन के अनुरूप, केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर जिले के करीब 150 किसान अब मछली पालन, हैचरी और पाउंड लाइनर जैसी आधुनिक गतिविधियों के जरिए अपनी आय और आजीविका के नए रास्ते तैयार कर रहे हैं। सरकारी अनुदान और बुनियादी सुविधाओं के विकास से ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। बिरकोनी के दिनेश चन्द्राकर बने मिसाल           प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) ने आधुनिक तकनीकों, वित्तीय सहायता और अनुदान के जरिए देश के हजारों किसानों और मछली पालकों की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है । पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत से परेशान होकर बिरकोनी निवासी दिनेश चन्द्राकर ने मछली पालन की तरफ कदम बढ़ाया। योजना के तहत उन्होंने करीब 7.50 लाख रुपए की लागत से एक हेक्टेयर में तालाब खुदवाया और 14 लाख रुपए की लागत से 20 हजार वर्गफुट में मछली हैचरी स्थापित की। उत्पादन और कमाई           हैचरी में तैयार बच्चे तालाब में डाले जाते हैं, जिससे 8 से 9 महीने में लगभग 15 टन मछली तैयार हो जाती है। 70 से 80 रुपए प्रति किलो की लागत आने के बावजूद बाजार में 120 से 150 रुपए प्रति किलो तक बिक्री होने से उन्हें बेहतरीन मुनाफा मिल रहा है। ग्राम बकमा के हिमांशु चंद्राकर को मिला स्थायी जरिया           प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, मछली बीज हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और फीड प्लांट जैसी परियोजनाओं के लिए सहायता दी जाती है। ग्राम बकमा के किसान हिमांशु चंद्राकर ने लगभग 28 लाख रुपए की लागत से दो पाउंड लाइनर यूनिट तैयार कराईं। सरकार से 60 प्रतिशत अनुदान मिलने के बाद, सभी खर्च काटकर उन्हें सालाना 3 से 4 लाख रुपए की शुद्ध बचत हो रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मजदूरों को मिल रहा संबल             मछली पालन से केवल यूनिट संचालकों ही नहीं, बल्कि स्थानीय मजदूरों को भी बड़ा लाभ मिला है। बिरकोनी के मजदूरों का कहना है कि अब उन्हें काम की तलाश में बाहर नहीं जाना पड़ता, बल्कि गांव में ही सालभर नियमित रोजगार मिल रहा है। करीब 9 हजार रुपए प्रतिमाह की आय से उनके परिवारों का जीवनयापन बेहद आसान हो गया है। योजना के मुख्य बिंदु और प्रावधान              बुनियादी ढांचे के विकास के लिए नए तालाबों का निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और मछली दाना निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 60  प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 40 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है। धान की पारंपरिक खेती पर निर्भर महासमुंद के किसानों के लिए अब मछली पालन आत्मनिर्भरता, समृद्धि और विकास का एक नया प्रतीक बन चुका है।

सरगुजा संभाग के 6 जिलों में सुधरेगा सड़क नेटवर्क, 44 मुख्य सड़क कार्यों को मिली प्रशासनिक स्वीकृति

