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आवासीय निर्माण के नियम बदले, इंडस्ट्रियल एरिया में सिर्फ सिंगल-डबल बेडरूम फ्लैट बनेंगे

भोपाल   राज्य सरकार (MP Govt) ने इंडस्ट्रियल एरिया (Industrial Area) में रेजिडेंशियल निर्माण और इंडस्ट्रियल जमीन (industrial land) के उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इंडस्ट्रियल पॉलिसी एवं इन्वेस्टमेंट प्रोत्साहन विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, अब औद्योगिक क्षेत्रों में स्वतंत्र रेजिडेंशियल प्लॉट, रो-हाउस और प्लॉट आधारित रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को विकसित करने की अनुमति नहीं मिलेगी।  केवल बहुमंजिला और ग्रुप हाउसिंग को मिलेगी मंजूरी नए नियमों के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों के भीतर सिर्फ बहुमंजिला फ्लैट या ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स ही तैयार किए जा सकेंगे। इनमें एकल व दोहरे शयनकक्ष (सिंगल/डबल बेडरूम) वाली आवासीय इकाइयों के साथ-साथ हॉस्टल और उनसे जुड़ी सामाजिक-सामुदायिक सुविधाएं विकसित करने का प्रावधान रखा गया है। इसका सीधा उद्देश्य कम जगह में अधिक से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों के रहने की सुचारू व्यवस्था बनाना है। पुराने निर्माण और चालू प्रोजेक्ट्स पर नहीं पड़ेगा असर यह नियम उन जमीनों पर प्रभावी होगा जो आवासीय उपयोग के लिए आरक्षित हैं, साथ ही औद्योगिक इकाइयों को कर्मचारियों के लिए कैप्टिव आवासीय परिसरों हेतु दी जाने वाली भूमि पर भी लागू होगा। किसी भी परियोजना को शुरू करने से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति अनिवार्य होगी। निर्माण के दौरान मास्टर प्लान, भवन उपविधियों, पर्यावरण तथा अग्निशमन संबंधी सभी दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूर्व से जारी आवासीय योजनाओं और पुराने बने मकानों पर इन नए नियमों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कलेक्टर गाइडलाइन से तय होगा जमीन का मूल्य शासन ने औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि का मूल्य निर्धारण करने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया है। ग्रामीण व शहरी इलाकों में विकसित या विकसित होने वाले औद्योगिक क्षेत्रों की भूमि का मूल्य संबंधित क्षेत्र की असिंचित कृषि भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन दर को 0.6 से विभाजित कर निकाला जाएगा। किसी भी परिस्थिति में जमीन की न्यूनतम कीमत 250 रुपये प्रति वर्गमीटर से कम नहीं होगी। यदि गणना में दर इससे कम आती है, तो एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक को संचालक मंडल की पूर्व अनुमति से दरें बढ़ाने का अधिकार होगा। अतिरिक्त भूमि पर नहीं मिलेगी रियायत निवेश के आधार पर तय सीमा से अधिक जमीन लेने पर अतिरिक्त भू-भाग पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। उदाहरण स्वरूप, यदि कोई कंपनी संयंत्र एवं मशीनरी में 200 करोड़ रुपये का निवेश करती है और उसे 25 हेक्टेयर भूमि मिलती है, तो प्रीमियम छूट का लाभ केवल 20 हेक्टेयर पर ही मिलेगा। शेष 5 हेक्टेयर पर सामान्य दरें लागू होंगी। नियमों में 40 हेक्टेयर तक भूमि आवंटन पर प्रीमियम गणना के समय 50% तक छूट का प्रावधान शामिल है। अनुपयोगी जमीन के हस्तांतरण के कड़े नियम यदि किसी औद्योगिक इकाई के पास आवंटित जमीन का कोई हिस्सा अनुपयोगी पड़ा है, तो उसे शर्तों के अधीन पृथक कर स्थानांतरित किया जा सकेगा। इसके लिए अनुपयोगी हिस्सा कुल आवंटित भूमि का अधिकतम 50% या कम से कम 5,000 वर्गमीटर होना चाहिए, जहां स्वतंत्र पहुंच मार्ग की उपलब्धता अनिवार्य है। हस्तांतरण से पूर्व आवंटी को भू-भाटक, संधारण शुल्क सहित सभी बकायों का भुगतान करना होगा तथा विधिक समर्पण दस्तावेज पंजीकृत कराने होंगे। अधिकारियों के प्रशासनिक अधिकार तय प्रशासनिक पारदर्शी व्यवस्था हेतु भूमि और भवनों के आवंटन के