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रियाद एयरपोर्ट हमले में 12 की मौत, 309 घायल; हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चला सकता है सऊदी अरब

रियाद  सऊदी अरब ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 10 अक्टूबर को हुए घातक हमले का कड़ा जवाब देने की कसम खाई है। इस हमले में 12 लोग मारे गए और 309 अन्य घायल हो गए थे। यह हमला यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब के हवाई अड्डों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर चलाए जा रहे सैन्य अभियान का हिस्सा है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब यमन में लड़ाई तेज हो रही है और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि सऊदी अरब हूती विद्रोहियों के हमलों का किस तरह से जवाब दे सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हूती विद्रोही अपनी रणनीति के तहत सऊदी अरब को चौतरफा घेर रहे हैं। उनकी रणनीति सऊदी अरब के रणनीतिक बुनियादी ढांचों पर हमला कर दबाव बढ़ाने की है। हूती विद्रोही नागरिक जीवन को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह रणनीति कुछ ऐसी ही है, जैसे ईरान ने अमेरिका के खिलाफ अपनाई थी। ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अड्डों की मेजबानी करने वाले देशों के एयरपोर्ट, तेल के कुओं और स्टोरेज फैसिलिटी को निशाना बनाया। इसका सीधा असर अमेरिका पर पड़ा और उसे दबाव में ईरान के साथ बैकचैनल बातचीत के लिए राजी होना पड़ा है। हूतियों को रोकने में सऊदी अरब नाकाम सऊदी अरब के पास दुनिया के सबसे महंगे एयर डिफेंस सिस्टम हैं। हालांकि, ईरान और हूती विद्रोहियों ने यह साबित कर दिया है कि वे न केवल सऊदी अरब में बल्कि खाड़ी देशों और हां तक कि इजरायल के एयर डिफेंस को भेदकर हमला करने में सक्षम हैं। इसका प्रमुख कारण हूती विद्रोहियों के हथियारों के जखीरे में बड़ी संख्या में मिसाइलों की मौजूदगी है। इन मिसाइलों को अब स्थानीय स्तर पर ही बनाया जा रहा है। इससे हूतियों को हथियारों के लिए ईरान से आने वाली सप्लाई पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। इससे हूती विद्रोही अपने सैन्य अभियान को बड़े पैमाने पर और बिना किसी बाधा के अंजाम दे रहे हैं। हूतियों के खिलाफ कैसे कार्रवाई कर सकता है सऊदी अरब? सऊदी अरब की तुलना में हूथियों के पास खोने के लिए कम है। उनके पास रणनीतिक बुनियादी ढांचा बहुत कम है। रियाद 2015 से ही उनसे लड़ रहा है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन यमन की राजधानी सना और हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में मिसाइल लॉन्च पैड्स, ड्रोन डिपो और कमांड सेंटरों पर हवाई हमले तेज कर सकता है। इसके अलावा सऊदी समर्थित यमनी सरकारी सेना को आधुनिक हथियार और फंडिंग देकर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर के तटीय क्षेत्रों को हूतियों के कब्जे से छुड़ाने के लिए बड़ा जमीनी अभियान चला सकता है। अमेरिका-पाकिस्तान-तुर्की देंगे सऊदी का साथ? हूती विद्रोहियों के हमलों में अमेरिकी नागरिकों की मौत के बाद सऊदी अरब अपनी रक्षा के लिए अन्य देशों से समर्थन जुटा रहा है। ऐसी संभावना है कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमलों में अमेरिका भी शामिल हो जाए। सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्की जैसे साझेदार देशों के साथ मिलकर रक्षा समझौते के तहत रणनीतिक व तकनीकी मदद ले सकता है। इसके अलावा वह लाल सागर और अरब सागर में समुद्री गश्त बढ़ाकर ईरान से हूतियों तक पहुंचने वाले ड्रोन, मिसाइल और घातक हथियारों की तस्करी के रास्तों को पूरी तरह सील कर सकता है।  

बिहार में गंगा कटाव से उजड़े 65 परिवार, किसी ने खेत तो किसी ने गंवाया अपना आशियाना; पुनर्वास की मांग तेज