सरगुजा संभाग में सड़क अधोसंरचना को मिलेगी ऐतिहासिक मजबूती 6 जिलों में 44 मुख्य सड़क कार्यों के लिए 1,093.73 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति रायपुर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सरगुजा संभाग के विकास और सुशासन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। संभाग के सभी छह जिलों सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और जशपुर में सड़कों के जाल को मजबूत करने के लिए 44 मुख्य सड़क कार्यों हेतु कुल 1,093.73 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं के तहत नई सड़कों का निर्माण, चौड़ीकरण, डामरीकरण, सुदृढ़ीकरण, फोरलेन निर्माण और आवश्यक स्थानों पर पुल-पुलिया का निर्माण किया जाएगा। सरगुजा जिला         अम्बिकापुर विधानसभा क्षेत्र में लरंगसाय चौक से रामानुजगंज मार्ग के 5 किमी हिस्से के फोरलेन चौड़ीकरण के लिए 69.10 करोड़ रुपए तथा गांधी चौक से रेलवे स्टेशन तक 5 किमी फोरलेन के लिए 61.34 करोड़ रुपए स्वीकृत। लुण्ड्रा और सीतापुर क्षेत्रों में असकला-दोरना मार्ग, सोनतराई-मैनपाट मार्ग (26.33 करोड़) सहित विभिन्न मार्गों और पुलियों के सुदृढ़ीकरण के कार्य शामिल हैं। सूरजपुर जिला           भटगांव विधानसभा क्षेत्र के तारा-प्रेमनगर-रामानुजनगर-कृष्णपुर 63 किमी मार्ग के लिए 64.93 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा कल्याणपुर-लटोरी मार्ग (40.93 करोड़), विशुनपुर-सूरजपुर-ओड़गी मार्ग (32.24 करोड़) और सूरजपुर के 17 किमी रिंग रोड के मजबूतीकरण (16.39 करोड़) सहित कई अन्य मार्ग संवरेंगे। बलरामपुर-रामानुजगंज जिला          परसवार से चलगली 18 किमी उन्नयन मार्ग के लिए 38.80 करोड़ रुपए, वाड्रफनगर- जनकपुर-बलंगी मार्ग के लिए 35.32 करोड़ रुपए, तथा कामेश्वरनगर-लुरगी मार्ग के लिए 25.69 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी। जशपुर जिला          लुड़ेग-बागबहार-तपकरा-लवाकेरा 55.80 किमी राज्य मार्ग के सुदृढ़ीकरण के लिए 40.32 करोड़ रुपए, पत्थलगांव के पहाड़ी भागों के उन्नयन हेतु 36.85 करोड़ रुपए, और बतौली-बगीचा-चरईडांड मार्ग के लिए 34.44 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। सड़कें बनेंगी विकास की जीवनरेखा          इन व्यापक सड़क परियोजनाओं से केवल आवागमन ही सुगम नहीं होगा, बल्कि इसके दूरगामी आर्थिक और सामाजिक लाभ होंगे। कृषि और व्यापार को गति मिलेगी, किसानों के कृषि उत्पाद आसानी से बाजारों तक पहुंच सकेंगे, जिससे स्थानीय व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। बेहतर होगा स्वास्थ्य और शिक्षा, दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों और मरीजों के लिए स्कूल, कॉलेज व स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। बेहतर कनेक्टिविटी से गांवों तक सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक सेवाओं का लाभ त्वरित गति से पहुँचेगा।       1,093.73 करोड़ रुपए की लागत वाली ये 44 परियोजनाएं सरगुजा संभाग के समग्र विकास, निवेश और नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में मील का पत्थर साबित होंगी।

UPI और RuPay कार्ड से ₹2,000 तक का भुगतान रहेगा मुफ्त, वित्त मंत्रालय ने दी जानकारी

नई दिल्ली देश में यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर लगने वाले शुल्कों को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर केंद्र सरकार ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है. वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 14 सितंबर को एक आधिकारिक राजपत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि दो हजार रुपये तक के यूपीआई लेन-देन और रुपे डेबिट कार्ड से भुगतान पर बैंक या कोई भी पेमेंट सिस्टम प्रदाता किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं वसूल सकते हैं।  सरकार ने यह कदम भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए के तहत मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए उठाया है. इस नए आदेश के बाद बैंकों और भुगतान कंपनियों द्वारा ग्राहकों या दुकानदारों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, यानी किसी भी अन्य घुमावदार माध्यम से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या कोई भी छिपा हुआ चार्ज वसूलने पर पूरी तरह कानूनी रोक लग गई है।  ग्राहक और दुकानदार दोनों को बड़ी राहत इस अधिसूचना में यह पूरी तरह स्पष्ट किया गया है कि यह नियम पैसे भेजने वाले (ग्राहक) और पैसे प्राप्त करने वाले (दुकानदार) दोनों पर समान रूप से लागू होगा. इसका सीधा मतलब यह है कि डिजिटल भुगतान करने पर ग्राहक से कोई अतिरिक्त फीस नहीं काटी जाएगी, और न ही ऐसा डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के लिए किसी व्यापारी या छोटे दुकानदार से कोई चार्ज लिया जाएगा।  ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर क्या होगी स्थिति? इस नए आदेश से यह तो साफ हो गया है कि ₹2,000 तक के भुगतानों पर कोई सीधा या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगेगा. हालांकि, क्या ₹2,000 से अधिक के भुगतानों पर कोई चार्ज कटेगा और यदि हां, तो कितना? इस पर सरकारी राजपत्र में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं की गई है और मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर स्थिति अभी भी अस्पष्ट बनी हुई है. सूत्रों के मुताबिक, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) अगले एक हफ्ते के भीतर ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज को लेकर नए नियम या गाइडलाइंस जारी कर सकता है।  हाल ही में सरकार ने कानून में संशोधन करने के लिए जो बिल पेश किया था, उसमें एक ऐसा ढांचा तैयार किया गया है जो भविष्य में कुछ चुनिंदा बड़े मर्चेंट भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति देता है. इसका मतलब है कि बैंक एक निश्चित सीमा से ऊपर के भुगतानों के लिए शुल्क ले सकेंगे. इस पर काफी चर्चा हुई थी, जिसके बाद सरकार ने स्पष्ट किया था कि आम जनता पर इसका कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा. व्यापक ढांचे के तहत, भविष्य की कोई भी एमडीआर व्यवस्था केवल एक निश्चित सीमा से ऊपर के कुछ चुनिंदा व्यापारिक लेन-देन तक ही सीमित रहेगी, जबकि आम लोगों के बीच होने वाले अन्य भुगतान पूरी तरह से मुफ्त बने रहेंगे।  बाहरी दबाव के दावों को बताया पूरी तरह गलत इसके साथ ही वित्त मंत्रालय ने उन सभी मीडिया रिपोर्ट्स और अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि सरकार किसी बाहरी प्रभाव या दबाव में आकर इस नीति में बदलाव कर रही है. मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह से "झूठा, निराधार और भ्रामक" बताया है. सरकार का मुख्य मकसद छोटे डिजिटल लेन-देन को मुफ्त रखकर देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और बढ़ावा देना है। 

