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दीपावली से पहले नगरीय निकायों में वेतन और पेंशन का भुगतान, नगरीय प्रशासन विभाग ने निकायों को जारी किए 164.65 करोड़ रुपए

रायपुर. दीपावली जैसे बड़े पर्व पर नगरीय निकायों के अधिकारियों-कर्मचारियों का वेतन और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन न रुके, इसके लिए उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव की संवेदनशील पहल पर विभाग ने निकायों को कुल 164 करोड़ 65 लाख रुपए आबंटित किए हैं। विभाग ने लंबित वेतन के लिए 59 करोड़ 53 लाख रुपए और पेंशन भुगतान के लिए अतिरिक्त अनुदान के रूप में 34 करोड़ 85 लाख रुपए आबंटित किए हैं। इससे नगरीय निकायों को दीपावली के पहले अपने अधिकारी-कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित भुगतान में मदद मिलेगी। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए नगरीय निकायों में लंबित वेतन, पेंशन और अन्य आवश्यक भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि इस पर्व के अवसर पर अधिकारी-कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनधारियों को अपने देय भुगतान के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। उनके निर्देशों के अनुरूप विभाग ने विभिन्न मदों में राशि की व्यवस्था की है। इससे नगरीय निकाय वेतन और पेंशन के साथ अपनी अन्य आवश्यक वित्तीय जिम्मेदारियों का भी समय पर निर्वहन कर सकेंगे। साथ ही निकायों में स्वच्छता, नागरिक सुविधाओं एवं अन्य आवश्यक सेवाओं का संचालन भी निर्बाध रूप से हो सकेगा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने स्वच्छता दीदियों के मानदेय का भी विशेष ध्यान रखा है। मिशन क्लीन सिटी के अंतर्गत स्वच्छता दीदियों के अक्टूबर से दिसम्बर-2026 तक के मानदेय भुगतान के लिए 23 करोड़ 51 लाख रुपए आबंटित किए गए हैं। इससे नगरीय निकायों में स्वच्छता कार्यों से जुड़ी दीदियों के मानदेय भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। विभाग ने नगरीय निकायों की नियमित वित्तीय जरूरतों और नागरिक सुविधाओं से संबंधित कार्यों के लिए भी राशि उपलब्ध कराई है। नियमित मासिक चुंगी मद के अंतर्गत अक्टूबर 2026 के लिए 21 करोड़ 9 लाख रुपए आबंटित किए गए हैं। वहीं, नगरीय निकायों में आवश्यक मरम्मत एवं संधारण कार्य निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए अपार निधि मरम्मत-संधारण के द्वितीय त्रैमासिक मद में 22 करोड़ 60 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त बिलासपुर नगर निगम को नगरोत्थान योजना की द्वितीय किस्त के रूप में 3 करोड़ 8 लाख रुपए प्रदान किए जा रहे हैं। दीपावली के पूर्व इस राशि के आबंटन से नगरीय निकायों को एक साथ कई वित्तीय जरूरतें पूरी करने में सहायता मिलेगी। अधिकारी-कर्मचारियों के लंबित वेतन और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन के भुगतान के साथ स्वच्छता दीदियों के मानदेय, नियमित वित्तीय दायित्वों, मरम्मत-संधारण और विकास कार्यों के लिए भी राशि उपलब्ध होगी।

हरियाणा में विकास को मिलेगी नई रफ्तार, ऑस्ट्रेलिया से साझेदारी और गांवों में खुलेंगे 582 नॉलेज सेंटर