अधिकार क्षेत्र भी निर्धारित कर दिए गए हैं। औद्योगिक भवनों के आवंटन का अधिकार क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक को सौंपा गया है। आवासीय तथा व्यावसायिक भूमि आवंटन में क्षेत्रीय कार्यकारी संचालक 10,000 वर्गमीटर तक की सीमा तक फैसला ले सकेंगे, जबकि इससे अधिक भूमि के आवंटन का निर्णय प्रबंध संचालक के स्तर से होगा। इसके अतिरिक्त, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर भी औद्योगिक आवास योजनाएं शुरू करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। इसके अलावा आवासीय भूखंडों का उप-विभाजन भी प्रतिबंधित रहेगा। सिर्फ फ्लैट और हाइराइज बिल्डिंग्स को मंजूरी नई व्यवस्था के तहत इंडस्ट्रियल एरिया में केवल फ्लैट आधारित और हाइराइज रेजिडेंशियल बिल्डिंगस विकसित की जा सकेंगी।  इनमें एक और दो बेडरूम वाले फ्लैट के साथ छात्रावास और जरूरी सामाजिक सुविधाओं के निर्माण का प्रावधान किया गया है। पुराने रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर नहीं पड़ेगा असर सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए नियम सिर्फ भविष्य में शुरू होने वाले प्रोजेक्ट्स पर लागू होंगे।  पहले से संचालित रेजिडेंशियल स्कीम और अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। निर्माण से पहले अधिकारी की मंजूरी जरूरी नए दिशा-निर्देश नोटिफाइड रेजिडेंशियल लेंड के साथ इंडस्ट्रियल यूनिट्स को आवंटित जमीन पर कर्मचारियों के लिए विकसित की जाने वाली कैप्टिव रेजिडेंशियल सुविधाओं पर भी लागू होंगे।  प्रत्येक परियोजना के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा निर्माण कार्यों में मास्टर प्लान, विकास योजना, भवन निर्माण नियमों, भूमि आवंटन की शर्तों, अग्नि सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी मानकों का पालन करना होगा। जमीन की कीमत ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम नहीं सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि के मूल्य निर्धारण का आधार भी तय किया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकसित या विकसित किए जाने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन का मूल्य संबंधित क्षेत्र की असिंचित कृषि भूमि के लिए निर्धारित कलेक्टर गाइडलाइन को 0.6 से भाग देकर निकाला जाएगा। हालांकि, किसी भी स्थिति में भूमि का मूल्य ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम नहीं होगा। यदि औद्योगिक क्षेत्र में तय गणना के आधार पर भूमि का मूल्य ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम आता है, तो एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक को संचालक मंडल की अनुमति से मूल्य बढ़ाने का अधिकार होगा। अतिरिक्त क्षेत्रफल पर कोई छूट नहीं निर्धारित निवेश सीमा से अधिक भूमि के लिए आवेदन करने पर अतिरिक्त क्षेत्रफल पर छूट नहीं मिलेगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई इकाई संयंत्र और मशीनरी में ₹200 करोड़ का निवेश करती है और उसे 25 हेक्टेयर जमीन आवंटित होती है, तो 20 हेक्टेयर पर ही छूट मिलेगी। बाकी 5 हेक्टेयर पर छूट लागू नहीं होगी। नियमों में प्रीमियम की गणना के दौरान 40 हेक्टेयर तक भूमि आवंटन पर भूमि के मूल्य में 50% छूट का भी उल्लेख है। अन्य औद्योगिक प्रयोजनों के लिए प्रीमियम की गणना में भी भूमि के मूल्य पर 50% छूट का प्रावधान दिया गया है।

IRCTC Travel Insurance: 45 पैसे में मिलेगा ₹10 लाख तक का कवर, जानें कैसे उठाएं लाभ

