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मां अंगारमोती मंदिर में नवरात्र की भव्य तैयारी, 7 हजार ज्योति कलश के साथ निभाई जाएगी आदिवासी परंपरा

धमतरी  गंगरेल में आदिशक्ति मां अंगारमोती मंदिर है. इस मंदिर में 11 अक्टूबर को शाम 5 बजे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ ज्योत-जवारा का आयोजन किया जाएगा. इस बार घी और तेल की 7 हजार से ज्यादा ज्योत प्रज्ज्वलित होने की उम्मीद है।  ज्योत के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीयन सुविधा आदिशक्ति मां अंगारमोती ट्रस्ट के अध्यक्ष जीवराखन मरई ने बताया कि मन्नत की ज्योत के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है. अब तक करीब 40 प्रतिशत पंजीयन ऑनलाइन हुए हैं. नवरात्र के नौ दिनों तक मंदिर परिसर में लगभग 150 युवक-युवतियां सेवादार के रूप में अपनी सेवाएं देंगे. ये सभी आदिवासी समाज से हैं, जिन्हें श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था संभालने के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है।  रूढ़ि परंपरा के अनुसार होगी जंवारा स्थापना जीवराखन मरई ने बताया कि आदिवासी समाज की परंपरा के मुताबिक मंदिर में जवारा लगाया जाएगा. 11 अक्टूबर को शाम 5 बजे पूजा के साथ आयोजन की शुरुआत होगी. इसके बाद नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर ज्योत-जवारा के दर्शन कर सकेंगे।  52 गांवों के देवी-देवताओं के नाम से प्रज्वलित होगी अखंड ज्योत मां अंगारमोती मंदिर ट्रस्ट की खास परंपरा 52 गांवों के देवी-देवताओं के नाम से प्रथम ज्योत प्रज्ज्वलित करने की है. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. इसे अखंड ज्योत के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है।  श्रद्धालुओं के लिए खास इंतजाम बाहर से आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में डॉरमेट्री हॉल है, जहां एक साथ 40 से 45 लोग ठहर सकते हैं. अलग कमरे में रुकने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए चार कमरे आरक्षित रखे गए हैं. मंदिर परिसर की साज सज्जा में भी इस साल बदलाव किए गए हैं।  बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधा मंदिर में बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा गया है. मुख्य द्वार पर दो ट्राइसाइकिल रहेंगी और वालंटियर तैनात रहेंगे. ये वालंटियर श्रद्धालुओं को प्रवेश द्वार से माताजी के दर्शन कराएंगे और दर्शन के बाद वापस मुख्य द्वार तक छोड़ेंगे. मंदिर परिसर में बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था भी की गई है।  25 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाने की पहल मंदिर परिसर में बिजली की उपलब्धता बेहतर बनाने के उद्देश्य से ट्रस्ट ने 25 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट भी लगाया है।  नवरात्र के बाद घर पहुंचेगी माता की प्रसादी मन्नत की ज्योत प्रज्वलित कराने वाले श्रद्धालुओं के लिए ट्रस्ट ने एक विशेष व्यवस्था भी की है. नवरात्र समाप्त होने के बाद पंजीयन कराने वाले भक्तों के घर माता की तस्वीर और प्रसादी भेजने का प्रावधान है. ट्रस्ट अध्यक्ष जीवराखन मरई ने बताया कि तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. अब प्रयास यही है कि नवरात्र में मां के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। 

मैहर में शुरू होगी महाभोग प्रसाद की बिक्री, 250 ग्राम देसी घी के लड्डू का पैकेट ₹150 में

