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लोगों की शिकायत पर एक्शन में डिप्टी CM, सड़क दोबारा बनाने के दिए निर्देश

करीबधाम  ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठ जाना, शिकायत मिलने पर अधिकारियों को फोन लगाकर एक्शन लेना। शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के डेप्युटी सीएम विजय शर्मा का अलग अंदाज देखने को मिला। विजय शर्मा बंदौरा और ठकुराइनटोला गांव का दौरा करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी मांगे और समस्याएं सुनीं और गांव के विकास से जुड़ी मांगों पर गंभीरता से चर्चा की। वहीं, बंदौरा में सड़क की खराब स्थिति की शिकायत सामने आने पर उन्होंने संबंधित अधिकारी को फोन कर सड़क उखाड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए। सड़क उखाड़कर फिर से बनाओ ग्रामीणों से संवाद के दौरान लोगों ने डेप्युटी सीएम विजय शर्मा को बताया कि सड़क के कारण परेशानी हो रही है। इसके बाद उन्होंने मामले में तत्काल एक्शन लिया। बंदौरा में ग्रामीणों ने सड़क की खराब स्थिति की समस्या उप मुख्यमंत्री के सामने रखी। ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद विजय शर्मा ने संबंधित अधिकारी से फोन पर बात की और खराब सड़क को उखाड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए। विकास कार्यों की मिली सौगात ग्राम बंदौरा में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वार्ड क्रमांक 10 में कबीर कुटी निर्माण के लिए 10 लाख रुपये, सामाजिक भवन के लिए 10 लाख रुपये और नवधा मंच निर्माण के लिए 3 लाख रुपये की घोषणा की। इसके अलावा मुक्तिधाम में शेड निर्माण तथा गांव में शेड निर्माण के लिए 18 लाख रुपए देने की घोषणा की। वहीं, ठकुराइनटोला गांव में 7.80 लाख रुपये की लागत से सीसी सड़क, 10 लाख रुपये की लागत से सामाजिक भवन और मुक्तिधाम के लिए 6 लाख रुपये की घोषणा की गई। वहीं, ग्राम नयापारा पंचायत में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा की। इन कार्यों से ग्रामीणों को सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। गांवों के विकास के लिए लगातार हो रहे कार्य ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार गांवों के समग्र विकास और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, धार्मिक पर्यटन और किसानों के हितों को ध्यान में रखकर विभिन्न विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहरी विकास परियोजनाओं पर की आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आंध्र प्रदेश के अमरावती में "आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी" के अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से सुनियोजित शहरीकरण, आधुनिक बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्ण डिजिटल, स्मार्ट और पर्यावरण-अनुकूल एकीकृत टाउनशिप परियोजना का अवलोकन कर इसकी प्रमुख विशेषताओं एवं विकास संबंधी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में इंदौर – उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन परियोजनाओं के लिए की गई पहल और भविष्य में जबलपुर एवं ग्वालियर के लिए तैयार की जा रही योजनाओं का भी उल्लेख किया।  

धान खरीदी में लापरवाही पड़ी महंगी, 25 दिन में काम पूरा नहीं किया तो ₹10 प्रति क्विंटल जुर्माना

रायपुर छत्तीसगढ़ में धान खरीदी और कस्टम मिलिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने सख्त फैसले लिए हैं। धान की साइकिलिंग और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के उद्देश्य से सरकार ने नई धान कस्टम मिलिंग नीति 2026-27 जारी की है। इस बार धान की निगरानी डिजिटल माध्यम से की जाएगी। वहीं, राइस मिलर्स पर देरी करने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार का यह सख्त फैसला बिचौलियों और अवैध गतिविधियों में लगे लोगों को रोकने के लिए लिया गया है। सरकार ने साफ किया है कि सरकारी योजनाओं और समर्थन मूल्य का वास्तविक लाभ केवल प्रदेश के सच्चे अन्नदाताओं तक ही पहुंचे। हर बोरी में क्यूआर कोड नई व्यवस्था के तहत इस बार धान खरीदी में हर एक बोरी पर क्यूआर कोड लगाया जाएगा। इस तकनीकी पहल से धान के बोरे के उत्पादन से लेकर उसके भंडारण और मिलिंग तक की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखी जा सकेगी। इसके साथ ही, धान का परिवहन करने वाले सभी