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बलौंगी को मिलेगी नई पुल की सौगात, गमाडा ने तैयार किया निर्माण प्लान

 मोहाली  मोहाली के बलौंगी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 120 मीटर लंबा नया हाईलेवल आरसीसी पुल बनाने की योजना है।ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) की इस परियोजना के तहत नए पुल के निर्माण के साथ पटियाला की राव पर बने मौजूदा पुल की मरम्मत और आसपास की सड़क को बेहतर बनाने का काम भी शामिल किया गया है। परियोजना पूरी होने पर इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है। परियोजना में केवल नया पुल बनाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि पटियाला की राव पर बने मौजूदा पुल की रेट्रोफिटिंग भी प्रस्तावित है। इसके तहत पुराने पुल की स्थिति के अनुरूप आवश्यक सुधार किए जाएंगे। इससे मौजूदा ढांचे को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। नए पुल के निर्माण और पुराने पुल की मरम्मत को साथ लेकर चलने से क्षेत्र में सड़क संपर्क से जुड़ी जरूरतों को व्यापक रूप से पूरा करने की योजना है। तैयार होगा नया ढांचा 120 मीटर लंबे हाईलेवल आरसीसी पुल का निर्माण इस परियोजना का प्रमुख हिस्सा है। इसके साथ अप्रोच रोड और मौजूदा सड़क की कारपेटिंग भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि पुल तक पहुंचने और वहां से आगे जाने के लिए सड़क की स्थिति अच्छी होना जरूरी है। सड़क और पुल के बीच बेहतर तालमेल से वाहन चालकों को आवागमन में सुविधा मिल सकती है। हालांकि, निर्माण पूरा होने के बाद यातायात में कितना सुधार होगा, यह सड़क के उपयोग, निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव पर निर्भर करेगा। पांच साल तक रखरखाव की भी व्यवस्था गमाडा के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों के मुताबिक परियोजना में निर्माण कार्य के बाद पांच साल तक रखरखाव का प्रावधान भी शामिल है। इसका उद्देश्य पुल और संबंधित सड़क कार्यों को निर्धारित अवधि तक उचित स्थिति में बनाए रखना है। निर्माण के बाद नियमित निरीक्षण और समय पर जरूरी मरम्मत से सड़क एवं पुल की उपयोगिता लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। जानकारी के मुाबिक परियोजना के लिए उपलब्ध कुल 185.96 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। सड़क और पुल की हालत काफी खस्ता बलौंगी क्षेत्र में यह परियोजना सड़क बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगी। अभी कि बात करें तो यहां सड़क और पुल की हालत काफी खस्ता है। परियोजना के पूरा होने के बाद लोगों को यहां से आने जाने में असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।  

रेल यात्रा में फोन पर तेज आवाज में वीडियो देखना पड़ सकता है महंगा, दक्षिण रेलवे ने जारी की सख्त चेतावनी