भागलपुर  गंगा के भीषण कटाव ने राघोपुर पंचायत के कई परिवारों से उनका आशियाना छीन लिया है। वर्षों की मेहनत और जीवनभर की कमाई से बनाए गए पक्के मकान आंखों के सामने गंगा में समा गए। अब इन परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बच्चों और परिजनों को सुरक्षित रखने तथा सिर छिपाने के लिए ठिकाना तलाशने की है। घर उजड़ने के बाद पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन से जमीन और मकान के नुकसान का उचित मुआवजा देने के साथ स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है। कटाव से प्रभावित परिवारों की सूची जिला प्रशासन को सौंपी गई है। इसमें पूर्व जिला पार्षद प्रेमशीला देवी, मधुसूदन मंडल, सुनील मंडल, पुरण यादव, कैलाश यादव, मोनू यादव, शिव मंडल मांझी और राजू मंडल सहित अन्य पीड़ितों के नाम शामिल हैं। बताया गया कि सूची में कुल 65 कटाव पीड़ित परिवारों को शामिल किया गया है, जिनके घर गंगा के कटाव से प्रभावित हुए हैं। पहले खेत गंवाया, अब घर भी छिन गया कटाव पीड़ितों कनिक मंडल अनिल मंडल मणिकांत मंडल मनोहर मंगल रेखा देवी अवधेश यादव वकील यादव रजिया देवी अविनाश कुमार बृजेश यादव पूनम देवी सरवन यादव का दर्द यह है कि कई परिवारों की खेती योग्य जमीन पहले ही गंगा में समा चुकी थी इसके बाद उन्होंने ठेका पर जमीन लेकर खेती की और किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हुए अपना आशियाना बनाया। लेकिन गंगा के लगातार कटाव ने उनका यह सहारा भी छीन लिया। एक पीड़ित ग्रामीण ने दर्द बयां करते हुए कहा, “हमारी जमीन तो पहले ही गंगा में चली गई थी। परिवार चलाने के लिए ठेका पर खेती करते थे। मेहनत करके किसी तरह घर बनाया था, लेकिन अब वह घर भी गंगा में समा गया। आखिर हम अपने परिवार को लेकर कहां जाएं? सरकार हमारे नुकसान का मुआवजा दे और रहने के लिए जमीन व मकान की व्यवस्था करे।” 65 परिवारों के पुनर्वास की उठी मांग कटाव पीड़ितों का कहना है कि घर और जमीन गंवाने के बाद उनके सामने आजीविका के साथ-साथ रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे में केवल राहत सामग्री देना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार को नुकसान का आकलन कर प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देना चाहिए, ताकि वे दोबारा अपना आशियाना बना सकें। पीड़ितों ने मांग की है कि जिला प्रशासन सौंपी गई सूची के आधार पर प्रत्येक परिवार के नुकसान का सत्यापन कराए। जिन लोगों के मकान और जमीन गंगा में समा चुके हैं, उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया जाए। साथ ही, बेघर परिवारों के लिए सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। जिनके घर बचे हैं, वे भी दहशत में गंगा की धारा जिस तेजी से गांव की ओर बढ़ रही है, उससे आसपास के परिवार भी भयभीत हैं। जिनके मकान अभी कटाव की चपेट में नहीं आए हैं, उन्हें भी हर पल अपना आशियाना उजड़ने का डर सता रहा है। कई परिवार जरूरी सामान समेटकर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कटाव से बचाव के लिए प्रभावी कदम उठाने के साथ-साथ पहले से बेघर हो चुके परिवारों की सुध लेना भी जरूरी है। उनके लिए यह केवल घर टूटने का मामला नहीं, बल्कि जीवनभर की मेहनत, जमा-पूंजी और भविष्य की उम्मीदों के उजड़ जाने का दर्द है। कटाव पीड़ितों की मांग है कि सरकार उनके नुकसान का आकलन कर जमीन और मकान का उचित मुआवजा दे तथा सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की व्यवस्था करे, ताकि वे फिर से अपना घर-परिवार बसा सकें।  