ट्रकों और वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य कर दी गई है, ताकि रास्ते में धान की हेराफेरी या अवैध डायवर्जन नहीं किया जाए। प्रशासनिक अमला और निगरानी टीमें ऑनलाइन माध्यम से इन वाहनों की आवाजाही पर लगातार नजर रखेगीं। राइस मिलर्स के लिए क्या प्रावधान कस्टम मिलिंग की प्रक्रिया को सुचारू और अनुशासित बनाने के लिए राइस मिलों के लिए भी सख्त प्रावधान तय किए गए हैं। नई नीति के अनुसार अब किसी भी राइस मिल को उसकी कुल क्षमता का केवल 75 प्रतिशत धान ही आवंटित किया जाएगा। इससे मिलों पर अनावश्यक दबाव नहीं रहेगा और वे समय पर चावल की डिलीवरी सरकार को दे सकेंगी। 10 रुपये प्रति क्विंटल का जुर्माना इसके अलावा, मिलर्स को धान प्राप्त होने के बाद निर्धारित 25 कार्य दिवसों के भीतर अपना स्टेक का काम पूरा करना होगा। तय समय सीमा में काम पूरा नहीं करने या नियमों का उल्लंघन करने वाले मिलर्स पर 10 रुपये प्रति क्विंटल की दर से जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। पारदर्शिता बढ़ेगी सरकार के इन सख्त और डिजिटल कदमों से न केवल धान खरीदी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर सुधार आएगा, बल्कि राइस मिलों की कार्यप्रणाली में भी पारदर्शिता बढ़ेगी। इन पहलों के जरिए बिचौलियों और धान की अवैध साइकिलिंग पर पूरी तरह लगाम कसेगी, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों पर नकेल कसी जा सकेगी और किसानों का अनाज सुरक्षित रहेगा।

शादी की रस्मों पर विवाद से विवाह शून्य नहीं होता: हाईकोर्ट ने पति की याचिका ठुकराई

बिलासपुर  फेसबुक पर दोस्ती के बाद मंदिर में शादी करने वाले पति ने सात फेरे नहीं होने का हवाला देकर शादी को अमान्य घोषित करने की मांग की थी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी है।जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की बेंच ने कहा कि सिर्फ शादी की रस्में पूरी नहीं होने से विवाह को अमान्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 में शादी को अमान्य घोषित करने के कुछ तय आधार हैं। केवल रस्मों को लेकर विवाद होने पर शादी को शून्य घोषित नहीं किया जा सकता। मामला जांजगीर-चांपा जिले के राहौद के युवक-युवती से जुड़ा है, जिन्होंने 3 फरवरी 2022 को मंदिर में शादी की थी। बाद में पति ने शादी को मानने से इनकार करते हुए दावा किया कि सात फेरे नहीं हुए और दबाव डालकर शादी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। वहीं, पत्नी का कहना था कि शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी और पति भरण-पोषण से बचने के लिए इसे अमान्य घोषित कराना चाहता है। इस मामले में डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया, लेकिन पति की मूल याचिका भी खारिज कर दी। अब जानिए पूरा मामला दरअसल, जांजगीर-चांपा जिले के राहौद के रहने वाले युवक और युवती की पहचान फेसबुक के जरिए हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए। फिर उन्होंने शादी करने का फैसला किया। हालांकि, जब युवक युवती के परिवार वालों से मिला, तो उसने कहा कि वह पहले अपने परिवार की सहमति लेगा। धमकी देकर दस्तावेजों में हस्ताक्षर कराने का आरोप इस दौरान दोनों ने 3 फरवरी 2022 को मंदिर में शादी कर ली और शादी से जुड़े दस्तावेज भी बनवा लिए। लेकिन कुछ समय बाद दोनों के बीच मनमुटाव होने लगा। इसके बाद युवक ने शादी को मानने से इनकार कर दिया। युवक का आरोप था कि युवती ने उसे अपने घर बुलाया और शादी करने के लिए दबाव बनाया। उसने यह भी आरोप लगाया कि आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर शादी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। इसके बाद चिरमिरी के शिव मंदिर में जल्दबाजी में शादी करा दी गई। युवक का कहना था कि शादी के दौरान सात फेरे भी नहीं हुए थे। सात फेरे की रस्में नहीं हुई थीं पूरी युवक का कहना था कि शादी के दौरान हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अग्नि के सामने सात फेरे लेने की रस्म नहीं हुई थी। इसलिए उसने शादी को अमान्य घोषित करने की मांग की। इसके लिए युवक ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी। भरण-पोषण देने से बचने के लिए विवाह शून्य करने की मांग वहीं, युवती ने युवक के आरोपों को गलत बताया। उसका कहना था कि शादी हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के बाद युवक ने उसे पत्नी