चंडीगढ़ हरियाणा में हाल ही में सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं और प्रदेश ने कई मामलों में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इसी क्रम में इस आर्टिकल के जरिए हम हाल ही में हुए घटनाक्रमों का जिक्र करेंगे और उनके बारे में विस्तार से बात करेंगे। सितंबर महीने के शुरुआत में चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भारत में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के बीच एक अहम बैठक की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने शिक्षा, कौशल विकास, आधुनिक कृषि, खेल और पर्यटन में तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की। इस मीटिंग का उद्देश्य राज्य के युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कौशल और रोजगार के नए अवसर तैयार करना और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का आदान-प्रदान करना रहा। फरीदाबाद ने हासिल की 14वीं रैंक केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण' की राष्ट्रीय रैंकिंग में हरियाणा के फरीदाबाद शहर ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश भर में चौदहवां स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि शहर में प्रदूषण नियंत्रण उपायों, धूल प्रबंधन और वायु गुणवत्ता सुधार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। अल्पसंख्यक आयोग विधेयक को मंजूरी सितंबर महीने में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक को औपचारिक मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों का संरक्षण करना, उनके कल्याणकारी कार्यक्रमों की निगरानी करना और शिकायतों का कम समय में निवारण सुनिश्चित करना है। इसके द्वार अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया जाएगा। अल्पसंख्यकों को सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्तर पर मजबूत किया जाएगा। जांच के दौरान आयोग के पास सिविल कोर्ट के समान ही शक्तियां होंगी। आयोग अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर अनुसंधान और अध्ययन कर सकता है। हरियाणा में बनेंगे 'विलेज नॉलेज सेंटर' ग्रामीण बुनियादी ढांचे को डिजिटल युग के अनुसार बनाने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 582 विलेज नॉलेज सेंटर (Village Knowledge Centres) स्थापित करने की एलान किया। इसमें कुल 514 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। विलेज नॉलेज सेंटर के जरिए गांवों में उच्च गति की डिजिटल कनेक्टिविटी, युवाओं के लिए ई-लाइब्रेरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। वहीं, छह सितंबर को पंचकूला में अतंर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 मनाया गया। इसका उद्देश्य गिद्धों के पारिस्थितिक महत्व और उनकी संख्या में गिरावट के लिए जिम्मेदार खतरों से निपटने को लेकर था। हरियाणा में दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। रोजाना प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता बढ़ी है। 1127 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध उपलब्धता के साथ हरियाणा ने तीसरा स्थान हासिल किया। हरियाणा ने तीसरे साल भी देश में रक्तदान के मामले में बड़ी भूमिका अदा की। देश में हरियाणा सबसे ज्यादा रक्त दान करने वाला पहला राज्य बना है।

धान खरीदी केंद्रों की संख्या 2,740 से बढ़कर हुई 3,100, किसानों को मिलेगी लंबी कतारों से राहत

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी को अधिक सुगम, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश के किसानों को धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े, उपार्जन केंद्रों में अनावश्यक प्रतीक्षा से राहत मिले और कम समय में अधिक किसान अपनी उपज का विक्रय कर सकें, इस उद्देश्य से राज्य सरकार ने प्रदेश में 360 नए धान उपार्जन केंद्रों को स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही प्रदेश में धान उपार्जन केंद्रों की संख्या 2,740 से बढ़कर 3,100 हो गई है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि अन्नदाता किसानों की मेहनत का सम्मान और उनकी सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। धान खरीदी की प्रक्रिया में किसानों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि नए उपार्जन केंद्रों की स्वीकृति का उद्देश्य केवल केंद्रों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों के लिए धान विक्रय की पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल, सुलभ और सुविधाजनक बनाना है। नए उपार्जन केंद्रों से किसानों को मिलेगी बड़ी राहत राज्य सरकार द्वारा 360 नए उपार्जन केंद्रों की स्वीकृति से प्रदेश में धान खरीदी की व्यवस्था का व्यापक विस्तार होगा। नए केंद्रों के प्रारंभ होने से किसानों को अपने गांव अथवा आसपास के क्षेत्रों में धान विक्रय की सुविधा मिलेगी। इससे धान लेकर दूरस्थ उपार्जन केंद्रों तक जाने की आवश्यकता कम होगी और परिवहन पर होने वाले खर्च में भी बचत होगी। अब तक जिन उपार्जन केंद्रों पर अधिक संख्या में किसानों के पहुंचने के कारण भीड़ और प्रतीक्षा की स्थिति बनती थी, वहां भी नए केंद्रों के प्रारंभ होने से दबाव कम होगा। किसानों का आवागमन विभिन्न केंद्रों में विभाजित होने से धान की तौल, गुणवत्ता परीक्षण और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने में सहायता मिलेगी। इस निर्णय से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कम समय देना पड़ेगा और वे अपने कृषि कार्यों तथा अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए अधिक समय निकाल सकेंगे। विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों को इससे सुविधा मिलने की अपेक्षा है। दो लाख से अधिक किसानों को मिलेगा सीधा लाभ प्रदेश में स्वीकृत 360 नए धान उपार्जन केंद्रों से दो लाख से अधिक पंजीकृत किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इन किसानों को नए केंद्रों के माध्यम से टोकन प्राप्त करने और निर्धारित अवधि में धान विक्रय करने की सुविधा उपलब्ध होगी। नए उपार्जन केंद्रों के संचालन से धान खरीदी की क्षमता का विस्तार होगा। एक ही समय में अधिक केंद्रों पर खरीदी होने से अधिक संख्या में किसानों का धान निर्धारित अवधि के भीतर खरीदा जा सकेगा। इससे पुराने केंद्रों पर किसानों की निर्भरता कम होगी और धान विक्रय के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा की समस्या में कमी आएगी। राज्य सरकार का प्रयास है कि धान खरीदी की व्यवस्था ऐसी हो, जिसमें किसानों को कम दूरी तय करनी पड़े, कम समय लगे और उनकी उपज का विक्रय सुचारू रूप से संपन्न हो। 15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी, 15 जनवरी तक चलेगी प्रक्रिया राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की है। निर्धारित अवधि में प्रदेश के पंजीकृत किसानों से धान की खरीदी की जाएगी। धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले उपार्जन केंद्रों पर आवश्यक तैयारियां पूरी करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसानों को शुरुआत से ही व्यवस्थित सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। नए केंद्रों की स्वीकृति से खरीदी कार्य को अधिक विकेंद्रीकृत बनाने में सहायता मिलेगी। इससे सीमित केंद्रों पर किसानों की भीड़ एकत्र होने के बजाय विभिन्न केंद्रों पर धान खरीदी की प्रक्रिया समानांतर रूप से संचालित हो सकेगी। ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप से घर बैठे मिलेगी सुविधा धान विक्रय के लिए किसानों को समितियों में बार-बार आने और टोकन प्राप्त करने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता कम करने के उद्देश्य से इस वर्ष भी ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई है। किसान अपने मोबाइल फोन से घर बैठे धान विक्रय के लिए टोकन प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। इससे किसानों को अपनी सुविधा के अनुसार टोकन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और टोकन लेने के लिए निर्धारित समय में समिति पहुंचने की बाध्यता नहीं रहेगी। ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से किसानों को धान विक्रय की पूर्व तैयारी करने में भी सुविधा होगी। वे निर्धारित तिथि के अनुसार धान के परिवहन एवं विक्रय की योजना बना सकेंगे। इससे उपार्जन केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ कम करने और खरीदी कार्य को व्यवस्थित बनाए रखने में सहायता मिलेगी। 2 से 5 नवंबर तक ट्रायल रन, 10 नवंबर से मिलेंगे टोकन धान खरीदी व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए राज्य सरकार ने अग्रिम तैयारियों पर विशेष जोर दिया है। इसके अंतर्गत 2 नवंबर से 5 नवंबर 2026 तक समितियों में ट्रायल रन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान टोकन संबंधी प्रक्रियाओं और आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जाएगा, ताकि वास्तविक खरीदी प्रारंभ होने से पहले संभावित समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान किया जा सके। किसानों के लिए 10 नवंबर 2026 से टोकन प्राप्त करने की व्यवस्था प्रारंभ होगी। इससे किसानों को 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी के लिए पहले से तैयारी करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। समय और परिवहन खर्च की बचत से किसानों को होगा आर्थिक लाभ नए उपार्जन केंद्रों की स्थापना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य धान विक्रय से जुड़े किसानों के अतिरिक्त खर्च को कम करना भी है। दूरस्थ उपार्जन केंद्रों तक धान पहुंचाने के लिए किसानों को परिवहन की व्यवस्था करनी पड़ती है। अधिक दूरी होने पर परिवहन खर्च बढ़ता है और समय भी अधिक लगता है। नए केंद्रों के माध्यम से धान विक्रय की सुविधा नजदीक उपलब्ध होने पर किसानों को इन दोनों स्तरों पर राहत मिलेगी। इसी प्रकार, खरीदी केंद्रों पर भीड़ कम होने से किसानों को धान विक्रय के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। इससे उनकी श्रमशक्ति और समय की बचत होगी। राज्य सरकार की मंशा है कि … Read more