हजारों पुरानी बोतलों से बना बॉटल हाउस, 60 साल बाद भी कायम है इसकी अनोखी पहचान

कैनबरा साल 1967 में ऑस्ट्रेलिया के दूर-दराज इलाके में हजारों बेकार कांच की बोतलों से घर बनाया गया था। छह दशक बाद यह इमारत न्यू साउथ वेल्स के लाइटनिंग रिज इलाके में मौजूद है। आज यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है और यहां ओपल-माइनिंग से जुड़ी चीज़ें, पुरानी बोतलें और दूसरी ऐतिहासिक वस्तुएं रखी गई हैं। बॉटल हाउस के नाम से जानी जाने वाली इस इमारत को टेक्स मोकेल ने बनाया था। इस इमारत की दीवारें कांच की बोतलों को जोड़कर बनाई गई हैं, जबकि इसकी ढलान वाली छत नालीदार लोहे की चादर की है। इमारत के अंदर कई छोटे कमरे और एक मचान है। 1967 में बना बॉटल हाउस शहर की खास पहचान वाली जगहों में से एक है। इसे बॉटल हाउस एंड माइनिंग म्यूजियम के तौर पर लिस्ट किया गया है और पुराने माइनिंग कैंप में अनोखी वास्तुकला का उदाहरण बताया गया है। बेकार बोतलें कैसे बनीं निर्माण सामग्री इस इमारत की दीवारें इसकी सबसे खास विशेषता हैं। कांच की बोतलों की कतारों से इसका ढांचा बना है, जिससे यह ईंट, लकड़ी या कंक्रीट से बने आम घरों से बिल्कुल अलग दिखता है। बॉटल हाउस को क्वींसलैंड बॉर्डर के पास बसे छोटे से शहर हेबेल से इकट्ठा की गई बोतलों से बनाया गया था। न्यू साउथ वेल्स सरकार की आधिकारिक पर्यटन जानकारी के अनुसार, शुरुआत में बोतलों को जोड़ने के लिए सीमेंट का इस्तेमाल किया गया था। मोकेल को बाद में पता चला कि स्थानीय मिट्टी ज़्यादा सही थी क्योंकि इससे टूटी हुई बोतल को बदलना आसान हो जाता था। इमारत की दीवारें इसकी सबसे खास विशेषता हैं। कांच की बोतलों की कतारों से इसका ढांचा बना है, जिससे यह ईंट, लकड़ी या कंक्रीट से बने आम घरों से बिल्कुल अलग दिखता है। कांच से होकर आने वाली रोशनी एक और खास नजारा बनाती है। कितनी बोलतों का हुआ इस्तेमाल उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड में निर्माण में इस्तेमाल की गई बोतलों की सही संख्या नहीं बताई गई है। हालांकि इमारत की दीवारें तकरीबन पूरी तरह से बोतलों से बनी हैं, जिससे बेकार कांच इसके डिजाइन का मुख्य हिस्सा बन गया है। आज इस इमारत में एक छोटा सा म्यूजियम है, जिसमें ओपल माइनिंग और खनिजों से जुड़ी चीजें रखी गई हैं। बॉटल हाउस असल में खनिकों के एक कैंप से जुड़ा था, जो लाइटनिंग रिज के ओपल-माइनिंग बस्ती वाले इतिहास को दिखाता है। उत्तरी न्यू साउथ वेल्स का यह शहर अपने काले ओपल के लिए मशहूर है और यहां माइनिंग और छोटी बस्तियों का लंबा इतिहास रहा है। 1970 के दशक में कुछ समय के लिए डेव मार्टिन ने बॉटल हाउस चलाया था। बॉटल हाउस कहां है बॉटल हाउस और माइनिंग म्यूजियम, लाइटनिंग रिज, न्यू साउथ वेल्स (पोस्टकोड 2834) में ओपल स्ट्रीट पर स्थित है। न्यू साउथ वेल्स सरकार की वेबसाइट के अनुसार, यहां एंट्री फीस 2 से 10 ऑस्ट्रेलियन डॉलर के बीच है। यह जगह इलाके की माइनिंग विरासत और निर्माण के अनोखे तरीके, दोनों की झलक दिखाती है। 1967 में टेक्स मोकेल का बनाया गया बॉटल हाउस उस समय की याद दिलाता है, जब बेकार पड़ी चीजों का इस्तेमाल करके स्थानीय इमारत बनाई जाती थी। खनिकों के कैंप के हिस्से के तौर पर शुरुआती दिनों की तुलना में अब इसका मकसद अलग है। पर्यटकों के लिए लाइटनिंग रिज के इतिहास की चीजों को सहेजकर रखना है।

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने की एमपी ट्रांसको की सराहना, 23 साल पुराने ट्रांसफार्मर को मिला नया जीवन

