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गोरक्षपीठ में रविवार को होगी महानिशा पूजा, हवन कर लोक मंगल का आशीर्वाद मांगेंगे सीएम योगी

रविवार से मंगलवार तक विशिष्ट अनुष्ठान व आराधना में लीन रहेंगे मुख्यमंत्री गोरक्षपीठ में रविवार को होगी महानिशा पूजा, हवन कर लोक मंगल का आशीर्वाद मांगेंगे सीएम योगी महानवमी पर पांव पखारकर नौ कन्याओं और बटुकों का पूजन करेंगे मुख्यमंत्री दशहरे पर निकलेगी ऐतिहासिक विजयादशमी शोभायात्रा, प्रभु श्रीराम का होगा राजतिलक गोरखपुर,  शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ की पावन तपोस्थली गोरक्षपीठ में शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा से जारी आध्यात्मिक अनुष्ठान रविवार से अपने सबसे विशिष्ट और पावन पड़ाव की ओर अग्रसर होंगे। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार से मंगलवार तक अनवरत तीन दिनों तक विशेष अनुष्ठान, पूजन और पारंपरिक उत्सवों में लीन रहेंगे। अष्टमी (रविवार, 18 अक्टूबर) की शाम वह गोरक्षपीठ के पारंपरिक निशा पूजा में सम्मिलित होंगे जबकि सोमवार (19 अक्टूबर) को नवमी तिथि पर उनके द्वारा कन्या पूजन का अनुष्ठान किया जाएगा। नवरात्र की पूर्णता के बाद दशहरे के दिन मंगलवार (20 अक्टूबर) को गुरु गोरक्षनाथ की विशिष्ट पूजा कर गोरक्षपीठाधीश्वर, गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाली विजयादशमी शोभायात्रा की अगुवाई करेंगे।   शारदीय नवरात्र की प्रतिपदा को गोरक्षपीठाधीश्वर ने गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में कलश स्थापना की थी। इसके बाद के नियमित नवरात्र पूजन के अनुष्ठान उनके प्रतिनिधि के रूप में गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ द्वारा किए जा रहे हैं। अष्टमी की तिथि के मान से लेकर विजयादशमी तक गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ स्वयं आराधना व आनुष्ठानिक कार्यक्रमों के लिए उपस्थित रहेंगे। गोरक्षपीठाधीश्वर रविवार (18 अक्टूबर) को नवरात्र की अष्टमी तिथि में विधि विधान से महानिशा पूजन व हवन कर लोक मंगल की प्रार्थना करेंगे। गोरक्षपीठ में सोमवार (19 अक्टूबर) को पूर्वाह्न 11 बजे से मातृ शक्ति के प्रति श्रद्धा व सम्मान के प्रतीक के रूप में कन्या पूजन का अनुष्ठान होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कन्या पूजन कर मातृ शक्ति के प्रति गोरक्षपीठ की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। गोरक्षपीठाधीश्वर नौ दुर्गा स्वरूपा नौ कुंवारी कन्याओं के पांव पखारेंगे, उनके माथे पर रोली, चंदन, दही, अक्षत का तिलक लगा विधि विधान से पूजन करेंगे। पूरी श्रद्धा से भोजन कराकर दक्षिणा व उपहार देकर उनका आशीर्वाद भी लेंगे। इस दौरान परंपरा के अनुसार बटुक पूजन भी किया जाएगा। जबकि मंगलवार (20 अक्टूबर) को महायोगी गोरखनाथ जी के विशिष्ट पूजन व गोरक्षपीठाधीश्वर के तिलकोत्सव के बाद सायंकाल विजयादशमी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।  गोरखपुर की उत्सवी परंपरा का खास आकर्षण है विजयादशमी शोभायात्रा दशहरे के दिन गोरक्षपीठाधीश्वर की अगुवाई में गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाली विजयादशमी शोभायात्रा गोरखपुर की उत्सवी परंपरा का खास आकर्षण है। इस शोभायात्रा में सामाजिक समरसता देखने को मिलती है। इस शोभायात्रा में हर वर्ग के लोग तो शामिल होते ही हैं, इसका अल्पसंख्यक समुदाय (मुस्लिम व बुनकर समाज) के लोगों द्वारा भव्य स्वागत भी किया जाता है। तीन पीढ़ियों से विजयादशमी शोभायात्रा का स्वागत करने वाले उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के पूर्व चेयरमैन चौधरी कैफुलवरा बताते हैं कि मंदिर के मुख्य द्वार से थोड़ी दूर पर हम लोग घंटों पहले फूलमाला लेकर गोरक्षपीठाधीश्वर के स्वागत को खड़े रहते हैं।  धूमधाम से निकलेगी गोरक्षपीठाधीश्वर की विजयादशमी शोभायात्रा गोरक्षपीठ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी विजयादशमी के दिन मंगलवार (20 अक्टूबर) सायंकाल गोरखनाथ मंदिर से गोरक्षपीठाधीश्वर की शोभायात्रा धूमधाम से निकाली जाएगी। पीठाधीश्वर गुरु गोरक्षनाथ का आशीर्वाद लेकर अपने वाहन में सवार होंगे। तुरही, नगाड़े व बैंड बाजे की धुन के बीच गोरक्षपीठाधीश्वर की शोभायात्रा मानसरोवर मंदिर पहुंचेगी। यहां पहुंचकर गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठ से जुड़े मानसरोवर मंदिर पर देवाधिदेव महादेव की पूजा अर्चना करेंगे। इसके बाद उनकी शोभायात्रा मानसरोवर रामलीला मैदान पहुंचेगी। यहां चल रही रामलीला में वह प्रभु श्रीराम का राजतिलक करेंगे। इसके साथ ही प्रभु श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण व हनुमानजी का पूजन कर आरती भी उतारी जाएगी। यही नहीं विजयादशमी के दिन गोरखनाथ मंदिर में होने वाले पारंपरिक तिलकोत्सव कार्यक्रम में गोरक्षपीठाधीश्वर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी देंगे। विजयादशमी के दिन शाम को गोरखनाथ मंदिर में परंपरागत भोज का भी आयोजन होगा जिसमें अमीर-गरीब और जाति-मजहब के विभेद से परे बड़ी संख्या में सर्वसमाज के लोग शामिल होंगे।

छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना का लाभ, प्रेमिन के लिए सिलाई मशीन बनी रोजगार का सहारा