 नई दिल्ली ट्रेन का टिकट बुक करते समय अगर आप 500, 1000 या उससे भी ज्यादा रुपये खर्च कर रहे हैं, तो क्या सिर्फ 45 पैसे बचाने के लिए एक जरूरी सुविधा छोड़ देंगे? आईआरसीटीसी (IRCTC) के जरिए ऑनलाइन टिकट बुक करते समय यात्रियों को यात्रा बीमा लेने का विकल्प मिलता है. यह अनिवार्य नहीं है, यानी बीमा लेना या नहीं लेना पूरी तरह यात्री की मर्जी पर निर्भर करता है. लेकिन किसी गंभीर रेल दुर्घटना में यही छोटी-सी रकम यात्री या उसके परिवार के लिए बड़ी आर्थिक मदद का जरिया बन सकती है।  मौजूदा ऑनलाइन टिकट बीमा व्यवस्था के तहत पात्र यात्री की दुर्घटना में मौत या स्थायी रूप से पूरी तरह दिव्यांग होने पर 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिल सकता है. स्थायी आंशिक दिव्यांगता, अस्पताल में इलाज और मृतक के पार्थिव शरीर को ले जाने के खर्च के लिए भी बीमा लाभ का प्रावधान है. हालांकि, बीमा का भुगतान तभी होगा, जब घटना पॉलिसी के दायरे में आती हो और उसकी सभी शर्तें पूरी होती हों।  काउंटर टिकट पर भी है ये सुविधा? अब तक आईआरसीटीसी ऐप से ऑनलाइन टिकट बुकिंग में यात्रियों को यात्रा बीमा लेने का विकल्प मिलता रहा है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे बोर्ड को 27 अक्टूबर 2026 से रेलवे स्टेशनों के ​रिजर्वेशन काउंटरों से टिकट खरीदने वाले यात्रियों तक भी बीमा सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया है. इसका उद्देश्य स्टेशन के टिकट काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को भी यात्रा बीमा के दायरे में लाना है।  सिर्फ 45 पैसे में क्या-क्या मिलता है? आईआरसीटीसी ऐप से ई-टिकट बुक करते समय यात्रियों को बीमा का विकल्प दिया जाता है. इसका प्रीमियम टैक्स सहित प्रति यात्री 45 पैसे है. यात्री चाहे तो इसे चुन सकता है या बिना बीमा के भी टिकट बुक कर सकता है. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बीमा का विकल्प चुनना और बीमा के लिए पात्र होना दो अलग बातें हैं. बीमा लेने के बाद भी मुआवजा घटना की प्रकृति, नुकसान और पॉलिसी की शर्तों के आधार पर ही मिलता है. अगर आप ट्रेन से नियमित सफर करते हैं, तो टिकट बुक करते समय इस विकल्प को नजरअंदाज करने के बजाय इसकी शर्तें समझना फायदेमंद हो सकता है. बहुत कम प्रीमियम में मिलने वाला यह कवर किसी बड़ी दुर्घटना की स्थिति में परिवार को आर्थिक सहारा दे सकता है।  ट्रेन हादसे में कितना मुआवजा मिलेगा? मौजूदा आईआरसीटीसी ऑनलाइन टिकट ट्रैवल इंश्योरेंस में अलग-अलग तरह के दावों के लिए अधिकतम बीमा लाभ इस प्रकार बताया गया है।  बीमा दावे का प्रकार     अधिकतम बीमा राशि दुर्घटना में यात्री की मौत     ₹10 लाख स्थायी पूर्ण दिव्यांगता     ₹10 लाख स्थायी आंशिक दिव्यांगता     ₹7.5 लाख तक दुर्घटना में घायल होने पर अस्पताल का खर्च     ₹2 लाख तक मृतक के पार्थिव शरीर को ले जाने का खर्च     ₹10,000 तक ध्यान दें: ये अधिकतम बीमा राशियां हैं, हर मामले में मिलने वाली तय रकम नहीं. वास्तविक भुगतान नुकसान की स्थिति और बीमा पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक तय होगा।  यात्री की मौत होने पर परिवार को कैसे मिलेगी मदद? किसी रेल दुर्घटना में यात्री की मौत होने पर बीमा की रकम नामित व्यक्ति यानी नॉमिनी या पात्र कानूनी वारिस को मिल सकती है. इसलिए टिकट बुक करते समय बीमा का विकल्प चुनने के साथ उससे जुड़ी जानकारी और नॉमिनी का विवरण भी ध्यान से भरना चाहिए. दावा करने के लिए आम तौर पर ये दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:     बीमा का दावा फॉर्म     रेलवे प्राधिकरण की दुर्घटना संबंधी रिपोर्ट     मृत यात्री की पहचान से जुड़ी रिपोर्ट     नॉमिनी के पहचान पत्र     बैंक खाते का विवरण और कैंसल्ड चेक अगर बीमा में नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं है, तो कानूनी वारिस होने का प्रमाण, उत्तराधिकार संबंधी आदेश या पात्रता साबित करने वाले अन्य दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।  दिव्यांगता या इलाज के लिए कितना मुआवजा? बीमा का लाभ केवल यात्री की मौत होने पर ही नहीं मिलता. पॉलिसी की शर्तें पूरी होने पर स्थायी दिव्यांगता और दुर्घटना में घायल होने के बाद अस्पताल में इलाज के खर्च के लिए भी दावा किया जा सकता है. स्थायी दिव्यांगता के मामले में रेलवे की रिपोर्ट, डॉक्टर की रिपोर्ट, दिव्यांगता प्रमाणपत्र, प्राथमिकी (FIR) की प्रति और संबंधित चिकित्सा रिकॉर्ड मांगे जा सकते हैं।  