दिवाली के बाद झारखंड में सोहराई की धूम, जानें पशुओं की पूजा से जुड़ी अनोखी परंपराएं

 रांची  आदिवासी समाज में दिवाली के अवसर पर सोहराई पर्व मनाने की विशेष परंपरा है। इस वर्ष यह पर्व 9 नवंबर को मनाया जाएगा। सोहराई को पशुधन और अन्न धन की पूजा का पर्व माना जाता है। आदिवासी समाज में गाय, बैल और बकरी का जीवनयापन में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसी कारण इस पर्व में पशुओं की पूजा कर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट की जाती है।जगलाल पाहन के अनुसार, सोहराई कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। पर्व के दिन सुबह पशुओं को घरों से बाहर निकालकर नहलाया जाता है। इसके साथ ही हल, फावड़ा और खेती में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरणों की भी सफाई कर पूजा की जाती है। इसके बाद गोहाल घर यानी पशुओं के रहने के स्थान की विशेष पूजा होती है। महुआ की डाली से खूंटा बनाकर गोहाल घर के कोने में गाड़ा जाता है और पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की जाती है। पशुओं को बांधने वाली जगह पर अक्षत और टीका लगाया जाता है। चावल के घोल से रंगोली जैसी कलाकृतियां भी बनाई जाती हैं इस दिन पशुओं के सींगों पर तेल लगाया जाता है और उन्हें फूलों से सजाया जाता है। चावल के घोल से उनके शरीर पर भी पारंपरिक आकृतियां बनाई जाती हैं। शाम को पटाखे और आवाजें निकालकर पशुओं को दौड़ाया जाता है। जगलाल पाहन के मुताबिक, इसके पीछे मान्यता है कि मनुष्यों के साथ रहने वाले पशु अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति और संकट के समय भागने की क्षमता न भूलें। शाम को गोहाल घर में पशुओं को बांधने से पहले उन्हें उड़द, घघरा और प्रसाद स्वरूप पारंपरिक हड़िया दिया जाता है। पशुओं के बर्तन से उनके मालिक भी खाते हैं। पूजा में चढ़ाए गए मुर्गे से पारंपरिक व्यंजन सूढ़ी तैयार कर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। जगलाल पाहन बताते हैं कि सोहराई पशुधन के महत्व को स्वीकार करने का पर्व है। पहले आदिवासी समाज की आजीविका मुख्य रूप से पशुओं पर निर्भर थी। संकट के समय गाय, बैल और बकरी बेचकर परिवार अपनी जरूरतें पूरी करते थे। इस दिन पशुओं की देखभाल करने वाले व्यक्ति को सम्मानस्वरूप मानदेय भी दिया जाता है। इस तरह सोहराई प्रकृति, कृषि, पशुधन और सामुदायिक परंपराओं से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