नई दिल्ली  ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर मोबाइल फोन को स्पीकर पर गाने सुनने या वीडियो देखने वाले यात्रियों पर अब रेलवे सख्त कार्रवाई करने जा रहा है।दक्षिण रेलवे ने चेतावनी दी है कि इस तरह से अन्य यात्रियों को परेशान करने वालों पर 1000 का जुर्माना लगाया जाएगा और उन्हें ट्रेन या स्टेशन से बाहर भी निकाला जा सकता है। नियम बार-बार तोड़ने पर 5000 तक का जुर्माना और 6 महीने तक की जेल भी हो सकती है। रेलवे कानून के तहत तय की गई सजा सस्ते इंटरनेट और स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल के बाद से ट्रेनों में स्पीकर पर रील, वीडियो या गाने चलाना एक आम समस्या बन चुका है। इससे आसपास बैठे अन्य यात्रियों के सफर में काफी खलल पड़ता है। यात्रियों की इसी परेशानी को दूर करने के लिए दक्षिण रेलवे ने अपने सभी मंडलों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। जन विश्वास अधिनियम के तहत संशोधित रेलवे एक्ट के अनुसार, ट्रेन या रेलवे परिसर में स्पीकर पर गाने बजाने, तेज आवाज में बात करने या सार्वजनिक उपद्रव करने पर 1000 का जुर्माना और ट्रेन या स्टेशन से बाहर निकाला जा सकता है। रेलवे अधिकारी के निर्देश के बाद भी नियम तोड़ने पर 5000 तक का जुर्माना या 6 महीने तक की कैद या दोनों हो सकती है। मेट्रो और अन्य रेलवे जोन में भी लागू हो सकता है नियम अधिकारियों के अनुसार, यह नियम देश के अन्य रेलवे जोनों और मेट्रो रेल नेटवर्क में भी लागू किया जा सकता है। मेट्रो के मौजूदा नियमों में भी सह-यात्रियों को परेशानी में डालने वालों पर जुर्माना लगाने और कोच से बाहर निकालने का प्रावधान है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि ट्रेन में टिकट चेकिंग स्टाफ (टीटीई) और वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर ही ₹1,000 का जुर्माना लगाने का अधिकार दिया गया है। कार्रवाई के साथ-साथ रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों को जागरूक करने के लिए घोषणाएं की जाएंगी। यह अभियान हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं के पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए चलाया जाएगा, ताकि लोग ईयरफोन या हेडफोन का इस्तेमाल करें और फोन पर भी जोर-जोर से बात करने से बचें।  

न्यूजीलैंड दौरे पर विराट कोहली के पास बड़ा रिकॉर्ड बनाने का मौका, बस करना होगा ये काम

 नई दिल्ली भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली के पास एक अद्भुत उपलब्धि अपने नाम करने का मौका होगा, जब वे न्यूजीलैंड में अगले महीने 5 मैचों की वनडे इंटरनेशनल सीरीज खेलेंगे। विराट कोहली का प्रदर्शन अगर न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में अच्छा रहा तो वे दुनिया के पहले और एकमात्र बल्लेबाज बन जाएंगे, जिनका औसत SENA देशों में यानी साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में औसत वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में 50 से ज्यादा का होगा। विराट कोहली का औसत साउथ अफ्रीका में वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में 76.38 का है। वहीं, इंग्लैंड में विराट ने 51.48 के औसत से रन बनाए हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया में विराट कोहली ने 50.03 के औसत से वनडे क्रिकेट में रनों का अंबार लगाया हुआ है। अब बारी न्यूजीलैंड की है, जहां रन मशीन विराट का औसत 49.66 का है। विराट को करना होगा ये काम अब बात करते हैं कि विराट कोहली का औसत कैसे 50 के पार जा सकता है। इसका पहला सिनेरियो यह है कि विराट कोहली अगर पांच मैच खेलते हैं और उन पांचों मैचों में आउट हो जाते हैं और सीरीज में कुल रन वे 254 बनाते हैं तो उनका औसत 50 से ज्यादा का हो जाएगा। दूसरा सिनेरियो यह है कि अगर वे चार मैचों में आउट होते हैं और एक मैच में नाबाद रहते हैं और कुल रन सीरीज में 204 बनाते हैं तो भी वे 50 से ज्यादा का औसत हासिल कर लेंगे। विराट कोहली को 50 से ज्यादा का औसत अगर न्यूजीलैंड में वनडे क्रिकेट में चाहिए तो इसके लिए तीसरा सिनेरियो यह है कि विराट 3 मैचों में आउट हो जाएं और दो मैचों में नाबाद लौटें, भले ही रन 154 ही बनाएं, तो भी उनका औसत न्यूजीलैंड की सरजमीं पर 50 के पार हो जाएगा और वे ऐसा करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन जाएंगे, जिनका औसत चार बड़े देशों में वनडे क्रिकेट में 50 से ज्यादा का है। ऑस्ट्रेलिया में भाग्य ने दिया था कोहली का साथ ऑस्ट्रेलिया दौरे से जुड़ी दिलचस्प बात यह है कि विराट कोहली ने अपनी आखिरी गेंद पर चौका जड़ा था। इससे उनका औसत 50 से जरा से ऊपर चला गया था। अगर वे सिंगल या डबल आखिरी गेंद पर लेते तो उनका औसत 50 से नीचे चला जाता और वह फिर कभी ऊपर नहीं जाता, क्योंकि वह उनका आखिरी ऑस्ट्रेलिया दौरा था। वनडे इंटरनेशनल करियर में 15 हजार से ज्यादा रन बना चुके विराट कोहली का करियर औसत 58.79 है। इतने ज्यादा रन किसी अन्य बल्लेबाज ने इतने अच्छे औसत से नहीं बनाए हैं। यहां तक कि स्ट्राइक रेट भी विराट का बाकी बल्लेबाजों के मुकाबले अच्छा है। 94.37 के स्ट्राइक रेट से वे अपने करियर में खेले हैं। 55 शतक और 79 अर्धशतक उनके नाम दर्ज हैं।