मैहर देश के प्रमुख और प्रसिद्ध शक्तिपीठों व तीर्थस्थलों की तर्ज पर अब मैहर स्थित मां शारदा देवी धाम में भी श्रद्धालुओं को विशेष 'महाभोग प्रसाद' उपलब्ध कराया जाएगा। मां शारदा मंदिर प्रबंध समिति ने इस बार शारदीय नवरात्र मेले में पहली बार शुद्ध देसी घी से बन लडडू मिलेंगे।  250 ग्राम का पैकेट, 150 रुपए दर निर्धारित मंदिर समिति की प्रशासक एवं मैहर एसडीएम दिव्या पटेल ने बताया कि देश के कई विख्यात मंदिरों में वहां का एक विशेष प्रसाद श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध रहता है। इसी तर्ज पर काम करते हुए मां शारदा मंदिर में भी महाभोग लड्डू प्रसाद की व्यवस्था लागू की गई है।श्रद्धालुओं को 250 ग्राम का डिब्बा 150 रुपए में उपलब्ध कराया जाएगा। यह लड्डू पूरी तरह शुद्ध देसी घी और बेसन से तैयार किए जा रहे हैं। रोपवे, सीढ़ी मार्ग से मेला क्षेत्र तक लगेंगे अधिकृत काउंटर प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को बिचौलियों और मिलावटी प्रसादों से बचाकर सीधे मंदिर समिति के अधिकृत काउंटरों से शुद्ध प्रसाद उपलब्ध कराना है। इसके लिए पूरे मेला परिक्षेत्र में अधिकृत काउंटर लगाए जाएंगे।अधिकृत काउंटर रोपवे, सीढ़ी मार्ग से मेला क्षेत्र तक लगेंगे।इन सभी स्थानों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मिनरल वाटर/पीने के पानी की बोतलें भी उचित दर पर उपलब्ध रहेंगी। सफल रहा प्रयोग तो साल भर के लिए निकलेगी विस्तृत निविदा एसडीएम दिव्या पटेल के अनुसार, यह व्यवस्था फिलहाल नवरात्रि के 10 दिनों के लिए लागू की गई है। इस दौरान श्रद्धालुओं के फीडबैक और व्यवस्था की सफलता की समीक्षा की जाएगी। प्रयोग सफल रहने पर इसे पूरे वर्ष नियमित रूप से जारी रखने के लिए विस्तृत निविदा (टेंडर) जारी की जाएगी, जिससे मां शारदा धाम आने वाले हर भक्त को साल भर शुद्ध महाभोग प्रसाद मिल सके।

CM मोहन यादव 11 अक्टूबर को जारी करेंगे ₹502 करोड़ की RTE फीस प्रतिपूर्ति राशि, हजारों स्कूलों को फायदा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 11 अक्टूबर को करेंगे 502 करोड़ रुपये की आरटीई फीस प्रतिपूर्ति राशि अंतरित प्रदेश के 20 हजार 456 अशासकीय स्कूलों को राशि होगी अंतरित 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा नि:शुल्क शिक्षा का लाभ नरसिंहपुर में सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नवीन भवन का होगा लोकार्पण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 अक्टूबर को नरसिंहपुर जिले में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2024-25 की फीस प्रतिपूर्ति राशि का सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरण करेंगे। इसके अंतर्गत प्रदेश के 20 हजार 456 अशासकीय स्कूलों के खातों में 502 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। इससे 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा नरसिंहपुर जिले में 45 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त शासकीय सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण भी करेंगे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, स्थानीय जन प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ ही बडी संख्या विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहेंगे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के सांदीपनी विद्यालय बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेश सरकार द्वारा गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में अशासकीय स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति की राशि उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पात्र विद्यार्थियों की नि:शुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा सके। अब तक 3,600 करोड़ रुपये की राशि हो चुकी है जारी शिक्षा के अधिकार से प्रदेश का कोई भी बच्चा वंचित न रहे, इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) अंतर्गत निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक गरीब एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाया जा रहा है। इन विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति सरकार द्वारा सीधे संबंधित निजी स्कूलों को दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2011 से अब तक 16 लाख 85 हजार से अधिक विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति के रूप में 3,600 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है, जिससे जरूरतमंद बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग आसान हुआ है। विद्यार्थियों को मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा सांदीपनि विद्यालय योजना अंतर्गत प्रथम चरण में नरसिंहपुर जिले में शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का सर्वसुविधायुक्त नवीन भवन का निर्माण कराया गया है। केजी-1 से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक, शारीरिक एवं सर्वांगीण विकास के लिए एक आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया है। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के लिए सुसज्जित डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, समृद्ध पुस्तकालय, मल्टीपर्पज हॉल एवं ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही, विद्यार्थियों की बाह्य शारीरिक गतिविधियों एवं खेलकूद को प्रोत्साहन देने के लिए खेल मैदान, सुगम एवं सुरक्षित आवागमन के लिए परिवहन सुविधा भी प्रदान की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक शैक्षणिक वातावरण के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इसी विद्यालय की मेधावी छात्रा कु. माही साहू ने कक्षा-12वीं की मेरिट लिस्ट में स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं क्षेत्र का मान बढ़ाया है।  