अस्पताल में इलाज के मामले में रेलवे प्राधिकरण की रिपोर्ट, अस्पताल से छुट्टी मिलने का सारांश, इलाज के मूल बिल, भुगतान की रसीदें, डॉक्टर की पर्चियां और जांच रिपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है. दस्तावेजों की अंतिम सूची बीमा कंपनी और दावे की प्रकृति पर निर्भर करेगी. इसलिए दावा करने से पहले संबंधित बीमा कंपनी से जरूरी कागजात की पुष्टि कर लें।  बीमा क्लेम करने के लिए कितना समय मिलता है? मौजूदा आईआरसीटीसी ई-टिकट बीमा पॉलिसी के मुताबिक, बीमित घटना के चार महीने के भीतर यात्री, नॉमिनी या कानूनी वारिस को बीमा कंपनी के नजदीकी कार्यालय में लिखित दावा प्रस्तुत करना होता है. दावा करने के लिए ये कदम उठाएं:     बीमा कंपनी को सूचना दें: घटना की जानकारी देकर दावा करने की प्रक्रिया समझें.     रेलवे की रिपोर्ट जुटाएं: दुर्घटना से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज सुरक्षित रखें.     जरूरी प्रमाण तैयार करें: मौत, दिव्यांगता या इलाज के अनुसार सभी दस्तावेज इकट्ठा करें.     दावा फॉर्म भरें: पहचान पत्र, बैंक खाते का विवरण और अन्य जरूरी कागजात जमा करें.     अतिरिक्त दस्तावेज दें: बीमा कंपनी की ओर से मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध कराएं.     रिकॉर्ड संभालकर रखें: जमा किए गए दस्तावेजों और दावे की रसीद की प्रतियां अपने पास रखें.     समयसीमा और दस्तावेजों की जानकारी संबंधित बीमा कंपनी से जरूर जांच लें, ताकि जरूरी प्रक्रिया में देरी न हो. किन परिस्थितियों में नहीं मिलेगा बीमा का लाभ? यह समझना जरूरी है कि 45 पैसे का बीमा लेने का मतलब यह नहीं है कि यात्रा के दौरान होने वाली हर घटना पर मुआवजा मिलेगा. पॉलिसी में कुछ परिस्थितियों को बीमा के दायरे से बाहर रखा गया है. इनमें शामिल हो सकती हैं:     जानबूझकर खुद को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं     आत्महत्या या आत्महत्या की कोशिश … Read more

AI चैटबॉट से बदतमीजी करने पर लग सकता है अकाउंट पर प्रतिबंध? जानें Anthropic की नई पॉलिसी

 नई दिल्ली ChatGPT या Claude से जवाब पसंद नहीं आया तो क्या आप उसे गाली दे सकते हैं? AI कंपनी Anthropic ने अपने चैटबॉट Claude के लिए ऐसा नियम बनाया है, जिसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या AI को अपशब्द कहने पर अकाउंट बैन हो सकता है. कंपनी का कहना है कि बार-बार बिना किसी वजह के AI के साथ क्रूर या अपमानजनक व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई हो सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि AI के जवाब से नाराज होने या उसकी आलोचना करने पर आपका अकाउंट बंद हो जाएगा।  आम तौर पर देखा गया है कि लोग AI बॉट से मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलने पर गलत भाषा का इस्तेमाल करते हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ऐसा करने से यूजर्सा का ही नुकसान हो सकता है. लेकिन कैसे? आइए जानते हैं।  सोचिए, आपने AI से कोई जरूरी काम करने को कहा. उसने गलत जवाब दे दिया. आपने दोबारा पूछा, फिर भी सही जवाब नहीं मिला. गुस्से में आपने उसे गाली दे दी. अब सवाल है कि क्या AI कंपनी आपके इस व्यवहार के लिए आपका अकाउंट बंद कर सकती है?. यह सवाल इन दिनों इसलिए चर्चा में है, क्योंकि Claude AI बनाने वाली कंपनी Anthropic ने अपनी यूज पॉलिसी में AI मॉडल के साथ बार-बार बेवजह अपमानजनक या क्रूर व्यवहार करने पर रोक लगाई है. कंपनी ने 8 अक्टूबर 2026 को अपनी नई पॉलिसी का एलान किया. यह नियम 12 नवंबर से लागू होगा।  क्या AI को गाली देने पर अकाउंट बैन हो जाएगा? Anthropic ने अपनी पॉलिसी में 'सस्टेन्ड एंड नीडलेस एब्यूसिव ऑर क्रूएल बिहेवियर' यानी लगातार और बेवजह अपमानजनक या क्रूर व्यवहार पर रोक लगाई है. कंपनी के मुताबिक, यह नियम सिर्फ बेहद गंभीर मामलों के लिए है, जहां यूजर बार-बार ऐसा करता है और उसके पीछे कोई साफ मकसद नजर नहीं आता।  