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने आगामी रबी सीजन में बढ़ने वाली विद्युत मांग के मद्देनजर सागर जिले के 132/33 केवी सब स्टेशन राहतगढ़ में अतिरिक्त 40 एमवीए क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया है। साथ ही सब स्टेशन की कुल स्थापित क्षमता 40 एमवीए से बढ़कर 80 एमवीए हो गई है। पहले एक, अब दो ट्रांसफार्मर उपलब्ध ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि राहतगढ़ सब स्टेशन में पहले 40 एमवीए क्षमता का एक ही पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित था। अतिरिक्त ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से अब यहां दो पॉवर ट्रांसफार्मर उपलब्ध हैं। इससे सब स्टेशन की कुल क्षमता दोगुनी होने के साथ विद्युत पारेषण व्यवस्था को अतिरिक्त क्षमता और संचालन के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था मिली है। किसी एक ट्रांसफार्मर के रखरखाव या तकनीकी समस्या की स्थिति में दूसरे ट्रांसफार्मर की उपलब्धता से विद्युत आपूर्ति व्यवस्था के प्रबंधन में सुविधा होगी। यह व्यवस्था आगामी रबी सीजन में बढ़ने वाली विद्युत मांग को पूरा करने में भी सहायक होगी। ऊर्जा मंत्री ने दी बधाई ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने करीब 23 वर्ष पुराने पॉवर ट्रांसफार्मर की इन-हाउस रिकंडीशनिंग कर उसे पुनर्स्थापित करने के एमपी ट्रांसको के अभियंताओं एवं तकनीकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा कि पुराने ट्रांसफार्मर की तकनीकी जांच, आवश्यक सुधार एवं रिकंडीशनिंग कर उसे पुनः उपयोग में लाना कंपनी के अभियंताओं के तकनीकी कौशल और अनुभव को दर्शाता है। 23 वर्ष पुराने ट्रांसफार्मर की इन-हाउस रिकंडीशनिंग एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता टेस्टिंग श्री एम वाय मंसूरी के अनुसार राहतगढ़ में स्थापित किया गया 40 एमवीए क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर लगभग 23 वर्ष पुराना है। इससे पहले यह ट्रांसफार्मर मनसकरा, जबलपुर और अमरपाटन, मैहर में अपनी उपयोगी सेवाएं दे चुका है। एमपी ट्रांसको ने इस ट्रांसफार्मर की रिकंडीशनिंग अपने स्तर पर कराई। इस प्रक्रिया में ट्रांसफार्मर की गास्केट बदलने, विभिन्न स्थानों से होने वाले तेल के रिसाव को दूर करने तथा निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार ट्रांसफार्मर का वैक्यूम करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए गए। ट्रांसफार्मर का इंसुलेटिंग ऑयल बदलने के साथ तेल एवं इंसुलेशन से संबंधित आवश्यक तकनीकी मानकों की जांच भी की गई।  

8th Pay Commission: कर्मचारियों के लिए 2.92 से 4.38 तक फिटमेंट फैक्टर की मांग, जानें किस लेवल पर कितना बढ़ेगा बेसिक पे