मध्यप्रदेश में ग्रामीणों को बड़ी राहत, 82 लोगों को मिला अपनी जमीन का मालिकाना अधिकार

भोपाल  प्रदेश में ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का वैधानिक अधिकार उपलब्ध कराने की दिशा में स्वामित्व योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को प्रदेश के 17 जिलों के 82 हितग्राहियों को संपत्ति के मालिकाना हक के दस्तावेज प्रदान किए गए। डिजिटल तकनीक के माध्यम से पंजीयन एवं सत्यापन की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाकर ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के अधिकार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा लाभार्थी स्वामित्व योजना के तहत छिंदवाड़ा जिले में 34, हरदा में 10 और सिंगरौली में छह हितग्राहियों के संपत्ति दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण किया गया है। डिंडौरी, मंडला और रायसेन में पांच-पांच, जबकि अनूपपुर, उमरिया और नरसिंहपुर में तीन-तीन हितग्राहियों के दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण हुआ है। इसी प्रकार अशोकनगर, आलीराजपुर, कटनी, ग्वालियर, बालाघाट, श्योपुर, सागर और सीधी में एक-एक हितग्राही के दस्तावेजों का पंजीयन पूर्ण किया गया है। ड्रोन तकनीक से सर्वे स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी भूमि पर स्थित मकानों एवं भूखंडों का ड्रोन तकनीक से सर्वेक्षण कर संपत्ति संबंधी अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से पात्र हितग्राहियों को संपत्ति के स्वामित्व के वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। इन दस्तावेजों से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर अधिकार का प्रमाण मिलने के साथ बैंक ऋण सहित अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ लेने में भी मदद मिलती है। संपत्ति के अधिकार के साथ ऋण लेने में भी मिलेगी मदद स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में स्थित मकानों और भूखंडों का ड्रोन तकनीक से सर्वेक्षण कर संपत्ति संबंधी अभिलेख तैयार किए जाते हैं। इसके आधार पर पात्र हितग्राहियों को स्वामित्व के वैधानिक दस्तावेज दिए जाते हैं। इन दस्तावेजों से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर अधिकार का प्रमाण मिलता है। साथ ही, बैंक ऋण सहित अन्य वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करने में भी मदद मिल सकती है।  सारा ऐप से पंजीयन, संपदा 2.0 से सत्यापन डिजिटल प्रक्रिया का प्रदर्शन छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ विकासखंड की ग्राम पंचायत जमुनिया कला में आयोजित जनविश्वास शिविर में किया गया। यहां पटवारी सुनील गागड़े ने ‘सारा ऐप’ के माध्यम से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया समझाई। इसके बाद ‘संपदा 2.0’ के जरिए ऑनलाइन सत्यापन किया गया। योजना के तहत संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप देने के साथ पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया को सुगम व पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को संपत्ति के अधिकार से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।  छिंदवाड़ा में पटवारी ने प्रदर्शित की डिजिटल पंजीयन प्रक्रिया छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ विकासखंड की ग्राम पंचायत जमुनिया कला में आयोजित जनविश्वास शिविर में पटवारी सुनील गागड़े ने ‘सारा एप’ के माध्यम से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। इसके बाद ‘संपदा 2.0’ के माध्यम से ऑनलाइन सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई। स्वामित्व योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति संबंधी अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप देने और शासकीय सेवाओं को अधिक सुगम एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है।  

MP Metro Offer: आज से भोपाल-इंदौर मेट्रो में डिस्काउंट, सिर्फ 2 लोग भी ले सकेंगे ग्रुप टिकट