महतारी वंदन योजना से प्रेमिन के सपनों को मिले पंख, सिलाई मशीन बनी आत्मनिर्भरता का आधार हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता से शुरू किया सिलाई का काम, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में बनीं सहभागी महतारी वंदन योजना की 32 किस्तों से मिले 32 हजार रुपये ने बढ़ाया आत्मविश्वास, आर्थिक स्वावलंबन की ओर बढ़ाए कदम रायपुर,  छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना से मिलने वाली प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता महिलाओं को न केवल घरेलू जरूरतें पूरी करने में सहयोग दे रही है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार शुरू करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बचत करने का अवसर भी प्रदान कर रही है। बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड अंतर्गत ग्राम उफरा निवासी श्रीमती प्रेमिन वर्मा इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने योजना से प्राप्त राशि का सदुपयोग कर सिलाई मशीन खरीदी और स्वरोजगार की शुरुआत की। साथ ही अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए नियमित बचत भी कर रही हैं। श्रीमती प्रेमिन वर्मा बताती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सीमित आमदनी में घर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना ही बड़ी चुनौती थी। एक मां होने के नाते उन्हें सबसे अधिक चिंता अपनी बेटी की पढ़ाई और उसके भविष्य की रहती थी। वह चाहती थीं कि उनकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे और आर्थिक परेशानियां उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। लेकिन परिवार की सीमित आय के कारण भविष्य के लिए बचत कर पाना मुश्किल था। ऐसे कठिन समय में महतारी वंदन योजना उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आई। योजना के अंतर्गत उन्हें प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। प्रेमिन को अब तक 32 किस्तों के माध्यम से कुल 32 हजार रुपये प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने इस राशि को केवल घरेलू खर्चों तक सीमित रखने के बजाय परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बेटी के भविष्य को सुरक्षित बनाने में उपयोग करने का निर्णय लिया। सिलाई मशीन ने खोले स्वरोजगार के नए रास्ते प्रेमिन वर्मा ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि की बचत कर एक सिलाई मशीन खरीदी। उनके लिए यह सिलाई मशीन केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के सपने को साकार करने का माध्यम है। अब वह घर पर सिलाई का कार्य कर आमदनी अर्जित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दे रही हैं। प्रेमिन बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी आर्थिक जरूरतों के लिए भी उन्हें परेशान होना पड़ता था, लेकिन अब स्वयं की मेहनत से आय अर्जित करने पर आत्मविश्वास बढ़ा है। सिलाई के काम ने उन्हें अपनी क्षमता पहचानने और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी निभाने का अवसर दिया है। बेटी के भविष्य के लिए हर महीने 500 रुपये की बचत स्वरोजगार के साथ प्रेमिन ने अपनी बेटी के भविष्य को भी प्राथमिकता दी है। वह महतारी वंदन योजना से मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि में से प्रतिमाह 500 रुपये बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा कर रही हैं। उनकी इच्छा है कि भविष्य में बेटी की उच्च शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त बचत हो सके। प्रेमिन का मानना है कि छोटी-छोटी नियमित बचत भविष्य में बड़ा सहारा बन सकती है। आज वह अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए आर्थिक आधार तैयार कर रही हैं। उनकी यह पहल दर्शाती है कि आर्थिक सहायता का योजनाबद्ध उपयोग महिलाओं को वर्तमान की जरूरतों के साथ भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए भी सक्षम बना सकता है। आर्थिक सहायता ने दिया आत्मविश्वास और सम्मान से जीने का संबल श्रीमती प्रेमिन वर्मा कहती हैं कि पहले आर्थिक परेशानियों और बेटी के भविष्य को लेकर मन में चिंता बनी रहती थी, लेकिन महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अब वह न केवल नियमित बचत कर पा रही हैं, बल्कि स्वयं के रोजगार से परिवार की आमदनी बढ़ाने में भी योगदान दे रही हैं। उनका कहना है कि मेरे लिए सिलाई मशीन सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने की उम्मीद है। महतारी वंदन योजना से मिली सहायता ने मुझे बचत करने और अपना काम शुरू करने का हौसला दिया है। अब मैं अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए भी पैसे जमा कर पा रही हूं। प्रेमिन वर्मा की सफलता की कहानी बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता, सही योजना और दृढ़ संकल्प से महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकती हैं। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को स्वरोजगार और बेटी की शिक्षा के लिए बचत में उपयोग कर उन्होंने आर्थिक स्वावलंबन की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है।

8वां वेतन आयोग: 1 जनवरी 2026 से लागू होगी नई सैलरी? जानें एरियर पर क्या है उम्मीद

 नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों के मन में 8वें वेतन आयोग को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि बढ़ी हुई सैलरी कब से मिलेगी और क्या 1 जनवरी 2026 से एरियर यानी बकाया भी दिया जाएगा? अगर आयोग की सिफारिशें लागू होने में ज्यादा समय लगता है, तो कर्मचारियों को एरियर का पैसा मिलने की संभावना है. हालांकि, अभी सरकार ने एरियर को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. कर्मचारी संगठन 1 जनवरी 2026 से वेतन संशोधन लागू करने की मांग कर रहे हैं।  आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) का गठन केंद्र सरकार द्वारा 3 नवंबर 2025 को किया गया था. इस आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. आईआईएम बैंगलोर के प्रोफेसर और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य पुलक घोष आयोग के अंशकालिक-सदस्य और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज जैन सदस्य-सचिव हैं. 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।  इस हिसाब से रिपोर्ट मई 2027 के आसपास आने की उम्मीद है. इसके बाद सरकार सिफारिशों पर विचार करेगी और मंजूरी के बाद ही वेतन में बदलाव लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. अगर सरकार वेतन संशोधन के लिए 1 जनवरी 2026 की तारीख मंजूर करती है, तो 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में देरी के बावजूद कर्मचारियों को उस तारीख से एरियर मिल सकता है. लेकिन यह अभी एक संभावना है, पक्का फैसला नहीं. अंतिम तारीख सरकार की मंजूरी और अधिसूचना पर निर्भर करेगी।  बकाया यानी एरियर क्या होता है? मान लीजिए कि सरकार वेतन संशोधन की प्रभावी तारीख 1 जनवरी 2026 तय करती है, लेकिन बढ़ी हुई सैलरी का भुगतान बाद में शुरू होता है. ऐसी स्थिति में जनवरी 2026 से नई सैलरी लागू होने तक की अवधि का अंतर कर्मचारियों को बकाये यानी एरियर के रूप में मिल सकता है. उदाहरण के लिए, अगर नई सैलरी जुलाई 2027 से मिलनी शुरू होती है, लेकिन वेतन संशोधन 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाता है, तो बीच के 18 महीने का एरियर कर्मचारियों को मिल सकता है. एरियर की वास्तविक रकम इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार नई सैलरी, महंगाई भत्ते और दूसरी शर्तों को किस तरह मंजूरी देती है।  पिछले वेतन आयोगों में क्या हुआ था? पिछले वेतन आयोगों के अनुभव बताते हैं कि सिफारिशें लागू होने में देरी होने पर कर्मचारियों को एरियर दिया गया था. 5वें और 6ठे वेतन आयोग के दौरान केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को एरियर का भुगतान सरकारी खर्च पर असर डालने वाला बड़ा मुद्दा बना था. 7वें वेतन आयोग ने इस मामले में अलग रुख अपनाया था. आयोग ने अपनी सिफारिशों में एरियर की रकम सीमित कर दी थी, इसलिए इसका सरकारी खजाने पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ा था. हालांकि, पुराने वेतन आयोगों का अनुभव अपने आप यह तय नहीं करता कि 8वें वेतन आयोग में भी एरियर मिलेगा. इस पर स्पष्टता वेतन आयोग की रिपोर्ट आने और सरकार के फैसले के बाद ही होगी।  7वां वेतन आयोग कबसे हुआ था प्रभावी सातवें वेतन आयोग ने वेतन संशोधन के लिए 1 जनवरी 2016 की प्रभावी तारीख तय की थी. इससे पहले कर्मचारी पक्ष की ओर से 1 जनवरी 2014 से संशोधन लागू करने की मांग की गई थी. इसके पीछे महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी और सैलरी के रियल पर्चेजिंग पावर में कमी जैसे तर्क दिए गए थे. लेकिन आयोग ने 1 जनवरी 2016 की तारीख को उचित माना. उसका तर्क था कि सातवें वेतन आयोग का गठन 2014 में हुआ था और 1 जनवरी 2016 तक सातवें वेतन आयोग के लागू होने का समय आ गया था. इससे यह साफ होता है कि प्रभावी तारीख तय करना आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले पर निर्भर करता है।  फिटमेंट फैक्टर और एरियर का क्या संबंध? आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर भी कर्मचारियों के बीच चर्चा है. फिटमेंट फैक्टर वह गुणक है, जिसकी मदद से मौजूदा मूल वेतन को संशोधित मूल वेतन में बदला जाता है. लेकिन इसका पूरा असर समझने के लिए महंगाई भत्ते को भी ध्यान में रखना जरूरी है. सातवें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया गया था. इसमें महंगाई भत्ते के विलय का हिस्सा भी शामिल था, इसलिए इसे पूरी तरह से 157 फीसदी की वास्तविक वेतन बढ़ोतरी समझना सही नहीं होगा. आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, वास्तविक वेतन बढ़ोतरी का हिस्सा इससे काफी कम था. आठवें वेतन आयोग में अंतिम फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, यह अभी तय नहीं है. इसी तरह, बकाये की गणना भी अंतिम वेतन संरचना और सरकार द्वारा तय प्रभावी तारीख के आधार पर होगी।  क्या 2027 में फैसला होने पर मिलेगा बकाया? अगर आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर फैसला 2027 में होता है, तो भी 1 जनवरी 2026 से बकाया यानी एरियर मिलने की संभावना बनी रह सकती है. लेकिन इसके लिए सरकार को वेतन संशोधन की प्रभावी तारीख 1 जनवरी 2026 मंजूर करनी होगी. अगर प्रभावी तारीख अलग तय की जाती है, तो बकाये की अवधि भी उसी हिसाब से बदलेगी. इसलिए कर्मचारियों को फिलहाल दो बातों पर नजर रखनी चाहिए- आयोग की सिफारिशें कब आती हैं और सरकार वेतन संशोधन की प्रभावी तारीख क्या तय करती है. 8वें वेतन आयोग में एरियर, फिटमेंट फैक्टर की अंतिम स्थिति सरकार के फैसले और आधिकारिक अधिसूचना से ही स्पष्ट होगी। 

महिलाओं की सुरक्षा के लिए UP की 1090 हेल्पलाइन, फोन और सोशल मीडिया पर शिकायत का समाधान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और महिला अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए वुमन पावर लाइन-1090 अहम भूमिका निभा रही है, फोन पर परेशान करने, सोशल मीडिया पर पीछा करने और किसी भी तरह से प्रताड़ित किए जाने की शिकायतों पर इस सेवा के जरिए मदद मांगी जा सकती है, इसका उद्देश्य महिलाओं और युवतियों को बिना डर अपनी शिकायत दर्ज कराने का अवसर देना और उनकी पहचान गोपनीय रखना है।  अगर कोई व्यक्ति फोन पर परेशान करता है, सोशल मीडिया पर पीछा करता है या किसी अन्य माध्यम से प्रताड़ित करता है, तो पीड़िता 1090 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकती है. इस सेवा की एक प्रमुख विशेषता शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखना है. कई मामलों में पीड़िता को शिकायत के लिए सीधे थाने जाने की जरूरत नहीं पड़ती, पुलिस शिकायत के आधार पर आरोपी से संपर्क कर उसे ऐसी हरकतें बंद करने की चेतावनी देती है।  इसके अलावा, मानसिक तनाव या अवसाद से जूझ रही महिलाओं को काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है. इसके जरिए पीड़िताओं को भावनात्मक सहयोग देने और उनकी समस्याओं के समाधान में मदद करने का प्रयास किया जाता है।  रोजाना हजारों कॉल संभालने का दावा जानकारी के मुताबिक, 150 सीटों की क्षमता वाला 1090 कॉल सेंटर रोजाना लगभग 8,000 इनकमिंग और 10,000 आउटगोइंग कॉल संभालता है, इसकी कार्यप्रणाली शिकायत मिलने से लेकर उसके निस्तारण और पीड़िता से फीडबैक लेने तक फैली हुई है. शिकायत मिलने के बाद पुलिस का प्रतिनिधि आरोपी से फोन पर संपर्क कर उसे चेतावनी देता है और परेशान करने वाली गतिविधियां रोकने का निर्देश देता है, इसका उद्देश्य शुरुआती स्तर पर ही हस्तक्षेप करके पीड़िता को राहत दिलाना है।  1090 पर शिकायत के बाद क्या होता है? चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरा आरोपी तो आगे की कार्रवाई अगर चेतावनी देने के बाद भी आरोपी अपनी हरकतें जारी रखता है, तो एफएफआर (फैमिली, फ्रेंड्स एंड रिलेटिव्स) तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है, इसके तहत आरोपी के परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों से संपर्क कर उसे अपनी हरकतें रोकने के लिए समझाने का प्रयास किया जाता है. यदि इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता, तो मामला संबंधित थाने को भेजा जाता है, जहां कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जा सकती है।  1090 की प्रक्रिया में पीड़िता से कार्रवाई के अलग-अलग चरणों में फीडबैक लेने की व्यवस्था भी बताई गई है, इसका उद्देश्य यह जानना है कि शिकायत के बाद उसकी परेशानी दूर हुई या नहीं।  महिलाओं को परेशान करने वालों पर ऐसे कसता है शिकंजा उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायत के निस्तारण के 30 दिन बाद भी अंतिम फीडबैक लिया जाता है. अगर पीड़िता बताती है कि उसकी समस्या अब भी बनी हुई है या वह कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है, तो मामले पर दोबारा ध्यान देकर शिकायत के समाधान की प्रक्रिया फिर शुरू की जा सकती है, महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऐसी हेल्पलाइन का प्रभावी इस्तेमाल तभी संभव है, जब शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो, पीड़िताओं की निजता सुरक्षित रहे और जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनी सहायता भी मिले। 