नई दिल्ली 8वें पे कमीशन के सामने जो एक मुद्दा सबसे अधिक बार उठाया गया है वह है फिटमेंट फैक्टर। बेंगलुरू मीटिंग में भी कुछ पेंशनर्स से जुड़े संगठनों ने आयोग के सामने 3.833 फिटमेंट फैक्टर रखने की मांग की थी। वहीं, अन्य कुछ संगठनों ने अलग से अपनी डिमांड की है। इन संगठनों का कहना है कि अलग-अलग पे लेवल के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर तय किया जाए। अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की डिमांड इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन ने आयोग से अलग-अलग लेवल के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की डिमांड की है। इस संगठन ने लेवल 1 के लिए 2.92 फिटमेंट फैक्टर की जहां डिमांड की है। तो वहीं लेवल 18 के लिए संगठन ने 4.38 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। इसके पीछे की वजह से संगठन ने जिम्मेदारियों को बताया है। संगठन का कहना है कि एक फिटमेंट फैक्टर अलग-अलग लेवल के कर्मचारियों की जिम्मेदारी और ड्यूटी को जस्टीफाई नहीं कर पाता है। किस लेवल के लिए संगठन ने कितना फिटमेंट फैक्टर मांगा लेवल 1 से 3 के लिए – 2.92 फिटमेंट फैक्टर लेवल 4 से 8 के लिए 3.50 फिटमेंट फैक्टर लेवल 9 से 13 के लिए 3.80 फिटमेंट फैक्टर लेवल 14 से 16 के लिए 4.09 फिटमेंट फैक्टर लेवल 17 से 18 के लिए 4.38 फिटमेंट फैक्टर की डिमांड IRTSA ने की है। इस डिमांड के हिसाब से अगर देखें तो लेवल 1 के कर्मचारियों का कम से कम बेसिक पे 35400 रुपये हो जाएगा। वहीं, लेवल 18 के कर्मचारियों का बेसिक 2.25 लाख रुपये प्रति माह पहुंच जाएगा। फैमिली यूनिट भी बढ़ाने की मांग ग से 5 प्रतिशत के एनुअल इंक्रीमेंट की डिमांड की है। इस समय सालाना स्तर पर 3 प्रतिशत का एनुअल इंक्रीमेंट हो रहा है। इसके अलावा IRTSA ने फैमिली यूनिट को 4.6 करने की मांग की है। मौजूदा समय में 7वें पे कमीशन के दौरान फैमिली यूनिट 3 थी। वहीं, नए घर के खर्च को भी जोड़ने की मांग हुई है। 8वें पे कमीशन की अगली मीटिंग मुंबई में होगी। इसके पहले दिल्ली, लखनऊ, पुडुचेरी, चेन्नई, भुवनेश्वर, कोलकाता में हो चुकी है।

राजस्थान में 3-4 दिन बिगड़ा रहेगा मौसम, बीकानेर-श्रीगंगानगर समेत इन जिलों में बारिश की चेतावनी

जयपुर  राजस्थान में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर संभाग में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से बारिश और तेज ठंडी हवाओं का दौर शुरू हो गया है। रविवार सुबह श्रीगंगानगर सहित आसपास के इलाकों में रुक-रुककर बारिश हुई। इस दौरान कई जगह बिजली भी चमकी। मौसम में आए बदलाव से तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सर्दी का असर बढ़ने लगा है। मौसम विभाग ने बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और शेखावाटी क्षेत्र के जिलों में मेघगर्जन, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार, पाकिस्तान के मध्य भागों के ऊपर वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर परिसंचरण तंत्र बना हुआ है। वहीं, उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में ट्रफ लाइन सक्रिय है। अरब सागर की खाड़ी से हवाओं के साथ नमी मिलने के कारण प्रदेश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला है। इन जिलों में 3-4 दिन मौसम रहेगा खराब बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और शेखावाटी क्षेत्र के जिलों में मेघगर्जन के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और उत्तरी हिस्सों में अगले तीन से चार दिन तक मौसम की ऐसी गतिविधियां जारी रह सकती हैं। श्रीगंगानगर में बारिश, करनपुर में 20 एमएम बरसात श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में शनिवार देर रात से रुक-रुककर बारिश हो रही है। रविवार सुबह कई इलाकों में बारिश के साथ बिजली चमकने से मौसम में ठंडक बढ़ गई। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे के दौरान बीकानेर संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। इस दौरान श्रीगंगानगर के करनपुर में सर्वाधिक 20 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। नरमा की फसल को लेकर चिंता बढ़ी सूरतगढ़ क्षेत्र में भी बूंदाबांदी हुई। इससे नरमा की कटाई का काम प्रभावित हुआ है। किसानों को चिंता है कि यदि बारिश का दौर जारी रहा तो खेतों में तैयार फसल की कटाई और उपज को सुरक्षित रखने में परेशानी हो सकती है। फलोदी के ग्रामीण इलाकों में बढ़ी सर्दी पश्चिमी राजस्थान के फलोदी जिले के देणोक, आऊ, घंटियाली और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी रविवार को मौसम का असर दिखाई दिया। सुबह से आसमान में काले बादल छाए रहे और दिनभर रुक-रुककर तेज ठंडी हवाएं चलती रहीं। दोपहर बाद हवा की रफ्तार बढ़ने से धूल भरी आंधी जैसा माहौल बन गया। इससे खेतों में काम कर रहे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बादलों और ठंडी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट के साथ सर्दी का एहसास बढ़ गया। दिन के साथ रात के तापमान में भी गिरावट मौसम में बदलाव का असर प्रदेश के कई शहरों में दर्ज किया गया है। पिछले 24 घंटे के दौरान जोधपुर, फलोदी, बीकानेर, बाड़मेर, चित्तौड़गढ़, कोटा, सिरोही और हनुमानगढ़ में अधिकतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आई। दिन में गर्मी कम होने के साथ रातें भी ठंडी होने लगी हैं। शनिवार को प्रदेश के 10 शहरों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। उदयपुर में न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस रहा। 13 और 14 अक्टूबर को फिर बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार, 12 अक्टूबर को भी उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में बादल छाए रह सकते हैं। वहीं, 13 और 14 अक्टूबर को एक कमजोर मौसम प्रणाली के प्रभाव से बीकानेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मेघगर्जन, 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। किसानों के लिए मौसम विभाग की सलाह बारिश की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने बीकानेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र के किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। खुले आसमान के नीचे रखी तैयार फसलों को भीगने से बचाने के लिए जरूरी इंतजाम करने को कहा गया है। कृषि उपज मंडियों में खुले में रखे अनाज और अन्य जिंसों को भी बारिश से सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के बीच किसानों को आने वाले दिनों में बारिश के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर कटाई और उपज के भंडारण की तैयारी करने की जरूरत है।