मान सरकार का बाल विवाह के खिलाफ अभियान, 2025 से अब तक 137 मामले रुकवाए

चंडीगढ़  पंजाब में बाल विवाह के खिलाफ अभियान के तहत वर्ष 2025 और जनवरी से जुलाई 2026 तक कुल 137 बाल विवाह रोके गए। इनमें 2025 में 64 और जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान 73 मामले शामिल हैं। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डाक्टर बलजीत कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार बच्चों के सुरक्षित बचपन, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए कानून का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है और जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। विभागों के बीच समन्वय और समय पर हस्तक्षेप से कई मामले रोके गए हैं। 2076 अधिकारी फील्ड में उतारे मंत्री ने बताया कि प्रदेशभर में 2,076 बाल विवाह रोकथाम अधिकारी नामित किए गए हैं। इनमें सभी बाल विकास परियोजना अधिकारी और सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के प्रिंसिपल शामिल हैं। अधिकारी गांवों और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने, संदिग्ध मामलों की पहचान करने और समय रहते कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का काम कर रहे हैं। पंजाब सरकार ने 10 फरवरी 2025 को अधिसूचना जारी कर सभी 23 जिलों में जिला स्तरीय बाल विवाह रोकथाम इकाइयां बनाई थीं। ये इकाइयां संभावित मामलों में तत्काल हस्तक्षेप, बच्चों के बचाव एवं पुनर्वास और विभागों के बीच समन्वय में भूमिका निभाती हैं। इस कुरीति के खत्म करना सामूजिक की जिम्मेदारी बलजीत कौर ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के बचपन, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य के अवसरों को प्रभावित करता है। इसे समाप्त करना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने माता-पिता, शिक्षकों, पंचायती राज संस्थाओं, धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और युवाओं से अभियान में भाग लेने की अपील की। बाल विवाह की सूचना मिलने पर संबंधित अधिकारियों को तुरंत बताने का आग्रह भी किया, ताकि बच्चों के अधिकारों और भविष्य की रक्षा की जा सके।  

EV के मामले में MP की बड़ी छलांग, इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स में 23वें से 7वें स्थान पर पहुंचा