बच्चों की सेहत पर भारी बस्तों का असर, स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश

रायपुर स्कूली बच्चों पर भारी बस्तों के पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग को अनुशंसा प्रेषित की है। आयोग ने अपने अनुशंसा पत्र में उल्लेख किया है कि भारी बस्तों के कारण बच्चों की रीढ़, कंधों और शारीरिक मुद्रा पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रो. यशपाल समिति की 'शिक्षा बिना बोझ के', NEP 2020 और NCERT की 'स्कूल बैग पॉलिसी 2020' के प्रावधानों के अनुरूप सुझाव दिए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि बस्ते का वजन बच्चे के शरीर के वजन के 10% से अधिक न हो। आयोग द्वारा प्रेषित प्रमुख अनुशंसाएं: 1. प्राथमिक स्तर के लिए अनुशंसा: नर्सरी से यूकेजी तक 'नो बैग, नो टेक्स्टबुक' की अनुशंसा की गई है। कक्षा 1-2 के लिए बस्ता 1.6 से 2.2 KG और कक्षा 3-5 के लिए 1.7 से 2.5 KG तक सीमित रखने का सुझाव दिया गया है। साथ ही कक्षा 1-2 को होमवर्क न देने की अनुशंसा की गई है। 2. माध्यमिक स्तर के लिए अनुशंसा: कक्षा 6-7 के लिए 2.0 से 3.0 KG और कक्षा 8 के लिए 2.5 से 4.0 KG की सीमा प्रस्तावित की गई है। NEP 2020 के पैरा 4.26 के अनुसार वर्ष में 10 'बैगलेस डे' आयोजित करने का सुझाव दिया गया है। 3. उच्चतर स्तर के लिए अनुशंसा: कक्षा 9-10 के लिए 2.5 से 4.5 KG और कक्षा 11-12 के लिए 3.5 से 5.0 KG की अनुशंसा की गई है। भारी रेफरेंस बुक्स के स्थान पर DIKSHA, e-Pathshala जैसे डिजिटल संसाधनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने का सुझाव है। 4. संस्थागत उपायों हेतु सुझाव: आयोग ने अनुशंसा की है कि प्रत्येक विद्यालय में डिजिटल तौल मशीन, बैग वेट रजिस्टर, पुस्तकों पर वजन का मुद्रण और पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विचार किया जाए। आयोग ने शासन से अनुरोध किया है कि इन अनुशंसाओं पर विचार करते हुए सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त एवं निजी विद्यालयों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार किया जाए।

मुख्यमंत्री के सुशासन संकल्प के अनुरूप प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने जिला प्रशासन की त्वरित पहल

रायपुर प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में बेमेतरा जिले में अर्नब तूफान के प्रभाव से खरीफ फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीमों ने सर्वे शुरू कर दिया है। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6(4) के प्रावधानों के तहत फसल क्षति का सर्वे कर पात्र किसानों को नियमानुसार राहत राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अर्नब तूफान के प्रभाव से बेमेतरा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खेतों में खड़ी खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है। इससे प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने राजस्व एवं कृषि विभाग को संयुक्त रूप से सर्वे कार्य तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के निर्देश के बाद संयुक्त दल गांवों में पहुंचकर खेतों का निरीक्षण कर रहे हैं। अधिकारी फसलों की स्थिति का जायजा लेकर क्षति का आकलन कर रहे हैं, ताकि प्रभावित किसानों की पहचान कर नियमानुसार राहत की प्रक्रिया पूरी की जा सके। प्रभावित किसान राजस्व एवं कृषि अधिकारियों को दें जानकारी जिला प्रशासन ने प्रभावित किसानों से अपील की है कि जिनकी खरीफ फसलों को अर्नब तूफान के कारण नुकसान पहुंचा है, वे इसकी जानकारी तत्काल अपने क्षेत्र के राजस्व निरीक्षक (RI) अथवा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) को दें। इससे सर्वे दल समय पर संबंधित खेतों तक पहुंचकर फसल क्षति का आकलन कर सकेगा। सर्वे कार्य पूर्ण होने और पात्रता निर्धारित किए जाने के बाद शासन के नियमानुसार राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6(4) के तहत पात्र किसानों के बैंक खातों में राहत राशि अंतरित की जाएगी। जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को सर्वे कार्य गंभीरता और तत्परता से पूरा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके।