स्वस्थ और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण हमारी सरकार का संकल्प : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

*मुख्यमंत्री श्री साय ने देवपुरी में सुपर स्पेशलिटी प्रथमेश हॉस्पिटल का किया शुभारंभ* *छत्तीसगढ़ मध्य भारत के प्रमुख मेडिकल हब के रूप में तेजी से हो रहा विकसित : मुख्यमंत्री श्री साय* *प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी कम* *नवा रायपुर में 200 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही आधुनिक मेडिसिटी, मेडिकल टूरिज्म और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा* रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी संकल्प के साथ स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने और दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ आज मध्य भारत के प्रमुख मेडिकल हब के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के देवपुरी में लगभग एक एकड़ क्षेत्र में निर्मित 125 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक सुपर स्पेशलिटी प्रथमेश हॉस्पिटल के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने फीता काटकर अस्पताल का शुभारंभ किया और अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन, चिकित्सकों और पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह अस्पताल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रदेश में ही उपलब्ध हों बेहतर और आधुनिक उपचार सुविधाएं मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज और उसके परिवार को उपचार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़े तो आर्थिक बोझ के साथ अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को अधिक से अधिक विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा सेवाएं छत्तीसगढ़ में ही उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार से गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता लगातार कम होगी। इसका लाभ न केवल छत्तीसगढ़ के नागरिकों, बल्कि आसपास के राज्यों से आने वाले मरीजों को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी और निजी संस्थानों के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में एक मजबूत हेल्थकेयर इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। आधुनिक अस्पतालों के खुलने से जहां लोगों को गुणवत्तापूर्ण उपचार की सुविधा मिलेगी, वहीं चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत कवच मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में व्यापक विस्तार हुआ है। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। छत्तीसगढ़ में भी बड़ी संख्या में पात्र परिवार इस योजना के माध्यम से निःशुल्क उपचार की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी डबल इंजन सरकार का प्रयास है कि आर्थिक अभाव किसी व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने। स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा गया है। जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। सुदूर वनांचलों और जनजातीय क्षेत्रों तक चिकित्सकीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सोच स्पष्ट है – बेहतर स्वास्थ्य सेवा पर प्रत्येक नागरिक का समान अधिकार है, चाहे वह राजधानी में रहता हो या प्रदेश के किसी सुदूर वनांचल में। नवा रायपुर की मेडिसिटी से स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगी नई पहचान मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में नवा रायपुर में 200 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यह परियोजना आने वाले समय में प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई ऊंचाई प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि मेडिसिटी में आधुनिक और सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की व्यापक संभावनाएं होंगी। इससे प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और चिकित्सा क्षेत्र में नए निवेश तथा रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर और नवा रायपुर में आधुनिक चिकित्सा संस्थानों के लगातार विस्तार से छत्तीसगढ़ की पहचान एक बड़े हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में मजबूत हो रही है। हमारा प्रयास है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के लोगों को गंभीर और जटिल बीमारियों के बेहतर उपचार के लिए बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े, बल्कि दूसरे राज्यों के लोग गुणवत्तापूर्ण उपचार के लिए छत्तीसगढ़ आएं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आधुनिक संस्थानों की स्थापना प्रदेश में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के निरंतर विस्तार का परिचायक है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सेवा, संवेदनशीलता और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मरीजों के हित में कार्य करने का आह्वान किया। स्वास्थ्य अधोसंरचना के साथ मानव संसाधन और रोजगार का भी हो रहा विस्तार मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में होने वाला निवेश केवल अस्पतालों और चिकित्सा उपकरणों तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ चिकित्सकों, नर्सों, तकनीशियनों, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा संस्थानों का विस्तार छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए भी नई संभावनाएं लेकर आ रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन भी तैयार हो और युवाओं को अपने प्रदेश में ही बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त हों। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ से ही विकसित छत्तीसगढ़ का मार्ग प्रशस्त होगा। राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और जनोन्मुखी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंचे और हर परिवार को आवश्यकता के समय बेहतर उपचार का भरोसा मिले। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा … Read more