इसका मतलब है कि अगर Claude कोई गलत जानकारी देता है और आप उसे बताते हैं कि उसका जवाब गलत है, तो इसे अपने आप नियम का उल्लंघन नहीं माना जाएगा. आप उससे असहमत हो सकते हैं, उसके जवाब पर सवाल उठा सकते हैं और उसे बेहतर जवाब देने के लिए कह सकते हैं. यहां तक कि मॉडल की जांच करने या किसी कहानी के लिए गंभीर और अंधेरे विषयों पर लिखने को कहना भी इस नियम के दायरे से बाहर रखा गया है।  जब AI को दर्द नहीं होता, तो उसे गाली देने पर रोक क्यों? यही इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प सवाल है. इंसान को गाली देने से उसे दुख हो सकता है, उसका अपमान महसूस हो सकता है और रिश्ते खराब हो सकते हैं. लेकिन आज के AI चैटबॉट इंसानों की तरह भावनाएं महसूस करते हैं, इसका कोई पक्का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. वे भाषा और डेटा के पैटर्न के आधार पर जवाब बनाते हैं।  Claude भी इंसान की तरह नाराज होकर जवाब नहीं देता. वह ऐसा जवाब बना सकता है, जिससे लगे कि उसे बुरा लगा है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वह सचमुच दुखी हुआ है. Anthropic ने भी माना है कि AI के किसी तरह के अंदरूनी अनुभव या चेतना होने का सवाल अभी पूरी तरह हल नहीं हुआ है।  फिर कंपनी यह नियम क्यों ला रही है? इसकी एक वजह यह हो सकती है कि AI अब सिर्फ सवालों के जवाब देने वाला टूल नहीं रहा. लोग उससे लंबे समय तक बातचीत करते हैं, काम करवाते हैं और कई बार उसे इंसान की तरह संबोधित भी करते हैं. ऐसे में कंपनियां यह तय करना चाहती हैं कि उनके प्लेटफॉर्म पर किस तरह का व्यवहार स्वीकार किया जाएगा।  हालांकि, AI के साथ अच्छे व्यवहार की बात करना और यह दावा करना कि AI को इंसानों जैसी भावनाएं होती हैं, दो अलग बातें हैं. किसी कंपनी का अपने चैटबॉट के लिए व्यवहार के नियम बनाना यह साबित नहीं करता कि उस चैटबॉट को इंसान की तरह दर्द या अपमान महसूस होता है।  क्या AI से बदतमीजी करना गलत है? इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे किस नजरिए से देखते हैं. अगर बात सिर्फ AI की भावनाओं की है, तो अभी यह साबित नहीं है कि चैटबॉट को इंसान की तरह अपमान महसूस होता है. इसलिए उसे गाली देने की तुलना किसी इंसान को गाली देने से सीधे नहीं की जा सकती।  लेकिन दूसरी तरफ, यह भी सवाल है कि क्या AI से बात करते समय हमारी भाषा और आदतों का कोई महत्व नहीं है. मान लीजिए कोई व्यक्ति रोज अपने चैटबॉट से बेहद आक्रामक तरीके से बात करता है. क्या इससे उसके इंसानों के साथ व्यवहार पर भी असर पड़ सकता है? इसका जवाब अभी आसान नहीं है. यह कहना भी गलत होगा कि AI को गाली देने वाला हर व्यक्ति असल जिंदगी में भी दूसरों से बदतमीजी करता है।  फिर भी, भाषा की आदतें मायने रखती हैं. अगर आप AI से नाराज हैं, तो उसे साफ-साफ बता सकते हैं कि जवाब गलत है, जानकारी अधूरी है या उसे दोबारा जांचने की जरूरत है. गाली देने के बजाय निर्देश स्पष्ट करने से बातचीत काम की दिशा में आगे बढ़ सकती है।  AI से विनम्रता से बात करना जरूरी नहीं कि उसके लिए हो. यह आपके संवाद करने के तरीके का हिस्सा भी हो सकता है. वहीं, हर बार 'प्लीज' और 'थैंक यू' कहना भी जरूरी नहीं है. कई कामों में छोटा और स्पष्ट निर्देश ही काफी होता है।  क्या गाली देने से AI का जवाब खराब हो जाता है? यह कहना सही नहीं होगा कि गाली देने पर हर AI जानबूझकर खराब जवाब देगा या विनम्र होने पर हर बार बेहतर जवाब देगा. AI का जवाब मॉडल, सवाल, दिए गए संदर्भ और निर्देशों पर निर्भर करता है. अलग-अलग रिसर्च में भाषा के लहजे का असर अलग पाया गया है. कुछ मामलों में विनम्र या विस्तार से दिए गए निर्देश जवाब के स्वरूप को बदल सकते हैं, लेकिन सिर्फ 'प्लीज' लिखने से जवाब सही होने की गारंटी नहीं मिलती।  इसलिए बेहतर तरीका है कि आप AI को बताएं कि उससे क्या चाहिए. अगर उसने गलती की है, तो गलती का हिस्सा दिखाकर सुधार मांगें. अगर … Read more