भोपाल/इंदौर भोपाल और इंदौर मेट्रो में सफर करने वालों को आज 11 अक्टूबर से टिकट पर अतिरिक्त छूट मिलेगी। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने त्योहारों के दौरान यात्रियों को राहत देने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक विशेष छूट देने का फैसला किया है। इसके तहत सिंगल जर्नी टिकट पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट मिलेगी। वहीं, रिटर्न टिकट पर कुल 30 प्रतिशत और ग्रुप टिकट पर 35 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। ग्रुप टिकट लेने की शर्त हुई आसान नई व्यवस्था में ग्रुप टिकट लेने की शर्त भी आसान की गई है। पहले इसके लिए कम से कम आठ यात्रियों का होना जरूरी था, लेकिन अब दो लोग भी ग्रुप टिकट ले सकेंगे। इससे परिवार और दोस्तों के साथ मेट्रो में सफर करने वालों को फायदा मिल सकता है। हालांकि, 20 रुपये के सिंगल जर्नी टिकट पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत छूट लागू नहीं होगी। ई-वॉलेट रिचार्ज पर भी मिलेगा बोनस मेट्रो के मोबाइल ऐप पर ई-वॉलेट रिचार्ज कराने वालों को पहले से बोनस राशि मिल रही है। 200 से 499 रुपये के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत, 500 से 999 रुपये पर 10 प्रतिशत, 1,000 से 1,499 रुपये पर 12 प्रतिशत और 1,500 से 2,000 रुपये तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस दिया जाता है। नई टिकट छूट के साथ ई-वॉलेट बोनस का लाभ लेने पर यात्रियों को कुल बचत में और फायदा हो सकता है। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, दोनों सुविधाओं को मिलाकर अधिकतम लाभ करीब 44 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वास्तविक बचत टिकट के प्रकार और रिचार्ज राशि पर निर्भर करेगी। मोबाइल ऐप से टिकट बुकिंग और कैशलेस भुगतान की सुविधा भोपाल और इंदौर मेट्रो में यात्री एमपी मेट्रो मोबाइल ऐप के जरिए डिजिटल टिकट ले सकते हैं। भुगतान के लिए यूपीआई, क्यूआर कोड और ई-वॉलेट की सुविधा उपलब्ध है। डिजिटल टिकटिंग से यात्रियों को टिकट खरीदने के लिए काउंटर पर निर्भर रहने की जरूरत कम होती है और नकद भुगतान भी नहीं करना पड़ता। नई छूट 11 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। ऐसे में नियमित यात्रा करने वाले यात्रियों के साथ त्योहारों के दौरान परिवार या दोस्तों के साथ मेट्रो में सफर करने वालों को भी फायदा मिल सकता है। रिटर्न टिकट पर 30%, ग्रुप टिकट पर कुल 35% छूट     सिंगल जर्नी टिकट (SJT): टिकट पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट।     टर्न जर्नी टिकट (RJT): पहले मिलने वाली 5 प्रतिशत छूट के स्थान पर अब कुल 30 प्रतिशत छूट।     ग्रुप टिकट (GT): पहले मिलने वाली 10 प्रतिशत छूट के स्थान पर अब कुल 35 प्रतिशत छूट। ग्रुप टिकट के लिए अब 2 यात्री ही जरूरी ग्रुप टिकट की सुविधा को भी यात्रियों के लिए आसान बनाया गया है। पहले ग्रुप टिकट लेने के लिए कम से कम 8 यात्रियों का होना आवश्यक था, जिसे अब घटाकर केवल 2 यात्री कर दिया गया है। इससे परिवार और दोस्तों के साथ यात्रा करने वाले यात्री भी ग्रुप टिकट का लाभ ले सकेंगे। ₹20 के सिंगल जर्नी टिकट पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत छूट लागू नहीं होगी। नई छूट से यात्रियों को होगा दोहरा फायदा MPMRCL मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-वॉलेट रिचार्ज करने पर यात्रियों को पहले से ही रिचार्ज राशि के अनुसार 8 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक बोनस राशि का लाभ दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत ₹200 से ₹499 तक के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत, ₹500 से ₹999 तक पर 10 प्रतिशत, ₹1,000 से ₹1,499 तक पर 12 प्रतिशत तथा ₹1,500 से ₹2,000 तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस राशि मिलती है। अब इस मौजूदा ई-वॉलेट बोनस सुविधा के साथ नई प्रमोशनल टिकट छूट का लाभ मिलने से यात्रियों को टिकट पर अधिकतम लगभग 44 प्रतिशत का लाभ प्राप्त हो सकता है। डिजिटल टिकटिंग और कैशलेस भुगतान से स्मार्ट यात्रा भोपाल एवं इंदौर मेट्रो में यात्रियों की सुविधा के लिए ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन (AFC) प्रणाली पहले से संचालित है। यात्री MPMRCL मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल टिकट प्राप्त कर सहज, सुरक्षित और कैशलेस यात्रा कर सकते हैं। टिकट का भुगतान UPI, QR कोड, ई-वॉलेट और MP Metro मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जा सकता है। इतना किराया 1 से 2 स्टेशन के लिए ₹20, 3 से 5 स्टेशन तक ₹30, और 6 से 8 स्टेशन तक ₹40 किराया लिया जा रहा है। अधिकतम किराया (पूरे रूट पर) 80 रुपए तक है।  