के रूप में स्वीकार भी किया और दोनों करीब डेढ़ महीने तक साथ रहे। युवती ने आरोप लगाया कि युवक भरण-पोषण देने से बचने के लिए शादी को अमान्य घोषित कराने की कोशिश कर रहा है। फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दी थी अर्जी फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने और सबूत देखने के बाद युवक की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट का कहना था कि सिर्फ सात फेरे नहीं होने से शादी को अमान्य घोषित नहीं किया जा सकता। इसके बाद युवक ने हाईकोर्ट में अपील की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5, 7 और 11 पर विचार किया। कोर्ट ने बताया कि धारा 7 के तहत हिंदू विवाह संबंधित लोगों के रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार होता है। अगर उन रीति-रिवाजों में सात फेरे या अग्नि के सामने सात कदम लेने की रस्म शामिल है, तो सातवां कदम लेने के बाद ही विवाह पूरा माना जाता है। फैमिली कोर्ट ने नियम की अनदेखी की हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने मामले के कानूनी पहलुओं पर ध्यान देने के बजाय शादी की रस्मों और उसकी वैधता पर फैसला दिया था। जबकि, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 11 के तहत यह देखना जरूरी था कि शादी में धारा 5 की शर्तों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। इस कानूनी गलती के कारण हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया। हालांकि, इससे युवक को शादी को अमान्य घोषित कराने में कोई राहत नहीं मिली और उसकी याचिका खारिज कर दी गई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आंध्र प्रदेश में की प्रमुख निवेशकों से भेंट

जीआईएस 2027 के लिये किया आमंत्रित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आंध्र प्रदेश में निवेशकों से मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापना का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा मध्यप्रदेश सरकार की औद्योगिक विकास की प्रोत्साहनकारी नीतियों के कारण निवेशकों द्वारा किए गए निवेश पर उन्हें हर स्थिति में लाभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को आंध्र प्रदेश में निवेशकों से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेश के नए अवसरों और औद्योगिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में हो रहे कार्यों की जानकारी निवेशकों को दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा में बताया कि मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश की व्यापक संभावनाओं और अनुकूल औद्योगिक वातावरण का लाभ सभी को मिल रहा है। राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन की 25 सरलीकृत नीतियां विभिन्न क्षेत्रों में निवेश आने में सहायक बन रही हैं। मध्यप्रदेश में धार जिले में पीएम मित्र पार्क और ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग इकाई में महत्वपूर्ण निवेश अब क्रियान्वयन की ओर है। हाल ही में जबलपुर-इंदौर औद्योगिक कॉरिडोर की योजना तैयार की गई है। यह कॉरिडोर प्रदेश के बड़े व्यापक भू-भाग की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की विजयवाड़ा में सुप्रसिद्ध अभिनेता श्री विजय देवरकोंडा एवं अभिनेत्री श्रीमती रश्मिका मंदाना से भी भेंट हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश फिल्म शूटिंग के क्षेत्र में देश में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। प्रदेश की फिल्म-फ्रेंडली नीतियां, फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करने में सफल हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को जीआईएस : 2027 का आमंत्रण देते हुए आयोजन की रूपरेखा की जानकारी दी जिसमें भोपाल में विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख उद्योगपति और निवेशक एकत्र होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट हुई थी जिसमें 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए थे। इन प्रस्तावों में से एक तिहाई प्रस्तावों को धरातल पर उतारा जा चुका है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। निवेशकों से की वन-टू-वन चर्चा टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मोहन स्पिनटेक्स इंडिया लिमिटेड के संस्थापक एवं प्रबंध संचालक श्री वी. सुधाकर चौधरी तथा श्री