Tata Sons की शेयर बाजार में एंट्री पर बढ़ा विवाद, RBI ने हाई कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

 मुंबई टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान के बीच अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी कानूनी तैयारी तेज कर दी है. इसका असर मंगलवार को टाटा ग्रुप की कुछ कंपनियों के शेयरों में भी देखने को मिला, जहां कुछ स्टॉक्स 20% तक चढ़ गए।  आबीआई ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट याचिका दायर की है. आसान भाषा में समझें तो कैविएट का मतलब है कि अगर इस मामले में कोई याचिकाकर्ता अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो RBI की बात सुने बिना उसके खिलाफ या उसके पक्ष में कोई आदेश जारी न किया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने इस कैविएट की जानकारी टाटा संस को भी दे दी है. इससे संकेत मिलता है कि RBI इस मामले में संभावित कानूनी चुनौती को लेकर पहले से अपनी स्थिति तैयार रखना चाहता है।  11 सितंबर के फैसले से बढ़ी हलचल RBI का यह कदम 11 सितंबर के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें केंद्रीय बैंक ने टाटा संस की सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी थी. टाटा संस ने अनरजिस्टर्ड कोर इनवेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर क्लासिफाइड होने के लिए यह आवेदन दिया था. लेकिन अर्जी खारिज होने का मतलब है कि कंपनी पर अपर-लेयर एनबीएफसी से जुड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू रहने का रास्ता साफ है. यही वजह है कि टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है।  टाटा संस की लिस्टिंग क्यों है जरूरी इसकी जड़ RBI के अपर-लेयर एनबीएफसी नियमों में है. टाटा संस को RBI की अपर-लेयर नॉन-बैंक फाइनेंस कंपनियों की लिस्ट में रखा गया है. इस लिस्ट में शामिल कंपनियों पर अपेक्षाकृत कड़े रेगुलेटरी नियम लागू होते हैं, जिनमें लिस्टिंग से जुड़ी शर्त भी अहम है. यही वजह है कि टाटा संस के लिए निजी कंपनी बने रहना और RBI के नियमों के तहत उसकी लिस्टिंग की अनिवार्यता, दोनों के बीच टकराव का सवाल बना हुआ है।  यह मामला 2022 से चला आ रहा है RBI ने 2022 में अपर-लेयर नॉन-बैंक फाइनेंस कंपनियों की सूची जारी की थी. इसमें टाटा संस को कोर इनवेस्टमेंट कंपनी के तौर पर शामिल किया गया था. इसके बाद जून 2026 में नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के क्लासिफिकेशन के लिए नया प्रिंसिपल-बेस्ड फ्रेमवर्क लाया गया. इसने पहले लागू पैरामेट्रिक मेथडोलॉजी की जगह ली. फिर 6 अगस्त को संशोधित अपर-लेयर NBFC सूची जारी हुई. इसमें भी टाटा संस को बरकरार रखा गया. उस समय RBI ने साफ किया था कि टाटा संस को लिस्ट में बनाए रखना उसकी डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी के नतीजे पर कोई असर नहीं डालता. उस समय कंपनी की अर्जी RBI के पास जांच के तहत थी।  रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और ज्यादातर ट्रस्टी टाटा संस को निजी कंपनी बनाए रखने के पक्ष में रहे हैं. उनका फोकस शापूरजी पालनजी ग्रुप के साथ हिस्सेदारी के मोनेटाइजेशन को लेकर ऐसा रास्ता निकालने पर रहा है, जिस पर दोनों पक्ष सहमत हों. यानी टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के बजाय हिस्सेदारी से जुड़े दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाता रहा है।  टाटा ग्रुप के शेयरों में क्यों आया उछाल इस पूरे घटनाक्रम का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया. टाटा केमिकल्स और टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसे कुछ टाटा ग्रुप शेयरों में मंगलवार को 20% तक की तेजी देखने को मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार के कुछ हिस्से में इन शेयरों की तेजी को टाटा संस की संभावित लिस्टिंग से मिलने वाले संभावित फायदे की उम्मीद से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, इसे टाटा संस की लिस्टिंग तय होने का संकेत नहीं माना जा सकता. अभी कानूनी और नियामकीय स्तर पर मामला आगे बढ़ना बाकी है। 