नवरात्रि का पहला दिन आज, मां शैलपुत्री को चढ़ाएं सफेद मिठाई और घी का भोग; जानें पूजा विधि

Navratri 1st Day Maa Shailputri ; शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के साथ मनाया जाता है. नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से माता की उपासना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है. इस दौरान देवी को प्रिय वस्तुओं का भोग लगाने और श्रद्धापूर्वक पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है. उज्जैन के आचार्य पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन कुछ खास बातों का ध्यान रखकर माता की आराधना की जा सकती है.  आज  से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि वैदिक पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होती है. वर्ष 2026 में प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्टूबर को मनाया जाएगा. इसी दिन घट स्थापना के साथ मां दुर्गा के नौ दिवसीय पर्व की शुरुआत होगी. मां शैलपुत्री की पूजा का क्या है महत्व? नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता ने पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था, इसलिए उनका नाम शैलपुत्री पड़ा. देवी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है. उनका वाहन वृषभ यानी बैल है. मां शैलपुत्री को शक्ति, स्थिरता और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से चंद्रमा से जुड़े अशुभ प्रभावों को शांत करने में सहायता मिलती है. सफेद मिठाई और घी का लगाएं भोग आचार्य के अनुसार, मां शैलपुत्री को सफेद रंग प्रिय माना जाता है. ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन उन्हें सफेद बर्फी, दूध से बनी मिठाई, रबड़ी, मावे के लड्डू या गाय के घी से तैयार हलवे का भोग अर्पित कर सकते है. पूजा के दौरान स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें. भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार माता को भोग लगाकर सुख-शांति और परिवार की खुशहाली की कामना कर सकते हैं. जरूर करें इन मंत्रों का जाप ऊं देवी शैलपुत्र्यै नमः।। या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।। वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।

भारत की वायुसेना होगी और ताकतवर? रूस ने दिया 5th जेनरेशन फाइटर जेट का ऑफर, रक्षा क्षेत्र में बढ़ी हलचल