अनंत लक्ष्मी स्पिनिंग मिल्स के अध्यक्ष श्री सामिनेनी कोटेश्वर राव से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने दोनों उद्योगपतियों को धार स्थित पीएम मित्रा पार्क और प्रदेश के कपास उत्पादक क्षेत्रों में इकाइयां स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया। चर्चा में स्पिनिंग, होम टेक्सटाइल, बुनाई और प्रसंस्करण इकाइयों के लिए प्रदेश में उपलब्ध अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। श्री चौधरी के साथ कृभको के अध्यक्ष के रूप में जैव-उर्वरक, कृषि आदान और कृषि लॉजिस्टिक्स में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में तेनाली डबल हॉर्स के प्रबंध संचालक श्री मोहन श्याम प्रसाद के साथ प्रदेश के दलहन उत्पादक क्षेत्रों के समीप दाल मिल स्थापित करने की संभावनाओं पर संवाद हुआ। कॉन्टिनेंटल कॉफी के महाप्रबंधक श्री मीनावल्ली बलराम से उत्तर और मध्य भारत के बाजारों में आपूर्ति के लिए मध्यप्रदेश में कॉफी ब्लेंडिंग, पैकिंग एवं वितरण केंद्र विकसित करने पर विचार-विमर्श किया गया। इंजीनियरिंग क्षेत्र में क्रिस्टना इंजीनियरिंग वर्क्स के संचालक श्री बी. राजा शेखर के साथ प्रदेश के सीमेंट, खनन और विद्युत उत्पादन क्षेत्रों की औद्योगिक आवश्यकताओं पर चर्चा हुई। इन उद्योगों के समीप कास्टिंग, मशीनिंग, कलपुर्जों और सर्विस सेंटर से संबंधित इकाइयों की स्थापना की संभावनाओं पर विचार किया गया। रामकोर ग्रुप के अध्यक्ष श्री के.वी.एस. प्रकाश राव से प्रदेश में वाणिज्यिक वाहनों और ट्रैक्टरों के डीलर नेटवर्क के विस्तार तथा ऑटो-सर्विस क्षेत्र में कौशल विकास पर चर्चा हुई। सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में निवेश को लेकर फॉर्च्यून मुरली ग्रुप के प्रबंध संचालक श्री मुत्तवरपु मुरली (कृष्णा) से संवाद हुआ। मुख्यमंत्री ने उज्जैन, इंदौर और ओंकारेश्वर में होटल व्यवसाय एवं पर्यटन सुविधाओं के विकास की संभावनाओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधोसंरचना और नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। ऋत्विक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर एवं लोकसभा सांसद डॉ. सी.एम. रमेश तथा कंपनी के कार्यकारी संचालक श्री सी.एम. राजेश के साथ प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। कंपनी अधोसंरचना विकास, इंजीनियरिंग एवं निर्माण, सिंचाई, बांध निर्माण और नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में कार्यरत है। बोंडाडा ग्रुप के अध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक डॉ. बोंडाडा राघवेंद्र राव के साथ भी प्रदेश में निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। समूह नवकरणीय ऊर्जा, सोलर परियोजनाओं, टेलीकॉम और रेलवे अधोसंरचना के क्षेत्रों में कार्य करता है। नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के प्रमोटर एवं संचालक श्री सी. गोविंद विश्वेश से अधोसंरचना और नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं पर चर्चा हुई। सीवीआर समूह से जुड़ी नवयुग इंजीनियरिंग एवं चिंता ग्रीन एनर्जी कंपनियां पुल, टनल, बंदरगाह, सिंचाई, सौर ऊर्जा, बैटरी भंडारण और पंप्ड स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।  

नारी शक्ति को ‘स्टार्ट इन यूपी’ का संबल, योगी सरकार ने स्वीकृत की ग्रांट, पहली किस्त मिली

नवरात्र विशेष-8: स्वावलंबन की शक्ति झांसी नवरात्र के पावन दिनों में जब घर-घर शक्ति स्वरूपा देवी की आराधना हो रही है, तब झांसी की एक मां समाज को नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण दिखा रही हैं। बेटे की एक परेशानी को उन्होंने सिर्फ सुना ही नहीं, बल्कि उसे समाधान और फिर कारोबार की शक्ल दे दी। यह कहानी है अनुराधा मेहरोत्रा की, जो आज स्टार्टअप 'हॉस्टल्स नियर मी' की मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) हैं। इस स्टार्टअप को योगी सरकार की 'स्टार्ट इन यूपी' पहल के तहत 10 लाख की ग्रांट भी स्वीकृत हुई है। एक परेशानी, जो बन गई प्रेरणा कहानी की शुरुआत बेहद आम-सी समस्या से हुई। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान बेटे आर्यमन को रहने के लिए हॉस्टल तलाशने में खासी दिक्कत आई। यह हर साल हजारों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की भी परेशानी है। अनजान शहर, सीमित जानकारी और भरोसेमंद विकल्पों की कमी, इन सबके बीच सही ठिकाना तलाशना आसान नहीं होता। आर्यमन ने अपनी इस परेशानी और उसके समाधान का आइडिया मां अनुराधा के साथ साझा किया। यहीं मां ने वह भूमिका निभाई, जो हर बेटे को चाहिए। उन्होंने न आइडिया को हल्के में लिया और न बेटे के उत्साह को। मां-बेटे ने मिलकर इसे हकीकत में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया। यही विचार आगे चलकर 'हॉस्टल्स नियर मी' के रूप में सामने आया। मां ने संभाली कमान, बनीं सीओओ अनुराधा केवल प्रेरणा देने तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने स्टार्टअप में मुख्य परिचालन अधिकारी की जिम्मेदारी संभाली और इसके संचालन व विकास में सक्रिय भूमिका निभाई। वह कहती हैं कि कॉलेज के दिनों में बेटे ने जो समस्या बताई, उसी से इस विचार का जन्म हुआ। आज वह एक तरफ बेटे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं, तो दूसरी तरफ कंपनी की रोजमर्रा की कमान भी संभाल रही हैं। एक मां के लिए अपने बच्चे का सहारा बनना स्वाभाविक है, लेकिन उस सहारे को कारोबारी नेतृत्व में बदल देना बड़ी बात है। नवरात्र में जिस शक्ति की उपासना की जाती है, वह यही है- परिवार को थामने वाली, और जरूरत पड़ने पर नई राह बनाने वाली। इनक्यूबेशन सेंटर से ग्रांट तक का सफर 'हॉस्टल्स नियर मी' बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के इनक्यूबेशन सेंटर में पंजीकृत है। कंपनी के रूप में इसका रजिस्ट्रेशन वर्ष 2024 में हुआ। यह प्लेटफॉर्म कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से हॉस्टल तलाशने में मदद करता है। अब हॉस्टल खोजने के लिए गली-गली भटकने या अधूरी जानकारी पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो रही है। वर्ष 2025 में 'स्टार्ट इन यूपी' के तहत इस स्टार्टअप के लिए 10 लाख की ग्रांट स्वीकृत हुई और इसकी पहली किस्त भी प्राप्त हो चुकी है। अनुराधा के मुताबिक प्रदेश सरकार की ओर से स्टार्टअप की सराहना की गई है, जो टीम के लिए बड़ा संबल है। छह शहरों तक पहुंचा स्टार्टअप आज यह प्लेटफॉर्म सिर्फ झांसी तक सीमित नहीं है। लखनऊ, जयपुर, ग्वालियर, इंदौर और मेरठ जैसे शहरों में भी विद्यार्थी हॉस्टल तलाशने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। एक छोटे शहर से शुरू हुआ विचार अब कई राज्यों के विद्यार्थियों के काम आ रहा है। फिलहाल यह सुविधा वेबसाइट के माध्यम से उपलब्ध है। ग्रांट मिलने के बाद स्टार्टअप में नए फीचर जोड़ने की तैयारी है। आने वाले समय में इसे मोबाइल ऐप के रूप में भी उपलब्ध कराने की योजना है। नवरात्र का संदेश भी यही है कि शक्ति केवल पूजा की चीज नहीं, जीने और करने का तरीका है। झांसी की इस मां ने दिखा दिया कि जब महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व संभालती हैं, तो घर के साथ-साथ समाज और अर्थव्यवस्था भी आगे बढ़ती है। 'हॉस्टल्स नियर मी' की यह यात्रा अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन एक मां की हिम्मत और बेटे के आइडिया ने जो नींव रखी है, वह आने वाले समय में कई और परिवारों को प्रेरित करेगी।

भोपाल में बच्ची की हत्या के बाद भड़का गुस्सा, लोगों ने थाने का किया घेराव; आरोपी को सौंपने की मांग

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ एरिया में 13 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या की घटना के बाद शहर में भारी आक्रोश फैल गया है। शनिवार को बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने बैरागढ़ से भोपाल और सीहोर की ओर जाने वाले मुख्य मार्गों को पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे करीब दो किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और सैकड़ों लोग जाम में फंसे रहे। भोपाल में 12 साल की बच्ची की निर्मम हत्या के बाद शनिवार को 3 घंटे विरोध प्रदर्शन हुआ। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए।उनका कहना था कि पुलिस आरोपी मोबिन को फांसी दे या हमें सौंपे। हम उसे सजा देंगे। भीड़ ने थाने में जबरदस्ती घुसने का प्रयास किया। इसके लिए उन्होंने थाने के गेट पर धक्का-मुक्की भी की। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। वहीं वारदात वाली रात का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें आरोपी बच्ची को ले जाते हुए और कुछ देर बाद अकेले निकलते हुए दिख रहा है। रात से लापता, सुबह खंडहर में मिला शव बता दें बैरागढ़ में 15 अक्टूबर यानी गुरुवार रात से लापता बच्ची का शव 16 अक्टूबर को कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे खंडहर में मिला था। उसके सामने के दो दांत टूटे हुए थे। मुंह में कपड़ा ठुंसा हुआ था। शरीर के निचले हिस्से पर कपड़े नहीं थे। शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा, गला घोंटने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया था। बताया जा रहा है कि उसने भी जुर्म कबूल कर लिया। थाने का घेराव के बाद अंदर घुसने का प्रयास गुस्साई भीड़ ने बैरागढ़ थाने का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आरोपी को उनके हवाले किया जाए, वे उसे खुद सजा देंगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने थाने के दोनों मुख्य गेट बंद कर दिए और भारी पुलिस बल तैनात किया गया। इस दौरान भीड़ ने थाने के अंदर जबरदस्ती घुसने का भी प्रयास किया, जिसे पुलिस बल ने बाहर ही रोक लिया। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास कर रही है कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराकर आरोपी को सख्त सजा दिलाई जाएगी, लेकिन प्रदर्शनकारी मानने को तैयार नहीं हैं। बुलडोजर कार्रवाई के साथ फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग सड़क पर डटे प्रदर्शनकारियों और हिंदू संगठनों ने मांग की है कि आरोपी के अवैध मकान पर तुरंत बुलडोजर चलाकर उसे जमींदोज किया जाए। इसके साथ ही इस सनसनीखेज मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्द से  प्रदर्शनकारियों की यह भी मांग है कि पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर आकर पीड़ित परिवार से मिलें और लिखित आश्वासन दें। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। 2 किमी तक जाम रहा भोपाल-सीहोर रोड प्रदर्शनकारियों ने भोपाल-सीहोर रोड पर जाम लगा दिया था। प्रदर्शनकारी हटने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि आरोपी को बीच सड़क पर फांसी दी जाए। उसके मकान पर बुलडोजर चलाया जाए। जाम के कारण करीब 2 किलोमीटर तक वाहनों की कतार लगी रही। एसीपी बोले- विस्तृत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद धाराएं बढ़ाएंगे मामले में एसीपी रत्नेश तोमर का कहना था कि पुलिस ने हत्या और बहला-फुसलाकर ले जाने सहित गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर आरोपी को पकड़ लिया है। शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। विस्तृत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने पर अतिरिक्त कानूनी धाराएं जोड़ी जाएंगी। क्या है पूरा मामला? गौरतलब है कि बैरागढ़ में कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित एक खंडहरनुमा इमारत में 13 वर्षीय बच्ची का शव बरामद हुआ था। मृतका के सामने के दो दांत टूटे हुए थे, मुंह में कपड़ा ठुंसा हुआ था और शरीर के निचले हिस्से पर कपड़े नहीं थे। प्रारंभिक शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा और गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई है। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को दबोच लिया है, लेकिन जनता का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है और क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

UP Election 2027: BJP की वापसी या सत्ता परिवर्तन? चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में साल 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से जोड़-तोड़ और सियासी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है. चुनाव से ठीक पहले सूबे की हवा किस तरफ बह रही है और जनता के मन में क्या चल रहा है, इसे जानने के लिए न्यूज18 ने मेगा सर्वे किया है. इस मेगा सर्वे के आंकड़े राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ाने वाले हैं. सर्वे में जनता से सीधा सवाल किया गया कि उत्तर प्रदेश में अगली सरकार किसकी बनेगी, जिसके नतीजों ने तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है।  जनता के बीच जाकर किए गए इस सबसे बड़े ओपिनियन पोल में जब यह पूछा गया कि आगामी चुनाव में किसकी सरकार बनेगी, तो मतदाताओं ने खुलकर अपनी राय रखी. सर्वे के आंकड़े इस प्रकार हैं:     बीजेपी गठबंधन: राज्य के 67 प्रतिशत लोगों ने भरोसा जताया है कि उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी।      