भोपाल  प्रदेश में ई व्हीकल को लेकर लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है. प्रदेश में पिछले एक साल में ई व्हीकल पंजीयन में 124 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. प्रदेश में इलेक्ट्रिक टू व्हीलर वाहनों की संख्या बढ़कर 1 लाख 6 हजार 136 पहुंच गई है. ई व्हीकल को लेकर मध्य प्रदेश ने इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025 में बड़ी छलांग लगाते हुए 23वें स्थान से 7वें स्थान पर पहुंच गया है।  ई व्हीकल को लेकर सरकार उठाया  राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में ई व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. मध्य प्रदेश ई वाहन नीति 2025 के तहत प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को मॉडल ईवी सिटी के रूप में चिन्हित किया गया है. इन शहरों में ई व्हीकल के रूप में वातावरण तैयार किया गया है. राज्य सरकार प्रदेश भर में ई बस शुरू की ।  7 माह में 1 लाख ई व्हीकल रजिस्टर्ड प्रदेश में ई व्हीकल की संख्या तेजी से बढ़ रही है. साल 2024-25 में ई व्हीकल की संख्या सिर्फ 58 हजार 524 थी, जो साल 2025-26 में बढ़कर 1 लाख 31 हजार 158 पहुंच गई है. इसमें 124 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. प्रदेश में इलेक्ट्रिक टू व्हीलर की संख्या 54 हजार 108 से बढ़कर 1 लाख 6 हजार 136 पहुंच गई है।  थ्री व्हीलर वाहनों की संख्या 3 हजार 61 से बढ़कर 19 हजार पहुंच गई है, जबकि फोर व्हीलर वाहनों की संख्या 3486 पहुंच गई है. हालांकि इस साल ई व्हीकल की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है. प्रदेश में मार्च से सितंबर माह के बीच 1 लाख 64 ई व्हीकल के रजिस्ट्रेशन कराए गए हैं. यानि प्रदेश में खरीदे जा रहे वाहनों में 10 फीसदी लोग इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीद रहे हैं।  प्रदेश में 1780 चार्जिंग स्टेशन प्रदेश में ई व्हीकल के लिए चार्जिंग स्टेशन को लगातार बढ़ाया जा रहा है. प्रदेश में 1780 चार्जिंग स्टेशन स्थापित हो चुके हैं. इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कपंनियों द्वारा 650 स्टेशन और निजी चार्जिंग प्वाइंट ऑपरेटर द्वारा 1130 स्टेशन संचालित किए जा रहे हैं। 

दिवाली-छठ पर यात्रियों को राहत, खजुराहो से दिल्ली के लिए चलेगी फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन

महोबा  त्योहारों में यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेल प्रशासन खजुराहो-हजरत निजामुद्दीन के बीच फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन संचालित करेगा। कुल 13-13 ट्रिप चलेगी। खजुराहो से हजरत निजामुद्दीन के लिए 21 अक्टूबर से 18 नवंबर तक प्रत्येक सोमवार, बुधवार और शनिवार को रात 10:15 बजे रवाना होगी। यह छतरपुर, टीकमगढ़, झांसी, ग्वालियर, आगरा, मथुरा होते हुए अगले दिन सुबह 11 बजे निजामुद्दीन पहुंचेगी। वापसी में हजरत निजामुद्दीन से 22 अक्टूबर से 19 नवंबर तक प्रत्येक मंगलवार, गुरुवार और रविवार को दोपहर 12:30 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 3:30 बजे खजुराहो पहुंचेगी। ट्रेन में 5 स्लीपर, 12 सामान्य, 1 एसी थ्री टियर और 2 एसएलआर सहित कुल 20 कोच होंगे। झांसी रेलवे मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि परिचालनिक कारणों से खजुराहो-रुंधी फेस्टिवल एक्सप्रेस को रद्द कर उसके स्थान पर यह ट्रेन चलाई जा रही है।

अंतरिक्ष में कबाड़ हटाने के लिए भारत-जापान साथ आए, निष्क्रिय सैटेलाइट के मलबे पर नजर