बेंगलुरु   रूस-यूक्रेन और ईरान जंग ने ग्‍लोबल लेवल पर उथल-पुथल मचा रखी है. सामरिक हालात में व्‍यापक परिवर्तन आ चुके हैं. हर देश खुद को सुरक्षित करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार आर्म्‍ड फोर्सेज को अपडेट कर रहा है. इससे दुनियाभर में हथियारों की होड़ बढ़ गई है. नई टेक्‍नोलॉजी की वजह से डिफेंस सेक्‍टर में नए-नए बदलाव हो रहे हैं. मिसाइल और ड्रोन हमले को देखते हुए तमाम देश एयर डिफेंस सिस्‍टम पर लाखों करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं. वहीं, ताकतवर देश ऐसी टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल कर रहे हैं, जो रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को भी मात दे दे. बदले हालात में भारत भी किसी से पीछे नहीं रहना चाहता है. यही वजह है कि एयर फायर-पावर को बढ़ाने के लिए भारत की ओर से लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।   114 राफेल फाइटर जेट की डील को हरी झंडी मिल चुकी है और अब एक मुकम्‍मल 5th जेनरेशन फाइटर जेट की तलाश चल रही है. यह तलाश इसलिए भी जरूरी हो गया है, क्‍योंकि चीन और पाकिस्‍तान के बीच पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर डील होने की संभावना है. इन सबको ध्‍यान में रखते हुए रूस ने भारत के सामने पांचवीं पीढ़ी के 140 Su-57E लड़ाकू विमान का प्रस्‍ताव रखा है. बताया जा रहा है कि इसमें डोमेस्टिक प्रोडक्‍शन के साथ ही टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर का भी ऑफर है।  दरअसल, रूस भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Su-57E के कम से कम 140 विमानों की खरीद के लिए तैयार करने में जुटा है. इस प्रस्ताव के तहत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के नासिक प्‍लांट को Su-57E के स्थानीय उत्पादन केंद्र में बदलने की पेशकश की गई है. रूसी पक्ष का मानना है कि इतने बड़े ऑर्डर से उत्पादन लाइन में बदलाव, जरूरी उपकरणों और तकनीक हस्तांतरण पर होने वाले निवेश की लागत की भरपाई संभव हो सकेगी. हालांकि, यह प्रस्ताव अभी बातचीत के स्तर पर है और भारत की ओर से 140 विमानों की खरीद पर अंतिम फैसला होने की पुष्टि नहीं हुई है।  रिपोर्ट के अनुसार, रूस चाहता है कि भारत पहले 40 Su-57E विमानों की खरीद के बाद स्थानीय उत्पादन के लिए अतिरिक्त 100 विमानों का ऑर्डर देने पर प्रतिबद्धता जताए. शुरुआती 40 विमानों की खरीद सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत होने की संभावना बताई गई है. इस शुरुआती प्रस्ताव में केवल एक सीट वाले लड़ाकू विमानों को शामिल करने की बात कही गई है।  नासिक प्‍लांट में करना होगा बदलाव प्रस्ताव के मुताबिक, एचएएल के नासिक संयंत्र में मौजूदा Su-30MKI उत्पादन लाइन को Su-57E के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, इसके लिए बड़े पैमाने पर बदलाव करने होंगे. रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादन लाइन को नए विमान के अनुकूल बनाने के लिए करीब 50 से 60 प्रतिशत नए टूलिंग उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है. Su-30MKI के लिए खरीदे गए 12 अतिरिक्त विमानों की आपूर्ति पूरी होने और मौजूदा उत्पादन लाइन बंद होने के बाद इस प्‍लांट को नए कार्यक्रम के लिए तैयार करने का विकल्प सामने आया है. रूस स्थानीय उत्पादन के साथ 60 प्रतिशत से अधिक तकनीक हस्तांतरण (टीओटी) की पेशकश भी कर रहा है।  दो सीटों वाले विमान पर भी विचार रूस ने Su-57 के पुराने प्रोटोटाइप को दो सीटों वाले संस्करण में बदलकर उसका परीक्षण शुरू किया है. भारतीय वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दो सीटों वाले विमान का विकल्प भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. Su-30MKI की तरह इसमें दूसरा चालक दल सदस्य हथियार संचालन के साथ ड्रोन नियंत्रण की जिम्मेदारी भी संभाल सकता है. प्रस्ताव में इंजन तकनीक हस्तांतरण का विकल्प भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में Su-30MKI के अपग्रेडेशन और उसके AL-31F इंजन को बदलने की संभावनाओं के लिए किया जा सकता है।  सॉफ्टवेयर और रडार पर अधिकार की पेशकश रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने विमान के मिशन कंप्यूटर और रडार का सोर्स कोड उपलब्ध कराने की पेशकश की है. इससे भारत को अपने हथियार प्रणालियों को विमान में एकीकृत करने में अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है और इसके लिए रूसी कंपनियों पर निर्भरता घट सकती है. हालांकि, Su-57E के 140 विमानों और फ्रांस से 114 राफेल विमानों की संभावित खरीद पर एक साथ विचार करने की स्थिति में वायुसेना के बजट पर बड़ा दबाव पड़ सकता है. ऐसे में प्रस्तावित तकनीक हस्तांतरण, स्वदेशी उत्पादन की लागत और दीर्घकालीन परिचालन जरूरतें भारत के अंतिम फैसले में अहम भूमिका निभाएंगी। 

नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का सही तरीका क्या है? घी, बत्ती और दिशा से जुड़े नियम जानें

Shardiya Navratri Akhand Jyoti Niyam: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है. यह पर्व मां दुर्गा को समर्पित है, जो पूरे नौ दिनों तक चलता है.  इस दौरान मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ अखंड ज्योति जलाने की भी परंपरा है. कई भक्त नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योति जलाते हैं. मान्यता है कि नौ दिनों तक लगातार जलने वाली ज्योति मां दुर्गा के प्रति आस्था और भक्ति का प्रतीक है. हालांकि, अखंड ज्योति जलाने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. अखंड ज्योति जलाने के लिए सही दीपक, बत्ती और घी या तेल का इस्तेमाल करना जरूरी है. साथ ही, इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि दीपक में घी या तेल कम न हो और उसकी लौ लगातार जलती रहे. तो आइए जानते हैं नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का सही तरीका क्या है. साथ ही जानिए इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. अखंड ज्योति जलाने की शुभ दिशा वास्तु के अनुसार, नवरात्रि में अखंड ज्योति रखने के लिए घर की दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण को शुभ माना जाता है. इस दिशा का संबंध अग्नि तत्व से है. पूजा घर में जगह हो, तो यहां दीपक रख सकते हैं. ध्यान रखें कि ज्योति ऐसी जगह हो, जहां उसकी देखभाल आसानी से हो सके और आग लगने का खतरा भी न रहे. नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने की सही विधि नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करने के बाद पूजा घर की सफाई कर लें. इसके बाद मां दुर्गा की पूजा की तैयारी करें.  फिर अखंड ज्योति रखने के लिए साफ-सुथरा जगह चुनें. अब एक लकड़ी की चौकी पर साफ लाल कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर दीपक रखें. दीपक ऐसी जगह रखें, जहां वह स्थिर रहे और आसानी से गिर न सके. अखंड ज्योति के लिए ऐसी बत्ती चुनें, जो लंबे समय तक जल सके.  आप गाय के घी का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर घी उपलब्ध न हो तो तिल या सरसों के तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.  इस बात का ध्यान रखें कि बत्ती को दीपक में ठीक तरह से लगाएं, ताकि लौ स्थिर बनी रहे. दीपक जलाने से पहले मां दुर्गा का ध्यान करें. नवरात्रि के नौ दिनों तक पूजा करने का संकल्प लें. मन में अपनी श्रद्धा और मनोकामना व्यक्त करते हुए देवी से पूजा पूरी करने की प्रार्थना करें. इसके बाद अखंड ज्योति प्रज्वलित करें. फिर दीपक के पास फूल और अक्षत अर्पित करें. इसके बाद मां दुर्गा की पूजा करें. साथ ही, आरती के साथ उनका स्मरण करें. अखंड ज्योति जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान अगर आपने नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का संकल्प लिया है, तो इसकी देखभाल के लिए पहले से इंतजाम कर लें. घर में कोई न कोई व्यक्ति इसकी निगरानी  जरूर करें. जलते हुए दीपक को अकेला छोड़ने से आग लगने का खतरा हो सकता है. अखंड ज्योति को चौकी पर रखना शुभ माना जाता है. दीपक को हमेशा समतल और सुरक्षित जगह पर रखें. इसके आसपास पर्दे, कागज या कपड़े जैसी चीजें न रखें. साथ ही, दीपक को बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें. दीपक में घी या तेल कम होने पर ज्योति बुझ सकती है. इसलिए समय-समय पर घी या तेल की मात्रा चेक करते रहें. इसे डालते समय सावधानी बरतें और दीपक को पूरा न भरें. साथ ही, बत्ती का आकार दीपक के हिसाब से रखें. इसके अलावा अखंड ज्योति से दूसरा दीपक जलाने और बार-बार उसकी बत्ती बदलने से बचना चाहिए. अखंड ज्योति का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में दीपक को रोशनी, आस्था और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाकर भक्त मां दुर्गा की पूजा करते हैं और नौ दिनों तक उनकी आराधना करते हैं. मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है.