Festive Inflation: रसोई से बाजार तक महंगाई का असर, त्योहार पर खर्च करना हुआ मुश्किल

नई दिल्ली    सैलरी वहीं की वहीं थमी हुई है, लेकिन महंगाई है कि रुकने का नाम नहीं ले रही. जिसने रसोई से लेकर बाजार तक का पूरा गणित बिगाड़ दिया है. लेकिन त्योहार है, तो खरीदारी भी होगी. चाहे इसके लिए कर्ज ही क्यों न लेना पड़े, दोस्तों से उधार मांगना पड़े या फिर क्रेडिट कार्ड सहारा बने, लोग पीछे नहीं हटते।  दरअसल, इस त्योहारी सीजन में आम आदमी की जेब खाली हो चुकी है. पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों ने सभी बुनियादी चीजों को महंगा कर दिया है. इस बार दिवाली का उल्लास तो भरपूर मनेगा, लेकिन इसके ठीक बाद गहराता आर्थिक संकट हर मिडिल क्लास फैमिली की नींद उड़ाने के लिए तैयार है।  त्योहार छोड़िए, आज मध्यम वर्गीय परिवार के सामने सबसे बड़ा संकट बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का है. पिछले कुछ समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में जो तेजी आई है, उसने हर चीज का गणित बिगाड़ दिया है. क्योंकि जब ईंधन महंगा होता है, तो हर छोटी-बड़ी चीज चाहे वह सब्जी हो, दाल हो, कपड़े हों या फिर सजावट के सामान, सब महंगे हो जाते हैं. इसका सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ता है और कीमतें रॉकेट की रफ्तार से ऊपर भागती हैं।  हर घर बिगड़ रहा है बजट खाने-पीने की चीजें जैसे तेल, आटा, मसाले और सब्जियां आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं. गृहिणियां समझ नहीं पा रही हैं कि सीमित बजट में घर आखिर कैसे चलाएं? क्योंकि नौकरीपेशा लोगों के वेतन में या तो कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है या फिर वह महंगाई दर के मुकाबले बहुत कम है. ऐसे में अधिकतर परिवारों की मंथली बचत पहले ही खत्म हो चुकी है।  अब सवाल उठता है कि जब रोजमर्रा की जिंदगी चलाना ही मुश्किल है, तो ऐसे में त्योहार पर खर्च के लिए पैसे कहां से आएंगे? जबकि इस बीच बाजार लुभावनी स्कीमों से पटा पड़ा है, 'अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें', 'नो कॉस्ट ईएमआई', और 'भारी छूट'. आम आदमी भी इन विज्ञापनों के झांसे में आसानी से आ जाते हैं. यहीं से कर्ज जाल में फंसना शुरू हो जाता है।  नए कपड़े, एलईडी टीवी, महंगे स्मार्टफोन और सोने के गहने खरीदना अब आसान हो गया है, क्योंकि लोग तुरंत भुगतान करने के बजाय किस्तों का सहारा लेते हैं. लेकिन ये किस्तें भारी पड़ती है, क्योंकि ऑफर के चक्कर में कई बार लोग आमदनी से ज्यादा खर्च कर देते हैं. लोग यह भूल जाते हैं कि क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन पर लगने वाला ब्याज उनकी वित्तीय कमर तोड़ सकता है।  इस बीच जो पैसा अगले कुछ महीनों के राशन, बच्चों की फीस या इमरजेंसी के लिए होना चाहिए था, वह त्योहारी बिल चुकाने में चला जाता है. एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा कर्ज लेने की यह आदत परिवारों को कर्ज के कुचक्र में धकेल देती है।  क्या वाकई कोई विकल्प नहीं बचा है? आम आदमी के पास क्या सचमुच कोई दूसरा रास्ता नहीं है? यह सवाल हर उस व्यक्ति के मन में आता है, जो इस व्यवस्था से जूझ रहा है. क्योंकि लोग त्योहार आने से पहले कोई आर्थिक योजना नहीं बनाते. जब समय सिर पर आता है, तो बिना सोचे-समझे खर्च कर देते हैं. लेकिन ये हकीकत है कि महंगाई और आमदनी का यह अंतर रातो-रात खत्म नहीं होने वाला है, ये आंकड़े भी चीख-चीख कर बता रहे हैं।  दुनियाभर में महंगाई तेजी से बढ़ रही है, बढ़ती महंगाई की वजह से केंद्रीय बैंकों को कर्ज महंगा करना पड़ रहा है. अमेरिका जैसा विकसित देश महंगाई से जूझ रहा है, और फेड रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने के लिए लाचार है. भारत में भी पिछले हफ्ते ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया, जबकि इस साल रेपो रेट और 50 बेसिस प्वाइ्ंट्स बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।   