पंजाब चुनाव 2027 की तैयारी तेज, खरगे ने कांग्रेस सांसदों के साथ बनाई रणनीति

चंडीगढ़. पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पंजाब कांग्रेस के सभी सांसदों को दिल्ली बुलाया है। यह बैठक 31 अक्टूबर को सुबह 11 बजे होगी। इसमें आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति, राज्य में पार्टी की मौजूदा स्थिति और संगठन को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। बैठक में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी समेत राज्य के अन्य कांग्रेस सांसदों के शामिल होने की उम्मीद है। कांग्रेस हाईकमान की इस पहल को पंजाब में चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के सामने अगले विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने, नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने और जनता के बीच अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की चुनौती है। बैठक में इन मुद्दों पर सांसदों से फीडबैक लिया जा सकता है। इसके साथ ही राहुल गांधी की पंजाब में प्रस्तावित रैली की तैयारियों पर भी विचार-विमर्श होगा। 31 अक्टूबर को दिल्ली में जुटेंगे पंजाब कांग्रेस के सांसद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से बुलाई गई बैठक में पंजाब के सभी पार्टी सांसदों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। शनिवार सुबह 11 बजे होने वाली इस बैठक में राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों और आगामी चुनाव की तैयारियों पर चर्चा होगी। बैठक में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के साथ पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, डॉ. अमर सिंह और डॉ. सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत अन्य सांसदों के शामिल होने की उम्मीद है। हाईकमान इस बैठक के जरिए पंजाब के अलग-अलग क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति, संगठन की गतिविधियों और आगामी चुनाव को लेकर सांसदों के सुझाव जान सकता है। सांसदों के पास अपने संसदीय क्षेत्रों से जुड़ी राजनीतिक परिस्थितियों और जनता के मुद्दों की जानकारी होती है। ऐसे में चुनावी रणनीति तैयार करने से पहले उनका फीडबैक महत्वपूर्ण हो सकता है। बैठक में पार्टी की राज्य इकाई और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, बैठक के एजेंडे में किसी प्रदेश अध्यक्ष को बदलने या नेतृत्व में फेरबदल का कोई आधिकारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है। राहुल गांधी की संगरूर रैली की तैयारियों पर होगा मंथन पंजाब कांग्रेस की बैठक में राहुल गांधी की 4 नवंबर को संगरूर में प्रस्तावित रैली भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगी। इस कार्यक्रम में पंजाब के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने पर चर्चा हो सकती है। पार्टी के लिए यह रैली केवल एक सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य में संगठनात्मक सक्रियता दिखाने का अवसर भी है। इसमें प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को लेकर तैयारी की जा सकती है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में पार्टी के कार्यक्रमों को गति मिले और विभिन्न स्तरों के नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बने। संगरूर की रैली के माध्यम से राहुल गांधी पंजाब के राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रख सकते हैं। बैठक में रैली की तैयारियों, नेताओं की जिम्मेदारियों और कार्यकर्ताओं की भागीदारी से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। एक नवंबर की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली भी एजेंडे में कांग्रेस की एक नवंबर को दिल्ली में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम को लेकर भी पार्टी के सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा होनी है। कांग्रेस नेतृत्व ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार तथा निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए हैं। पार्टी की ओर से इन मुद्दों को लेकर देशभर में राजनीतिक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। एक नवंबर की रैली भी इसी अभियान का हिस्सा है। पंजाब कांग्रेस के नेताओं को फिलहाल संगरूर में राहुल गांधी की प्रस्तावित रैली को देखते हुए दिल्ली के कार्यक्रम में शामिल होने से छूट दी गई है। ऐसे में पंजाब के नेताओं की प्राथमिकता राज्य में होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों पर रह सकती है। इसके बावजूद कांग्रेस हाईकमान की ओर से बुलाई गई बैठक में राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक अभियान और पंजाब की चुनावी रणनीति के बीच तालमेल बनाने पर चर्चा हो सकती है।

छत्तीसगढ़ सरकार की आर्थिक सहायता से घरेलू खर्च के साथ बेटियों की पढ़ाई और भविष्य के लिए बचत कर रही महिलाएं