इंदौर में 7 ROB और 6 फ्लाईओवर का काम धीमा, लाइन-डायवर्शन की खींचतान में फंसे प्रोजेक्ट

 इंदौर इंदौर शहर में यातायात का दबाव कम करने के लिए बनाए जा रहे रेलवे ओवर ब्रिज और फ्लाईओवर खुद विभागीय असमन्वय के शिकार हो गए हैं। कहीं नगर निगम की पानी-सीवरेज लाइन नहीं हट रही, कहीं रेलवे के हिस्से का निर्माण अटका है तो कहीं ट्रैफिक डायवर्शन के लिए प्रशासनिक मंजूरी का इंतजार है। नतीजा यह कि कई प्रोजेक्ट तय समय सीमा पार कर चुके हैं, लेकिन निर्माण की गति बढ़ने के बजाय बाधाएं लगातार बढ़ रही हैं। जनता को तीन साल से जाम और डायवर्शन झेलना पड़ रहा है। शहर में आईडीए, पीडब्ल्यूडी और एमपीआरडीसी द्वारा सात आरओबी और छह फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं। दो प्रोजेक्ट टेंडर के बाद भी शुरू नहीं हुए। रिंग रोड के रोबोट और रेडिसन चौराहे पर भी फ्लाईओवर की योजना बन रही है। सभी का काम धीमी गति से चल रहा है और आधी प्रगति के बाद भी बाधाएं नहीं हटीं। संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार ने हाल ही में सभी एजेंसियों की बैठक लेकर आपसी सामंजस्य से काम पूरा करने और बाधाएं हटाने के लिए लगातार समीक्षा के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस है। लाइन शिफ्टिंग बनी रोड़ा राजेंद्र नगर आरओबी के लिए नगर निगम की पेयजल लाइन स्थानांतरित होना है। बाणगंगा और माल गोदाम आरओबी में भी लाइन शिफ्टिंग की समस्या से काम लटका है। मांगलिया आरओबी ग्रामीण और शहरी क्षेत्र को जोड़ने वाला अहम प्रोजेक्ट है, लेकिन यहां रेलवे और पीडब्ल्यूडी के बीच तालमेल नहीं बन पा रहा। रेलवे हिस्से का काम देरी से होने के कारण पूरा प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहा है। योजना बनी, काम अटका बड़ा गणपति चौराहा पर फ्लाईओवर की योजना दो साल पहले बनी थी, लेकिन लाइन शिफ्टिंग में देरी से काम आगे नहीं बढ़ा। चंदन नगर में भी बिजली-पानी की लाइन के कारण निर्माण रुका है। आइडीए और नगर निगम के बीच देरी से सामंजस्य बनने से बड़ा गणपति फ्लाईओवर की आधी समय सीमा बीत चुकी है। जरूरत छह की, तीन लेन में उलझा प्रोजेक्ट कैलाद हाला क्रासिंग पर एमआर-12 को देखते हुए छह लेन आरओबी की जरूरत है। आइडीए ने छह लेन का प्रस्ताव दिया, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने पहले ही तीन लेन प्रस्तावित कर दिए। अब आइडीए भी तीन लेन बनाएगा, पर पीडब्ल्यूडी का काम पूरा न होने से शुरुआत नहीं हो पा रही। तीनों एजेंसियों की अलग-अलग प्लानिंग से इस व्यस्त क्रासिंग पर रोज लंबा जाम लग रहा है। यहां पर भी समस्याएं कायम     केसरबाग आरओबी : निर्माण अतिक्रमण के कारण प्रभावित है। बाधाएं हटाने में देरी का सीधा असर प्रोजेक्ट की गति पर पड़ रहा है।     देवास नाका : देवास नाका फ्लाईओवर में चौराहे और देवास नाका की ओर निर्माण पूरा करने के लिए यातायात डायवर्ट करना जरूरी है। प्रशासन स्तर पर प्रक्रिया लंबित होने से काम प्रभावित है।     मूसाखेड़ी : मूसाखेड़ी चौराहे के निर्माण में भी बाधाओं के कारण गति नहीं बढ़ सकी। सर्विस रोड पर आ रहा मंदिर हाल ही में हटाया गया।     सत्यसाईं और आईटी पार्क चौराहा : सत्यसाईं चौराहा और आइटी पार्क चौराहा पर भी निर्माण से जुड़ी बाधाएं अब तक पूरी तरह नहीं हटाई गई हैं। इसका असर काम की गति पर पड़ रहा है।     एलिवेटेड कॉरिडोर : एलआईजी चौराहा से नौलखा तक बनाए जाने वाला एलिवेटेड कॉरिडोर अटका हुआ है। निर्माण के लिए एलआईजी की तरफ से पतरे तो लगा दिए, लेकिन काम शुरू नहीं हो पा रहा है। यह प्रोजेक्ट भी तीन साल से अधिक समय से सिर्फ कागजों और बैठकों में बन रहा है।  