नई दिल्ली     अंतरिक्ष में पुराने सैटेलाइट और उनके टुकड़ों से होने वाले खतरे को कम करने के लिए भारत और जापान की दो कंपनियां साथ काम करेंगी. भारत की सैमटेल एवियोनिक्स और जापान की बुल कंपनी ने इस दिशा में अपनी साझेदारी आगे बढ़ाई है.  गुरुग्राम में दोनों कंपनियों के अधिकारियों ने इस योजना पर चर्चा की. इसका मकसद ऐसी तकनीक पर काम करना है, जिससे अंतरिक्ष में पहले से मौजूद मलबे को हटाने और आगे कचरा बढ़ने से रोकने में मदद मिल सके।  अंतरिक्ष में कई सैटेलाइट काम करते हैं. इनकी मदद से मौसम की जानकारी मिलती है और संचार जैसी जरूरी सेवाएं चलती हैं. लेकिन जब कोई सैटेलाइट काम करना बंद कर देता है, तो उसका मलबा अंतरिक्ष में रह जाता है. इसके टुकड़े दूसरे सैटेलाइट से टकराकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसी समस्या को कम करने के लिए दोनों कंपनियां अपनी तकनीक को एक साथ इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रही हैं।  सितंबर में हुआ था समझौता सैमटेल एवियोनिक्स और बुल कंपनी के बीच सितंबर 2026 में बेंगलुरु स्पेस एक्सपो के दौरान समझौता हुआ था. अब दोनों कंपनियां अपनी तकनीक को जोड़ने और उसे बेहतर बनाने के तरीकों पर काम कर रही हैं. वे यह भी देख रही हैं कि भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है. सैमटेल एवियोनिक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ पुनीत कौरा ने कहा कि अंतरिक्ष को सुरक्षित रखना किसी एक कंपनी के लिए आसान नहीं है. इसके लिए अलग-अलग कंपनियों को मिलकर काम करना होगा।  क्या है जापानी कंपनी की तकनीक? बुल कंपनी की तकनीक को पोस्ट-मिशन डिस्पोजल (पीएमडी) कहा जाता है. इसका काम सैटेलाइट का मिशन पूरा होने के बाद उसे अंतरिक्ष में बेकार पड़े रहने से रोकने में मदद करना है. इससे आगे चलकर अंतरिक्ष में नया कचरा बनने की समस्या कम हो सकती है. लेकिन यह तकनीक पहले से अंतरिक्ष में मौजूद मलबे को नहीं हटा सकती. इसी वजह से इसे सैमटेल के डेब्रिस रिमूवल व्हीकल (डीआरवी) के साथ जोड़ने की योजना पर विचार किया जा रहा है।  दोनों कंपनियां यह भी देख रही हैं कि बुल के उपकरण की मदद से पहले से अंतरिक्ष में मौजूद मलबे को हटाने में कैसे मदद मिल सकती है. अभी इस योजना पर काम चल रहा है. कंपनियों ने किसी खास मिशन या रॉकेट लॉन्च की तारीख नहीं बताई है।  अंतरिक्ष में कचरा हटाना क्यों जरूरी? बुल कंपनी के सीईओ और संस्थापक यासुहितो उटो ने कहा कि अंतरिक्ष पूरी दुनिया के लिए जरूरी है. उनकी कंपनी की तकनीक आगे चलकर नया कचरा बनने से रोकने में मदद कर सकती है. लेकिन पुराने मलबे को हटाने के लिए दूसरी तकनीकों की भी जरूरत है।  अंतरिक्ष में मौजूद मलबे से काम कर रहे सैटेलाइट को नुकसान पहुंच सकता है. इससे मौसम, संचार और दूसरी सेवाओं पर भी असर पड़ने का खतरा रहता है. इसलिए सैटेलाइट का काम पूरा होने के बाद उसे सही तरीके से हटाना जरूरी है।  सैमटेल और बुल कंपनी इसी समस्या का हल खोजने के लिए साथ काम कर रही हैं. हालांकि, अभी यह शुरुआती तैयारी है. आगे यह देखना होगा कि दोनों कंपनियां अपनी तकनीक को किस तरह इस्तेमाल करती हैं और मलबा हटाने का काम कब शुरू हो पाता है। 