रायपुर  प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन तथा उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर मे सतत सुधार तथा परिवार में उनकी निर्णायक भूमिका सुदृढ़ करने हेतु, समाज में महिलाओं के प्रति भेदभाव, असमानता एवं जागरूकता की कमी को दूर करने, स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार करने तथा आर्थिक स्वावलंबन एवं महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना की शुरुआत आधिकारिक रूप से 1 मार्च 2024 को हुई थी और इसका औपचारिक शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को किया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा है कि मोदी की गारंटी का मतलब होता है, गारंटी पूरी होने की गारंटी। यह योजना के तहत राज्य की सभी पात्र विवाहित महिलाओं को लाभ प्रदान की जा रही है इसके अलावा विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी इस योजना का लाभ ले रही हैं। छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना की आर्थिक सहायता महिलाओं के लिए घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ बेटियों के भविष्य को संवारने का जरिया बन रही है। योजना से मिलने वाली राशि का एक हिस्सा वे सुकन्या समृद्धि खातों में जमा कर रही हैं, ताकि आगे चलकर बेटियों की उच्च शिक्षा और अन्य जरूरतों के लिए आर्थिक संबल मिल सके। यह पहल प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संकल्प को जमीनी स्तर पर मजबूती दे रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि मातृशक्ति का सम्मान और उनका आर्थिक सशक्तिकरण हमारी सरकार के लिए केवल एक योजना या कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुशासन की प्रमुख प्राथमिकता है। हमारा विश्वास है कि जब परिवार की महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। बच्चों की शिक्षा और पोषण से लेकर परिवार के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े निर्णयों तक उसकी भागीदारी और मजबूत होती है। इसलिए महतारी वंदन योजना के माध्यम से सरकार माताओं-बहनों के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य देकर उन्हें अपने निर्णय स्वयं लेने का आत्मविश्वास दे रही है। दंतेवाड़ा जिले के बोडरी गांव की प्रमिला पोतामी के लिए बेटी की पढ़ाई के लिए बचत करना पहले आसान नहीं था। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित मासिक सहायता ने उनके लिए बचत की राह खोली है। प्रमिला कहती हैं, “हमारी आमदनी इतनी नहीं है कि कुछ बचाकर रख सकें। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि बड़ी मददगार है। इस राशि का कुछ हिस्सा मैं सुकन्या समृद्धि खाते में जमा करती हूं जो आगे चलकर बेटी की पढ़ाई में काम आएंगे। ”दक्षिण बस्तर का दंतेवाड़ा लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है। ऐसे क्षेत्र में बेटी की शिक्षा के लिए बचत का यह प्रयास बदलती आकांक्षाओं और बेहतर भविष्य को नई उम्मीद दे रहा है। प्रमिला की तरह कुछ अन्य महिलाएं भी मासिक सहायता का हिस्सा बेटियों के नाम बचत करने में लगा रही हैं। इस योजना से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है, इससे महिलाएं अपनी आय के स्रोत विकसित कर कर अपने परिवार का आर्थिक रूप से सहयोग कर रही हैं। इस योजना से महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद मिल रही है, इससे महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक होने और उन्हें प्राप्त करने में मदद मिल रही है। रायपुर जिले के रावेली गांव की मीना निषाद ने भी अपनी बेटी महिमा के लिए सुकन्या समृद्धि खाता खुलवाया है। वह कहती हैं, “महतारी वंदन योजना से हर महीने एक हजार रुपये मिलते हैं। मैं यह राशि अपनी बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा करती हूं। मैं चाहती हूं कि आगे चलकर यह बचत उसकी पढ़ाई और भविष्य की जरूरतों में काम आए।”सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड के पर्री गांव की अंजू कुशवाहा भी इसी तरह बचत कर रही हैं। वह मासिक सहायता की कुछ राशि बेटी के सुकन्या खाते में जमा करती हैं और शेष रकम घरेलू खर्चों पर लगाती हैं। उनके मुताबिक, नियमित आर्थिक मदद से भविष्य के लिए थोड़ी-बहुत बचत कर पाने का भरोसा बढ़ा है। वहीं, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के बघमरा गांव की दीपाली मरकाम इस राशि का इस्तेमाल बच्चों की स्कूली जरूरतों और बेटी के भविष्य के लिए बचत करने में कर रही हैं। उनका कहना है कि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल करें और जीवन में आगे बढ़ें, लेकिन सीमित घरेलू संसाधनों के बीच भविष्य के लिए पैसे बचाना आसान नहीं होता। मासिक सहायता से उन्हें बच्चों की पढ़ाई में योगदान देने और बेटी के लिए बचत करने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की नारी, शान हैं हमारी..    सुशासन की सरकार महतारी वंदन योजना के माध्यम से हर माह 1,000 यानी सालाना 12,000 की आर्थिक सहायता देकर प्रदेश की माता-बहनों के सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने 8 अक्टूबर 2026 को योजना की 32 वीं किस्त के रूप में 67 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में डी बी टी के माध्यम से 632.40 करोड़ से अधिक की राशि अंतरित की गई है। अब तक 20,708 करोड़ से अधिक की राशि महतारी वंदन योजना के माध्यम से माता-बहनों को प्रदान की जा चुकी है। महतारी वंदन योजना से रायपुर जिले के 5 लाख 13 हजार 534 हितग्राही, बिलासपुर जिले के 4 लाख 11 हजार 310 हितग्राही, दुर्ग के 3 लाख 89 हजार 507 हितग्राही, बलौदाबाजार-भाटापारा के 3 लाख 19 हजार 815 हितग्राही और महासमुंद जिले के 3 लाख 12 हजार 162 हितग्राहियों के खातों में डी बी टी के माध्यम से सुशासन की सरकार राशि अंतरित कर माताओं-बहनों को आर्थिक रूप से सक्षम बना रही है। वर्ष 2015 में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना बालिकाओं के भविष्य के लिए बचत का अवसर देती है। इसके माध्यम से मां-बाप बेटियों की शिक्षा और विवाह जैसी भविष्य की जरूरतों के लिए धन जमा कर सकते हैं। इन महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि नियमित आर्थिक सहायता से बेटियों की शिक्षा और भविष्य के लिए योजनाबद्ध बचत … Read more