कान्हा में जंगल सफारी के नियम बदले, HSRP नंबर प्लेट वाले वाहन ही होंगे मान्य; दस्तावेजों की होगी जांच

मंडला  लगभग तीन महीने के मानसून ब्रेक के बाद कान्हा का जंगल फिर पर्यटकों की अगवानी के लिए तैयार हो रहा है। कान्हा टाइगर रिजर्व में एक अक्टूबर से नया पर्यटन सत्र शुरू होगा, जिसे लेकर पार्क प्रबंधन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जंगल सफारी के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों की इस बार प्रवेश से पहले कड़ी पड़ताल होगी। प्रबंधन अलग-अलग प्रवेश द्वारों के लिए वाहन जांच और पंजीयन की तिथियां तय कर रहा है। वाहन मालिकों को स्वयं उपस्थित होकर पंजीयन कराने और निर्धारित नियमों का पालन करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बिना किसी वाहन को प्रवेश नहीं सबसे महत्वपूर्ण शर्त हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को लेकर है। इसके बिना किसी वाहन को पार्क में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। वाहन के पंजीयन, दस्तावेज और अन्य निर्धारित मानकों की भी जांच होगी। नए पर्यटन सत्र में सिर्फ वही वाहन सफारी करा सकेंगे, जो प्रबंधन की तय कसौटियों पर खरे उतरेंगे। इन तिथियों पर वाहनों की जांच व पंजीयन पार्क प्रबंधन ने वाहन मालिकों और चालकों को निर्धारित समय-सारणी के अनुसार वाहनों के अभिलेखों की जांच तथा भौतिक परीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। पंजीयन फार्म का वितरण एवं जमा करने की प्रक्रिया 15 से 28 सितंबर तक संबंधित प्रवेश द्वारों पर की जाएगी। सभी प्रवेश द्वार पर वाहनों के पंजीयन व जांच का समय 10 बजे से 5 बजे के बीच रखा गया है। 20 सितंबर को मुक्की गेट पर सुबह 10 से शाम 5 बजे तक पंजीयन फार्म वितरित एवं जमा किए जाएंगे। 21 सितंबर को भी मुक्की गेट पर इसी समय पंजीयन की प्रक्रिया होगी। 23 सितंबर को सरही गेट पर वाहनों को जांचा जाएगा। इसके साथ 25, 26 और 27 सितंबर को खटिया गेट पर पंजीयन फार्म प्राप्त व जमा किए जा सकेंगे। 28 सितंबर को घुर्री गेट फेन पर सुबह 10 से शाम 5 बजे तक वाहनों के पंजीयन एवं दस्तावेजों का निरीक्षण किया जाएगा। पर्यटक वाहनों का मध्यप्रदेश परिवहन विभाग में पंजीयन अनिवार्य पर्यटक वाहनों का मध्यप्रदेश परिवहन विभाग में पंजीयन होना तथा उनमें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगी होना अनिवार्य है। पंजीयन के समय वाहन मालिक को स्वयं उपस्थित रहना होगा। वाहन की मूल लंबाई और चौड़ाई में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की जा सकेगी। पर्यटक वाहन हार्वेस्ट ग्रीन रंग के होने चाहिए सीट की ऊंचाई वाहन के फ्लोर लेवल से अधिकतम 18 इंच तक निर्धारित की गई है। पार्क प्रबंधन के निर्देशानुसार पर्यटक वाहन हार्वेस्ट ग्रीन रंग के होने चाहिए।