यूपी में मरीजों की जान से खिलवाड़ पर सख्ती, तीन दिन में 772 एंबुलेंस पर कार्रवाई

लखनऊ  जिस एंबुलेंस से मरीज और उसके परिजन जिंदगी बचने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, उसकी अपनी सेहत ही ठीक न हो तो भरोसा कैसे किया जाए? प्रदेश में अनफिट और अवैध एंबुलेंस का धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग के तीन दिवसीय विशेष अभियान में अनफिट हो चुके 772 एंबुलेंस के चालान किए गए, जबकि 135 को बंद कराया गया। प्रदेश के कई जिलों में अभियान के दौरान परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमों ने निजी क्षेत्र में संचालित एंबुलेंस की जांच की। नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की गई। एंबुलेंस का काम मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना है, लेकिन वाहन अनफिट हो या उसके जरूरी दस्तावेज पूरे न हों तो सफर के दौरान मरीज की सुरक्षा जोखिम में पड़ सकती है। सभी जरूरी दस्तावेज पूरे रखने को कहा ऐसे में केवल आपातकालीन सेवा के नाम पर वाहनों को सड़क पर दौड़ने की छूट नहीं दी जा सकती। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने एंबुलेंस संचालकों से पंजीकरण, वैध परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र सहित सभी जरूरी दस्तावेज पूरे रखने को कहा है। साथ ही स्पष्ट किया है कि अवैध और अनफिट वाहनों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। हालांकि, बड़ी संख्या में एंबुलेंस पर कार्रवाई के बाद निगरानी जरूरी है, ताकि मरीजों की जान बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन खुद उनकी सुरक्षा के लिए खतरा न बनें।

बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मिलेगी रफ्तार, आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेंगे कई प्रमुख शहर