सपा-कांग्रेस गठबंधन: मुख्य विपक्षी दल के रूप में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को 26 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिलता नजर आ रहा है.     बहुजन समाज पार्टी (BSP): मायावती के नेतृत्व वाली बसपा को इस सर्वे में 5 प्रतिशत लोगों का साथ मिला है।      अन्य और कह नहीं सकते: अन्य दलों के खाते में 1 प्रतिशत और कोई भी स्पष्ट राय न रखने वाले ‘कह नहीं सकते’ वर्ग में भी 1 प्रतिशत लोग शामिल रहे।  युवाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा सर्वे में उम्र के हिसाब से 26 से 35 साल के लोगों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 36% रही. 36 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के 29% और 18 से 25 साल के 17% लोगों से बातचीत की गई. 46 से 55 वर्ष के लोगों की हिस्सेदारी 11%, 56 से 65 वर्ष की 5% और 66 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 1% बताई गई. लिंग के आधार पर सर्वे में 76% पुरुष और 24% महिलाएं शामिल थीं. इस अनुपात को ध्यान में रखना जरूरी है, क्योंकि सर्वे में दोनों समूहों की भागीदारी बराबर नहीं थी।  क्यों विश्वसनीय है यह सर्वे? इस मेगा सर्वे के दायरे और इसकी पारदर्शिता का अंदाजा इसके सैंपल साइज से लगाया जा सकता है. यह सर्वे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में किया गया।  भागीदारी: सर्वे टीमों ने घर-घर जाकर कुल 30,925 लोगों से आमने-सामने बात की, जिसमें गांव और शहर दोनों के 18 वर्ष से अधिक आयु के लोग शामिल रहे।  डेमोग्राफिक्स: इसमें 18 से 66+ वर्ष तक के आयु वर्ग, 76% पुरुष और 24% महिलाओं के साथ-साथ व्यापारी, किसान, छात्र, कामगार, बेरोजगार और नौकरीपेशा हर वर्ग की राय ली गई।  सामाजिक समीकरण: सर्वे में विभिन्न जातियों (OBC 45.8%, सामान्य 35.8%, SC 14.7%, ST 2.4%) और प्रमुख धर्मों के मतदाताओं को शामिल कर पूरी तरह संतुलित ओपिनियन पोल तैयार किया गया। 

‘हर दावे के पीछे तथ्य, साक्ष्य और तर्क जरूरी’, लॉ स्टूडेंट्स से बोले CM योगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने विकसित भारत की परिकल्पना को एक मुकदमे के उदाहरण से समझाया. इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर केस नंबर 2047 हो और उसका विषय विकसित भारत हो, तो इस मामले में 140 करोड़ भारतीय याचिकाकर्ता होंगे. उनकी ओर से दलील रखने वाले अधिवक्ता को हर दावे के समर्थन में तथ्य, साक्ष्य और तर्क पेश करने होंगे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की बात करते समय यह बात ध्यान में जरूर रखना होगा कि देश के भविष्य से जुड़े हर दावे को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर साबित किया जाना भी जरूरी है. इसके लिए ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।  सच बोलना और लगातार अध्ययन करना जरूरी इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय शिक्षा परंपरा के बारे में बोलते हुए कहा कि सत्यं वद: धर्मं चर: स्वाध्यायान्मा प्रमदः. इसका अर्थ है सत्य बोलना, धर्म का आचरण करना और अध्ययन में कभी आलस्य नहीं करना. उन्होंने कहा कि किसी अधिवक्ता के लिए इससे बेहतर कार्य-निर्देश नहीं हो सकता. मुख्यमंत्री ने दीक्षांत समारोह की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र भले ही नए गाउन पहनते हों, लेकिन भारत का दीक्षांत उपदेश हजारों वर्ष पुराना है. उन्होंने कहा कि गुरुकुलों और विश्वविद्यालयों में इस शिक्षा को लंबे समय से जीवन का हिस्सा बनाया जाता रहा है।  आपातकाल और न्यायपालिका की भूमिका का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में देश के लोकतांत्रिक इतिहास और न्यायपालिका की भूमिका का भी उल्लेख किया. उन्होंने 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले का जिक्र किया, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया गया था. इसके 13 दिन बाद, 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया गया था. उन्होंने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन इतिहास में उनकी असहमति का महत्व बना रहा. योगी आदित्यनाथ ने साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें न्यायमूर्ति खन्ना की असहमति को सही माना गया था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि 1975 के दौर ने देश को यह समझाया कि ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून का शासन और ‘रूलर ऑफ लॉ’ यानी शासक का कानून अलग-अलग अवधारणाएं हैं. उनके मुताबिक, लोकतंत्र में कानून का शासन सर्वोपरि होना चाहिए।  