कांग्रेस की महारैली पर भाजपा नेताओं का विरोध, अस्थिरता फैलाने को लेकर दी चेतावनी

रायपुर. दिल्ली में आयोजित कांग्रेस नीत इंडिया ब्लॉक की महारैली पर भाजपा नेता मुखर हैं. एक तरफ जहां केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक ने इसे देशभर में अस्थिरता और अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश बताया है. तो दूसरी ओर प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा है कि किसी को भी अराजकता भड़काने या अव्यवस्था पैदा करने का अधिकार नहीं है. राजधानी रायपुर पहुंचे केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार खाटिक ने कांग्रेस की महारैली को लेकर मीडिया से चर्चा में कहा कि विपक्षी दल संवैधानिक संस्थाओं पर लांछन लगाकर देश भर में अस्थिरता और अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. जनादेश हासिल करने के लिए सबसे पहले जनता का विश्वास जीतना जरूरी है. उन्होंने कहा कि विपक्ष में निराशा और हताशा का माहौल छाया हुआ है. इसी से प्रेरित होकर वे सत्ता हासिल करने के लिए इतने बेताब हैं कि जनता द्वारा चुनी गई सरकार को भी बेदखल करने को तैयार हैं, और अस्थिरता का माहौल बना रहे हैं. इसके बजाय, विपक्ष को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और जनता के हित से जुड़े मुद्दों को लेकर जनता के सामने आना चाहिए; तभी वे जनता का सच्चा विश्वास हासिल कर सकते हैं और सत्ता में आसीन हो सकते हैं. वहीं, वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दिल्ली में होने वाले जनरैली को लेकर कहा कि अनुमति दे दी गई है, लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की भी जिम्मेदारी है. इस दृष्टि से, लोग लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने के अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं. हालांकि, पुलिस ने कानून व्यवस्था का पूरा ध्यान रखते हुए अनुमति दी है, लेकिन किसी को भी अराजकता भड़काने या अव्यवस्था पैदा करने का अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि देश को प्रशांत भूषण या नेहा बोरा जैसे लोगों की मानसिकता के अनुसार नहीं चलाया जा सकता, जो सुझाव देते हैं कि भारत के युवाओं को बांग्लादेश की घटनाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए, न ही इसे कांग्रेस पार्टी या ऐसी अराजकता फैलाने वालों की मानसिकता से चलाया जा सकता है.

बस्तर संभाग का शत-प्रतिशत सर्वे कर सभी पात्र बसाहटों तक सड़क संपर्क सुनिश्चित करने के निर्देश