900 किलो सोने के गहने पहन गरबा करने पहुंचीं 15 हजार महिलाएं, दिखी अनोखी परंपरा

राजकोट गुजरात में नवरात्रि के दौरान भक्ति, शक्ति और संस्कृति के अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं. कहीं पारंपरिक गरबा की धूम है, तो कहीं सदियों पुरानी परंपराएं लोगों का ध्यान खींच रही हैं. इसी बीच राजकोट में आयोजित अहीर गरबा महोत्सव का एक नजारा चर्चा का विषय बन गया. यहां 15 हजार से ज्यादा अहीर समाज की महिलाएं पारंपरिक परिधानों और सोने के आभूषणों से सजकर रास-गरबा करने पहुंचीं. आयोजन में शामिल महिलाओं के आभूषणों का कुल वजन करीब 900 किलो और उनकी अनुमानित कीमत 1300 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है. सोने के गहनों से सजी महिलाओं का सामूहिक गरबा इस महोत्सव का खास आकर्षण रहा।  900 किलो सोना और पारंपरिक गरबा, देखने उमड़ी लोगों की नजरें राजकोट में आहिर सेना की ओर से नौ दिवसीय अहीर गरबा महोत्सव का आयोजन किया गया है. इसका उद्देश्य समाज की संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक आस्था को जीवंत बनाए रखना है. महोत्सव में अहीर समाज के भाई-बहन पारंपरिक अंदाज में रास-गरबा कर रहे हैं।  नवरात्रि के सातवें दिन इस आयोजन की भव्यता देखते ही बनी. हजारों की संख्या में अहीर समाज की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा पहनकर गरबा मैदान पहुंचीं. उनके गले में सोने के हार, हाथों में कंगन और शरीर पर सजे दूसरे पारंपरिक आभूषण आकर्षण का केंद्र रहे. इन आभूषणों की चमक के बीच जब हजारों महिलाओं ने एक साथ पारंपरिक रास खेलना शुरू किया, तो पूरा मैदान उत्सव के रंग में रंग गया।  इस आयोजन की खासियत सिर्फ सोने के गहने और उनकी कीमत नहीं थी. महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा, रास खेलने की शैली और सामूहिक भागीदारी ने अहीर समाज की सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की।  गरबा के साथ भगवान द्वारकाधीश की महाआरती अहीर गरबा महोत्सव में भक्ति का रंग भी खास रहा. आयोजन के दौरान भगवान श्री द्वारकाधीश की महाआरती की गई. पारंपरिक रास-गरबा और महाआरती के संगम ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया. नवरात्रि के इस उत्सव में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा एक साथ नजर आईं।  अहीर समाज के लिए गरबा महज नृत्य नहीं, बल्कि अपनी पहचान और विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है. पारंपरिक पोशाकों में सजी महिलाओं का एक साथ रास करना सामूहिक एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी दर्शाता है।  परंपरा, आस्था और एकता का संगम गुजरात में नवरात्रि के दौरान गरबा का विशेष महत्व है. इस दौरान लोग पारंपरिक नृत्य, पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों के जरिए त्योहार मनाते हैं. राजकोट का अहीर गरबा महोत्सव भी इसी सांस्कृतिक परंपरा का एक भव्य उदाहरण बनकर सामने आया है।  करीब 900 किलो सोने के आभूषणों और 1300 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित कीमत की चर्चा ने इस आयोजन को खास पहचान दी है. वहीं, भगवान द्वारकाधीश की महाआरती और हजारों महिलाओं की सामूहिक भागीदारी ने इसे आस्था और परंपरा से जुड़ा यादगार उत्सव बना दिया। 