उत्तर प्रदेश की छवि और निवेश पर भी बोले योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की पहले की छवि का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 10 साल पहले राज्य में निवेश की बात करने पर लोग सवाल उठाते थे. उस समय कानून-व्यवस्था, कनेक्टिविटी, निर्यात और स्पष्ट नीतियों को लेकर चिंताएं जताई जाती थीं. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में रखा जाता था और लोगों के मन में यह धारणा बन गई थी कि राज्य में सुधार नहीं हो सकता. मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में भी उन्होंने ऐसी सोच देखी थी, जहां उत्तर प्रदेश की स्थिति को लेकर निराशा जताई जाती थी। 

यूपी के 75 जिलों में 124 वन स्टॉप सेंटर, 3.18 लाख मामलों में महिलाओं को मिली मदद

बंदिशों से बेखौफ उड़ान तक वन स्टॉप सेंटर से संवर रही महिलाओं की जिंदगी, मुश्किलों को मात देकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रहीं बेटियां लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को मजबूत करने के लिए संचालित वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं को सुरक्षा, परामर्श और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। लखनऊ की तीन महिलाओं की कहानियां इस पहल के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती हैं। पारिवारिक बंदिशों से जूझ रही एक युवती ने काउंसलिंग के बाद पढ़ाई जारी रखी और आज उच्च पद पर सेवाएं देकर जिम्मेदारी निभा रही है। वहीं, शोषण की शिकार एक बालिका ने मुश्किलों से उबरकर प्रतिष्ठित होटल में नौकरी हासिल की। घरेलू प्रताड़ना से प्रभावित एक अन्य महिला भी शिक्षा और रोजगार के सहारे आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही है। काउंसलिंग से बदली परिवार की सोच महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि लखनऊ की 31 वर्षीय युवती ने वन स्टॉप सेंटर को ईमेल भेजकर जानकारी दी कि परिजन उन्हें उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से रोक रहे हैं। पारिवारिक तनाव के बीच सेंटर की टीम ने उनके घर पहुंचकर परिजनों से बातचीत की। इसके बाद सुरक्षित और गोपनीय माहौल में काउंसलिंग कराई गई। टीम के समझाने पर परिवार ने युवती को पढ़ाई जारी रखने की स्वतंत्रता दी। वन स्टॉप सेंटर पर काउंसलिंग से युवती को मुश्किल परिस्थितियों से उबरकर आगे बढ़ने का हौसला मिला। उसने अपनी पढ़ाई पूरी की और प्रतिष्ठित पद पर सेवाएं देकर नई मिसाल पेश कर रही है। शोषण से निकलकर होटल में बनाई पहचान लखनऊ की एक बालिका ने 16 वर्ष की उम्र में वन स्टॉप सेंटर पहुंचकर बचपन से हो रहे पारिवारिक शोषण की जानकारी दी। सेंटर ने उसे काउंसलिंग और संरक्षण उपलब्ध कराने के साथ कानूनी कार्रवाई में सहयोग किया। बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसे राजकीय संरक्षण में रखा गया और शिक्षा जारी रही। 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उसे बेंगलुरु के इको संस्थान में होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिलाया गया। आज वह लखनऊ के होटल में नौकरी कर रही है। घरेलू प्रताड़ना से मुक्ति, अब पढ़ाई और नौकरी लखनऊ की एक अन्य 31 वर्षीय महिला ने शिकायत की कि पति उसे बंधक बनाकर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना दे रहा है। वन स्टॉप सेंटर की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित निकाला। सेंटर में 12 दिन के अस्थायी आश्रय के दौरान काउंसलिंग की गई। महिला को उसका विवाह संबंधी सामान वापस दिलाने और सुरक्षित मायके पहुंचाने में भी मदद मिली। अब वह स्वतंत्र रूप से रहकर पढ़ाई और नौकरी कर रही है। प्रदेश के 75 जिलों में 124 केंद्र, 3.18 लाख मामलों में मदद महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित वन स्टॉप सेंटर योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी 75 जिलों में 124 केंद्र संचालित हैं। इनके माध्यम से अब तक करीब 3,18,500 मामलों में महिलाओं और बालिकाओं को सहायता दी गई है। केंद्रों पर अस्थायी आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, परामर्श, विधिक मदद और पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जाती है।