पटना आमस-दरभंगा फाेरलेन सड़क जो एक्सप्रेस वे के स्वरूप में तैयार किया जा रहा है, को प्रदेश के कई जगहों से स्पर (लिंक रोड) के माध्यम से संपर्कता देने की तैयारी आगे बढ़ी है। स्पर के निर्माण को ले तय एलायनमेंट (मार्गरेखन) पर राज्य सरकार की सहमति है। राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राध‍िकरण (NHAI) के स्तर पर इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराए जाने की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ी है। हाल ही में अपने बिहार दौरे के क्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष इन स्परों के निर्माण पर चर्चा भी हुई थी। बोधगया स्पर के निर्माण पर 613.19 करोड़ का खर्च आमस-दरभंगा एक्सप्रेस वे का एक स्पर बोधगया को इस प्रोजेक्ट से जोड़ेगा। इसकी लंबाई 19.26 किमी है तथा इसके निर्माण पर 613.19 करोड़ रुपए का खर्च होगा। वर्तमान में इसके एलायनमेंट को अंतिम रूप दिए जाने का मामला प्रक्रिया में है। राजगीर स्पर की लंबाई 38.78 किमी एक्सप्रेस वे का एक स्पर राजगीर से संपर्कता उपलब्ध कराएगा। इसकी लंबाई 38,78 किमी है और इसके निर्माण पर 1213.74 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 22.70 किमी लंबा होगा डोभी स्पर आमस-दरभंगा एक्सप्रेस वे का एक स्पर डोभी की संपर्कता के लिए बनाया जाना है। इसकी लंबाई 22.70 किमी है। इसके निर्माण पर 849.34 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस स्पर के एलायनमेंट की स्वीकृति का प्रस्ताव एनएचएआई को समर्पित किया गया है। दरभंगा में भी एक स्पर का निर्माण आमस-दरभंगा एक्सप्रेस वे दरभंगा शहर के बाहर खत्म हो रहा। इस एक्सप्रेस वे को शहर के भीतरी हिस्से से संपर्कता दिए जाने को ले भी एक स्पर का निर्माण कराया जा रहा। इसकी लंबाई 12.70 किमी है और निर्माण पर 866 करोड़ रुपए खर्च होंगे। बक्सर-भागलपुर हाई स्पीड कारिडोर पटना में बिहटा से जुड़ेगा बक्सर-भागलपुर हाई स्पीड काॅरिडोर के नि्र्माण के लिए भी डीपीआर की प्रक्रिया आरंभ है। भागलपुर तक जाने के क्रम में यह बक्सर होते हुए भोजपुर के रास्ते पटना के बिहटा होते हुए रामनगर से मिलेगा। यहां से पटना आउटर रिंग रोड की कनेक्टिवटी है। इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 217 किमी है।  

एलन मस्क पर भड़के BJP सांसद निशिकांत दुबे, Starlink को बताया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

नई दिल्ली  भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी 'स्टारलिंक' की एंट्री को लेकर चल रहे विवाद अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है। ऐसे में बढ़ते विवाद के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एलन मस्क के बयान और आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दो टूक जवाब दिया है। मस्क के आरोपों पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दो टूक कहा कि स्टारलिंक भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर खतरा है और भारत किसी भी दबाव में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति नहीं बदलेगा। निशिकांत दुबे ने क्या कहा? सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सांसद और संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर बनी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि पैनल ने देश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने आने वाली इन चुनौतियों की गहन जांच की है। उन्होंने जोर दिया कि रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और हमारी जांच एजेंसियां इस तरह के खतरों के खतरनाक खेलों से प्रभावित हो रही हैं। मस्क पर निशाना साधते हुए अमेरिका को दी सलाह अपने पोस्ट में मस्क पर निशाना साधते हुए दुबे ने कहा कि उन्हें पहले अपने देश अमेरिका में गरीबों को किफायती दरों पर इंटरनेट देना चाहिए, उसके बाद भारत पर आरोप लगाने चाहिए। दुबे ने दो टूक कहा कि भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक देश है, यह किसी के दबाव या सोशल मीडिया पोस्ट के आगे झुककर अपनी सुरक्षा नीति नहीं बदलता। पैसे के ऊपर देश की सुरक्षा- दुबे इस दौरान दुबे ने साफ किया कि अगर भारत सरकार का फैसला सिर्फ पैसों या मुनाफे पर आधारित होता, तो सुरक्षा एजेंसियों के विरोध के बावजूद वे स्टारलिंक के लिए रेड कारपेट बिछा देते। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2013-14 में मनमोहन सिंह की सरकार के समय भी TRAI को ऐसे खतरों से आगाह किया गया था। अब जानिए एलन मस्क ने क्या आरोप लगाए? गौरतलब है कि इससे पहले एलन मस्क ने आरोप लगाया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी के समर्थकों जैसे प्रभावशाली व्यापारिक समूह अपनी मोनोपॉली बचाने के लिए स्टारलिंक की राह में रोड़ा अटका रहे हैं। मस्क का दावा था कि स्टारलिंक से भारतीय आम नागरिकों को फायदा होगा। भारत सरकार ने मस्क को दिखाया था आईना हालांकि इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार ने साफ किया है कि स्टारलिंक के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है, बल्कि किसी भी कंपनी का कॉमर्शियल ऑपरेशन नियमों और सुरक्षा पर निर्भर करता है। नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026' में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी स्पष्ट किया कि भारत किसी भी सेक्टर में एकाधिकार की अनुमति नहीं देगा।