Honda की पहली इलेक्ट्रिक SUV की एंट्री तय, भारत में जल्द लॉन्च होगी 0 Alpha EV

 नई दिल्ली Honda 0 Alpha EV India Launch: जापानी कार कंपनी होंडा भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों की दौड़ में उतरने की तैयारी कर रही है. कंपनी अपनी पहली ऑल-इलेक्ट्रिक कार के तौर पर Honda 0 Alpha के प्रोडक्शन मॉडल को 2 दिसंबर को भारत में पेश करेगी. इस SUV के कॉन्सेप्ट मॉडल से अक्टूबर 2025 में पर्दा उठाया गया था. अब इसका प्रोडक्शन मॉडल भारतीय सड़कों पर उतरने के लिए तैयार है।  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी नवंबर में इस SUV के फाइनल नाम का खुलासा कर सकती है. हाल ही में इस इलेक्ट्रिक SUV को टेस्टिंग के दौरान स्पॉट किया गया था. इसके कॉप्सेप्ट मॉडल के डिज़ाइन को लोगों ने काफी पसंद किया था. अब इसके प्रोडक्शन रेडी वर्जन का इंतजार है. टाटा, मारुति, महिंद्रा, एमजी मोटर, हुंडई, विनफास्ट, बीवाईडी और किआ के बाद होंडा अगली कंपनी होगी जो भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री करेगी। कैसी होगी Honda 0 Alpha EV  Honda ने फिलहाल अपनी पहली इलेक्ट्रिक SUV की तकनीकी जानकारी पूरी तरह साझा नहीं की है. हालांकि, कंपनी ने पुष्टि की है कि इसमें दो बैटरी पैक के ऑप्शन मिलेंगे. दोनों बैटरी में LFP यानी लिथियम आयरन फॉस्फेट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इनकी क्षमता 65kWh से 75kWh के बीच होने की उम्मीद है. लॉन्च के समय इस SUV में सिंगल इलेक्ट्रिक मोटर और फ्रंट-व्हील ड्राइव (FWD) सेटअप मिल सकता है. हालांकि, बैटरी कैपेसिटी, ड्राइविंग रेंज और मोटर की पावर से जुड़ी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।  टेस्टिंग के दौरान सामने आई तस्वीरों से यह साफ हो चुका है कि, Honda की ये इलेक्ट्रिक SUV अपने कॉन्सेप्ट मॉडल से काफी हद तक मिलती-जुलती होगी. इसका लुक कंपनी की मौजूदा कारों से काफी अलग है. SUV के पिछले हिस्से में स्ट्रेट टेलगेट और मोटा C-पिलर दिया जा सकता है, जो इसे MPV जैसा लुक देता है. पीछे की तरफ बड़ी विंडस्क्रीन और नीचे की ओर निकला हुआ बंपर नजर आता है. बंपर के निचले हिस्से में डिफ्यूजर जैसा डिजाइन एलिमेंट भी मिलने की उम्मीद है।  केबिन में बड़ी टचस्क्रीन Honda 0 Alpha के टेस्ट मॉडल की पहले सामने आई तस्वीरों में इसके केबिन की झलक भी देखने को मिली थी. इसमें बड़ी टचस्क्रीन दी जा सकती है, जबकि ड्राइवर के लिए इसके दाईं ओर थोड़ा छोटा डिजिटल डिस्प्ले नजर आया है. SUV में थ्री-स्पोक वाला फ्लैट-बॉटम स्टीयरिंग व्हील भी मिल सकता है, जिसके साथ पैडल शिफ्टर्स दिए गए हैं।  सेंटर कंसोल पर कई फिजिकल बटन दिखाई दिए हैं. इनका इस्तेमाल क्लाइमेट कंट्रोल और वेंटिलेटेड सीटों जैसे फीचर्स को ऑपरेट करने के लिए किया जा सकता है. हालांकि, इन फीचर्स और उनके फंक्शन की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है. इस एसयूवी का व्हीलबेस लगभग 2,700 मिमी से 2,800 मिमी के बीच होने की संभावना है. जिससे यूजर्स को केबिन में बेहतर स्पेस मिलेगा।  लॉन्च के बाद Honda 0 Alpha का मुकाबला भारतीय बाजार की मिडसाइज इलेक्ट्रिक SUV सेगमेंट में होगा. ये कार मूल रूप से महिंद्रा बीई 6, हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक, टाटा सिएरा ईवी, मारुति ई विटारा और टोयोटा अर्बन क्रूजर जैसे मॉडलों को टक्कर देगी. हालांकि लॉन्च से पहले इसकी कीमत के बारे में कुछ भी कहना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन माना जा रहा है कि कंपनी इसे 15-16 लाख रुपये की शुरुआती कीमत में पेश कर सकती है।  राजस्थान में बनेगी कार Honda अपनी इस इलेक्ट्रिक SUV का निर्माण भारत में ही करेगी. राजस्थान के टपूकड़ा स्थित कंपनी के प्लांट को इसके प्रोडक्शन किया जाएगा. इससे Honda को भारतीय बाजार के हिसाब से अपनी इलेक्ट्रिक SUV तैयार करने में मदद मिल सकती है। 