फेस्टिव सीजन से ठीक पहले रेपो रेट बढ़ने से तमाम तरह के कर्ज महंगे हो गए हैं. होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले करोड़ों मध्यम वर्गीय परिवारों की EMI बढ़ गई है. पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी को लोन की बढ़ी हुईं किस्तें आने वाले दिनों में और परेशान करेंगी।  आंकड़े दे रहे सबूत रही सही कसर महंगाई दर ने पूरी कर दी है. खुदरा महंगाई दर 2 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जबकि थोक महंगाई दर की बात करें, तो ये भी डबल डिजिट में पहुंच गई है. दशहरा से ठीक पहले दोनों आंकड़े सामने आए हैं, सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% पर पहुंच गई. जबकि अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.82% थी. खाने-पानी के चीजें से तेजी से महंगी हुई हैं, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति अगस्त के 5.97% से बढ़कर सितंबर में 7.74% पर पहुंच गई. खासकर सब्जियों, दालों और रोजमर्रा की जरूरत की अन्य चीजों के महंगे होने से आम आदमी की थाली पर सीधा असर पड़ा है. प्याज, चीनी और खाने के तेल की कीमतों में साल भर के अंदर बड़ा इजाफा हुआ है।  खुदरा के बाद थोक महंगाई दर ने आम आदमी को झटका दे दिया है. थोक मूल्य सूचकांक (WPI) सितंबर में उछलकर 11.39% पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 9.92% थी. थोक बाजार में ईंधन, बिजली और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में आई भारी तेजी इसके मुख्य कारण रहे।  थोक महंगाई का यह स्तर बताता है कि आने वाले दिनों में कंपनियों की लागत बढ़ने से बाजार में सामान और ज्यादा महंगे हो जाएंगे, जिसका सीधा बोझ अंतिम उपभोक्ता यानी आम जनता को ही उठाना पड़ेगा. सितंबर में खाद्य सूचकांक की महंगाई बढ़कर 8.66% हो गई, जो कि अगस्त में 7.05 फीसदी थी. यानी त्योहारों के बीच आम आदमी को महंगाई की चौतरफा मार पड़ने वाली है।  इसलिए आखिर में आपको सलाह दी जाती है, त्योहार हर साल आते हैं, अगले साल भी आएंगे, खुद को आर्थिक संकट में डालकर फिजूलखर्ची से बचने में ही भलाई है. बाजार जाने से पहले ही तय कर लें कि इस बार आप कुल कितने पैसे खर्च करेंगे? उस सीमा से एक रुपया भी ज्यादा खर्च न करें. क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से बचें, क्योंकि इससे खर्च करने का … Read more

Shardiya Navratri 2026: सप्तमी पर करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें प्रिय भोग, शुभ रंग और पौराणिक कथा

शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। देवी का यह रूप जितना उग्र और शक्तिशाली है, उतना ही भक्तों के लिए कल्याणकारी भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय, नकारात्मक शक्तियों और जीवन की बाधाओं से लड़ने का साहस प्रदान करती हैं। उन्हें शुभ फल देने वाली देवी होने के कारण 'शुभंकरी' नाम से भी पुकारा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां की उपासना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। आइए जानते हैं नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, प्रिय भोग, मंत्र, आरती, कथा और शुभ रंग के बारे में। नवरात्रि का सातवां दिन कब है? वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि 17 अक्तूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन मां कालरात्रि की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का स्मरण करने से मन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। भक्त उनसे जीवन की परेशानियों को दूर करने और परिवार की सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। देवी कालरात्रि का स्वरूप पुराणों के अनुसार देवी दुर्गा ने राक्षस रक्तबीज का वध करने के लिए कालरात्रि को उत्पन्न किया था। इनके शरीर का रंग घने अंधकार जैसा है, बिखरे हुए बाल, गले में विद्युत जैसी माला और तीन नेत्र इनकी विशेषता है। इनके सांसों से अग्नि ज्वालाएं निकलती रहती हैं और इनका वाहन गर्दभ है। वर और अभय मुद्रा में हाथ तथा खड्ग और काँटे का अस्त्र धारण करने वाली मां कालरात्रि भयानक स्वरूप के बावजूद शुभ फल देने वाली हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।   