महिला प्रीमियर लीग 2027 ऑक्शन में 146 खिलाड़ी शामिल, 27 स्लॉट के लिए होगी टक्कर

 नई दिल्ली महिला प्रीमियर लीग (WPL) 2027 के ऑक्शन का आयोजन 28 अक्टूबर को कोच्चि में होगा. इस नीलामी में भारतीय बल्लेबाज जी कमलिनी, ऑलराउंडर स्नेह राणा, ऑस्ट्रेलिया की कप्तान सोफी मोलिन्यू और श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू समेत कुल 146 खिलाड़ियों पर बोली लगेगी. हालांकि, फ्रेंचाइजी के पास खिलाड़ियों को खरीदने के लिए सिर्फ 27 स्लॉट उपलब्ध हैं।  ऑक्शन पूल में 119 भारतीय खिलाड़ी शामिल हैं, जिनमें 22 कैप्ड और 97 अनकैप्ड खिलाड़ी हैं. घरेलू खिलाड़ियों के लिए सिर्फ 20 स्लॉट खाली हैं. वहीं, विदेशी खिलाड़ियों की सूची में 27 नाम हैं, जिनमें एसोसिएट देशों की छह खिलाड़ी भी शामिल हैं. विदेशी खिलाड़ियों के लिए कुल सात स्लॉट उपलब्ध हैं. इस सूची में 14 कैप्ड और 13 अनकैप्ड खिलाड़ी हैं।  दो खिलाड़ियों का बेस प्राइस 50 लाख रुपये नीलामी में सबसे ज्यादा बेस प्राइस 50 लाख रुपये रखा गया है. इस श्रेणी में सिर्फ दो खिलाड़ी हैं- इंग्लैंड की सोफिया डंकली और ऑस्ट्रेलिया की सोफी मोलिन्यू. मोलिन्यू को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने रिलीज कर दिया था. वहीं, डंकली आखिरी बार 2024 में गुजरात जायंट्स की ओर से WPL में खेली थीं।  मुंबई इंडियंस से रिलीज हुईं जी कमलिनी ने 40 लाख रुपये के बेस प्राइस पर अपना नाम दर्ज कराया है. इस श्रेणी में उनके साथ किरण नवगिरे और ऑस्ट्रेलिया की हीथर ग्राहम व जेस जोनासन भी शामिल हैं।  स्नेह राणा और अटापट्टू 30 लाख के बेस प्राइस पर कुल 30 खिलाड़ियों ने 30 लाख रुपये के बेस प्राइस पर रजिस्ट्रेशन कराया है. इनमें दिल्ली कैपिटल्स से रिलीज हुईं स्नेह राणा और श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू भी शामिल हैं. वहीं, सिर्फ तीन खिलाड़ियों ने 20 लाख रुपये के बेस प्राइस वाली श्रेणी चुनी है. बाकी 107 खिलाड़ियों का बेस प्राइस 10 लाख रुपये है।  यूपी वॉरियर्स के पास सबसे बड़ा पर्स ऑक्शन में यूपी वॉरियर्स की टीम सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आ सकती है. फ्रेंचाइजी ने सबसे ज्यादा नौ खिलाड़ियों को रिलीज किया है. इनमें डिएंड्रा डॉटिन, क्लो ट्रायन और किरण नवगिरे जैसे नाम शामिल हैं. टीम ने तारा नॉरिस को 10 लाख रुपये में मुंबई इंडियंस के साथ ट्रेड भी किया है।  यूपी वॉरियर्स नीलामी में 3.75 करोड़ रुपये के सबसे बड़े पर्स के साथ उतरेगी. टीम के पास भरने के लिए सबसे ज्यादा स्लॉट भी हैं. ऐसे में फ्रेंचाइजी की नजरें उन खिलाड़ियों पर होंगी, जो टीम को मजबूत करने के साथ उसके खाली स्थानों को भर सकें। 

वर्षा जल संरक्षण से बदलेगी गांव की सूरत, ग्राम दर्री में 24 लाख लीटर से ज्यादा पानी सहेजने की तैयारी