मध्य प्रदेश में लेडी कॉन्स्टेबल को मिली जेंडर चेंज की मंजूरी, मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर फैसला

भोपाल मध्य प्रदेश में गृह विभाग ने लेडी कॉन्स्टेबल को जेंडर चेंज करवाने की अनुमति दे दी है। मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा के बाद सरकार ने कॉन्स्टेबल को यह अनुमति दी है। अब वह जल्द ही मेडिकल प्रक्रिया से गुजरने के बाद मर्द बन जाएगी। मध्य प्रदेश में इससे पहले भी दो लेडी कॉन्स्टेबल जेंडर चेंज करवा चुकी हैं। 2022 में महिला ने मांगी थी अनुमति मिली जानकारी के अनुसार एमपी पुलिस में पदस्थ लेडी कॉन्स्टेबल ने जनवरी 2022 में जेंडर परिवर्तन के लिए अनुमति मांगी थी। इसके साथ ही उसने शपथ पत्र भी पेश किया था। महिला के आवेदन के बाद उसका मेडिकल जुलाई 2022 में गांधी मेडिकल कॉलेज में करवाया गया। रिपोर्ट पेश की लेडी कॉन्स्टेबल की जांच के बीद मनोचिकित्सक ने उसकी रिपोर्ट पेश की थी। इसके जिला मेडिकल बोर्ड ने लेडी कॉन्स्टेबल के पक्ष में अनुशंसा की थी। तमाम प्रक्रियाओं के बाद लेडी कॉन्स्टेबल ने अपना आवेदन शासन को मंजूरी के लिए भेजा था। सीएम ने दिए थे निर्देश वहीं, लेडी कॉन्स्टेबल के आवेदन पर सीएम मोहन यादव ने गृह विभाग को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद गृह विभाग ने तमाम दस्तावेजों का परीक्षण किया। जेंडर चेंज करवाने को मिली अनुमति गृह विभाग ने अब लेडी कॉन्स्टेबल को जेंडर चेंज करवाने की अनुमति दे दी है। आदेश जारी होने के बाद लेडी कॉन्स्टेबल मेडिकल प्रक्रिया के जरिए जेंडर चेंजर करवाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले 2021 में निवाड़ी और 2023 में रतलाम में एक लेडी कॉन्स्टेबल का जेंडर चेंज करवा चुकी है। अब दोनों पुरुष बन गई हैं।  

मध्य प्रदेश में ADJ की अनिवार्य सेवानिवृत्ति को चुनौती, हाई कोर्ट में सुनवाई

जबलपुर   अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश के पद से अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता आर.के. श्रीवास ने जबरन रिटायर्ड किए जाने को नियमों के खिलाफ बताया. हाई कोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने इस मामले में न्याय मित्र की नियुक्ति की है।  याचिका में ये दलीलें दी गईं याचिकाकर्ता आर.के. श्रीवास ने याचिका में कहा "उन्होंने वर्ष 2000 में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था. वह वर्ष 2016 में उन्हें उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नत कर जिला न्यायाधीश (प्रारंभिक स्तर) बनाया गया. डेढ साल बाद ही उन्हें अप्रैल 2018 में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया गया. मध्य प्रदेश उच्च न्यायिक सेवा (भर्ती और सेवा की शर्तें) नियम, 2017 के नियम 14, उप-नियम 2 के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति लागू करने के लिए संबंधित अधिकारी की सेवा के 10 वर्ष पूर्ण या उसकी आयु 50 वर्ष होनी चाहिए थी।  डेढ़ साल में 4 तबादले किए याचिका में कहा गया "यह नियम उन सेवा सदस्यों पर लागू होता है जिन्हें 2017 के नियमों की धारा 2(ह) में परिभाषित किया गया है. सिविल जज और मजिस्ट्रेट के रूप में उनके पिछले कार्यकाल को नहीं गिना जा सकता, क्योंकि वह निचली न्यायपालिका का हिस्सा थी. सत्र न्यायाधीश के रूप में डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान उनका 4 बार तबादला किया गया. इसके अलावा उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई और निलंबित कर दिया गया।  नए सेवा नियम लागू करने पर आपत्ति याचिका में कहा गया "अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने से ठीक एक महीने पहले, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 1994 के सेवा नियमों को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इन नियमों को बनाते समय उनसे परामर्श नहीं लिया गया था. इसके बाद नए सेवा नियम लागू किए गए, जो मार्च 2018 से प्रभावी हुए. नए नियमों के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए आवश्यक सेवा अवधि को 20 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष कर दी गयी परंतु आयु सीमा 50 साल को यथावत रखा गया था।  मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को याचिकाकर्ता का आरोप है कि ऐसा जानबूझकर किया गया ताकि उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सके. निचली और उच्च न्यायपालिका में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान, उन्हें अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में बी या सी ग्रेड मिला, जिसका अर्थ है अच्छा या बहुत अच्छा होता है. याचिका के सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत श्रीवास्तव को न्यायमित्र नियुक्त किया. मामले की अगली सुनवाई 16 नवम्बर को होगी। 

ऊर्जा मंत्री तोमर की जानकारी, इंदौर में बिजली आपूर्ति मजबूत करने के लिए 50 MVA ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत

महालक्ष्मी नगर सब स्टेशन इंदौर में 50 एमवीए का अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत : ऊर्जा मंत्री तोमर इंदौर  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि दशहरा और दीपावली पर्व के दौरान बिजली की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने इंदौर के 132 केवी जीआईएस महालक्ष्मी नगर सब स्टेशन में 50 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किया है। इससे सब स्टेशन की क्षमता बढ़कर 100 एमवीए हो गई है। इस वृद्धि से संबंधित क्षेत्रों में बढ़ते विद्युत भार को संभालने और पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे महालक्ष्मी नगर सब स्टेशन से जुड़े व्यावसायिक एवं घरेलू उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया कि जीआईएस महालक्ष्मी नगर सब स्टेशन से 33 केवी के 7 फीडरों के माध्यम से पश्चिमी इंदौर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगभग 90 हजार उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति की जाती है। पिछले वर्ष की तुलना में इस क्षेत्र में विद्युत भार में हुई वृद्धि को देखते हुए विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्वीकृत कर स्थापित किया गया है। इससे सब स्टेशन की क्षमता बढ़ने के साथ बढ़ती विद्युत मांग के अनुरूप आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इंदौर के इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होती है सप्लाई 132 केवी जीआईएस महालक्ष्मी सब स्टेशन से 33 केवी के विभिन्न फीडरों के माध्यम से बेस्ट प्राइस, शालीमार टाउनशिप, इन्फोटेल, स्कीम नंबर 134, डी.बी. अपोलो, महालक्ष्मी नगर क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति की जाती है। इंदौर शहर की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता बढ़कर हुई 1366 एमवीए एमपी ट्रांसको इंदौर के अधीक्षण अभियंता जयेश चौपडा ने बताया कि महालक्ष्मी नगर सबस्टेशन में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से इंदौर शहर की कुल ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता बढ़कर 1366 एमवीए हो गई है। एमपी ट्रांसको इंदौर शहर में 12 अति उच्च दाब सब स्टेशनों के माध्यम से पारेषण व्यवस्था संचालित करती है। इनमें 220 केवी के पांच और 132 केवी के सात सब स्टेशन शामिल हैं। इंदौर की अधिकतम 894 मेगावॉट विद्युत मांग संभाल चुका है एमपी ट्रांसको चौपडा ने बताया कि पिछले वर्ष अक्टूबर में इंदौर शहर का अधिकतम विद्युत भार लगभग 610 मेगावॉट था, जो इस त्यौहार के मौसम में बढ़कर करीब 714 मेगावॉट तक पहुंच गया है। वहीं, इस वर्ष 25 मई को इंदौर की अब तक की सर्वाधिक 894 मेगावॉट विद्युत मांग दर्ज की गई थी। त्यौहारों और आगामी गर्मियों में संभावित बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए महालक्ष्मी नगर सब स्टेशन में अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। बारिश के दौरान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद इसे लगभग तीन माह के अल्प समय में स्थापित कर ऊर्जीकृत किया गया। इससे बढ़ते विद्युत भार के अनुरूप पारेषण व्यवस्था को सक्षम बनाए रखने में मदद मिलेगी।  

आवासीय निर्माण के नियम बदले, इंडस्ट्रियल एरिया में सिर्फ सिंगल-डबल बेडरूम फ्लैट बनेंगे