मां कालरात्रि की पूजा विधि     नवरात्रि के सातवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।     इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।     मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और उनके सामने दीपक जलाएं।     देवी को रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप दिखाकर मंत्रों का जाप करें।     मां को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं।     अंत में मां कालरात्रि की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण की प्रार्थना करें। मां कालरात्रि का प्रिय भोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि को गुड़ विशेष प्रिय माना जाता है। इस दिन देवी को गुड़, गुड़ का हलवा, गुड़ की खीर या मालपुआ अर्पित किया जा सकता है। भोग लगाते समय शुद्धता और श्रद्धा का ध्यान रखें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें। मान्यता है कि देवी को गुड़ का भोग लगाने से जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है। नवरात्रि के सातवें दिन का शुभ रंग और फूल नवरात्रि के सातवें दिन नीला रंग पहनना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह रंग शक्ति, स्थिरता और सकारात्मकता का प्रतीक है। मां कालरात्रि की पूजा में चमेली के फूल अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार गुड़हल या अन्य सुगंधित फूल भी चढ़ा सकते हैं। मां कालरात्रि की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे असुरों ने तीनों लोकों में उत्पात मचाना शुरू किया, तब देवता चिंतित होकर भगवान शिव के पास पहुंचे। देवताओं की रक्षा के लिए मां दुर्गा ने असुरों से युद्ध किया। युद्ध के दौरान रक्तबीज नामक दैत्य को वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की प्रत्येक बूंद धरती पर गिरते ही उसके समान एक नया दैत्य पैदा हो जाएगा। रक्तबीज का वध करना कठिन हो गया, क्योंकि उसके रक्त से लगातार नए दैत्य उत्पन्न होने लगे। तब देवी ने उग्र कालरात्रि स्वरूप धारण किया। मान्यता है कि मां ने रक्तबीज के शरीर से निकलने वाले रक्त को धरती पर गिरने से पहले ही ग्रहण कर लिया और उसका संहार किया। इस प्रकार देवी ने देवताओं को संकट से मुक्त कराया और अधर्म पर विजय प्राप्त की। मां कालरात्रि की यह कथा बुराई के विरुद्ध संघर्ष, साहस और धर्म की रक्षा का संदेश देती है। नवरात्रि के सातवें दिन भक्त देवी की पूजा करके जीवन से भय और नकारात्मकता दूर करने तथा शक्ति और सद्बुद्धि प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं। मां कालरात्रि की आरतीः कालरात्रि जय जय महाकाली।  काल के मुंह से बचाने वाली। दूष्ट संचारक नाम तुम्हारा।  महाचेही तेरा अवतारा ॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥ खड्ग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली ॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देख तेरा नजारा ॥ सभी देवता सब नर-नारी।  गावे स्तुति सभी तुम्हारी॥ रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥ ना कोई चिता रहे ना बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी ॥ उस पर कभी कष्ट ना आवे। महाकाली मां जिसे बचावे ॥ तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि मां तेरी जय ॥ मां कालरात्रि के प्रिय मंत्रः ॐ कालरात्र्यै नमः बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः देवी मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः ॥ प्रार्थना या स्तुति मंत्रः या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