रायपुर  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव तथा छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (सीजीआरडीए) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  भीम सिंह ने कहा है कि नक्सलवाद से मुक्त हो चुके बस्तर संभाग और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विस्तार शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। वर्षों से विकास की मुख्यधारा से दूर रहे इन क्षेत्रों के प्रत्येक पात्र गांव और बसाहट तक सड़क पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता और तत्परता से कार्य करना होगा। उन्होंने बस्तर संभाग के सभी क्षेत्रों का शत-प्रतिशत सर्वे कर सड़क संपर्क की शत-प्रतिशत संतृप्तता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सचिव  भीम सिंह आज रायपुर स्थित विकास भवन में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना (एमएमजीएसवाई) के अंतर्गत संचालित सड़क निर्माण कार्यों की राज्य स्तरीय समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने योजनावार एवं जिलावार कार्यों की प्रगति, निर्माण की गुणवत्ता, समय-सीमा, संधारण और लंबित प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की। पीएमजीएसवाई-1 में शेष कार्य छह माह में करें पूर्ण सचिव  सिंह ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के प्रथम चरण में छत्तीसगढ़ के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई-1 के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने देश में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इस उपलब्धि को बनाए रखते हुए योजना के सभी शेष कार्य आगामी छह माह के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण किए जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बस्तर के हर पात्र गांव और बसाहट को सड़क से जोड़ने पर विशेष जोर  भीम सिंह ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति से बस्तर संभाग के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के नए अवसर प्राप्त हुए हैं। इन अवसरों का पूरा लाभ क्षेत्र की जनता तक पहुंचाना शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने बस्तर संभाग के अधिकारियों से जिलेवार सड़क निर्माण कार्यों की जानकारी ली और स्वीकृत सभी कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में अब तक सड़क संपर्क उपलब्ध नहीं हो पाया है, उनका व्यापक सर्वेक्षण किया जाए। कोई भी पात्र गांव अथवा बसाहट सड़क संपर्क से वंचित न रहे। नक्सलवाद प्रभावित रहे क्षेत्रों में विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) योजना के अंतर्गत स्वीकृत सड़क निर्माण कार्यों को भी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। पीएम जनमन के तहत मार्च 2027 तक 828 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य     सचिव  सिंह ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की बसाहटों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संचालित प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के अंतर्गत सड़क निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय क्षेत्रों तक सड़क संपर्क और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पीएम जनमन योजना के अंतर्गत मार्च 2027 तक लक्ष्य के अनुरूप 828 किमी सड़क निर्माण पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही योजना के अंतर्गत स्वीकृत सभी सड़क निर्माण कार्यों को मार्च 2027 से पूर्व पूरा करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने पीएमजीएसवाई के चतुर्थ चरण के कार्यों को भी त्वरित गति से संचालित करने के निर्देश दिए। निर्माण कार्यों में लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश  समीक्षा बैठक में सचिव  भीम सिंह ने सड़क निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब और अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कवर्धा जिले में सड़क निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति के मामले में तत्कालीन कार्यपालन अभियंता के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसी प्रकार बलरामपुर जिले के राजपुर में सड़क निर्माण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में लापरवाही के मामले में संबंधित उप अभियंता को निलंबित करने तथा पूरे प्रकरण की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में लापरवाही और गड़बड़ी के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। भारी वाहनों से सड़कों को होने वाले नुकसान की सीसीटीवी से होगी निगरानी सचिव  सिंह ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत निर्मित सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन मार्गों पर बड़े पोस्टर और बैनर लगाकर लोगों को निर्धारित भार क्षमता तथा भारी वाहनों के आवागमन संबंधी प्रतिबंधों के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने बताया कि आगामी समय में इन सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई की जाएगी, ताकि ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता और उपयोगिता लंबे समय तक बनी रहे। बिटुमिन की उपलब्धता की अग्रिम तैयारी के निर्देश सचिव  सिंह ने सड़क निर्माण कार्यों के लिए बिटुमिन की संभावित कमी को ध्यान में रखते हुए सभी ठेकेदारों से आवश्यक कच्ची सामग्री की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण सामग्री की अनुपलब्धता के कारण किसी भी परियोजना की प्रगति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सड़क निर्माण में बाधक यूटिलिटी शिफ्टिंग के कार्यों को संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर शीघ्र पूर्ण कराने तथा पीएम गतिशक्ति योजना के अंतर्गत सभी संबंधित सड़कों को जोड़ने की कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा। सड़क निर्माण में प्लास्टिक के उपयोग के लिए एसएचजी की भागीदारी को बढ़ावा सिंह ने निर्धारित तकनीकी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सड़क निर्माण में प्लास्टिक के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अनुपयोगी प्लास्टिक के संग्रहण और उठाव के कार्य में महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। इससे प्लास्टिक अपशिष्ट के उपयोग को बढ़ावा मिलने के साथ स्व-सहायता समूहों के लिए आजीविका के अवसर भी विकसित किए जा सकेंगे। सड़कों के संधारण, लंबित भुगतान के शीघ्र निराकरण पर जोर सचिव  सिंह ने निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद संबंधित लंबित भुगतानों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने तथा सड़कों के संधारण कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने गौरव पथ निर्माण के दौरान भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपयोगी सेवाओं के लिए अनिवार्य रूप से डक्ट का प्रावधान करने को कहा, ताकि बाद में पाइपलाइन अथवा अन्य सेवाओं के विस्तार के लिए सड़कों को बार-बार खोदने की आवश्यकता न पड़े। इसके साथ ही उन्होंने विभाग के अंतर्गत लंबित पेंशन प्रकरणों का समय पर निराकरण करने तथा सभी स्तरों पर … Read more