भोपाल   राज्य सरकार (MP Govt) ने इंडस्ट्रियल एरिया (Industrial Area) में रेजिडेंशियल निर्माण और इंडस्ट्रियल जमीन (industrial land) के उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इंडस्ट्रियल पॉलिसी एवं इन्वेस्टमेंट प्रोत्साहन विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, अब औद्योगिक क्षेत्रों में स्वतंत्र रेजिडेंशियल प्लॉट, रो-हाउस और प्लॉट आधारित रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को विकसित करने की अनुमति नहीं मिलेगी।  केवल बहुमंजिला और ग्रुप हाउसिंग को मिलेगी मंजूरी नए नियमों के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों के भीतर सिर्फ बहुमंजिला फ्लैट या ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स ही तैयार किए जा सकेंगे। इनमें एकल व दोहरे शयनकक्ष (सिंगल/डबल बेडरूम) वाली आवासीय इकाइयों के साथ-साथ हॉस्टल और उनसे जुड़ी सामाजिक-सामुदायिक सुविधाएं विकसित करने का प्रावधान रखा गया है। इसका सीधा उद्देश्य कम जगह में अधिक से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों के रहने की सुचारू व्यवस्था बनाना है। पुराने निर्माण और चालू प्रोजेक्ट्स पर नहीं पड़ेगा असर यह नियम उन जमीनों पर प्रभावी होगा जो आवासीय उपयोग के लिए आरक्षित हैं, साथ ही औद्योगिक इकाइयों को कर्मचारियों के लिए कैप्टिव आवासीय परिसरों हेतु दी जाने वाली भूमि पर भी लागू होगा। किसी भी परियोजना को शुरू करने से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति अनिवार्य होगी। निर्माण के दौरान मास्टर प्लान, भवन उपविधियों, पर्यावरण तथा अग्निशमन संबंधी सभी दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूर्व से जारी आवासीय योजनाओं और पुराने बने मकानों पर इन नए नियमों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कलेक्टर गाइडलाइन से तय होगा जमीन का मूल्य शासन ने औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि का मूल्य निर्धारण करने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया है। ग्रामीण व शहरी इलाकों में विकसित या विकसित होने वाले औद्योगिक क्षेत्रों की भूमि का मूल्य संबंधित क्षेत्र की असिंचित कृषि भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन दर को 0.6 से विभाजित कर निकाला जाएगा। किसी भी परिस्थिति में जमीन की न्यूनतम कीमत 250 रुपये प्रति वर्गमीटर से कम नहीं होगी। यदि गणना में दर इससे कम आती है, तो एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक को संचालक मंडल की पूर्व अनुमति से दरें बढ़ाने का अधिकार होगा। अतिरिक्त भूमि पर नहीं मिलेगी रियायत निवेश के आधार पर तय सीमा से अधिक जमीन लेने पर अतिरिक्त भू-भाग पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। उदाहरण स्वरूप, यदि कोई कंपनी संयंत्र एवं मशीनरी में 200 करोड़ रुपये का निवेश करती है और उसे 25 हेक्टेयर भूमि मिलती है, तो प्रीमियम छूट का लाभ केवल 20 हेक्टेयर पर ही मिलेगा। शेष 5 हेक्टेयर पर सामान्य दरें लागू होंगी। नियमों में 40 हेक्टेयर तक भूमि आवंटन पर प्रीमियम गणना के समय 50% तक छूट का प्रावधान शामिल है। अनुपयोगी जमीन के हस्तांतरण के कड़े नियम यदि किसी औद्योगिक इकाई के पास आवंटित जमीन का कोई हिस्सा अनुपयोगी पड़ा है, तो उसे शर्तों के अधीन पृथक कर स्थानांतरित किया जा सकेगा। इसके लिए अनुपयोगी हिस्सा कुल आवंटित भूमि का अधिकतम 50% या कम से कम 5,000 वर्गमीटर होना चाहिए, जहां स्वतंत्र पहुंच मार्ग की उपलब्धता अनिवार्य है। हस्तांतरण से पूर्व आवंटी को भू-भाटक, संधारण शुल्क सहित सभी बकायों का भुगतान करना होगा तथा विधिक समर्पण दस्तावेज पंजीकृत कराने होंगे। अधिकारियों के प्रशासनिक अधिकार तय प्रशासनिक पारदर्शी व्यवस्था हेतु भूमि और भवनों के आवंटन के अधिकार क्षेत्र भी निर्धारित कर दिए गए हैं। औद्योगिक भवनों के आवंटन का अधिकार क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक को सौंपा गया है। आवासीय तथा व्यावसायिक भूमि आवंटन में क्षेत्रीय कार्यकारी संचालक 10,000 वर्गमीटर तक की सीमा तक फैसला ले सकेंगे, जबकि इससे अधिक भूमि के आवंटन का निर्णय प्रबंध संचालक के स्तर से होगा। इसके अतिरिक्त, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर भी औद्योगिक आवास योजनाएं शुरू करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। इसके अलावा आवासीय भूखंडों का उप-विभाजन भी प्रतिबंधित रहेगा। सिर्फ फ्लैट और हाइराइज बिल्डिंग्स को मंजूरी नई व्यवस्था के तहत इंडस्ट्रियल एरिया में केवल फ्लैट आधारित और हाइराइज रेजिडेंशियल बिल्डिंगस विकसित की जा सकेंगी।  इनमें एक और दो बेडरूम वाले फ्लैट के साथ छात्रावास और जरूरी सामाजिक सुविधाओं के निर्माण का प्रावधान किया गया है। पुराने रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर नहीं पड़ेगा असर सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए नियम सिर्फ भविष्य में शुरू होने वाले प्रोजेक्ट्स पर लागू होंगे।  पहले से संचालित रेजिडेंशियल स्कीम और अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। निर्माण से पहले अधिकारी की मंजूरी जरूरी नए दिशा-निर्देश नोटिफाइड रेजिडेंशियल लेंड के साथ इंडस्ट्रियल यूनिट्स को आवंटित जमीन पर कर्मचारियों के लिए विकसित की जाने वाली कैप्टिव रेजिडेंशियल सुविधाओं पर भी लागू होंगे।  प्रत्येक परियोजना के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा निर्माण कार्यों में मास्टर प्लान, विकास योजना, भवन निर्माण नियमों, भूमि आवंटन की शर्तों, अग्नि सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी मानकों का पालन करना होगा। जमीन की कीमत ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम नहीं सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि के मूल्य निर्धारण का आधार भी तय किया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकसित या विकसित किए जाने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन का मूल्य संबंधित क्षेत्र की असिंचित कृषि भूमि के लिए निर्धारित कलेक्टर गाइडलाइन को 0.6 से भाग देकर निकाला जाएगा। हालांकि, किसी भी स्थिति में भूमि का मूल्य ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम नहीं होगा। यदि औद्योगिक क्षेत्र में तय गणना के आधार पर भूमि का मूल्य ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम आता है, तो एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक को संचालक मंडल की अनुमति से मूल्य बढ़ाने का अधिकार होगा। अतिरिक्त क्षेत्रफल पर कोई छूट नहीं निर्धारित निवेश सीमा से अधिक भूमि के लिए आवेदन करने पर अतिरिक्त क्षेत्रफल पर छूट नहीं मिलेगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई इकाई संयंत्र और मशीनरी में ₹200 करोड़ का निवेश करती है और उसे 25 हेक्टेयर जमीन आवंटित होती है, तो 20 हेक्टेयर पर ही छूट मिलेगी। बाकी 5 हेक्टेयर पर छूट लागू नहीं होगी। नियमों में प्रीमियम की गणना के दौरान 40 हेक्टेयर तक भूमि आवंटन पर भूमि के मूल्य में 50% छूट का भी उल्लेख है। अन्य औद्योगिक प्रयोजनों के लिए प्रीमियम की गणना में भी भूमि के मूल्य पर 50% छूट का प्रावधान दिया गया है।

IRCTC Travel Insurance: 45 पैसे में मिलेगा ₹10 लाख तक का कवर, जानें कैसे उठाएं लाभ