जल संरक्षण से बदलेगी ग्राम दर्री की तस्वीर, 24 लाख 30 हजार लीटर वर्षा जल सहेजने की अनूठी पहल मरवाही के डोंगरी टोला में निर्मित 3 हजार कंटूर ट्रेंच बनेंगे जल संरक्षण का मजबूत आधार, 250 परिवारों को मिलेगी राहत जल संरक्षण के साथ रोजगार का भी सृजन, निर्माण कार्य से ग्रामीणों को मिला 3166 मानव दिवस रोजगार रायपुर,  जल ही जीवन है और जल संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य का आधार है। इसी भावना को साकार करते हुए गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में वर्षा जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिले के मरवाही विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत दर्री के डोंगरी टोला में लगभग 3 हजार स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच का निर्माण कर 24 लाख 30 हजार लीटर वर्षा जल संग्रहण की क्षमता विकसित की गई है। यह पहल न केवल वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल स्तर बढ़ाने में सहायक बनेगी, बल्कि गर्मी के दिनों में पानी की समस्या से जूझने वाले लगभग 250 ग्रामीण परिवारों के लिए भी भविष्य में राहत की नई उम्मीद लेकर आई है। पहाड़ियों से बहने वाला पानी अब बनेगा जल संरक्षण का आधार पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में वर्षा के दौरान बड़ी मात्रा में पानी बहकर निकल जाता है। इससे एक ओर वर्षा जल का समुचित उपयोग नहीं हो पाता, वहीं दूसरी ओर मिट्टी का कटाव और भूजल स्तर में गिरावट जैसी समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत दर्री के डोंगरी टोला में वैज्ञानिक पद्धति से स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया गया है। पहाड़ी ढलानों पर सीढ़ीनुमा क्रम में बनाई गई ये ट्रेंच वर्षा के पानी के बहाव को धीमा करने और उसे एकत्रित करने का कार्य करेंगी। ट्रेंच में संग्रहित पानी धीरे-धीरे जमीन में समाहित होगा, जिससे भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा। इस व्यवस्था से वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के साथ प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण में भी मदद मिलने की उम्मीद है। 24 लाख 30 हजार लीटर जल संग्रहण क्षमता से मजबूत होगी जल सुरक्षा डोंगरी टोला में निर्मित लगभग 3 हजार कंटूर ट्रेंच की कुल जल संग्रहण क्षमता 24 लाख 30 हजार लीटर है। यह क्षमता क्षेत्र में वर्षा जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वर्षा के दौरान इन संरचनाओं में पानी एकत्रित होने से आसपास की भूमि में नमी बनाए रखने, मिट्टी के कटाव को कम करने तथा भूजल पुनर्भरण में सहायता मिलेगी। विशेष रूप से गर्मी के मौसम में जल संकट का सामना करने वाले लगभग 250 परिवारों के लिए यह पहल दीर्घकालीन जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। भूजल स्तर में सुधार होने से आसपास के कुओं और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों को भी लाभ मिलने की संभावना है। जल संरक्षण के साथ ग्रामीणों को मिला रोजगार, 3166 मानव दिवस का सृजन इस पहल की विशेषता यह है कि पर्यावरण एवं जल संरक्षण के साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित किए गए हैं। कंटूर ट्रेंच निर्माण कार्य में प्रतिदिन लगभग 150 से 160 श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक निर्माण कार्य के माध्यम से कुल 3166 मानव दिवस रोजगार का सृजन हो चुका है। स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से ग्रामीण परिवारों को आजीविका का सहारा मिला है। इस प्रकार जल संरक्षण का यह कार्य प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की दिशा में भी उपयोगी साबित हो रहा है। भूजल पुनर्भरण से बढ़ेगी हरियाली, पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा प्रोत्साहन स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच निर्माण से वर्षा जल के संरक्षण के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है। वर्षा जल के जमीन में समाहित होने से मिट्टी में नमी बढ़ेगी, जिससे आसपास के पेड़-पौधों और वनस्पतियों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां निर्मित होंगी। इसके साथ ही तेज वर्षा के दौरान पानी के बहाव को नियंत्रित करने से मिट्टी के कटाव में कमी आएगी। भूमि में नमी बनाए रखने से कृषि एवं अन्य स्थानीय आवश्यकताओं के लिए जल उपलब्धता में भी सुधार की संभावना है। जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका का संगम बन रहा डोंगरी टोला ग्राम पंचायत दर्री के डोंगरी टोला में विकसित जल संरक्षण संरचनाएं इस बात का उदाहरण हैं कि प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक एवं सुनियोजित प्रबंधन ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव का आधार बन सकता है। एक ओर वर्षा जल को सहेजने के लिए स्थायी संरचनाएं विकसित की गई हैं, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्य के माध्यम से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध हुआ है। लगभग 250 परिवारों के लिए जल सुरक्षा की उम्मीद जगाने वाली यह पहल आने वाले समय में भूजल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।