 नई दिल्ली ट्रेन का टिकट बुक करते समय अगर आप 500, 1000 या उससे भी ज्यादा रुपये खर्च कर रहे हैं, तो क्या सिर्फ 45 पैसे बचाने के लिए एक जरूरी सुविधा छोड़ देंगे? आईआरसीटीसी (IRCTC) के जरिए ऑनलाइन टिकट बुक करते समय यात्रियों को यात्रा बीमा लेने का विकल्प मिलता है. यह अनिवार्य नहीं है, यानी बीमा लेना या नहीं लेना पूरी तरह यात्री की मर्जी पर निर्भर करता है. लेकिन किसी गंभीर रेल दुर्घटना में यही छोटी-सी रकम यात्री या उसके परिवार के लिए बड़ी आर्थिक मदद का जरिया बन सकती है।  मौजूदा ऑनलाइन टिकट बीमा व्यवस्था के तहत पात्र यात्री की दुर्घटना में मौत या स्थायी रूप से पूरी तरह दिव्यांग होने पर 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिल सकता है. स्थायी आंशिक दिव्यांगता, अस्पताल में इलाज और मृतक के पार्थिव शरीर को ले जाने के खर्च के लिए भी बीमा लाभ का प्रावधान है. हालांकि, बीमा का भुगतान तभी होगा, जब घटना पॉलिसी के दायरे में आती हो और उसकी सभी शर्तें पूरी होती हों।  काउंटर टिकट पर भी है ये सुविधा? अब तक आईआरसीटीसी ऐप से ऑनलाइन टिकट बुकिंग में यात्रियों को यात्रा बीमा लेने का विकल्प मिलता रहा है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे बोर्ड को 27 अक्टूबर 2026 से रेलवे स्टेशनों के ​रिजर्वेशन काउंटरों से टिकट खरीदने वाले यात्रियों तक भी बीमा सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया है. इसका उद्देश्य स्टेशन के टिकट काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्रियों को भी यात्रा बीमा के दायरे में लाना है।  सिर्फ 45 पैसे में क्या-क्या मिलता है? आईआरसीटीसी ऐप से ई-टिकट बुक करते समय यात्रियों को बीमा का विकल्प दिया जाता है. इसका प्रीमियम टैक्स सहित प्रति यात्री 45 पैसे है. यात्री चाहे तो इसे चुन सकता है या बिना बीमा के भी टिकट बुक कर सकता है. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बीमा का विकल्प चुनना और बीमा के लिए पात्र होना दो अलग बातें हैं. बीमा लेने के बाद भी मुआवजा घटना की प्रकृति, नुकसान और पॉलिसी की शर्तों के आधार पर ही मिलता है. अगर आप ट्रेन से नियमित सफर करते हैं, तो टिकट बुक करते समय इस विकल्प को नजरअंदाज करने के बजाय इसकी शर्तें समझना फायदेमंद हो सकता है. बहुत कम प्रीमियम में मिलने वाला यह कवर किसी बड़ी दुर्घटना की स्थिति में परिवार को आर्थिक सहारा दे सकता है।  ट्रेन हादसे में कितना मुआवजा मिलेगा? मौजूदा आईआरसीटीसी ऑनलाइन टिकट ट्रैवल इंश्योरेंस में अलग-अलग तरह के दावों के लिए अधिकतम बीमा लाभ इस प्रकार बताया गया है।  बीमा दावे का प्रकार     अधिकतम बीमा राशि दुर्घटना में यात्री की मौत     ₹10 लाख स्थायी पूर्ण दिव्यांगता     ₹10 लाख स्थायी आंशिक दिव्यांगता     ₹7.5 लाख तक दुर्घटना में घायल होने पर अस्पताल का खर्च     ₹2 लाख तक मृतक के पार्थिव शरीर को ले जाने का खर्च     ₹10,000 तक ध्यान दें: ये अधिकतम बीमा राशियां हैं, हर मामले में मिलने वाली तय रकम नहीं. वास्तविक भुगतान नुकसान की स्थिति और बीमा पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक तय होगा।  यात्री की मौत होने पर परिवार को कैसे मिलेगी मदद? किसी रेल दुर्घटना में यात्री की मौत होने पर बीमा की रकम नामित व्यक्ति यानी नॉमिनी या पात्र कानूनी वारिस को मिल सकती है. इसलिए टिकट बुक करते समय बीमा का विकल्प चुनने के साथ उससे जुड़ी जानकारी और नॉमिनी का विवरण भी ध्यान से भरना चाहिए. दावा करने के लिए आम तौर पर ये दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:     बीमा का दावा फॉर्म     रेलवे प्राधिकरण की दुर्घटना संबंधी रिपोर्ट     मृत यात्री की पहचान से जुड़ी रिपोर्ट     नॉमिनी के पहचान पत्र     बैंक खाते का विवरण और कैंसल्ड चेक अगर बीमा में नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं है, तो कानूनी वारिस होने का प्रमाण, उत्तराधिकार संबंधी आदेश या पात्रता साबित करने वाले अन्य दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।  दिव्यांगता या इलाज के लिए कितना मुआवजा? बीमा का लाभ केवल यात्री की मौत होने पर ही नहीं मिलता. पॉलिसी की शर्तें पूरी होने पर स्थायी दिव्यांगता और दुर्घटना में घायल होने के बाद अस्पताल में इलाज के खर्च के लिए भी दावा किया जा सकता है. स्थायी दिव्यांगता के मामले में रेलवे की रिपोर्ट, डॉक्टर की रिपोर्ट, दिव्यांगता प्रमाणपत्र, प्राथमिकी (FIR) की प्रति और संबंधित चिकित्सा रिकॉर्ड मांगे जा सकते हैं।  अस्पताल में इलाज के मामले में रेलवे प्राधिकरण की रिपोर्ट, अस्पताल से छुट्टी मिलने का सारांश, इलाज के मूल बिल, भुगतान की रसीदें, डॉक्टर की पर्चियां और जांच रिपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है. दस्तावेजों की अंतिम सूची बीमा कंपनी और दावे की प्रकृति पर निर्भर करेगी. इसलिए दावा करने से पहले संबंधित बीमा कंपनी से जरूरी कागजात की पुष्टि कर लें।  बीमा क्लेम करने के लिए कितना समय मिलता है? मौजूदा आईआरसीटीसी ई-टिकट बीमा पॉलिसी के मुताबिक, बीमित घटना के चार महीने के भीतर यात्री, नॉमिनी या कानूनी वारिस को बीमा कंपनी के नजदीकी कार्यालय में लिखित दावा प्रस्तुत करना होता है. दावा करने के लिए ये कदम उठाएं:     बीमा कंपनी को सूचना दें: घटना की जानकारी देकर दावा करने की प्रक्रिया समझें.     रेलवे की रिपोर्ट जुटाएं: दुर्घटना से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज सुरक्षित रखें.     जरूरी प्रमाण तैयार करें: मौत, दिव्यांगता या इलाज के अनुसार सभी दस्तावेज इकट्ठा करें.     दावा फॉर्म भरें: पहचान पत्र, बैंक खाते का विवरण और अन्य जरूरी कागजात जमा करें.     अतिरिक्त दस्तावेज दें: बीमा कंपनी की ओर से मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध कराएं.     रिकॉर्ड संभालकर रखें: जमा किए गए दस्तावेजों और दावे की रसीद की प्रतियां अपने पास रखें.     समयसीमा और दस्तावेजों की जानकारी संबंधित बीमा कंपनी से जरूर जांच लें, ताकि जरूरी प्रक्रिया में देरी न हो. किन परिस्थितियों में नहीं मिलेगा बीमा का लाभ? यह समझना जरूरी है कि 45 पैसे का बीमा लेने का मतलब यह नहीं है कि यात्रा के दौरान होने वाली हर घटना पर मुआवजा मिलेगा. पॉलिसी में कुछ परिस्थितियों को बीमा के दायरे से बाहर रखा गया है. इनमें शामिल हो सकती हैं:     जानबूझकर खुद को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं     आत्महत्या या आत्महत्या की कोशिश … Read more